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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 2 मिनट पहले कॉपी लिंक ओडिशा गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव आईएएस आराधना दास पर एक दिव्यांग व्यक्ति ने 95 लाख रुपए की धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि दास ने कटक में सीडीए में जमीन दिलाने के नाम पर पैसे लिए, लेकिन जमीन नहीं दिलाई। यह मामला सीडीए पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पीड़ित कमल कुमार भावसिंका के मुताबिक, उनकी पत्नी ने आराधना दास के खाते में भुगतान किया था। आज की अन्य बड़ी खबरें… दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ दुर्व्यवहार से एससी-एसटी एक्ट नहीं लगेगा, डीयू प्रोफेसर के खिलाफ केस रद्द दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल दुर्व्यवहार या विवाद के आधार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत अपराध तभी बनता है, जब जाति के आधार पर अपमान करने की स्पष्ट मंशा साबित हो। अगस्त 2021 में लक्ष्मीबाई कॉलेज की दो एसोसिएट प्रोफेसरों के बीच विभागीय बैठक में दस्तावेज पर हस्ताक्षर को लेकर विवाद हुआ, जो कथित हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का जिक्र नहीं था और बाद में जोड़े गए आरोप भी स्पष्ट नहीं थे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी। गुजरात में एक ही प्रत्याशी ने तीन पार्टियों भाजपा, कांग्रेस और AAP से पर्चा भरा गुजरात के दाहोद जिले की पिपेरो जिला पंचायत सीट पर पंचायत चुनाव से पहले अनोखा मामला सामने आया है। यहां भरत सिंह वाखला नाम के उम्मीदवार ने एक साथ भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से नामांकन दाखिल कर दिया है। नियमों के मुताबिक किसी भी उम्मीदवार को पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी तभी माना जाता है, जब वह पार्टी की ओर से जारी अधिकृत पत्र तय समय सीमा के भीतर जमा कर दे। नामांकन वापसी और अधिकृत पत्र जमा करने की आखिरी तारीख 15 अप्रैल है। घर में राइफल चलने से 22 साल की महिला की मौत, युवक गिरफ्तार गोवा के कुशावती जिले के संगुएम गांव में रविवार को एक घर में दोस्तों की बैठक के दौरान राइफल से गोली चलने से 22 साल की महिला की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में 22 साल के युवक श्वेत गावड़े को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर राइफल निकालकर तन्वी घाडी पर तान दी और मजाक में पूछा कि क्या गोली चलानी चाहिए। इसके बाद उसने लापरवाही से ट्रिगर दबा दिया। गोली तन्वी की गर्दन में लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि राइफल घर में कैसे आई और क्या वह लाइसेंसी थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर पहली बार चुने गए विधायकों ने भी दबाव बढ़ाते हुए मंत्री बनाने की मांग दोहराई है। कर्नाटक कांग्रेस के विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बांटते समय रणदीप सुरजेवाला ने भरोसा दिया था कि सभी को मौका मिलेगा, लेकिन वही लोग बार-बार चौथी बार भी उन्हीं मंत्रालयों में नियुक्त किए जा रहे हैं। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को सिर्फ उसका पुराना वादा याद दिलाने आए हैं। पहली बार चुने गए 38 MLA ने भी मंत्री पद मांगा कैबिनेट फेरबदल की मांग सिर्फ सीनियर विधायकों तक सीमित नहीं है। पहली बार विधायक बने 38 कांग्रेस MLA भी लामबंद हो गए हैं। इन विधायकों ने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम 5 को मंत्री बनाया जाए। मांड्या से पहली बार विधायक बने रविकुमार गौड़ा (रवि गनीगा) ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर विधायक की होती है और नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि पहली बार चुने गए विधायकों में से कम से कम पांच लोगों को कैबिनेट में शामिल किया जाए। मांग करना गलत नहीं है।” उन्होंने कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ मंत्री न तो उपलब्ध रहते हैं और न ही काम ठीक से हो रहा है। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, के. शदाक्षरी, एआर कृष्णमूर्ति, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे। वरिष्ठ विधायक टीबी जयचंद्र ने कहा कि यह एक नियमित राजनीतिक प्रक्रिया है और उनका मुख्य एजेंडा सिर्फ कैबिनेट फेरबदल है। उन्होंने साफ किया कि नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उनके एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं और अब केवल दो साल का कार्यकाल बचा है। ऐसे में वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए।” फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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भारत बोला-चीन के दिए नाम मनगढ़ंत, अरुणाचल भारत का हिस्सा:झूठे दावे हकीकत नहीं बदलते; चीन ने 9 साल में 62 जगहों के नाम बदले

भारत बोला-चीन के दिए नाम मनगढ़ंत, अरुणाचल भारत का हिस्सा:झूठे दावे हकीकत नहीं बदलते; चीन ने 9 साल में 62 जगहों के नाम बदले

चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को फर्जी नाम देने पर भारत ने विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि ऐसे झूठे दावे जमीन की हकीकत नहीं बदल सकते। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के लिए अपने हिसाब से नाम तय करता रहा है और उस पर दावा करता है। भारत ने इस तरह के कदम को खारिज करते हुए कहा कि यह भारत का हिस्सा है। इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने यह बयान एक मीडिया सवाल के जवाब में दिया। उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करते हुए लिखा कि भारत अपने क्षेत्र के हिस्सों को दिए गए फर्जी नामों को पूरी तरह खारिज करता है। चीन की ओर से ऐसे नाम तय करना शरारती कोशिश है। इधर, चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में ‘सेनलिंग’ नाम से नया काउंटी बनाया है। इसे 26 मार्च को मंजूरी दी गई। यह इलाका कराकोरम क्षेत्र के पास है। जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की सीमा के करीब स्थित है। काउंटी चीन की प्रशासनिक इकाई होती है, जो जिले जैसी होती है। दोनों देशों के रिश्तों पर असर की चेतावनी भारत ने कहा कि चीन के ऐसे कदम दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को प्रभावित करते हैं। चीन को ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जो रिश्तों में नकारात्मकता लाते हैं और बेहतर समझ बनाने की प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब लद्दाख को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। एक साल में तीसरी बार शिनजियांग में काउंटी बनाया चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में ‘सेनलिंग’ नाम से नया काउंटी बनाया है। पिछले एक साल में चीन तीसरी बार शिनजियांग में नया काउंटी बना चुका है। इससे पहले ‘हियान’ और ‘हेकांग’ काउंटी बनाए गए थे। हियान काउंटी का बड़ा हिस्सा अक्साई चिन क्षेत्र में आता है, जिसे भारत लद्दाख का हिस्सा मानता है। सिल्क रूट और CPEC से कनेक्शन नया काउंटी काशगर क्षेत्र से जुड़ा है, जो प्राचीन सिल्क रूट का अहम केंद्र रहा है। सिल्क रूट वह ऐतिहासिक व्यापार मार्ग था, जो चीन को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता था। आज यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की शुरुआत का भी केंद्र है। यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। हालांकि सेनलिंग काउंटी की सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन संवेदनशील सीमा क्षेत्रों के पास इस तरह के प्रशासनिक बदलाव को लेकर भारत ने चिंता जताई है। चीन ने 9 साल में 62 जगहों के नाम बदले चीन पहले भी अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदल चुका है। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है। 2017 में 6 स्थानों के नए नाम जारी किए 2021 में 15 स्थानों के नाम बदले थे 2023 में 11 स्थानों के नाम घोषित किए 2024 में 30 जगहों के नाम बदल दिए। इनमें 11 रिहायशी इलाके, 12 पर्वत, 4 नदियां, एक तालाब और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता है। ————-

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कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा

कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। साथ ही महिला आरक्षण कानून में बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन की बात कर रही है। यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने 6 महीने से कम समय में जाति सर्वे पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ये सरकार का छिपा हुई एजेंडा है। सरकार का असल मकसद जाति जनगणना नहीं कराना है। अनुच्छेद 334-A में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। सरकार अब इसे अलग करने की कोशिश कर रही है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके। जयराम रमेश ने पोस्ट में चार मुख्य सवाल उठाए… महिला आरक्षण बिल के लिए 3 दिन का विशेष सत्र जयराम रमेश का बयान ऐसे समय आया है, जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इसमें महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटें बढ़ाने से जुड़े बिल लाए जा सकते हैं। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। 1 अप्रैल से जनगणना का पहला फेज शुरू हुआ जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हुआ। यह 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। जनगणना के पहले फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकानों की गिनती की जा रही है। दूसरा फेज ‘जनसंख्या गणना’ फरवरी 2027 में होगा। इसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जाति का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। पहली बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से होगी। कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा सीधे अपने स्मार्टफोन पर कलेक्ट करेंगे। जनगणना करने वाले आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे। ————- ये खबर भी पढ़ें… BJP ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया:16-18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहना होगा; महिला आरक्षण के लिए विशेष सत्र; PM ने पत्र लिखा BJP ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई थी। पूरी खबर पढ़ें…

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उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी: झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी - Jhansi News

उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी: झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी – Jhansi News

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के लिए रविवार को झांसी में चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकनी पड़ी। उमा भारती प्लेटफॉर्म पर पहुंचीं तो नई दिल्ली जाने वाली पंजाब मेल रवाना हो चुकी थी। . ट्रेन आधा प्लेटफॉर्म छोड़ चुकी थी। उमा के समर्थकों ने तत्काल ट्रेन को रुकवाया। उन्हें ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच A-1 में सवार होना था। लेकिन जब तक ट्रेन रुकी, कोच A-1 यार्ड में पहुंच चुका था। इस कारण वह B-1 कोच में सवार हुईं। उन्होंने ट्रेन के गेट पर ही खड़ी होकर मीडिया से बात भी की। चेन पुलिंग के चलते ट्रेन के ब्रेक की एयर रिलीज हो चुकी थी। ट्रेन 5 मिनट तक आधी प्लेटफॉर्म और आधी यार्ड में खड़ी रही। उमा भारती के ट्रेन में सवार होने के बाद गाड़ी को आगे रवाना किया गया। उमा भारती ने कहा- ट्रेन समय से पहले रवाना हो गई थी। यह पूरी घटना रेलवे की अव्यवस्था का नतीजा है। आज जो मेरे साथ हुआ है, वो आए दिन यात्रियों के साथ हो रहा है। मथुरा, झांसी और ललितपुर जैसे स्टेशनों पर अक्सर ऐसी दिक्कतें आती हैं। महिलाएं सामान और बच्चों के साथ प्लेटफार्म पर दौड़ती भागती हैं। बुजुर्गों और दिव्यांगों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उमा भारती को थर्ड एसी में चढ़ना पड़ा। अब जानिए पूरा मामला… उमा भारती का दावा- 2 बजकर 18 मिनट पर स्टेशन पर पहुंच गई थी पूर्व सीएम उमा भारती ने दावा किया कि वे रविवार दोपहर 2:18 बजे झांसी रेलवे स्टेशन आ गई थीं। ट्रेन 2:23 बजे की थी। उमा भारती ने कहा- मैं एस्केलेटर से जा रही थी, लेकिन अफसरों ने ई-कार्ट से जाने के लिए कह दिया। कुछ दूरी चलने पर ई-कार्ट के सामने से एक ट्रेन निकली, इसलिए पांच मिनट तक वहीं खड़े रहना पड़ा। फिर हाथ ठेला निकला। इसके चलते ट्रेन छूट गई। रेल मंत्री को X पर लेटर लिखा- स्टेशन पर संवेदनशीलता का अभाव उमा भारती ने घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सोशल मीडिया X पर एक लेटर लिखा है। उमा भारती ने कहा, मैंने पूर्व में मथुरा रेलवे स्टेशन की यात्रियों के प्रति संवेदनहीनता की बात लिखी है। मेरे साथ आज फिर झांसी रेलवे स्टेशन पर चढ़ते हुए एक घटना हो गई जिसमें कोई अपराधी नहीं है, बल्कि स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं के निर्माण में व्यावहारिक संवेदनशीलता का अभाव कारण बना है। अफसरों ने ई-कार्ट से जाने के लिए कह दिया। इसके बाद उमा भारती प्लेटफॉर्म तक ई-कार्ट से गईं। सीसीटीवी निकलवाए जाएं उमा भारती ने लिखा- झांसी रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी निकलवाए जाएं। मैं झांसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन आने के पहले आ गई थी और यह ट्रेन निर्धारित समय से पूर्व टाइम पर आ गई और निर्धारित समय से पूर्व प्रस्थान हो गई। मुझे बैटरी गाड़ी में बैठाकर प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 4 नंबर की तरफ ले जाया जा रहा था। इतने में उसी ट्रैक से एक गाड़ी लंबे समय तक गुजरी और हम खड़े रहे। फिर जब थोड़ा आगे बढ़े तो एक हाथ ठेला ट्रैक में फंसा हुआ था। उसको निकालने में मेरे सुरक्षाकर्मियों ने सहयोग किया फिर जब मैं 4 नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची तथा जिस ट्रेन पंजाब मेल में मुझे बैठना था, वह चलती जा रही थी। किसने चेन खींची, जिसका मुझे अंदाज नहीं है और मुझे ट्रेन में बैठा दिया गया। मिलकर मथुरा और झांसी की घटनाएं बताऊंगी उमा ने आगे लिखा- सब कुछ समय के अनुसार था, किसी से कोई भूल नहीं थी। ट्रेन के तीन-चार मिनट मेरे लिए खराब हुए। इसमें पहला कारण था ट्रेन का समय से पहले पहुंचना तथा समय से 2 मिनट पहले निकल जाना। रेल के अंदर संचालित करने वाले अधिकारियों की गलती उमा भारती ने कहा, मेरा तो छोड़ दीजिए लेकिन आमजन, दिव्यांगजन, वृद्ध, स्त्री पुरुष बहुत सारा सामान एवं गोद में बच्चे लिए महिलाएं अव्यवस्था का शिकार होते हैं। मैं झांसी रेलवे के अधिकारियों की बिल्कुल गलती नहीं मानती और अपनी भी नहीं मानती यह पूरी की पूरी व्यवस्था रेल के अंदर रेल को संचालित करने वाले अधिकारियों के द्वारा हुई। मैं आपसे फिर कहूंगी कि आप इन अव्यवस्थाओं पर ध्यान दीजिए। रेलवे का दावा- अपने समय पर छूटी थी ट्रेन नेशनल ट्रेन इन्क्वारी सिस्टम के मुताबिक, ट्रेन अपने निर्धारित समय दोपहर 2.15 की जगह 6 मिनट पहले 2.09 बजे प्लेटफॉर्म 4 पर आ गई थी। इसके बाद उसे 8 मिनट के स्टॉप के बाद 2.23 पर रवाना होना था और ट्रेन अपने निर्धारित टाइम पर ही छूटी थी। बाद में उसे चेन पुलिंग कर रोका गया तो फिर 2.28 बजे रवाना हुई। मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने बताया- मुंबई-फिरोजपुर पंजाब मेल की चेन पुलिंग उमा भारती ने नहीं कराई थी। कुछ यात्री, जो खाना और पानी लेने के लिए झांसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर उतरे थे, उन्होंने जब देखा कि ट्रेन चलने लगी है तो उन्हीं यात्रियों के साथियों ने चेन पुलिंग कर दी थी। रेलवे के सिस्टम में ऐसा नहीं होता कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म छोड़ दे। हां, ये बात जरूर है कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले स्टेशन पर पहुंच जाती है। फिर भी हम मामले की जांच करा रहे हैं कि समय से पहले ट्रेन चलाई गई थी या नहीं। ———————- ये खबर भी पढ़िए- मिर्जापुर में वकील की हत्या करने वाले का एनकाउंटर:दोनों पैर में गोली लगी, पुलिसवाले टांगकर ले गए; मॉर्निंग वॉक पर मारी थी गोली मिर्जापुर में सीनियर वकील राजीव सिंह की हत्या करने वाले 50 हजार के इनामी राजेंद्र सोनकर को पुलिस ने शनिवार रात एनकाउंटर में गिरफ्तार कर लिया। उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिसकर्मी उसे कंधे पर टांगकर गाड़ी तक ले गए, फिर मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। पढ़ें पूरी खबर…

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WB Voter List Scrutiny | Supreme Court Hearing SIR

WB Voter List Scrutiny | Supreme Court Hearing SIR

नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट सोमवार को SIR पर सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह मतदाता सूची फ्रीज होने के खिलाफ नई याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करेगा। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट मालदा जिले में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले में भी सुनवाई करेगा। चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को बंगाल के लिए SIR की सूची जारी की थी। इसके बाद 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। बंगाल में 11.85% नाम हटे पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं। चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे। चुनवा आयोग और TMC के बीच मतभेद 8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। लेकिन बैठक के बाद डेरेक ने कहा कि हमने SIR के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने हमें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे। 12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई। इसके पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कम हुए हैं। पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाता करीब 51 करोड़ थे। फाइनल लिस्ट के बाद यह संख्या 44.92 करोड़ रह गई। SIR के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा समेत पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की गई है। उत्तर प्रदेश में SIR की फाइनल लिस्ट में वोटर्स 13% घटकर 13.39 करोड़ रह गए हैं। यानी 2.04 करोड़ नाम कट गए हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में भी करीब 91 लाख नाम बाहर हुए। —————————————————– ये खबर भी पढें… पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती 8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। पूरी खबर पढे़ं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी:पहला जत्था 1 जुलाई को रवाना होगा, 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी:पहला जत्था 1 जुलाई को रवाना होगा, 15 अप्रैल से शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन

अमरनाथ यात्रा की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि इस साल 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। 57 दिन चलने वाली इस यात्रा के लिए पहला जत्था 1 जुलाई को रवाना होगा। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होंगे। LG सिन्हा ने यात्रा की जानकारी देते हुए लोक भवन में मीडिया को बताया कि 13 से 70 साल की उम्र के तीर्थयात्री यात्रा कर सकते हैं। यात्रा अनंतनाग से पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रूट और गांदरबल से 14 किमी लंबे बालटाल रूट से होगी। देशभर में 556 बैंक ब्रांच से होगा ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन LG सिन्हा ने बताया कि देशभर में लगभग 556 तय बैंक शाखाओं के जरिए यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है, जबकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए यस बैंक, ICICI बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक की ब्रांचेस में यात्रा के रजिस्ट्रेशन फॉर्म उपलब्ध रहें।

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Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जाए। उन्होंने लिखा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। महिलाओं को राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की इच्छा सभी पार्टियों ने लंबे समय से जताई है, अब इसे हकीकत में बदलने का समय है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र के जवाब में पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री के पत्र की तस्वीर। खड़गे बोले- सर्वदलीय बैठक हो खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसलिए सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है । संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

Kharge Alleges Govt Bill for Election Gain; Special Session From Aug 16

नई दिल्ली46 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जाए। उन्होंने लिखा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। महिलाओं को राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की इच्छा सभी पार्टियों ने लंबे समय से जताई है, अब इसे हकीकत में बदलने का समय है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्र के जवाब में पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री के पत्र की तस्वीर। खड़गे बोले- सर्वदलीय बैठक हो खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसलिए सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है । संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Chhattisgarh Naxal Paparao Confesses Karma-Mandavi Murder Case

Chhattisgarh Naxal Paparao Confesses Karma-Mandavi Murder Case

सरेंडर्ड नक्सली लीडर पापाराव ने दैनिक भास्कर की टीम से खास बातचीत की। बस्तर में नक्सल आतंक का चेहरा रहा पापाराव अब सरेंडर कर चुका है। सरेंडर के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उसने माना कि रास्ता गलत था। पापाराव ने कहा कि, जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनसे माफी मांगना चाहता हूं। . पापाराव का जन्म सुकमा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। 17-18 साल की उम्र में नक्सलियों की नजर उस पर पड़ी। एक दिन कुख्यात नक्सली लीडर रमन्ना उसे अपने साथ जंगलों में ले गया। पापाराव करीब 30-31 साल तक नक्सल संगठन से जुड़ा रहा। पार्टी सदस्य से लेकर DKSZCM कैडर तक पहुंचा। पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज रहा। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 100 से ज्यादा जवानों की शहादत से पापाराव का नाम जुड़ा है। अंबेली और तर्रेम IED ब्लास्ट, टेकलगुडेम और ताड़मेटला जैसी बड़ी वारदातों में पापाराव की भूमिका बताई जाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान पापाराव ने महेंद्र कर्मा और भीमा मंडावी की हत्या से जुड़े कई खुलासे भी किए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… बातचीत के दौरान पापाराव ने महेंद्र कर्मा और भीमा मंडावी की हत्या के पीछे की कहानी भी बताई। सवाल- 17-18 साल की उम्र में बंदूक तक कैसे पहुंचे? मजबूरी थी या विचारधारा? जवाब – मेरा घर का सुनम चंद्रय्या है। 5वीं क्लास तक पढ़ा हूं। मैं करीब 17-18 साल का था तब हम पर सरकार का दबाव था। उस समय छत्तीसगढ़ अलग नहीं हुआ था। हम मध्य प्रदेश का हिस्सा थे। तब कांग्रेस की सरकार थी। हमें गांव में मारते पीटते थे। सरकारी काम करवाना, पौधे लगवाना, ठेकेदार जबरदस्ती काम करवाते थे। इसी वजह से दिसंबर 1995 में मुझे नक्सल लीडर रमन्ना ने पार्टी में भर्ती करवाया। फिर उसी ने मेरा नाम पापाराव रखा था। यहीं से मैं चंद्रय्या से पापाराव बना। पार्टी सदस्य से लेकर ACM, DVCM और DKSZCM कैडर तक पहुंचा। करीब 30-31 सालों तक नक्सल संगठन के साथ जुड़कर काम किया। पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज था। सवाल- नक्सल संगठन में नसबंदी का नियम था, फिर आपके 3 बच्चे कैसे? क्या ये दोहरी नीति नहीं? जवाब- मेरी 2 शादी हुई थी। पहली शादी तब हुई जब मैं गांव में था। नक्सल संगठन में नहीं जुड़ा था। हां ये सच है कि मेरे 3 बच्चे हैं। लेकिन ये तब हुए जब मैं संगठन के साथ नहीं जुड़ा था। जब संगठन के साथ जुड़ा तो बाद में पत्नी को भी साथ ले आया। 2007 में जगरगुंडा में हुई एक मुठभेड़ में वो मारी गई। फिर साल 2009 में मैंने संगठन में ही एक महिला नक्सली उर्मिला से शादी की थी। तब मैंने नसबंदी करवाई थी। उर्मिला भी साल 2025 में एक मुठभेड़ में मारी गई। नक्सल संगठन में सब के लिए एक जैसा ही नियम है। लेकिन CCM, पोलित ब्यूरो के कितने बच्चे हैं, वो नसबंदी करवाए हैं या नहीं ये मैं नहीं जानता। सवाल- 2005 में सलवा जुडूम का दौर चला था। आप लोगों ने एक बार भी नहीं सोचा और अपने ही लोगों का पूरा गांव खाली करवा दिया, ऐसा क्यों? जवाब- 2005 में जुडूम शुरू हुआ। नक्सल संगठन ने, हमने कोई गांव खाली नहीं करवाया था। सरकार और पुलिस ने पूरा गांव जला दिया था। गांव वालों को काफी नुकसान हुआ था। कुछ लोग पार्टी के विरोध में रहते थे, ऐसे लोगों को पार्टी के निर्णय के बाद गांव से बाहर निकाला था। सवाल- IED ब्लास्ट करना, कैंप पर या फिर ऑपरेशन पर निकले जवानों पर हमला करने की प्लानिंग आप लोग कैसे बनाते थे? जवाब- हम पहले रेकी करवाकर ये देखते थे कि कैंप मजबूत है या फिर कच्चा है। जिसके बाद अटैक का प्लान बनाते थे। IED लगाने से पहले फोर्स का मूवमेंट देखते थे, कहां से फोर्स आ-जा रही है। फिर IED लगाकर रखते थे। पुलिस आने वाली है इसकी जानकारी जनता देती थी। कमांडर स्तर के नक्सलियों के पास ही ज्यादा जानकारी होती थी। पूरा मैप होता था। सवाल- पुलिस मानती है कि ताड़मेटला (76), टेकलगुडेम (21), अंबेली (9) और झीरम हमलों के आप जिम्मेदार हैं, इन्हें कैसे अंजाम दिया? जवाब- ताड़मेटला की घटना में मैं नहीं था। पार्टी के किसी काम के सिलसिले में मैं माड़ डिवीजन गया हुआ था। टेकलगुडेम मुठभेड़ में भी मैं शामिल नहीं था। मैं पश्चिम बस्तर का इंचार्ज था। वो वारदात दक्षिण बस्तर डिवीजन में हुई थी। मैं तर्रेम और अंबेली IED ब्लास्ट की घटना में था। तर्रेम में 16 और अंबेली में 9 जवान शहीद हुए थे। पुलिस ने माड़ अभियान चलाया था। लौट रहे थे। हमने प्लानिंग की, प्लानिंग का काम कमांडर लोगों का होता है। बाकी अन्य सभी घटनाओं में मेरा सीधे तौर पर कोई हाथ नहीं था। मैं झीरम हमले में भी नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 100 से ज्यादा जवानों की शहादत के पीछे इसका नाम जुड़ा है। सवाल- नक्सलियों के पास भारी हथियार और विदेशी गन कैसे पहुंचती थीं? सप्लाई कौन करता था? जवाब- AK-47, SLR जैसे ये सारे हथियार पुलिस जवानों से ही लूटे हुए हैं। हम पुलिस पर हमला करते थे फिर उन्हीं का हथियार लेकर आते थे। ताड़मेटला की घटना के बाद वहां से 76 हथियार लेकर आए। मुरकीनार, रानी बोदली, गीदम पुलिस थाना में हमला कर वहां से हथियार लूटे थे। विदेशी हथियार कहां से आया इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह जानकारी सिर्फ केंद्रीय कमेटी के सदस्यों को होती थी। सवाल- सरेंडर से पहले नक्सली संगठन आर्थिक रूप से कितना मजबूत था? करोड़ों कैश और गोल्ड कहां से आते थे? जवाब – नक्सली संगठन आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। खाने पीने का सामान आम जनता से लेते थे, कपड़े तक आम जनता हमें देती थी। पश्चिम बस्तर डिवीजन के पास 1 करोड़ से ज्यादा थे। जब मैं सरेंडर के लिए आया तो अपने साथ 10 लाख रुपए लेकर आया था। बाद में पुलिस को ठिकाना बताकर और पैसे की जानकारी दी। यह डंप हम जंगल में एक डिब्बे में डालकर जमीन में दबाकर रखते थे। जिसे अब पुलिस ने बरामद कर लिया है। सवाल- आप लोगों ने बस्तर की धरती में और कितनी IED कहां-कहां पर दबा

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