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Pakistan Debt Payment Prep | Saudi Qatar Aid Eases UAE Pressure

Pakistan Debt Payment Prep | Saudi Qatar Aid Eases UAE Pressure

16 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान को सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर (लगभग 46,500 करोड़ रुपए) की वित्तीय मदद मिलेगी। यह मदद ऐसे समय में आ रही है, जब देश को इस महीने के अंत तक UAE को 3.5 अरब डॉलर (लगभग 29,000 करोड़ रुपए) चुकाने हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति संभालने के लिए यह मदद अहम मानी जा रही है। UAE ने हाल ही में कर्ज रोलओवर की नीति में बदलाव किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अप्रैल तक UAE का 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने का फैसला किया। तय शेड्यूल के मुताबिक 23 अप्रैल तक पाकिस्तान को इस कर्ज की आखरी किस्त देनी है। इसका मतलब कर्ज चुकाने के लिए सिर्फ 11 दिन का समय बाकी है। इसके अलावा, अप्रैल में पाकिस्तान को कुल करीब 4.8 अरब डॉलर चुकाने हैं, जिसमें एक बड़ा बॉन्ड भी शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोहा में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करते हुए। फोटो 31 अक्टूबर, 2024 की है। IMF की पाकिस्तान में पैसे बनाए रखने की शर्त IMF ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए 3 साल का प्रोग्राम शुरू किया है, जिसके तहत उसे करीब 7 अरब डॉलर की मदद मिलेगी। इसके बदले IMF ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के बड़े कर्जदाता सऊदी अरब, चीन और UAE अपने कर्ज के पैसे 3 साल तक तक पाकिस्तान में ही रखेंगे, यानी वे पैसा वापस नहीं निकालेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगे चलकर कतर, UAE की जगह ले सकता है। अप्रैल अंत तक UAE का पैसा चुकाना है UAE ने हाल में कर्ज रोलओवर की नीति बदलकर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ा। इसके बाद पाकिस्तान ने UAE का 3.5 अरब डॉलर यानी करीब 29,000 करोड़ रुपए का कर्ज 11, 17 और 23 अप्रैल को अलग-अलग किस्तों में लौटाने का फैसला लिया। ये फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही दूसरे देशों की मदद पर टिका है। ये कर्ज पाकिस्तान को अलग-अलग समय पर मिला था। UAE ने 2018 में 2 अरब डॉलर का लोन दिया था, जिसे बार-बार बढ़ाया गया। 2023 में 1 अरब डॉलर और दिया गया था, ताकि पाकिस्तान IMF की शर्तें पूरी कर सके। शहबाज शरीफ UAE के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ। फोटो 12 जून 2025 की है। साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी काफी समय से चल रही है। इससे पहले औरंगजेब ने इस्लामाबाद में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जादान से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की। इस बैठक के बाद अधिकारियों ने इसे सकारात्मक बताया था। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंध और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। औरंगजेब ने वॉशिंगटन में फिर से मुलाकात की इच्छा भी जताई। सऊदी अरब पहले से ही पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है। अब तक वह 5 अरब डॉलर के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। इस बीच सऊदी अरब ने शनिवार को पुष्टि की कि पाकिस्तान एयरफोर्स के पहले बैच का स्टॉफ, फाइटर जेट्स और सपोर्ट विमान सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पहुंच चुके हैं। यह तैनाती दोनों देशों के बीच हुए एक जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत की गई है। शहबाज शरीफ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के साथ। पाकिस्तान के वित्त मंत्री IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरे पर इसी बीच पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब वॉशिंगटन दौरे पर हैं। वह 13 से 18 अप्रैल तक होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा लेंगे। वह अपने दौरे में 50 से ज्यादा उच्च स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इनमें IMF, वर्ल्ड बैंक, निवेशक और कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। डॉन के मुताबिक, औरंगजेब चीन, सऊदी अरब, UAE, तुर्किये और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। वे G24 फाइनेंस मिनिस्टर्स मीटिंग और क्लाइमेट एक्शन फोरम में भी हिस्सा लेंगे। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है: दूसरे देशों के सामने हमारा सिर झुका रहता है, उनकी शर्तें मानना हमारी मजबूरी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज ने विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, शहबाज ने शुक्रवार को माना कि देश की बदहाल आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बार‑बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है।’ पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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1 घंटे पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान को सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर (लगभग 46,500 करोड़ रुपए) की वित्तीय मदद मिलेगी। यह मदद ऐसे समय में आ रही है, जब देश को इस महीने के अंत तक UAE को 3.5 अरब डॉलर (लगभग 29,000 करोड़ रुपए) चुकाने हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति संभालने के लिए यह मदद अहम मानी जा रही है। UAE ने हाल ही में कर्ज रोलओवर की नीति में बदलाव किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अप्रैल तक UAE का 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने का फैसला किया। तय शेड्यूल के मुताबिक 23 अप्रैल तक पाकिस्तान को इस कर्ज की आखरी किस्त देनी है। इसका मतलब कर्ज चुकाने के लिए सिर्फ 11 दिन का समय बाकी है। इसके अलावा, अप्रैल में पाकिस्तान को कुल करीब 4.8 अरब डॉलर चुकाने हैं, जिसमें एक बड़ा बॉन्ड भी शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोहा में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करते हुए। फोटो 31 अक्टूबर, 2024 की है। IMF की पाकिस्तान में पैसे बनाए रखने की शर्त IMF ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए 3 साल का प्रोग्राम शुरू किया है, जिसके तहत उसे करीब 7 अरब डॉलर की मदद मिलेगी। इसके बदले IMF ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के बड़े कर्जदाता सऊदी अरब, चीन और UAE अपने कर्ज के पैसे 3 साल तक तक पाकिस्तान में ही रखेंगे, यानी वे पैसा वापस नहीं निकालेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगे चलकर कतर, UAE की जगह ले सकता है। अप्रैल अंत तक UAE का पैसा चुकाना है UAE ने हाल में कर्ज रोलओवर की नीति बदलकर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ा। इसके बाद पाकिस्तान ने UAE का 3.5 अरब डॉलर यानी करीब 29,000 करोड़ रुपए का कर्ज 11, 17 और 23 अप्रैल को अलग-अलग किस्तों में लौटाने का फैसला लिया। ये फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही दूसरे देशों की मदद पर टिका है। ये कर्ज पाकिस्तान को अलग-अलग समय पर मिला था। UAE ने 2018 में 2 अरब डॉलर का लोन दिया था, जिसे बार-बार बढ़ाया गया। 2023 में 1 अरब डॉलर और दिया गया था, ताकि पाकिस्तान IMF की शर्तें पूरी कर सके। शहबाज शरीफ UAE के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ। फोटो 12 जून 2025 की है। साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी काफी समय से चल रही है। इससे पहले औरंगजेब ने इस्लामाबाद में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जादान से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की। इस बैठक के बाद अधिकारियों ने इसे सकारात्मक बताया था। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंध और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। औरंगजेब ने वॉशिंगटन में फिर से मुलाकात की इच्छा भी जताई। सऊदी अरब पहले से ही पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है। अब तक वह 5 अरब डॉलर के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। इस बीच सऊदी अरब ने शनिवार को पुष्टि की कि पाकिस्तान एयरफोर्स के पहले बैच का स्टॉफ, फाइटर जेट्स और सपोर्ट विमान सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पहुंच चुके हैं। यह तैनाती दोनों देशों के बीच हुए एक जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत की गई है। शहबाज शरीफ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के साथ। पाकिस्तान के वित्त मंत्री IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरे पर इसी बीच पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब वॉशिंगटन दौरे पर हैं। वह 13 से 18 अप्रैल तक होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा लेंगे। वह अपने दौरे में 50 से ज्यादा उच्च स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इनमें IMF, वर्ल्ड बैंक, निवेशक और कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। डॉन के मुताबिक, औरंगजेब चीन, सऊदी अरब, UAE, तुर्किये और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। वे G24 फाइनेंस मिनिस्टर्स मीटिंग और क्लाइमेट एक्शन फोरम में भी हिस्सा लेंगे। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है: दूसरे देशों के सामने हमारा सिर झुका रहता है, उनकी शर्तें मानना हमारी मजबूरी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज ने विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, शहबाज ने शुक्रवार को माना कि देश की बदहाल आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बार‑बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है।’ पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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युंगाडा आर्मी चीफ ने तुर्किये से सबसे खूबसूरत महिला मांगी:कहा- शादी करूंगा, नहीं मिली तो डिप्लोमेटिक रिश्ते तोड़ेंगे, तुर्किश एयरलाइनंस पर भी रोक लगा देंगे

युंगाडा आर्मी चीफ ने तुर्किये से सबसे खूबसूरत महिला मांगी:कहा- शादी करूंगा, नहीं मिली तो डिप्लोमेटिक रिश्ते तोड़ेंगे, तुर्किश एयरलाइनंस पर भी रोक लगा देंगे

युगांडा के आर्मी चीफ मुहूजी काइनरुगाबा ने तुर्किये से 1 अरब डॉलर और ‘सबसे खूबसूरत महिला’ को अपनी पत्नी बनाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं हुई तो तुर्किये के साथ कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए जाएंगे और तुर्किश एयरलाइन पर भी रोक लगाई जा सकती है। काइनरुगाबा ने X पर लिखा कि अगर तुर्किये ने हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो 30 दिन के भीतर संबंध तोड़ दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि या तो वे हमें भुगतान करें या हम उनका दूतावास बंद कर देंगे। उन्होंने युगांडावासियों को तुर्किये यात्रा से बचने की सलाह दी और साथ ही इजराइल के समर्थन में 1 लाख सैनिक भेजने की पेशकश भी की। हालांकि, इस पर तुर्किये या सोमालिया की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह बयान सरकारी नीति है या उनकी निजी राय। सोमालिया मिशन का हवाला देकर 1 अरब डॉलर मांगे कैनेरुगाबा ने पोस्ट में तुर्किये पर आरोप लगाया कि उसने सोमालिया में इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स से फायदा उठाया, जबकि युगांडा ने अल-शबाब जैसे आतंकी संगठनों से लड़ने का बोझ उठाया। इसी आधार पर उन्होंने 1 अरब डॉलर की मांग की। हाल ही में भी काइनरुगाबा ने सोशल मीडिया पर कई विवादित पोस्ट किए हैं। उन्होंने विपक्षी नेता बॉबी वाइन को लेकर सिर काटने जैसी धमकी दी, जिस पर काफी विवाद हुआ। हालांकि बाद में उन्होंने इसे मजाक बताया और माफी मांग ली। इसी बीच, काइनरुगाबा ने कुछ दिन पहले X से हटने के बाद फिर वापसी की है। उन्होंने ‘आई एम बैक’ लिखकर वापसी की घोषणा की और कहा कि वे दुनिया को हिला देंगे। उन्होंने 7 दिन पहले कहा था कि वे X छोड़ रहे हैं ताकि अपनी सैन्य जिम्मेदारियों पर ज्यादा ध्यान दे सकें। वापसी के बाद उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दिया कि जो भी व्यक्ति सेना जैसी वर्दी में दिखे, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने एक अमेरिकी राजनयिक को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी, अगर वह उन्हें सलाम नहीं करता। काइनरुगाबा, जो 50 साल के हैं, युगांडा की सेना में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता है। हालांकि राष्ट्रपति मुसेवेनी ने इससे इनकार किया है। हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे धीरे-धीरे खुद को राजनीति में स्थापित कर रहे हैं और भविष्य में राष्ट्रपति पद की दावेदारी कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक युगांडा में मुसेवेनी 1986 से सत्ता में हैं, ऐसे में अगर बेटे को उत्तराधिकारी माना जाए तो यह संदेश जाता है कि सत्ता एक ही परिवार में ट्रांसफर हो रही है। मेलोनी से शादी के बदले 100 गाय देने की पेशकश की थी यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने इस तरह की मांग की हो। 2022 में उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से शादी के बदले 100 गाय देने की पेशकश की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि अगर इटली ने प्रस्ताव ठुकराया, तो रोम पर कब्जा करना पड़ेगा। इस बयान के बाद उनके पिता और युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी को माफी मांगनी पड़ी थी। 2022 में उन्होंने केन्या पर हमला करने की धमकी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि नैरोबी पर कब्जा करने में दो हफ्ते भी नहीं लगेंगे। इसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से पद से हटा दिया गया था और सरकार को माफी मांगनी करनी पड़ी थी। रूस-येक्रेन युद्ध में रूस का किया समर्थन इससे पहले उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में व्लादिमीर पुतिन का समर्थन किया था और केन्या के तुर्काना समुदाय को लेकर भी विवादित बयान दिए थे। फरवरी 2022 में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सही हैं और दुनिया के कई अश्वेत लोग रूस के साथ हैं। इसके बाद मार्च 2023 में उन्होंने यह भी कहा कि अगर मॉस्को पर कोई खतरा आया, तो युगांडा अपनी सेना भेजेगा। वहीं अक्टूबर 2022 में उनके एक और बयान से केन्या के साथ रिश्ते बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि उनकी सेना दो हफ्ते से भी कम समय में नैरोबी पर कब्जा कर सकती है। इस बयान के बाद उनके पिता और राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी को केन्या से माफी मांगनी पड़ी। —————————–

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World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos

World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos

Hindi News International World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos| Trump, Russia, China, America, Putin 13 मिनट पहले कॉपी लिंक अस्पताल में रखे मृतकों के शव। हैती के सिटाडेल लाफेरियेर किले में एक वार्षिक समारोह के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना किले के एंट्री गेट के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादा भीड़ और अचानक हुई बारिश के कारण हालात बिगड़ गए। लोग एक साथ बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, जिससे भगदड़ मच गई। यह किला 19वीं सदी की शुरुआत में बनाया गया था और UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। हर साल यहां बड़ी संख्या में छात्र और पर्यटक आते हैं। हैती के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमे ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि मौके पर कई युवा मौजूद थे। राहत और बचाव टीम मौके पर तैनात है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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ईरान-अमेरिका की 21 घंटे चली बातचीत बेनतीजा:अमेरिकी उपराष्ट्रपति बिना डील पाकिस्तान से रवाना, कहा- यह ईरान के लिए बुरी खबर

ईरान-अमेरिका की 21 घंटे चली बातचीत बेनतीजा:अमेरिकी उपराष्ट्रपति बिना डील पाकिस्तान से रवाना, कहा- यह ईरान के लिए बुरी खबर

पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर चल रही बातचीत बेनतीजा रही। यह 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली। वेंस अब अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। देश लौटने से पहले वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि समझौता न होना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बिना किसी डील के ही लौट रहा है। वेंस ने कहा कि अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें नहीं माना। किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वहीं, ईरान ने भी कहा है कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं। इस वजह से समझौते का रास्ता नहीं निकल पाया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स पाकिस्तान में बातचीत बेनतीजा: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। वेंस ने कहा कि हमें पूरी तरह भरोसा चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसी तैयारी करेगा जिससे वह जल्दी हथियार बना सके। अमेरिका ने माइंस हटाने का अभियान शुरू किया: अमेरिकी सेना के सेंटकॉम (CENTCOM) ने कहा है कि अमेरिकी युद्धपोत समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहे हैं। आरोप है कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। नेतन्याहू बोले- अभियान अभी खत्म नहीं: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि हमले इसलिए किए गए क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब था। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इमोशनल मैसेज: ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ शुक्रवार रात प्लेन में बच्चों की तस्वीरें रखकर पाकिस्तान पहुंचे। ये बच्चे 28 फरवरी को मिसाइल हमले में मारे गए थे। इसका इल्जाम अमेरिका-इजराइल पर लगा था। लेबनान में हमले जारी: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, तुफाहता इलाके में हुए हमलों में 9 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 5 की हालत गंभीर है। जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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53 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान-अमेरिका के प्रतिनिधि सीजफायर वार्ता के लिए शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। यहां पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दोनों का अलग-अलग अंदाज में स्वागत किया। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जबकि ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मीटिंग का नेतृत्व किया। ईरानी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त आसिम मुनीर आर्मी ड्रेस में थे। अमेरिकी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त मुनीर ने नॉर्मल सूट पहना हुआ था। इस दौरान ध्यान रखा गया कि इन हाई-लेवल मुलाकातों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय आर्मी चीफ मुनीर सामने आए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं बल्कि पावर और मैसेजिंग का प्रदर्शन था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस को रिसीव करने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृहमंत्री मोहसिन नकवी पहुंचे। यूनिफॉर्म के जरिए अलग-अलग संदेश रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन के मुताबिक यह कदम मैसेज देने के लिए था। उनके मुताबिक, “मुनीर अमेरिका के सामने खुद को डिप्लोमैट और ईरान के सामने सैनिक के रूप में दिखाना चाहते हैं।” डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन ने कहा कि ईरान के साथ हालिया तनाव को देखते हुए कॉम्बैट ड्रेस (मिलिट्री यूनिफॉर्म) पहनना ताकत दिखाने की कोशिश थी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच पहले मिसाइल हमले और बॉर्डर टकराव हो चुका है, इसलिए यह कदम कैमरों के लिए भी था। अमेरिका के सामने ‘राजनेता’ की छवि जेडी वेंस से मुलाकात में सूट पहनकर मुनीर ने खुद को राजनेता की तरह पेश करने की कोशिश की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे वह दिखाना चाहते हैं कि वह सिर्फ सैन्य नेता नहीं, बल्कि कूटनीतिक भूमिका भी निभा सकते हैं। इससे पहले भी वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात में सूट पहन चुके हैं। ईरान-पाकिस्तान तनाव का बैकग्राउंड 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। उसका दावा था कि वह जैश अल-अदल नाम के आतंकी संगठन को निशाना बना रहा है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में सैन्य कार्रवाई की थी। बाद में चीन के हस्तक्षेप के बाद तनाव कम हुआ, लेकिन रिश्तों में खटास बनी रही। पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर शुक्रवार रात ईरानी डेलिगेशन को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे। सत्ता के केंद्र में खुद को दिखाने की कोशिश एक अहम बात यह रही कि इन मुलाकातों में आर्मी चीफ का मौजूद रहना प्रोटोकॉल के हिसाब से असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री आगे रहते हैं। रिटायर्ड मेजर जनरल संजय सोई ने कहा कि पाकिस्तान में असल सत्ता सेना के पास है और मुनीर इसे खुलकर दिखा रहे हैं। उनके मुताबिक, “वह हर अंतरराष्ट्रीय बातचीत में दिखना चाहते हैं और यह जताना चाहते हैं कि फैसले वही लेते हैं।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान और अमेरिका के साथ इन बैठकों के जरिए आसिम मुनीर ने कूटनीतिक संतुलन दिखाया और यह स्पष्ट किया कि फिलहाल पाकिस्तान में असली शक्ति उनके पास ही है। ————————— ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान पर हमले के लिए कैसे माने थे ट्रम्प:नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस आकर प्लान बताया; उपराष्ट्रपति वेंस खिलाफ थे, फिर भी जंग में कूदे तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Suit vs Military Uniform for US & Iran

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12 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान-अमेरिका के प्रतिनिधि सीजफायर वार्ता के लिए शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। यहां पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दोनों का अलग-अलग अंदाज में स्वागत किया। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जबकि ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मीटिंग का नेतृत्व किया। ईरानी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त आसिम मुनीर आर्मी ड्रेस में थे। अमेरिकी डेलिगेशन को रिसीव करते वक्त मुनीर ने नॉर्मल सूट पहना हुआ था। इस दौरान ध्यान रखा गया कि इन हाई-लेवल मुलाकातों में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय आर्मी चीफ मुनीर सामने आए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं बल्कि पावर और मैसेजिंग का प्रदर्शन था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस को रिसीव करने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृहमंत्री मोहसिन नकवी पहुंचे। यूनिफॉर्म के जरिए अलग-अलग संदेश रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन के मुताबिक यह कदम मैसेज देने के लिए था। उनके मुताबिक, “मुनीर अमेरिका के सामने खुद को डिप्लोमैट और ईरान के सामने सैनिक के रूप में दिखाना चाहते हैं।” डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन ने कहा कि ईरान के साथ हालिया तनाव को देखते हुए कॉम्बैट ड्रेस (मिलिट्री यूनिफॉर्म) पहनना ताकत दिखाने की कोशिश थी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच पहले मिसाइल हमले और बॉर्डर टकराव हो चुका है, इसलिए यह कदम कैमरों के लिए भी था। अमेरिका के सामने ‘राजनेता’ की छवि जेडी वेंस से मुलाकात में सूट पहनकर मुनीर ने खुद को राजनेता की तरह पेश करने की कोशिश की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे वह दिखाना चाहते हैं कि वह सिर्फ सैन्य नेता नहीं, बल्कि कूटनीतिक भूमिका भी निभा सकते हैं। इससे पहले भी वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात में सूट पहन चुके हैं। ईरान-पाकिस्तान तनाव का बैकग्राउंड 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। उसका दावा था कि वह जैश अल-अदल नाम के आतंकी संगठन को निशाना बना रहा है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान इलाके में सैन्य कार्रवाई की थी। बाद में चीन के हस्तक्षेप के बाद तनाव कम हुआ, लेकिन रिश्तों में खटास बनी रही। पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर शुक्रवार रात ईरानी डेलिगेशन को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे। सत्ता के केंद्र में खुद को दिखाने की कोशिश एक अहम बात यह रही कि इन मुलाकातों में आर्मी चीफ का मौजूद रहना प्रोटोकॉल के हिसाब से असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री आगे रहते हैं। रिटायर्ड मेजर जनरल संजय सोई ने कहा कि पाकिस्तान में असल सत्ता सेना के पास है और मुनीर इसे खुलकर दिखा रहे हैं। उनके मुताबिक, “वह हर अंतरराष्ट्रीय बातचीत में दिखना चाहते हैं और यह जताना चाहते हैं कि फैसले वही लेते हैं।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान और अमेरिका के साथ इन बैठकों के जरिए आसिम मुनीर ने कूटनीतिक संतुलन दिखाया और यह स्पष्ट किया कि फिलहाल पाकिस्तान में असली शक्ति उनके पास ही है। ————————— ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान पर हमले के लिए कैसे माने थे ट्रम्प:नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस आकर प्लान बताया; उपराष्ट्रपति वेंस खिलाफ थे, फिर भी जंग में कूदे तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार शीर्ष पद पर महिला नेतृत्व की उम्मीद बनी है। मौजूदा प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल दिसंबर में खत्म होगा। इस बार चार उम्मीदवार शार्ट लिस्ट हुए हैं। इनमें दो महिलाएं मिशेल बैचलेट (74) व रेबेका ग्रिनस्पैन (70) हैं। न्यूयॉर्क में 21-22 अप्रैल को दोनों की डिबेट होगी। मिशेल चिली की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं जबकि रेबेका कोस्टा रिका की उप राष्ट्रपति रह चुकी हैं। मिशेल – संसाधनों की कमी से मरीज को तड़पते देख डॉक्टरी की पढ़ाई की 1973 में चिली में जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने सैन्य तख्तापलट किया, तब मिशेल पैडिएट्रिक्स की पढ़ाई कर रही थीं। उस दौरान राष्ट्रपति सल्वाडोर से करीबी संबंध के चलते मिशेल के परिवार को बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। जेल में हाथ बांध लात-घूसे मारे गए। तब बंदियों को लोहे की ग्रिल से बिजली के झटके तक दिए जाते। यातनाओं से पिता की मौत के बाद भी मिशेल नहीं झुकीं। स्वास्थ्य मंत्री व रक्षा मंत्री के बाद 2006 में पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। तब शॉपिंग के लिए मॉल जाती तो प्रशंसक घेर लेते। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई का फैसला क्लीनिक में संसाधनों की कमी से तड़पते मरीज को देखकर ली। रेबेका – एक कॉल से कोस्टा रिका के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंची थीं 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही वैश्विक खाद्य संकट गहराने लगा। यूक्रेन से गेहूं, मक्का, जौ का निर्यात ठप हुआ, दाम बढ़े व भुखमरी का खतरा पैदा हुआ। तब रेबेका यूएन व्यापार-विकास सम्मेलन की महासचिव थीं। उन्होंने मुख्य वार्ताकार बन रूस, तुर्किए व यूक्रेन में बातचीत कराई। नतीजा काला सागर से निर्यात का समझौता हुआ, जिससे 3.3 करोड़ टन अनाज बाजार पहुंचा। कीमतें 23% तक घटीं। उनकी राजनीति 80 के दशक में राष्ट्रपति ऑफिस से एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसने उन्हें आर्थिक सलाहकार बनाया फिर वित्त उप मंत्री होते हुए 1994 में मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका की उपराष्ट्रपति बनीं।

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World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संकेत दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकती हैं। न्यूयॉर्क में नेशनल एक्शन नेटवर्क की बैठक के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने कहा, “हो सकता है, मैं इस बारे में सोच रही हूं।” उनके इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। हैरिस ने यह भी कहा कि वह 2028 में अपना फैसला इस आधार पर लेंगी कि अमेरिकी जनता के लिए कौन सबसे बेहतर काम कर सकता है। कमला हैरिस, जो जो बाइडेन के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रही थीं, 2024 का राष्ट्रपति चुनाव हार गई थीं। उस चुनाव में उन्हें डोनाल्ड ट्रम्प ने हराया था। हैरिस इससे पहले कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल और अमेरिकी सीनेटर भी रह चुकी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा:बैठक से पहले लेबनान में सीजफायर की शर्त; अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस भी आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे

अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा:बैठक से पहले लेबनान में सीजफायर की शर्त; अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस भी आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे

अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता से पहले ईरान का डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंच गया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ के नेतृत्व में शुक्रवार देर रात यह टीम इस्लामाबाद पहुंची है। इस डेलिगेशन में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियन, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती, पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बाकर जोलगदर और संसद के कई सदस्य शामिल हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता और उसके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर जारी नहीं किए जाते, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत शुरू नहीं होगी। दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी डेलिगेशन के साथ आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच यह अहम बैठक आज इस्लामाबाद में होनी है। इस पर दुनियाभर की नजर बनी हुई है। ईरानी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुंचने का वीडियो… ट्रम्प बोले- डील नहीं हुई तो फिर हमला करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर डील नहीं होती, तो अमेरिका फिर हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया है कि ट्रम्प ने बातचीत के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन ‘खेल’ करने की कोशिश पर सख्त जवाब दिया जाएगा।

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