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आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)

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Arshdeep Singh Chandigarh Airport Spotted With Girlfriend

Arshdeep Singh Chandigarh Airport Spotted With Girlfriend

अर्शदीप सिंह मॉडल समरीन कौर के साथ चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर। इंडियन क्रिकेट टीम के गेंदबाज अर्शदीप सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक लड़की के साथ दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि वह लड़की मॉडल, बॉलीवुड व पंजाबी फिल्मों की एक्ट्रेस समरीन कौर हैं। . अर्शदीप उनके साथ बात करते हुए चंडीगढ़ एयरपोर्ट के अंदर चले गए। इस घटना को एयरपोर्ट पर मौजूद कई फैंस ने चुपके से अपने कैमरों में कैद किया है। लोग इस वीडियो पर कई तरह के कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- लो, पकड़ा गया शेर। कई दिनों से ऐसी चर्चाएं भी चल रही हैं कि अर्शदीप और समरीन एक-दूसरे को डेट रहे हैं। उन्हें कई मौकों पर साथ देखा गया है। दोनों ने एक जैसे फोटो भी अपने-अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर किए हैं। हालांकि, अर्शदीप सिंह और समरीन कौर इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। दोनों सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, लेकिन उनमें से किसी ने भी अब तक न तो इन चर्चाओं की पुष्टि की है, और न ही इन्हें केवल अफवाह बताया है। अर्शदीप सिंह का वीडियो शेयर करने के साथ कैप्शन में लिखा गया- पकड़ा गया शेर…झूठ नहीं है कि दोनों एकसाथ बहुत अच्छे लग रहे हैं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर अर्शदीप सिंह और एक्ट्रेस एकांत में बात करते हुए दिखे। ताजा वीडियो में क्या दिख रहा सोशल मीडिया पर जो ताजा वीडियो शेयर किया जा रहा है, वह आज (12 अप्रैल) का ही बताया जा रहा है। इसे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर चेकइन के लिए जाते समय शूट किया गया। इसमें दिख रहा है कि अर्शदीप अपना बैग लेकर 3 लोगों के साथ चंडीगढ़ एयरपोर्ट के अंदर जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इन 3 लोगों में एक एक्ट्रेस समरीन कौर हैं। उन्होंने साथ में एयरपोर्ट के अंदर तक पैदल यात्रा की। इसके बाद कैमरा अर्शदीप और समरीन को एकांत में बात करते हुए कैच करता है। इसी दौरान पंजाब किंग्स की जर्सी पहने एक लड़की इन दोनों के पास पहुंचती है। वह समरीन से बात करती है और समरीन उसे गले लगकर विदा करती हैं। इस वीडियो पर कैप्शन लिखा गया है- अर्शदीप सिंह विद गर्लफ्रेंड समरीन कौर (गर्लफ्रेंड समरीन कौर के साथ अर्शदीप सिंह)। पंजाब किंग्स की जर्सी पहने लड़की को गले लगकर विदा करतीं एक्ट्रेस समरीन कौर। पंजाब किंग्स के मैच में दिखीं जानकारी के मुताबिक, शनिवार (11 अप्रैल) को जब मुल्लांपुर में पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच था, उस समय मॉडल समरीन कौर भी स्टेडियम में मौजूद थीं। उन्होंने वीआईपी बॉक्स में बैठकर मैच देखा। मैच देखते हुए के कुछ फोटो और वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किए। शनिवार को हुए मैच के दौरान के ये फोटो समरीन कौर ने सोशल मीडिया स्टोरी पर लगाए। दोनों ने गुरुद्वारे के फोटो शेयर किए इससे पहले शनिवार दोपहर के समय एक्ट्रेस ने अपने इंस्टग्राम स्टेटस पर एक धार्मिक स्थल की फोटो शेयर की थी। उसके बाद ठीक वही फोटो अर्शदीप सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर की। स्नैपचैट पर भी फोटो शेयर किया पंजाब किंग्स की टीम आज मोहाली से मुंबई के लिए रवाना हो गई। टीम 16 मई को मुंबई के साथ मैच खेलेगी। चंडीगढ़ से मुंबई के बीच उड़ान के दौरान का भी एक फोटो अर्शदीप सिंह ने अपने स्नैपचैट एकाउंट पर शेयर किया है। इसमें दो लोग 2 बोतलें पकड़े दिख रहे हैं। एक हाथ लड़के का और दूसरा लड़की का है। हालांकि, इसमें अर्शदीप ने कोई कैप्शन नहीं लिखा। इसी के साथ अगला वीडियो उन्होंने मुंबई पहुंचने के बाद शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा- कैसे हो मुंबई वालो? हम मुंबई पहुंच गए हैं। जल्द ही मिलते हैं मैदान पर, फिर एंजॉय करेंगे। स्नैपचैट पर अर्शदीप सिंह ने यह फोटो पोस्ट किया है, जिसमें दोनों ने बोतल पकड़ी हुई है। ॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… क्रिकेटर अर्शदीप ने लड़की का हाथ थामे फोटो डाली:फैंस ने वैसे ही टैटू वाली मॉडल ढूंढी; बोले- मिस्ट्री सॉल्व, ये PBKS के बॉलर की गर्लफ्रेंड इंडियन क्रिकेटर अर्शदीप सिंह की स्नेपचैट स्टोरी से गर्लफ्रेंड की चर्चा शुरू हो गई है। अर्शदीप ने स्नैपचैट पर एक लड़की का हाथ थामे फोटो शेयर की। इसमें कोई कैप्शन नहीं लिखा और न ही लड़की का चेहरा दिखाया। हालांकि अर्शदीप के फोटो शेयर करते ही फैंस ने लड़की के हाथ में टैटू को नोटिस कर लिया। पढ़ें पूरी खबर…

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Asha Bhosle Childhood Indore Memories

Asha Bhosle Childhood Indore Memories

इंदौर10 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। मध्य प्रदेश से उनका गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा। उनका बचपन इंदौर की छावनी इलाके के मुराई मोहल्ले में बीता, जिसकी यादें वे अक्सर साझा करती थीं। इंदौर की संस्कृति और माहौल का उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर रहा। इंदौर निवासी रिश्तेदार मनोज बिनवाले के मुताबिक, आशा ताई को सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां बेहद पसंद थीं और वे कई बार इंदौर से गेहूं मंगवाती थीं। इंदौर के खान-पान से उनका खास लगाव था। सराफा की खाऊ गली के गुलाब जामुन, रबड़ी और दही बड़े उन्हें बेहद पसंद थे। बचपन में वे सराफा चौपाटी जाया करती थीं। आशाजी और लताजी की बचपन की तस्वीर। 17 साल पहले आईं थी इंदौर करीब 17 साल पहले एक कार्यक्रम में इंदौर आईं तो सयाजी होटल में ठहरीं। उन्होंने रिश्तेदारों से घर का खाना मंगवाया था। वे खुद भी नए-नए व्यंजन बनाने की शौकीन थीं। इंदौर में रहने वाले रिश्तेदार मनोज बिनवाले बताते हैं कि बचपन में आशा भोसले, उनकी बहनें लता मंगेशकर और मीना व मां के साथ छावनी से तोपखाना तक करीब 2.5 किमी पैदल चलकर एक समय का भोजन करने जाती थीं। उनके मुताबिक, आशा ताई का इंदौर से लगाव लता मंगेशकर से भी ज्यादा था। वे इंदौर ज्यादा बार आती थीं। कम उम्र में शादी होने के कारण यहां ज्यादा समय नहीं बिता सकीं, लेकिन इंदौर का नमकीन, सराफा के मिष्ठान और सीहोर का शरबती गेहूं उन्हें हमेशा पसंद रहा। बचपन में आशाजी उनकी बहन मीना के साथ। विजयवर्गीय बोले-इंदौर से आत्मीय रिश्ता मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और इंदौर से उनका जुड़ाव शहर के लिए गर्व का विषय रहा। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी के साथ परिवार कुछ समय इंदौर में रहा था। इसी दौरान उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में हुआ। 12 हजार से ज्यादा गानों की विरासत आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने गजल, भजन, पॉप और क्लासिकल हर शैली में अपनी पहचान बनाई और ओपी नैयर, आरडी बर्मन, एआर रहमान जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। संघर्षों से भरा निजी जीवन 8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले, पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने परिवार संभालने के लिए गायन शुरू किया। उन्होंने पहला गीत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ में और हिंदी सिनेमा में 1948 की फिल्म ‘चुनरिया’ में गाया। कम उम्र में की गई पहली शादी 11 साल बाद टूट गई। इसके बाद उन्होंने लंबा समय अकेले बिताया और फिर संगीतकार आर.डी. बर्मन से शादी की। गिनीज बुक में नाम है दर्ज आशा भोसले को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है। वे ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर भी थीं। यह खबर भी पढ़ें… सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें शनिवार शाम को यहां भर्ती किया गया था। ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीत समदानी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि आशा भोसले को कई मेडिकल समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर यानी उनके कई अंग फेल होने के कारण उनका निधन हुआ। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Asha Bhosle Passes Away at 92

Asha Bhosle Passes Away at 92

16 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। 10 साल की उम्र से करियर शुरू करने वाली आशा ताई को शुरुआती दौर में ‘खराब आवाज’ कहकर स्टूडियो से रिजेक्ट कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साये से बाहर निकलकर उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और 12,000 से ज्यादा गानों के साथ अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया। आशा भोसले ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप और गजल तक हर शैली में अपनी महारत साबित की। दिवंगत गायिका आशा भोसले। महाराष्ट्र के सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहे आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने बहुत कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था। मराठी फिल्म से बॉलीवुड तक का सफर आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में एक मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला मौका 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से मिला। शुरुआती दौर में आशा को वे गाने मिलते थे जिन्हें प्रमुख गायिकाएं जैसे लता मंगेशकर, शमशाद बेगम या गीता दत्त छोड़ देती थीं। उस समय उन्हें अक्सर फिल्मों में विलेन, डांसर या साइड किरदारों के लिए गाने के लिए बुलाया जाता था। आवाज को खराब बताया, स्टूडियो से रिजेक्शन मिला आज जो आवाज दुनिया भर में पहचानी जाती है, एक समय उसे भी नकारा गया था। 1947 में, जब आशा अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, तब फिल्म ‘जान पहचान’ (संगीतकार: खेमचंद प्रकाश) के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वे किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियो गई थीं। वहां के रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने उनकी आवाज सुनने के बाद कहा था, “यह आवाज नहीं चलेगी, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ।” उस समय आशा को यह कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। इस घटना से किशोर कुमार काफी दुखी हुए थे। रात के 2 बज चुके थे और दोनों महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर उदास बैठे थे। तब आशा ने ही किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। इस रिजेक्शन ने आशा को तोड़ा नहीं, बल्कि और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। आरडी बर्मन रहे करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त का दबदबा था। शमशाद बेगम अपनी खनकदार आवाज और गीता दत्त अपने दर्द भरे और वेस्टर्न अंदाज वाले गानों के लिए मशहूर थीं। जब गीता दत्त अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के चलते रिकॉर्डिंग से दूर होने लगीं, तब ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले की तरफ रुख किया। 1950 के दशक में नैयर ने आशा की आवाज की खनक को पहचाना। 1954 में फिल्म ‘मंगू’ से शुरू हुआ उनका साथ ‘सीआईडी’ (1956) और ‘नया दौर’ (1957) तक आते-आते ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नया दौर का गाना ‘मांग के साथ तुम्हारा’ और ‘उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी’ ने उन्हें मुख्यधारा की टॉप सिंगर्स में शामिल कर दिया। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की परिभाषा बदल दी। पंचम दा ने आशा से ‘दम मारो दम’ (हरे रामा हरे कृष्णा) और ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां) जैसे वेस्टर्न और जैज स्टाइल के गाने गवाए, जिन्होंने आशा को ‘क्वीन ऑफ इंडिपॉप’ बना दिया। जब लता के साये से बाहर आईं आशा आशा भोसले के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही बहन लता मंगेशकर के साथ कॉम्पिटिशन करना था। उस दौर में लता जी की आवाज को ‘आदर्श’ माना जाता था। आशा ने चतुराई से अपनी आवाज के साथ प्रयोग किए। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह लता जैसी ही शैली अपनाएंगी, तो वह कभी अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। उन्होंने वेस्टर्न टच, मॉड्यूलेशन को अपनी आवाज में पिरोया, जो उस समय किसी अन्य सिंगर के पास नहीं था। उन्होंने गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे सिंगर्स को उनके ही दौर में कड़ी टक्कर दी और बाद में अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और सुनिधि चौहान जैसी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनीं। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म ‘उमराव जान’ आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में आशा ने ‘दिल चीज क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसी बेहतरीन गजलें गाकर क्लासिकल गायिकी में भी लता मंगेशकर के बराबर अपनी जगह पक्की कर ली। आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार 1968 में फिल्म ‘दस लाख’ के गाने ‘गरीबों की सुनो’ के लिए मिला था। कुल फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्होंने कुल 7 बार यह अवॉर्ड जीता। इसके बाद उन्होंने खुद को नॉमिनेशन से अलग कर लिया ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके। 2001 में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया। नेशनल अवार्ड्स: उन्हें फिल्म ‘उमराव जान’ (1981) और ‘इजाजत’ (1987) के लिए दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। पद्म विभूषण: साल 2000 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ और 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: साल 2011 में गिनीज बुक ने आधिकारिक तौर पर उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सर्वाधिक गाने) करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी।

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नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं आशा भोसले सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, जब फिल्ममेकर्स या तो बड़ी सिंगर्स की फीस चुका नहीं पाते थे या दूसरी सिंगर्स इनकार कर देती थीं। गाना रिकॉर्ड करने पहुंचीं, तो आवाज पर ताना देकर स्टूडियो से निकाला गया आशा भोसले को एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से बाहर निकाल दिया गया था। 1947 की बात है। आशा, किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। तब स्टूडियो में कोई खास सुविधा नहीं होती थी, माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा और किशोर दा ने जैसे ही गाना शुरू किया, वहां रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने धीरे से म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद्र से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, दूसरे सिंगर लाओ। पास खड़े किशोर दा ये बात समझ गए और उन्होंने आशा से कहा कि यहां कुछ गड़बड़ है। उनका गाना भी रोक दिया गया और थोड़ी देर में ही उन्हें वहां से निकल जाने को कहा गया। रात के 2 बज चुके थे। दोनों इस अपमान से टूट गए और वहां से निकलकर महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटे की हुई एक्सीडेंट में मौत, बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर

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Work begins on Sunny's 'Border 3', Sunny Deol, Border 3

Work begins on Sunny’s ‘Border 3’, Sunny Deol, Border 3

अमित कर्ण. मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक सनी की ‘बॉर्डर 3’ को 2027 का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह सनी की देशभक्ति वाली इमेज को एक बार फिर बड़े स्तर पर स्थापित करेगा। – फाइल फोटो सनी देओल और वरुण धवन स्टारर ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के बाद अब जेपी फिल्म्स ने आने वाले वर्षों के लिए बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। 362 करोड़ के घरेलू कलेक्शन के साथ फिल्म ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति और रियल-लाइफ हीरोइज्म का क्रेज आज भी दर्शकों के बीच बरकरार है। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए निर्माता निधि दत्ता ने एक मेगा प्लान तैयार किया है, जिसके केंद्र में सनी को रखा गया है। ‘बॉर्डर 3’ पर काम शुरू हो चुका है। सनी ही मुख्य चेहरा बने रहेंगे। ‘बॉर्डर 3’ से सनी की देशभक्ति की इमेज फिर मजबूत होगी सनी की ‘बॉर्डर 3’ को 2027 का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह सनी की देशभक्ति वाली इमेज को एक बार फिर बड़े स्तर पर स्थापित करेगा। वहीं नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ में सनी का ‘हनुमान’ के रूप में नजर आना उनके करियर का एक नया और दिलचस्प अध्याय होगा। वह फिल्म के दोनों पार्ट्स में नजर आएंगे। वायुसेना पर एक नई फिल्म भी शुरू करेगा जेपी फिल्म्स जेपी फिल्म्स अब अपने पारंपरिक वॉर जोन से बाहर निकलते हुए एक बड़े बजट की फैंटेसी एडवेंचर फ्रेंचाइज पर भी काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट स्टूडियो के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसकी कहानी और राइटिंग प्रोसेस में खुद निधि शामिल हैं और यह देश की कई लोकेशंस में शूट होगी। चर्चा है कि इस प्रोजेक्ट में भी सनी का कैमियो हो सकता है। जेपी फिल्म्स भारतीय वायुसेना पर भी एक नई फिल्म भी शुरू करने जा रहा है। करियर को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं सनी ‘गदर 2’ की जबरदस्त सफलता के बाद सनी ने अपने करियर की दिशा को काफी रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ाया है। अब उनका फोकस ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर है, जो उन्हें सिर्फ स्टार ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस का मजबूत पिलर भी बनाए रखें। 2027 तक सनी के पास कई फिल्में हैं जो 1000 करोड़ क्लब तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। इस लाइनअप में ‘सफर’ नाम की एक इमोशनल ड्रामा है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। ​निधि दत्ता पर भी है विरासत को आगे ले जाने की चुनौती ​निधि ने ‘पलटन’ और ‘घुड़चढ़ी’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई है। अब उनके कंधों पर ‘बॉर्डर’ जैसी विरासत को आगे ले जाने का मौका है। ‘बॉर्डर 2′ ने यह साबित किया कि बड़े परदे पर सनी का गुस्सा आज भी दर्शक जुटा सकता है। बता दें कि एक तरफ सनी जहां ‘बॉर्डर 3′ और एयर फोर्स ड्रामा में देशभक्ति का जज्बा जगाएंगे, वहीं ‘फैंटेसी एडवेंचर’ के जरिए अलग अवतार में दिखेंगे। जेपी फिल्म्स की ओर से अगले कुछ महीनों में ‘बॉर्डर 3′ की आधिकारिक कास्टिंग अनाउंस होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Priyanka Chopras Humble Seva at Golden Temple, Amritsar

Priyanka Chopras Humble Seva at Golden Temple, Amritsar

12 दिन के भीतर दूसरी बार गोल्डन टेंपल पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा। बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल पहुंचीं। यहां उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद वह लंगर हॉल में गईं, जहां उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक बर्तन धोने की सेवा की। साथ ही लंगर के अन्य कामों में भी सहयोग किया। . प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ दिनों से अमृतसर में अपनी आने वाली फिल्म ‘अमरी’ की शूटिंग कर रही थीं। बीती रात उनकी शूटिंग पूरी हुई और काम खत्म होते ही वह सीधे गोल्डन टेंपल पहुंच गईं। इस दौरान प्रिंयका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल की मर्यादा का खास ख्याल रखा। वह व्हाइट कलर का शूट पहने नजर आईं। उनका सिर दुपट्‌टे से ढंका हुआ रहा। प्रिंयका चोपड़ा आम श्रद्धालु की तरह यहां रही। यह 12 दिन के भीतर उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 31 मार्च को भी यहां आई थीं और उस समय भी उन्होंने लंगर हॉल में सेवा की थी। फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद गोल्डन टेंपल पहुंची प्रियंका चोपड़ा। 18 साल की उम्र में 90 देशों की कंटेस्टेंट्स को पछाड़ मिस वर्ल्ड बनीं उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मीं प्रियंका चोपड़ा ने बचपन में कभी रंगभेद का सामना किया, तो कभी तानों से बचने के लिए बाथरूम में छिपकर खाना खाया। इन सबके बावजूद उन्होंने महज 18 साल की उम्र में 90 देशों की खूबसूरत कंटेस्टेंट्स को पीछे कर 2000 में मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया। मिस वर्ल्ड जीतने के बाद प्रियंका ने पहले तमिल सिनेमा में एंट्री ली और फिर बॉलीवुड में। प्रियंका ने लगातार ऐतराज, कृष, फैशन, डॉन 2, अग्निपथ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम करते हुए खुद को बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस के बीच ला खड़ा किया, लेकिन फिर 2015 के बाद उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी। सालों बाद प्रियंका ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से बॉलीवुड इंडस्ट्री से दूरी नहीं बनाई थी, बल्कि उन्हें कॉर्नर किया गया था। उन्हें मनमुताबिक काम नहीं दिया जा रहा था और वो लगातार होती पॉलिटिक्स से थक चुकी थीं। फिल्में मिलनी बंद हुईं तो प्रियंका की मां ने उनसे कहा था- तुम्हें कमाई का कोई दूसरा जरिया ढूंढना चाहिए। फिर क्या था, प्रियंका ने बतौर सिंगर करियर की दूसरी पारी शुरू की। इंग्लिश गानों से हॉलीवुड में जगह बनाने वालीं प्रियंका के लिए ये बदलाव अहम साबित हुआ। जहां भारत में जेंडर पे गेप एक अहम बहस का मुद्दा है, वहीं प्रियंका ने हॉलीवुड एक्टर्स के बराबर फीस लेकर इतिहास रचा। वो हॉलीवुड में सबसे ज्यादा काम करने वाली इंडियन एक्ट्रेस हैं। ***************** ये खबर भी पढ़ें: प्रियंका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल में माथा टेका: दुपट्‌टे से सिर ढंककर आईं; लंगर हॉल में जूठे बर्तन मांजने की सेवा की, गुरबाणी सुनी बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा मंगलवार को अमृतसर में गोल्डन टेंपल पहुंची। इस दौरान उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद उन्होंने लंगर हॉल में जाकर जूठे बर्तन धोने की सेवा की। इसके अलावा लंगर हॉल के बाकी कामों में भी सहयोग किया। इस दौरान उन्होंने कुछ देर बैठकर गुरबाणी भी सुनी। (पढ़ें पूरी खबर)

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विराट कोहली की जर्सी पाकर खुश हुईं कोरियन कंटेंट क्रिएटर:RCB की जर्सी को किस किया, कहा- मैं कोरियन RCB फैन हूं

विराट कोहली की जर्सी पाकर खुश हुईं कोरियन कंटेंट क्रिएटर:RCB की जर्सी को किस किया, कहा- मैं कोरियन RCB फैन हूं

IPL टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की फैन और दक्षिण कोरियाई कंटेंट क्रिएटर मिशेल का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत से आए एक पार्सल को अनबॉक्स करती नजर आईं। पार्सल में RCB की लाल जर्सी थी, जिस पर नंबर 18 और विराट कोहली लिखा हुआ था। जर्सी देखते ही मिशेल ने इसे गले से लगाया और पहनकर अपनी खुशी जाहिर की। मिशेल ने अपने वीडियो में कहा कि लोग कहते हैं RCB के पास ग्लोबल फैंस नहीं हैं, लेकिन वे कोरिया से टीम को पूरा सपोर्ट करती हैं। कंटेंट क्रिएटर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, ‘मैं एक कोरियन RCB फैन हूं। मुझे जर्सी भले ही देर से मिली हो, लेकिन टीम के लिए मेरा प्यार कभी देर से नहीं आया।’ वीडियो पर लोगों के जबरदस्त रिएक्शन सामने आए मिशेल के वीडियो पर कई लोगों ने रिएक्शन दिया। एक यूजर ने लिखा, “RCB का फैन होकर मैं बहुत खुश हूं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “RCB सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं, हमारी भावनाएं हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “कोई इन्हें RCB मैच का टिकट दिला दो।” मिशेल RCB पर कई वीडियो बना चुकी हैं मिशेल इंस्टाग्राम पर @sausabe के नाम से जानी जाती हैं। उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर करीब 32.6K फॉलोअर्स हैं। वो अपने इंस्टाग्राम पर मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, ट्रैवल से जुड़े वीडियो शेयर करती हैं। उन्होंने RCB, विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट टीम से रिलेटेड कई कंटेंट भी पोस्ट किए हैं। वे अक्सर RCB की जर्सी पहनकर वीडियो बनाती हैं। मिशेल भारत की यात्रा कर चुकी हैं और उन्होंने यहां की कई ट्रैवल रील्स शेयर की हैं।

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दावा- सलमान की 'मातृभूमि' में चीन का नाम नहीं होगा:रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के बाद कंटेंट में बदलाव, 40% फिल्म रीशूट

दावा- सलमान की 'मातृभूमि' में चीन का नाम नहीं होगा:रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के बाद कंटेंट में बदलाव, 40% फिल्म रीशूट

सलमान खान की अपकमिंग फिल्म मातृभूमि को लेकर नई खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं ताकि भारत-चीन के बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गौरतलब है कि फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, जिसे इस साल बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित थी। हाल ही में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए रक्षा मंत्रालय को फिल्म के कंटेंट को लेकर कुछ आपत्ति थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार फिल्म में चीन का नाम नहीं लिया जाएगा। करीब 40% फिल्म दोबारा शूट की गई रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “पहले यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के कहने पर सलमान खान और डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने फिल्म को दोबारा शूट किया और कहानी में थोड़ा फिक्शन एंगल जोड़ दिया। लगभग 40% फिल्म दोबारा शूट की गई, जिसमें रोमांटिक सीन और बैकस्टोरी भी जोड़ी गई। मेकर्स ने नई फिल्म मंत्रालय को भेजी ताकि उन्हें NOC मिल सके, लेकिन मंत्रालय को अभी भी कुछ चिंताएं हैं।” सूत्र ने आगे बताया, “सलमान खान से यह भी कहा गया कि फिल्म में चीन का नाम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह बात पहले ही मेकर्स को बता दी गई थी। इस महीने जो नया वर्जन जमा किया गया है, उसमें चीन का कहीं जिक्र नहीं है।” फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग और कंटेंट में बदलाव के कारण इसे टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, सलमान खान जल्द ही दिल राजू के साथ अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे।

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सिंगर आशा भोसले अस्पताल में भर्ती:ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन से बिगड़ी तबीयत; पोती जनाई ने दी हेल्थ अपडेट

सिंगर आशा भोसले अस्पताल में भर्ती:ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन से बिगड़ी तबीयत; पोती जनाई ने दी हेल्थ अपडेट

बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर आशा भोसले को शनिवार शाम मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें ज्यादा थकान और छाती में इन्फेक्शन की शिकायत है। पहले जानकारी आई थी कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। हालांकि, उनकी पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पर बताया- मेरी दादी आशा भोसले, बहुत ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा। हम आपको जल्द ही अच्छी खबर देंगे। 12,000 से ज्यादा गाने गाए आशा भोसले ने अपने करियर में 12,000 से ज्यादा गाने गा चुकी हैं। उनके “दम मारो दम”, “पिया तू अब तो आजा” और “चुरा लिया है तुमने” जैसे गाने आज भी सदाबहार हैं। आशा भोसले के लिए संगीत का सफर इतना भी आसान नहीं था। आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी। 16 साल की उम्र में जब आशा भोसले ने भागकर परिवार वालों के खिलाफ बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी की थी। लता जी और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था, जिसके कारण उन्होंने आशा से लंबे समय तक बातचीत बंद कर दी थी। शादी के बाद आशा भोसले को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह घरेलू हिंसा का शिकार भी हुईं। इतना ही नहीं, जिंदगी से इतना निराश हो गई थीं कि खुद को खत्म करना चाहती थीं। 1960 में वह पहले पति से अलग हो गईं और अपने तीन बच्चों (हेमंत, वर्षा और आनंद) की जिम्मेदारी अकेले ही उठाई। जब आशा भोसले की पहली शादी टूट गई और वह अपने तीन बच्चों के साथ वापस अपने परिवार के पास आईं, तब धीरे-धीरे दूरियां कम होनी शुरू हुईं। आर डी बर्मन की मां ने कहा था शादी मेरी लाश पर ही होगी आशा भोसले ने दूसरी शादी संगीतकार आर डी बर्मन से 1980 में की। दोनों की पहली मुलाकात 1966 में फिल्म तीसरी मंजिल के गाने के दौरान हुई थी। इसके बाद आशा भोसले ने आर.डी. बर्मन की कई फिल्मों में गीत गाए। लगातार काम करते हुए दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई और ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला। आर.डी. बर्मन ने एक दिन मौका पाते ही आशा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। आशा ने इसके लिए तुरंत हां भी कर दिया था, लेकिन बर्मन की मां ने शादी से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बर्मन से कहा कि अगर ये शादी होगी तो मेरी लाश पर ही होगी। बर्मन की मां शादी से इसलिए इनकार कर रही थीं, क्योंकि आशा बर्मन से 6 साल बड़ी थीं और वो 3 बच्चों की मां थीं। तब बर्मन ने चुपचाप मां की बात मान ली। हालांकि, जब बर्मन के पिता एस.डी. बर्मन का निधन हुआ, तो मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। ऐसे में मां की हालत में सुधार के लिए बर्मन ने आशा भोसले से 1980 में शादी कर ली थी। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बेकार आवाज कहकर निकाल दिया गया था आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। कई सदाबहार गाने गाए। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब इसी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस भेज दिया गया था। आरजे अनमोल के साथ बातचीत के दौरान आशा भोसले ने बताया था कि एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया था कि 1947 में किशोर कुमार के साथ वो फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म जान पहचान के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। आजकल स्टूडियो एयर-कंडीशन्ड होते हैं और उनमें ढेर सारी मशीनें होती हैं। उन दिनों दो ट्रैक वाली मशीनें हुआ करती थीं। एक ट्रैक संगीतकार और दूसरा ट्रैक गायक के लिए होता था। माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा भोसले और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया। आशा भोसले ने बताया कि इसके बाद साउंड रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने बंगाली में कहा कि आप लोगों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही है। किशोर दा समझ गए क्योंकि वह बंगाली जानते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि कुछ गड़बड़ है। मैं कुछ नहीं बोली। रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश से कहा कि आप दूसरे सिंगर लाओ। इनकी आवाज गाने के लायक ही नहीं है। आशा के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स आशा भोसले की आवाज जितनी मदहोश करने वाली है, उतना ही उनके हाथ का बना खाना है। आशा भोसले खाना पकाने की बहुत शौकीन हैं, उनके हाथों के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स हैं। दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर को आशा भोसले के हाथों का बना खाना बेहद पसंद था। एक इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने कहा था कि ऋषि कपूर को उनके हाथ का शामी कबाब, कड़ाई गोश्त और काली दाल बहुत पसंद थी। इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने यह भी बताया था कि अगर सिंगर नहीं होती तो पक्का कुक होतीं। गायिकी के साथ-साथ आशा भोसले ने अपने कुकिंग के शौक को भी जिंदा रखा। खाना पकाने के प्यार ने आशा भोसले को एक सफल रेस्तरां व्यवसायी के रूप में भी पहचान दिलाई है। सबसे पहले उन्होंने दुबई में आशाज नाम से रेस्टोरेंट खोला। इसे खुले दो दशक बीत चुके हैं। आशा भोसले के रेस्टोरेंट में उत्तर पश्चिमी भारतीय व्यंजन परोसा जाता है। आशा भोसले का रेस्टोरेंट दुबई के अलावा कुवैत, अबुधाबी, दोहा और बहरीन जैसे कई देशों में है। इन रेस्टोरेंट का संचालन वाफी ग्रुप द्वारा किया जाता है जिसमें आशा भोसले की 20 प्रतिशत भागीदारी है।

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6:59 am

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दमोह का आधा नूरी नगर निकला बिजली चोर:75 घरों की जांच में 35 में हो रही थी चोरी, पहचान के लिए कंपनी ने कराई वीडियोग्राफी

April 4, 2026/
4:18 pm

दमोह शहर के नूरी नगर में शनिवार दोपहर बिजली विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान 35 उपभोक्ताओं को बिजली...

राजनीति