Wednesday, 16 Sep 2026 | 09:12 AM

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Raigarh Steel Slag Road Guinness Record & Dal Lake Papier Mache Model अमेरिका में विदेशी छात्रों का नौकरी करना मुश्किल:पढ़ाई के बाद जॉब के लिए 1 करोड़ रुपए देने होंगे; व्हाइट हाउस की प्रस्ताव को मंजूरी इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने इनकी सप्लाई पर रोक लगाई थी गणपति उत्सव, शिल्पा ने पैपराजी संग किया डांस:गोविंदा ने मांगी बेटे के लिए मन्नत; संजय दत्त ने घायल फोटोग्राफर का पूछा हाल, अजय देवगन लालबागचा राजा पहुंचे गणपति उत्सव, शिल्पा ने पैपराजी संग किया डांस:गोविंदा ने मांगी बेटे के लिए मन्नत; संजय दत्त ने घायल फोटोग्राफर का पूछा हाल, अजय देवगन लालबागचा राजा पहुंचे ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई
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अमेरिका में विदेशी छात्रों का नौकरी करना मुश्किल:पढ़ाई के बाद जॉब के लिए 1 करोड़ रुपए देने होंगे; व्हाइट हाउस की प्रस्ताव को मंजूरी

अमेरिका में विदेशी छात्रों का नौकरी करना मुश्किल:पढ़ाई के बाद जॉब के लिए 1 करोड़ रुपए देने होंगे; व्हाइट हाउस की प्रस्ताव को मंजूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना महंगा करने की तैयारी कर रही है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के लिए छात्रों को करीब 96 लाख रुपए (1 लाख डॉलर) फीस देनी पड़ सकती है। यह फीस ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के लिए प्रस्तावित है। OPT के तहत विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति मिलती है। इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है। लागू करने से पहले लोगों और संस्थानों से इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। OPT क्या है और उसका ट्रेनिंग पीरियड OPT यानी ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। इसके तहत ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को आम तौर पर 12 महीने तक नौकरी करने की छूट मिलती है। STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से जुड़े विषयों के छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने का एक्सटेंशन मिलता है। यानी पात्र STEM छात्रों को कुल 36 महीने तक OPT के तहत काम करने का मौका मिल सकता है। OPT के बाद कुछ छात्र अमेरिका में लंबे समय तक नौकरी करने के लिए अन्य वर्क वीजा विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। OPT के लिए फिलहाल 40 हजार रुपए फीस फिलहाल OPT के लिए फीस करीब 40 हजार रुपए है। प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फीस लागू होने पर छात्रों को मौजूदा फीस से कई गुना ज्यादा रकम चुकानी होगी। अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए यह खर्च ट्यूशन फीस और रहने-खाने के खर्च के अलावा होगा। इससे पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। 2 लाख से भारतीय छात्र OPT के तहत नौकरी कर रहे अमेरिका में 2 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र OPT के तहत नौकरी कर रहे हैं। विदेशी छात्रों में भारतीय छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्रस्तावित फीस लागू होने पर अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। पढ़ाई का खर्च करीब 50 लाख, जॉब के लिए अलग 1 करोड़ अमेरिका में ग्रेजुएशन की फीस करीब 50 लाख रुपए तक हो सकती है। इसके अलावा छात्रों को रहने, खाने और दूसरी जरूरतों पर भी खर्च करना पड़ता है। कई छात्र पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम काम करके अपने रहने-खाने का खर्च निकालते हैं। ऐसे में पढ़ाई पूरी होने के बाद OPT के लिए करीब 96 लाख रुपए की फीस का प्रस्ताव छात्रों की कुल लागत को काफी बढ़ा सकता है। अमेरिका में करीब 10 लाख विदेशी छात्र पढ़ रहे अमेरिका में इस समय करीब 10 लाख विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से जो छात्र पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए OPT महत्वपूर्ण रास्ता है। फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होने पर अमेरिका के बजाय दूसरे देशों में पढ़ाई और नौकरी के विकल्प तलाशने वाले छात्रों की संख्या बढ़ सकती है। जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, अभी यह प्रस्तावित फीस है। इसे लागू करने से पहले संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी और लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों को ईमेल भेजा प्रस्ताव के बीच कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों को ईमेल भेजकर मौजूदा अनिश्चितता को लेकर भरोसा दिलाया है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह स्थिति को समझती है और इससे जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रही है। OPT में बदलाव का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब ट्रम्प प्रशासन विदेशी छात्रों और अमेरिका में पढ़ाई के बाद उनके रुकने से जुड़े नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा रहा है।

ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान की सेपेहरान एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक टायर फट गया। इसके बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी। RT के मुताबिक, विमान के इंजन में भी खराबी आ गई थी। इसके बाद पायलट ने विमान को वापस मशहद एयरपोर्ट लाने का फैसला किया। यह विमान मशहद से केरमानशाह जा रहा था। घटना के दौरान विमान के अंदर बैठे यात्री काफी घबरा गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म ने यह अलर्ट जारी किया था। इसमें खतरे की वजह नहीं बताई गई। लोगों से कहा गया कि वे भीड़ और खुले इलाकों में जाने से बचें और तुरंत किसी सुरक्षित जगह चले जाएं। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि खतरा टल गया है। हालांकि, लोगों से भीड़ से दूर रहने और किसी घटना की वीडियो या फोटो नहीं बनाने की अपील की गई। मंगलवार सुबह जेद्दा और ताइफ में भी ऐसे ही इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। इन्हें भी कुछ देर बाद हटा लिया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

रिपोर्ट-हूती हमले के बाद सऊदी ने इजराइल से मदद मांगी:अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत; दोस्त पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया

रिपोर्ट-हूती हमले के बाद सऊदी ने इजराइल से मदद मांगी:अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत; दोस्त पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया

यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बड़े इलाके पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद सऊदी अरब बड़े संकट में है।यरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हूती सैन्य कार्रवाई से निपटने के लिए इजराइल से खुफिया मदद मांगी है। यह बातचीत अमेरिका की मध्यस्थता में हुई। खास बात यह है कि सऊदी अरब इजराइल को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता। उसके इजराइल के साथ राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। इसके बावजूद रियाद ने इजराइल से मदद मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के मक्का रक्षा गठबंधन के साथी पाकिस्तान ने यमन में लड़ने के लिए अपनी सेना या सैन्य संसाधन भेजने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी। अमेरिका और ब्रिटेन ने भी नहीं की सऊदी की मदद यमन में हूती विद्रोहियों के हमले और तेजी से बढ़ते कब्जे ने सऊदी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब मदद के लिए अपने सहयोगी देशों से संपर्क कर रहा है। पाकिस्तान के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन ने भी यमन में हूती संगठन के खिलाफ सीधे हमले करने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने खुफिया मदद देने की पेशकश की है, जबकि ब्रिटेन सैन्य सलाहकार देने की बात कह रहा है। ऐसे में सऊदी अरब ने अब इजराइल से भी मदद मांगी है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

सूरज पंचोली बोले- कभी दिशा सालियान से नहीं मिला:उनकी मौत में मेरा नाम घसीटना गलत; एक्टर सुशांत की मैनेजर थीं दिशा

Sooraj Pancholi Statement | Disha Salian Death Controversy Mumbai

एक्टर सूरज पंचोली ने एक्टर सुशांत सिंह की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में खुद का नाम जोड़े जाने पर सफाई दी है। इंस्टाग्राम पर एक लंबा बयान जारी कर सूरज ने कहा कि वे जीवन में कभी भी दिशा सालियान या शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे से न तो सीधे मिले हैं और न ही अप्रत्यक्ष रूप से। सूरज ने अपना नाम इस केस में घसीटे जाने को गलत बताते हुए कहा कि 4-5 साल पहले सीबीआई और पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है। फिर भी अगर जांच एजेंसियां पूछताछ करना चाहें तो वे पूरे सहयोग के लिए तैयार हैं। इन्स्टाग्राम पोस्ट में सूरज ने जताई नाराजगी सूरज पंचोली ने अपनी इन्स्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि बीते कुछ सालों से कई मीडिया रिपोर्ट्स और बयानों में लगातार उनका नाम दिशा सालियान की मौत से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि वे हर रिपोर्ट का जवाब नहीं देना चाहते थे, लेकिन बार-बार एक ही बात होने पर बोलना जरूरी हो गया था। सूरज ने कहा कि बिना किसी सबूत या तथ्यों के उनका नाम इस मामले में घसीटना बहुत परेशान करने वाला और गलत है। उन्होंने अपील की कि बिना पुख्ता सबूतों के किसी की मौत को जरिया बनाकर दूसरे इंसान की छवि खराब नहीं की जानी चाहिए। ‘हेडलाइन और टीवी डिबेट सबूत नहीं’ सूरज पंचोली ने लोगों और मीडिया से अपील की कि वे अफवाहों के आधार पर राय न बनाएं। उन्होंने लिखा, “न्यूज या सोशल मीडिया पर जो कुछ भी दिख रहा है, उस पर तुरंत भरोसा मत करिए। टीवी पर हेडलाइन, डिबेट या किसी का बयान सबूत नहीं होता।” सूरज ने कहा कि टीवी पर चर्चा में आने वाले हर नाम के पीछे एक असली इंसान और उसका परिवार होता है। वे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच का समर्थन करते हैं और उन्हें देश के कानून और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है। 2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से हुई थी। घटना के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत मिले थे। दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने मौत को सुसाइड बताया था। वहीं दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। इसमें भी आत्महत्या की बात कही गई थी। पिता की शिकायत पर CBI ने दर्ज की FIR इस मामले में हाल ही में तब नया मोड़ आया जब सीबीआई ने दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत और उनके दर्ज कराए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की। सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा के मुताबिक, एफआईआर और शिकायत में आदित्य ठाकरे, रोहन राय, रिया चक्रवर्ती और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का नाम शामिल है। इसी नए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सूरज पंचोली का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया था। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… आदित्य ठाकरे बोले-दिशा सालियान मौत से मेरा कोई लेना-देना नहीं:मैं आरोपों का जवाब क्यों दूं शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने नई दिल्ली में गुरुवार को एक्टर सुशांत सिंह की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, तो मैं इन आरोपों पर जवाब क्यों दूं।” पूरी खबर पढ़ें… ‘मुझे नहीं लगता कि वो सुसाइड था’, एक्टर शिशिर शर्मा बोले- सुशांत सिंह राजपूत ऐसे इंसान नहीं थे जो आत्महत्या जैसा कदम उठाएं फिल्म ‘छिछोरे’ में सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम कर चुके एक्टर शिशिर शर्मा ने उनकी मौत को लेकर कहा कि उन्हें लगता है कि सुशांत ने सुसाइड किया है। शिशिर शर्मा ने बताया कि उनकी और सुशांत की पहचान टीवी के दिनों से थी। जब वह ‘यहां मैं घर घर खेली’ में काम कर रहे थे और सुशांत ‘पवित्र रिश्ता’ में थे, तब दोनों पास में शूटिंग करते थे और लंच ब्रेक में साथ खाना खाते थे। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। दोनों दोस्त एक ही यूनिवर्सिटी से थे मलाइका चित्रे एक फार्मास्यूटिकल्स कंपनी में ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करती थीं। वहीं नवम कौल सॉफ्टवेयर कंपनी ब्लूमबर्ग में फाइनेंशियल डेटा एनालिस्ट थे। दोनों ने न्यू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और लगभग एक ही समय में ग्रेजुएशन किया था। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे:9 महीने तक जोड़ीदार तलाशते रहे, अब तक की सबसे लंबी दूरी तय की

जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे:9 महीने तक जोड़ीदार तलाशते रहे, अब तक की सबसे लंबी दूरी तय की

साथी की तलाश में जाम्बिया के तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने करीब 4,126 किलोमीटर का सफर तय किया। ये तीनों भाई 2025 के बीच में अपने पुराने इलाके से निकले और करीब 9 महीने तक लगातार घूमते रहे। अप्रैल 2026 तक उन्होंने यह दूरी पूरी कर ली थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन पर रहने वाले किसी अफ्रीकी स्तनधारी के साथी की तलाश में दर्ज की गई यह अब तक की सबसे लंबी दूरी है। इन तीनों को मायूकूयूकू मेल्स (Mayukuyuku males) के नाम से पहचाना गया है। उनका सफर सिर्फ लंबा नहीं था, बल्कि बेहद मुश्किल भी था। रास्ते में उन्हें जंगलों के साथ-साथ सड़कें, शहर, खेती और औद्योगिक इलाके भी मिले। वे इनसे बचते हुए बार-बार अपना रास्ता बदलते रहे। 420 किमी की दूरी, लेकिन सफर 4 हजार किमी का अगर नक्शे पर दोनों छोरों के बीच सीधी लाइन खींचें तो तीनों भाइयों ने करीब 260 मील यानी 420 किमी की दूरी तय की। लेकिन असल में वे करीब 2,485 मील यानी 4 हजार किमी घूमे। सोचिए, मंजिल 420 किमी दूर हो और वहां पहुंचने के लिए 4 हजार किमी का चक्कर लगाना पड़े। इन जंगली कुत्तों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। वे जहां इंसानी गतिविधियां ज्यादा देखते, वहां से रास्ता बदल लेते। इस तरह जंगलों और दूसरे प्राकृतिक इलाकों के बीच घूमते हुए उन्होंने एक लंबा घुमावदार रास्ता तय किया। वैज्ञानिक इस तरह अपने जन्म वाले झुंड या इलाके को छोड़कर साथी की तलाश में निकलने को डिस्पर्सल कहते हैं। यह माइग्रेशन से अलग है। माइग्रेशन में जानवर आमतौर पर मौसम के साथ भोजन या रहने की जगह की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके जाते हैं और फिर लौटते हैं। डिस्पर्सल में जानवर नए साथी या नए इलाके की तलाश में निकलता है। अपने ही झुंड में जोड़ी नहीं बनाते अफ्रीकी जंगली कुत्ते झुंड में रहने वाले बेहद सामाजिक जानवर हैं। वे साथ मिलकर शिकार करते हैं और झुंड के बच्चों की देखभाल भी करते हैं। लेकिन वे आमतौर पर अपने जन्म वाले झुंड में प्रजनन नहीं करते। इसलिए बड़े होने पर उनके सामने दो रास्ते होते हैं। वे अपने झुंड में रहकर इंतजार करें और आगे चलकर उसी झुंड का हिस्सा बने रहें, या फिर करीब 2 से 3 साल की उम्र में साथी की तलाश में बाहर निकल जाएं। जाम्बिया में इन तीन भाइयों ने साथी की तलाश में निकलने का रास्ता चुना। राजधानी लुसाका से भी बचकर निकले तीनों का रास्ता सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं था। वे जाम्बिया के अलग-अलग वन्यजीव इलाकों के बीच घूमे। इस दौरान उन्होंने राजधानी लुसाका और भारी औद्योगिक विकास वाले इलाकों के आसपास से भी रास्ता बनाया। सड़कों, शहरों और खेती की वजह से कई प्राकृतिक इलाके एक-दूसरे से कट गए हैं। ऐसे में किसी जानवर के लिए एक जंगल से दूसरे जंगल तक जाना आसान नहीं है। इसके बावजूद तीनों भाइयों ने इन बाधाओं के बीच रास्ता निकाला। वैज्ञानिकों के लिए यह एक अहम संकेत है। इससे पता चलता है कि पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में जंगली कुत्तों की अलग-अलग आबादियां शायद पहले के अनुमान से ज्यादा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। तीन बहनें भी साथी की तलाश में निकलीं, 2 की मौत इसी रिसर्च में तीन मादा जंगली कुत्तों की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई। उन्होंने भी साथी की तलाश में लंबी दूरी तय करना शुरू किया था। लेकिन उनका सफर पूरा नहीं हो सका। तीनों में से एक शिकारी के लगाए तार के फंदे यानी स्नेर में फंस गई। बाद में तीनों में से दो की मौत हो गई। दूसरी की मौत की जानकारी नहीं मिल पाई है। रिसर्चर्स ने इन जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उनके गले में GPS कॉलर लगाए थे। इससे पता चला कि बची हुई मादा जंगली कुत्तियां बार-बार उसी जगह लौट रही थीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसा व्यवहार अक्सर तब देखा जाता है जब झुंड का कोई साथी मर जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह तय नहीं है कि वे साथी को खोज रही थीं या उस जगह से उनका जुड़ाव बना हुआ था। इस रिसर्च में GPS कॉलर लगाए गए कुछ दूसरे जंगली कुत्तों की मौत भी अवैध शिकार के लिए लगाए गए फंदों में फंसने से हुई। जंगलों में करीब 6 हजार ही जंगली कुत्ते बचे अफ्रीकी जंगली कुत्ते अफ्रीका के सबसे दुर्लभ शिकारी जानवरों में शामिल हैं। जंगलों में इनकी संख्या करीब 6 हजार ही बची है। इनके लिए खतरा सिर्फ शिकारियों से नहीं है। सड़कें, शहर और खेती उनके रहने वाले इलाकों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट रहे हैं। इससे साथी की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके तक जाना मुश्किल हो सकता है। फिर भी इस रिसर्च में तीन भाइयों का 4 हजार किमी का सफर यह दिखाता है कि ये जानवर इंसानों से बदले हुए इलाकों के बीच भी रास्ता खोज सकते हैं। मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्कॉट क्रील, जो इस रिसर्च के प्रमुख लेखक हैं और 1991 से अफ्रीकी जंगली कुत्तों का अध्ययन कर रहे हैं, इसे सावधानी के साथ उम्मीद जगाने वाला नतीजा मानते हैं। उनके मुताबिक, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में बाड़ से घिरे इलाकों को छोड़ दें तो जंगली कुत्तों की लगभग सभी बड़ी आबादियां एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन उनके मुताबिक तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। जानवर इतनी लंबी दूरी तय कर सकते हैं, लेकिन रास्ते में इंसानों की वजह से पैदा हुए खतरे भी हैं। इनमें सबसे बड़ा खतरा शिकारियों के लगाए फंदों का है। सिर्फ जंगल बचाना काफी नहीं, उनके बीच के रास्ते भी जरूरी यह रिसर्च इकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसके नतीजे बताते हैं कि वन्यजीवों के लिए सिर्फ संरक्षित जंगल बचाना पर्याप्त नहीं है। मान लीजिए दो बड़े जंगल हैं, लेकिन उनके बीच सड़क, शहर और खेती इतनी बढ़ गई कि जानवर एक से दूसरे तक पहुंच ही नहीं सकते। ऐसे में दोनों जंगल धीरे-धीरे अलग-अलग छोटे द्वीप जैसे बन जाएंगे। द नेचर कंजरवेंसी से जुड़े और रिसर्च के सह-लेखक ब्रूस एलेंडर के मुताबिक, जंगली कुत्तों और हाथियों जैसे बड़े इलाके में घूमने वाले जानवरों को जिंदा रहने के लिए जुड़े हुए प्राकृतिक इलाके चाहिए। इसलिए संरक्षण का मतलब सिर्फ जंगल

सलमान खान ने एंटीलिया में लिया बप्पा का आशीर्वाद:तिलक लगवाकर फूल अर्पण किए, सिद्धार्थ-कियारा ने भी दर्शन किए; राधिका मर्चेंट की भक्तिमय परफॉर्मेंस में डूबे मेहमान

सलमान खान ने एंटीलिया में लिया बप्पा का आशीर्वाद:तिलक लगवाकर फूल अर्पण किए, सिद्धार्थ-कियारा ने भी दर्शन किए; राधिका मर्चेंट की भक्तिमय परफॉर्मेंस में डूबे मेहमान

सलमान खान अंबानी परिवार के गणपति सेलिब्रेशन का हिस्सा बने हैं। इस दौरान उन्होंने बप्पा का आशीर्वाद लिया और भगवान को फूल अर्पण किए। एंटीलिया में हुए गणपति सेलिब्रेशन की शुरुआत में राधिका मर्चेंट ने भक्तिमय प्रस्तुति दी। सलमान खान ने नए लुक के साथ एंटीलिया में एंट्री ली और तस्वीरें क्लिक कराईं। कुछ देर बाद उन्होंने गणपति प्रतिमा के सामने जाकर आशीर्वाद लिया। पंडित जी ने उन्हें तिलक लगाया और पटका पहनाया। आगे सलमान ने गणपति बप्पा को पुष्प अर्पित किए। राधिका मर्चेंट ने गणपति सेलिब्रेशन में क्लासिकल भक्तिमय भरतनाट्यम परफॉर्मेंस दी, जिसे पॉपुलर कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेंट ने कोरियोग्राफ किया है। वैभवी ने सोशल मीडिया से राधिका का वीडियो पोस्ट किया। देखिए राधिका मर्चेंट की डांस परफॉर्मेंस की झलक- एंटीलिया के गणपति सेलिब्रेशन की ये इनसाइड झलकियां भी देखिए- विक्की-कटरीना, सिद्धार्थ-कियारा ने भी लिया आशीर्वाद विक्की कौशल और कटरीना कैफ ने भी एंटीलिया में बप्पा का आशीर्वाद लिया और फूल अर्पित किए। नए पेरेंट्स बने सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी भी हाथ जोड़े बप्पा के दर्शन करते नजर आए। गणपति पूजा में साथ दिखा अंबानी परिवार इस सेलिब्रेशन से पहले अंबानी परिवार में पूजा आयोजित की गई, जिसमें महज परिवार के सदस्य और चंद करीबी शामिल हुए थे। एंटीलिया में गणपति बप्पा का स्वागत गणपति बप्पा के स्वागत के लिए एंटीलिया गेंदे के फूलों, शानदार लाइटिंग और त्योहारों वाली सजावट से जगमगा उठा। इस मौके पर नीता अंबानी, राधिका मर्चेंट, अनंत अंबानी और मुकेश अंबानी गणपति बप्पा का स्वागत करते नजर आए। नीता अंबानी ने गहरे लाल रंग का पारंपरिक परिधान पहना था। वह शानदार गहनों में नजर आईं। राधिका मर्चेंट ने चमकीले नारंगी रंग का कढ़ाईदार एथनिक आउटफिट चुना। उन्होंने पारंपरिक एक्सेसरीज के साथ अपना फेस्टिव लुक पूरा किया।

ट्रम्प की डाक वोटिंग सख्त करने की कोशिश पर रोक:सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 7 जज खिलाफ; वोटरों की जानकारी USPS को देने का था आदेश

ट्रम्प की डाक वोटिंग सख्त करने की कोशिश पर रोक:सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 7 जज खिलाफ; वोटरों की जानकारी USPS को देने का था आदेश

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक से वोटिंग के नियम सख्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कोशिश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 7 जज ट्रम्प के नियमों के खिलाफ रहे। मामला नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प ने मार्च में आदेश जारी किया था। वे चाहते थे कि डाक से वोट भेजने वाले लोगों की लिस्ट राज्यों को अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को दी जाए। ट्रम्प का कहना था कि डाक से वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए नए नियम जरूरी हैं। विरोध करने वालों ने कहा कि इन नियमों से सही वोट भी रुक सकते हैं और राष्ट्रपति राज्यों के चुनावी सिस्टम में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नियम लागू करने की अनुमति नहीं दी। ट्रम्प के नियम के तहत USPS रोक सकता था बैलेट अगर कोई बैलेट नए नियमों के मुताबिक नहीं होता या वोट देने वाले का नाम तय लिस्ट में नहीं मिलता, तो USPS उस बैलेट को रोक सकता था। डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले राज्यों और वोटिंग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे चुनाव के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…