Thursday, 16 Apr 2026 | 03:26 AM

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बुरहानपुर में 4 घंटे बिजली आपूर्ती ठप:सी.के.ग्रीन्स, वल्लभ नगर, गुरु गोविंद सिंह कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में सप्लाई ठप

बुरहानपुर में 4 घंटे बिजली आपूर्ती ठप:सी.के.ग्रीन्स, वल्लभ नगर, गुरु गोविंद सिंह कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में सप्लाई ठप

बुरहानपुर में रविवार, 15 मार्च को सुबह 7 बजे से 11 बजे तक शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री (शहर) ने इसकी जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार 11 केवी सी.के. ग्रीन फीडर पर आवश्यक रखरखाव कार्य किया जाना है। इसी कारण निर्धारित समय के दौरान बिजली सप्लाई बाधित रहेगी। इन इलाकों में सप्लाई रहेगी ठप बिजली कटौती से सी.के. ग्रीन्स कॉलोनी, बीज निगम बहादरपुर रोड, वल्लभ नगर, गुरु गोविंद सिंह कॉलोनी और चाणक्यपुरी सहित आसपास के क्षेत्र प्रभावित होंगे। बिजली कंपनी ने बताया कि रखरखाव कार्य की स्थिति के अनुसार बिजली बंद रहने की अवधि में कमी या बढ़ोतरी भी की जा सकती है। इसलिए लोगों से आवश्यक तैयारी रखने की अपील की गई है।

गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर:जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप

गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर:जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप

अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए किया है। LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम 6 दिन में तीन बार बदले 55 दिन की बजाय 15 दिन में बुक करा रहे लोग गांवों में औसतन एक परिवार सालभर में करीब 5 सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। ऐसे में जल्दी दोबारा बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती थी। हाल ही में देखा गया कि लोग अफवाहों की वजह से जरूरत न होने पर भी जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जो लोग पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, उन्होंने अचानक 15-15 दिनों के अंतर पर बुकिंग शुरू कर दी थी। इस तरह की एडवांस और जल्दबाजी में की जा रही बुकिंग से सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा था। अब अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट पढ़ें… मध्य प्रदेश: LPG की ऑनलाइन बुकिंग ठप…वेटिंग 7-8 दिन बढ़ी मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग ठप जैसी है। सर्वर डाउन होने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में लोग सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। गैस एजेंसियों में सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी हुई है। इधर गैस की किल्लत के बीच इंडक्शन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। भोपाल में इसकी बिक्री 7 गुना तक बढ़ गई है। वहीं 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने के कगार पर है। होटल, रेस्टॉरेंट को 4 दिन से कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के मुताबिक, भोपाल के करीब 2 हजार होटल-रेस्टोरेंट को 4 दिन में एक भी सिलेंडर नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेजा जा रहा होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं। चित्तौड़गढ़ में रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेज दिया है। सवाई माधोपुर में भी रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। जैसलमेर के सम में 150 रिसॉर्ट को बंद करने की तैयारी है। जयपुर में चाय की थड़ी, मिठाई की दुकानों और ढाबों पर कॉमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर का उपयोग करने लगे हैं। कोटा में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लकड़ी और कोयले की भट्ठी की मांग बढ़ गई है। मेस और हॉस्टलों के लिए 35 से 40 किलो वजन की भट्ठियां बनाई जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: ब्लैक में 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा सिलेंडर लखनऊ में दिन-दिनभर लाइन में खड़े रहने पर भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। लोगों का दावा है कि इन सबके बावजूद 950 रुपए वाला सिलेंडर 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपए में आसानी से उपलब्ध है। पूरी खबर पढ़ें… फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हुए गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने कहा कि LPG की किल्लत के कारण जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हो गए हैं। इससे डिलीवरी पार्टनर्स और इस सेक्टर से जुड़े दूसरे वर्कर्स की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है। यूनियन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है। यूनियन की मांग है कि जोमैटो, स्विगी और दूसरे प्लेटफॉर्म्स प्रभावित होने वाले हर वर्कर को तुरंत 10,000 रुपए की राहत राशि दें। वर्कर्स की ID बंद करने पर 3 महीने की रोक लगे। सरकार ने तैयारियों का लेखा-जोखा पेश किया सरकार रोजाना 50 लाख सिलेंडर बांट रही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “हम अपनी जरूरत की लगभग 60% LPG बाहर से मंगवाते हैं और इसका करीब 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। स्थिति थोड़ी मुश्किल है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।” उन्होंने कहा, “हम हर दिन लगभग 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर फिलहाल कहीं भी किल्लत की कोई खबर नहीं है। लेकिन घबराहट की वजह से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। राज्य सरकारों से लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है ताकि सिलेंडर की डिलीवरी प्राथमिकता के आधार पर की जा सके।” सरकार ने अब तक 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। अब उत्पादन 28% बढ़ गया है। सप्लाई संकट की 2 वजह 1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

18 फरवरी को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही फिर नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजी तौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिखाई दिया। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। हार्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। यह घटना इस बात को भी दिखाती है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने यह गलत अंदाजा लगाया कि ईरान इस युद्ध पर कैसे रिएक्ट करेगा। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रही है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने की कोई प्लान नजर नहीं आ रही है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसे ही जवाब की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो सकता है, इसकी संभावना थी। उनके मुताबिक ईरान के ये हमले दिखाते हैं कि वहां की सरकार दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने इस संभावना को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे अस्थायी समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को संभावित कीमत बढ़ोतरी से निपटने के विकल्प तैयार करने को कहा। हालांकि राष्ट्रपति ने इन विकल्पों के बारे में सार्वजनिक रूप से तब तक कुछ नहीं कहा, जब तक युद्ध शुरू हुए 48 घंटे से ज्यादा समय नहीं बीत गया। इन विकल्पों में अमेरिकी सरकार द्वारा राजनीतिक जोखिम बीमा देना और अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल थे। अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही

ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं:ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया, तेल सप्लाई ठप होगी सोचा नहीं था

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 18 फरवरी को जब यह तय कर रहे थे कि ईरान पर हमला किया जाए या नहीं, तब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही नीचे आ गई थी। ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजीतौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिख रहा है। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रूकी ईरान की इन धमकियों के बाद खाड़ी रीजन में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इस वजह से तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल को छू गई थीं। ट्रम्प प्रशासन अब आर्थिक संकट को काबू में करने के तरीके खोजने में जुट गया है। इस संकट के कारण अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इस घटना यह भी पता चलता है कि ट्रम्प और उनके सलाहकारों ने जंग पर ईरान के रुख का गलत अंदाजा लगाया। ईरान इस संघर्ष को अपने अस्तित्व से जुड़ा खतरा मान रहा है। ईरान का जवाब ज्यादा आक्रामक पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग की तुलना में इस बार ईरान ने कहीं ज्यादा आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई अरब देशों के शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन अटेक किए हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी अधिकारियों को कई प्लान तुरंत बदलने पड़े। कुछ जगहों पर दूतावास खाली कराने पड़े और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी पर काम करना पड़ा। ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं इसके बाद मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने सांसदों को बंद कमरे में जानकारी दी। इसके बाद अमेरिकी प्रांत कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने का कोई प्लान नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात को लेकर निराश हैं कि युद्ध खत्म करने का कोई प्लान नजर नहीं आ रहा है। हालांकि वे यह बात सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प से कहने से बच रहे हैं, क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। ईरान को लेकर ट्रम्प और रक्षा मंत्री की सोच अलग ट्रम्प कई बार बहुत बड़े टारगेट की बात करते हैं। जैसे कि वे चाहते हैं कि ईरान में ऐसा नेता आए जो अमेरिका की बात माने। लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ऐसी बात नहीं करते। पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा भी था कि अमेरिका, इराक में हाथ जला चुका है। वे ऐसा ईरान में नहीं करेगा। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल ताकत और सैन्य क्षमता को कमजोर करना ही असल मकसद है। अगर यह हो जाता है तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हेगसेथ ने माना कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर जिस तरह से जोरदार जवाबी हमले किए, उसकी तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान की ये कार्रवाइयां आखिरकार उसी के खिलाफ जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ-साफ कहना मुश्किल है कि ईरान से बिल्कुल ऐसा ही जवाब आएगा, लेकिन इस तरह के हमले होने की संभावना पहले से थी। उनके मुताबिक ईरान के इन हमलों से लगता है कि वहां की सरकार इस समय काफी दबाव में है। तेल की सप्लाई पर पड़े असर से ट्रम्प नाराज इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान की टॉप लीडरशिप को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे। जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने माना कि ऐसा हो सकता है, लेकिन इसे थोड़े समय की समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से कहा कि अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उससे निपटने के लिए जरूरी विकल्प तैयार रखें। इन विकल्पों में सरकार की तरफ से कंपनियों को राजनीतिक जोखिम का बीमा देना और अमेरिकी नेवी के जरिए जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल हैं, लेकिन अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है। समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी में ईरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कराया है। उनके इस पोस्ट के बाद तेल बाजार में हलचल मच गई और निवेशकों को लगा कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन बाद में जब प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट ऑपरेशन हुआ ही नहीं है, तो राइट को वह पोस्ट हटानी पड़ी और बाजार फिर

दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X 2 घंटे डाउन रहा:एप और वेब दोनों जगह नहीं चला; 1 महीने में दूसरी बार सर्विस ठप हुई

दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X 2 घंटे डाउन रहा:एप और वेब दोनों जगह नहीं चला; 1 महीने में दूसरी बार सर्विस ठप हुई

इलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) की सर्विस आज (16 फरवरी) को दुनियाभर में 2 घंटे ठप रहीं। हजारों यूजर्स फीड एक्सेस नहीं कर पाने और ब्लैंक स्क्रीन दिखने की शिकायत की। हालांकि यह बीच में कुछ समय के लिए फिर से चालू और बंद होता रहा। आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट ‘डाउनडिटेक्टर’ पर शाम 6.30 से 8.30 बजे तक 45,000 से ज्यादा लोगों ने शिकायतें की। हालांकि फिर सर्विस बहाल हो गई। इस दौरान यूजर्स का कहना था कि वे न तो अपनी टाइमलाइन देख पा रहे थे और न ही नई पोस्ट कर पा रहे थे। X की सर्विस 1 महीने में दूसरी बार ठप हुई है। इससे पहले 16 जनवरी को भी भारत,अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों में हजारों यूजर्स को एक्सेस करने में परेशानी हुई थी। 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में X के 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे। वहीं,41% लोगों को एप इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है और करीब 10% ने बताया कि टाइमलाइन लोड करने में दिक्कत हुई। एप और वेब दोनों पर लोडिंग की समस्या, ग्रोक AI भी बंद रहा इस आउटेज का असर मोबाइल एप्लिकेशन और डेस्कटॉप वर्जन दोनों पर देखा गया। यूजर्स ने बताया कि एप खोलने पर उन्हें सिर्फ ब्लैंक स्क्रीन दिखी। इसके साथ ही मस्क की कंपनी xAI का चैटबॉट ‘ग्रोक’ भी काम नहीं कर रहा था। यूजर्स के रिफ्रेश करने पर पुरानी पोस्ट गायब हो रहीं और कोई नया डेटा लोड नहीं हो रहा था। X की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं इलॉन मस्क या X की सपोर्ट टीम ने अभी तक इस आउटेज की वजह या इसके ठीक होने के समय को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। आमतौर पर X ऐसे मामलों में आंतरिक रूप से पैच अपडेट जारी करता है, जिसके बाद सर्विस धीरे-धीरे बहाल होती है। बार-बार होने वाले इन तकनीकी हादसों ने प्लेटफॉर्म की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। X के 4 आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… रेलवे टिकट बुकिंग वेबसाइट और एप फिर से डाउन: छठ पर्व पर हजारों यात्री परेशान; तत्काल टिकट बुक नहीं कर पाए छठ पर्व के पहले दिन आज यानी, 25 अक्टूबर को IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो गए। लोगों को सुबह 10 बजे से रेल टिकट बुक करने में परेशानी हो रही है। इससे पहले दिवाली पर भी IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो चुके हैं। आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म डाउन डिटेक्टर के मुताबिक सुबह 9:00 बजे से लोगों ने साइट और एप डाउन होने की शिकायत दर्ज करानी शुरू कर दी थी। सुबह 10 बजे करीब 180 लोगों ने इसे रिपोर्ट किया था। सोशल मीडिया पर भी लोग वेबसाइट डाउन होने की शिकायत करते रहे। पूरी खबर पढ़ें…