मूवी रिव्यू- एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा:शानदार कलाकारों के बावजूद, कमजोर पटकथा और ढीली रफ्तार के कारण मिस्ट्री थ्रिलर असर छोड़ने में नाकाम

मिस्ट्री-थ्रिलर जॉनर में बनी ‘एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा’ एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट के साथ शुरू होती है, लेकिन कमजोर कहानी और धीमी रफ्तार के कारण यह फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। रजत कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शानदार स्टारकास्ट तो है, मगर कंटेंट उस स्तर का नहीं बन पाया, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रख सके। यह फिल्म ZEE5 पर स्ट्रीम हो चुकी है। इस फिल्म की लेंथ 1 घंटा 4 0 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी एक पार्टी से शुरू होती है, जहां दोस्तों का एक ग्रुप एनिवर्सरी सेलिब्रेशन के लिए इकट्ठा होता है। इसी दौरान सोहराब हांडा नाम का एक व्यक्ति मृत पाया जाता है, जिसकी हत्या गला काटकर की गई होती है। इसके बाद शुरू होती है जांच, जिसमें हर किरदार शक के घेरे में आता है और उनके बीच छिपे राज सामने आने लगते हैं। हालांकि कहानी का प्लॉट दिलचस्प है, लेकिन स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है। फिल्म कई जगह भटकती नजर आती है और मिस्ट्री का असर उतना मजबूत नहीं बन पाता, जितना होना चाहिए था। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है। विनय पाठक अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं और उनकी परफॉर्मेंस काफी नेचुरल लगती है। सौरभ शुक्ला भी अपने रोल में दमदार नजर आते हैं और स्क्रीन पर पकड़ बनाए रखते हैं। वहीं रणवीर शौरी और रजत कपूर जैसे कलाकार भी अपने अनुभव का असर दिखाते हैं। हालांकि बाकी सहायक कलाकारों की एक्टिंग सामान्य है और वे ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाते। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? डायरेक्शन की बात करें तो रजत कपूर का प्रयास साफ दिखता है, लेकिन कहानी और पटकथा कमजोर होने की वजह से फिल्म प्रभावित होती है। फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को बांधे रखने में असफल रहती है। तकनीकी रूप से फिल्म ठीक-ठाक है, लेकिन इसमें कोई खास नई बात या प्रभावशाली ट्रीटमेंट देखने को नहीं मिलता। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर कैसा है? फिल्म में कोई खास गाने नहीं हैं, जिससे इसका एंटरटेनमेंट वैल्यू थोड़ा कम हो जाता है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सामान्य है और कई जगह सीन के असर को मजबूत करने में नाकाम रहता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखे या नहीं? अगर आप मिस्ट्री फिल्मों के शौकीन हैं और सिर्फ अच्छे कलाकारों की एक्टिंग देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है। लेकिन अगर आप एक कसावट भरी कहानी और मजबूत थ्रिल की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।
इंदौर में 3 मस्टर वसूली सहायक की सेवा समाप्त:राजस्व वसूली के काम में लापरवाही पड़ी भारी; एक कर्मचारी को किया निलंबित

राजस्व वसूली के काम में लगातार लापरवाही करने के साथ ही वर्क प्लेस से बिना अनुमति के अपसेंट रहने वाले तीन मस्टर वसूली सहायक की सेवा समाप्त कर दी है। साथ ही 1 वसूली सहायक को निलंबित किया गया है। दरअसल, जोन क्रमांक 9 वार्ड क्रमांक 26 के अंतर्गत राजस्व वसूली काम में लगे मस्टर वसूली सहायक दिनेश पिता बदामी लाल चौहान पिछले 20 दिनों से बिना पूर्व सूचना के वर्क प्लेस से अनुपस्थित रहने तथा मस्टर वसूली सहायक तरुण पिता बने सिंह तोमर राजस्व वसूली काम में लापरवाही करने पर दोनों मस्टर वसूली सहायक को काम और हाजिरी से मुक्त किया गया। इसी तरह जोन क्रमांक 1 के वार्ड 10 के अंतर्गत राजस्व वसूली काम में लगे मस्टर वसूली सहायक अभिषेक महिपाल सरवन पिछले 9 फरवरी से लगातार अपने वर्क प्लेस पर अपसेंट रहने पर मस्टर वसूली सहायक को काम एवं हाजिरी से मुक्त किया गया। वहीं, जलकर विभाग में काम करने वाले स्थाई बेलदार निलेश पिता राजाराम पाल जो कि जलकर वसूली काम में लगे थे, लेकिन वह जनवरी 2024 से लगातार वर्क प्लेस से अपसेंट रहा, विभाग द्वारा लगातार लेटर देने के बाद भी आखिरी सूचना पत्र का स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने पर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल के निर्देश पर स्थाई बेलदार निलेश पाल को निलंबित किया गया।
मास्टर प्लान सड़क विवाद में हाईकोर्ट का फैसला:नेहरू प्रतिमा से छावनी पुल मार्ग पर निगम का नोटिस निरस्त, कार्रवाई को बताया अनुचित

नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल तक प्रस्तावित मास्टर प्लान सड़क के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए जारी नोटिस को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया है कि वह मामले में पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेश पारित करे। मामला इंदौर नगर निगम के जोन-11 के भवन अधिकारी द्वारा जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें उक्त मार्ग को बाधक बताते हुए याचिकाकर्ता बसंत रावत के मकान को सात दिन के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया था। नोटिस के बाद छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और निगम प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट जयेश गुरनानी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि संबंधित मकान नगर निगम की अनुमति एवं स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्मित है, ऐसे में उसे हटाने की कार्रवाई विधिसम्मत नहीं है। सुनवाई के दौरान गुरनानी ने तर्क दिया कि 27 मई 2014 को नगर निगम ने स्वयं आदेश जारी कर उक्त सड़क की चौड़ाई 60 फीट (18 मीटर) निर्धारित की थी, जबकि वर्तमान नोटिस में सड़क की चौड़ाई 24 मीटर (80 फीट) बताई गई है, जो पूर्व आदेश के विपरीत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि इंदौर विकास योजना 2021 की वैधता को हाई कोर्ट पहले ही समाप्त घोषित कर चुका है, इसलिए उसके आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता की उपस्थिति में सड़क की सेंट्रल अलाइनमेंट भी निर्धारित नहीं की गई थी। इन तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को शून्य घोषित कर दिया तथा निगम को पुनः सुनवाई कर वैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले से छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और प्रभावित पक्षों को राहत मिली है।
मासूम शर्मा ने पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:अमृतसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक में MA की; बोले- अचीवमेंट फैंस को समर्पित

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच विवाद के बीच अपनी दूसरी मास्टर डिग्री पूरी कर ली है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ कई फोटोज भी शेयर किए हैं। मासूम शर्मा ने अमतृसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक सब्जेक्ट में MA की है। करीब डेढ़ साल पहले ही उन्होंने अपनी मास्टरर्स पूरी कर ली थी, लेकिन 23 फरवरी को हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें ये डिग्री मिली। मासूम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- गायकी मेरा इश्क है, पढ़ाई मेरी ताकत। दो मास्टर डिग्री पूरी करने की अचीवमेंट अपने हर एक फैन को समर्पित करता हूं। अब पढ़िए…मासूम का स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक का सफर गांव के स्कूल से की दसवीं की पढ़ाई मासूम शर्मा का जन्म जींद के गांव ब्राह्मणवास गांव में 27 मार्च 1991 को हुआ था। मासूम ने दसवीं तक की पढ़ाई हिंदू स्कूल जुलाना से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई एसडी स्कूल किलाजफरगढ़ से की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए रोहतक का रुख किया। पंडित लख्मीचंद कॉलेज से फिल्म एंड एक्टिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। मास कम्युनिकेशन में पहली डिग्री की ग्रेजुएशन के बाद मासूम शर्मा ने 2019 में मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया प्रोडक्शन में MA की पढ़ाई पूरी की। यह डिग्री भी उन्होंने पंडित लख्मीचंद यूनिवर्सिटी से ही हासिल की। 2019 में ही पंडित लख्मीचंद कॉलेज में मास्टर डिग्री का पहला बैच शुरू हुआ था। मासूम इसी बैच के स्टूडेंट थे। मासूम शर्मा ने अपनी दूसरी मास्टर डिग्री वर्ष 2024 में म्यूजिक विषय में पूरी की थी। बड़ा बेटा फर्स्ट क्लॉस में पढ़ाई कर रहा मासूम शर्मा के के दो बेटे और एक बेटी है। जिनमें से एक एलकेजी और दूसरा बच्चा फर्स्ट क्लास में पढ़ाई करता है। जबकि छोटा बेटा अभी तीन साल का है। 18 फरवरी को जींद में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ 18 फरवरी को जींद में मासूम शर्मा का बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं सालगिराह के दौरान हुए कार्यक्रम में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ था। मासूम शर्मा ने लाइव शो के दौरान स्टेज पर पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को देखकर भड़क गए थे। मासूम ने यहां तक कह दिया था कि मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। इसके बाद विवाद बढ़ा तो पूर्व पूर्व सरपंच ने उन्हें पंच का चुनाव तक लड़ने की चुनौती दे डाली। इसके बाद मासूम के बड़े भाई विकास शर्मा ने मुआना गांव में पूर्व सरपंच के सामने बैठकर मामले में मासूम की गलती स्वीकार की थी, लेकिन विवाद फिर भी नहीं रुका। हालांकि, मासूम ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अपने शब्द वापस लेने की बात कही थी, लेकिन उसके साथ यह भी कहा था कि एक व्यक्ति के कहने पर पंचायत नहीं होती। ————– पूर्व सरपंच विवाद की ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं: दोस्त मुकेश जाजी ने गलती मानी, सरपंचों ने किया बहिष्कार; प्रदेश प्रभारी बोले- मौत के कार्यक्रम में भी नचा लो पूर्व सरपंच बोले-पैसे देकर मासूम शर्मा को कहीं नचवा लो:पंच चुनाव जीतकर दिखाए, जींद में महापंचायत की तैयारी; सिंगर ने स्टेज से उतारा था फतेहाबाद में सरपंचों की मासूम शर्मा को चेतावनी:माफी मांगने की मांग; बोले- वरना कोई भी इवेंट्स नहीं होने देंगे
मुकुल रॉय का निधन: बंगाल के मास्टर रणनीतिकार जो कभी थे टीएमसी के नंबर 2 | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:23 फ़रवरी 2026, 07:42 IST सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों के दिनों से लेकर पश्चिम बंगाल में पार्टी की सत्ता तक पहुंचने तक, रॉय ने बनर्जी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुकुल रॉय. (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) वरिष्ठ राजनेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार रात 1.30 बजे कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे और लंबे समय से कई बीमारियों से पीड़ित थे। रॉय लंबे समय से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और भरोसेमंद विश्वासपात्र थे। अपने संगठनात्मक कौशल और रणनीतिक कौशल के लिए बंगाल की राजनीति के “चाणक्य” के रूप में जाने जाने वाले, उन्हें अक्सर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में दूसरे नंबर के नेता के रूप में माना जाता था। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों के दिनों से लेकर पश्चिम बंगाल में पार्टी के सत्ता में आने तक, रॉय ने बनर्जी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रॉय ने दूसरी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान जहाजरानी मंत्रालय और बाद में रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के लिए ममता बनर्जी द्वारा रेल मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, रॉय को रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। बनर्जी ने टीएमसी के लिए रेलवे विभाग अपने पास रखने की इच्छा व्यक्त की थी और व्यक्तिगत रूप से तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से रॉय की सिफारिश की थी। टीएमसी के गठन से पहले, रॉय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे। 2017 में उन्होंने खुद को तृणमूल कांग्रेस से अलग कर लिया और उसी साल 25 सितंबर को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया और 11 अक्टूबर, 2017 को अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए, 2017 से 2021 तक पार्टी के साथ रहे। उन्होंने 2021 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद टीएमसी में लौट आए। 11 जून, 2021 को वह अपने बेटे के साथ ममता बनर्जी की उपस्थिति में फिर से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। 13 नवंबर, 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दलबदल के आधार पर विधान सभा सदस्य (एमएलए) के रूप में उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। अपने राजनीतिक करियर के दौरान, रॉय से सारदा चिट फंड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी पूछताछ की थी। उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति ने अपने सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक और तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत के प्रमुख वास्तुकार को खो दिया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 23 फ़रवरी 2026, 07:42 IST समाचार राजनीति मुकुल रॉय का निधन: बंगाल के मास्टर रणनीतिकार जो कभी थे टीएमसी के नंबर 2 अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मुकुल रॉय की मृत्यु(टी)मुकुल रॉय मृत्युलेख(टी)मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस(टी)मुकुल रॉय बीजेपी(टी)मुकुल रॉय रेल मंत्री(टी)मुकुल रॉय ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)मुकुल रॉय सारदा मामला
How Body Senses Cold | शरीर को ठंड का अहसास कैसे होता है? वैज्ञानिकों ने सुलझाई शरीर की सबसे बड़ी मिस्ट्री, अंदर छिपा है ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’, वो सेंसर जो दिमाग को भेजता है कूल सिग्नल

नई दिल्ली: जब आप सर्दियों की सुबह घर से बाहर निकलते हैं या मुंह में पुदीने की गोली (Mint) रखते हैं, तो आपके शरीर के भीतर एक छोटा सा मॉलिक्यूलर सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है. यह सेंसर आपके दिमाग को अलर्ट करता है कि बाहर ठंड है या आपने कुछ ठंडा खाया है. वैज्ञानिकों ने अब इस सेंसर की पहली विस्तृत तस्वीरें कैद करने में सफलता हासिल की है. इस रिसर्च से यह साफ हो गया है कि हमारा शरीर असली ठंड और मेंथॉल (Menthol) से मिलने वाली बनावटी ठंडक के बीच कैसे फर्क करता है या कैसे दोनों को एक ही तरह से महसूस करता है. सैन फ्रांसिस्को में 21-25 फरवरी, 2026 तक चलने वाली ’70वीं बायोफिजिकल सोसाइटी एनुअल मीटिंग’ में इस रिसर्च को पेश किया गया. 1. क्या है TRPM8 और यह कैसे काम करता है? इस पूरी रिसर्च का केंद्र ‘TRPM8’ नामक एक प्रोटीन चैनल है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ह्युक-जून ली ने इसे शरीर के भीतर मौजूद एक ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’ की तरह बताया है. यह प्रोटीन हमारे सेंसरी न्यूरॉन्स की झिल्लियों (Membranes) में स्थित होता है, जो हमारी त्वचा, मुंह और आंखों तक फैले होते हैं. जब तापमान 46°F से 82°F (लगभग 8°C से 28°C) के बीच होता है, तो यह चैनल खुल जाता है. इसके खुलते ही कोशिका के अंदर आयन (Ions) का प्रवाह शुरू होता है, जो दिमाग को ठंडक का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है. 2. मेंथॉल कैसे देता है दिमाग को धोखा? रिसर्च में यह दिलचस्प खुलासा हुआ कि मेंथॉल वास्तव में शरीर को ‘बेवकूफ’ बनाता है. ली के अनुसार, मेंथॉल एक ट्रिक की तरह काम करता है. यह प्रोटीन चैनल के एक खास हिस्से से जुड़ जाता है और उसे बिल्कुल वैसे ही खोल देता है जैसे असली ठंडक खोलती है. हालांकि मेंथॉल किसी चीज को बर्फ की तरह जमाता नहीं है, लेकिन आपका शरीर दिमाग को वही सिग्नल भेजता है जो बर्फ छूने पर मिलता है. यही कारण है कि पुदीना खाने पर या नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल लगाने पर हमें तेज ठंडक का एहसास होता है. क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक जो इलेक्ट्रॉन बीम से फ्लैश-फ्रोजन प्रोटीन की इमेज बनाती है. इसका इस्तेमाल करके रिसर्चर्स ने कोल्ड सेंसिंग चैनल, TRPM8 के कई कन्फर्मेशनल स्नैपशॉट कैप्चर किए, जब यह बंद से खुले में बदलता है. (Credit: Hyuk-Joon Lee) 3.क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से खुला राज? वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को काम करते हुए देखने के लिए ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें प्रोटीन को अचानक जमा दिया जाता है और फिर इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए उसकी इमेज ली जाती है. टीम ने TRPM8 के बंद होने से लेकर खुलने तक की कई तस्वीरें लीं. उन्होंने पाया कि ठंड और मेंथॉल दोनों ही इस चैनल को सक्रिय करते हैं, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. ठंड सीधे उस रास्ते (Pore) को प्रभावित करती है जहां से आयन गुजरते हैं, जबकि मेंथॉल प्रोटीन के दूसरे हिस्से से जुड़कर उसमें बदलाव लाता है, जो अंततः रास्ते को खोल देता है. 4. बीमारियों के इलाज में कैसे मिलेगी मदद? इस खोज के मेडिकल मायने बहुत गहरे हैं. जब TRPM8 सेंसर सही से काम नहीं करता, तो यह क्रोनिक पेन (लगातार होने वाला दर्द), माइग्रेन, आंखों का सूखापन (Dry Eye) और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ जाता है. फिलहाल ‘एकोल्ट्रेमोन’ नामक दवा, जो TRPM8 को सक्रिय करती है, ड्राई आई के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. यह दवा मेंथॉल की तरह ही काम करती है और आंखों में ठंडक का अहसास कराकर आंसू बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है. AI की मदद से बनाई प्रतीकात्मक तस्वीर. 5. क्या भविष्य में दर्द से मिलेगी पूरी राहत? रिसर्चर्स ने प्रोटीन के अंदर एक ‘कोल्ड स्पॉट’ (Cold Spot) की भी पहचान की है. यह हिस्सा तापमान को भांपने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होता है. यह खोज वैज्ञानिकों को ऐसी नई दवाएं विकसित करने का आधार प्रदान करती है जो सीधे इस रास्ते को टारगेट कर सकें. इससे न केवल दर्द के इलाज में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी समझ में आएगा कि लंबे समय तक ठंड में रहने पर हमारा शरीर उसे सहने के अनुकूल कैसे हो जाता है. दशकों से वैज्ञानिक जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे, वह अब हमारे सामने है.








