Saturday, 12 Sep 2026 | 12:13 PM

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Stock Market Update | Sensex Nifty Fall Realty FMCG Shares Drop

Stock Market Update | Sensex Nifty Fall Realty FMCG Shares Drop

7 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 12 अगस्त को गिरावट है। सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 77,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंक से ज्यादा की गिरावट 24,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। रियल्टी और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा गिरावट है। मोलबायो डायग्नोस्टिक्स और धूत ट्रांसमिशन के IPO का आखिरी दिन मोलबायो डायग्नोस्टिक्स और धूत ट्रांसमिशन के IPO का आज आखिरी दिन है। मोलबायो डायग्नोस्टिक्स IPO के जरिए 939.70 करोड़ और धूत ट्रांसमिशन 3,066.89 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार रहा इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 6618 +272 +4.33% निक्केई (जापान) 67040 +70 +0.10% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25346 -306 -1.17% 11 अगस्त को अमेरिकी बाजारों में गिरावट रही थी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 53792 -184 -0.34% नैस्डैक 26445 -160 -0.60% S&P 500 7728 -25 -0.32% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 1,494 करोड़ के शेयर खरीदे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII +25 +2,984 +28,164 FII/FPI +259 +2,696 -2,169 कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 11 अगस्त को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 388 अंक की गिरावट के साथ 78,154 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 112 अंक की गिरावट रही, ये 24,472 पर बंद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Tata Trust Vice Chairman Vijay Singh Resigns

Tata Trust Vice Chairman Vijay Singh Resigns

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर प्लास्टिक नोटों से जुड़ी रही। सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे। वहीं टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है। जुलाई के रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोटों को मंजूरी: वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा: 14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उन्होंने अगला कार्यकाल न लेने का फैसला किया है। हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. F&O ट्रेडिंग में रिटेल-निवेशकों का लॉस घटकर ₹91,685 करोड़ हुआ: सेबी के सख्त नियमों का असर; हर निवेशक का औसत नुकसान बढ़कर ₹1.16 लाख पहुंचा भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिकी कोर्ट से अडाणी का केस खारिज: 2 साल पहले दर्ज हुआ था; भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने, अमेरिकी निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप थे अमेरिकी अदालत ने सोमवार को गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहा रिश्वत और धोखाधड़ी का केस खारिज कर दिया। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने केस खत्म करने की अमेरिकी न्याय विभाग की मांग मंजूर कर ली। गौतम अडाणी पर 2024 में भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताने का आरोप लगा था। यह भी कहा गया कि रिश्वत के जरिए अडाणी ग्रुप की एक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट का ठेका दिलाने की कोशिश की गई। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? RBI के नए डिस्क्लोजर नियमों और केएफएस यानी की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स के तहत अब ग्राहकों को लोन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी लोग बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Tata Trust Vice Chairman Vijay Singh Resigns

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नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर प्लास्टिक नोटों से जुड़ी रही। सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे। वहीं टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है। जुलाई के रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए जाएंगे। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोटों को मंजूरी: वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा: 14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उन्होंने अगला कार्यकाल न लेने का फैसला किया है। हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. F&O ट्रेडिंग में रिटेल-निवेशकों का लॉस घटकर ₹91,685 करोड़ हुआ: सेबी के सख्त नियमों का असर; हर निवेशक का औसत नुकसान बढ़कर ₹1.16 लाख पहुंचा भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिकी कोर्ट से अडाणी का केस खारिज: 2 साल पहले दर्ज हुआ था; भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने, अमेरिकी निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप थे अमेरिकी अदालत ने सोमवार को गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहा रिश्वत और धोखाधड़ी का केस खारिज कर दिया। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने केस खत्म करने की अमेरिकी न्याय विभाग की मांग मंजूर कर ली। गौतम अडाणी पर 2024 में भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताने का आरोप लगा था। यह भी कहा गया कि रिश्वत के जरिए अडाणी ग्रुप की एक कंपनी को सोलर एनर्जी प्लांट का ठेका दिलाने की कोशिश की गई। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? RBI के नए डिस्क्लोजर नियमों और केएफएस यानी की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स के तहत अब ग्राहकों को लोन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी लोग बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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FSSAI Bans Plastic Packaging for Pan Masala & Gutkha

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक FSSAI यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है। नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ प्लास्टिक-मुक्त पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक कर बेच सकेंगी। FSSAI ने इस संबंध में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। 10 अगस्त को भारत के राजपत्र में प्रकाशित होते ही ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। पैकेजिंग रेगुलेशन में 3 बड़े बदलाव FSSAI ने कहा कि नया नोटिफिकेशन सिर्फ पैकेजिंग से जुड़े नियमों के लिए है। यानी सरकार ने पान मसाला प्रोडक्ट पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि इसके पैकेजिंग मटेरियल की लिस्ट में 3 बड़े बदलाव किए हैं… नया एंट्री शेड्यूल: साल 2018 के खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ‘पान मसाला’ को भी उस लिस्ट (शेड्यूल 4) में शामिल कर लिया गया है, जिसके लिए सरकार तय करती है कि सामान किस चीज में पैक होकर बिकेगा। प्लास्टिक और पॉलीथीन पूरी तरह बैन: गुटखे की पैकिंग में अब पॉलीथीन, पीवीसी (PVC), पॉलिस्टर या किसी भी तरह के नकली प्लास्टिक (सिंथेटिक पॉलीमर) और लैमिनेशन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जा सकेगा। अंदरूनी लेयर्स भी होंगी प्लास्टिक फ्री: अगर कोई कंपनी नियमों से बचने के लिए ऊपर से तो कागज की पैकिंग लगाती है, लेकिन पाउच के अंदर प्लास्टिक या चमकीली एल्युमिनियम लेयर (मैटेलाइज्ड लेयर) का इस्तेमाल करती है, तो उसे भी गैरकानूनी माना जाएगा। अंदर-बाहर दोनों तरफ से पैकिंग पूरी तरह प्लास्टिक-फ्री होनी चाहिए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या घटी, प्रति व्यक्ति एवरेज नुकसान बढ़ा सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सेबी के नए नियमों का बाजार पर सीधा असर दिखा। इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले यूनिक इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 98.10 लाख थी, जो 2025-26 में घटकर 78.60 लाख रह गई। हालांकि, कम निवेशकों के बाद भी प्रति व्यक्ति औसत नुकसान में मामूली बढ़त देखी गई है। FY26 में F&O में ट्रेड करने वाले हर व्यक्ति का औसत घाटा बढ़कर 1.16 लाख रुपए हो गया, जो FY25 में 1.14 लाख रुपए था। 1. सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाए कड़े कदम वित्त मंत्रालय ने बताया कि सेबी ने स्टॉक मार्केट में स्थिरता लाने और आम निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई रेगुलेटरी और सर्विलांस उपाय लागू किए हैं। इसमें सबसे पहले प्लेटफॉर्म पर रिस्क डिस्क्लोजर को अनिवार्य किया गया। अब जब भी कोई यूजर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करता है, तो ब्रोकर को यह चेतावनी दिखाना जरूरी है कि FY22 में F&O में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ था। 2. नवंबर 2024 से लागू हुए 7 बड़े बदलाव F&O सेगमेंट को मजबूत करने के लिए सेबी ने नवंबर 2024 के बाद से एक पूरा रोडमैप लागू किया था… वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को तार्किक बनाना। ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन टेल रिस्क कवरेज को बढ़ाना। इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज में बढ़ोतरी करना। मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को सही ढंग से व्यवस्थित करना। बायर्स से ऑप्शंस प्रीमियम का अग्रिम (अपफ्रंट) कलेक्शन सुनिश्चित करना। एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना। पोजीशन लिमिट्स की इंट्राडे मॉनिटरिंग लागू करना। 3. मई 2025 में सेबी ने लिए और भी कड़े फैसले मई 2025 में सेबी ने बाजार में जोखिम को और बेहतर ढंग से मॉनिटर करने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके तहत अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग-अलग डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिनों को स्ट्रीमलाइन किया गया। साथ ही पोजीशन लिमिट्स के लिए उपयुक्त रिस्क मैट्रिक्स लागू किए गए, जिससे F&O सेगमेंट में जोखिमों का खुलासा और उनकी निगरानी आसान हो सके। 4. F&O में STT से सरकार की कमाई बढ़कर ₹27,695 करोड़ हुई वित्त मंत्रालय ने बताया कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT को एक मॉडर्न और टेक्नोलॉजी-ऑपरेटेड कलेक्शन मैकेनिज्म के रूप में तैयार किया गया है। यह टैक्स सीधे रेगुलेटेड सिक्योरिटीज मार्केट के इंफ्रास्ट्रक्चर में एम्बेडेड यानी जुड़ा होता है। इससे टैक्स चोरी और लीकेज की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, F&O ट्रेड्स पर लगने वाले STT से सरकार का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27,695 करोड़ रुपए हो गया। यह FY25 के 22,225 करोड़ रुपए के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर FY22 से तुलना करें तो उस वक्त सालाना STT कलेक्शन महज 6,634 करोड़ रुपए था। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O? F&O यानी ‘फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस’ शेयर बाजार का एक डेरिवेटिव सेगमेंट है। इसमें निवेशक सीधे शेयर खरीदने के बजाय किसी शेयर या इंडेक्स जैसे- निफ्टी या सेंसेक्स के भविष्य के दाम पर दांव लगाते हैं। यह काफी जोखिम भरा यानी हाई-रिस्क ट्रेडिंग मॉडल होता है, जिसमें कम समय में भारी मुनाफा या बड़ा घाटा हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? RBI के नए डिस्क्लोजर नियमों और केएफएस यानी की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स के तहत अब ग्राहकों को लोन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी लोग बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं। सवाल-जवाब में जानिए वे गलतियां जो आपकी कार को बेवजह महंगी बना देती हैं और इनसे कैसे बचा जाए… सवाल: कार लोन लेते समय खरीदार सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं? जवाब: कार फाइनेंस कराते समय सबसे आम गलती यह होती है कि खरीदार लोन की कुल लागत देखने के बजाय केवल मंथली EMI देखकर बजट तय करते हैं। उदाहरण के लिए ₹15,000 की EMI सुनने में आसान लग सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कितने साल तक चुकाएंगे। लोन की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 या 7 साल करने पर आपकी हर महीने की किस्त तो कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज की रकम कई गुना बढ़ जाएगी। डीलर की दिखाई गई EMI पर तुरंत हां करने के बजाय, हमेशा यह कैलकुलेट करें कि लोन के आखिरी में आप कुल कितना पैसा बैंक को वापस कर रहे हैं। सवाल: डीलर जो पहला लोन ऑफर दे, उसे ही स्वीकार कर लेना नुकसानदेह क्यों है? जवाब: कार शोरूम में सुविधा के नाम पर डीलर जिस बैंक या NBFC का लोन ऑफर दिखाता है, लोग बिना तुलना किए उसे मान लेते हैं। डीलर के पास कई बैंकों के टाई-अप होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि पहला ऑफर आपके लिए सबसे सस्ता हो। अलग-अलग बैंकों और NBFCs की ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज में अंतर होता है। RBI के नियमों के अनुसार, बैंकों को लोन की ऑल-इन कॉस्ट यानी कुल लागत पारदर्शी रूप से बतानी होती है। ब्याज दर में महज 0.5% से 1% का अंतर भी 5 साल के लोन में आपके हजारों रुपए बचा सकता है। सवाल: कम डाउन पेमेंट करने से क्या नुकसान होता है? जवाब: शुरुआत में कम डाउन पेमेंट करना काफी आकर्षक लगता है, क्योंकि बैंक खाते में ज्यादा नकदी बची रहती है। लेकिन डाउन पेमेंट कम होने का सीधा मतलब है- बड़ा लोन। लोन की रकम जितनी ज्यादा होगी, आपको उतना ही ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा और आपकी EMI भी बड़ी होगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपना सारा इमरजेंसी फंड खत्म न करें। एक सही बैलेंस बनाएं, जहां आपका लोन भी छोटा रहे और आपकी बचत और सिक्योरिटी फंड भी बरकरार रहे। सवाल: कार लोन के हिडन चार्जेस और फाइन प्रिंट में क्या देखना चाहिए? जवाब: ज्यादातर खरीदार सिर्फ ब्याज दर यानी इंटरेस्ट रेट पर ध्यान देते हैं और बाकी पेपर्स को बिना पढ़े साइन कर देते हैं। प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, इंश्योरेंस-लिंक्ड कॉस्ट और समय से पहले लोन बंद करने के चार्ज (प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्जेस) लोन को महंगा बना देते हैं। आरबीआई के नए नियमों के तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को की-फैक्ट्स स्टेटमेंट यानी KFS के जरिए सभी लागू चार्ज और पेनल्टी चार्ज की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होती है। लोन फाइनल करने से पहले बैंक से पूरे फी-शेड्यूल की लिखित कॉपी जरूर मांगें। सवाल: लोन लेने से पहले प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर नियमों को जानना क्यों जरूरी है? जवाब: कार खरीदने के 1 या 2 साल बाद आपकी वित्तीय स्थिति बदल सकती है। आपको इंसेंटिव, बोनस या सैलरी हाइक मिल सकता है और आप अपना लोन जल्दी खत्म करना चाह सकते हैं। अगर आपने पहले से लोन एग्रीमेंट नहीं जांचा है, तो पार्ट-पेमेंट या प्री-क्लोजर पर बैंक भारी पेनल्टी लगा सकते हैं। फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट लोन के नियम अलग-अलग होते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले ही जान लें कि पेनल्टी-फ्री प्री-पेमेंट का विकल्प उपलब्ध है या नहीं। सवाल: क्या कार की कुल लागत में सिर्फ कार की कीमत और लोन का ब्याज ही शामिल होता है? जवाब: नहीं, यही दूसरी सबसे बड़ी गलतफहमी है। कार का वास्तविक खर्च केवल EMI और ऑन-रोड प्राइस तक सीमित नहीं होता। जब आप फाइनेंस पर कार लेते हैं, तो आपकी जेब पर EMI के अलावा इंश्योरेंस, फ्यूल का खर्च, रूटीन मेंटेनेंस, सर्विसिंग, और अचानक आने वाले रिपेयर खर्च का भी बोझ पड़ता है। अगर आपकी EMI आपके टेक-होम पे का बहुत बड़ा हिस्सा ले लेती है, तो अन्य जरूरी खर्चों और निवेश के लिए पैसे कम पड़ जाएंगे। सवाल: RBI का डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क खरीदारों की मदद कैसे करता है? जवाब: RBI ने ग्राहकों को पारदर्शिता देने के लिए की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS) और डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत बैंकों को लोन की एनुअल परसेंटेज रेट (APR), कुल ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और सभी हिडन चार्ज एक ही पेज पर स्पष्ट भाषा में लिखकर देने होते हैं। इस नियम का मकसद खरीदार को लोन के सभी वित्तीय पहलुओं से रूबरू कराना है ताकि वह सोच-समझकर फैसला ले सके। हालांकि, जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी अलग-अलग ऑफर्स की तुलना करना खुद खरीदार की जिम्मेदारी है। क्या होता है की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS)? KFS एक ऐसा दस्तावेज है जो बैंक या लोन देने वाली संस्था को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को देना अनिवार्य होता है। इसमें एक ही जगह पर लोन की रकम, ब्याज दर, एनुअल परसेंटेज रेट (APR), प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट पेनल्टी और प्री-पेमेंट चार्ज लिखे होते हैं। इसे पढ़कर आप तुरंत समझ सकते हैं कि आपका लोन वास्तव में कितना महंगा है।

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कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? RBI के नए डिस्क्लोजर नियमों और केएफएस यानी की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स के तहत अब ग्राहकों को लोन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी लोग बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं। सवाल-जवाब में जानिए वे गलतियां जो आपकी कार को बेवजह महंगी बना देती हैं और इनसे कैसे बचा जाए… सवाल: कार लोन लेते समय खरीदार सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं? जवाब: कार फाइनेंस कराते समय सबसे आम गलती यह होती है कि खरीदार लोन की कुल लागत देखने के बजाय केवल मंथली EMI देखकर बजट तय करते हैं। उदाहरण के लिए ₹15,000 की EMI सुनने में आसान लग सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कितने साल तक चुकाएंगे। लोन की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 या 7 साल करने पर आपकी हर महीने की किस्त तो कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज की रकम कई गुना बढ़ जाएगी। डीलर की दिखाई गई EMI पर तुरंत हां करने के बजाय, हमेशा यह कैलकुलेट करें कि लोन के आखिरी में आप कुल कितना पैसा बैंक को वापस कर रहे हैं। सवाल: डीलर जो पहला लोन ऑफर दे, उसे ही स्वीकार कर लेना नुकसानदेह क्यों है? जवाब: कार शोरूम में सुविधा के नाम पर डीलर जिस बैंक या NBFC का लोन ऑफर दिखाता है, लोग बिना तुलना किए उसे मान लेते हैं। डीलर के पास कई बैंकों के टाई-अप होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि पहला ऑफर आपके लिए सबसे सस्ता हो। अलग-अलग बैंकों और NBFCs की ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज में अंतर होता है। RBI के नियमों के अनुसार, बैंकों को लोन की ऑल-इन कॉस्ट यानी कुल लागत पारदर्शी रूप से बतानी होती है। ब्याज दर में महज 0.5% से 1% का अंतर भी 5 साल के लोन में आपके हजारों रुपए बचा सकता है। सवाल: कम डाउन पेमेंट करने से क्या नुकसान होता है? जवाब: शुरुआत में कम डाउन पेमेंट करना काफी आकर्षक लगता है, क्योंकि बैंक खाते में ज्यादा नकदी बची रहती है। लेकिन डाउन पेमेंट कम होने का सीधा मतलब है- बड़ा लोन। लोन की रकम जितनी ज्यादा होगी, आपको उतना ही ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा और आपकी EMI भी बड़ी होगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपना सारा इमरजेंसी फंड खत्म न करें। एक सही बैलेंस बनाएं, जहां आपका लोन भी छोटा रहे और आपकी बचत और सिक्योरिटी फंड भी बरकरार रहे। सवाल: कार लोन के हिडन चार्जेस और फाइन प्रिंट में क्या देखना चाहिए? जवाब: ज्यादातर खरीदार सिर्फ ब्याज दर यानी इंटरेस्ट रेट पर ध्यान देते हैं और बाकी पेपर्स को बिना पढ़े साइन कर देते हैं। प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, इंश्योरेंस-लिंक्ड कॉस्ट और समय से पहले लोन बंद करने के चार्ज (प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्जेस) लोन को महंगा बना देते हैं। आरबीआई के नए नियमों के तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को की-फैक्ट्स स्टेटमेंट यानी KFS के जरिए सभी लागू चार्ज और पेनल्टी चार्ज की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होती है। लोन फाइनल करने से पहले बैंक से पूरे फी-शेड्यूल की लिखित कॉपी जरूर मांगें। सवाल: लोन लेने से पहले प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर नियमों को जानना क्यों जरूरी है? जवाब: कार खरीदने के 1 या 2 साल बाद आपकी वित्तीय स्थिति बदल सकती है। आपको इंसेंटिव, बोनस या सैलरी हाइक मिल सकता है और आप अपना लोन जल्दी खत्म करना चाह सकते हैं। अगर आपने पहले से लोन एग्रीमेंट नहीं जांचा है, तो पार्ट-पेमेंट या प्री-क्लोजर पर बैंक भारी पेनल्टी लगा सकते हैं। फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट लोन के नियम अलग-अलग होते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले ही जान लें कि पेनल्टी-फ्री प्री-पेमेंट का विकल्प उपलब्ध है या नहीं। सवाल: क्या कार की कुल लागत में सिर्फ कार की कीमत और लोन का ब्याज ही शामिल होता है? जवाब: नहीं, यही दूसरी सबसे बड़ी गलतफहमी है। कार का वास्तविक खर्च केवल EMI और ऑन-रोड प्राइस तक सीमित नहीं होता। जब आप फाइनेंस पर कार लेते हैं, तो आपकी जेब पर EMI के अलावा इंश्योरेंस, फ्यूल का खर्च, रूटीन मेंटेनेंस, सर्विसिंग, और अचानक आने वाले रिपेयर खर्च का भी बोझ पड़ता है। अगर आपकी EMI आपके टेक-होम पे का बहुत बड़ा हिस्सा ले लेती है, तो अन्य जरूरी खर्चों और निवेश के लिए पैसे कम पड़ जाएंगे। सवाल: RBI का डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क खरीदारों की मदद कैसे करता है? जवाब: RBI ने ग्राहकों को पारदर्शिता देने के लिए की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS) और डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत बैंकों को लोन की एनुअल परसेंटेज रेट (APR), कुल ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और सभी हिडन चार्ज एक ही पेज पर स्पष्ट भाषा में लिखकर देने होते हैं। इस नियम का मकसद खरीदार को लोन के सभी वित्तीय पहलुओं से रूबरू कराना है ताकि वह सोच-समझकर फैसला ले सके। हालांकि, जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी अलग-अलग ऑफर्स की तुलना करना खुद खरीदार की जिम्मेदारी है। क्या होता है की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS)? KFS एक ऐसा दस्तावेज है जो बैंक या लोन देने वाली संस्था को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को देना अनिवार्य होता है। इसमें एक ही जगह पर लोन की रकम, ब्याज दर, एनुअल परसेंटेज रेट (APR), प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट पेनल्टी और प्री-पेमेंट चार्ज लिखे होते हैं। इसे पढ़कर आप तुरंत समझ सकते हैं कि आपका लोन वास्तव में कितना महंगा है।

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10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:फील्ड ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट जारी होंगे, सफल होने पर नियमित जारी होंगे

10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:फील्ड ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट जारी होंगे, सफल होने पर नियमित जारी होंगे

नई दिल्ली, 11 अगस्त, मंगलवार। सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंकनोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर RBI एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को यह प्रस्ताव भेजा था। सफल ट्रायल के बाद नियमित जारी होंगे नोट RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी करने की योजना है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। RBI के मुताबिक, पॉलीमर नोट कागज से बने नोटों के साथ जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पॉलीमर नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए फिलहाल इनके जारी होने की सही समय सीमा और इस पर होने वाले खर्च का व्यावहारिक तौर पर आकलन करना संभव नहीं है। महंगाई 2025-26 में घटकर 2.1% रही एक अन्य सवाल के जवाब में सीतारमन ने बताया कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से मापी जाने वाली औसत खुदरा महंगाई 2023-24 में 5.4% से घटकर 2024-25 में 4.6% और 2025-26 में 2.1% रह गई। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से जिंसों की कीमतों में आए झटके और दुनिया भर में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ी। सब्जियों की कीमतों में मौसमी तेजी और अल नीनो की प्रतिकूल परिस्थितियों की आशंका से 2026-27 की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9% हो गई। हालांकि, यह अब भी RBI के 4% महंगाई लक्ष्य से कम है। GST में 18%, 5% और 40% की दरें वित्त मंत्री ने कहा कि GST काउंसिल की 56वीं बैठक में दो-दर वाला ढांचा लाया गया है। इसमें सामान्य दर 18%, मेरिट दर 5% और कुछ चुनिंदा वस्तुओं व सेवाओं के लिए विशेष डिमेरिट दर 40% रखी गई है। उन्होंने कहा कि 40% की दर में पहले का मुआवजा उपकर भी शामिल है। इसलिए कुल टैक्स बोझ में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस बदलाव से कई वस्तुओं और सेवाओं की दरों को 28% से घटाकर 18%, 18% से घटाकर 12% या 5% और 12% से घटाकर 5% या शून्य किया गया है। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए घटी सीतारमन ने कहा कि इनपुट लागत कम करने, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए सरकार ने कई वस्तुओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) में बदलाव किया। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ये बदलाव 2 फरवरी 2026 से लागू हुए। जरूरी वस्तुओं की कीमतों का दबाव कम करने के लिए क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर BCD घटाई गई। इसके अलावा, मसूर पर कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट सेस कम किया गया। मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई गई। 12 लाख रुपए तक की सालाना आय पर टैक्स छूट वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रत्यक्ष करों में सुधार के साथ सरकार ने लोगों की खर्च करने योग्य आय भी बढ़ाई है। सालाना 12 लाख रुपए तक की आय को इनकम टैक्स से छूट दी गई है। सैलरी पाने वाले लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपए तक की सालाना आय टैक्स से मुक्त है। उन्होंने कहा कि इन उपायों से घरेलू खपत को समर्थन मिला है। GDP में निजी अंतिम उपभोग खर्च का हिस्सा 2022-23 के आधार वर्ष पर 56.5% से 56.7% के बीच लगभग स्थिर रहा। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के जारी ताजा GDP अनुमान के मुताबिक, 2025-26 में प्रति व्यक्ति निजी अंतिम उपभोग खर्च (PFCE) 6.8% बढ़ा। 2023-24 में इसकी वृद्धि 4.8% रही थी। सीतारमन ने कहा कि सरकार देश में कीमतों की स्थिति पर लगातार नजर रखती है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार लोगों की क्रय शक्ति बचाने के लिए वित्तीय, प्रशासनिक और सप्लाई से जुड़े कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन उपायों का खास ध्यान निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों पर रहता है।

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10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे

10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों को मंजूरी:वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे, ये 30 साल तक चलेंगे

सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोट के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। दोनों के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सफल ट्रायल के बाद नियमित जारी होंगे नोट RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। ट्रायल सफल होने के बाद इन दोनों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। RBI के मुताबिक, पॉलीमर नोट कागज से बने नोटों के साथ जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पॉलीमर नोटों की खरीद की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए फिलहाल इनके जारी होने की सही समय सीमा बता पाना संभव नहीं है। सवाल-जवाब में जानें इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें… सवाल 1: पॉलीमर नोट क्या होते हैं और सरकार इन्हें क्यों ला रही? जवाब: पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बताया था कि ये नोट दुनिया के कई देशों जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक उपयोग में रहे हैं। इन्हें लाने की मुख्य वजहें- लंबी उम्र: ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं। नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। छपाई खर्च में बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे छपाई का खर्च बढ़ता है। FY25 में आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे चलेंगे, जिससे बार-बार छापने का खर्च घटेगा। सवाल 2: क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई ने पूरी तरह साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने से पुराने कागजी नोट चलन से बाहर नहीं होंगे। सर्कुलेशन जारी रहेगा: जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं होते, तब तक कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे। सवाल 3: पॉलीमर नोट का प्रस्ताव कब आया था? जवाब: भारत ने 2012 में पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से प्रोजेक्ट रुक गया था। मई-जून : मीडिया रिपोर्ट्स और आरबीआई की रिपोर्ट में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर विचार की बात आई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन किया जा रहा है। सवाल 4: दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं? दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। सवाल 5: भारत में कब-कब नोट बदले गए? जवाब: आजादी से लेकर अब तक भारत में बड़े पैमाने पर 3 बार नोटबंदी या बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है… 1. पहली बार – जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल/आजादी से ठीक पहले): क्या हुआ: तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया था। मकसद: काले धन और युद्ध के दौरान हुई अवैध कमाई को बाहर निकालना। बाद में: 1954 में सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट फिर से शुरू किए थे। 2. दूसरी बार – जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): क्या हुआ: जनता पार्टी की सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया। मकसद: चुनाव में होने वाले काले धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार को रोकना। 3. तीसरी बार – 8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): क्या हुआ: रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने देश में चल रहे ₹500 और ₹1,000 के नोटों को रातों-रात अमान्य घोषित कर दिया। बदलाव: इनकी जगह ₹500 का नया नोट और पहली बार ₹2,000 का नया नोट जारी किया गया। ₹2000 के नोट की वापसी (मई 2023): 19 मई 2023 को RBI ने ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत ₹2,000 के नोट को चलन (सर्कुलेशन) से वापस लेने का ऐलान किया। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया क्योंकि इसे बैंक में जमा करने या बदलने का समय दिया गया था।

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दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया:लोगों के आइडिया से तैयार प्रोडक्ट महज तीन माह में जमीन पर उतार रहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया:लोगों के आइडिया से तैयार प्रोडक्ट महज तीन माह में जमीन पर उतार रहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

जरा सोचिए, आपके पास किसी स्किनकेयर प्रोडक्ट का आइडिया हो और महज 3 महीने में वह लॉन्च हो जाए। न तो फैक्ट्री लगाने की जरूरत पड़ी और न ही रिसर्च लैब की। यही मॉडल दक्षिण कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री (K-ब्यूटी) को ग्लोबल पावरहाउस बना रहा है। इसका कारोबारी ढांचा दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी टीएसएमसी जैसा है। जैसे टीएसएमसी दूसरों (जैसे एपल) के डिजाइन पर चिप बनाती है, वैसे ही ओडीएम (ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर) कंपनियां नए ब्रांड्स के आइडिया को प्रोडक्ट में बदल रही हैं। इस बिजनेस मॉडल के केंद्र में कोलमार कोरिया और कॉसमैक्स जैसी कंपनियां हैं, जो खुद का कोई कंज्यूमर ब्रांड नहीं बेचतीं। इनका काम रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित है। कोलमार ने 2024 में ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे आइडिया को तैयार प्रोडक्ट में बदलने का समय 9-12 महीने से घटकर सिर्फ 3 महीने रह गया। इनके पास हमेशा 150 से अधिक सेमी-फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का कैटलॉग रहता है, जिससे नए उद्यमियों के लिए शुरुआती लागत और रिस्क कम हो जाते हैं। अनोखे बिजनेस मॉडल की बदौलत दक्षिण कोरिया में बिना अपनी फैक्ट्री के कॉस्मेटिक्स बिजनेस करने वाली कंपनियों की संख्या 2025 में बढ़कर 28,412 हो गई। यह एक दशक पहले की तुलना में 4 गुना अधिक है। मैडेका क्रीम और मैन्यो जैसी हिट स्किनकेयर लाइन्स इसी मॉडल की देन हैं। उत्पादन की जिम्मेदारी बाहरी कंपनियों पर होने से नए ब्रांड्स पूरा फोकस सिर्फ मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बिक्री पर कर पाते हैं। इस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के दम पर दक्षिण कोरिया में कॉस्मेटिक्स उत्पादन 17.9 ट्रिलियन वॉन (1.19 लाख करोड़ रुपए) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2025 में दक्षिण कोरिया का कॉस्मेटिक्स निर्यात 12% बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर निकल गया। इससे दक्षिण कोरिया अमेरिका को पछाड़कर फ्रांस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्यूटी प्रोडक्ट निर्यातक बन गया। हालांकि, ‘के-ब्यूटी’ की इस जबरदस्त सफलता पर अब ‘सी-ब्यूटी’ का खतरा मंडराने लगा है। चीन की कंपनियां दक्षिण कोरिया का ही कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाकर तेजी से नए ब्रांड्स लॉन्च कर रही हैं। जिस फॉर्मूले से कोरिया ग्लोबल लीडर बना, अब उसी फॉर्मूले की नकल करके चीन उसके सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। सरकार की मदद से विस्तार की राह भी आसान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, दक्षिण कोरिया के सीजे ओलिव यंग जैसे रिटेल नेटवर्क्स ने भी नए ब्रांड्स को वैश्विक प्लेटफॉर्म दिया। इसके 1,400 से अधिक स्टोर्स पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं, जबकि इसका ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 60 देशों में सर्विस दे रहा है। कोरियाई सरकार भी 2020 से कॉस्मेटिक्स को सेमीकंडक्टर और एंटरटेनमेंट की तरह प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर मानकर सब्सिडी और लोन दे रही है। इससे इस सेक्टर के लिए विस्तार की राह असान हो गई है।

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Kanjirappally Election Result 2026 LIVE Updates Highlights: Kanjirappally Assembly Seat Winner, Leading, MLA, Margin, Vote Count

May 4, 2026/
11:56 am

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 11:56 IST कूच बिहार, मालदा, जलपाईगुड़ी-बंगाल के बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में 94-96% मतदान हुआ। महिलाओं ने...

क्या राजस्थान को IPL फाइनल का टिकट दिला पाएंगे सूर्यवंशी:गुजरात की गेंदबाजी सबसे मजबूत, रॉयल्स-टाइटंस में क्वालिफायर-2 मैच आज

May 29, 2026/
4:30 am

IPL 2026 के क्वालिफायर-2 में आज गुजरात टाइटंस और राजस्थान रॉयल्स की टीमें आमने-सामने होगीं। इस मैच को जीतने वाली...

US-ईरान समझौते से दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी:क्रूड ऑयल 4.8% गिरकर $83 पर आया; अमेरिकी AI-एयरलाइंस कंपनियों के शेयर 7.8% तक उछले

June 15, 2026/
8:35 pm

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने और होर्मुज रूट को दोबारा खोलने के लिए एक समझौता हो गया...

नसीरुद्दीन शाह CJP के सपोर्ट में जंतर-मंतर नहीं पहुंचे:दावा गलत, मुंबई के रीगल सिनेमा के बाहर का है वायरल वीडियो

July 21, 2026/
10:57 am

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के बीच एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल...

ईशान किशन टी-20 बैटर्स की रैंकिंग में नंबर-5 पर आए:बॉलर्स में बुमराह ने 7 स्थान की छलांग लगाई, सिकंदर रजा टॉप ऑलराउंडर

February 25, 2026/
5:43 pm

ICC की ताजा टी-20 रैंकिंग में भारतीय ओपनर ईशान किशन 3 स्थान की छलांग लगाकर 5वें नंबर पर पहुंच गए...

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April 19, 2026/
6:07 pm

गर्मियों के मौसम में शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं. बढ़ते तापमान के कारण सिरदर्द, पाचन...

जयपुर में मॉडल रह चुकी युवती की मौत, VIDEO:कार बेकाबू होकर डिवाइडर पर चढ़ी, सहेली के घर से लौट रही थी

March 24, 2026/
9:51 am

जयपुर में सोमवार देर रात सड़क हादसे में मॉडल रह चुकी युवती की मौत हो गई। अभी स्टेज एंकरिंग करती...

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