Packaged Milk Controversy; Coliform Bacteria Health Risk & Prevention Tips

Hindi News Lifestyle Packaged Milk Controversy; Coliform Bacteria Health Risk & Prevention Tips | FSSAI 8 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें ‘ट्रस्टिफाइड’ नाम के एक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म ने दावा किया है कि भारत की कुछ प्रतिष्ठित कंपनियों के पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया तय सीमा से कई गुना ज्यादा पाया गया। बैक्टीरिया की ये मात्रा सुरक्षित स्तर से बहुत ज्यादा है, जो दूध के हाइजीन और क्वालिटी पर सवाल उठाती है। इन दावों के सामने आने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इसलिए जरूरत की खबर में डेयरी प्रोडक्ट्स पर उठ रहे सवालों पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- दूध में मिला कोलिफॉर्म बैक्टीरिया क्या है? यह बैक्टीरिया कितना खतरनाक होता है? दूध खरीदते हुए किन बातों का ध्यान रखें? दूध को सुरक्षित तरीके से अपनी डाइट में कैसे शामिल करें? एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा कितना सही और गंभीर है? जवाब- पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने के दावे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। डेयरी प्रोडक्ट्स की जांच 100% ब्लाइंड टेस्टिंग करने वाली स्वतंत्र संस्था ‘ट्रस्टिफाइड’ ने की है। 100% ब्लाइंड टेस्टिंग का मतलब है कि ब्रांड की पहचान बताए बिना निष्पक्ष जांच करना। दूध की क्वालिटी में लगातार कमियां मिल रही हैं। पिछले महीने गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिलावटी दूध बनाने वाली अवैध यूनिट्स पर कार्रवाई भी हुई है। गुजरात की एक रेड में सामने आया कि दूध में पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, तेल, डिटर्जेंट और यूरिया मिलाया जा रहा था। इसलिए दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा बेहद गंभीर है। सवाल- भारत के कुछ प्रतिष्ठित दूध के ब्रांड्स पर उठे सवाल कितने जायज हैं? जवाब- भारत में पैकेज्ड दूध बेचने से पहले FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। बड़े ब्रांड्स आमतौर पर कई स्तरों की क्वालिटी जांच से गुजरते हैं। हालांकि किसी भी फूड प्रोडक्ट में गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए शिकायत या रिपोर्ट सामने आने के बाद फूड आइटम्स की गुणवत्ता को लेकर स्वतंत्र रूप से टेस्टिंग जरूरी है। ऐसे में भारत की कुछ प्रतिष्ठित डेयरी कंपनियों पर उठे सवाल की सख्ती से जांच करने की जरूरत है। डेयरी प्रोडक्ट्स पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद FSSAI ने जांच और सैंपलिंग तेज कर दी है। सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया क्या होता है और यह दूध में कैसे पहुंचता है? जवाब- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानों और जानवरों के मल, मिट्टी, पानी और गंदगी में पाए जाते हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही यह दूध में ई. कोली जैसे हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। ई. कोली बैक्टीरिया से गंभीर संक्रमण हो सकता है। ये बैक्टीरिया जानवरों का दूध निकालते समय, प्रोसेसिंग या स्टोरेज के दौरान हाइजीन का ध्यान न रखने के कारण आ जाते हैं। सवाल- क्या दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का मतलब उसकी क्वालिटी खराब होना है? जवाब- दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मानक से अधिक होने का मतलब है कि उसकी हाइजीन का ध्यान नहीं रखा गया है। दूध किसी-न-किसी स्तर पर गंदगी, दूषित पानी या खराब हैंडलिंग से गुजरा है। साइंटिफिक तरीके से पैकेज्ड और सुरक्षित माने जाने वाले दूध में मानक से कई गुना ज्यादा बैक्टीरिया की मात्रा लापरवाही दिखाती है। इससे दूध जल्दी खराब हो सकता है और फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया सेहत को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब- दूध में मानक से अधिक कोलिफॉर्म बैक्टीरिया होने का मतलब है कि यह दूषित है। इसके कारण पेट में संक्रमण, दस्त, उल्टी, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका गंभीर असर हो सकता है। इसलिए दूषित दूध से बचना जरूरी है। इससे क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया से किन लोगों को ज्यादा हेल्थ रिस्क होता है? जवाब- इसके कारण सबसे अधिक समस्या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को होती है। ये सभी रिस्क के दायरे में हैं- छोटे बच्चे: इनकी इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती है। बुजुर्ग लोग: इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। गर्भवती महिलाएं: संक्रमण मां और शिशु दोनों को प्रभावित कर सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: इन्हें बीमारियों का रिस्क ज्यादा होता है। डायबिटिक लोग: इन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग: इन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। कुपोषण से ग्रसित लोग: इनका शरीर संक्रमण से लड़ने में सक्षम नहीं होता है। जिनका डाइजेस्टिव सिस्टम खराब है: इन्हें पेट की समस्याओं का जोखिम ज्यादा होता है। सवाल- क्या दूध को उबालने से कोलिफॉर्म बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं? जवाब- बैक्टीरिया हाई-टेम्परेचर सहन नहीं कर पाते हैं। उबालने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। हालांकि अगर दूध उबालने के बाद दूषित बर्तन या गंदे हाथों के संपर्क में आए, तो बैक्टीरिया दोबारा बढ़ सकते हैं। इसलिए उबालने के साथ साफ-सफाई भी जरूरी है। सवाल- दूध खरीदते समय पैकेट पर कौन-कौन सी चीजें जरूर चेक करनी चाहिए? जवाब- पैकेज्ड दूध खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- खुले और पैकेज्ड दूध में कौन सा ज्यादा सुरक्षित है और क्यों? जवाब- पैकेज्ड दूध कई मायनों में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसे प्रोसेसिंग और पैकिंग के दौरान FSSAI के तय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होता है। इसमें पॉश्चरीकरण (ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दूध के हानिकारक बैक्टीरिया को मारने के लिए एक निश्चित समय तक उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर दिया जाता है।) जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया बेहद कम हो जाते हैं। वहीं खुले दूध में यह ट्रैक करना मुश्किल होता है कि दूध निकालने, स्टोरेज करने और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान कितनी साफ-सफाई रखी गई है। इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि








