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लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

उत्तराखंड की राजनीति में कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ ऐसा नाम है, जो लंढौरा राजघराने की विरासत, शाही ठाठ और हथियारों के शौक के साथ-साथ 350 कमरों वाले ‘रंगमहल’ और अपनी अलग जीवनशैली के कारण भी चर्चा में रहा है। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के बाद वे राजनीति में उतरे और चार बार विधायक बने। हालांकि उनका राजनीतिक सफर उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों से भी घिरा रहा। बगावत, पार्टी बदलने, फायरिंग और हथियारों से जुड़े वीडियो ने उन्हें हमेशा सुर्खियों में बनाए रखा। लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का बचपन रुड़की के पास स्थित पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ में बीता। उनके पिता राजा नरेंद्र सिंह भी लक्सर से विधायक रहे और उन्हीं से उन्हें राजनीति की प्रेरणा मिली। शुरुआत में चैंपियन ने खेल को करियर बनाया और कुश्ती व आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते, जिससे उन्हें ‘चैंपियन’ नाम मिला। वर्ष 2002 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की और इसके बाद कांग्रेस व भाजपा दोनों से चुनाव जीतते हुए चार बार विधायक बने। उनकी पहचान मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में बनी, लेकिन विवादों ने भी उनके करियर को लगातार प्रभावित किया। ‘चैंपियन’ के शाही पृष्ठभूमि, संपत्ति और परिवार से जुड़े तथ्य… 1. राजघराने की विरासत और ‘रंग महल’ से शाही पहचान
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से आते हैं, जिससे उनकी पहचान सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि शाही विरासत से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। रुड़की के पास स्थित उनका पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसे उनकी पारंपरिक हैसियत और शाही जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है, जो उनकी राजनीतिक छवि को भी अलग पहचान देता है। 2. घोषित संपत्ति 1.88 करोड़, कृषि भूमि-मकान शामिल
2017 के विधानसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार चैंपियन ने अपनी कुल संपत्ति करीब 1.88 करोड़ रुपए घोषित की थी। इसमें हरिद्वार के लंढौरा क्षेत्र में 12 एकड़ कृषि भूमि, देहरादून में आवासीय मकान और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा पारिवारिक विरासत और अचल संपत्ति के रूप में दर्ज है, जबकि ‘रंग महल’ को लेकर अक्सर उनकी शाही पृष्ठभूमि की चर्चा होती रही है। 3. पत्नी राजनीति में सक्रिय, बेटे ने खेल में दिलाया सम्मान
चैंपियन का परिवार भी राजनीति और खेल दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी देवयानी सिंह 2022 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं, जबकि उनके बेटे दिव्य प्रताप सिंह ने अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर परिवार को नई पहचान दिलाई। समर्थक उन्हें निडर और प्रभावशाली नेता मानते हैं, जबकि विरोधी उनकी आक्रामक शैली और विवादों को लेकर आलोचना करते रहे हैं। यही विरोधाभास उनकी राजनीतिक छवि को हमेशा चर्चा में बनाए रखता है। 5 प्वाइंट्स में पढ़िए खेल से राजनीति तक ऐसे बने चैंपियन… 1. राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में बनाई पहली पहचान
कुंवर प्रणव सिंह ने युवा अवस्था में कुश्ती और आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1989 से 1994 के बीच उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते। खेल के मैदान में मिली इस सफलता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और यहीं से उन्होंने अपने नाम के साथ ‘चैंपियन’ उपनाम जोड़ लिया, जो बाद में उनकी स्थायी पहचान बन गया। 2. खेल छोड़कर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में एंट्री
1995 में सक्रिय खेल करियर छोड़ने के बाद उन्होंने सामाजिक और स्थानीय गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। राजघराने की पृष्ठभूमि और जनसंपर्क के कारण वे जल्द ही क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए। लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और आक्रामक शैली ने उन्हें एक उभरते हुए युवा नेता के रूप में पहचान दिलाई। 3. निर्दलीय जीत से शुरू हुआ विधायक बनने का सफर
वर्ष 2002 में उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में उन्होंने लक्सर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर राजनीति में मजबूत एंट्री की। इसके बाद 2007 में कांग्रेस के टिकट पर फिर लक्सर से विधायक बने। 2012 में सीट बदलकर खानपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ गया। 4. भाजपा से चौथी जीत, कैबिनेट रैंक का पद भी मिला
2017 में भाजपा के टिकट पर खानपुर से चुनाव जीतकर वे चौथी बार विधायक बने। इससे पहले 2012 में कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया, जिसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने वन विभाग और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 5. बगावत, निष्कासन और वापसी ने बनाए रखा चर्चा में
2016 में उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत कर दी, जिसके बाद उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित किया गया। बाद में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने फिर चुनाव जीता। हालांकि 2019 में हथियारों के साथ वायरल वीडियो के बाद भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया, लेकिन लिखित माफी के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई। इन घटनाओं ने उनके राजनीतिक करियर को लगातार चर्चा में बनाए रखा। हाल के वर्षों में इन विवादों से घिरे… हथियार लहराते हुए नाचने का वीडियो सामने आया
2019 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें चैंपियन हथियार लहराते हुए नाचते नजर आए। इस वीडियो के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने लिखित माफी दी और पार्टी में उनकी वापसी हुई। खानपुर विधायक के कार्यालय में फायरिंग का आरोप
जनवरी 2025 में चैंपियन पर खानपुर विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय में समर्थकों के साथ पहुंचकर फायरिंग करने का आरोप लगा। घटना के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और पुलिस ने चैंपियन को गिरफ्तार भी किया। इस विवाद ने राज्यभर में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। समर्थकों के बीच नोट उड़ाने का वीडियो वायरल
2026 में एक कार्यक्रम के दौरान कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का समर्थकों के बीच नोट उड़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस घटना के बाद उनकी जीवनशैली और सार्वजनिक आचरण को लेकर नई बहस छिड़ गई। समर्थकों ने इसे जश्न का हिस्सा बताया, जबकि विरोधियों ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। ———————- ये खबर भी पढ़ें : विधायक और पूर्व MLA में जुबानी जंग: चैंपियन ने दी ‘आर-पार’ की चेतावनी, उमेश कुमार बोले-पत्नी पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, कहीं भी भिड़ लो विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट राजनीतिक टकराव को लेकर सुर्खियों में है। मौजूदा विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को खुलेआम चुनौती दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। (पढ़ें पूरी खबर)

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राजनीति

लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

उत्तराखंड की राजनीति में कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ ऐसा नाम है, जो लंढौरा राजघराने की विरासत, शाही ठाठ और हथियारों के शौक के साथ-साथ 350 कमरों वाले ‘रंगमहल’ और अपनी अलग जीवनशैली के कारण भी चर्चा में रहा है। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के बाद वे राजनीति में उतरे और चार बार विधायक बने। हालांकि उनका राजनीतिक सफर उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों से भी घिरा रहा। बगावत, पार्टी बदलने, फायरिंग और हथियारों से जुड़े वीडियो ने उन्हें हमेशा सुर्खियों में बनाए रखा। लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का बचपन रुड़की के पास स्थित पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ में बीता। उनके पिता राजा नरेंद्र सिंह भी लक्सर से विधायक रहे और उन्हीं से उन्हें राजनीति की प्रेरणा मिली। शुरुआत में चैंपियन ने खेल को करियर बनाया और कुश्ती व आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते, जिससे उन्हें ‘चैंपियन’ नाम मिला। वर्ष 2002 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की और इसके बाद कांग्रेस व भाजपा दोनों से चुनाव जीतते हुए चार बार विधायक बने। उनकी पहचान मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में बनी, लेकिन विवादों ने भी उनके करियर को लगातार प्रभावित किया। ‘चैंपियन’ के शाही पृष्ठभूमि, संपत्ति और परिवार से जुड़े तथ्य… 1. राजघराने की विरासत और ‘रंग महल’ से शाही पहचान
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से आते हैं, जिससे उनकी पहचान सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि शाही विरासत से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। रुड़की के पास स्थित उनका पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसे उनकी पारंपरिक हैसियत और शाही जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है, जो उनकी राजनीतिक छवि को भी अलग पहचान देता है। 2. घोषित संपत्ति 1.88 करोड़, कृषि भूमि-मकान शामिल
2017 के विधानसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार चैंपियन ने अपनी कुल संपत्ति करीब 1.88 करोड़ रुपए घोषित की थी। इसमें हरिद्वार के लंढौरा क्षेत्र में 12 एकड़ कृषि भूमि, देहरादून में आवासीय मकान और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा पारिवारिक विरासत और अचल संपत्ति के रूप में दर्ज है, जबकि ‘रंग महल’ को लेकर अक्सर उनकी शाही पृष्ठभूमि की चर्चा होती रही है। 3. पत्नी राजनीति में सक्रिय, बेटे ने खेल में दिलाया सम्मान
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कुंवर प्रणव सिंह ने युवा अवस्था में कुश्ती और आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1989 से 1994 के बीच उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते। खेल के मैदान में मिली इस सफलता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और यहीं से उन्होंने अपने नाम के साथ ‘चैंपियन’ उपनाम जोड़ लिया, जो बाद में उनकी स्थायी पहचान बन गया। 2. खेल छोड़कर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में एंट्री
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2019 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें चैंपियन हथियार लहराते हुए नाचते नजर आए। इस वीडियो के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने लिखित माफी दी और पार्टी में उनकी वापसी हुई। खानपुर विधायक के कार्यालय में फायरिंग का आरोप
जनवरी 2025 में चैंपियन पर खानपुर विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय में समर्थकों के साथ पहुंचकर फायरिंग करने का आरोप लगा। घटना के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और पुलिस ने चैंपियन को गिरफ्तार भी किया। इस विवाद ने राज्यभर में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। समर्थकों के बीच नोट उड़ाने का वीडियो वायरल
2026 में एक कार्यक्रम के दौरान कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का समर्थकों के बीच नोट उड़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस घटना के बाद उनकी जीवनशैली और सार्वजनिक आचरण को लेकर नई बहस छिड़ गई। समर्थकों ने इसे जश्न का हिस्सा बताया, जबकि विरोधियों ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। ———————- ये खबर भी पढ़ें : विधायक और पूर्व MLA में जुबानी जंग: चैंपियन ने दी ‘आर-पार’ की चेतावनी, उमेश कुमार बोले-पत्नी पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, कहीं भी भिड़ लो विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट राजनीतिक टकराव को लेकर सुर्खियों में है। मौजूदा विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को खुलेआम चुनौती दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। (पढ़ें पूरी खबर)

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