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Tejas Shirse Breaks National Record in 110m Hurdles, Qualifies for Commonwealth Games

Tejas Shirse Breaks National Record in 110m Hurdles, Qualifies for Commonwealth Games

Hindi News Sports Tejas Shirse Breaks National Record In 110m Hurdles, Qualifies For Commonwealth Games पंजाब4 मिनट पहले कॉपी लिंक तेजस शिर्से जीतने के बाद सेलिब्रेट करते हुए। भारतीय एथलीट तेजस शिर्से ने हर्डल रेस में नया रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने शनिवार को 110 मीटर की रेस 13.27 सेकेंड में पूरी की। तेजस ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने मई 2024 में फिनलैंड के जैवस्किला में मोटोनेट जीपी मीट में 13.41 सेकेंड का रिकॉर्ड बनाया था। तेजस ने पंजाब के लुधियाना स्थित गुरु नानक स्टेडियम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-9 में यह रिकॉर्ड बनाया। वे इस टूर्नामेंट में रिलायंस फाउंडेशन को रिप्रेजेंट कर रहे थे। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया तेजस ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया। उनका निर्धारित क्वालिफिकेशन मार्क 13.39 सेकेंड से बेहतर रहा। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होगा। रांची में गोल्ड मेडल जीता तेजस चोट के कारण कुछ समय ट्रैक से दूर रहे थे। इसके बाद उन्होंने रांची में हुए फेडरेशन कप 2026 में गोल्ड मेडल जीता था। एशिया का छठा बेस्ट प्रदर्शन तेजस ने 13.27 सेकेंड का समय निकालकर एशिया का छठा बेस्ट प्रदर्शन भी दर्ज किया। यदि उनका चयन भारतीय टीम में होता है तो वह 2014 में सिद्धार्थ थिंगालाया के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय मेंस 110 मीटर हर्डलर बन जाएंगे। रेस-बी में तेजस का दबदबा 110 मीटर हर्डल्स रेस-बी में तेजस ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी। कृष्णिक एम ने उन्हें कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंतिम हर्डल से टकराने के बावजूद तेजस ने 13.27 सेकेंड में रेस पूरी कर पहला स्थान हासिल किया। कृष्णिक एम 13.55 सेकेंड के साथ दूसरे और राजस्थान के माधवेंद्र सिंह 14.00 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। दिल्ली के हरमनजीत सिंह 14.42 सेकेंड के साथ चौथे स्थान पर रहे। हरियाणा के शिवदर्शन ने 14.65 सेकेंड का समय निकालकर पांचवां स्थान हासिल किया। एयर फोर्स के तरनदीप सिंह भाटी 15.01 सेकेंड के साथ छठे और ऑल इंडिया पुलिस के सचिन कुमार 15.48 सेकेंड के साथ सातवें स्थान पर रहे। रेस-ए में पंकज पाल साहू विजेता रेस-ए में पंजाब के पंकज पाल साहू ने 14.65 सेकेंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल किया। दिल्ली के शुभम रावत 14.77 सेकेंड के साथ दूसरे और बलराम शर्मा 14.85 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। राजस्थान के मुकुल 15.23 सेकेंड के साथ चौथे और उत्तर प्रदेश के शिवम सिंह 16.91 सेकेंड के साथ पांचवें स्थान पर रहे। अफसल कॉमनवेल्थ क्वालिफिकेशन से चूके पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले मोहम्मद अफसल कॉमनवेल्थ गेम्स का क्वालिफिकेशन मार्क हासिल नहीं कर सके। उन्होंने 1:47 मिनट का समय निकाला, जबकि ग्लासगो 2026 के लिए निर्धारित क्वालिफिकेशन मानक 1:45 मिनट था। सचिन यादव बाहर, रोहित-जेना पर नजर जैवलिन वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनलिस्ट सचिन यादव कोहनी की चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर रह सकते हैं। ऐसे में रोहित यादव, शिवम लोहाकरे और किशोर कुमार जेना पर नजरें रहेंगी, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहेंगे। वहीं दो बार के ओलिंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा भी पिछले साल लगी चोट से उबर रहे हैं और उनके कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। नीरज चोपड़ा का कॉमनवेल्थ गेम्स खेलना मुश्किल माना जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

खेल मंत्री रेखा आर्या का दावा:भविष्य में उत्तराखंड कर सकता है कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे खेलों की मेजबानी

खेल मंत्री रेखा आर्या का दावा:भविष्य में उत्तराखंड कर सकता है कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे खेलों की मेजबानी

उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को राजधानी देहरादून में दो बड़े खेल आयोजनों में शिरकत की। परेड ग्राउंड में उन्होंने जहां ‘उत्तराखंड सचिवालय बैडमिंटन क्लब’ की वार्षिक प्रतियोगिता का शुभारंभ किया, वहीं आमवाला में ‘7वीं राज्य स्तरीय पेंचक सिलाट चैंपियनशिप’ के समापन समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया। खेल मंत्री ने राज्य में खेलों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल ढांचा विकसित हुआ है, उसे देखते हुए हम आने वाले समय में कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे बड़े खेलों की मेजबानी की उम्मीद कर सकते हैं। संघर्ष और समर्पण सिखाते हैं खेल परेड ग्राउंड स्थित मल्टीपरपज हॉल में बैडमिंटन टूर्नामेंट का उद्घाटन करते हुए खेल मंत्री रेखा आर्या ने सचिवालय के कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि शनिवार और रविवार के अवकाश के दिन आयोजित यह प्रतियोगिता संदेश देती है कि काम के साथ-साथ शरीर के लिए खेल भी उतना ही जरूरी है। खेल हमें परिश्रम, संघर्ष और समर्पण जैसे अहम गुण सिखाता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियों आरक्षण और सीधी नौकरी के कारण आज युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं। इस अवसर पर क्लब अध्यक्ष हीरा सिंह बसेड़ा, महासचिव प्रमोद कुमार, प्रभारी जिला खेल अधिकारी रविंदर भंडारी, अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी पुनीता और संजय जोशी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। आत्मरक्षा और फिटनेस का शानदार जरिया आमवाला स्थित मल्टीपरपज हॉल में दो दिवसीय पेंचक सिलाट चैंपियनशिप के समापन अवसर पर खेल मंत्री ने विजेता खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर उनका हौसला बढ़ाया। इस प्रतियोगिता में राज्य के 8 जिलों से आए 250 से ज्यादा खिलाड़ियों ने अपना दमखम दिखाया। रेखा आर्या ने बताया कि यह खेल पहले उत्तराखंड की खेल नीति में शामिल नहीं था, लेकिन गोवा राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन और मेडल जीतने के बाद इसे तुरंत नीति का हिस्सा बनाया गया। पिछले एक साल में राज्य के खिलाड़ियों ने इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना लोहा मनवाया है। अभिभावकों की सोच में आया सकारात्मक बदलाव खेल मंत्री ने कहा कि पेंचक सिलाट युवाओं को अनुशासन सिखाता है और आत्मरक्षा का आत्मविश्वास देता है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि अब अभिभावक खुद अपने बच्चों को खेल में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह समाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव है। ऐसे में खिलाड़ियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरे उतरें।

जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर ने जीतकर मां को कहा-देखी मेरी रेस:पिता से बोला-डेडी दस्स फेर किदां, 12 साल से दौड़ना शुरू किया; नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया

जालंधर के गुरिंदर वीर सिंह ने रांची में भारतीय एथलेटिक्स का नया इतिहास लिख दिया है। 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में पंजाब के इस धावक ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.09 सेकंड में पूरी की। गुरिंदर वीर की उलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है। करीब 90 साल की दादी ने भी लड्डू खाकर पोते को आशीर्वाद दिया। गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने कहा कि जैसे ही बेटे ने रेस जीती तो उसके मोबाइल पर बधाइयों के फोन आना शुरू हो गए। फोन बिजी होने से बेटे से पहली बात उसकी मां की हुई। जब उसने मुझे फोन किया तो एक ही बात कही कि डेडी दस्स फेर किदां (अब बताओ कैसा लगा) गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने बताया कि रेस जीतने के बाद उसने पहला फोन मुझे किया और कहा कि मम्मी मेरी रेस देखी। मैंने कहा कि हां तूने कमाल कर दिया। रेस जीतने और रिकॉर्ड तोड़ने का पता लगने के बाद से गुरिंदर वीर के घर के बाहर लोगों की भीड़ लग गई। आस-पड़ोस के लोग घर के बाहर पहुंचे और परिवार को बधाई दी। पिता बोले-पहले ही रिकॉर्ड लिखा था, मुझे पता नहीं था नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदर वीर ने कॉमनवेल्थ गेम्ज में अपनी जगह पक्की कर ली। बिरसा मुंडा स्टेडियम में फाइनल दौड़ पूरी करते ही गुरिंदर ने अपनी छाती पर लगे नंबर (चेस्ट नंबर) की ओर इशारा किया। उन्होंने फाइनल से पहले ही उस नंबर के पीछे अपना लक्ष्य 10.10 लिख दिया था। इस बारे में पूछने पर उनके पिता ने कहा कि गुरिंदर ने पहले ही रिकॉर्ड का समय लिख रखा था, इसकी जानकारी उनको भी न्यूज के माध्यम से चली। इसके साथ ही उसने लिखा था- रुको, मैं अब भी खड़ा हूं। बता दें कि 100 मी. दौड़ का वर्ल्ड रिकॉर्ड (9.58 सेकंड) जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम है। मां बोलीं- मुझे गोल्ड की पक्की उम्मीद है मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। परमात्मा ने उस बच्चे को गुण बख्शा है। उसने पहले ही तय कर लिया था कि 10.10 सेंकेंड में रेस पूरी करनी है। उसने इस मुकाम के लिए बहुत मेहनत की है। वो रोज 8 घंटे प्रेक्टिस करता था। घर पर बात करने के लिए उसके पास वक्त नहीं मिलता था। उसने अपने शरीर को बहुत तोड़ा है। रेस जीतने के बाद पहले मुझसे बात कि और बोला कि मम्मा देखी है रेस। मैंने कहा कि हां देखी तूने आज खुश कर दिया है। परमात्मा इसी तरह मेहर रखेंगे तो कॉमनवेल्थ में भी गोल्ड आएगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है। वो एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करता है। 12 साल की उम्र में पिता के साथ रेस लगानी शुरू की गुरिंदर वीर के पिता कमलजीत सिंह ने बताया कि वह खुद भी वॉलीबाल के प्लेयर रहे हैं। वो तो इतना ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पाए लेकिन मन में एक सपना था कि बेटा स्पोर्ट्स में कुछ कर दिखाए। गुरिंदर वीर बचपन से उनके साथ दौड़ लगाने जाता था। 12 साल की उम्र में उसने ठीक से प्रेक्टिस शुरू की। छोटी उम्र में ही वो मुझे भी पीछे छोड़ देता था। दौड़ने में उसकी मेहनत और लगन देख उसे इसी स्पोर्ट्स में डाला।

खेल मंत्री रेखा आर्या बोलीं-:2036 के ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अभी से जुटें युवा, पदक लाने वालों को मिलेगी सरकारी नौकरी

खेल मंत्री रेखा आर्या बोलीं-:2036 के ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अभी से जुटें युवा, पदक लाने वालों को मिलेगी सरकारी नौकरी

उत्तराखंड अब अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी में है। प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ‘पदक लाओ, नौकरी पाओ’ की नीति पर मजबूती से काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही, अन्य सरकारी भर्तियों में भी खिलाड़ियों को 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। यह बातें खेल मंत्री ने बुधवार को देहरादून में आयोजित 87वीं अंतरराज्यीय जूनियर एवं युवा राष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। सरकारी नौकरी का रास्ता साफ मेडल जीतने वाले युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, सरकार उन्हें सीधे नियुक्तियां देगी। खेल कोटे के तहत 4% आरक्षण से प्रदेश के हजारों युवाओं को सरकारी सिस्टम का हिस्सा बनने में मदद मिलेगी। प्रदेश में खेल सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। 2036 ओलंपिक हमारा लक्ष्य खिलाड़ियों में जोश भरते हुए खेल मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत में कई बड़े खेल आयोजन होने हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अभी से राष्ट्रमंडल खेल और वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारी शुरू कर दें। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि जब ओलंपिक का मंच सजे, तो उत्तराखंड के खिलाड़ी तिरंगा लहराते हुए नजर आएं।” राष्ट्रीय खेलों से पहले उत्तराखंड में होंगे कई बड़े ट्रायल अगले वर्ष उत्तराखंड 39वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी करने जा रहा है। मंत्री ने बताया कि इन खेलों से पहले राज्य में विभिन्न खेलों की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा रही हैं। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के खिलाड़ियों को हाई-प्रोफाइल कॉम्पिटिशन का अनुभव देना है, ताकि वे नेशनल गेम्स में अधिक से अधिक पदक जीत सकें। विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित समारोह के अंत में मंत्री ने टेबल टेनिस प्रतियोगिता के विजेताओं को ट्रॉफी और मेडल देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस फेडरेशन के महासचिव एमपी सिंह, अध्यक्ष मेघा अहलावत, यतिन टिप्पणिस, राजू दुग्गल, प्रिंस वेपोन और केके शर्मा समेत कई खेल प्रेमी और पदाधिकारी मौजूद रहे।