Saturday, 25 Jul 2026 | 03:53 PM

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वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में पंजाब की छात्रा की गला घोंटकर हत्या, लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार

वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में पंजाब की छात्रा की गला घोंटकर हत्या, लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार

कनाडा के एडमंटन शहर में पंजाब की 23 साल की छात्रा दमनप्रीत कौर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में उनके 22 साल के भारतीय लिव-इन पार्टनर रितिश कुमार को गिरफ्तार किया है। दमनप्रीत पंजाब के लुधियाना जिले के समराला की रहने वाली थीं। वह स्टूडेंट वीजा पर करीब 5 साल पहले कनाडा गई थीं। एडमंटन पुलिस के मुताबिक, 9 जुलाई को उन्हें एक घर में गंभीर हालत में पाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जुलाई को उनकी मौत हो गई। 14 जुलाई को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना बताई गई। पुलिस ने 22 जुलाई को रितिश कुमार को गिरफ्तार कर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि यह लिव-इन पार्टनर से जुड़ा हत्या का मामला है और फिलहाल किसी अन्य आरोपी की तलाश नहीं की जा रही। परिवार के मुताबिक, दमनप्रीत की पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब उनका शव भारत लाने के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है।

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वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में पंजाब की छात्रा की गला घोंटकर हत्या, लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार

वर्ल्ड अपडेट्स:कनाडा में पंजाब की छात्रा की गला घोंटकर हत्या, लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार

कनाडा के एडमंटन शहर में पंजाब की 23 साल की छात्रा दमनप्रीत कौर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में उनके 22 साल के भारतीय लिव-इन पार्टनर रितिश कुमार को गिरफ्तार किया है। दमनप्रीत पंजाब के लुधियाना जिले के समराला की रहने वाली थीं। वह स्टूडेंट वीजा पर करीब 5 साल पहले कनाडा गई थीं। एडमंटन पुलिस के मुताबिक, 9 जुलाई को उन्हें एक घर में गंभीर हालत में पाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जुलाई को उनकी मौत हो गई। 14 जुलाई को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना बताई गई। पुलिस ने 22 जुलाई को रितिश कुमार को गिरफ्तार कर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि यह लिव-इन पार्टनर से जुड़ा हत्या का मामला है और फिलहाल किसी अन्य आरोपी की तलाश नहीं की जा रही। परिवार के मुताबिक, दमनप्रीत की पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब उनका शव भारत लाने के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के वकील करीम खान पद से हटाए गए, यौन उत्पीड़न का आरोप इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के वकील करीम खान को यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच पद से हटा दिया गया है। ICC की सदस्य देशों की सभा ने शुक्रवार को इस पर मतदान कर उन्हें हटाने का फैसला लिया। वहीं, करीम खान की कानूनी टीम ने इस फैसले को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच पैनल को उनके खिलाफ गलत व्यवहार के पक्के सबूत नहीं मिले। साथ ही, उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका भी नहीं दिया गया। करीम खान 2024 में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद चर्चा में आए थे। इसके बाद अमेरिका ने करीम खान समेत ICC के कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस साल जून में एक निगरानी पैनल ने खान पर गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए अपना पद छोड़ दिया था।

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ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने धमकी दी कि अगर दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल ही में बीजिंग में हुई उनकी मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे किसी भी हाल में ईरान को हथियार नहीं देंगे। चीनी कंपनियों के लिए भी यही चीज लागू है। ट्रम्प ने कहा मुझे जिनपिंग पर यकीन है। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे। ट्रम्प ने कहा कि यूक्रेन जंग के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो देशों को बेचता है। नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं। उसके बाद वे इन्हें किस तरह आगे भेजते हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. नेतन्याहू अमेरिका जाएंगे, जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। वह राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ईरान जंग शुरू होने के बाद पहली बार होगी। 2. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार: ईरान-अमेरिका में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। 3. कुवैत में 3 अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत में मौजूद अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। इसमें कैंप अरिफजान, कैंप दोहा और कैंप अदैरी को निशाना बनाया गया। 4. ईरान बोला- अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं और उसकी धमकियां भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान किर्गिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया। 5. होर्मुज में 28 क्रू मेंबर्स वाले LPG टैंकर पर हमला: ईरान के जलक्षेत्र में एक LPG टैंकर पर हमला हुआ। मोजाम्बिक के झंडे वाला यह टैंकर दिशा 28 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा था। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 13वां टेस्ट कामयाब:पहली बार पानी में सुरक्षित लैंड कराया, अंतरिक्ष में 20 स्टारलिंक सैटेलाइट भी तैनात किए

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 13वां टेस्ट कामयाब:पहली बार पानी में सुरक्षित लैंड कराया, अंतरिक्ष में 20 स्टारलिंक सैटेलाइट भी तैनात किए

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान कामयाब रही। पिछले हफ्ते इंजन इग्निशन में खराबी के कारण टले लॉन्च के बाद इस मिशन में स्टारशिप के अपर स्टेज ने हिंद महासागर में लैंड किया, जबकि इसके बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ से स्टारशिप ने भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 4 बजे उड़ान भरी थी। ये टेस्ट 1 घंटे 3 मिनट का था। इस टेस्ट की सफलता स्पेसएक्स और नासा दोनों के लिए बेहद जरूरी थी। अगले साल नासा की मून लैंडिंग इसी पर निर्भर है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। पहली बार पानी में सुरक्षित तैरता दिखा स्टारशिप स्पेसएक्स के प्रवक्ता डैन हुओट ने लाइव स्ट्रीम के दौरान कहा कि “यह पहली बार है जब हमने पूरे स्टारशिप को सुरक्षित पानी में उतारा। लैंडिंग के दौरान स्टारशिप अपनी ‘बेली-फ्लॉप’ स्थिति से सीधा हुआ और पानी पर लंबवत उतरा। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक तरफ झुककर समुद्र में तैरने लगा। पहली बार असली स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स की तैनाती इस मिशन में स्टारशिप ने पहली बार नए वर्जन के 20 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में तैनात किया। स्पेसएक्स ने पुष्टि की कि उसने सभी 20 टेस्ट सैटेलाइट्स से संपर्क स्थापित कर लिया है। ये सैटेलाइट्स सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर थे और इन्हें स्थायी रूप से अंतरिक्ष में रहने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। तैनात होने के लगभग 20 मिनट बाद ये पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो गए। सुपर हैवी बूस्टर और ‘हॉट स्टेजिंग’ में सुधार लॉन्च के समय सुपर हैवी बूस्टर के सभी 33 रैप्टर इंजनों ने उड़ान भरी, जिससे 1.8 करोड़ पाउंड का थ्रस्ट पैदा हुआ। स्पेसएक्स के स्टारशिप लॉन्च के सीनियर डायरेक्टर जस्टिन स्टेयर के मुताबिक, “यह दुनिया की सबसे बड़ी मशीन गन की तरह है जो गोलियों की जगह हर सेकंड 11 पिकअप ट्रक फायर कर रही हो।” उड़ान के 2 मिनट बाद मेन इंजन कटऑफ (MECO) के बाद ‘हॉट स्टेजिंग’ के जरिए स्टारशिप बूस्टर से अलग हुआ। मई में हुई पिछली उड़ान में सभी 6 इंजन एक साथ चालू न होने से बूस्टर उल्टा घूम गया था, जिसे इस बार सुधार लिया गया था। अलग होने के बाद बूस्टर ने 13 इंजनों का इस्तेमाल करके बूस्टबैक बर्न किया। लैंडिंग के समय इसकी स्पीड थोड़ी ज्यादा थी और सभी 13 इंजन चालू नहीं हो पाए, फिर भी इसने खाड़ी में एक नियंत्रित लैंडिंग की। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 12वां टेस्ट: इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग ‘स्टारशिप’ का 12वां टेस्ट सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा था। इसमें स्टारशिप के नए और बड़े वर्जन (V3) का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस टेस्ट को भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग

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दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 13वां टेस्ट कामयाब:पहली बार पानी में सुरक्षित लैंड कराया, अंतरिक्ष में 20 स्टारलिंक सैटेलाइट भी तैनात किए

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 13वां टेस्ट कामयाब:पहली बार पानी में सुरक्षित लैंड कराया, अंतरिक्ष में 20 स्टारलिंक सैटेलाइट भी तैनात किए

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान कामयाब रही। पिछले हफ्ते इंजन इग्निशन में खराबी के कारण टले लॉन्च के बाद इस मिशन में स्टारशिप के अपर स्टेज ने हिंद महासागर में लैंड किया, जबकि इसके बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ से स्टारशिप ने भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 4 बजे उड़ान भरी थी। ये टेस्ट 1 घंटे 3 मिनट का था। इस टेस्ट की सफलता स्पेसएक्स और नासा दोनों के लिए बेहद जरूरी थी। अगले साल नासा की मून लैंडिंग इसी पर निर्भर है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। पहली बार पानी में सुरक्षित तैरता दिखा स्टारशिप स्पेसएक्स के प्रवक्ता डैन हुओट ने लाइव स्ट्रीम के दौरान कहा कि “यह पहली बार है जब हमने पूरे स्टारशिप को सुरक्षित पानी में उतारा। लैंडिंग के दौरान स्टारशिप अपनी ‘बेली-फ्लॉप’ स्थिति से सीधा हुआ और पानी पर लंबवत उतरा। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक तरफ झुककर समुद्र में तैरने लगा। पहली बार असली स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स की तैनाती इस मिशन में स्टारशिप ने पहली बार नए वर्जन के 20 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में तैनात किया। स्पेसएक्स ने पुष्टि की कि उसने सभी 20 टेस्ट सैटेलाइट्स से संपर्क स्थापित कर लिया है। ये सैटेलाइट्स सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर थे और इन्हें स्थायी रूप से अंतरिक्ष में रहने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। तैनात होने के लगभग 20 मिनट बाद ये पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो गए। सुपर हैवी बूस्टर और ‘हॉट स्टेजिंग’ में सुधार लॉन्च के समय सुपर हैवी बूस्टर के सभी 33 रैप्टर इंजनों ने उड़ान भरी, जिससे 1.8 करोड़ पाउंड का थ्रस्ट पैदा हुआ। स्पेसएक्स के स्टारशिप लॉन्च के सीनियर डायरेक्टर जस्टिन स्टेयर के मुताबिक, “यह दुनिया की सबसे बड़ी मशीन गन की तरह है जो गोलियों की जगह हर सेकंड 11 पिकअप ट्रक फायर कर रही हो।” उड़ान के 2 मिनट बाद मेन इंजन कटऑफ (MECO) के बाद ‘हॉट स्टेजिंग’ के जरिए स्टारशिप बूस्टर से अलग हुआ। मई में हुई पिछली उड़ान में सभी 6 इंजन एक साथ चालू न होने से बूस्टर उल्टा घूम गया था, जिसे इस बार सुधार लिया गया था। अलग होने के बाद बूस्टर ने 13 इंजनों का इस्तेमाल करके बूस्टबैक बर्न किया। लैंडिंग के समय इसकी स्पीड थोड़ी ज्यादा थी और सभी 13 इंजन चालू नहीं हो पाए, फिर भी इसने खाड़ी में एक नियंत्रित लैंडिंग की। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 12वां टेस्ट: इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग ‘स्टारशिप’ का 12वां टेस्ट सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा था। इसमें स्टारशिप के नए और बड़े वर्जन (V3) का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस टेस्ट को भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा कि वह लंबे समय से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में डॉक्टरों ने उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से उन्हें कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है और उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लंदन दौरे पर उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा।

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा- मैं लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहा हूं। हाल ही में डॉक्टरों ने मुझमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। हसीना के देश छोड़ने के बाद भी पद नहीं छोड़ा था मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उस आंदोलन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद शहाबुद्दीन ही अवामी लीग सरकार के दौर के एकमात्र संवैधानिक पदाधिकारी थे, जो 2 साल बाद भी पद पर बने हुए थे। लंदन दौरे पर शेख हसीना से बातचीत का आरोप वह 9 मई को इलाज के लिए लंदन गए थे और 18 मई को ढाका लौटे थे। बांग्लादेशी समाचार पत्रों की रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। जैसे ही इस बातचीत की भनक बीएनपी (BNP) के शीर्ष नेतृत्व को लगी, उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से लिया। इसके बाद राष्ट्रपति तक यह मैसेज पहुंचाया कि शेख हसीना से संपर्क साधना या बातचीत करना मौजूदा राजनीतिक माहौल में स्वीकार्य नहीं है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अखबार प्रोथोम आलो ने भी सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि सरकार इस बात से नाराज है कि राष्ट्रपति ने हाल ही में शेख हसीना से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की थी। वहीं द डेली स्टार ने बीएनपी के एक सीनियर नेता के हवाले से लिखा था कि शहाबुद्दीन और शेख हसीना के बीच कथित फोन पर हुई बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं है। दरअसल शेख हसीना ने इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है। इससे देश का राजनीतिक माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। वह सत्तारूढ़ अवामी लीग के उम्मीदवार थे और निर्विरोध चुने गए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था। स्पीकर इलाज के लिए बैंकॉक गए थे स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद 19 जुलाई को इलाज के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक गए थे। उनकी वापसी रविवार को तय थी, लेकिन उन्होंने अपना दौरा बीच में ही खत्म कर दो दिन पहले ढाका लौटने का फैसला किया। ढाका हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि विदेश में होने के कारण उन्हें राष्ट्रपति के इस्तीफे के फैसले की जानकारी नहीं थी।

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नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाया है। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठनों का कहना है कि नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को उस समय मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया, जब उनसे तीन सीनियर चीफ जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। तीन सीनियर जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। नेपाल के संविधान के अनुसार किसी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को केवल गंभीर आरोप साबित होने और महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हटाया जा सकता है। अगर बिना ऐसी प्रक्रिया अपनाए या सिर्फ राजनीतिक दबाव के कारण इन न्यायाधीशों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठेंगे। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। लेकिन संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है।

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नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

Nepal Balen Shah Controversy | PM Pressuring Supreme Court Judges

काठमांडू3 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाया है। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शर्मा उस समय वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे सीनियर तीन न्यायाधीश को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी वजह से विवाद शुरू हुआ। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को उस समय मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया, जब उनसे तीन सीनियर चीफ जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। इसके अलावा संगठन का आरोप है कि मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की भी खुली और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। संसदीय सुनवाई समिति को शर्मा के खिलाफ कुल 16 शिकायतें मिली थीं। हालांकि ये शिकायतें गोपनीय रखी गई और मीडिया के सामने पेश नहीं की गई। नेपाल के मुख्य न्यायधीष मनोज कुमार शर्मा ने मई 2016 में पद की शपथ ली। बिना सबूत के जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नेपाल के संविधान के मुताबिक, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होते ही उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। अगर सुप्रीम कोर्ट के तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को एक साथ निलंबित किया गया तो अदालत की संरचना और कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में होगा, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार के कई अहम फैसलों और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर रही है। संगठनों का कहना है कि अगर बिना ठोस संवैधानिक आधार के महाभियोग का इस्तेमाल किया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार अदालत की संरचना बदलकर लंबित मामलों के फैसलों को प्रभावित करना चाहती है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। नेपाल के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार शर्मा ने 19 मई को पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें शपथ दिलाई थी। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। लेकिन संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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US Saudi Nuclear Deal Conditions; Donald Trump Abraham Accords

US Saudi Nuclear Deal Conditions; Donald Trump Abraham Accords

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से अटके परमाणु समझौते पर बुधवार को हस्ताक्षर हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह डील अटक गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते में नई शर्त जोड़ दी है। उन्होंने कहा कि डील तभी आगे बढ़ेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल से राजनयिक रिश्ते सामान्य करेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं मिलेगी। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर सऊदी से अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए कहा। बिना बताए डील की घोषणा से ट्रम्प नाराज वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स की शर्त शुरू से ही ट्रम्प की नीति का हिस्सा थी। वहीं ऊर्जा विभाग ने किसी भी मतभेद से इनकार किया। तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (दाएं) और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट की है। ट्रम्प की नई शर्त ने सऊदी को भी चौंकाया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की घोषणा से सऊदी अरब भी हैरान रह गया। समझौते के मसौदे में कुछ शर्तें पूरी होने पर सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने की बात थी, लेकिन ट्रम्प ने इसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। दोनों देशों ने करीब दो दशक पहले परमाणु ऊर्जा सहयोग की पहल की थी। पिछले साल अक्टूबर में प्रारंभिक सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और कांग्रेस की संभावित आपत्तियों के कारण समझौता महीनों तक अटका रहा। पिछले सप्ताह ऊर्जा विभाग को लगा कि ट्रम्प की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद इसकी घोषणा कर दी गई। परमाणु एक्सपर्ट्स ने यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और IAEA के अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई। वहीं समर्थकों का तर्क था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन या रूस सऊदी अरब में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आखिर अब्राहम अकॉर्ड्स है क्या, जिसे लेकर डील अटक गई? दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की पहल पर हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान इसके तहत इजराइल से जुड़ चुके हैं। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इसी समझौते का हिस्सा बने। ट्रम्प का मानना है कि अगर सऊदी इजराइल से रिश्ते सामान्य करता है, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका का रणनीतिक गठजोड़ और मजबूत होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन भी सऊदी परमाणु समझौते को इजराइल से रिश्ते सामान्य करने से जोड़कर आगे बढ़ा रहा था। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा युद्ध के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। सऊदी का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए अलग राज्य का रास्ता साफ हुए बिना वह इजराइल से आधिकारिक रिश्ते नहीं बनाएगा। यही वजह है कि अब न्यूक्लियर डील भी इस शर्त पर अटक गई है। ट्रम्प ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर इनकार क्यों किया परमाणु बिजलीघर चलाने के लिए यूरेनियम को एक खास स्तर तक एनरिच (संवर्धित) किया जाता है। लेकिन यही तकनीक अगर बहुत अधिक स्तर तक पहुंच जाए, तो उसी यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। इसलिए यूरेनियम एनरिचमेंट को दुनिया की सबसे संवेदनशील परमाणु तकनीकों में माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका आमतौर पर किसी भी देश को अपनी जमीन पर यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति देने से बचता है। उसे आशंका रहती है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रम के लिए भी हो सकता है। सऊदी अरब को लेकर भी यही चिंता है, इसलिए ट्रम्प ने साफ कर दिया कि न्यूक्लियर डील होगी, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत नहीं मिलेगी। ——————— अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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