वरिष्ठ वकील और बेटे पर धोखाधड़ी का केस दर्ज:शाजापुर में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने की कार्रवाई

शाजापुर कोतवाली पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ अभिभाषक नारायण प्रसाद पांडे और उनके बेटे अखिलेश पांडे के खिलाफ कूट रचना,अमानत में खनायत और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। शिकायत कर्ता महेश पांडे अभिभाषक नारायण प्रसाद पांडे के छोटे भाई है। शिकायत कर्ता के नाम पर दो बैंकों से चार करोड़ का लोन ले लिया। माता-पिता की वसीयत के अनुसार संपत्ति में दोनों भाईयों का बराबरी का हिस्सा था लेकिन अभिभाषक पांडे और उनके बेटे अखिलेश ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार महेश पांडे के फर्जी हस्ताक्षरों और शपथ पत्र के माध्यम से बंधन और आईसीआईसीआई बैंक में संपत्ति बंधक रखकर चार करोड़ का लोन ले लिया। महेश पांडे नौकरी में थे और उनकी संपत्ति की देखभाल बड़े भाई करते थे।रिटायर्ड होने के बाद जब शाजापुर आएं और सिविल चेक की तो पता चला बैंकों से लोन है। उन्होंने कोई लोन नहीं लिया और बैंक से जानकारी निकाली तो पता चला बड़े भाई और भतीजे ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी कर ली। धोखाधड़ी की जानकारी लगने के बाद शिकायत कर्ता ने दस्तावेज इकट्ठा करने शुरू किए। बैंकों में दस्तावेज के लिए गए तो उन्हें देने से इंकार कर दिया। राजस्व विभाग और पंजीयन विभाग से मिले दस्तावेजों के आधार पर कोतवाली पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने अभिभाषक पांडे के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायत कर्ता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने पुलिस को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। अभिभाषक पांडे ने निचली अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए पुलिस को तत्काल प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार कों कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया। कोतवाली थाना प्रभारी संतोष सिंह वाघेला ने रविवार दोपहर 1 बजे करीब बताया की पुलिस ने उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में आवेदक महेश कुमार पाण्डे निवासी नई सड़क शाजापुर की शिकायत पर वरिष्ठ अभिभाषक नारायण प्रसाद पाण्डे और अखिलेश पाण्डे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आवेदक ने आरोप लगाया कि आरोपियों द्वारा उनके नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न स्थानों पर उपयोग किए गए। साथ ही बिना अनुमति उनके नाम पर बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण भी लिया गया। आवेदक के अनुसार, उन्हें अप्रैल 2023 में इस मामले की जानकारी मिली, जब उन्होंने अपने नाम पर बंधन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में लिए गए ऋण की जानकारी प्राप्त की, जबकि उन्होंने स्वयं कोई ऋण नहीं लिया था। आवेदक ने बताया कि आरोपियों ने संयुक्त पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों में भी कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए और फर्जी हस्ताक्षर कर बंटवारे के आवेदन लगाएं। बाद में आपत्ति के बाद ये आवेदन वापस ले लिए गए। हस्तलिपि विशेषज्ञ की जांच में भी दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। इस मामले में आवेदक ने पहले पुलिस और प्रशासन को शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 156(3) के तहत जांच के आदेश दिए गए, जिसे बाद में सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय ने भी यथावत रखा। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत पाया गया है। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
'फेक रिफंड स्कैम' से ठगी के दो मामले दर्ज:मंडला में अपराधी फर्जी SMS भेजकर पैसे वापस मंगाकर कर रहे धोखाधड़ी

मंडला जिले में साइबर ठगी के हाल के मामलों के बाद पुलिस ने आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। अपराधी ‘फेक रिफंड स्कैम’ का सहारा लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग पहले फोन कर बताते हैं कि गलती से आपके खाते में पैसे ट्रांसफर हो गए हैं। इसके बाद फर्जी एसएमएस या स्क्रीनशॉट भेजकर पैसे आने का भ्रम पैदा किया जाता है। फिर भावनात्मक दबाव डालकर तुरंत रकम वापस भेजने के लिए कहा जाता है। पुलिस ने हाल ही में दो मामले दर्ज पहले मामले में एक दुकानदार को फर्जी बैंक मैसेज भेजकर 50 हजार रुपए लौटवाए गए। दूसरे मामले में बैंक में काम करने वाली महिला को 9 हजार रुपए लौटाने के लिए फंसाया गया, जबकि उसके खाते में कोई पैसा आया ही नहीं था। पुलिस ने जारी किया अलर्ट एसपी रजत सकलेचा ने लोगों से कहा कि केवल एसएमएस या स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें। पहले अपने बैंक बैलेंस की पुष्टि करें और किसी भी अनजान कॉल या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिफंड या खाते में पैसे जमा होने के लिए कभी भी ओटीपी साझा करने की जरूरत नहीं होती। किसी भी ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, मंडला पुलिस हेल्पलाइन 7049141561 या साइबर क्राइम की बेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।
अडाणी की अमेरिकी कोर्ट से फ्रॉड केस खारिज की मांग:बोले- मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से बाहर है, किसी तरह की धोखाधड़ी साबित नहीं हुई

गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने अमेरिकी रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की तरफ से दायर सिविल फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसमें कोई ठोस आरोप नहीं हैं। अडाणी ग्रुप ने न्यूयॉर्क की अदालत में प्री-मोशन लेटर दाखिल कर कहा कि जिस डील को लेकर आरोप लगाए गए हैं वह अमेरिका के बाहर हुई थी। इसलिए SEC का मुकदमा कानूनी रूप से कमजोर है और इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। SEC ने 24 नवंबर में गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। SEC ने आरोप लगाया था कि अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने 2021 के बॉन्ड जारी करने के दौरान निवेशकों को गुमराह किया और रिश्वत मामले का खुलासा नहीं किया।
अडाणी की अमेरिकी कोर्ट से फ्रॉड केस खारिज की मांग:बोले- मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से बाहर है, किसी तरह की धोखाधड़ी साबित नहीं हुई

गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने अमेरिकी रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की तरफ से दायर सिविल फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसमें कोई ठोस आरोप नहीं हैं। अडाणी ग्रुप ने न्यूयॉर्क की अदालत में प्री-मोशन लेटर दाखिल कर कहा कि जिस डील को लेकर आरोप लगाए गए हैं वह अमेरिका के बाहर हुई थी। इसलिए SEC का मुकदमा कानूनी रूप से कमजोर है और इसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। SEC ने 24 नवंबर में गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। SEC ने आरोप लगाया था कि अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने 2021 के बॉन्ड जारी करने के दौरान निवेशकों को गुमराह किया और रिश्वत मामले का खुलासा नहीं किया। अडाणी की दलील- अमेरिका से कोई सीधा संबंध नहीं अडाणी के वकीलों ने केस खारिज करने की मांग के साथ तर्क दिया है कि न तो गौतम अडाणी और न ही सागर अडाणी का अमेरिका के साथ ऐसा कोई संपर्क रहा है जो इस केस के लिए जरूरी हो। साथ ही, बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं थी। अडाणी पक्ष ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि SEC यह दिखाने में विफल रहा है कि इसमें कोई ‘घरेलू लेनदेन’ (Domestic Transaction) शामिल था। उन्होंने कहा कि बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी भारतीय है, वह अमेरिका में लिस्टेड नहीं है और कथित घटना भी पूरी तरह से भारत में हुई है। ऐसे में अमेरिकी कानूनों को देश की सीमा से बाहर (Extraterritorial) लागू नहीं किया जा सकता। 750 मिलियन डॉलर का बॉन्ड सेल और विदेशी नियम फाइलिंग में बताया गया कि 750 मिलियन डॉलर (करीब ₹6,300 करोड़) के बॉन्ड की बिक्री अमेरिका से बाहर नियम 144A और रेगुलेशन के तहत की गई थी। ये प्रतिभूतियां गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेची गई थीं और बाद में उनका कुछ हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs) को फिर से बेचा गया था। वकीलों का कहना है कि शिकायत में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि गौतम अडाणी ने इस इश्यू को मंजूरी दी थी या अमेरिकी निवेशकों को प्रभावित करने वाली किसी मीटिंग में हिस्सा लिया था। ग्रुप ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि SEC ने निवेशकों को हुए किसी भी नुकसान का जिक्र नहीं किया है। ग्रुप के मुताबिक, इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 2024 में पूरी हो गई थी और निवेशकों को ब्याज सहित पूरा पैसा वापस कर दिया गया है। इसके अलावा, रिश्वतखोरी के आरोपों को भी ग्रुप ने पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है और कहा है कि इसके पक्ष में कोई विश्वसनीय सबूत नहीं हैं। भविष्य की रणनीति: 30 अप्रैल को बड़ी सुनवाई संभव अडाणी ग्रुप ने मांग की है कि इस मामले को पूरी तरह से बंद किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस के लिए पेश होने को तैयार हैं। अब सबकी नजरें 30 अप्रैल पर टिकी हैं, जब इस मामले में विस्तृत मोशन कोर्ट के सामने रखा जाएगा। ————————– यह खबर भी पढ़ें… दावा- एपस्टीन और अनिल अंबानी के बीच सैकड़ों मैसेज-ईमेल हुए:यौन अपराधी ने खुद को व्हाइट हाउस का इनसाइडर बताया था अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। पूरी खबर पढ़ें…
9.90 लाख साइबर फ्रॉड मामले में दो आरोपी गिरफ्तारी:महाराष्ट्र पुलिस ने मैहर से दोनों को पकड़ा; धोखाधड़ी से खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए

महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने 9.90 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड के मामले में मैहर के रामनगर कस्बे से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में आशू खरे और अमित पटेल को महाराष्ट्र ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, यह साइबर फ्रॉड 26 फरवरी को महाराष्ट्र के ठाणे पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुआ था। फरियादी की शिकायत के बाद 27 फरवरी को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने दो आरोपियों किया गिरफ्तार 28 फरवरी को ठाणे में बीएनएस की धारा 318(4), 319 (2), 336 (2), 336(3), 340(2), 3(5) समेत साइबर फ्रॉड की अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान इन दोनों आरोपियों के नाम सामने आए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 9.90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की रकम का पहला ट्रांजेक्शन 1.65 लाख रुपए आरोपी आशू खरे के खाते में हुआ था। दूसरे ट्रांजेक्शन में 60 हजार रुपए अमित पटेल के खाते में आए थे। पुलिस ने यह भी बताया कि अन्य खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई थी और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला, 18 पटवारियों पर चलेगा मुकदमा:कलेक्टर ने दी अभियोजन स्वीकृति; राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी की थी

श्योपुर जिले में हुए बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इस मामले में संलिप्त 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी के बाद अब इन राजस्व कर्मचारियों के विरुद्ध न्यायालय में कानूनी कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है। पुलिस ने जांच में पाया था कि राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा किया गया है। थाना बड़ौदा में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस यह पूरा प्रकरण थाना बड़ौदा में अपराध क्रमांक 439/23 के तहत दर्ज है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 409 (अमानत में ख्यानत) और 120-बी (साजिश) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच में राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी प्रविष्टियां करने और अपात्रों को लाभ पहुंचाने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद अभियोजन की मांग की गई थी। इन 18 पटवारियों पर होगी अदालती कार्रवाई प्रशासन द्वारा जिन पटवारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है, उनमें मेवाराम गौरछिया, हेमन्त मित्तल, राजकुमार शर्मा, महेन्द्र सिंह जाटव, सुमित देशलेहरा, योगेश जिंदल, विनोद भूषण, अखिलेश जैन, भोलाराम गुप्ता, हुकुमचंद बिसारिया, राजवीर जाटव, बृजराज मीणा, रामनरेश जाटव, रामदयाल जागा, सोनेराम धाकड़, नीतेश मीणा, संजय रावत और शंकरलाल मर्सकोले शामिल हैं। इस घोटाले में पटवारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों सहित कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जल्द दाखिल होगा आरोप पत्र, गिरफ्तारी की संभावना अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब पुलिस संबंधित पटवारियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान (आरोप पत्र) पेश करेगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आपराधिक मामले के साथ-साथ इन कर्मचारियों पर विभागीय जांच और निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। जिले के राजस्व विभाग में इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे विभाग के अन्य संदिग्ध मामलों की परतें भी खुलने की संभावना है।
कोटक बैंक पर ₹160 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप:पंचकूला नगर निगम की FD में गड़बड़ी, बैंक ने पुलिस में खुद शिकायत दर्ज की

हरियाणा की पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपए के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को लेकर कोटक महिंद्रा बैंक विवादों में है। बैंक पर करीब ₹160 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद बैंक ने पंचकूला पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और नगर निगम के साथ मिलकर खातों की जांच शुरू कर दी है। मैच्योरिटी पर पैसे ट्रांसफर करने के दौरान हुआ खुलासा पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर विनय कुमार ने बताया कि नगर निगम की कुछ एफडी लंबे समय से कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा में थीं। जब निगम ने एक एफडी के मैच्योर होने पर फंड ट्रांसफर करने के लिए बैंक से कहा कि तब रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद निगम ने बैंक से सभी जमा राशि का हिसाब मांगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह गड़बड़ी ₹160 करोड़ तक हो सकती है। बैंक का पक्ष- केवाईसी और कागजात पूरी तरह सही कोटक महिंद्रा बैंक के प्रवक्ता ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि बैंक ने नगर निगम के निर्देशों के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट और उससे जुड़े बैंक खातों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बैंक का कहना है कि अब तक की जांच में अकाउंट ओपनिंग प्रोसेस, KYC दस्तावेज, ऑथराइज्ड सिग्नेचर और निगम से मिले निर्देश पूरी तरह सही पाए गए हैं। बैंक ने दावा किया है कि सभी ट्रांजेक्शन बैंकिंग नियमों के तहत ही किए गए थे। बैंक ने खुद पंचकूला पुलिस में शिकायत दर्ज कराई बैंक ने बताया कि दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा पहले ही नगर निगम के साथ मिलकर चेक किया जा चुका है और बाकी की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से चल रही है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंक ने खुद पंचकूला पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि वे इस मामले में नगर निगम, सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। IDFC फर्स्ट बैंक में भी सामने आया था ऐसा ही मामला सरकारी खातों में हेरफेर का यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में भी ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। वह मामला भी हरियाणा सरकार के कुछ चुनिंदा खातों से जुड़ा था। बैंक ने तब बताया था कि कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों ने मिलकर इस फ्रॉड को अंजाम दिया था। ये खबर भी पढ़ें… घर के पास PNG पाइपलाइन, तो कनेक्शन लेना ही होगा: कंपनी 3 महीने का नोटिस देगी, कनेक्शन नहीं लिया तो LPG सप्लाई बंद होगी अगर आपके घर के पास गैस पाइपलाइन आ गई है और आपने PNG कनेक्शन नहीं लिया है, तो अगले 3 महीने में आपके घर आने वाला LPG सिलेंडर बंद कर दिया जाएगा। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और गैस की किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू किया है। पूरी खबर पढ़ें…
पति पर तीन शादियां करने और धोखाधड़ी का आरोप:पत्नी ने पुलिस से मांगी मदद, पति ने दी अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी

ग्वालियर में एक नवविवाहिता महिला ने अपने पति पर धोखे, मारपीट और तीन शादियां करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता ने पति द्वारा अश्लील वीडियो-फोटो वायरल करने की धमकी देने का भी जिक्र है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 19 वर्षीय नवविवाहिता ने पुलिस को बताया कि उसने 2025 में अपने माता-पिता की मर्जी के बगैर घर से भागकर अनिकेत वर्मा नामक युवक से प्रेम विवाह किया था। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही अनिकेत ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। बाद में युवती को पता चला कि अनिकेत पहले से शादीशुदा था और उसने यह बात उससे छुपाकर धोखे से शादी की थी। शिकायत के अनुसार, अनिकेत ने युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया और फिर इंदौर भागकर आर्य समाज मंदिर में उससे शादी कर ली। हालांकि, युवती के बार-बार कहने के बावजूद अनिकेत ने अपनी शादी का कोर्ट में रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया। युवती ने बताया कि अनिकेत का अब जाकर अपनी पहली पत्नी से तलाक हुआ है। इसके बाद वह दिल्ली चला गया और वहां एक अन्य लड़की से आर्य समाज मंदिर में तीसरी शादी कर ली है, जिसके साथ वह अब रह रहा है। पीड़िता वर्तमान में अपने माता-पिता के साथ रह रही है और अनिकेत की इस तीसरी शादी का विरोध कर रही है। इससे नाराज अनिकेत अब उसे धमका रहा है और उसके अश्लील फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहा है। परेशान युवती ने अनिकेत से तलाक की मांग की है। पुलिस ने युवती को वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
अनिल अंबानी को बैंक 'फ्रॉड' घोषित कर सकेंगे:₹40 हजार करोड़ की धोखाधड़ी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला, पहले राहत दी थी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज यानी 23 फरवरी को रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को मिला राहत का आदेश रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद अब बैंक उन्हें ‘फ्रॉड’ घोषित करने की कार्यवाही फिर से शुरू कर पाएंगे। इससे पहले कोर्ट ने 40 हजार करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में बैंकों की इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। बैंकों ने नियमों का पालन नहीं किया जनवरी में बैंकों ने दी थी चुनौती बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक ने जनवरी 2026 में सिंगल बेंच के स्टे ऑर्डर को चुनौती दी थी। बैंकों का तर्क था कि वे फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर कार्यवाही करना चाहते हैं। अब बैंक कानून के मुताबिक आगे की कार्यवाही कर सकेंगे। अंबानी बोले- बिना अनुमति देश नहीं छोडूंगा पिछले हफ्ते अनिल अंबानी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वे देश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और बिना अनुमति के विदेश यात्रा नहीं करेंगे। अनिल अंबानी ने ये भी कहा था कि रिलायंस ग्रुप (ADAG) की कंपनियों के खिलाफ चल रही ED और CBI की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाने के दिए थे निर्देश इसी महीने की शुरुआत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों (ED और CBI) से पूछा था कि जांच में इतना वक्त क्यों लग रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने ED को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया था ताकि 40,000 करोड़ के इस कथित घोटाले की जांच में तेजी लाई जा सके।
यूपी के मंत्री ने वाराणसी में मतदाता सूची में अनियमितता का आरोप लगाया, चुनाव आयोग को कोई बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी नहीं मिली | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:फ़रवरी 17, 2026, 15:13 IST रवीन्द्र जयसवाल ने वाराणसी में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके विधानसभा क्षेत्र से लगभग एक लाख वोट कम कर दिये गये। चुनाव आयोग (फोटो: पीटीआई) क्या वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से लगभग एक लाख वोट रहस्यमय तरीके से गायब हो गए, जिसे “वोट जिहाद” कहा गया, या आधिकारिक आंकड़े बहुत अलग कहानी बताते हैं? उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विवाद तब पैदा हो गया है जब राज्य मंत्री रवींद्र जयसवाल ने वाराणसी में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके विधानसभा क्षेत्र से लगभग एक लाख वोट कम हो गए हैं। हालाँकि, भारत के चुनाव आयोग ने प्रारंभिक सत्यापन के बाद आरोप को खारिज कर दिया है। विवाद 12 फरवरी को शुरू हुआ जब जायसवाल ने वाराणसी में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 से 40 वर्ष की आयु की विवाहित महिलाओं को उनके पिता के नाम पर पंजीकृत किया गया था और कुछ मतदाताओं को समान विवरण के साथ विभिन्न बूथों पर दो से तीन बार सूचीबद्ध किया गया था। उन्होंने इसे ”बड़ी अनियमितता” बताते हुए जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार को एक ज्ञापन सौंपा और व्यापक समीक्षा की मांग की. बढ़ती राजनीतिक गहमागहमी के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने वाराणसी का दौरा किया और मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा उपलब्ध करायी गयी कथित फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची की जांच की गयी है. रिनवा ने व्यापक हेरफेर के दावों का प्रभावी ढंग से विरोध करते हुए कहा, “सत्यापन के पहले चरण में, लगभग 4,500 मतदाताओं की जाँच की गई। केवल नौ ही डुप्लिकेट पाए गए।” अधिकारियों के मुताबिक, कुल 9,000 नाम जांच के लिए सौंपे गए थे। पाई गई अधिकांश विसंगतियों को जानबूझकर की गई धोखाधड़ी के बजाय दोहरे फॉर्म सबमिशन या तकनीकी ओवरलैप के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। सीईओ ने कहा कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ के किसी संगठित प्रयास का कोई सबूत नहीं है। राज्यव्यापी पुनरीक्षण अभ्यास पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के पैमाने का विवरण देते हुए, रिनवा ने कहा कि 6 जनवरी को प्रकाशित मसौदा सूची में, दो श्रेणियों के तहत पहचाने गए कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं – ‘नो मैपिंग’ के तहत 1.04 करोड़ और ‘तार्किक विसंगतियों’ के तहत 2.22 करोड़। ‘नो मैपिंग’ उन मामलों को संदर्भित करता है जहां मतदाता का नाम वर्तमान मतदाता सूची में मौजूद है, लेकिन 2002 या 2005 के रिकॉर्ड के साथ मिलान नहीं किया जा सकता है, जिससे उन्हें अनमैप्ड श्रेणी में रखा जाता है। ‘तार्किक विसंगतियों’ में एक ही व्यक्ति का कई स्थानों पर पंजीकृत होना या उम्र, पता या पारिवारिक विवरण में बेमेल जैसी विसंगतियां शामिल हैं। अब तक लगभग 1.09 करोड़ नोटिस दिए जा चुके हैं और साथ ही सुनवाई भी की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि उचित सत्यापन के बाद ही कार्रवाई की जाएगी, इस बात पर जोर देते हुए कि अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची में सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। कानूनी कार्रवाई और आश्वासन सीईओ ने स्पष्ट किया कि सख्त कार्रवाई तभी की जाएगी जब यह साबित हो जाए कि जानबूझकर गलत जानकारी दी गई है। गलत फॉर्म जमा करके सिस्टम में हेरफेर करने का कोई भी प्रयास लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्यवाही को आमंत्रित कर सकता है। रिणवा ने कहा, “किसी भी निर्दोष मतदाता को परेशान नहीं किया जाएगा। कार्रवाई सख्ती से ठोस सबूतों पर आधारित होगी।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची की अखंडता और जनता का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहले ड्राफ्ट में पूरे उत्तर प्रदेश में 12.55 करोड़ नाम सूचीबद्ध किए गए हैं। 86 लाख से अधिक आवेदनों पर पहले ही सुनवाई और कार्रवाई की जा चुकी है। पात्र मतदाताओं को शामिल करना सुनिश्चित करने के लिए सुधार की समय सीमा एक महीने बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल, 2026 को प्रकाशित की जाएगी और यह भविष्य के चुनावों के लिए एक स्थायी रिकॉर्ड के रूप में काम करेगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : वाराणसी, भारत, भारत पहले प्रकाशित: फ़रवरी 17, 2026, 15:13 IST समाचार राजनीति यूपी के मंत्री ने वाराणसी में मतदाता सूची में अनियमितता का आरोप लगाया, चुनाव आयोग को बड़े पैमाने पर कोई धोखाधड़ी नहीं मिली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)वाराणसी मतदाता सूची विवाद(टी)वोट जिहाद(टी)उत्तर प्रदेश मतदाता सूची(टी)मतदाता सूची संशोधन(टी)डुप्लिकेट मतदाता(टी)भारत निर्वाचन आयोग(टी)रवींद्र जयसवाल के आरोप(टी)मतदाता सूची सत्यापन









