Wednesday, 10 Jun 2026 | 07:58 AM

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पहले वनडे में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन हराया:21 साल बाद कंगारू टीम पर मिली दूसरी जीत; नालेद राणा ने झटके 4 विकेट

पहले वनडे में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन हराया:21 साल बाद कंगारू टीम पर मिली दूसरी जीत; नालेद राणा ने झटके 4 विकेट

बांग्लादेश ने मीरपुर में खेले गए पहले वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम के तहत 86 रन से हरा दिया। बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे इतिहास में यह केवल दूसरी जीत है। इससे पहले साल 2005 में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पहली बार किसी वनडे मैच में मात दी थी। इस मुकाबले में करीब चार साल बाद वनडे क्रिकेट में वापसी कर रहे मोसाद्देक हुसैन ने पहले बल्लेबाजी में नाबाद 86 रनों की पारी खेली और बाद में गेंदबाजी में भी 2 विकेट चटकाए। वहीं, नावेद राणा ने 4 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया की टीम पिछले हफ्ते पाकिस्तान से वनडे सीरीज 2-1 से हारने के बाद यहां पहुंची है, जहां उसे पहले ही मैच में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। खराब रोशनी और बारिश के कारण रुका मैच टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट पर 284 रन बनाए थे। जवाब में 285 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 42.2 ओवरों में 9 विकेट खोकर केवल 191 रन ही बना सकी थी कि तभी मैदान पर तेज बिजली कड़कने और बारिश के कारण खेल को रोकना पड़ा। खेल दोबारा शुरू न होने की स्थिति में डकवर्थ-लुईस नियम के तहत बांग्लादेश को 86 रनों से विजेता घोषित कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कैमरून ग्रीन 52 रन बनाकर नाबाद रहे। मोसाद्देक हुसैन की शानदार वापसी, शांतो और तंजीद के भी अर्धशतक चार साल बाद टीम में लौटे मोसाद्देक हुसैन बांग्लादेश की जीत के सबसे बड़े हीरो रहे। उन्होंने महज 70 गेंदों में 7 चौकों और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 86 रन कूट डाले। हालांकि, इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई फील्डर्स ने उन्हें तीन जीवनदान भी दिए। कूपर कॉनोली, ओलिवर पीक और एडम जम्पा ने उनके कैच छोड़े, जिसका मोसाद्देक ने पूरा फायदा उठाया। उनके अलावा कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 67 और ओपनर तंजीद हसन ने 54 रनों की महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नाथन एलिस सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 38 रन देकर 3 विकेट लिए। खिलाड़ियों की कसी फील्डिंग ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी की पहली ही गेंद पर ओपनर मैथ्यू शॉट को तस्कीन अहमद ने बोल्ड कर दिया। खराब फॉर्म से जूझ रहे मार्नस लाबुशेन भी सिर्फ 1 रन बनाकर मुस्तफिजुर रहमान का शिकार बने। पाकिस्तान के खिलाफ पिछली सीरीज में 0, 5 और 19 रन बनाने वाले लाबुशेन का फ्लॉप शो यहां भी जारी रहा। मिडिल ऑर्डर में कूपर कॉनोली (35) ने कप्तान जोश इंग्लिस (19) और एलेक्स कैरी (47) के साथ छोटी साझेदारियां कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे टीम को संकट से नहीं निकाल सके। नाहिद राणा की 140 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी बांग्लादेश के युवा तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने अपनी रफ्तार से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हुए राणा ने 41 रन देकर 4 विकेट चटकाए। उन्होंने अपने दूसरे स्पेल में घातक गेंदबाजी करते हुए तीन ओवरों में तीन विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी। मोसाद्देक हुसैन ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और अपने 10 ओवर के कोटे में सिर्फ 37 रन देकर 2 जरूरी विकेट निकाले। 15 साल बाद दोनों देशों के बीच बाइलेटरल सीरीज ऑस्ट्रेलिया की टीम पूरे 15 साल बाद बांग्लादेश के दौरे पर कोई बाइलेटरल वनडे सीरीज खेल रही है। सीरीज का पहला मैच जीतकर बांग्लादेश ने 1-0 की बढ़त बना ली है। सीरीज के बाकी बचे दोनों मैच भी मीरपुर के इसी मैदान पर गुरुवार और रविवार को खेले जाएंगे।

अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए:हेलिकॉप्टर गिराने के बदले में अटैक; तेहरान बोला- हर हमले का जवाब देंगे

अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए:हेलिकॉप्टर गिराने के बदले में अटैक; तेहरान बोला- हर हमले का जवाब देंगे

अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की है। सेंटकॉम के मुताबिक, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में किया गया। इससे पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हालांकि उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई। ट्रम्प ने लिखा था, “अमेरिका को इस हमले का जवाब देना ही होगा।” उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ईरानी सेना किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब नहीं छोड़ेंगे।” अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारा क्षेत्र छोड़ दें। फारस की खाड़ी का इतिहास बाहरी ताकतों के बुरे अंजामों से भरा है।” हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अपाचे हेलिकॉप्टर एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या हादसा थी। मामले की जांच जारी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर पिछले 25 वर्षों से मानवता की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला के रूप में काम कर रहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नासा ने 2028 से शुरू करके 2030 तक इसे सुरक्षित तरीके से धरती पर गिराने की अपनी योजना को सार्वजनिक किया है। इसके लिए नासा ने 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपए) का प्लान तैयार किया है। आईएसएस निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसका कार्यकाल कई बार बढ़ चुका है। पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं। स्टेशन को सुरक्षित बनाए रखने पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। नासा अब अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल मिशनों पर केंद्रित करना चाहता है। इसलिए आईएसएस को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से रिटायर करने का फैसला लिया गया है। कैसे होगा अंतरिक्ष स्टेशन का अंत? करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी आईएसएस को यूं ही पृथ्वी की ओर गिरने नहीं दिया जाएगा। 2028 के आसपास स्टेशन को कक्षा में बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद कर दी जाएगी। विशेष अंतरिक्ष यान से उसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही स्टेशन का अधिकांश हिस्सा घर्षण से जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी स्पेस के बड़े टुकड़े पृथ्वी पर आबादी वाले क्षेत्रों में गिर सकते हैं। इसलिए नासा ने प्रशांत महासागर के एक दूरस्थ क्षेत्र को चुना है ताकि वायुमंडल में जलने के बाद बचा हुआ मलबा इसी सुनसान समुद्री क्षेत्र में गिरे। NASA के अनुसार, ISS को दक्षिण प्रशांत महासागर के क्षेत्र में क्रैश किया जाएगा। इस जगह का नाम पॉइंट नीमो है। यह जगह वैश्विक स्तर पर खास अंतरिक्ष के पुराने स्पेस स्टेशन, सैटेलाइट और दूसरे कचरे को डिस्पोज करने के लिए चुनी गई है। पॉइंट नीमो के आस पास किसी भी जहाज के जाने पर बैन है। यहां इंसानों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। साल 1971 से लेकर अब तक तकरीबन 300 तरह के अंतरिक्षीय कचरे को यहां गिराया गया है। इसमें अधिकतर अमेरिकी और रूसी कचरा शामिल है। 19 देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 6 से 8 लोग 6 महीने तक रह सकते हैं। इस पर पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े अंतरिक्ष यान उतारे जाते हैं। अब तक 19 देशों के 250 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS का दौरा किया है। आईएसएस की जगह अब प्राइवेट स्पेस स्टेशन नासा के नेतृत्व में कई निजी कंपनियां अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना रही हैं। इनमें वोस्ट कंपनी का हेवन-2, एक्सिओम का स्पेस स्टेशन, और ब्लू ओरिजिन का ऑर्बिट रीफ प्रमुख हैं। चीन पहले ही अपना स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी 2035 तक खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। ——————– ISS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा का रिसाव:नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में छिपने को कहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा का रिसाव बढ़ने के बाद नासा ने तुरंत एक्शन लिया और एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में छिपने और सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। हालांकि, करीब दो घंटे की मशक्कत और जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में देखकर इस आदेश को वापस ले लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

2030 तक खत्म हो जाएगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सफर:नासा प्रशांत महासागर में गिराएगी मलबा, 9500 करोड़ रुपए का आएगा खर्च

पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर पिछले 25 वर्षों से मानवता की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला के रूप में काम कर रहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नासा ने 2028 से शुरू करके 2030 तक इसे सुरक्षित तरीके से धरती पर गिराने की अपनी योजना को सार्वजनिक किया है। इसके लिए नासा ने 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपए) का प्लान तैयार किया है। आईएसएस निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है। इसका कार्यकाल कई बार बढ़ चुका है। पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं। स्टेशन को सुरक्षित बनाए रखने पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। नासा अब अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल मिशनों पर केंद्रित करना चाहता है। इसलिए आईएसएस को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से रिटायर करने का फैसला लिया गया है। कैसे होगा अंतरिक्ष स्टेशन का अंत? करीब 4.5 लाख किलोग्राम वजनी आईएसएस को यूं ही पृथ्वी की ओर गिरने नहीं दिया जाएगा। 2028 के आसपास स्टेशन को कक्षा में बनाए रखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बंद कर दी जाएगी। विशेष अंतरिक्ष यान से उसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में धकेला जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही स्टेशन का अधिकांश हिस्सा घर्षण से जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी स्पेस के बड़े टुकड़े पृथ्वी पर आबादी वाले क्षेत्रों में गिर सकते हैं। इसलिए नासा ने प्रशांत महासागर के एक दूरस्थ क्षेत्र को चुना है ताकि वायुमंडल में जलने के बाद बचा हुआ मलबा इसी सुनसान समुद्री क्षेत्र में गिरे। NASA के अनुसार, ISS को दक्षिण प्रशांत महासागर के क्षेत्र में क्रैश किया जाएगा। इस जगह का नाम पॉइंट नीमो है। यह जगह वैश्विक स्तर पर खास अंतरिक्ष के पुराने स्पेस स्टेशन, सैटेलाइट और दूसरे कचरे को डिस्पोज करने के लिए चुनी गई है। पॉइंट नीमो के आस पास किसी भी जहाज के जाने पर बैन है। यहां इंसानों के रहने के लिए कोई जगह नहीं है। साल 1971 से लेकर अब तक तकरीबन 300 तरह के अंतरिक्षीय कचरे को यहां गिराया गया है। इसमें अधिकतर अमेरिकी और रूसी कचरा शामिल है। 19 देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS का दौरा कर चुके ISS में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 6 से 8 लोग 6 महीने तक रह सकते हैं। इस पर पृथ्वी से उड़ान भरने वाले बड़े-बड़े अंतरिक्ष यान उतारे जाते हैं। अब तक 19 देशों के 250 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्रियों ने ISS का दौरा किया है। आईएसएस की जगह अब प्राइवेट स्पेस स्टेशन नासा के नेतृत्व में कई निजी कंपनियां अपने अंतरिक्ष स्टेशन बना रही हैं। इनमें वोस्ट कंपनी का हेवन-2, एक्सिओम का स्पेस स्टेशन, और ब्लू ओरिजिन का ऑर्बिट रीफ प्रमुख हैं। चीन पहले ही अपना स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी 2035 तक खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। ——————– ISS से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में हवा का रिसाव:नासा ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में छिपने को कहा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में हवा का रिसाव बढ़ने के बाद नासा ने तुरंत एक्शन लिया और एस्ट्रोनॉट्स को स्पेसक्राफ्ट में छिपने और सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया। हालांकि, करीब दो घंटे की मशक्कत और जांच के बाद स्थिति नियंत्रण में देखकर इस आदेश को वापस ले लिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

एक-पार्टी के प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया | भारत समाचार

Bangladesh Vs Australia Live Score: Follow Latest Updates From The 1st ODI. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 01:58 IST प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। फ़ाइल छवि/एएफपी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है, आधिकारिक तौर पर जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित, लगातार सरकार के प्रमुख के रूप में चुने गए हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया मानदंड स्थापित करते हुए आधुनिक राजनीतिक दीर्घायु के मापदंडों को फिर से परिभाषित करती है। हालाँकि, जबकि दोनों नेता भारतीय मतदाताओं से स्थायी जनादेश हासिल करने में कामयाब रहे, उनके संबंधित कार्यकाल के संरचनात्मक परिदृश्य अधिक विशिष्ट नहीं हो सके। प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को एक अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है, जो कि स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशक के निर्विवाद एकल-दल प्रभुत्व के साथ बिल्कुल विपरीत है। विभिन्न युगों का संस्थागत ताना-बाना इस मील के पत्थर की भयावहता को समझने के लिए, राजनीतिक विश्लेषक बीसवीं सदी के मध्य और समकालीन युग के बीच विशाल प्रणालीगत अंतर पर प्रकाश डालते हैं। आज़ादी के बाद शुरुआती दशकों के दौरान, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने उस व्यवस्था के तहत काम किया जिसे समाजशास्त्री ऐतिहासिक रूप से “एकदलीय प्रभुत्व प्रणाली” कहते हैं। जवाहरलाल नेहरू के तहत, केंद्र सरकार भारी संस्थागत अधिकार के साथ काम कर रही थी, और उसे ऐसे विरोध का सामना करना पड़ रहा था, जिसमें बौद्धिक रूप से जीवंत होने के बावजूद, संघीय ढांचे के लिए प्रणालीगत खतरा पैदा करने के लिए संख्यात्मक ताकत, क्षेत्रीय मशीनरी और वित्तीय समर्थन का अभाव था। राजनीतिक केंद्रीकरण उस युग का स्वाभाविक उपोत्पाद था जब गणतंत्र के मूलभूत स्तंभ अभी भी मजबूत हो रहे थे। इसके बिल्कुल विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी अभूतपूर्व राजनीतिक विखंडन और गहन जांच के युग में निरंतर कार्यकाल की कमान संभाल रहे हैं। वर्तमान प्रशासन अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में काम करता है जहां मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन, मुखर राज्य सरकारें और संरचित विपक्षी गठबंधन लगातार संघीय नीतियों का विरोध करते हैं। सत्ता अब एक ही बोर्डरूम में केंद्रित नहीं है; इसके बजाय, इसमें गहराई से स्थापित क्षेत्रीय हितों के विविध स्पेक्ट्रम पर बातचीत की जाती है, जिसमें विधायी, वित्तीय और संघीय मामलों पर केंद्र को चुनौती देने की संस्थागत क्षमता होती है। डिजिटल पुनर्जागरण और सार्वजनिक जांच दलगत राजनीति से परे, संचार परिदृश्य में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, जिसने मौलिक रूप से बदल दिया है कि एक आधुनिक प्रधान मंत्री एक विस्तारित अवधि में जनता का विश्वास कैसे बनाए रखता है। नेहरू युग की विशेषता नवजात, बड़े पैमाने पर राज्य-सहयोगी या पारंपरिक प्रिंट मीडिया थी, जो कम साक्षरता दर वाले समाज में काम कर रहा था, जहां जन संचार धीमा और अत्यधिक औपचारिक था। शासन काफी हद तक त्वरित, प्रतिक्रियाशील सार्वजनिक प्रतिक्रिया से अछूता था, जिससे नीतियों को सार्वजनिक चकाचौंध से दूर एक व्यापक अवधि की अनुमति मिल गई। आज, लोकतांत्रिक विमर्श एक अतिसक्रिय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सामने आता है। स्मार्टफोन प्रौद्योगिकी, सर्वव्यापी हाई-स्पीड इंटरनेट और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता प्लेटफार्मों के प्रसार का मतलब है कि संघीय निर्णयों की घोषणा के कुछ ही सेकंड के भीतर विच्छेदन, आलोचना और विरोध किया जाता है। एक्टिविस्ट नेटवर्क, नागरिक समाज समूह और विविध मीडिया गुट शक्तिशाली ऑनलाइन आर्किटेक्चर पर नियंत्रण रखते हैं जो रातों-रात कथा परिवर्तन को आकार देने में सक्षम हैं। लोकतांत्रिक बहुमत को बनाए रखना और इस अथक, 24-घंटे की स्पॉटलाइट के तहत प्रशासनिक गति बनाए रखना सार्वजनिक प्रबंधन में एक पूरी तरह से अद्वितीय परिचालन विजय का प्रतिनिधित्व करता है। लोकतांत्रिक दीर्घायु का एक नया प्रतिमान जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। आधुनिक युग में निरंतरता हासिल करने के लिए एक ऐसे मतदाता वर्ग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जो अत्यधिक आकांक्षी, डिजिटल रूप से सशक्त और अलग-अलग क्षेत्रीय रेखाओं के साथ खंडित हो। स्वतंत्र भारत के संस्थापक प्रधान मंत्री के निरंतर शासन रिकॉर्ड को पार करके, वर्तमान नेतृत्व ने एक तरल, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक वास्तविकता को अनुकूलित करने की असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया है, एक मिसाल कायम की है जो आने वाले दशकों के लिए देश की लोकतांत्रिक वास्तुकला को आकार देगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एक-दलीय प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री उज्ज्वल बिस्वास ‘तिरपाल हेराफेरी’ मामले में गिरफ्तार | न्यूज18

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री उज्ज्वल बिस्वास 'तिरपाल हेराफेरी' मामले में गिरफ्तार | न्यूज18

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री उज्जल बिस्वास को तिरपाल हेराफेरी मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिससे राजनीतिक उथल-पुथल मच गई और अदालत परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। गिरफ्तारी के कारण अराजक दृश्य पैदा हो गए, अंडे फेंके जाने की खबरें आईं और तनाव बढ़ने पर समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई। इस मामले ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव तेज कर दिया है, विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। अधिकारी मामले से जुड़ी सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक टकराव बढ़ता ही जा रहा है। -newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 09 जून, 2026, 23:21 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)आरोप(टी)गिरफ्तारी(टी)वर्तमान घटनाएं(टी)पूर्व मंत्री(टी)सरकार(टी)कानून प्रवर्तन(टी)समाचार(टी)राजनीति(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति

PoK रावलकोट में खून-खराबा: क्या पाकिस्तान ने नियंत्रण खो दिया है? | आसिम मुनीर | सही स्टैंड | न्यूज18

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तरबूज का जूस: गर्मी में पिसाई के बिना सिर्फ 2 मिनट में ऐसे बनाएं मुंह में पानी, देखें ही आ जाएगा पानी

तस्वीर का विवरण

तरबूज़ का उत्पाद बनाने के लिए सामग्री: 2 कप ताजा तरबूज़ के टुकड़े, 1 मसाले का रस, चुटकी भर काला नमक, कुछ बर्फ के टुकड़े, पुदीने की मिठाई छवि: फ्रीपिक सबसे पहले तरबूज़ों को छोटे-छोटे बीजों में काट लें और बीज निकाल दें। एक बड़े टोकरे में टरबाइन के टुकड़े डाले। अब ओरिएंट या किसी साफा कटोरी के पीछे वाले हिस्सों की मदद से अच्छी तरह मैश कर लें। छवि: फ्रीपिक जब तरबूज पूरी तरह से रस छोड़ने लगे तो इसे एक चुनौती की मदद से अच्छा लें। इससे उत्पाद अलग हो जाएगा और गुडा ऊपर रह जाएगा। अब साबुत नींबू का रस, काला नमक और शहद या चीनी की आवश्यकता के अनुसार। छवि: एआई एक गोले में बर्फ के टुकड़े डालें और तैयार सामग्री डालें। ऊपर से पुदीने की सीट पर सजाकर सर्व करें। पाचन को बेहतर बनाने में सहायक है। कम गुणवत्ता वाले होने के कारण वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक शरीर को लंबे समय तक निकोलसएस्ट तक रखा गया है। गर्मी और लू से बचने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन-ए और सी त्वचा के लिए आकर्षक होते हैं। छवि: फ्रीपिक हमेशा ताज़ा और मीठा तरबूज़ चुनें। सामग्री बनाने के बाद तुरंत पी लें, इससे स्वाद और पोषण दोनों कायम रहते हैं। बहुत अधिक मात्रा में चीनी से इनकार किया गया, क्योंकि तरबूज़ प्राकृतिक रूप से मीठा होता है। छवि: एआई गर्मियों में जब कुछ ठंडा और स्टेक ड्रिंकिंग का मन करे, तो बिना पिज्जा के तैयार होने वाला यह आसान तरबूज का स्वाद जरूर खरीदें। इसका ताज़ा स्वाद और ठंडक हर किसी को पसंद आएगी। छवि: फ्रीपिक

न्यू मुल्लांपुर स्टेडियम में 'वॉल ऑफ फेम' स्थापित:33 क्रिकेटरों की तस्वीरें लगाई गईं, शुभमन गिल, युवराज-हरमनप्रीत कौर को मिली जगह

न्यू मुल्लांपुर स्टेडियम में 'वॉल ऑफ फेम' स्थापित:33 क्रिकेटरों की तस्वीरें लगाई गईं, शुभमन गिल, युवराज-हरमनप्रीत कौर को मिली जगह

मुल्लांपुर स्थित न्यू चंडीगढ़ क्रिकेट स्टेडियम में पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) ने पंजाब के खेल इतिहास को सहेजने के लिए ‘वॉल ऑफ फेम’ स्थापित की है। इस वॉल पर पंजाब के उन 33 दिग्गज क्रिकेटरों की तस्वीरें लगाई गई हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश-दुनिया में राज्य का नाम रोशन किया है। इसमें भारतीय टीम के वनडे और टी-20 विश्व कप जीतने के ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षणों की ग्रुप फोटोज को भी जगह दी गई है। पंजाब का गौरव बढ़ाने वाली महिला क्रिकेटरों को इस वॉल पर खास स्थान दिया गया है, ताकि महिला क्रिकेट को और बढ़ावा मिल सके। शुभमन गिल, युवराज और हरमनप्रीत की तस्वीरें शामिल हैं। इसका उद्घाटन बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष मिथुन मन्हास और पीसीए के मानद सचिव गुरमीत सिंह मीत हेयर ने किया। इस मौके पर पीसीए के संयुक्त सचिव सिद्धांत शर्मा भी मौजूद रहे। इसमें भारतीय टीम के वनडे और टी-20 विश्व कप जीतने के ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षणों की ग्रुप फोटोज को भी जगह दी गई है। छह विश्व कप अपने नाम किए देश के क्रिकेट इतिहास का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने बताया कि भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने अब तक कुल 6 विश्व कप अपने नाम किए हैं। इनमें तीन वनडे विश्व कप (दो पुरुष और एक महिला) तथा तीन टी-20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) शामिल हैं। पंजाब की ऐतिहासिक जीतों को भी संजोया गया है। वॉल ऑफ फेम में सिर्फ व्यक्तिगत खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि पंजाब टीम की ऐतिहासिक जीतों की यादों को भी ताजा किया गया है। सत्र 1992-93 में रणजी ट्रॉफी जीतने वाली पंजाब टीम के यादगार पल तथा साल 2022-23 में इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाने वाली पंजाब की विजेता टीम की तस्वीरें शामिल हैं। पंजाब के क्रिकेटरों पर गर्व पीसीए के सचिव गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा, “हमें पंजाब के क्रिकेटरों की उपलब्धियों पर गर्व है। यह ‘वॉल ऑफ फेम’ राज्य की समृद्ध खेल विरासत को संजोने का एक प्रयास है, ताकि युवा खिलाड़ी इनसे प्रेरणा ले सकें। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि देश के खेल इतिहास में पंजाब का योगदान हमेशा अमर रहे।” बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मनहास ने पीसीए की इस अनूठी पहल की जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे खेल इतिहास को जीवंत रखने के लिए एक गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक कदम बताया।

अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने‎ बैंकों की चिंता बढ़ा दी है। ठगी के मामलों में ‎तेजी आने के बाद कुछ बैंक अब तकनीक के‎ साथ मनोवैज्ञानिक तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। अमेरिका के सबसे बड़े बैंक जेपी मोर्गन ने‎इसी उद्देश्य से व्यवहार साइंटिस्ट की नियुक्ति ‎की है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के‎ इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के अनुसार 2025‎ में साइबर अपराधों से लोगों को 2 लाख करोड़ ‎रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। यह 2024‎ की तुलना में 25% ज्यादा और 2020 के 42‎ हजार करोड़ रुपए से करीब चार गुना है।‎ जेपी मॉर्गन ने दो वर्ष पहले व्यवहार साइंटिस्ट‎ एलिजाबेथ हपर्ट को नियुक्त किया था। उनका‎ काम कॉल सेंटर और बैंक शाखाओं के‎ कर्मचारियों को यह समझाना है कि ठग किस ‎तरह लोगों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें बैंक ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎की सलाह पर संदेह करने के लिए तैयार करते ‎हैं। कई मामलों में ठग महीनों तक अपने शिकार‎ से संपर्क बनाए रखते हैं और फिर उनसे खुद ही ‎पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। बैंक अब संदिग्ध‎ मामलों में ग्राहकों से सीधे संपर्क कर रहे हैं।‎ स्कैम विशेषज्ञ सवाल पूछकर और संदेह के‎ आधार पर ग्राहकों को ठगी के जाल से बाहर‎ निकालने की कोशिश करते हैं। बैंक पासवर्ड दर्ज‎ करते समय असामान्य रुकावट, हिचकिचाहट या ‎किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्क्रीन साझा करना‎ संभावित धोखाधड़ी के संकेत मान रहे हैं।‎