Saturday, 12 Sep 2026 | 12:13 PM

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इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइल में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर 2019 से अगस्त 2026 तक करीब 4.7 लाख डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिले सरकारी रिकॉर्ड से हुआ है। दिसंबर 2025 में वकील यारा शलित ने PM ऑफिस से इस खर्च की जानकारी मांगी थी। इसके बाद अलग-अलग साल और महीनों में हुए खर्च का ब्योरा जारी किया गया। इस दौरान पिछले 7 साल में तीन प्रधानमंत्री रहे- बेंजामिन नेतन्याहू, नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड। रिकॉर्ड के मुताबिक, बाल और मेकअप पर हुए कुल खर्च का करीब 90% हिस्सा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर हुआ। हालांकि, कई दस्तावेजों में उनके हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नाम भी छिपा दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसके लिए राज्य की सुरक्षा का हवाला दिया। 2023 में युद्ध शुरू होने के दौरान भी बाल-मेकअप पर खर्च 2025 में सबसे ज्यादा खर्च, विदेश यात्राओं में भी बड़ा बिल 2025 में प्रधानमंत्री के बालों और मेकअप पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई। इस साल कुल खर्च करीब 1.11 लाख डॉलर यानी लगभग 93 लाख रुपए रहा। विदेश यात्राओं के दौरान भी बालों और मेकअप पर बड़ी रकम खर्च हुई। फरवरी 2025 में नेतन्याहू की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान इन सेवाओं पर करीब 13,500 डॉलर यानी 11 लाख रुपए खर्च किए गए। जुलाई 2024 में उनकी एक और वॉशिंगटन यात्रा के दौरान इन सेवाओं पर करीब 11,500 डॉलर यानी 9.6 लाख रुपए खर्च हुए थे। मेहमानों और कपड़ों पर भी नेतन्याहू का खर्च ज्यादा बाल और मेकअप के अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े खर्च की अलग मद भी है। इसमें कपड़ों और मेहमानों की मेजबानी जैसे खर्च शामिल हैं। इस मद में नेतन्याहू से जुड़े खर्च करीब 1.34 लाख डॉलर यानी 1.12 करोड़ रुपए रहे। नफ्ताली बेनेट के लिए यह रकम करीब 19,000 डॉलर यानी 16 लाख रुपए और याइर लैपिड के लिए करीब 2,600 डॉलर यानी 2.2 लाख रुपए थी। हालांकि, सरकार ने गहनों, कपड़ों और इमेज कंसल्टिंग से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से इन जानकारियों की भी मांग की गई थी। कुछ खर्चों का हिसाब नहीं बताया, स्टाइलिस्ट के नाम भी छिपाए इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर अलग से हजारों डॉलर खर्च होने की जानकारी सामने आई है। खास तौर पर 2025 में यह खर्च 1 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। वहीं, सरकार ने कुछ जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। प्रधानमंत्री के निजी हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नामों को राज्य की सुरक्षा का हवाला देकर दस्तावेजों से हटा दिया गया। गहने, कपड़े और इमेज कंसल्टिंग जैसी कुछ मदों का खर्च भी सार्वजनिक नहीं किया गया। खर्च का हिसाब-किताब 2019-अगस्त 2026: हेयर स्टाइलिंग और मेकअप पर करीब 4.7 लाख डॉलर नेतन्याहू और सारा: कुल हेयर-मेकअप खर्च का करीब 90% 2023: करीब 1.03 लाख डॉलर 2022: करीब 27,600 डॉलर 2025: करीब 1.11 लाख डॉलर, सबसे ज्यादा फरवरी 2025 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 13,500 डॉलर जुलाई 2024 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 11,500 डॉलर सितंबर-नवंबर 2023: बालों पर करीब 2,600 डॉलर, मेकअप पर 1,580 डॉलर अक्टूबर 2023: बालों की स्टाइलिंग पर करीब 810 डॉलर नेतन्याहू का आधिकारिक प्रतिनिधित्व खर्च: करीब 1.34 लाख डॉलर

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इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइल में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर 2019 से अगस्त 2026 तक करीब 4.7 लाख डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिले सरकारी रिकॉर्ड से हुआ है। दिसंबर 2025 में वकील यारा शलित ने PM ऑफिस से इस खर्च की जानकारी मांगी थी। इसके बाद अलग-अलग साल और महीनों में हुए खर्च का ब्योरा जारी किया गया। इस दौरान पिछले 7 साल में तीन प्रधानमंत्री रहे- बेंजामिन नेतन्याहू, नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड। रिकॉर्ड के मुताबिक, बाल और मेकअप पर हुए कुल खर्च का करीब 90% हिस्सा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर हुआ। हालांकि, कई दस्तावेजों में उनके हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नाम भी छिपा दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसके लिए राज्य की सुरक्षा का हवाला दिया। 2023 में युद्ध शुरू होने के दौरान भी बाल-मेकअप पर खर्च 2025 में सबसे ज्यादा खर्च, विदेश यात्राओं में भी बिल बढ़ा 2025 में प्रधानमंत्री के बालों और मेकअप पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई। इस साल कुल खर्च करीब 1.11 लाख डॉलर यानी लगभग 93 लाख रुपए रहा। विदेश यात्राओं के दौरान भी बालों और मेकअप पर बड़ी रकम खर्च हुई। फरवरी 2025 में नेतन्याहू की 4 दिन की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट की सेवाओं पर करीब 13,500 डॉलर यानी 11 लाख रुपए खर्च हुए। यह विदेश यात्रा के दौरान इस मद में सबसे बड़ा खर्च था। यह यात्रा ट्रम्प से मुलाकात के लिए हुई थी। उस समय नेतन्याहू ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। जुलाई 2024 में नेतन्याहू की एक और वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी इन सेवाओं पर करीब 11,500 डॉलर यानी 9.6 लाख रुपए खर्च हुए थे। मेहमानों और कपड़ों पर भी नेतन्याहू का खर्च ज्यादा बाल और मेकअप के अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े खर्च की अलग मद भी है। इसमें कपड़ों और मेहमानों की मेजबानी जैसे खर्च शामिल हैं। इस मद में नेतन्याहू से जुड़े खर्च करीब 1.34 लाख डॉलर यानी 1.12 करोड़ रुपए रहे। नफ्ताली बेनेट के लिए यह रकम करीब 19,000 डॉलर यानी 16 लाख रुपए और याइर लैपिड के लिए करीब 2,600 डॉलर यानी 2.2 लाख रुपए थी। हालांकि, सरकार ने गहनों, कपड़ों और इमेज कंसल्टिंग से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से इन जानकारियों की भी मांग की गई थी। कुछ खर्चों का हिसाब नहीं बताया, स्टाइलिस्ट के नाम भी छिपाए इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर अलग से हजारों डॉलर खर्च होने की जानकारी सामने आई है। खास तौर पर 2025 में यह खर्च 1 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। वहीं, सरकार ने कुछ जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। प्रधानमंत्री के निजी हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नामों को राज्य की सुरक्षा का हवाला देकर दस्तावेजों से हटा दिया गया। गहने, कपड़े और इमेज कंसल्टिंग जैसी कुछ मदों का खर्च भी सार्वजनिक नहीं किया गया। खर्च का हिसाब-किताब 2019-अगस्त 2026: हेयर स्टाइलिंग और मेकअप पर करीब 4.7 लाख डॉलर नेतन्याहू और सारा: कुल हेयर-मेकअप खर्च का करीब 90% 2023: करीब 1.03 लाख डॉलर 2022: करीब 27,600 डॉलर 2025: करीब 1.11 लाख डॉलर, सबसे ज्यादा फरवरी 2025 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 13,500 डॉलर जुलाई 2024 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 11,500 डॉलर सितंबर-नवंबर 2023: बालों पर करीब 2,600 डॉलर, मेकअप पर 1,580 डॉलर अक्टूबर 2023: बालों की स्टाइलिंग पर करीब 810 डॉलर नेतन्याहू का आधिकारिक प्रतिनिधित्व खर्च: करीब 1.34 लाख डॉलर

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ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने तेल पाइपलाइन बंद की:होर्मुज बंद होने के बाद इसी से रोजाना 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था

ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने तेल पाइपलाइन बंद की:होर्मुज बंद होने के बाद इसी से रोजाना 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था

सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी है। गुरुवार को हुए ड्रोन हमले में पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों में आग लग गई और कुछ लोग घायल हुए। ईरान जंग के चलते होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी इसी पाइपलाइन से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पाइपलाइन पर गुरुवार को कई हमले हुए थे। इसके बाद इसे एहतियात के तौर पर बंद किया गया। मंत्रालय की टीमें पाइपलाइन को सुरक्षित करने और नुकसान का पता लगाने में जुटी हैं। ड्रोन हमले से पंपिंग स्टेशनों में लगी आग अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में पाइपलाइन के पास बने पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया गया। पंपिंग स्टेशन पाइपलाइन में तेल को आगे भेजने में मदद करते हैं। शुक्रवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीर में एक पंपिंग स्टेशन पर आग से काफी नुकसान दिखाई दिया। एक दूसरी तस्वीर में स्टेशन से काला धुआं निकलता दिखा। अभी यह साफ नहीं है कि पाइपलाइन को सीधे कितना नुकसान हुआ है। यह भी पता नहीं है कि पाइपलाइन फिर से कब शुरू होगी। सऊदी का दावा- इराक से आए थे ड्रोन सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि रियाद और मदीना इलाकों में पाइपलाइन पर कई ड्रोन से हमला किया गया। सऊदी के मुताबिक, ये ड्रोन इराक से आए थे। सऊदी ने कहा कि इराक के प्रधानमंत्री के कहने पर उसने अभी जवाबी हमला नहीं करने का फैसला किया है। सऊदी चाहता है कि इराक पहले अपनी जमीन से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई करे। इराक ने भी हमले की निंदा की है। इराकी सरकार ने कहा कि वह इस मामले की जांच करेगी और अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमला करने के लिए नहीं होने देगी। खबर अपडेट हो रही है…

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ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने तेल पाइपलाइन बंद की:होर्मुज बंद होने के बाद इसी से रोजाना 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था

ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने तेल पाइपलाइन बंद की:होर्मुज बंद होने के बाद इसी से रोजाना 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था

सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी है। गुरुवार को हुए ड्रोन हमले में पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों में आग लग गई और कुछ लोग घायल हुए। ईरान जंग के चलते होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी इसी पाइपलाइन से रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल भेज रहा था। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पाइपलाइन पर गुरुवार को कई हमले हुए थे। इसके बाद इसे एहतियात के तौर पर बंद किया गया। मंत्रालय की टीमें पाइपलाइन को सुरक्षित करने और नुकसान का पता लगाने में जुटी हैं। ड्रोन हमले से पंपिंग स्टेशनों में लगी आग अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में पाइपलाइन के पास बने पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया गया। पंपिंग स्टेशन पाइपलाइन में तेल को आगे भेजने में मदद करते हैं। शुक्रवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीर में एक पंपिंग स्टेशन पर आग से काफी नुकसान दिखाई दिया। एक दूसरी तस्वीर में स्टेशन से काला धुआं निकलता दिखा। अभी यह साफ नहीं है कि पाइपलाइन को सीधे कितना नुकसान हुआ है। यह भी पता नहीं है कि पाइपलाइन फिर से कब शुरू होगी। सऊदी का दावा- इराक से आए थे ड्रोन सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि रियाद और मदीना इलाकों में पाइपलाइन पर कई ड्रोन से हमला किया गया। सऊदी के मुताबिक, ये ड्रोन इराक से आए थे। सऊदी ने कहा कि इराक के प्रधानमंत्री के कहने पर उसने अभी जवाबी हमला नहीं करने का फैसला किया है। सऊदी चाहता है कि इराक पहले अपनी जमीन से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई करे। इराक ने भी हमले की निंदा की है। इराकी सरकार ने कहा कि वह इस मामले की जांच करेगी और अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमला करने के लिए नहीं होने देगी। खबर अपडेट हो रही है…

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Punjabi Sarabjit Kaur Case; Lahore HC Notice Nasir Hussain

Punjabi Sarabjit Kaur Case; Lahore HC Notice Nasir Hussain

सरबजीत कौर पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन के साथ। फाइल फोटो पंजाब के कपूरथला से पाकिस्तान गई सरबजीत कौर के मुस्लिम पति नासिर हुसैन को लाहौर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस नासिर की पहली पत्नी सायमा हुसैन की याचिका पर जारी हुआ है। कोर्ट ने नासिर को 16 सितंबर को पेश होने के लिए कहा है। . सायमा हुसैन ने वकील अली चंगेजी संधू के जरिए याचिका दायर की है। इसमें नासिर पर पहली पत्नी की अनुमति के बिना दूसरी शादी करने का आरोप लगाया गया है। जिसमें सायमा हुसैन और उसके भाई मुहम्मद नदीम ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए हैं। सायमा ने आरोप लगाया कि सरबजीत ने नासिर के साथ मिलकर उसके घर पर कब्जा कर लिया और उन्हें चार बच्चों के साथ घर से बाहर कर दिया। सायमा ने बच्चों के गुजारा भत्ते और रहने की व्यवस्था की मांग की है। वकील अली चंगेजी संधू सायमा हुसैन के अलावा सरबजीत कौर के भारतीय पति करनैल सिंह और पाकिस्तान के पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री महेंद्र पाल सिंह की ओर से भी पैरवी कर रहे हैं। सरबजीत कौर को पाकिस्तान से निर्वासित किए जाने से जुड़ी याचिका भी लाहौर हाईकोर्ट में लंबित है। नासिर हुसैन की पत्नी सायमा हुसैन अपने वकील अली चंगेजी संधू के साथ। याचिका में सायमा ने ये बातें कही…4 पॉइंट सरबजीत ने घर पर कब्जा किया: 7 सितंबर को सायमा हुसैन ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें उसने कहा कि भारत से यात्रा वीजा पर पाकिस्तान आई सरबजीत कौर ने उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया। सायमा के मुताबिक, उन्हें और उनके चार छोटे बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया गया। हमारे कपड़े भी फेंक दिए गए और परिवार के खाने का सहारा भी छीन लिया गया। बिना अनुमति दूसरी शादी की: सायमा के एडवोकेट अली चंगेजी संधू के अनुसार, पाकिस्तान के कानून के तहत दूसरी शादी को लेकर पहली पत्नी की लिखित अनुमति और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान है। नासिर हुसैन ने सायमा की सहमति के बिना सरबजीत कौर से निकाह किया। पति ने 10 महीने से संपर्क नहीं किया: याचिका में सायमा ने कहा कि है करीब 10 महीने से नासिर ने उससे और बच्चों से संपर्क नहीं किया है। उनका आरोप है कि इस दौरान न तो बच्चों के पालन-पोषण के लिए कोई राशि दी गई और न ही उनका हक-मेहर अदा किया गया। सायमा का कहना है कि चार नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है। वह अदालत के जरिए बच्चों के लिए गुजारा भत्ता और रहने की व्यवस्था चाहती हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हूं: याचिका में सायमा ने कहा- नासिर हुसैन और सरबजीत नामक महिला दिन-रात एक साथ रहकर मोबाइल वीडियो पर अश्लील वीडियो देखते है। दोनों आपत्तिजनक हालत में रहते हैं। ऐसी महिला के साथ रहना बिल्कुल संभव नहीं है, क्योंकि इसका बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। आगे चलकर उनके शादी-ब्याह और रिश्तों में भी रुकावट आएगी। इसलिए वे एक घर में साथ नहीं रह सकते और उन्हें सिर्फ उनका जायज हक दिया जाए। मुस्लिम पति नासिर हुसैन के साथ खुश नजर आती सरबजीत कौर। फाइल फोटो दूसरी शादी के लिए पहली पत्नी की अनुमति जरूरी वकील अली चंगेजी संधू के मुताबिक, पाकिस्तान के मुस्लिम फैमिली लॉज ऑर्डिनेंस 1961 की धारा 6 के तहत दूसरी शादी के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। इसके लिए आर्बिट्रेशन काउंसिल से अनुमति लेने के साथ पहली पत्नी की अनुमति भी जरूरी है। बिना जरूरी अनुमति दूसरी शादी करने पर एक साल तक की सजा और 5 लाख पाकिस्तानी रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। ********** सरबजीत कौर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… पाक गई पंजाबी महिला बोली- ब्लैकमेल कर निकाह किया:वकील से रोते हुए कहा- नासिर पर कार्रवाई कराना चाहती हूं, मुझे भारत भिजवा दो PAK गई पंजाबी महिला बोली- असीं लाहौरिए हां:इंडिया में हमारी 20 किले जमीन, पाकिस्तान में नंबरदार रहे; मुस्लिम से निकाह कर चुकी PAK गई पंजाबी महिला बोली- मेरा 8 साल पुराना प्यार:मुंह में दांत न रहते तो भी जरूर पाकिस्तान आती; मुस्लिम से निकाह रचाकर खुश हूं पाकिस्तान में निकाह करने वाली सरबजीत कौर की बढ़ी मुश्किलें:लाहौर हाईकोर्ट में याचिका- इसे गिरफ्तार करो, भारत वापस भेजो; सुरक्षा के लिए खतरा पाकिस्तान गई पंजाबी महिला का निकला क्रिमिनल रिकॉर्ड:वेश्यावृत्ति की भी FIR; हिसार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का इंटरव्यू करने वाले ने वेलकम किया

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BRICS Summit New Delhi | Modi, Putin & Jinping Meet After 10 Years

BRICS Summit New Delhi | Modi, Putin & Jinping Meet After 10 Years

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक BRICS समिट शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारत में होने वाले BRICS समिट में 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे। समिट में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे। BRICS की ताकत को सिर्फ सदस्य देशों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी आबादी और अर्थव्यवस्था से भी समझा जा सकता है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है। अर्थव्यवस्था की बात करें तो PPP यानी खरीदने की क्षमता के आधार पर BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब 3 गुना है। गोवा में ब्रिक्स समिट से पहले 15 अक्टूबर 2016 को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारतीय अंदाज के कपड़ों में नजर आए थे। PM मोदी 4 वर्ल्ड लीडर्स से मिलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। सुबह 10 बजे- हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली। सुबह 10:30 बजे- मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम। सुबर 11 बजे- अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद। सुबह 11:30 बजे- वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग। शाम 6 से 7 बजे*- भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी। गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा। अब भारत और चीन LAC से लेकर कारोबार तक 6 बड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इनमें सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है। दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच कारोबार है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग 11 अक्टूबर, 2019 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ‘कृष्णाज बटर बॉल’ पर। यह जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा थी। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। ब्रिक्स तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन BRICS 11 देशों का ऐसा समूह है, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। BRICS का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है। शुरुआत में इसमें 4 देश थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया था। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। लेकिन बाद में ये चारों देश एक साथ आने लगे। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके साथ BRICS का दायरा और बढ़ गया। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। पाकिस्तान के चाहने के बावजूद BRICS में नहीं मिली एंट्री BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने इसमें शामिल होने की कोशिश की। इनमें पाकिस्तान और तुर्किये भी थे। पाकिस्तान ने 2023 में सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक BRICS में उसकी एंट्री नहीं हो पाई है। तुर्किये ने भी सदस्यता की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। इससे सवाल उठा कि दोनों देशों की एंट्री क्यों अटकी। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत पाकिस्तान और तुर्की को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी किसी एक देश की आपत्ति से सदस्यता रुक सकती है। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है। ——————- यह खबर

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पीएम मोदी कल वर्ल्ड लीडर्स के साथ करेंगे डिनर:मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल

पीएम मोदी कल वर्ल्ड लीडर्स के साथ करेंगे डिनर:मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS लीडर्स समिट होगा। यह आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा। कल पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग समेत कई वर्ल्ड लीडर्स को होस्ट करेंगे। डिनर के मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल हैं। वहीं, लग्ज़री होटलों में मेहमानों के स्वागत की तैयारी कई हफ्तों से चल रही है। इसमें क्षेत्रीय भारतीय खान-पान, खास मेन्यू, पारंपरिक उपहार और कस्टमाइज्ड व्यक्तिगत सुविधाएं शामिल हैं। ITC मौर्या में रूस के राष्ट्रपति पुतिन और ताज पैलेस में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ठहरने की उम्मीद है। वहीं, UAE के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल द लीला पैलेस और मिस्र का प्रतिनिधिमंडल शेरेटन नई दिल्ली में ठहरेगा। खबर अपडेट हो रही है…

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PM Modi & Vladimir Putin Car Diplomacy in Delhi

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9 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत के बाद साथ यात्रा की। दोनों नेता पुतिन की बख्तरबंद ऑरस सीनेट कार से भारत मंडपम पहुंचे। दोनों ने INNOPROM प्रदर्शनी में हिस्सा लिया। यह यात्रा 11 सदस्यीय BRICS समिट से एक दिन पहले हुई। पुतिन की इस कार को अक्सर ‘पहियों वाला किला’ कहा जाता है। यह वही कार है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान पुतिन के साथ सवार हुए थे। वहीं, इसी साल किर्गिस्तान में SCO समिट में भी मोदी और पुतिन 31 अगस्त को एक कार में बैठे थे। पीएम मोदी 2014 के बाद 12 बार अलग-अलग वर्ल्ड लीडर्स के साथ कार में बैठ चुके हैं। इसमें ओबामा, इमैनुएल मैक्रों जैसे लीडर्स शामिल हैं। मोदी 11 बार वर्ल्ड लीडर्स के साथ एक काम में बैठे 30 सितंबर 2014 बराक ओबामा के साथ पीएम के तौर पर मोदी की पहली विदेश यात्रा। वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी मोटरकेड के जरिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल तक एक साथ यात्रा की। 4 जुलाई 2017 बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तेल अवीव में इजराइली पीएम नेतन्याहू ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत किया और वे एक साथ कार में बैठे। सितंबर 2025 पुतिन के साथ तियानजिन, चीन: एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक के लिए पुतिन और मोदी ने एक ही कार में यात्रा की। अक्टूबर 2025 कीर स्टार्मर के साथ लंदन: राजनयिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर एक कार में बैठे। दिसंबर 2025 पुतिन के साथ नई दिल्ली, भारत: मोदी ने पालम हवाई अड्डे पर पुतिन का स्वागत किया और वे एक साथ प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास तक गए। 16 दिसंबर 2025 इथियोपियाई पीएम के साथ अदीस अबाबा, इथियोपिया: इथियोपियाई पीएम ने हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत किया और खुद कार चलाकर उन्हें विज्ञान संग्रहालय ले गए। 12 जनवरी 2026 जर्मन चांसलर के साथ गुजरात, भारत: जर्मन चांसलर की यात्रा के दौरान मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनके साथ एक ही कार में यात्रा की। 31 अगस्त 2026 पुतिन के साथ बिश्केक, किर्गिस्तान: छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में एक ही कार से पहुंचे। 11 सितंबर 2026 पुतिन के साथ नई दिल्ली, भारत: द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत मंडपम में आयोजित ‘इनोप्रोम’ (INNOPROM) प्रदर्शनी के लिए एक साथ कार में गए। क्या होती है कार डिप्लोमेसी कार डिप्लोमेसी का सीधा सा मतलब है जब दो देशों के शीर्ष नेता कूटनीतिक औपचारिकताओं (प्रोटोकॉल) को किनारे रखकर एक साथ एक ही कार में सफर करते हैं। यह कोई आम सफर नहीं होता, बल्कि दुनिया को यह दिखाने का तरीका होता है कि दोनों नेताओं और उनके देशों के बीच बहुत गहरी व्यक्तिगत दोस्ती, सहजता और अटूट भरोसा है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… BRICS में मेहमानों को गिफ्ट में गुडी बैग दिया:इसमें बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और गुजराती दुपट्टा; मकसद भारतीय संस्कृति से परिचित कराना BRICS समिट में शामिल होने आए प्रतिनिधियों और मेहमानों को खास गुडी बैग गिफ्ट किया जा रहा है। इसमें बिहार का सत्तू व मखाना पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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PM Modi & Vladimir Putin Car Diplomacy in Delhi

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3 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद एक तस्वीर ने फिर ध्यान खींचा। दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक के बाद कार में सवार होकर इनोप्रोम प्रदर्शनी तक साथ गए। ये कार पुतिन की बख्तरबंद ओरस सीनेट है। इससे पहले दोनों नेता ने 12 दिन पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में साथ यात्रा की थी। मोदी के पीएम बनने के बाद यह भी पहली बार नहीं है, जब वह किसी विदेशी नेता के साथ कार में बैठे हों। 2014 के बाद वह ओबामा, मैक्रों समेत कई विश्व नेताओं के साथ 11 बार कार राइड कर चुके हैं। पहले आज की कार राइड की फोटो देखें द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत मंडपम में आयोजित ‘इनोप्रोम’ (INNOPROM) प्रदर्शनी के लिए एक साथ कार में गए। करीब 5 मिनट यात्रा की। पुतिन-मोदी पहले भी 3 बार साथ कार में बैठ चुके मोदी 11 बार वर्ल्ड लीडर्स के साथ एक काम में बैठे 30 सितंबर 2014 बराक ओबामा के साथ पीएम के तौर पर मोदी की पहली विदेश यात्रा। वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी मोटरकेड के जरिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल तक एक साथ यात्रा की। 4 जुलाई 2017 बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तेल अवीव में इजराइली पीएम नेतन्याहू ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत किया और वे एक साथ कार में बैठे। सितंबर 2025 पुतिन के साथ तियानजिन, चीन: एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक के लिए पुतिन और मोदी ने एक ही कार में यात्रा की। अक्टूबर 2025 कीर स्टार्मर के साथ लंदन: राजनयिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर एक कार में बैठे। दिसंबर 2025 पुतिन के साथ नई दिल्ली, भारत: मोदी ने पालम हवाई अड्डे पर पुतिन का स्वागत किया और वे एक साथ प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास तक गए। 16 दिसंबर 2025 इथियोपियाई पीएम के साथ अदीस अबाबा, इथियोपिया: इथियोपियाई पीएम ने हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत किया और खुद कार चलाकर उन्हें विज्ञान संग्रहालय ले गए। 12 जनवरी 2026 जर्मन चांसलर के साथ गुजरात, भारत: जर्मन चांसलर की यात्रा के दौरान मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनके साथ एक ही कार में यात्रा की। 31 अगस्त 2026 पुतिन के साथ बिश्केक, किर्गिस्तान: छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में एक ही कार से पहुंचे। 11 सितंबर 2026 पुतिन के साथ क्या होती है कार डिप्लोमेसी कार डिप्लोमेसी का सीधा सा मतलब है जब दो देशों के शीर्ष नेता कूटनीतिक औपचारिकताओं (प्रोटोकॉल) को किनारे रखकर एक साथ एक ही कार में सफर करते हैं। यह कोई आम सफर नहीं होता, बल्कि दुनिया को यह दिखाने का तरीका होता है कि दोनों नेताओं और उनके देशों के बीच बहुत गहरी व्यक्तिगत दोस्ती, सहजता और अटूट भरोसा है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… BRICS में मेहमानों को गिफ्ट में गुडी बैग दिया:इसमें बिहार का सत्तू, ओडिशा की कॉफी और गुजराती दुपट्टा; मकसद भारतीय संस्कृति से परिचित कराना BRICS समिट में शामिल होने आए प्रतिनिधियों और मेहमानों को खास गुडी बैग गिफ्ट किया जा रहा है। इसमें बिहार का सत्तू व मखाना पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Sukhoi Su-57 Fighter Jet; India Russia Defence Deal Reason Vs US | Pakistan China

Sukhoi Su-57 Fighter Jet; India Russia Defence Deal Reason Vs US | Pakistan China

जुलाई 2026, भारत के रक्षा सचिव ने साफ कहा था कि सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। बमुश्किल दो महीने बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर सुखोई-57 पर डील की चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को दिसंबर 2026 तक पांचवीं पीढ़ी का . भारत घूम-फिरकर पांचवीं पीढ़ी के इसी Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने पर वापस क्यों आ गया, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कभी हां-कभी न… सुखोई-57 को लेकर भारत का रुख कैसे बदलता रहा है? जवाबः भारत ने 1990 के दशक से रूस के करीब 400 सुखोई-30 और सुखोई-30MKI विमान खरीदे हैं। इनमें से करीब आधे विमान रूस के साथ मिलकर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, HAL के प्लांट में बने हैं… 2007 में दोनों देशों के बीच ‘फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट’, यानी FGFA समझौता हुआ। इसके तहत रूसी कंपनी सुखोई और HAL को मिलकर 5th जनरेशन का फाइटर जेट बनाना था। 2010 में भारत शुरुआती डिजाइन के लिए करीब 1,897 करोड़ रुपए देने को राजी हुआ। फिर भारत ने जेट में अपनी जरूरतों के मुताबिक, स्टील्थ टेक्नोलॉजी, यानी दुश्मन के रडार की नजर से बचने की क्षमता और रडार वगैरह से जुड़े 40 से ज्यादा बदलावों की मांग की। लंबी बातचीत के बावजूद प्रोजेक्ट अटका रहा। फरवरी 2018 में भारत ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला किया। भारतीय एयरफोर्स को इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर भरोसा नहीं था। भारत जिस तरह का टू-सीटर, एडवांस्ड रडार और सेंसर वाला सुखोई-57 चाहता था, वो रूस के मूल फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट PAK-FA से कहीं अलग और महंगा था। लागत में हिस्सेदारी और टेक्नोलॉजी शेयरिंग वगैरह को लेकर भी मतभेद थे। हालांकि रूस ने सुखोई-57 का प्रोडक्शन जारी रखा और 2020 में इसे अपनी सेना में भी शामिल किया। फरवरी 2025 में बेंगलुरु में एयर शो के दौरान रूस ने सुखोई-57E की उड़ान दिखाई और भारत को एक ‘गोल्डन ऑफर’ दिया कि भारत को तैयार विमानों की सप्लाई मिलेगी, भारत में भी सुखोई बनेंगे और रूस भारत के ‘एडवांस्ड मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम’, यानी AMCA के तहत स्वदेशी 5th जनरेशन एयरक्राफ्ट बनाने में भी मदद करेगा। सितंबर 2025 में चर्चा हुई कि दो स्क्वाड्रन, यानी करीब 40 सुखोई-57 रूस से ‘फ्लाई-एवे’ कंडीशन में आएंगे और 3 से 5 स्क्वाड्रन HAL और सुखोई मिलकर नासिक प्लांट में बनाएंगे। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपॉव के मुताबिक, ‘मई 2025 में रूस ने ये भी ऑफर दे दिया कि रूस 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा और सुखोई का दो सीटों वाले वर्जन- ‘सुखोई-57E’ का भारत में ही प्रोडक्शन होगा। इसका रूसी वर्जन ‘सुखोई-57D’ मई 2026 में अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट कर चुका है। 4-5 दिसंबर 2025 को पुतिन के भारत आने से पहले उनके प्रेस सेक्रेटरी दमित्री पेस्कोव ने कहा कि सुखोई-57 और S-400/500 एयर डिफेंस सिस्टम का सौदा पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात का मुख्य एजेंडा है। हालांकि सुखोई-57 पर बिना किसी फैसले के ही पुतिन वापस चले गए। मार्च 2026 में भारत के डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि फाइटर जेट्स को लेकर रूस, अमेरिका और फ्रांस के ऑफर्स पर विचार किया जा रहा है। हालांकि जुलाई 2026 में राजेश ने कहा, ‘भारत की सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। हमारा फोकस सुखोई-MKI को अपग्रेड करने पर है।’ अब दोबारा पुतिन की यात्रा के दौरान चर्चा है कि भारत 75 सुखोई-57E जेट्स खरीद सकता है। 11 सितंबर को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मिले। पुतिन BRICS समिट के लिए भारत आए हैं। सवाल-2: भारत की तलाश वापस सुखोई-57 पर क्यों टिक गई है? जवाबः 4 वजहों से भारत को सुखोई-57E जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है… 1. फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले आधे रह गए भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू जेट्स के 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए। एक स्क्वाड्रन में करीब 20 लड़ाकू विमान होते हैं। सरकार स्क्वाड्रन क्षमता को 50 से 60 तक बढ़ाना चाहती है, जबकि अभी एयरफोर्स के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं। इनमें से 6 स्क्वाड्रन में पुराने ‘SEPECAT जगुआर’ फाइटर जेट्स हैं, जो रिटायर होने वाले हैं। मिग-21 और मिग-27 जैसे जेट्स रिटायर हो चुके हैं। वहीं 260 Su-30MKI जेट्स को नए रडार, सेंसर लगाकर अपग्रेड किया जाना है। हालांकि इस बेड़े में कोई नया विमान शामिल नहीं होगा। ऐसे में भारत को एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है। 2. पाकिस्तान-चीन के पास 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट चीन के पास 2017 से ही 5th जनरेशन का J-20 स्टील्थ फाइटर जेट है। सितंबर 2025 में चीन ने अपना दूसरा स्टील्थ फाइटर जेट J-35 भी सेना में शामिल किया है। इसके पहले सिर्फ अमेरिका के पास दो तरह के 5th जनरेशन जेट- F-22 और F-35 हैं। चीन, पाकिस्तान को भी J-35 जेट्स देने जा रहा है। जबकि भारतीय एयरफोर्स के पास अभी तक सबसे एडवांस्ड जेट्स फ्रांस से मिले 4.5 जनरेशन के राफेल हैं। 3. भारत का स्वदेशी 5th जनरेशन प्रोग्राम AMCA लेट-लतीफ AMCA प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय ने 2025 में औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके तहत बनाए जा रहे 5th जनरेशन जेट्स की पहली टेस्ट फ्लाइट 2028 में हो सकती है। इसके 5 प्रोटोटाइप 2031 तक तैयार हो पाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 स्क्वाड्रन, यानी करीब 140-150 विमान बनने में 2035 तक का समय लग जाएगा। तेजस MK1A जैसे विमानों की डिलीवरी में भी देर हो रही है, क्योंकि इनमें लगने वाले अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स, GE के F404 इंजन की सप्लाई में दिक्कत है। 4. भारत के पास दूसरा बेहतर ऑप्शन नहीं अमेरिका F-35 को भारत में बनाने के बजाय तैयार जेट्स देने को ही राजी है। वो इसकी टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर नहीं करना चाहता। बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड के इनमें अपने हथियार नहीं लगाए जा सकते। ये कोड एक तरह से विमान का डिजिटल ब्लूप्रिंट या दिमाग होता है। F-35 के एक्सपोर्ट वर्जन पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता। जबकि F-35, सुखोई से करीब ढाई गुने महंगे हैं। फ्रांस से कुछ और राफेल खरीदने की बात चल रही है, लेकिन उसने भी भारत को राफेल के सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया है। वहीं चीन पहले ही J-10 जैसे विमान पाकिस्तान को दे चुका है और J-35 देने की तैयारी है। इसलिए चीन के J-35

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