Thursday, 16 Apr 2026 | 03:52 AM

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1971 के नायक रहे राजस्थान के सपूत को बांग्लादेशी सम्मान:22 साल की उम्र में अंतिम सांस तक पाकिस्तानी ठिकानों पर करते रहे थे बमबारी

1971 के नायक रहे राजस्थान के सपूत को बांग्लादेशी सम्मान:22 साल की उम्र में अंतिम सांस तक पाकिस्तानी ठिकानों पर करते रहे थे बमबारी

1971 के भारत-पाक युद्ध में मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले पिलानी (झुंझुनूं) के शहीद धर्मपाल डूडी के अदम्य साहस को आधी सदी बाद एक नई पहचान मिली है। बांग्लादेश सरकार ने शहीद के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए उनके परिवार को ‘विशेष प्रशस्ति पत्र’ और ‘राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न’ भेंट किया। गुरुवार को जब सेना के अधिकारी यह सम्मान लेकर शहीद के पैतृक गांव धींधवा पहुंचे, तो पूरा माहौल ‘शहीद धर्मपाल अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। बांग्लादेश से भेजे गए सम्मान की PHOTOS…. 54 साल का इंतजार, 2018 में जारी हुआ था पत्र, अब पहुंचा घर बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना और राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद के हस्ताक्षरों वाला यह सम्मान पत्र 27 नवंबर 2018 को जारी किया गया था। प्रशासनिक कारणों से इसे पहुंचने में देरी हुई, लेकिन गुरुवार दोपहर 2:30 बजे जब 65 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट विक्रांत, हवलदार रामबीर और अग्निवीर जीतू सिंह गांव पहुंचे, तो शहीद की यादें फिर ताजा हो गईं। जवानों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें सलामी दी। शरीर जख्मी था, लेकिन हौसला फौलादी 3 दिसंबर 1971 को अखोरा (ढाका) में भीषण जंग जारी थी। धर्मपाल डूडी और उनकी टीम पाकिस्तानी ठिकानों पर कहर बनकर टूट रही थी। इसी बीच पाकिस्तान की ओर से किए गए भारी बम हमले में धर्मपाल गंभीर रूप से घायल हो गए। शहीद के भतीजे सुनील कुमार डूडी ने बताया- दुश्मन का गोला उनके पास गिरा, वे लहूलुहान थे। शरीर से खून बह रहा था, लेकिन उन्होंने अपना रेडियो सेट और गन नहीं छोड़ी। दर्द असहनीय था, पर उनके दिमाग में सिर्फ दुश्मन को तबाह करने का लक्ष्य था। घायल अवस्था में भी वे अंतिम सांस तक पाकिस्तानी ठिकानों पर सटीक बमबारी करवाते रहे और अंततः 4 दिसंबर 1971 को वह वीरगति को प्राप्त हुए। 13 जनवरी 1970 को सेना में भर्ती हुए थे धर्मपाल डूडी (शहीद) के भतीजे सुनील कुमार डूडी ने गर्व से बताया कि उनके चाचा 13 जनवरी 1970 को सेना में भर्ती हुए थे। महज 22 साल की उम्र में वह शहीद हो गए थे। सम्मान- यूनिट ने ‘धर्मपाल बैट्री’ रखा नाम लेफ्टिनेंट विक्रांत ने बताया कि 65 मीडियम रेजिमेंट की आर्टलरी यूनिट की एक बैट्री का नाम अब ‘शहीद धर्मपाल बैट्री’ रखा गया है। यह किसी भी सैनिक के लिए अद्वितीय सम्मान है। भारत सरकार उन्हें पहले ही ‘पूर्वी स्टार’ से नवाज चुकी है। 7 भाइयों में से 6 ने सेना में दीं सेवाएं शहीद धर्मपाल समेत परिवार में सात भाई हैं। इनमें सबसे बड़े भाई मक्खन लाल का 2002 में निधन हो चुका है। वे गांव में ही खेती करते थे। इसके अलावा लांस नायक अमर सिंह, सूबेदार शुभकरण, सूबेदार रणनीत सिंह, सूबेदार सत्यवीर सिंह, सूबेदार रामजीलाल सेना से रिटायर हो चुके हैं। शहीद धर्मपाल सिंह पांचवे नंबर के भाई थे। —- यह खबर भी पढ़िए… ऑपरेशन-सिंदूर में शहीद हुए सुरेंद्र मोगा वायु-सेना मेडल से सम्मानित:वीरांगना बोलीं-सुरेंद्र हमेशा कहते थे-देश पहले बाकी सब बाद में ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सार्जेंट सुरेंद्र मोगा को सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल (गैलंट्री)’ से सम्मानित किया गया। 93वें वायु सेना दिवस के अवसर पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर आयोजित समारोह में भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने यह वीरता सम्मान शहीद की वीरांगना पत्नी सीमा मोगा को प्रदान किया। (पढ़ें पूरी खबर)

ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला, 1300 मौत:जंग में 140 अमेरिकी सैनिक घायल, इजराइल में कई जगह बमबारी

ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला, 1300 मौत:जंग में 140 अमेरिकी सैनिक घायल, इजराइल में कई जगह बमबारी

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 12वां दिन है। ईरान का कहना है कि अब तक हुए हमलों में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है। UN में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के मुताबिक देश में करीब 9600 सिविलियन इलाकों पर हमले हुए हैं। इनमें घरों के अलावा बाजार, अस्पताल, मेडिसिन सेंटर्स और स्कूल भी शामिल हैं। वहीं ईरान ने इजराइल में हाइफा, येरुशलम और तेल अवीव पर भी मिसाइल हमले करने का दावा किया है। युद्ध का असर अमेरिकी सेना पर भी पड़ा है। अमेरिका के रक्षा विभाग के मुताबिक अब तक करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक

ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। यह बयान ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत से पहले आया है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आज (17 फरवरी 2026) जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हो रही है। इससे पहले ओमान में 6 फरवरी को पहली बैठक हुई थी। ट्रम्प ने कहा, ‘मैं उन बातचीत पर नजर रहूंगा।’ उन्होंने संकेत दिया कि ईरान इस बार समझौते को लेकर गंभीर है। डील की संभावना पर ट्रम्प ने कहा कि ईरान इसे लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले साल अमेरिका की ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी से उसे अक्ल आई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम भुगतना चाहेंगे।’ ईरान-अमेरिका के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होगी ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, ईरान ने सोमवार को कुछ ही हफ्तों में दूसरी बार नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में हो रहा है। इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो पर चेतावनी दी गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के उत्तरी मार्ग में मंगलवार को लाइव-फायर ड्रिल हो सकती है। हालांकि ईरानी सरकारी टीवी ने लाइव-फायर अभ्यास का जिक्र नहीं किया। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। ईरान के उप विदेश मंत्री बोले- ट्रम्प प्रतिबंध हटाएं तो डील संभव व्हाइट हाउस का कहना है कि वह ऐसा समझौता चाहता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वहीं, रविवार को ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर बात करने को तैयार है, तो हम अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी अधिकारी बार-बार कहते रहे हैं कि परमाणु वार्ता में प्रगति रुकने की वजह ईरान है, न कि अमेरिका। रवांची बोले- हमने 60% इंरिच्ड यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव दिया ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता एक लंबे समय से चल रही विवादास्पद बातचीत है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। जिससे वह परमाणु हथियार न बना सके। मजीद तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान ने 60% तक इंरिच्ड यूरेनियम को कम करने का प्रस्ताव दिया है। ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा उच्च स्तर पर इंरिच्ड यूरेनियम का भंडार है। 2015 के परमाणु समझौते के तहत उसने अपना यूरेनियम रूस भेजा था। इस बार क्या वह ऐसा करेगा, इस पर तख्त-रवांची ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। रूस ने दोबारा यह सामग्री स्वीकार करने की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अस्थायी रूप से यूरेनियम इंरिचमेंट रोकने का प्रस्ताव भी दे चुका है। बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान की एक बड़ी शर्त रही है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे पर हो। तख्त-रवांची ने कहा कि उनकी समझ है कि अगर समझौता करना है तो फोकस परमाणु मुद्दे पर ही रहेगा। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। रवांची बोले- हमारे अस्तित्व पर खतरा हुआ तो जवाब देंगे ईरान के उप विदेश मंत्री ने ट्रम्प के बयानों पर चिंता जताई। सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर अमेरिका बातचीत में रुचि दिखा रहा है, लेकिन ट्रम्प ने हाल में सत्ता परिवर्तन की बात की। तख्त-रवांची ने कहा कि निजी संदेशों में ऐसा नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि दूसरा युद्ध सबके लिए बुरा होगा। अगर ईरान को अस्तित्व का खतरा लगा, तो ईरान जवाब देगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से बात की है और सब युद्ध के खिलाफ हैं। ईरान को लगता है कि इजराइल इस वार्ता को तोड़ना चाहता है। समझौते को लेकर तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान जेनेवा में उम्मीद के साथ जाएगा और दोनों पक्षों को ईमानदारी दिखानी होगी। क्षेत्र में तैनात किए जा रहे 40,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के बारे में पूछे जाने पर, तख्त-रावंची ने जवाब दिया, ‘ऐसी स्थिति में खेल अलग होगा।’ ईरान से तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा रहा अमेरिका अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड