Tuesday, 15 Sep 2026 | 09:16 AM

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एडोबी के CEO शांतनु नारायण 18 साल बाद पद छोड़ेंगे:नए CEO की तलाश कर रही कंपनी; AI युग में एडोबी को ग्लोबल लीडर बनाया

एडोबी के CEO शांतनु नारायण 18 साल बाद पद छोड़ेंगे:नए CEO की तलाश कर रही कंपनी; AI युग में एडोबी को ग्लोबल लीडर बनाया

भारतीय मूल के शांतनु नारायण एडोबी के CEO का पद छोड़ रहे हैं। वे पिछले 18 साल से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। शांतनु ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इसकी जानकारी दी है। हालांकि, वे तुरंत पद नहीं छोड़ेंगे। जब तक बोर्ड उनके उत्तराधिकारी की तलाश पूरी नहीं कर लेता, वे CEO बने रहेंगे। इसके बाद वे बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे। 18 साल में कंपनी का रेवेन्यू ₹2.31 लाख करोड़ पहुंचाया शांतनु नारायण ने 2007 में एडोबी की कमान संभाली थी। उस समय एडोबी मुख्य रूप से बॉक्स में पैक सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप और एक्रोबैट बेचने वाली कंपनी थी। तब कंपनी का रेवेन्यू 1 अरब डॉलर (करीब 9,200 करोड़ रुपए) से कम था और सिर्फ 3,000 कर्मचारी थे। शांतनु ने कंपनी को ट्रेडिशनल लाइसेंस मॉडल से हटाकर ‘सब्सक्रिप्शन फर्स्ट’ मॉडल पर शिफ्ट किया। पहले लोग फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर की CD या लाइसेंस एक बार भारी पैसा देकर खरीदते थे। शांतनु ने इसे बदलकर नेटफ्लिक्स जैसा बना दिया। यानी अब आपको सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के लिए हर महीने या साल के हिसाब से फीस देनी होती है। इसी छोटे से बदलाव ने कंपनी की कमाई कई गुना बढ़ा दी। आज एडोबी का सालाना रेवेन्यू करीब 2.31 लाख करोड़ रुपए है और कंपनी में 30,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। उनके कार्यकाल में कंपनी के शेयरों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। AI प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू 3 गुना बढ़ा, तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में एडोबी का रेवेन्यू 12% बढ़कर 6.40 अरब डॉलर रहा, जो बाजार के अनुमान 6.28 अरब डॉलर से ज्यादा है। खास बात यह है कि कंपनी के AI-बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे फायरफ्लाई से होने वाली कमाई पिछले साल के मुकाबले 3 गुना बढ़ गई है। कंपनी के कुल मंथली यूजर्स की संख्या भी 17% बढ़कर 85 करोड़ पहुंच गई है। यह शांतनु के कार्यकाल की 100वीं अर्निंग्स कॉल थी। बोर्ड ने नए CEO की तलाश शुरू की कंपनी के बोर्ड ने नए CEO की तलाश के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता इंडिपेंडेंट डायरेक्टर फ्रैंक कालडेरोनी करेंगे। नारायण ने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि मैं अगले CEO के लिए उसी तरह सपोर्ट सिस्टम बनाऊंगा, जैसे मुझसे पहले जॉन और चक ने मेरे लिए बनाया था। फिगमा डील टूटने का लगा था झटका, AI से बढ़ी चुनौती शांतनु के सफर में कुछ चुनौतियां भी रहीं। एडोबी ने डिजाइन टूल ‘फिगमा’ को 20 अरब डॉलर में खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन रेगुलेटरी अड़चनों की वजह से यह डील रद्द हो गई। इसके अलावा 2026 में एडोबी के शेयरों पर दबाव बना हुआ है और यह करीब 23% तक गिर चुका है। निवेशकों को डर है कि ‘जेनरेटिव AI’ आने वाले समय में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के पारंपरिक मॉडल को बदल सकता है, जिससे एडोबी जैसी कंपनियों के सामने कड़ी टक्कर होगी। शांतनु बोले- एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं नारायण ने अपने मेमो में एडोबी के साथ अपने 28 साल के सफर को याद किया। उन्होंने लिखा, “जब मैं यहां आया था, तब वर्क कल्चर और इनोवेशन की चाह ने मुझे प्रभावित किया था। हमने मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जिसने अरबों लोगों की जिंदगी छुई। AI के दौर में हमारे सामने और भी बड़े अवसर हैं। एडोबी के सबसे अच्छे दिन आने अभी बाकी हैं।”

दूसरा वनडे- पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 128 रन से हराया:सदाकत की फिफ्टी, 3 विकेट भी झटके; सलमान के रनआउट पर विवाद

दूसरा वनडे- पाकिस्तान ने बांग्लादेश को 128 रन से हराया:सदाकत की फिफ्टी, 3 विकेट भी झटके; सलमान के रनआउट पर विवाद

पाकिस्तान ने वनडे सीरीज के दूसरे मैच में बांग्लादेश को 128 रन से हराया दिया है। इस जीत से टीम ने 3 मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली है। तीसरा और निर्णायक मुकाबला 15 मार्च को मीरपुर में खेला जाएगा। ढाका के शेर-ए-बांग्ला क्रिकेट स्टेडियम में मेजबान टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला लिया। पाकिस्तानी टीम 47.3 ओवर में 274 रन पर ऑलआउट हो गई और मेजबान टीम को 275 रन का टारगेट दिया। इसे बांग्लादेश की पारी के दौरान बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा। ऐसे में टारगेट को रिवाइज करके 243 रन कर दिया गया। इसे चेज करते हुए बांग्लादेशी टीम 23.3 ओवर में 114 रन पर ऑलआउट हो गई। प्लेयर ऑफ द मैच सदाकत माज ने दोहरा प्रदर्शन किया। उन्होंने 46 बॉल पर 75 रनों की पारी खेली। इतना ही नहीं, 3 विकेट भी झटके। पाकिस्तान के सलमान अली आगा ने 62 बॉल पर 64 रन बनाए। उन्हें मेहदी हसन मिराज ने रनआउट कर दिया। इस रनआउट पर विवाद खड़ा हो गया। मैच के 2 मोमेंट्स 1. सलमान आगा का विवादित रनआउट 39वें ओवर में पाकिस्तान ने सलमान अली आगा का विकेट गंवाया। यहां पर मेहदी हसन मिराज की चौथी बॉल को रिजवान ने डिफेंड किया। गेंद लुढ़कते हुए नॉन-स्ट्राइकर पर खड़े सलमान की ओर गई। वे क्रीज से बाहर थे। मिराज गेंद की तरफ दौड़े, जिसे आगा ने रोक लिया। इससे पहले कि आगा झुककर गेंद उठाते, मिराज ने गेंद उठा ली और उसे स्टंप्स पर मार दी। यहां सलमान के पास क्रीज तक पहुंचने का मौका नहीं था, क्योंकि मेहदी सामने खड़े थे। इस तरह आउट होने से आगा नाखुश दिखे। उन्होंने मैदान से लौटते हुए ग्लव्स और हेलमेट उतार कर फेंक दी। 2. तलत हुसैन के कंधे पर चोट लगी बांग्लादेश की पारी के 7वें ओवर की तीसरी बॉल पर एक बाउंड्री रोकने के प्रयास में हुसैन तलत चोटिल हो गए। उनका बायां कंधा डिसलोकेट हो गया। उन्हें स्ट्रेचर के जरिए मैदान से बाहर ले जाया गया। खबर लिखे जाने तक उनकी चोट पर PCB की ओर से कोई अपडेट नहीं आया है। मैच रिपोर्ट… पाकिस्तानी ओपनर्स की मजबूत शुरुआत, सदाकत की फिफ्टी टॉस हारकर बल्लेबाजी कर रही पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी रही। टीम ने पहले पावरप्ले में बगैर विकेट गंवाए 85 रन बनाए। सदाकत माज ने 9वें ओवर में नाहिद राणा की दूसरी बॉल पर चौका लगाकर फिफ्टी पूरी की। उन्होंने साहिबजादा फरहान के साथ 103 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की। माज को मेहदी हसन मिराज ने कैच आउट कराया और ओपनिंग पार्टनरशिप ब्रेक की। फरहान और शमील आउट, सलमान ने पारी संभाली 103 रन पर पहला विकेट गंवाने वाली पाकिस्तान ने 121 पर दूसरा और 122 रन पर दूसरा विकेट गंवाया। यहां पर फरहान 31 और शमील 6 रन बनाकर आउट हुए। एक समय टीम का स्कोर 122/3 हो गया था। यहां से मोहम्मद रिजवान और सलमान अली आगा ने चौथे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी करके पाकिस्तानी टीम की वापसी कराई। लेकिन, सलमान 64 रन के स्कोर पर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रनआउट होने से यह साझेदारी टूट गई। बांग्लादेश की ओर से रिशाद हुसैन ने 3 विकेट झटके। मेहदी हसन मिराज को दो विकेट मिले। तस्कीन अहमद, मुस्तफिजुर रहमान ओर नाहिद राणा ने भी एक-एक विकेट हासिल किए। बांग्लादेश की खराब बल्लेबाजी, कोई बैटर फिफ्टी नहीं 243 रन के संशोधित लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की शुरुआत खराब रही। टीम ने शुरुआती 15 रन बनाने 3 विकेट गंवा दिए थे। तंजीद हसन ने एक रन, सैफ हसन ने 12 और नजमुल हसन शांतो ने 12 रन बनाए। विकेटकीपर लिटन दास (41 रन) और तौहीद ह्रिदॉय (28 रन) ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन इनके आउट होने के बाद बांग्लादेश को ऑलआउट होने में टाइम नहीं लगा। पाकिस्तान की ओर से हारिस रऊफ और सदाकत माज ने 3-3 विकेट झटके। शाहीन अफरीदी ने 2 विकेट लिए। मोहम्मद वसीम और फहीम अशरफ को एक-एक विकेट मिला। —————————– क्रिकेट की यह खबर भी पढ़िए… भारतीय फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तानी क्रिकेटर खरीदा भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने गुरुवार को पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद पर बोली लगाई। सनराइजर्स की CEO काव्या मारन ने खुद उन्हें 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपए) में खरीदा। इसी के साथ अबरार 21 जुलाई से शुरू हो रही द हंड्रेड लीग में किसी भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी से जुड़ने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी बन गए। पढ़ें पूरी खबर

केले को लंबे समय तक ताजा कैसे रखें: गर्मियों में केले 1-2 दिन में ही हो जाते हैं खराब? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स, छोटे-छोटे रेस्तरां तक

केले भंडारण युक्तियाँ

केले भंडारण युक्तियाँ | छवि: फ्रीपिक केले को लंबे समय तक ताज़ा कैसे रखें: केला एक ऐसा फल है जो लगभग हर घर में खा जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बहुत जल्दी पककर काला पड़ जाता है। अक्सर देखा जाता है कि 1 से 2 दिन में ही मशालेदार गोलियां लग जाती हैं। कई लोग इसी कारण से कम मात्रा में केले दिशानिर्देश रखते हैं। हालाँकि कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर केले को लंबे समय तक ताज़ा और ताज़ा रखा जा सकता है। सही तरीके से स्टोर करने पर कई दिन तक खराब नहीं होता और उनका स्वाद भी बना रहता है। आइये आपको बताते हैं इन ट्रिक्स के बारे में… केले एनिमेटेड समय इस बात का ध्यान जब भी केले चालू हो तो कोशिश करें कि सभी केले एक जैसे हों। कुछ केले पूरी तरह से बताए गए लेंथ जिसमें तत्काल कहानी जा सके, जबकि कुछ अनकहे या कम रिकॉर्ड वाले केले लें। इससे केले धीरे-धीरे पकेंगे और लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। केलों को गुच्छे से अलग करके बताएं केले को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए उन्हें गुच्छे से अलग कर देना एक अच्छा तरीका माना जाता है। जब केले एक साथ गुच्छे में रहते हैं तो वे तेजी से मंदिर बनाते हैं। ऐसे में उन्हें अलग-अलग भंडारों से लेकर मसालों की प्रक्रिया तक में बदल दिया जाता है और वे ज्यादातर समय तक समुद्री किनारे तक रहते हैं। आराम करो केले के चॉकलेट से एथिलीन गैस गायब हो जाती है, जो फल को मसाले में तेजी से मदद करता है। यदि केले के प्लास्टर को पॉलिथिन या क्लिंग रैप से अच्छी तरह लपेट दिया जाए तो एथि गैस का असर कम हो जाता है। इससे केले जल्दी काले नहीं नाटकीय और ज्यादातर समय तक सेफ और ताज़ा रहते हैं। अन्य फलों से अलग जगह केले केले को कभी भी सेब की तरह फलों के साथ नहीं रखना चाहिए। कई फल एथिलीन गैस पेट्रोलियम हैं, जिनके आस-पास फल रैपिड से ज्वालामुखी बने हुए हैं। ऐसे में केले को अलग-अलग टोकरी या फल रखने की जगह पर रखना बेहतर होता है। इससे उनके जल्दी खराब होने की संभावना कम हो जाती है। केला हैंगर का भी उपयोग किया जा सकता है आजकल बाजार में केले रखने के लिए खास तरह के के हैंगर भी मिलते हैं। इन्हें केले टांगकर रखने से उन पर दबाव नहीं पड़ता और वे जल्दी खराब नहीं होते। इस तरीके से केले कई दिनों तक समुद्र तट बने रह सकते हैं। विटामिन सी का उपयोग कर सकते हैं केलॉन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विटामिन सी की टैबलेट का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके लिए विटामिन सी की गोली को पानी में घोल लें और उस पानी से केले को दांतों से धो लें। इससे केले अर्ली ब्लैक नॉट प्रोजेक्टर हैं और उनकी ताजगी लंबे समय तक बनी हुई है। केलों को सही टेंपरेचर में पोस्ट करें केलों को गलने से बचने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा गर्म जगह पर नहीं रखना चाहिए। साथ ही उन्हें फ़र्ज़ी में रखने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे उनका छिलका जल्दी काला पड़ सकता है। केले को हमेशा नॉमिनेट रूम का तापमान बेहतर बना रहता है। छात्र तो उन्हें वैक्स पेपर से स्नातक करके भी रखा जा सकता है ताकि वे अधिक से अधिक समय तक सुरक्षित रहें। यह भी पढ़ें: अहान-अनीत ‘सैयारा’ के बाद अनीत पड्डा और अहान पैज ने फिर से हाथ मिलाया (टैग्सटूट्रांसलेट)केले भंडारण युक्तियाँ(टी)केले को लंबे समय तक ताजा कैसे रखें(टी)केले को काला होने से रोकें(टी)केले रसोई हैक(टी)केले संरक्षण युक्तियाँ(टी)घर पर केले भंडारण(टी)फल भंडारण युक्तियाँ(टी)केले को हफ्तों तक ताजा रखें

दिल्ली में युवक की हत्या पर एमपी में विरोध:धार में समाज जन बोले- दोषियों को फांसी दी जाए, परिवार को मिले मुआवजा

दिल्ली में युवक की हत्या पर एमपी में विरोध:धार में समाज जन बोले- दोषियों को फांसी दी जाए, परिवार को मिले मुआवजा

दिल्ली के उत्तमनगर में होली के दिन दलित युवक तरुण खटीक की हत्या के विरोध में धार में प्रदर्शन किया गया। क्षत्रिय मालवा खटीक सेना धार के नेतृत्व में समाज के लोगों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर आशा परमार को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। समाजजनों ने बताया कि होली जैसे पावन पर्व पर हुई इस घटना से समाज में चिंता का माहौल है। समाजजनों ने मांग की कि इस हत्या के सभी दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कठोरतम दंड, यानी फांसी की सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर एक करोड़ रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई। यह मांग परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से की गई है। ज्ञापन में दोषियों की अवैध संपत्तियों और घरों पर बुलडोजर चलाने की भी मांग शामिल थी। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से इस गंभीर घटना का संज्ञान लेने और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के लोग और विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।

विजय के लिए गणना का क्षण यहां है: एनडीए के लिए या अपने रास्ते पर जाएं? | राजनीति समाचार

Nahid Rana bowls a delivery to Pakistan's Saad Masood (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:मार्च 13, 2026, 17:26 IST जैसे-जैसे तमिलनाडु चुनाव नजदीक आ रहा है, विजय को एनडीए खेमे में शामिल होने के लिए कई तरह से प्रेरित किया जा रहा है खंडित गढ़ों के राजनीतिक परिदृश्य में, कोई भी पार्टी विजय जैसी ताकत को पसंद करेगी। (फोटो क्रेडिट: एक्स) अभिनेता से राजनेता बने कुछ ही लोगों को इतने बड़े संकटों का सामना करना पड़ा है जितना अभिनेता विजय को एक राजनेता के रूप में झेलना पड़ा है। हालाँकि इनमें से बहुत से, यदि अधिकांश नहीं, तो संकट उनके ही दरवाजे पर रखे जा सकते हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि वह क्षेत्रीय और राष्ट्रीय, समान रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि गलतियाँ, या गलतियाँ, राजनीतिक लाभ उठाने के लिए की जा रही हैं, चाहे वह करूर त्रासदी हो या उनका अपना हालिया निजी संकट। हाल ही में, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, विजय को एनडीए खेमे में शामिल होने के लिए कई तरह से प्रेरित किया जा रहा है। तमिलनाडु में उनकी अद्वितीय राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है। एक तरफ डीएमके है, जिसमें कांग्रेस, वामपंथी संगठन, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), दिवंगत अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके और वाइको की एमडीएमके शामिल हैं। यह एक विजयी संयोजन है जिसने एक सफल भाजपा विरोधी कहानी के साथ एक मजबूत मोर्चा खड़ा किया है। दूसरी तरफ एनडीए है, जिसमें एआईएडीएमके, पीएमके (अंबुमणि रामदास के नेतृत्व में) और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। खंडित गढ़ों के राजनीतिक परिदृश्य में, कोई भी पार्टी विजय जैसी ताकत को पसंद करेगी। यहां एक ऐसा अभिनेता है जिसकी उपस्थिति मात्र से हजारों की भीड़ उमड़ पड़ती है, इस हद तक कि उसे परेशान प्रशंसकों से अपने काफिले का पीछा न करने के लिए अनुरोध करना पड़ता है। क्या विजय को असमंजस में अपना सिर छिपा लेना चाहिए, उसे इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। 2000 के दशक के मध्य में अभिनेता विजयकांत की प्रसिद्ध प्रविष्टि निश्चित रूप से विजय की वर्तमान स्थिति से तुलनीय है, हालांकि काफी भिन्न भी है। जबकि उनके पास एक शक्तिशाली अनुयायी थे, उनके शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी भी थे: एम करुणानिधि और जे जयललिता अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव के चरम पर थे। हालाँकि विजय के पास दोनों के बराबर नहीं है, फिर भी उन्हें दिल्ली में एक सर्वशक्तिमान एनडीए का सामना करना पड़ता है। क्या उन्हें अकेले चुनाव लड़ना चाहिए, यह उनकी व्यक्तिगत क्षमता की कड़ी परीक्षा होगी। इससे यह संकेत भी जाएगा कि वह दबाव के आगे नहीं झुकते। इससे स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों को यह संकेत मिलेगा कि वह लंबी अवधि का खेल खेलकर अपना रास्ता अलग कर रहे हैं। क्या उन्हें इस बारे में अनिश्चित होना चाहिए कि एनडीए के बाद उनका राजनीतिक कद कैसा होगा, उनके पास संदर्भ लेने के लिए कमल हासन हैं। अभिनेता से नेता बने अभिनेता ने मजबूत शुरुआत की और अपने पहले चुनाव में 3% से अधिक की बढ़त हासिल की, लेकिन जल्द ही, उनकी राजनीतिक ताकत खत्म हो गई और डीएमके के साथ साझेदारी ने उनकी पार्टी को इसके साथ जोड़ दिया। विजय खुद को एक दुर्लभ प्रकार के चौराहे पर पाता है। एक तरफ, राजनीतिक गठबंधन की संभावना है – आरामदायक भोजन के बराबर (उनके साक्षात्कारों से, मटन बिरयानी)। दूसरी तरफ एक कड़वी गोली है. उनका चयन राजनीति को लेकर उनके दिल में कितनी गंभीरता है, यह प्रतिबिंबित करेगा। पहले प्रकाशित: मार्च 13, 2026, 17:26 IST समाचार राजनीति विजय के लिए गणना का क्षण यहां है: एनडीए के लिए या अपने रास्ते पर जाएं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु(टी)विजय(टी)एनडीए(टी)डीएमके(टी)चेन्नई अनफ़िल्टर्ड

Indian Womens Cricket Craze Doubles Participation

Indian Womens Cricket Craze Doubles Participation

स्पोर्ट्स डेस्क28 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत ने 2 नवंबर को साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराते हुए विमेंस वर्ल्डकप जीत था। वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ भारतीय विमेंस कप्तान हरमनप्रीत कौर। भारत में महिलाओं के बीच क्रिकेट खेलने की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक नए सर्वे के मुताबिक 2020 के बाद से 14 राज्यों में महिलाओं की भागीदारी दोगुनी हो गई है। बीबीसी और कलेक्टिव न्यूजरूम की ओर से कराए गए इस सर्वे में 10 हजार से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि 2020 में जहां सिर्फ 5% महिलाओं ने क्रिकेट खेलने की बात कही थी, अब यह आंकड़ा बढ़कर 10% हो गया है। क्रिकेट को करियर चुन रहीं युवा महिलाओं में बढ़ोतरी और तेज है। 15 से 24 साल की 16% लड़कियां क्रिकेट खेलती हैं, जबकि 2020 में यह आंकड़ा 6% था। इसी उम्र वर्ग की हर चार में से एक लड़की ने खेल को करियर विकल्प के रूप में सोचने की बात भी कही है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने प्रभाव छोड़ा रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हाल की सफलताओं का भी असर दिख रहा है। टीम ने हाल ही में अपना पहला वनडे वर्ल्ड कप जीता और ऑस्ट्रेलिया को तीन मैच की टी-20 सीरीज में हराया। सर्वे में यह भी सामने आया कि महिलाओं के बीच क्रिकेट अब पारंपरिक खेल कबड्डी से काफी आगे निकल गया है। 2020 में दोनों खेलों के बीच अंतर कम था, लेकिन अब क्रिकेट आगे है। यूपी में 10% महिलाएं क्रिकेट खेल रहीं ज्यादातर राज्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। उत्तर प्रदेश में तो यह आंकड़ा 1% से बढ़कर 10% तक पहुंच गया है। साथ ही पुरुष और महिला खिलाड़ियों के बीच का अंतर भी कम हुआ है। अब हर एक महिला खिलाड़ी पर तीन पुरुष खिलाड़ी हैं, जबकि 2020 में यह अनुपात एक के मुकाबले पांच था। करियर के रूप में खेल को देखने वाली 15-24 उम्र की 26% लड़कियां हैं, जो 2020 में 16% थीं। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 27%, मध्य प्रदेश और मेघालय में 19-19% दर्ज किया गया। पंजाब में बैडमिंटन में महिलाएं आगे सर्वे में यह भी बताया गया कि बैडमिंटन में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, खासकर पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अब भी एक बड़ी बाधा हैं। जो महिलाएं कोई खेल नहीं खेलतीं, उनमें से 13% ने सुरक्षा को वजह बताया। भारतीय विमेंस ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता भारत ने 2 नवंबर को साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराते हुए विमेंस वर्ल्डकप में अपना पहला टाइटल जीता था। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वालीं दीप्ति शर्मा को प्लयेर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ भारतीय महिला टीम। ————————- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अब नेट्स शेयर नहीं कर सकेंगी IPL टीमें, BCCI ने प्रैक्टिस सेशन की गाइडलाइन जारी की BCCI ने IPL टीमों के प्रैक्टिस सेशन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की हैं। इसके अनुसार कोई भी टीम उस नेट या पिच पर प्रैक्टिस नहीं कर सकेगी, जिस पर दूसरी टीम पहले अभ्यास कर चुकी हो। हर टीम को अभ्यास के लिए अलग और नए नेट उपलब्ध कराए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रियल एस्टेट- छोटे शहरों में प्रॉपर्टी नया सोना:बुनियादी ढांचे पर निवेश; 2-4 साल में 100% तक बढ़ सकते हैं दाम, इंदौर-जयपुर नए हॉटस्पॉट

रियल एस्टेट- छोटे शहरों में प्रॉपर्टी नया सोना:बुनियादी ढांचे पर निवेश; 2-4 साल में 100% तक बढ़ सकते हैं दाम, इंदौर-जयपुर नए हॉटस्पॉट

अगर आप जमीन-जायदाद में निवेश की सोच रहे हैं तो जल्द फैसला करना फायदेमंद हो सकता है। इंदौर, भोपाल, जयपुर, पटना, रांची और लुधियाना जैसे टियर-2,3 शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 4 साल में इन शहरों में प्लॉट के दाम 25% से लेकर 100% तक बढ़ सकते हैं। स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ₹12.2 लाख करोड़ के सरकारी पूंजी निवेश, नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और रोजगार विस्तार की वजह से छोटे शहरों की जमीन आगामी वर्षों में सबसे तेज रफ्तार से महंगी होगी। इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर, कटक, वाराणसी और पुरी जैसे शहर इस लहर की अगुआई करेंगे। मुख्य शहर के बाहरी इलाकों में सबसे तेज बढ़ेंगे दाम 15-40% – मेट्रो कॉरिडोर के 1 किमी दायरे में 30-70% – नए एयरपोर्ट/ एक्सप्रेसवे के पास 80-100% – हाई-ग्रोथ पेरिफेरल प्लॉटेड एरिया 20-60% – इंडस्ट्रियल कॉरिडोर/ लॉजिस्टिक हब (स्रोत: स्क्वेयर यार्ड्स रिपोर्ट 2026) 2020-25 – टियर-2 और टियर 3 शहरों में 5 साल में दोगुना तक हो चुके दाम यह कोई नई शुरुआत नहीं है। 2020 से 2025 के बीच भी छोटे-मझोले शहरों में जमीन और मकान, दोनों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हर शहर में प्लॉट की बढ़त फ्लैट से 10-25% अधिक रही है। इंदौर में इस दौरान फ्लैट 72% तक और प्लाट में 85-100% तक तेजी देखी गई। शहर फ्लैट महंगे प्लॉट के दाम बढ़े इंदौर 72% 85-100% जयपुर 65% 75-90% भोपाल 49% 60-75% नागपुर 47% 55-70% चंडीगढ़ 44% 50-65% रायपुर 40% 45-60% लुधियाना 38% 45-60% पटना 35% 40-55% रांची 33% 40-55% जबलपुर 28% 35-50% उदयपुर 25% 35-50% स्रोत: एनएचबी रेजिडेक्स एचपीआई, प्रॉपइक्विटी 50 लाख से 1 करोड़ रुपए के घरों की मांग सबसे ज्यादा निवेशक – लंबे समय के लिए प्लॉट सबसे बेहतर विकल्प। इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पास लिए गए प्लॉट अगले 5-10 वर्षों में मल्टी-बैगर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। नौकरीपेशा वर्ग – 50 से 1 करोड़ रुपए के मकानों की मांग सबसे ज्यादा। पहली बार घर खरीदने वाले – ब्याज दरें घटने, आसान सुविधाएं मददगार। 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स और ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से रियल एस्टेट में क्रांति टियर-2,3 शहरों में 200 से ज्यादा पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर की बहाली, सेमीकंडक्टर मिशन-2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स-केमिकल सेक्टर में विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे, जो इन शहरों में घर-प्लॉट की मांग बढ़ाएंगे। सरकार का 1 लाख करोड़ का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ इसे रफ्तार देगा। आखिर टियर-2 और 3 शहरों में उछाल क्यों? मेट्रो शहरों में सीमित और महंगी जमीन से विस्तार की सीमित संभावनाएं हैं। छोटे शहरों में कम कीमतों पर बड़े प्लॉट खरीदे जा सकते हैं। इन्फ्रा निवेश का सबसे ज्यादा लाभ उन्हीं इलाकों को, जहां अभी विकास कम है। 70% ब्लू-कॉलर और बड़ी संख्या में वाइट-कॉलर जॉब्स महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, LPG चिंता का विषय:रोजाना 75.7 लाख सिलेंडर बुक हो रहे, ईरान जंग से पहले 55.7 लाख होते थे

सरकार बोली- पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, LPG चिंता का विषय:रोजाना 75.7 लाख सिलेंडर बुक हो रहे, ईरान जंग से पहले 55.7 लाख होते थे

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बीच भारत सरकार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन अवग-अलग मंत्रालयों की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से LPG हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार ने बताया कि ईरान जंग के कारण देश में गैस बुकिंग की संख्या में लगभग 20 लाख की बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने बताया कि जंग से पहले हर रोज औसतन 55.7 लाख सिलेंडरों की बुकिंग होती थी। अभी एक दिन में लगभग 75.7 लाख गैस बुकिंग हो रही है। सरकार ने कहा कि जंग के माहौल के बीच LPG सिलेंडर की बुकिंग में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। यह लोगों के बीच घबराहट के कारण हो रहा है। सरकार ने कहा- LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास अभी गैस का स्टॉक पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा- LPG चिंता का विषय है क्योंकि देश का ज्यादातर LPG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है और वह अभी बंद है। हालांकि, हमारे 25,000 LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स में से किसी पर भी गैस खत्म होने (ड्राई आउट) की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। मंत्रालय ने आगे कहा- केंद्र की तरफ से राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन आवंटन किया गया है। राज्यों से अपील की गई है कि वे जिलों में केरोसिन बांटने लिए जगह तय करें। वैकल्पिक ईंधन विकल्पों के लिए कोल इंडिया को छोटे, मध्यम और अन्य उपभोक्ताओं को कोयला उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने कहा कि LPG की पैनिक बुकिंग करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि किसी भी LPG डीलर पर गैस खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है। 9 मार्च 2026 को जारी नेचुरल गैस ऑर्डर के तहत कई सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है। उसी आदेश के अनुसार घरेलू पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) की आपूर्ति बिना किसी कटौती के जारी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा- लोगों को घबराने की जरूरत नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने आगे कहा- मौजूदा स्थिति में लोगों को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इसके अलावा बड़े शहरों और केंद्रों में व्यावसायिक उपभोक्ता जो फिलहाल LPG सप्लाई पर निर्भरता के कारण कुछ दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, भारत सरकार उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार के मुताबिक, भारत के पास कच्चे तेल के लिए 258 मिलियन मीट्रिक टन की रिफाइनिंग क्षमता है। सभी रिफाइनरियां इस समय 100% या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। रिफाइनरियों के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और इसके अलावा सप्लाई लगातार जारी है। ———————— LPG किल्लत से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… LPG संकट- पंजाब में सिलेंडर लेकर भागते दिखे लोग:ब्लैक में कॉमर्शियल सिलेंडर ₹4 हजार का बिक रहा अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। कई जगहों पर ₹2 हजार का कॉमर्शियल सिलेंडर ₹4 हजार में बिक रहा है। वहीं पंजाब में लोग सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। केरल में करीब 40% रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर है। पूरी खबर पढ़ें…

what is Sarcoma cancer | सरकोमा कैंसर क्या है

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Last Updated:March 13, 2026, 15:51 IST Sarcoma Cancer: कैंसर का जब भी नाम सुनते होंगे तो ब्रेस्ट, लंग्स, लिवर या ब्लड कैंसर ही ज्यादा सुना जाता है लेकिन इन सबसे भी ज्यादा घातक कैंसर है जो हड्डियों और मांसपेशियों के भीतर खामोशी से पनपता है. इसे मेडिकल साइंस में सरकोमा Sarcoma कहा जाता है. सारकोमा की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसकी शुरुआत बेहद साधारण दर्द से होती है. कभी जिम में लगी मोच तो कभी पेट का मामूली दर्द, लोग इसे आम समस्या समझकर पेनकिलर खा लेते हैं, जबकि अंदर ही अंदर यह कैंसर गंभीर रूप ले रहा होता है. ऐसे में छोटी सी परेशानी कैसे सरकोमा में बदल जाती है इसे इग्नोर करने का क्या अंजाम होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं. सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं. Sarcoma Cancer Symptoms: सरकोमा कैंसरों के समूह को कहते हैं. इसका मतलब है कि ऐसा कैंसर जो शरीर के सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से पनप कर कई अंगों को प्रभावित करता है, उसे व्यापक संदर्भ में सरकोमा कैंसर कहा जाता है. सॉफ्ट टिशू से शरीर की मांसपेशियां, चर्बी, ब्लड वैसल्स, टेंडन, नसें आदि जुड़ी होती है, इसलिए जब सरकोमा कैंसर होता है तो ये सारे अंग प्रभावित हो सकते हैं. सरकोमा शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है. सरकोमा में कई प्रकार के कैंसर आते हैं. सरकोमा कैंसर के प्रकारमायो क्लिनिक के मुताबिक सरकोमा कैंसर सॉफ्ट टिशू और हड्डियों से शुरू होता है, इसलिए ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है और इसका उसी तरह से नाम भी होता है. एंजियोसारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा, डर्माटोफाइब्रोसारकोमा प्रोट्यूबरन्स, डेस्मोप्लास्टिक स्मॉल राउंड सेल ट्यूमर, एपिथेलियोइड सारकोमा, इविंग सारकोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, कापोसी सारकोमा, लेयोमायोसारकोमा, लाइपोसारकोमा, मैलिग्नेंट पेरिफेरल नर्व शीथ ट्यूमर सरकोमा कैंसर के प्रकार हैं. सरकोमा के लक्षणसरकोमा के लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोगों के दिमाग में आता ही नहीं कि ये कैंसर भी हो सकता है. सरकोमा में शरीर के किसी हिस्से में स्किन के नीचे किसी प्वाइंट पर हल्का सा गांठ या हार्डनेस जैसा महसूस होता है. इसमें दर्द भी हो सकता है और दर्द नहीं भी हो सकता है. ये इतने मामूली होते हैं कि छूने पर कभी पता चलता है तो कभी नहीं भी चलता. इसलिए लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन इसमें डॉक्टरों के पास जरूरी है. इसके अलावा हड्डियों में दर्द भी सरकोमा का लक्षण हो सकता है. ऐसे में बिना किसी वजह कभी हड्डियां टूट भी सकती है. सरकोमा कभी-कभी पेट दर्द से भी शुरू हो सकता है. वहीं किसी भी प्रकार के कैंसर में बिना वजह वजन कम होना सबसे बड़ा लक्षण है. सरकोमा के कारणहालांकि सरकोमा के स्पष्ट कारण अब तक वैज्ञानिकों को पता नहीं है लेकिन यह कैंसर शरीर की हड्डियों और सॉफ्ट टिशू में कोशिकाओं की अनियंत्रित बढ़त के कारण शुरू होता है. सारकोमा तब होता है जब कोशिकाओं के निर्देश केंद्र यानी DNA में गड़बड़ियां होने लगती है. सामान्य तौर पर डीएनए कोशिकाओं को बताता है कि उन्हें कब बढ़ना है और कब मरना है. लेकिन कैंसर वाली कोशिकाओं में यह डीएनए गलत निर्देश देने लगता है. इन गलत निर्देशों के कारण कैंसर कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने और फैलने लगती हैं. जहां सामान्य कोशिकाएं मर जाती हैं, वहीं ये कैंसर कोशिकाएं जीवित रहती हैं, जिससे शरीर में जरूरत से ज्यादा कोशिकाएं जमा हो जाती हैं. जब ये कोशिकाएं एक जगह इकट्ठा होती हैं, तो वे एक गांठ या हार्डनेस बना लेती हैं जिसे ट्यूमर कहा जाता है. जब कैंसर इस तरह शरीर में फैलता है, तो इसे मेटास्टैटिक कैंसर कहते हैं. किन लोगों को सरकोमा का रिस्क ज्यादाकुछ लोगों में यह जेनेटिक होता है यानी अगर ये बीमारियां माता-पिता से बच्चों में पहुंचती हैं, तो आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने पहले कभी किसी दूसरे कैंसर के इलाज के लिए रेडिएशन थेरेपी ली है, तो भविष्य में उनमें सरकोमा होने का खतरा बढ़ सकता है. जब शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम (रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा) में कोई रुकावट आती है या उसे नुकसान पहुंचता है, तो शरीर में सूजन आ जाती है. इसे लिम्फेडेमा कहते हैं. इसकी वजह से एंजियोसारकोमा नाम के सारकोमा का खतरा बढ़ जाता है. अगर ह्यूमन हर्पीज वायरस 8 का इंफेक्शन हो जाए तो इससे भी सरकोमा का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए इन हालातों में तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें First Published : March 13, 2026, 15:51 IST

Silver Falls ₹8,350, Gold Down ₹1,748 Amid US-Iran Tensions; Experts Advise Caution

Silver Falls ₹8,350, Gold Down ₹1,748 Amid US-Iran Tensions; Experts Advise Caution

Hindi News Business Silver Falls ₹8,350, Gold Down ₹1,748 Amid US Iran Tensions; Experts Advise Caution नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से चांदी-सोने में आज 13 मार्च को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,904 रुपए गिरकर 1.58 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 12 मार्च को सोना 1,60 लाख रुपए प्रति 10g था। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 7,813 रुपए घटकर 2.60 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2.68 लाख रुपए किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं। ऑल टाइम हाई से 1.25 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2026 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 17,722 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 44 दिन में चांदी 1,25,445 लाख रुपए सस्ती हो गई है। कीमतें गिरने की 3 बड़ी वजहें ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम: अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कम कर दी है। माना जा रहा है कि मार्च की मीटिंग में दरें नहीं घटेंगी। कैश पर बढ़ा भरोसा: अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग से मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक सोने के बजाय नकद हाथ में रखना पसंद कर रहे हैं। इससे सोने की मांग पर असर पड़ा है। महंगा तेल और शेयर बाजार की गिरावट: मिडिल ईस्ट जंग की वजह से तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली हो रही है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी हो रहा है। एक्सपर्ट व्यू- अभी सोने-चांदी में निवेश से बचें कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक लोग शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए सोने-चांदी में मुनाफा वसूली कर रहे हैं। इससे सोने-चांदी के दामों में गिरावट है। अजय केडिया अनुसार आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…