इंदौर में 12 वर्षीय छात्रा से दोस्ती के बाद रेप:जेवर और नकदी भी लेकर रख लिए; परिजनों ने पूछताछ की तब हुआ खुलासा

इंदौर की हीरानगर पुलिस ने रविवार को 12 साल की एक छात्रा से दोस्ती के बाद उसके साथ रेप के मामले में FIR दर्ज की है। आरोपी के घर पर रात में पुलिस ने दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया। लड़के के पिता सेल्स टैक्स में कार्यरत हैं। टीआई सुशील पटेल के मुताबिक, इलाके में रहने वाली छात्रा अपने पिता और मां के साथ रविवार रात थाने पहुंची। उसने बताया कि सेल्स टैक्स कॉलोनी निवासी आरव ने उसके साथ रेप किया। वहीं, उसे धमकाकर नकदी और जेवर भी अपने पास रख लिए। छात्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम पर दोनों की बातचीत हुई। इसके बाद आरव उससे मिलने आया और उसके साथ गलत काम किया। 9 अप्रैल को भी उसने छात्रा को दोबारा संबंध बनाने के लिए राजी किया। आरव ने छात्रा से कहा कि उसे किसी को रुपए देना है। इसके चलते उसने छात्रा के घर से जेवर और नकदी लेकर अपने पास रख लिए। छात्रा के परिजनों को जब घर पर जेवर और नकदी नहीं मिले, तो उन्होंने उससे पूछताछ की, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। हालांकि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर छात्रा को साथ लेकर आरोपी के घर पहुंचकर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है।
महवा चोरी का खुलासा, 3 आरोपी और 1 नाबालिग गिरफ्तार:एक फरार, ₹1.80 लाख नकद, सोने के टॉप्स बरामद

मन्दसौर की सीतामऊ थाना पुलिस ने बुधवार को ग्राम महवा में हुई चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए मामले में तीन आरोपियों और एक विधि विरुद्ध बालक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई ₹1,80,000 नकद राशि और लगभग ₹60,000 मूल्य के सोने के एक जोड़ी कान के टॉप्स बरामद किए हैं। ग्राम महवा निवासी भगवतीलाल सुरावत (62 वर्ष) ने सीतामऊ थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5 बजे वे अपने घर पर ताला लगाकर अफीम तौल के लिए सीतामऊ स्थित विजय पैलेस गए थे। अगले दिन 2 अप्रैल को दोपहर लगभग 12 बजे घर लौटने पर उन्होंने देखा कि घर के अंदर रखी लोहे की अलमारी का ताला टूटा हुआ था। जांच करने पर अलमारी में रखे तीन सोने के मंगलसूत्र (लगभग 12 ग्राम, 8 ग्राम और 11 ग्राम) तथा दो जोड़ी सोने की झुमकियां (प्रत्येक 6-6 ग्राम) गायब मिलीं। अज्ञात बदमाश छत के रास्ते घर में घुसे थे और चोरी कर फरार हो गए थे। इस मामले में थाना सीतामऊ पर अपराध क्रमांक 158/2026, धारा 331(4) एवं 305(ए) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। सउनि केसी बहुगुणा और उनकी टीम ने जांच शुरू की। 7 अप्रैल 2026 को ग्राम महवा के संदेही दशरथ उर्फ कालू को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। दशरथ उर्फ कालू ने एक विधि विरुद्ध बालक के साथ मिलकर चोरी करने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि चोरी किए गए आभूषण अशोक जैन (निवासी काचरिया जाट) और प्रभात नलवाया (निवासी सीतामऊ) को बेचे गए थे। पुलिस ने दशरथ उर्फ कालू पिता राधेश्याम भांभी (30 वर्ष, निवासी महवा), अशोक पिता कन्हैयालाल जैन (52 वर्ष, निवासी काचरिया जाट), प्रभात पिता रमेशचंद्र नलवाया (35 वर्ष, निवासी सीतामऊ) और एक विधि विरुद्ध बालक को गिरफ्तार किया है। बरामदगी में ₹1,80,000 नकद और सोने के एक जोड़ी कान के टॉप्स शामिल हैं। इस मामले में अशोक (निवासी सीतामऊ) नामक एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।
नौकरियों पर नकदी: कल्याणकारी राज्य जो ममता बनर्जी की राजनीति को शक्ति देता है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 10:11 IST रोजगार-संचालित समृद्धि के बजाय, बंगाल तेजी से नकद हस्तांतरण, सब्सिडी वाले भोजन, पेंशन और अनुदान सहित राज्य-समर्थित उपभोग पर काम कर रहा है। पारंपरिक बेरोजगारी राहत को 1,500 रुपये प्रति माह के वजीफे के रूप में पुनः ब्रांड करके, दीदी अब राज्य के स्थिर औद्योगिक क्षेत्र को लेकर बढ़ती युवा बेचैनी के खिलाफ प्रभावी ढंग से समय खरीद रही है। (पीटीआई) पश्चिम बंगाल में आज कल्याण सिर्फ एक विनम्र शब्द है। नकदी की राजनीति अधिक सटीक और उपयुक्त मुहावरा हो सकता है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पुरोहितों (पुजारियों) और मुस्लिम मौलवियों के लिए अंतिम समय में पदयात्रा निश्चित रूप से पूर्व-खाली लोकलुभावनवाद में एक उल्लेखनीय अभ्यास है, जो आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) को केवल 80 मिनट से मात देने के लिए है। सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी घोषणा एक शासन शैली को दर्शाती है जो केवल राज्य की राजकोषीय बैंडविड्थ को बढ़ाकर, टिकाऊ नीति पर सामरिक अस्तित्व को प्राथमिकता देती है। तकनीकी तौर पर एमसीसी की भावना को दरकिनार करके, बनर्जी ने धार्मिक पादरियों के बीच अंतिम-मील संरक्षण नेटवर्क बनाने के लिए राज्य के खजाने को प्रभावी ढंग से हथियार बना लिया है, जो स्थानीय वोटिंग ब्लॉकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। हालाँकि, यह निर्णय चुनाव से पहले बनर्जी की नकद खैरात की राजनीति पर भी नजर डालता है। धार्मिक पादरियों के लिए भत्ते में वृद्धि भाजपा के कथित सांप्रदायिक आख्यान को बेअसर करने के साथ-साथ अपने स्वयं के अल्पसंख्यक आधार को शांत करने के लिए एक सुविचारित पूर्व-खाली हमला है। हालाँकि, चुनाव से कुछ घंटे पहले धार्मिक मध्यस्थों की वफादारी को सुरक्षित करने के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग प्रणालीगत आर्थिक सुधार के बजाय लोकलुभावन अनुदान पर गहरी निर्भरता को दर्शाता है। एक दशक से अधिक समय से, मुख्यमंत्री ने वित्तीय सहायता योजनाओं का एक विस्तृत नेटवर्क बनाया है जो राज्य के लगभग हर घर और उनकी पार्टी मशीनरी को भी छूता है। सरकार लगभग 10 करोड़ लोगों के राज्य में आठ से नौ करोड़ से अधिक लाभार्थियों के साथ लगभग 100 योजनाओं का गर्व से विज्ञापन करती है। कागज पर, यह भारत में सबसे बड़े कल्याणकारी आर्किटेक्चर में से एक जैसा दिखता है। लेकिन प्रभावशाली संख्या के पीछे एक गहरी राजनीतिक वास्तविकता छिपी है। बंगाल की अर्थव्यवस्था अपने कल्याणकारी विस्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। आज राज्य की राजनीतिक अर्थव्यवस्था का केंद्रबिंदु प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण है, जबकि सरकार राज्य भर में बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और रोजगार पैदा करने में विफल रही है। जब मुफ़्त पैसा चुनावी गणित से मेल खाता है फरवरी में, बनर्जी सरकार द्वारा बांग्लार युवा साथी या युवाश्री योजना की घोषणा की गई थी। यह ‘डोल राजनीति’ से ‘आकांक्षा प्रबंधन’ की ओर बढ़ने का एक और उच्च-स्तरीय प्रयास है, क्योंकि जनसांख्यिकीय लाभांश एक राजनीतिक दायित्व बनने का खतरा है। जीवित रहने के लिए प्रति माह 1,500 रुपये के वजीफे के रूप में पारंपरिक बेरोजगारी राहत या ‘बेकर भाटा’ को फिर से ब्रांड करके, दीदी अब राज्य के स्थिर औद्योगिक क्षेत्र पर बढ़ती युवा बेचैनी के खिलाफ प्रभावी ढंग से समय खरीद रही है। यह ‘भत्ता’ औद्योगिक पक्षाघात का एक पारदर्शी प्रवेश है, जहां राज्य अल्प राजकोषीय राहत के लिए वास्तविक रोजगार सृजन को बदल देता है। लक्ष्मीर भंडार जैसी योजनाएं, जो महिलाओं को मासिक धन भेजती हैं, अब 2.2 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर करती हैं। कन्याश्री, रूपश्री, जय बांग्ला, कृषक बंधु के माध्यम से किसान सहायता, खाद्यसाथी के तहत सब्सिडी वाला भोजन, बांग्लार बारी के तहत आवास और स्वास्थ्य साथी के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा जैसे अन्य कार्यक्रम सामूहिक रूप से सुनिश्चित करते हैं कि राज्य सरकार लाखों लोगों के दैनिक जीवन में वित्तीय रूप से मौजूद है। उदाहरण के लिए, चुनाव से ठीक पहले 2021 में लॉन्च किया गया लक्ष्मीर भंडार अब महिला मतदाताओं को मासिक प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण प्रदान करता है। राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 25-60 वर्ष की महिलाओं को एससी-एसटी वर्ग के लिए 1,500 रुपये और सामान्य वर्ग के परिवारों के लिए 1,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। 26,700 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट आवंटन के साथ लगभग 2.21 करोड़ महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाया गया है। सरकार ने अपनी स्थापना के बाद से कुल 74,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। राजनीतिक रूप से, तर्क सरल और प्रभावी है। सरकार का पैसा हर महीने घर तक पहुंचे तो वफादारी आती है। लेकिन बड़ा आर्थिक प्रश्न असहज बना हुआ है। नकदी बनाम सुधार नकदी योजनाओं का नाटकीय रूप से विस्तार हुआ है, फिर भी रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति समान नहीं रही है। बड़े उद्योग दुर्लभ बने हुए हैं, निवेश प्रवाह सीमित है, और रोजगार सृजन उन पड़ोसी राज्यों से पिछड़ गया है जिन्होंने आक्रामक रूप से विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के विस्तार को आगे बढ़ाया है। इस असंतुलन ने एक अजीब राजनीतिक अर्थव्यवस्था का निर्माण किया है। रोजगार-संचालित समृद्धि के बजाय, बंगाल तेजी से नकद हस्तांतरण, सब्सिडी वाले भोजन, पेंशन और अनुदान सहित राज्य-समर्थित उपभोग पर काम कर रहा है। कल्याण परिवारों को सहारा देता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि दीर्घकालिक आर्थिक गतिशीलता पैदा करता हो। नीति आयोग की प्रकाशित रिपोर्ट- राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026- के अनुसार, बढ़ते कर्ज, निरंतर घाटे और मामूली राजस्व वृद्धि के कारण पश्चिम बंगाल को लगातार राजकोषीय तनाव का सामना करना पड़ रहा है। नीति आयोग की एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट, ए मैक्रो एंड फिस्कल लैंडस्केप ऑफ द स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल में कहा गया है कि बंगाल की वास्तविक जीएसडीपी 2012-13 से 2021-22 की अवधि के दौरान 4.3 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ी है, जबकि राष्ट्रीय औसत वृद्धि 5.6 प्रतिशत है। राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में राज्य की हिस्सेदारी 1990-91 में 6.8 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 5.8 प्रतिशत हो गयी है। 2021-22 तक इसकी प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय से 20 प्रतिशत कम है। भाजपा और सीपीएम जैसे विपक्ष का तर्क है कि यह मॉडल वित्तीय रूप से जोखिम भरा और आर्थिक रूप से उथला है। उनका दावा है कि यह राज्य के सब्सिडी बोझ को बढ़ाते हुए निवेश को हतोत्साहित करता है। समर्थकों का कहना है कि ऐसे राज्य में कल्याण आवश्यक है जहां गरीबी और
गांधी नगर मार्केट में कैरी बैग से नकदी चोरी, दो गिरफ्तार

होमताजा खबरक्राइम दहशत में थे गांधी नगर के कारोबारी, बार-बार टटोलनी पड़ रही थी अपनी जेब, क्यों? Last Updated:February 22, 2026, 18:52 IST गांधी नगर मार्केट में कैरी बैग से नकदी चोरी की घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने सनी और हनी को गिरफ्तार कर 83 हजार रुपये बरामद किए, जिससे व्यापारियों को राहत मिली है. Delhi Crime News: दिल्ली के सबसे व्यस्त और नकदी आधारित बाजारों में शामिल गांधी नगर मार्केट में पिछले कुछ दिनों से कारोबारियों और ग्राहकों के बीच एक अजीब डर का माहौल था. लोग खरीदारी तो कर रहे थे, लेकिन उनका ध्यान अपने बैग और जेबों पर ही टिका रहता था. किसी अनहोनी के डर से वे बार-बार अपनी जेब टटोलने को मजबूरे थे. वजह थी लगातार हो रही कैरी बैग से नकदी चोरी की घटनाएं. अब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद राहत की सांस जरूर मिली है, क्योंकि शातिर चोरों के इस गैंग को गिरफ्तार कर लिया है. शाहदरा जिले की गांधी नगर थाना पुलिस की क्रैक टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर बाजार में सनसनी फैलाने वाली चोरी की वारदातों का खुलासा किया है. पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 83 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं, जिसमें दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर हासिल किए गए 65 हजार और 18 हजार रुपये शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी कैरी बैग में नकदी लेकर चलने वाले लोगों को निशाना बनाते थे. आपको बता दें कि गांधी नगर मार्केट सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी का केंद्र है. यहां रोजाना लाखों रुपये का कैश लेन-देन होता है. ऐसे में जब 12 और 14 फरवरी को दो अलग-अलग मामलों में 1.50 लाख रुपये और 78 हजार रुपये चोरी होने की खबर फैली, तो व्यापारियों और ग्राहकों की घबराहट बढ़ गई. कई दुकानदारों ने तो अपने कर्मचारियों को कैश लेकर अकेले बाहर भेजना भी बंद कर दिया था. घटनाओं के बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें आरोपियों की स्पष्ट तस्वीरें सामने आईं. एसएचओ गांधी नगर के निर्देश पर एसआई विकास के नेतृत्व में क्रैक टीम गठित की गई. 17 फरवरी को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी मंगलवार बाजार में फिर वारदात को अंजाम देने आने वाले हैं. पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और दोनों आरोपियों—सनी (34) और हनी (32), निवासी उत्तम नगर—को दबोच लिया. पूछताछ में सामने आया कि दोनों सगे भाई जल्दी पैसा कमाने के लालच में चोरी की राह पर उतर आए थे. वे खासतौर पर उन लोगों को टारगेट करते थे जो सिर या पीठ पर बैग लेकर चलते थे और सामान संभालने में व्यस्त रहते थे. सनी चुपके से बैग की चेन खोलकर नकदी निकालता और तुरंत हनी को थमा देता, ताकि वह मौके से फरार हो सके. इसी तरीके से उन्होंने दो बड़ी वारदातों को अंजाम दिया. About the Author Anoop Kumar MishraAssistant Editor Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 18:52 IST
बिस्तर के नीचे से निकला खजाना, 30 लाख के गहने और नकदी लेकर नौकरानी हुई थी रफूचक्कर, ऐसे हुई गिरफ्तार | treasure found under the bed maid arrest with jewellery and cash worth rs 30 lakh how she was arrested by delhi police

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने द्वारका में घर में काम करने वाली नौकरानी द्वारा की गई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को सुलझा लिया है. द्वारका सेक्टर-23 थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए न केवल आरोपी महिला को गिरफ्तार किया, बल्कि चोरी किया गया माल भी बरामद कर लिया है. पकड़ी गई महिला के पास से करीब 30 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद हुए हैं, जिसको वह अपने बिस्तर के नीचे छुपा रखी थी. दिल्ली पुलिस ने नौकरानी को कैसे पकड़ा? घटना 1 फरवरी 2026 की है. द्वारका सेक्टर-23 निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि उनके घर से भारी मात्रा में सोने के गहने और नकदी गायब है. उन्हें अपनी महिला नौकरानी पर शक था, जो वारदात के बाद से ही लापता थी. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया. पुलिस टीम और ‘ऑपरेशन इस्सापुर खेड़ा’ डीसीपी द्वारका अंकित सिंह के निर्देश पर एसएचओ सेक्टर-23 के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम बनाई गई. इस टीम में एएसआई कर्मवीर, हेड कांस्टेबल मुकेश, अनिल कुमार, महिला एएसआई भगवती और कांस्टेबल अलका शामिल थीं पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय किया. जल्द ही पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि संदिग्ध महिला कापसहेड़ा इलाके के गांव इस्सापुर खेड़ा बमनोली में छिपी हुई है. छापेमारी और भारी बरामदगी पुलिस टीम ने बिना समय गवाए बताए गए पते पर दबिश दी. महिला पुलिसकर्मियों की मदद से आरोपी महिला को काबू किया गया. घर की तलाशी लेने पर पुलिस की आंखें फटी रह गई. नौकरानी ने चोरी किए गए सारे गहने एक जगह छिपा कर रखे थे. बिस्तर के नीचे से सोने की 4 चूड़ियां, जिसका वजन लगभग 80 ग्राम, सोने की 2 कड़े, जिसका वजन लगभग 50 ग्राम, सोने की एक चेन, जिसका वजन लगभग 25 ग्राम, एक सोना और प्लेटिनम ब्रेसलेट, जिसका वजन लगभग 20 ग्राम, सोने की 3 अंगूठियां ,जिसका वजन लगभग 18 ग्राम, एक जोड़ी कान के झुमके, जिसका वजन लगभग 5 ग्राम, चांदी के 2 सिक्के, जिसका वजन लगभग 20 ग्राम और 18000 रुपये नकद बरामद हुए. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि बरामद सोने की वजन 190 ग्राम है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 30 लाख रुपये है. गिरफ्तार की गई महिला की उम्र 38 वर्ष है और वह मूल रूप से इस्सापुर खेड़ा, दिल्ली की रहने वाली है. पूछताछ में उसने कबूल किया कि लालच में आकर उसने इस वारदात को अंजाम दिया और उसे लगा था कि वह गांव में छिपकर पुलिस की नजरों से बच जाएगी. दिल्ली पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है.









