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दतिया में महिला से दहेज के लिए मारपीट का आरोप:लोको पायलट पति, सास और ससुर पर केस दर्ज

दतिया में महिला से दहेज के लिए मारपीट का आरोप:लोको पायलट पति, सास और ससुर पर केस दर्ज

दतिया में महोनाजाट गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला ने पति, सास और ससुर पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने और जेवर ले जाने के आरोप लगाए हैं। महिला की शिकायत पर इंदरगढ़ पुलिस ने सोमवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने बताया कि, उसकी शादी 16 फरवरी 2020 को भोपाल निवासी आशीष दीक्षित से हुई थी। आशीष लोको पायलट है। शादी में उसके पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार नकद राशि, सोने-चांदी के जेवर और अन्य सामान दिया था। आरोप है कि शादी के कुछ दिन बाद से ही पति आशीष, ससुर घनश्याम दीक्षित और सास अशोक दीक्षित कम दहेज का ताना देकर उसे परेशान करने लगे। महिला के अनुसार, आरोपियों ने कई बार मारपीट की और अतिरिक्त 10 लाख रुपए की मांग करते रहे। वर्ष 2021 में बेटी होने के बाद भी प्रताड़ना कम नहीं हुई। परेशान होकर उसने यह बात अपने मायके वालों को बताई। जिन्होंने ससुराल पक्ष को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। खुशबू का कहना है कि 16 अप्रैल 2024 को उसका पति महोनाजाट आया और उसके साथ मारपीट कर जेवर लेकर चला गया। इसके बाद से ही उसे मायके में छोड़ रखा है और 10 लाख रुपए लाने की शर्त रखी जा रही है। हाल ही में रिश्तेदारों द्वारा फोन पर समझाने की कोशिश भी बेनतीजा रही। पीड़िता ने अपने पिता और भाई के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' की भारत में रिलीज रुकी:ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला, भारत-इजराइल संबंधों के कारण मंजूरी पेंडिंग

'द वॉइस ऑफ हिंद रजब' की भारत में रिलीज रुकी:ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला, भारत-इजराइल संबंधों के कारण मंजूरी पेंडिंग

फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की कहानी पर आधारित ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म द वॉइस ऑफ हिंद रजब की भारत में रिलीज फिलहाल रुकी हुई है। फिल्म को अब तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है। फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना ने दावा किया कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के पास भेजा गया था। बोर्ड को इसमें कोई आपत्तिजनक कंटेंट नहीं मिला, लेकिन इसे संवेदनशील माना गया। फिल्म की स्क्रीनिंग फरवरी के आखिरी हफ्ते में हुई थी। नंदवाना के मुताबिक, फिल्म में न हिंसा है, न अश्लील सीन और न ही कोई राजनीतिक संवाद है। इसके बावजूद भारत-इजराइल संबंधों को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर फिल्मों में बदलाव के लिए कट्स सुझाए जाते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। रिवाइजिंग कमेटी को भेजी गई फिल्म फिल्म को अब रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया है। मनोज नंदवाना ने कहा कि कमेटी कब बनेगी, इसकी जानकारी नहीं है और तब तक फिल्म पुरानी हो सकती है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सर्टिफिकेट न मिलने पर कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा है। फिल्म फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब पर आधारित ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर काउथर बेन हानिया की इस फिल्म में हिंद रजब की सच्ची कहानी दिखाई गई है। जनवरी 2024 में गाजा सिटी से भागते समय उसकी कार पर हमला हुआ था। फिल्म में कहानी रेड क्रिसेंट के वालंटियर्स के नजरिए से दिखाई गई है। फिल्म में हिंद रजब की असली आवाज का इस्तेमाल किया गया है। 12 दिन बाद उसका शव उसके परिवार और दो वालंटियर्स के साथ मिला था। फिल्म का प्रीमियर सितंबर 2025 में वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसे ग्रैंड ज्यूरी प्राइज मिला। इसे टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया। यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को भारत में सेंसर सर्टिफिकेट में दिक्कत हुई हो। 2024 की फिल्म संतोष को भी सर्टिफिकेट नहीं मिला था, जिससे इसकी रिलीज नहीं हो सकी।

विजय थलपति फिल्म 'जन नायकन' पर सेंसर का निर्णय कल:रिवाइजिंग कमेटी करेगी नई स्क्रीनिंग, फिल्म देखने के बाद सर्टिफिकेट को लेकर होगा फैसला

विजय थलपति फिल्म 'जन नायकन' पर सेंसर का निर्णय कल:रिवाइजिंग कमेटी करेगी नई स्क्रीनिंग, फिल्म देखने के बाद सर्टिफिकेट को लेकर होगा फैसला

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार विजय थलपति की मोस्ट-अवेटेड फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर सेंसर से जुड़ा विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन की रिवाइजिंग कमेटी एक बार फिर फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाली है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च को कमेटी फिल्म देखेगी और इसके बाद सर्टिफिकेट को लेकर फैसला लिया जा सकता है। पहले यह स्क्रीनिंग 9 मार्च को तय की गई थी, लेकिन कमेटी के एक सदस्य के बीमार पड़ने के कारण इसे टाल दिया गया था। अब नई तारीख तय कर दी गई है और प्रोडक्शन हाउस को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस स्क्रीनिंग के बाद कमेटी यह तय करेगी कि फिल्म को सर्टिफिकेट दिया जाए या इसमें कुछ बदलाव किए जाएं। ‘जना नायगन’ पिछले कई महीनों से सेंसर प्रक्रिया में फंसी हुई है। फिल्म को पहले एग्जामिनिंग कमेटी के सामने पेश किया गया था। वहां कुछ आपत्तियों के बाद इसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया गया। इसी वजह से फिल्म की रिलीज लगातार टलती रही और फैंस को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। फिल्म का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है। यह एक बड़े बजट की एक्शन-ड्रामा फिल्म मानी जा रही है और इंडस्ट्री में इसे विजय के करियर की अहम फिल्मों में से एक बताया जा रहा है। अब सबकी नजर 17 मार्च को होने वाली रिवाइजिंग कमेटी की स्क्रीनिंग पर है। इसी के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। दरअसल, फिल्म पहले 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट समय पर न मिलने के कारण इसकी रिलीज टालनी पड़ी। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया था और निर्माताओं ने सर्टिफिकेशन को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी।

थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की ओटीटी डील कैंसिल:अमेजन प्राइम वीडियो ने 120 करोड़ की डील की थी, सेंसर विवाद में फंसी है मूवी

थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की ओटीटी डील कैंसिल:अमेजन प्राइम वीडियो ने 120 करोड़ की डील की थी, सेंसर विवाद में फंसी है मूवी

थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंसर बोर्ड के साथ चल रहे विवाद और रिलीज में हो रही देरी के कारण ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो ने फिल्म के साथ अपनी डील कैंसिल कर दी है। अमेजन प्राइम वीडियो ने ‘जन नायकन’ के डिजिटल राइट्स के लिए करीब 120 करोड़ रुपए की डील की थी। फैंस पिछले दो महीने से इस फिल्म के थिएटर्स में आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसकी रिलीज डेट फाइनल नहीं हो सकी है। 120 करोड़ की डील से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पीछे हटा अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट कब मिलेगा और यह सिनेमाघरों में कब लगेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार इसीलिए ही अमेजन प्राइम वीडियो ने यह डील कैंसिल की है। आमतौर पर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स थिएटर रिलीज की तारीख के आधार पर ही एग्रीमेंट करते हैं। 9 जनवरी को होनी थी रिलीज, कोर्ट तक पहुंचा मामला ‘जन नायकन’ को शुरुआत में 9 जनवरी को रिलीज करने का प्लान था। मगर सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के कुछ सीन्स पर आपत्ति जताते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया। बोर्ड का मानना था कि कुछ सीन्स काफी संवेदनशील हैं। इसके बाद मेकर्स और सेंसर बोर्ड के बीच विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। दो महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी फिल्म अधर में लटकी हुई है। 9 मार्च की स्क्रीनिंग भी हुई कैंसिल विवाद सुलझाने के लिए मेकर्स ने कोर्ट से केस वापस लिया और रिवाइजिंग कमेटी के पास पहुंचे। 9 मार्च को फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई थी, लेकिन ऐन मौके पर कमेटी के एक सदस्य के बीमार होने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। स्क्रीनिंग कैंसिल होने से रिव्यू प्रोसेस में और देरी हो गई है। थलापति विजय की यह आखिरी फिल्म विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। विजय तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) पार्टी के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी ने मार्च-अप्रैल में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हाल ही में विजय ने अपने एक्टिंग करियर से संन्यास लेने का ऐलान किया था। उन्होंने 33 साल के लंबे फिल्मी करियर के बाद फिल्मों को अलविदा कहने का फैसला किया। उन्होंने यह घोषणा मलेशिया में फिल्म के ऑडियो लॉन्च के दौरान की थी। अब वे राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होंगे।

How Body Senses Cold | शरीर को ठंड का अहसास कैसे होता है? वैज्ञानिकों ने सुलझाई शरीर की सबसे बड़ी मिस्ट्री, अंदर छिपा है ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’, वो सेंसर जो दिमाग को भेजता है कूल सिग्नल

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नई दिल्ली: जब आप सर्दियों की सुबह घर से बाहर निकलते हैं या मुंह में पुदीने की गोली (Mint) रखते हैं, तो आपके शरीर के भीतर एक छोटा सा मॉलिक्यूलर सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है. यह सेंसर आपके दिमाग को अलर्ट करता है कि बाहर ठंड है या आपने कुछ ठंडा खाया है. वैज्ञानिकों ने अब इस सेंसर की पहली विस्तृत तस्वीरें कैद करने में सफलता हासिल की है. इस रिसर्च से यह साफ हो गया है कि हमारा शरीर असली ठंड और मेंथॉल (Menthol) से मिलने वाली बनावटी ठंडक के बीच कैसे फर्क करता है या कैसे दोनों को एक ही तरह से महसूस करता है. सैन फ्रांसिस्को में 21-25 फरवरी, 2026 तक चलने वाली ’70वीं बायोफिजिकल सोसाइटी एनुअल मीटिंग’ में इस रिसर्च को पेश किया गया. 1. क्या है TRPM8 और यह कैसे काम करता है? इस पूरी रिसर्च का केंद्र ‘TRPM8’ नामक एक प्रोटीन चैनल है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ह्युक-जून ली ने इसे शरीर के भीतर मौजूद एक ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’ की तरह बताया है. यह प्रोटीन हमारे सेंसरी न्यूरॉन्स की झिल्लियों (Membranes) में स्थित होता है, जो हमारी त्वचा, मुंह और आंखों तक फैले होते हैं. जब तापमान 46°F से 82°F (लगभग 8°C से 28°C) के बीच होता है, तो यह चैनल खुल जाता है. इसके खुलते ही कोशिका के अंदर आयन (Ions) का प्रवाह शुरू होता है, जो दिमाग को ठंडक का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है. 2. मेंथॉल कैसे देता है दिमाग को धोखा? रिसर्च में यह दिलचस्प खुलासा हुआ कि मेंथॉल वास्तव में शरीर को ‘बेवकूफ’ बनाता है. ली के अनुसार, मेंथॉल एक ट्रिक की तरह काम करता है. यह प्रोटीन चैनल के एक खास हिस्से से जुड़ जाता है और उसे बिल्कुल वैसे ही खोल देता है जैसे असली ठंडक खोलती है. हालांकि मेंथॉल किसी चीज को बर्फ की तरह जमाता नहीं है, लेकिन आपका शरीर दिमाग को वही सिग्नल भेजता है जो बर्फ छूने पर मिलता है. यही कारण है कि पुदीना खाने पर या नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल लगाने पर हमें तेज ठंडक का एहसास होता है. क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक जो इलेक्ट्रॉन बीम से फ्लैश-फ्रोजन प्रोटीन की इमेज बनाती है. इसका इस्तेमाल करके रिसर्चर्स ने कोल्ड सेंसिंग चैनल, TRPM8 के कई कन्फर्मेशनल स्नैपशॉट कैप्चर किए, जब यह बंद से खुले में बदलता है. (Credit: Hyuk-Joon Lee) 3.क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से खुला राज? वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को काम करते हुए देखने के लिए ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें प्रोटीन को अचानक जमा दिया जाता है और फिर इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए उसकी इमेज ली जाती है. टीम ने TRPM8 के बंद होने से लेकर खुलने तक की कई तस्वीरें लीं. उन्होंने पाया कि ठंड और मेंथॉल दोनों ही इस चैनल को सक्रिय करते हैं, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. ठंड सीधे उस रास्ते (Pore) को प्रभावित करती है जहां से आयन गुजरते हैं, जबकि मेंथॉल प्रोटीन के दूसरे हिस्से से जुड़कर उसमें बदलाव लाता है, जो अंततः रास्ते को खोल देता है. 4. बीमारियों के इलाज में कैसे मिलेगी मदद? इस खोज के मेडिकल मायने बहुत गहरे हैं. जब TRPM8 सेंसर सही से काम नहीं करता, तो यह क्रोनिक पेन (लगातार होने वाला दर्द), माइग्रेन, आंखों का सूखापन (Dry Eye) और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ जाता है. फिलहाल ‘एकोल्ट्रेमोन’ नामक दवा, जो TRPM8 को सक्रिय करती है, ड्राई आई के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. यह दवा मेंथॉल की तरह ही काम करती है और आंखों में ठंडक का अहसास कराकर आंसू बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है. AI की मदद से बनाई प्रतीकात्मक तस्वीर. 5. क्या भविष्य में दर्द से मिलेगी पूरी राहत? रिसर्चर्स ने प्रोटीन के अंदर एक ‘कोल्ड स्पॉट’ (Cold Spot) की भी पहचान की है. यह हिस्सा तापमान को भांपने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होता है. यह खोज वैज्ञानिकों को ऐसी नई दवाएं विकसित करने का आधार प्रदान करती है जो सीधे इस रास्ते को टारगेट कर सकें. इससे न केवल दर्द के इलाज में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी समझ में आएगा कि लंबे समय तक ठंड में रहने पर हमारा शरीर उसे सहने के अनुकूल कैसे हो जाता है. दशकों से वैज्ञानिक जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे, वह अब हमारे सामने है.