Sunday, 09 Aug 2026 | 06:49 PM

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SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

New Online Gaming Rules Come into Effect Today; Gaming Certificates to Remain Valid for Up to 10 Years; Non-Money Games Now Exempt from Registration

New Online Gaming Rules Come into Effect Today; Gaming Certificates to Remain Valid for Up to 10 Years; Non-Money Games Now Exempt from Registration

Hindi News Business New Online Gaming Rules Come Into Effect Today; Gaming Certificates To Remain Valid For Up To 10 Years; Non Money Games Now Exempt From Registration नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में ऑनलाइन गेमिंग की इंडस्ट्री में आज से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026 शुक्रवार, 1 मई 2026 से लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन मनी गेमिंग से होने वाले वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकना और भारत को ग्लोबल गेमिंग हब बनाना है। ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन, विज्ञापन भी नहीं कर पाएंगे नए नियमों के तहत सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। इसमें किस्मत पर आधारित (चांस) और कौशल पर आधारित (स्किल) दोनों तरह के गेम्स शामिल हैं, जिनमें पैसे का दांव लगाया जाता है। अब इन गेम्स का विज्ञापन या प्रमोशन करना भी गैरकानूनी होगा। बैंकों और पेमेंट गेटवे को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे प्लेटफॉर्म्स के ट्रांजैक्शन प्रोसेस न करें। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और 5 साल तक की जेल सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है। ऑनलाइन मनी गेम ऑफर करने पर 3 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर जेल की अवधि 5 साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना 2 करोड़ रुपए तक लग सकता है। इन गेम्स का विज्ञापन करने पर भी 2 साल की जेल या 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। 45 करोड़ लोग प्रभावित, 20 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ा है और 2024 में यह 232 अरब रुपए यानी 23,200 करोड़ रुपए का था। डेटा के मुताबिक, देश के लगभग 45 करोड़ लोग मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स से प्रभावित हुए हैं, जिसमें लोगों को 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसी को देखते हुए सरकार ने ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स (मनोरंजन वाले खेल) को बढ़ावा देने और मनी गेम्स को खत्म करने का फैसला लिया है। अब ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया रखेगी नजर नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) का गठन किया गया है। डिजिटल ऑफिस: ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का ऑफिस दिल्ली में होगा, यह एक डिजिटल-फर्स्ट रेगुलेटर है। डिसिजन मेकिंग प्रोसेस: यह अथॉरिटी 90 दिनों के भीतर तय करेगी कि कोई गेम ‘मनी गेम’ की कैटेगरी में है या वह ‘ई-स्पोर्ट्स’ के रूप में सुरक्षित है। रजिस्ट्रेशन: ई-स्पोर्ट्स के लिए अब 10 साल तक का डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। पहले सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 साल रहती थी। शिकायत निवारण: यूजर्स की शिकायतों के लिए दो-स्तरीय सिस्टम होगा। अगर कंपनी समाधान नहीं करती, तो यूजर अथॉरिटी के पास अपील कर सकेंगे। युवाओं की सुरक्षा के लिए एज गेटिंग और पेरेंटल कंट्रोल डिजिटल माहौल को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियों को अब कई सेफ्टी फीचर्स देने होंगे। इनमें उम्र का वेरिफिकेशन, समय की पाबंदी और माता-पिता के लिए कंट्रोल टूल्स (पेरेंटल कंट्रोल) शामिल हैं। इससे युवाओं को लत और मानसिक तनाव से बचाने में मदद मिलेगी। गेम्स का क्लासिफिकेशन तीन तरीके से होगा गेम्स को किस कैटेगरी में रखा जाए, इसके लिए अथॉरिटी ने तीन रास्ते तय किए हैं… सुओ मोटो: अथॉरिटी खुद किसी गेम का रिव्यू कर उसे क्लासिफाई कर सकती है। ई-स्पोर्ट्स बॉडीज: ई-स्पोर्ट्स से जुड़ी इंस्टीट्यूशंस खुद आवेदन कर सकती हैं। केंद्र सरकार: सरकार स्पेसिफिक सोशल गेम्स को नोटिफाई कर सकती है। किसी भी गेम के क्लासिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है। अब हर गेम के लिए मैंडेटरी डिटरमिनेशन की जरूरत नहीं होगी। यूजर सेफ्टी के लिए टू-टियर सिस्टम सरकार ने गेम खेलने वालों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के निपटारे के लिए टू-टियर ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को डेटा रिटेंशन (डेटा संभाल कर रखना) और समय-समय पर कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। गृह मंत्रालय को भी इस अथॉरिटी का हिस्सा बनाया गया है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले गेम्स को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई की जा सके। प्रमोशन और रिफंड के नियमों में बदलाव नई गाइडलाइंस से गेम प्रमोशन से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं के हिसाब से प्रमोशन स्कीम डिजाइन कर सकेंगे। मटेरियल चेंज के कॉन्सेप्ट को भी हटा दिया है, ताकि कंपनियों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति न बने। रिफंड से जुड़े नियमों को भी हटाया गया है, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस समस्या का समाधान पहले ही हो चुका है। भविष्य की राह, डिजिटल इकोनॉमी और नए रोजगार सरकार का मानना है कि इन नियमों से भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। ई-स्पोर्ट्स और सुरक्षित सोशल गेम्स के बढ़ने से डिजाइन, टेक्नोलॉजी और कंटेंट क्रिएशन के सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 2027 तक इस सेक्टर के 316 अरब रुपए यानी 31,600 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। 2,500 स्टेकहोल्डर्स से ली गई राय इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने इंडस्ट्री बॉडीज, कानून की जानकारी रखने वाली फर्म्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स सहित करीब 2,500 लोगों से सुझाव लिए थे। स्टेकहोल्डर्स ने गेमिंग की परिभाषा को स्पष्ट करने और अथॉरिटी के स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की सलाह दी थी, जिन्हें नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है। क्या है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया? ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) एक छह सदस्यीय टीम होगी। इसमें आईटी मंत्रालय के अलावा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसका मुख्य काम भारत में चल रहे गेम्स की निगरानी करना, उनके क्लासिफिकेशन को तय करना और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ई-स्पोर्ट्स क्या है? यह एक कॉम्पिटिटिव डिजिटल स्पोर्ट्स है जिसमें टीम वर्क और स्किल की जरूरत होती है। इसे अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत पहचान मिल सकती है। क्या करें अगर कोई प्लेटफॉर्म पैसा मांगे? ऐसे प्लेटफॉर्म्स की शिकायत तुरंत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी’ या साइबर सेल में करें, क्योंकि

ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट

ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट

केंद्र सरकार ने देश में ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) के गठन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन एक्ट-2025 के तहत 1 मई से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगी। नए नियमों के तहत गेमिंग कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए सर्टिफिकेट की वैलिडिटी को दोगुना कर दिया गया है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि सरकार ने गेमिंग इंडस्ट्री के लिए लाइट-टच रेगुलेटरी अप्रोच अपनाई है, ताकि स्टार्टअप्स और डेवलपर्स पर बेवजह का बोझ न पड़े। सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 से बढ़कर 10 साल हुई नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव ऑनलाइन गेम्स के सर्टिफिकेशन को लेकर किया गया है। अब किसी भी गेम को मिलने वाले सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 साल के बजाय 10 साल होगी। इससे गेम डेवलपर्स को बार-बार रिन्यूअल की प्रोसेस से नहीं गुजरना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं आईटी सचिव के मुताबिक, जिन गेम्स में असली पैसों का लेन-देन शामिल नहीं है, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं होगा। एस. कृष्णन ने कहा कि ज्यादातर नॉन-रियल मनी गेम्स बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल सकते हैं। उनके लिए यह प्रोसेस पूरी तरह ऑप्शनल रखी गई है। हालांकि, जो गेम्स बड़े लेवल पर खेले जाते हैं या जिनमें फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन होते हैं, उन्हें नोटिफाई होने पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। गेम्स का क्लासिफिकेशन तीन तरीके से होगा गेम्स को किस कैटेगरी में रखा जाए, इसके लिए अथॉरिटी ने तीन रास्ते तय किए हैं… किसी भी गेम के क्लासिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है। अब हर गेम के लिए मैंडेटरी डिटरमिनेशन की जरूरत नहीं होगी। यूजर सेफ्टी के लिए टू-टियर सिस्टम प्रमोशन और रिफंड के नियमों में बदलाव आईटी सचिव ने जानकारी दी कि नई गाइडलाइंस से गेम प्रमोशन से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं के हिसाब से प्रमोशन स्कीम डिजाइन कर सकेंगे। मटेरियल चेंज के कॉन्सेप्ट को भी हटा दिया है, ताकि कंपनियों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति न बने। रिफंड से जुड़े नियमों को भी हटाया गया है, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस समस्या का समाधान पहले ही हो चुका है। 2,500 स्टेकहोल्डर्स से ली गई राय इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने इंडस्ट्री बॉडीज, कानून की जानकारी रखने वाली फर्म्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स सहित करीब 2,500 लोगों से सुझाव लिए थे। स्टेकहोल्डर्स ने गेमिंग की परिभाषा को स्पष्ट करने और अथॉरिटी के स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की सलाह दी थी, जिन्हें नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है। क्या है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया? ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) एक छह सदस्यीय टीम होगी। इसमें आईटी मंत्रालय के अलावा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसका मुख्य काम भारत में चल रहे गेम्स की निगरानी करना, उनके क्लासिफिकेशन को तय करना और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऑनलाइन गेमिंग: पुराने VS नए नियम ये खबर भी पढ़ें… सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। पूरी खबर पढ़ें…

ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट

ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम 1-मई से लागू होंगे:गेमिंग-सर्टिफिकेट अब 10 साल तक वैलिड रहेगा; बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन से छूट

केंद्र सरकार ने देश में ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) के गठन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन एक्ट-2025 के तहत 1 मई से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगी। नए नियमों के तहत गेमिंग कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए सर्टिफिकेट की वैलिडिटी को दोगुना कर दिया गया है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि सरकार ने गेमिंग इंडस्ट्री के लिए लाइट-टच रेगुलेटरी अप्रोच अपनाई है, ताकि स्टार्टअप्स और डेवलपर्स पर बेवजह का बोझ न पड़े। सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 से बढ़कर 10 साल हुई नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव ऑनलाइन गेम्स के सर्टिफिकेशन को लेकर किया गया है। अब किसी भी गेम को मिलने वाले सर्टिफिकेट की वैलिडिटी 5 साल के बजाय 10 साल होगी। इससे गेम डेवलपर्स को बार-बार रिन्यूअल की प्रोसेस से नहीं गुजरना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। बिना पैसे वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं आईटी सचिव के मुताबिक, जिन गेम्स में असली पैसों का लेन-देन शामिल नहीं है, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं होगा। एस. कृष्णन ने कहा कि ज्यादातर नॉन-रियल मनी गेम्स बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल सकते हैं। उनके लिए यह प्रोसेस पूरी तरह ऑप्शनल रखी गई है। हालांकि, जो गेम्स बड़े लेवल पर खेले जाते हैं या जिनमें फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन होते हैं, उन्हें नोटिफाई होने पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। गेम्स का क्लासिफिकेशन तीन तरीके से होगा गेम्स को किस कैटेगरी में रखा जाए, इसके लिए अथॉरिटी ने तीन रास्ते तय किए हैं… किसी भी गेम के क्लासिफिकेशन की प्रोसेस को पूरा करने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई है। अब हर गेम के लिए मैंडेटरी डिटरमिनेशन की जरूरत नहीं होगी। यूजर सेफ्टी के लिए टू-टियर सिस्टम प्रमोशन और रिफंड के नियमों में बदलाव आईटी सचिव ने जानकारी दी कि नई गाइडलाइंस से गेम प्रमोशन से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं। अब अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं के हिसाब से प्रमोशन स्कीम डिजाइन कर सकेंगे। मटेरियल चेंज के कॉन्सेप्ट को भी हटा दिया है, ताकि कंपनियों और सरकार के बीच विवाद की स्थिति न बने। रिफंड से जुड़े नियमों को भी हटाया गया है, क्योंकि सरकार का मानना है कि इस समस्या का समाधान पहले ही हो चुका है। 2,500 स्टेकहोल्डर्स से ली गई राय इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने इंडस्ट्री बॉडीज, कानून की जानकारी रखने वाली फर्म्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स सहित करीब 2,500 लोगों से सुझाव लिए थे। स्टेकहोल्डर्स ने गेमिंग की परिभाषा को स्पष्ट करने और अथॉरिटी के स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की सलाह दी थी, जिन्हें नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है। क्या है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया? ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI) एक छह सदस्यीय टीम होगी। इसमें आईटी मंत्रालय के अलावा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसका मुख्य काम भारत में चल रहे गेम्स की निगरानी करना, उनके क्लासिफिकेशन को तय करना और यूजर्स की प्राइवेसी व सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ये खबर भी पढ़ें… सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। पूरी खबर पढ़ें…