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Adani Acquires Intellismart for ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm

Adani Acquires Intellismart for ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm

Hindi News Business Adani Acquires Intellismart For ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm मुंबई8 मिनट पहले कॉपी लिंक अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को खरीद लिया है। यह सौदा पूरे 3,050 करोड़ रुपए में हुआ है। इसके तहत एईएसएल को इंटेलिस्मार्ट की पूरी 100% हिस्सेदारी मिलेगी। इंटेलिस्मार्ट भारत की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास यूपी, गुजरात, एमपी, बिहार और असम में 2.2 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर हैं। इस अधिग्रहण के बाद एईएसएल के कुल स्मार्ट मीटरों की संख्या बढ़कर 4.7 करोड़ से अधिक हो जाएगी। इसके साथ ही एईएसएल देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी बन गई है। इंटेलिस्मार्ट एनआईआईएफ और ईईएसएल का संयुक्त उपक्रम है। इस सौदे में पूरी इक्विटी का अधिग्रहण शामिल है। इसके साथ अडाणी इस कंपनी में एनआईआईएफ का पूरा बकाया कर्ज भी चुकाएगी। AESL के स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस में अभी 2.46 करोड़ से ज्यादा मीटर वहीं, AESL के स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस में अभी 2.46 करोड़ से ज्यादा मीटर का ऑर्डर बुक है। अधिग्रहण के बाद कंपनी के पास 4.7 करोड़ स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा और इससे भारत के स्मार्ट मीटरिंग मार्केट में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की टॉप पोजीशन को और मजबूत होगी। अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कहना है कि इस अधिग्रहण के बाद उसके पास 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा। इससे कंपनी भारत की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग प्लेटफॉर्म बन जाएगी। स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं को रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी देने, बिलिंग में पारदर्शिता लाने और बिजली चोरी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार भी देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। ऐसे में यह अधिग्रहण भविष्य के लिहाज से काफी रणनीतिक माना जा रहा है। उपभोक्ताओं को सटीक बिजली बिल मिलेंगे: CEO अडाणी एनर्जी के CEO कंदर्प पटेल ने कहा कि IntelliSmart का अधिग्रहण कंपनी की क्षमता और निष्पादन शक्ति को और मजबूत करेगा। इससे भारत के बिजली वितरण क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही बड़े स्तर पर संचालन होने से लागत में कमी आएगी और बेहतर दक्षता हासिल होगी। इससे आम उपभोक्ताओं को सटीक बिजली बिल मिलेंगे और गलत बिलों की समस्या खत्म होगी। —————— ये खबर भी पढ़ें…. अडाणी पावर का चौथी तिमाही में मुनाफा 64% बढ़ा:यह ₹4,271 करोड़ रहा, इनकम भी 10% बढ़ी अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹2,599 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Adani Acquires Intellismart for ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm

Adani Acquires Intellismart for ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm

Hindi News Business Adani Acquires Intellismart For ₹3,050 Cr; Becomes Indias Largest Smart Meter Firm मुंबई1 घंटे पहले कॉपी लिंक अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को खरीद लिया है। यह सौदा पूरे 3,050 करोड़ रुपए में हुआ है। इसके तहत एईएसएल को इंटेलिस्मार्ट की पूरी 100% हिस्सेदारी मिलेगी। इंटेलिस्मार्ट भारत की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास यूपी, गुजरात, एमपी, बिहार और असम में 2.2 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर हैं। इस अधिग्रहण के बाद एईएसएल के कुल स्मार्ट मीटरों की संख्या बढ़कर 4.7 करोड़ से अधिक हो जाएगी। इसके साथ ही एईएसएल देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी बन गई है। इंटेलिस्मार्ट एनआईआईएफ और ईईएसएल का संयुक्त उपक्रम है। इस सौदे में पूरी इक्विटी का अधिग्रहण शामिल है। इसके साथ अडाणी इस कंपनी में एनआईआईएफ का पूरा बकाया कर्ज भी चुकाएगी। AESL के स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस में अभी 2.46 करोड़ से ज्यादा मीटर वहीं, AESL के स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस में अभी 2.46 करोड़ से ज्यादा मीटर का ऑर्डर बुक है। अधिग्रहण के बाद कंपनी के पास 4.7 करोड़ स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा और इससे भारत के स्मार्ट मीटरिंग मार्केट में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की टॉप पोजीशन को और मजबूत होगी। अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कहना है कि इस अधिग्रहण के बाद उसके पास 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा। इससे कंपनी भारत की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग प्लेटफॉर्म बन जाएगी। स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं को रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी देने, बिलिंग में पारदर्शिता लाने और बिजली चोरी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार भी देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। ऐसे में यह अधिग्रहण भविष्य के लिहाज से काफी रणनीतिक माना जा रहा है। उपभोक्ताओं को सटीक बिजली बिल मिलेंगे: CEO अडाणी एनर्जी के CEO कंदर्प पटेल ने कहा कि IntelliSmart का अधिग्रहण कंपनी की क्षमता और निष्पादन शक्ति को और मजबूत करेगा। इससे भारत के बिजली वितरण क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही बड़े स्तर पर संचालन होने से लागत में कमी आएगी और बेहतर दक्षता हासिल होगी। इससे आम उपभोक्ताओं को सटीक बिजली बिल मिलेंगे और गलत बिलों की समस्या खत्म होगी। —————— ये खबर भी पढ़ें…. अडाणी पावर का चौथी तिमाही में मुनाफा 64% बढ़ा:यह ₹4,271 करोड़ रहा, इनकम भी 10% बढ़ी अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹2,599 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर फ्रॉड 4 गुना तक बढ़ा‎:ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए ‎मनोवैज्ञानिकों का सहारा ले रहे बैंक‎

अमेरिका में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने‎ बैंकों की चिंता बढ़ा दी है। ठगी के मामलों में ‎तेजी आने के बाद कुछ बैंक अब तकनीक के‎ साथ मनोवैज्ञानिक तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। अमेरिका के सबसे बड़े बैंक जेपी मोर्गन ने‎इसी उद्देश्य से व्यवहार साइंटिस्ट की नियुक्ति ‎की है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के‎ इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर के अनुसार 2025‎ में साइबर अपराधों से लोगों को 2 लाख करोड़ ‎रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। यह 2024‎ की तुलना में 25% ज्यादा और 2020 के 42‎ हजार करोड़ रुपए से करीब चार गुना है।‎ जेपी मॉर्गन ने दो वर्ष पहले व्यवहार साइंटिस्ट‎ एलिजाबेथ हपर्ट को नियुक्त किया था। उनका‎ काम कॉल सेंटर और बैंक शाखाओं के‎ कर्मचारियों को यह समझाना है कि ठग किस ‎तरह लोगों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें बैंक ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎की सलाह पर संदेह करने के लिए तैयार करते ‎हैं। कई मामलों में ठग महीनों तक अपने शिकार‎ से संपर्क बनाए रखते हैं और फिर उनसे खुद ही ‎पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। बैंक अब संदिग्ध‎ मामलों में ग्राहकों से सीधे संपर्क कर रहे हैं।‎ स्कैम विशेषज्ञ सवाल पूछकर और संदेह के‎ आधार पर ग्राहकों को ठगी के जाल से बाहर‎ निकालने की कोशिश करते हैं। बैंक पासवर्ड दर्ज‎ करते समय असामान्य रुकावट, हिचकिचाहट या ‎किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्क्रीन साझा करना‎ संभावित धोखाधड़ी के संकेत मान रहे हैं।‎

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Rajiv Bajaj Quits Bajaj Finserv Board

Rajiv Bajaj Quits Bajaj Finserv Board

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज अब बजाज फिनसर्व के बोर्ड से इस्तीफा देने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी बाहरी जिम्मेदारियों को कम करने और ऑटोमोबाइल बिजनेस पर फोकस करने के लिए यह फैसला लिया है। वह 31 जुलाई को होने वाली कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद डायरेक्टर पद से हट जाएंगे। रोटेशन के तहत रिटायरमेंट, एजीएम में दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे बजाज फिनसर्व ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी गई एक एक्सचेंज फाइलिंग में इस फैसले की आधिकारिक जानकारी साझा की है। कंपनी के मुताबिक राजीव बजाज बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने कंपनी को सूचित किया है कि 31 जुलाई को होने वाली AGM में वे दोबारा चुनाव की मांग नहीं करेंगे। इसके चलते एजीएम में रोटेशन द्वारा रिटायरमेंट के साथ ही वे कंपनी के डायरेक्टर नहीं रहेंगे। ऑटो बिजनेस में बढ़ीं जिम्मेदारियां, इसलिए लिया फैसला राजीव बजाज ने पिछले कुछ वर्षों में बजाज ऑटो में अपनी बढ़ती हुई जिम्मेदारियों को इस फैसले की मुख्य वजह बताया है। बजाज फिनसर्व ने कहा कि हाल के समय में बजाज ऑटो लिमिटेड में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। कंपनी ने बजाज ऑटो टेक्नोलॉजी लिमिटेड और बजाज ऑटो क्रेडिट लिमिटेड की स्थापना की है, साथ ही हाल ही में केटीएम (KTM) का अधिग्रहण भी किया है। इसी वजह से वे अपनी अन्य बाहरी जिम्मेदारियों को कम करना चाहते हैं। बोर्ड ने जताया आभार, अप्रैल में बजाज फाइनेंस भी छोड़ा था बजाज फिनसर्व के बोर्ड ने राजीव बजाज के इस फैसले को संज्ञान में लिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने कंपनी के साथ उनके लंबे जुड़ाव और दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उनके प्रति आभार और सराहना व्यक्त की है। इससे पहले इसी साल अप्रैल महीने में भी राजीव बजाज ने बजाज फाइनेंस को एक नोटिस भेजा था। तब उन्होंने बजाज फाइनेंस की एजीएम में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था। जिसके बाद लेंडर बोर्ड के साथ उनका लंबा सफर खत्म हो गया था। उस समय बजाज फाइनेंस ने भी उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए आभार जताया था। राहुल बजाज के बेटे और राजीव के भाई हैं संजीव बजाज राजीव बजाज वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनियों में से एक, बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) हैं। वे स्वर्गीय राहुल बजाज के बेटे हैं, जिन्होंने बजाज ऑटो को भारत के सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद ऑटोमोबाइल ब्रांड्स में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। राजीव बजाज के भाई संजीव बजाज हैं, जो बजाज फिनसर्व के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। बजाज फिनसर्व एक फाइनेंशियल सर्विसेज होल्डिंग कंपनी है, जिसके पास बजाज फाइनेंस में मेजॉरिटी हिस्सेदारी मौजूद है। 2005 से संभाल रहे हैं बजाज ऑटो के MD का पद राजीव बजाज के पास ऑटोमोबाइल सेक्टर और बिजनेस लीडरशिप का एक लंबा अनुभव है। वे साल 2002 में पहली बार बजाज ऑटो के बोर्ड मेंबर बने थे। इसके बाद साल 2005 में उन्होंने कंपनी के MD के रूप में कमान संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने केटीएम ग्रुप के भीतर कंपनियों के सुपरवाइजरी बोर्ड्स में भी कई पदों पर काम किया है। क्या होता है ‘रिटायरमेंट बाई रोटेशन’? कंपनीज एक्ट के तहत लिस्टेड कंपनियों के डायरेक्टर्स का एक निश्चित हिस्सा हर एजीएम में रोटेशन के तहत रिटायर होता है। यदि डायरेक्टर चाहें और शेयरहोल्डर्स अनुमति दें, तो उन्हें दोबारा चुना जा सकता है। राजीव बजाज ने खुद दोबारा चुनाव लड़ने से मना किया है। क्या है बजाज फिनसर्व और बजाज ऑटो का कनेक्शन? ये दोनों एक ही मूल समूह बजाज ग्रुप का हिस्सा हैं, लेकिन बजाज ऑटो पूरी तरह से गाड़ियों (टू-व्हीलर/थ्री-व्हीलर) के निर्माण पर केंद्रित है, जबकि बजाज फिनसर्व समूह का वित्तीय (फाइनेंस और इंश्योरेंस) कारोबार संभालती है। ये खबर भी पढ़ें… फिच ने भारत की GDP-ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.4% किया: अमेरिका-ईरान जंग के असर से थमेगी रफ्तार; महंगाई बढ़कर 5.3% पहुंचने की आशंका अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। 3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी 1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी। 2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी। इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा। साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है। फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था। डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है। चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है। ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है। फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है। 1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है। वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी। क्या होती है रेटिंग एजेंसी? रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं। इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। ये खबर भी पढ़ें… इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

US-Iran War Impact Slows India GDP Growth to 6.4%; Inflation to 5.3%

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है। फिच का कहना है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से सितंबर और दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी। 3 बड़े कारणों से सुस्त होगी इकोनॉमी 1. अमेरिका-ईरान जंग और तेल संकट का असर फिच रेटिंग्स ने अपनी जून ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट का असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखेगा। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी (सितंबर) और तीसरी (दिसंबर) तिमाही में आर्थिक सुस्ती सबसे ज्यादा नजर आएगी। 2. इनकम में कमी और कमजोर कंज्यूमर स्पेंडिंग जंग के कारण बढ़ती कीमतें लोगों की रियल इनकम को प्रभावित कर रही हैं। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी। हालांकि, देश के भीतर कैपिटल एक्सपेंडिचर में मजबूती बनी हुई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और क्रूड की बढ़ी कीमतें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पिछले 14 हफ्तों से बंद है। फिच ने अनुमान जताया है कि यह जुलाई से पहले नहीं खुलेगा। इसी तेल संकट के चलते फिच ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर $87 प्रति बैरल कर दिया है। हाल के हफ्तों में ही ईंधन की कीमतें 4-5% तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू मांग रहेगी ग्रोथ का मुख्य जरिया फिच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.4% रह जाएगी, जो हमारे मार्च के अनुमान से 0.3% कम है। हालांकि, घरेलू मांग ही इस ग्रोथ की मुख्य ड्राइवर बनी रहेगी। इसके साथ ही वास्तविक रूप से कम आयात होने के कारण नेट एक्सटर्नल डिमांड का ग्रोथ में पॉजिटिव योगदान रहेगा। साल के अंत तक 5.3% पर पहुंच सकती है महंगाई भारत में अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित रिटेल महंगाई 3.5% और थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 8.3% रही है। हालांकि रिटेल महंगाई अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है। फिच का अनुमान है कि बेस इफेक्ट और महंगी एनर्जी की वजह से इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक महंगाई दर बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा देश के कुछ हिस्सों में जारी हीटवेव और औसत से कम मानसून के अनुमान ने भी महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। ब्याज दरें बढ़ाकर 5.5% कर सकता है आरबीआई महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए फिच का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी नीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि अप्रैल की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। लेकिन फिच के मुताबिक, सप्लाई शॉक से पैदा हुए मूल्य दबाव से निपटने के लिए आरबीआई इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करके इसे 5.5% कर सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया था और महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था। डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी गिरावट नहीं करेंसी मार्केट को लेकर फिच ने भारतीय बाजार के लिए राहत भरी बात कही है। फिच के अनुसार, इस साल के बचे हुए महीनों में भारतीय रुपए में किसी बड़े अवमूल्यन (गिरावट) की आशंका नहीं है। चालू वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपए का एक्सचेंज रेट औसतन 97.50 के स्तर पर रहने की उम्मीद है। ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी घटा तेल संकट की मार सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रही है। फिच ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) का अनुमान भी 0.2% घटाकर 2.4% कर दिया है। फिच के चीफ इकोनॉमिस्ट ब्रायन कुल्टन ने कहा कि ऑयल प्राइस शॉक से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, लेकिन दुनिया भर में आईटी (IT) सेक्टर पर हो रहे भारी खर्च से इस झटके का असर थोड़ा कम जरूर हुआ है, खासकर एशिया में इसका फायदा मिल रहा है। 1970 के दशक जैसा बुरा संकट नहीं फिच का मानना है कि मौजूदा तेल संकट 1970 के दशक के खतरनाक तेल संकटों जितना गंभीर नहीं है। साल 1979 में कच्चे तेल की वास्तविक कीमतें 170 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और तब ओपेक (OPEC) देशों की भूमिका भी काफी अलग थी। 1980 के मुकाबले आज वैश्विक जीडीपी में तेल की कुल खपत की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई है। वित्त वर्ष 2027-28 में आएगी तेजी फिच को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी। एनर्जी संकट का असर कम होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट में सुधार होगा, जिससे इस पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ सुधरकर 6.7% पर पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में यह दोबारा अपने ट्रेंड ग्रोथ रेट 6.4% के स्तर पर आ जाएगी। क्या होती है रेटिंग एजेंसी? रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच, मूडीज और एसएंडपी (S&P) वैश्विक स्तर पर देशों और कंपनियों की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नीतियों का आकलन करती हैं। इनके द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान और क्रेडिट रेटिंग्स के आधार पर ही दुनिया भर के बड़े निवेशक किसी देश में निवेश करने का फैसला लेते हैं। किसी देश की रेटिंग या अनुमान घटने से वहां विदेशी निवेश की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। ये खबर भी पढ़ें… इस साल 7.7% की दर से बढ़ी इकोनॉमी: पिछले साल 7.1% की दर से बढ़ी थी, अगले साल 6.6% रह सकती है GDP ग्रोथ देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। पूरे साल जीडीपी ग्रोथ 7.7% रही, जो सरकार के फरवरी में लगाए गए 7.6% के अनुमान से ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में GDP दर 7.1% रही थी। हालांकि, सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 6.6% रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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वॉलमार्ट का दांव- छोटे-बड़े हर ऑपरेशन में एआई तैनात:20 लाख कर्मचारियों वाला वॉलमार्ट एआई से रिटेल और शॉपिंग का तरीका बदल रहा

वॉलमार्ट का दांव- छोटे-बड़े हर ऑपरेशन में एआई तैनात:20 लाख कर्मचारियों वाला वॉलमार्ट एआई से रिटेल और शॉपिंग का तरीका बदल रहा

ग्लोबल रिटेल चेन वॉलमार्ट की सालाना मीटिंग में यह साफ हो गया है कि कंपनी बिजनेस की रफ्तार बढ़ाने के लिए एआई को सबसे बड़ा हथियार बना रही है। दुनियाभर में फैले हजारों स्टोर्स, करोड़ों साप्ताहिक ग्राहक और 20 लाख से अधिक कर्मचारियों वाली यह कंपनी अब स्टोर के अंदर ऑर्डर पिकिंग से लेकर डिलीवरी टाइमिंग और कस्टमर फीडबैक समझने तक हर छोटे-बड़े ऑपरेशन में एआई की मदद ले रही है। वॉलमार्ट के सीईओ जॉन फर्नर ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य एआई सीखने और इसकी क्षमता को सबके लिए सुलभ बनाना है। एआई के दाम बड़े नेटवर्क के बावजूद वॉलमार्ट और बड़ा होना चाहता है, ये 6 बड़ी रणनीति… हर कर्मचारी तक एआई टूल पहुंचाएगी फर्नर का जोर है कि कंपनी का हर कर्मचारी एआई टूल्स सीखे और आगे बढ़े। मीटिंग में सबसे ज्यादा चर्चा ‘कोड पपी’ टूल की रही, जिसे वॉलमार्ट ग्लोबल टेक के ही इंजीनियरों ने विकसित किया है। यह एक ऐसा ‘वाइब-कोडिंग टूल’ है जो सभी कर्मचारियों को अपने स्तर पर तकनीकी समाधान खोजने में मदद करता है। आइडिया ग्लोबल स्केल पर फैलें वॉलमार्ट की कोशिश है कि नए आइडियाज सीधे फ्रंटलाइन कर्मचारियों से निकलें और ग्लोबल एंटरप्राइज में लागू किया जाए। फर्नर ने कहा, ‘आइडिया कहां से आया, यह मायने नहीं रखता। चाहे वह बेंगलुरु हो या ग्रेटर टोरंटो हो। जहां सबसे अच्छा आइडिया होगा, हम उसे अपनाएंगे और स्केल करेंगे।’ ओपनएआई के साथ क्रेडेंशियलिंग प्रोग्राम वॉलमार्ट ने ओपनएआई संग क्रेडेंशियलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया, जो हर कर्मचारी के लिए है। उद्देश्य कर्मचारी एआई से समस्याओं को हल कर सकें। कंपनी के एक लॉजिस्टिक्स मैनेजर ने ऐसा एआई एजेंट बनाया, जो रूट ऑप्टिमाइजेशन में मदद करता है। खाली ट्रकों की आवाजाही कम हुई है और ड्राइवरों का समय बच रहा है। कोड पपी: छोटी चीजों पर बड़ा दांव कोड पपी एक खास एआई एजेंट है जो कंपनी के भीतर काम को आसान और तेज बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे पूरे संगठन के साथ साझा किया गया है ताकि ग्राउंड लेवल पर भी लोग इसका इस्तेमाल कर सकें। सीटीओ सुरेश कुमार के मुताबिक यह ऐसा टूल है, जो असोसिएट्स को इंजीनियर में बदलता है। एआई तय कर रहा है ‘सैंडविच की टाइमिंग’ वॉलमार्ट के ऑर्डर पिकर्स एआई-जनरेटेड रूट के हिसाब से स्टोर से पिक करते थे, पर अब एआई यह भी तय करता है कि किस वक्त में सबवे वर्कर्स को ऑर्डर तैयार करने का निर्देश दिया जाए। डिजिटल फुलफिलमेंट के हेड ग्रेग कैथी के अनुसार, यह टाइमिंग इसलिए सेट की है ताकि ग्राहक को हमेशा फ्रेश व गर्म सैंडविच मिले। कस्टमर इनसाइट: भाव समझेगा AI मॉडल वॉलमार्ट पारंपरिक 5-स्टार रेटिंग सर्वे के बजाय अब कंपनी मल्टीमोडल एआई एनालिसिस का उपयोग कर रही है। 1.5 लाख सदस्यों वाले कम्युनिटी ग्रुप की बातचीत और वीडियो क्लिप्स का विश्लेषण किया जाता है। इससे न केवल यह पता चलता है कि ग्राहक क्या कह रहे हैं, बल्कि उनके भाव को भी समझा जा सकता है।

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वॉलमार्ट का दांव- छोटे-बड़े हर ऑपरेशन में एआई तैनात:20 लाख कर्मचारियों वाला वॉलमार्ट एआई से रिटेल और शॉपिंग का तरीका बदल रहा

वॉलमार्ट का दांव- छोटे-बड़े हर ऑपरेशन में एआई तैनात:20 लाख कर्मचारियों वाला वॉलमार्ट एआई से रिटेल और शॉपिंग का तरीका बदल रहा

ग्लोबल रिटेल चेन वॉलमार्ट की सालाना मीटिंग में यह साफ हो गया है कि कंपनी बिजनेस की रफ्तार बढ़ाने के लिए एआई को सबसे बड़ा हथियार बना रही है। दुनियाभर में फैले हजारों स्टोर्स, करोड़ों साप्ताहिक ग्राहक और 20 लाख से अधिक कर्मचारियों वाली यह कंपनी अब स्टोर के अंदर ऑर्डर पिकिंग से लेकर डिलीवरी टाइमिंग और कस्टमर फीडबैक समझने तक हर छोटे-बड़े ऑपरेशन में एआई की मदद ले रही है। वॉलमार्ट के सीईओ जॉन फर्नर ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य एआई सीखने और इसकी क्षमता को सबके लिए सुलभ बनाना है। एआई के दाम बड़े नेटवर्क के बावजूद वॉलमार्ट और बड़ा होना चाहता है, ये 6 बड़ी रणनीति… हर कर्मचारी तक एआई टूल पहुंचाएगी फर्नर का जोर है कि कंपनी का हर कर्मचारी एआई टूल्स सीखे और आगे बढ़े। मीटिंग में सबसे ज्यादा चर्चा ‘कोड पपी’ टूल की रही, जिसे वॉलमार्ट ग्लोबल टेक के ही इंजीनियरों ने विकसित किया है। यह एक ऐसा ‘वाइब-कोडिंग टूल’ है जो सभी कर्मचारियों को अपने स्तर पर तकनीकी समाधान खोजने में मदद करता है। आइडिया ग्लोबल स्केल पर फैलें वॉलमार्ट की कोशिश है कि नए आइडियाज सीधे फ्रंटलाइन कर्मचारियों से निकलें और ग्लोबल एंटरप्राइज में लागू किया जाए। फर्नर ने कहा, ‘आइडिया कहां से आया, यह मायने नहीं रखता। चाहे वह बेंगलुरु हो या ग्रेटर टोरंटो हो। जहां सबसे अच्छा आइडिया होगा, हम उसे अपनाएंगे और स्केल करेंगे।’ ओपनएआई के साथ क्रेडेंशियलिंग प्रोग्राम वॉलमार्ट ने ओपनएआई संग क्रेडेंशियलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया, जो हर कर्मचारी के लिए है। उद्देश्य कर्मचारी एआई से समस्याओं को हल कर सकें। कंपनी के एक लॉजिस्टिक्स मैनेजर ने ऐसा एआई एजेंट बनाया, जो रूट ऑप्टिमाइजेशन में मदद करता है। खाली ट्रकों की आवाजाही कम हुई है और ड्राइवरों का समय बच रहा है। कोड पपी: छोटी चीजों पर बड़ा दांव कोड पपी एक खास एआई एजेंट है जो कंपनी के भीतर काम को आसान और तेज बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और इसे पूरे संगठन के साथ साझा किया गया है ताकि ग्राउंड लेवल पर भी लोग इसका इस्तेमाल कर सकें। सीटीओ सुरेश कुमार के मुताबिक यह ऐसा टूल है, जो असोसिएट्स को इंजीनियर में बदलता है। एआई तय कर रहा है ‘सैंडविच की टाइमिंग’ वॉलमार्ट के ऑर्डर पिकर्स एआई-जनरेटेड रूट के हिसाब से स्टोर से पिक करते थे, पर अब एआई यह भी तय करता है कि किस वक्त में सबवे वर्कर्स को ऑर्डर तैयार करने का निर्देश दिया जाए। डिजिटल फुलफिलमेंट के हेड ग्रेग कैथी के अनुसार, यह टाइमिंग इसलिए सेट की है ताकि ग्राहक को हमेशा फ्रेश व गर्म सैंडविच मिले। कस्टमर इनसाइट: भाव समझेगा AI मॉडल वॉलमार्ट पारंपरिक 5-स्टार रेटिंग सर्वे के बजाय अब कंपनी मल्टीमोडल एआई एनालिसिस का उपयोग कर रही है। 1.5 लाख सदस्यों वाले कम्युनिटी ग्रुप की बातचीत और वीडियो क्लिप्स का विश्लेषण किया जाता है। इससे न केवल यह पता चलता है कि ग्राहक क्या कह रहे हैं, बल्कि उनके भाव को भी समझा जा सकता है।

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Gold & Silver Rates Today June 9

Gold & Silver Rates Today June 9

Hindi News Business Gold & Silver Rates Today June 9 | Gold ₹1.53 Lakh, Silver ₹2.46 Lakh नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने के दाम में आज यानी 9 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,095 रुपए बढ़कर 1.53 लाख रुपए हो गया है। हालांकि, चांदी के दाम में आज गिरावट रही। 1 किलो चांदी की कीमत 1,307 रुपए कम होकर 2.46 लाख रुपए पर आ गई है। सोना इस साल 19 हजार और चांदी 15 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 19 हजार रुपए और चांदी 15 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.53 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.45 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 31 जनवरी 2026 ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी 2026 ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च 2026 ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल 2026 ₹1,50,263 ₹2,40,331 9 जून 2026 ₹1,52,584 ₹2,45,607 नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने 100 चीनी कंपनियां को 'मिलिट्री लिस्ट' में डाला:दावा- ये कंपनियां चीनी सेना की मदद कर रहीं, कंपनियों पर प्रतिबंधों का खतरा बढ़ा

अमेरिका ने अलीबाबा ग्रुप, बायडू और BYD जैसी दिग्गज चीनी टेक और ऑटोमोबाइल कंपनियों को ‘चीनी मिलिट्री कंपनियों’ की लिस्ट में शामिल किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार ये कंपनियां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सेना और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की मदद करती हैं। अमेरिका ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) के सेक्शन 1260H के तहत अब तक 100 से अधिक चीनी कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। क्या है अमेरिका का सेक्शन 1260H और इसका असर? क्या है यह कानून: अमेरिकी नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) का सेक्शन 1260H अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को उन चीनी कंपनियों की पहचान कर उन्हें लिस्टेड करने की शक्ति देता है, जो अमेरिका में कमर्शियल काम करती हैं, लेकिन बैकएंड पर चीनी सेना को मजबूत बना रही हैं। क्यों किया जाता है लिस्टेड: अमेरिका को आशंका है कि चीन ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूज़न’ नीति के तहत नागरिक और व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल अपनी सेना को आधुनिक और घातक बनाने में कर रहा है। क्या होता है असर: इस लिस्ट में आने के बाद इन कंपनियों पर कई तरह के अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी कंपनियां और निवेशक इनमें निवेश करने से कतराते हैं। इससे इनके ग्लोबल सप्लाई चेन और बिजनेस ऑपरेशंस पर बुरा असर पड़ता है। अलीबाबा, टेनसेंट और शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों पर शिकंजा पेंटागन द्वारा जारी की गई इस नई लिस्ट में चीन के लगभग हर बड़े सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इनमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीबाबा, सर्च इंजन और एआई सेक्टर की बड़ी कंपनी बायडू, और दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों में से एक BYD शामिल है। इनके अलावा इस लिस्ट में बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL, गेमिंग और सोशल मीडिया की बड़ी कंपनी टेनसेंट, टेलिकॉम कंपनी हुवावे और ड्रोन बनाने वाली कंपनी DJI को भी शामिल किया गश है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग डिवाइस बनाने वाली टीपी-लिंक, रोबोटिक्स फर्म यूनिट्री , सर्विलांस कैमरा बनाने वाली हिकविज़), और कोस्को शिपिंग जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सूची में शामिल हैं। चीन की बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर जैसे चाइना मोबाइल, चाइना टेलीकॉम, और चाइना यूनिकॉम को भी सेना से जुड़े होने के कारण इसमें डाला गया है। पेंटागन ने दिया चीनी सरकारी मंत्रालयों और सेना से संबंधों का हवाला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इन कंपनियों को लिस्टेड करने के लिए ठोस कानूनी और रणनीतिक कारण बताए हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन के सरकारी तंत्र और सैन्य संस्थानों से जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेज में खास तौर पर ‘स्टेट-ओन्ड एसेट्स सुपरविज़न एंड एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन’ (SASAC) और ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (MIIT) का ज़िक्र किया गया है। इसके अलावा चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्री फॉर नेशनल डिफेंस (SASTIND) और चीन की मुख्य सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ-साथ पीपुल्स आर्म्ड पुलिस व चीनी खुफिया और कानून प्रवर्तन (लॉ-इन्फोर्समेंट) एजेंसियों के साथ भी इन कंपनियों के संबंध का दावा अमेरिका ने किया है। चीन के ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर पेंटागन के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि ये कंपनियां चीन के रणनीतिक तकनीकी विकास के कई बड़े प्रोग्राम्स में हिस्सा ले रही हैं। इनमें चीन के महत्वाकांक्षी ‘लिटिल जाइंट’ और ‘सिंगल चैंपियन’ जैसी स्कीम्स शामिल हैं। वाशिंगटन का मानना है कि बीजिंग इन सरकारी स्कीम्स के जरिए उन्नत तकनीकों को विकसित कर रहा है ताकि तकनीक के मामले में अमेरिका को पछाड़ा जा सके और इन तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य तैयारियों में किया जा सके। लिस्ट से बाहर निकलने के लिए कंपनियां कर सकती हैं अपील अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस आधिकारिक दस्तावेज में यह भी साफ किया है कि यदि किसी कंपनी को लगता है कि उसे गलत तरीके से इस लिस्ट में डाला गया है, तो वह इस फैसले को चुनौती दे सकती है। पेंटागन ने इसके लिए एक प्रॉपर प्रोसेस और गाइडलाइंस जारी की हैं। लिस्टेड कंपनियां अपनी सफाई में सबूत पेश कर सकती हैं और नाम हटाने के लिए पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं।

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