दुनिया में केवल 49 लोगों के पास है यह ब्लड ग्रुप, इतना दुर्लभ कि एक बूंद की कीमत सोने से भी महंगा, क्यों है इतना खास

Last Updated:April 01, 2026, 13:06 IST What is RH-Null Rare Blood Group: दुनिया में करीब 800 करोड़ लोग हैं. लेकिन इन 800 करोड़ में से सिर्फ 45 से 50 लोग ही इतने खुशनसीब हैं कि उनके पास यह दुर्लभ ब्लड ग्रुप है. इस ब्लड ग्रुप का नाम RH-null ब्लड ग्रुप है. जिसके पास यह ब्लड ग्रुप है उसका खून सोने से भी ज्यादा कीमती है. इसलिए इसे गोल्डन ब्लड ग्रुप भी कहा जाता है. यह ब्लड ग्रुप आमतौर पर इंसानों में पाए जाने वाले 4 ब्लड ग्रुप से अलग है. इस बेशकीमती खून के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं. खून तो वैसे भी बेशकीमती होता है लेकिन यह खून नायाब है. क्योंकि यह खून धरती पर पैदा लिए कुल 800 करोड़ लोगों में सिर्फ 45 से 50 लोगों के पास मौजूद है. यह खून इतना नायाब है कि इसके एक बूंद की कीमत सोने से कई गुना महंगा हो सकता है. आमतौर पर हम इंसानों में चार तरह के ब्लड ग्रुप A, B, AB या O होते हैं. इनमें पॉजिटिव और निगेटिव कैटगरी होती है. लेकिन इन 45 लोगों के पास जो ब्लड ग्रुप है वह इन चारों में से कोई नहीं है. इसे Rh null ब्लड ग्रुप कहा जाता है. Rh null ब्लड ग्रुप की खासियत यह है कि इस ब्लड ग्रुप वाले का खून धरती पर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है. यह खून किसी भी व्यक्ति में सेट हो सकता है. लेकिन इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दुर्भाग्य भी है. जब इस ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को किसी के खून की जरूरत होगी तो इसके शरीर में किसी भी दूसरे व्यक्ति का खून सेट नहीं होगा. इसलिए अपनी जान बचाने के लिए इन्हें अपना ही खून स्टोर कर आपात काल के लिए रखना होता है. यही कारण है कि इनका जीवन हमेशा मेडिकल रिस्क पर रहता है. एक अध्ययन के अनुसार 2018 में जब दुनिया भर में इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों की खोज की गई तो केवल 45 लोगों में यह ब्लड ग्रुप पाया गया. हालांकि इनमें से केवल 9 लोग ही रक्तदान कर सकते हैं. अब ऐसे ब्लड ग्रुप वालों की संख्या में 4-5 लोग और जुड़ गए हैं. इस ब्लड ग्रुप की खोज 1960 में हुई थी. इसकी दुर्लभता के कारण इसे गोल्डन ब्लड कहा जाता था. इसका वास्तविक नाम आरएच शून्य है. यह खून केवल उन लोगों में पाया जाता है जिनका आरएच कारक शून्य 0 होता है. इस रक्त समूह वाले लोग अमेरिका, कोलंबिया, ब्राजील और जापान जैसे देशों में पाए जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वास्तव में खून की कोशिकाओं में उसकी सतह पर एक प्रोटीन की परत होती है. जिसके खून की कोशिकाओं में यह प्रोटीन मौजूद होता है, उसका खून Rh पॉजिटिव होता है जिसके खून में यह प्रोटीन नहीं है, उसे निगेटिव कहा जाता है. लेकिन गोल्डन ब्लड ग्रुप का खून में Rh फेक्टर होता ही नहीं है. यानी यह न तो पॉजिटिव होता है और न ही निगेटिव होता है. यह जीरो होता है. इसलिए इसे Rh 0 ब्लड ग्रुप कहा जाता है. गोल्डन ब्लड ग्रुप वालों का खून इसलिए भी दुर्लभतम होता है क्योंकि Rh (-) वाले लोगों का खून मुश्किल से ही मैच होता है. इसलिए गोल्डन ब्लड वाले लोग उसे आसानी से खून देकर जान बचा सकते हैं. Rh 0 ब्लड ग्रुप में किसी तरह का एंटीजन होता ही नहीं है. इसे इस तरह भी समझ सकते है. सामान्य तौर पर इंसान के खून के लाल रक्त कोशिकाओं में 61 तरह के Rh एंटीजन पाया जाता है. इसी के आधार पर हम ब्लड ग्रुप को ‘पॉजिटिव’ (+) और न होने पर ‘नेगेटिव’ (-) कहते हैं. Rh-null ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति के शरीर में 61 में से एक भी Rh एंटीजन नहीं होता. इसलिए इसे किसी भी ऐसे व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है जिसका Rh सिस्टम दुर्लभ हो. इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दिक्कत भी है. इसका लाल रक्त कोशिकाओं का आकार थोड़ा असमान्य होता है. इस कारण ये कोशिकाएं जल्दी मर जाती है. और इससे ऐसे व्यक्तियों को अक्सर खून की कमी या एनीमिया भी हो सकता है. लेकिन इसे किसी अन्य व्यक्ति का खून सेट ही नहीं करेगा. ऐसे में इस आपात काल से निपटने के लिए इसी व्यक्ति से खून पहले से निकालकर रख लिया जाता है. डॉक्टर इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को आयरन से भरपूर फूड को खाने की सलाह देते हैं ताकि कभी भी खून की कमी न हो. First Published : April 01, 2026, 13:06 IST
Gold Silver Price Hike | 2026 Bullion Rates

नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 1 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,836 रुपए बढ़कर ₹1.50 लाख पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 9,348 रुपए बढ़कर ₹2.39 लाख पर पहुंच गई है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना इस साल ₹16,374 बढ़ा, ईरान जंग के बाद 9,528 गिरा इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 16,374 रुपए और चांदी 9,063 रुपए महंगी हुई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। 28 फरवरी को अमेरिका और इजारइल की ईरान से जंग शुरू होने के बाद लगातार गिरावट देखी जा रही है। तब से सोना 9,528 रुपए और चांदी 27,217 रुपए गिर चुकी है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ये मिर्च के पत्ते हैं सेहत के लिए वरदान, कई बीमारियों का करें काल, जोड़ों का दर्द और त्वचा की समस्याओं में राहत

Last Updated:April 01, 2026, 12:55 IST मिर्च के पत्ते और फल सिर्फ खाने में स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. ये पत्ते जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. जानिए मिर्च के पत्तों के अद्भुत लाभ और इसे अपने आहार में शामिल करने के आसान तरीके. मिर्च के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन A, C, एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द, गठिया, सूजन और त्वचा की समस्याओं में राहत दिला सकते हैं. इसके अलावा, ये पाचन सुधारने, प्रतिरक्षा बढ़ाने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मददगार हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि मिर्च के पत्ते पाचन और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और विटामिन A पाए जाते हैं. ये पत्ते पेट की सूजन कम करने, भूख बढ़ाने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मददगार होते हैं और पारंपरिक चिकित्सा में भी इन्हें उपयोग में लाया जाता है. मिर्च के पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, विशेषकर विटामिन A, C और एंटीऑक्सीडेंट. ये पत्ते प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और सूजन कम करने में बेहद फायदेमंद हैं. वास्तव में, मिर्च के पत्ते स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस हैं, जो शरीर की तंत्रिकाओं, रक्त वाहिकाओं और कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google मिर्च के पत्ते इम्यूनिटी और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन A, C, E से भरपूर होते हैं, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. मिर्च के पत्ते त्वचा में कसाव लाने, कील-मुंहासे कम करने और सूजन घटाने में मदद करते हैं, साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाते हैं. मिर्च के पत्ते और फल, खासकर लाल मिर्च, अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुणों के कारण दर्द और चोट में राहत देने में बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद कैप्साइसिन नामक तत्व नसों को शांत कर दर्द को कम करता है, जिससे गठिया, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन में आराम मिलता है. मिर्च के पत्ते पोषण का पावरहाउस हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C, विटामिन A, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं. मिर्च के पत्ते रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सूजन कम करने, आंखों की रोशनी सुधारने और पाचन में मदद करने में कारगर हैं. इन्हें सलाद, सूप या सब्जी में पकाकर खाया जा सकता है. मिर्च के पत्ते और फल, खासकर हरी मिर्च, में मौजूद कैप्साइसिन नामक यौगिक त्वचा और नसों को आराम देने में फायदेमंद है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण नसों के दर्द के संकेतों को कम करते हैं और सूजन घटाते हैं. वहीं, पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. इसका उपयोग दर्द निवारक मलहम में भी किया जाता है. First Published : April 01, 2026, 12:55 IST
Dewas Blinkit Delivery Partners Strike

देवास में ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी सेवा Blinkit के डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। बुधवार को कम भुगतान और खराब कार्य व्यवस्था के विरोध में बड़ी संख्या में कर्मचारी स्टेशन रोड स्थित कंपनी कार्यालय के बाहर एकत्र होकर प्रदर् . डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि उन्हें प्रति किलोमीटर केवल 7 से 8 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और पेट्रोल खर्च के हिसाब से यह राशि बहुत कम है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अन्य जिलों की तरह 12 से 15 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाए। कर्मचारियों ने बताया कि 3 से 4 किलोमीटर की डिलीवरी पर भी उन्हें पर्याप्त भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। ऑर्डर कैंसिल होने पर नहीं मिलता पेमेंट डिलीवरी पार्टनर्स की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि ऑर्डर कैंसिल होने पर उन्हें कोई भुगतान नहीं दिया जाता, जबकि उनका समय और ईंधन खर्च हो चुका होता है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कैश ऑर्डर जमा करते समय कंपनी ऑफिस में छुट्टे नोट और सिक्के स्वीकार नहीं किए जाते, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी होती है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी डिलीवरी पार्टनर्स ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हड़ताल का असर शहर में Blinkit की डिलीवरी सेवाओं पर साफ तौर पर देखा जा रहा है, जिससे ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Oracle 30K Layoffs Global | India 12K Jobs Cut; Non-Essential Roles Axed

Hindi News Business Oracle 30K Layoffs Global | India 12K Jobs Cut; Non Essential Roles Axed नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी आईटी कंपनी ओरेकल ने करीब 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। छंटनी में अकेले भारत के 12 हजार कर्मचारी शामिल है। कंपनी अगले एक महीने के भीतर छंटनी का दूसरा दौर भी शुरू कर सकती है। कंपनी बोली गैर-जरूरी पदों को खत्म किया ओरेकल ने प्रभावित कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा कि ऑपरेशंस को स्ट्रीमलाइन करने के लिए यह फैसला लिया है। इन बदलावों की वजह से कर्मचारी जिस पद पर काम कर रहे हैं, वह अब कंपनी के लिए ‘रिडंडेंट’ (गैर-जरूरी) हो गया है। भारत में करीब 12,000 कर्मचारी अपनी नौकरी खो चुके हैं। कंपनी ने भारत में अपनी करीब 40% वर्कफोर्स कम कर दी है। 16 घंटे की शिफ्ट का विरोध करने पर निकाला ओरेकल के एक पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर ने दावा किया कि उन्हें सितंबर में ही नौकरी से निकाल दिया गया था। श्रीधर के मुताबिक, उन्होंने भारत में कंपनी के 16 घंटे के वर्क शिफ्ट कल्चर का विरोध किया था, जिसकी सजा उन्हें दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय मूल के कर्मचारी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वहां के स्थानीय कानून अपने नागरिकों की छंटनी को लेकर काफी सख्त हैं। 15 दिन की सैलरी और 2 महीने का टॉप-अप, लेकिन एक शर्त कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए सेवरेंस पैकेज का ऐलान किया है, लेकिन यह उन्हीं को मिलेगा जो बिना किसी विवाद के खुद इस्तीफा देंगे। पैकेज की शर्तें इस प्रकार हैं: भारत में एक साल सर्विस पूरी करने वाले हर कर्मचारी को 15 दिन की सैलरी मिलेगी। टर्मिनेशन डेट तक का एक महीने का अनपेड वेतन और लीव एनकैशमेंट। एक महीने का नोटिस पीरियड पे और एलिजिबिलिटी के आधार पर ग्रेच्युटी। कंपनी ने 2 महीने की सैलरी ‘टॉप-अप’ के तौर पर देने का भी ऑफर दिया है। फिलहाल चुप्पी साधे है ओरेकल इतने बड़े पैमाने पर हुई छंटनी और अगले राउंड की खबरों पर जब ओरेकल से आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई, तो कंपनी ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Oracle 30K Layoffs Global | India 12K Jobs Cut; Non-Essential Roles Axed

Hindi News Business Oracle 30K Layoffs Global | India 12K Jobs Cut; Non Essential Roles Axed नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी आईटी कंपनी ओरेकल ने करीब 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छंटनी में अकेले भारत के 12 हजार कर्मचारी शामिल है। कर्मचारियों को सुबह 5 से 6 बजे के बीच ई-मेल मिले और कुछ ही मिनटों में उनका सिस्टम एक्सेस बंद कर दिया गया। कंपनी अगले महीने छंटनी का दूसरा दौर भी शुरू कर सकती है। ओरेकल के कई कर्मचारियों के मुताबिक, सुबह जब वें सोकर उठे, तो उनके इनबॉक्स में टर्मिनेशन लेटर था। भारत में पूरी की पूरी टीमों को रातों-रात खत्म कर दिया गया है। कर्मचारियों से कहा-यही उनका आखिरी वर्किंग डे ई-मेल में कर्मचारियों को बताया गया कि “बड़े संगठनात्मक बदलाव” के तहत उनकी भूमिका खत्म कर दी गई है और जिस दिन वे यह ई-मेल पढ़ रहे हैं, वही उनका आखिरी वर्किंग डे है। AI की वजह से कर्मचारियों को निकाला एक सीनियर मैनेजर माइकल शेफर्ड ने लिंक्डइन पर लिखा कि “सीनियर इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स, ऑपरेशंस लीडर्स, प्रोग्राम मैनेजर्स और टेक्निकल स्पेशलिस्ट्स” को नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह छंटनी परफॉर्मेंस के आधार पर नहीं की गई है। BBC की एक रिपोर्ट में सीनियर कर्मचारियों के हवाले से कहा गया है कि कंपनी AI में भारी निवेश कर रही है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। ओरेकल अंदरूनी तौर पर AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। इसकी मदद से कम कर्मचारी ज्यादा काम कर पा रहे हैं। 16 घंटे की शिफ्ट का विरोध करने पर निकाला ओरेकल के एक पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर ने दावा किया कि उन्हें सितंबर में निकाल दिया गया था। उन्होंने कंपनी के 16 घंटे के वर्क शिफ्ट कल्चर का विरोध किया था। श्रीधर का दावा है कि इस विरोध की वजह से ही उन्हें निकाला गया। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय मूल के कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ओरेकल ने छंटनी की वजह नहीं बताई इतने बड़े पैमाने पर हुई छंटनी और अगले राउंड की खबरों पर जब ओरेकल से आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई, तो कंपनी ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। एक्सपर्ट इसे इनविजिबल लेऑफ कह रहे एक्सपर्ट्स इसे ‘इनविजिबल लेऑफ’ कह रहे हैं, जहां कंपनियां बड़ी घोषणाएं करने के बजाय धीरे-धीरे और बिना किसी शोर के वर्कफोर्स कम कर रही हैं। पिछले तीन महीनों में अमेजन, मेटा और डेल जैसी कंपनियों को मिलाकर करीब 94,000 से ज्यादा लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल है ओरेकल ओरेकल दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक है। यह दूसरी कंपनियों को सॉफ्टवेयर और क्लाउड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा देती है। दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार लैरी एलिसन ओरेकल के को-फाउंडर, चेयरमैन और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘आपके प्रधानमंत्री कहाँ थे?’ पश्चिम एशिया युद्ध पर चर्चा को लेकर राज्यसभा में रिजिजू, खड़गे के बीच नोकझोंक | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 12:44 IST कांग्रेस द्वारा राज्यसभा में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग के बाद किरण रिजिजू की मल्लिकार्जुन खड़गे से तीखी नोकझोंक हुई। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। (संसद टीवी) केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बुधवार को राज्यसभा में तीखी बहस हुई, जब विपक्ष ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग की, जिसके कारण तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। सदन में बोलते हुए, खड़गे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास जो भी बिल चाहते थे उसे पारित करने का समय था, लेकिन बार-बार नोटिस के बावजूद ईरान युद्ध पर चर्चा करने का समय नहीं था। “कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन वे इस पर चर्चा नहीं करना चाहते। हम जो भी सुझाव देते हैं, वे उससे सहमत नहीं होते। वे जो चाहते हैं, उसे जबरन लागू करते हैं। क्या यह लोकतंत्र है?” उन्होंने टिप्पणी की. खड़गे के आरोप का जवाब देते हुए रिजिजू ने दोनों सदनों में युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विस्तृत बयान की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया संघर्ष पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन दोनों सदनों में विपक्ष के नेता अनुपस्थित थे। कांग्रेस कहां थी? अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए।” ‘आपके प्रधानमंत्री कहाँ थे?’ रिजिजू ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा संघर्ष के बीच ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में सदन में विवरण दिया था। उन्होंने खड़गे से कहा, “प्रधानमंत्री ने उत्पाद शुल्क कम कर दिया ताकि हमारे आम लोगों को बढ़ती लागत के कारण परेशानी न हो। इतने बड़े संकट से निपटने के बावजूद, आप मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यह एकजुट होने का समय है, राजनीति करने का नहीं।” खड़गे ने जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद रिजिजू द्वारा बताई गई सर्वदलीय बैठक से अनुपस्थित थे। उन्होंने कहा, “आपके प्रधानमंत्री कहां थे? वह कहां थे? जैसे प्रधानमंत्री ने अपना प्रतिनिधि भेजा, हमने भी अपना प्रतिनिधि भेजा।” रिजिजू ने खड़गे पर उचित सम्मान दिए जाने के बावजूद सरकार की बात सुनने को तैयार नहीं होने और अपनी जिम्मेदारियों से भागने का आरोप लगाया, साथ ही कहा कि सदन में कांग्रेस अध्यक्ष का एकमात्र काम प्रधानमंत्री का अपमान करना था। ऐसा तब हुआ जब पश्चिम एशिया संघर्ष ने बाजारों को बाधित करना जारी रखा, जिससे ईंधन और एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतों में बुधवार को 195.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जिससे होटल, रेस्तरां और छोटे उद्यमों जैसे व्यवसायों की लागत बढ़ गई। पिछले महीने लोकसभा को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने स्थिति को “चिंताजनक” कहा था, यह कहते हुए कि चल रहे संघर्ष ने भारत के लिए आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय चुनौतियां पैदा कर दी हैं, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वहां रहने और काम करने वाले बड़े भारतीय प्रवासियों के लिए क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को देखते हुए। उन्होंने कहा, “युद्धग्रस्त और संघर्ष से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं। जिस क्षेत्र में संघर्ष हो रहा है वह दुनिया भर के अन्य देशों के साथ हमारे व्यापार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है, विशेष रूप से हमारे कच्चे तेल और गैस की जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए।” पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 12:43 IST समाचार राजनीति ‘आपके प्रधानमंत्री कहाँ थे?’ पश्चिम एशिया युद्ध पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में रिजिजू, खड़गे के बीच नोकझोंक अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम एशिया संघर्ष पर राज्यसभा में टकराव(टी)किरेन रिजिजू मल्लिकार्जुन खड़गे(टी)पश्चिम एशिया संघर्ष बहस(टी)ईरान युद्ध चर्चा(टी)ईंधन मूल्य वृद्धि भारत(टी)एलपीजी सिलेंडर की कीमतें(टी)नरेंद्र मोदी का बयान(टी)सर्वदलीय बैठक की अनुपस्थिति
Fish Farming: तालाब का पानी गर्म हो रहा है? मछलियों को बचाने का तरीका जानें, सफाई और ऑक्सीजन बेहद जरूरी

Last Updated:April 01, 2026, 12:38 IST गर्मी का मौसम मछली पालन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. तालाब का पानी गर्म होने और गंदा होने से मछलियों में रोग फैल सकते हैं. समय पर तालाब की सफाई, ऑक्सीजन बनाए रखना और संतुलित आहार देना मछलियों की सुरक्षा और ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है. गर्मी का मौसम मछली पालकों के लिए खास चुनौती लेकर आता है. इस दौरान वातावरण का बढ़ता तापमान तालाब में पड़ी मछलियों के लिए हानिकारक हो सकता है. गर्मी के कारण अक्सर मछलियां मर जाती हैं, जिससे मछली पालन व्यवसाय को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में मछली पालन करने वालों के लिए गर्मी का मौसम शुरू होते ही तालाब में मछलियों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. समय पर और सही देखभाल न करने या तालाब की नियमित सफाई न होने पर मछलियां खराब हो सकती हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि गर्मी के मौसम में तालाब में पड़ी मछलियों को सुरक्षित कैसे रखा जाए. मत्स्य पालन अधिकारी आर्यन तिवारी बताते हैं कि गर्मियों में तापमान बढ़ने से तालाब का पानी भी गर्म हो जाता है. ऐसे में मछली पालन के लिए तालाब के पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. इस मौसम में तालाब की नियमित सफाई करना सबसे अहम कदम होता है. Add News18 as Preferred Source on Google समय-समय पर तालाब की सफाई पर ध्यान न देने से पानी दूषित हो सकता है, जिससे मछलियों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि मछलियां रोगों से ग्रसित होकर मर जाती हैं, और इससे मछली पालन करने वाले व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में तालाब में पड़ी मछलियों को संक्रमण से बचाने के लिए समय पर तालाब के पानी की सफाई बेहद जरूरी हो जाती है. इसके अलावा, गर्मी के मौसम में मछलियों को संतुलित और पौष्टिक आहार देना भी जरूरी है. इन दोनों के लिए मछलियों के लिए सही परिस्थितियों और देखभाल का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण होता है. गर्मी के कारण तालाब के पानी का तापमान असंतुलित हो जाता है और तेज धूप के कारण पानी अधिक गर्म हो जाता है. ऐसे में पानी के अधिक गर्म होने पर मछली पालन में एरियटर का उपयोग करना जरूरी होता है. इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है और मछलियों के लिए अनुकूल वातावरण बना रहता है. समय-समय पर तालाब में स्वच्छ पानी की व्यवस्था करना मछलियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा, गर्मी के मौसम में तालाब में नियमित रूप से चूना डालना और शाम के समय दो से तीन घंटे पानी चलाना जरूरी है. इससे तालाब में 6 से 7 फीट तक जलस्तर बना रहता है और मछलियों की ग्रोथ बेहतर होती है. First Published : April 01, 2026, 12:38 IST
Jalebi ₹300kg, Samosa Price Hike in Jabalpur

जबलपुर में समोसा अब 15 रुपए का हो गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण जबलपुर के स्थानीय बाजारों में नाश्ते के सामान महंगे हो गए हैं। हाल के दिनों में गैस और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से दुकानदारों की उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा है। . दुकानदारों ने बताया कि कमर्शियल गैस की कमी और महंगे ईंधन के कारण उन्हें वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं। मदन महल स्थित राजस्थान स्वीट्स के संचालक शंभूनाथ अग्रवाल ने बताया कि समोसे का दाम 13 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए करना पड़ा है। वहीं, जलेबी का भाव 240 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 300 रुपए प्रति किलो हो गया है। इंडक्शन उपयोग से उत्पादन क्षमता प्रभावित अग्रवाल ने बताया कि कमर्शियल गैस की कमी के कारण इंडक्शन स्टोव का उपयोग करना पड़ रहा है। इसकी कम क्षमता के कारण छोटी कड़ाही में बार-बार बैच बनाना पड़ता है, जिससे बिजली खपत और समय दोनों बढ़ते हैं। कोयले की भट्ठी से कुछ दुकानों पर स्थिर कीमतें मदन महल के मामा होटल के संचालक सुधीर कुमार राजपूत ने बताया कि वे अभी भी कोयले की भट्ठी का उपयोग कर रहे हैं। इस कारण उनकी लागत में फिलहाल ज्यादा बदलाव नहीं आया है और दाम पुराने स्तर पर ही हैं। राजपूत ने कहा कि यदि आने वाले समय में कोयला और लकड़ी के दाम बढ़ते हैं, तो उन्हें भी मजबूरी में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। ये खबर भी पढ़ें… MP में कमर्शियल सिलेंडर ₹195 महंगा किल्लत के बीच मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर 195 रुपए महंगा हो गया है। यह बढ़ोतरी घरेलू सिलेंडर के रेट 60 रुपए बढ़ाने के 25 दिन बाद 1 अप्रैल से की गई है। प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट को जरूरत का 9% सिलेंडर ही मिल रहा है। इससे कई होटल-रेस्टोरेंट का मेन्यू बदल गया है। गैस के रेट बढ़ने से खाना भी महंगा होगा। एमपी के 5 बड़े शहरों में भोपाल में 19 Kg कमर्शियल सिलेंडर 2084 रुपए, इंदौर में 2186 रुपए, जबलपुर में 2295 रुपए, ग्वालियर में 2307 रुपए और उज्जैन में 2251 रुपए में मिलेगा। पूरी खबर पढ़ें…
Mamta Kaliya Wins Sahitya Akademi Award 2025 for Jeete Ji Allahabad

Hindi News Career Mamta Kaliya Wins Sahitya Akademi Award 2025 For Jeete Ji Allahabad 16 मिनट पहले कॉपी लिंक 31 मार्च को ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। ये सम्मान 2021 में प्रकाशित उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिला है। ममता कालिया हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। उनके चर्चित उपन्यासों में ‘बेघर’, ‘दुक्खम-सुक्खम’, ‘नरक दर नरक’, ‘प्रेम कहानी’ और कहानियों में ‘दूसरा देवदास’, ‘आपकी छोटी लड़की’, ‘छुटकारा’, ‘एक अरद औरत’, ‘सीट नंबर छह’, ‘बोलने वाली औरत’ शामिल हैं। साथ ही ‘कितने प्रश्न करूं’ और ‘खांटी घरेलू औरतें’ उनकी चर्चित कविताएं हैं। नुक़्ता और अनुस्वार की गलतियों पर चिढ़ जाने वाली ममता मीडिल क्लास, स्त्री-पुरुष सम्बंध, उनके अन्तर्मन की बातें और कामकाजी महिलाओं के संघर्ष पर बेबाकी से लिखती आई हैं। नवंबर 1940 में उत्तर प्रदेश के मथुरा में जन्मीं ममता कालिया का बचपन शहर दर शहर घूमते बीता। दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, नागपुर और इंदौर जैसे शहरों में पली-बढ़ीं। पिता विद्याभूषण अग्रवाल सरकारी अधिकारी थे, तो उनकी पोस्टिंग के साथ हर दो-ढ़ाई साल में शहर बदलते रहे। ममता भी खुद को ‘सरकारी बंजारा’ कहती हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा ये दो बहनें थीं। ममता छोटी थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन पढ़ने, नाचने-गाने, सबमें अव्वल थी। उनके साथ की और लड़कियों के पास भी कई हुनर थे, लेकिन खुद उनके पास बस कागज-कलम और कई सवाल थे। घर के साहित्यिक माहौल में उन्होंने बचपन में ही वो सब पढ़ना शुरू कर दिया था जो उन्हें उस वक्त समझ भी नहीं आया। पिता का साहित्य के लिए प्रेम और आदर भाव देखकर उनकी नजरों में बने रहने के लिए ममता लगातार लिखने-पढ़ने से ताल्लुक रखने लगीं। घर में भी नामी साहित्यकारों का आना-जाना लगा रहता। ऐसे में लेखक बनने का इरादा करना बिलकुल भी मुश्किल नहीं था। इंग्लिश में पढ़ाई की पर लिखने की भाषा हिंदी चुनी ममता ने इंग्लिश मीडियम से स्कूली पढ़ाई पूरी की। इंग्लिश के अलावा फ्रेंच की भी अच्छी जानकार थीं। नागपुर में स्कूल के बाद फ्रेंच ऑनर्स में एडमिशन लिया। तब फ्रेंच ऑनर्स में दाखिले पर हर महीने 150 रुपए की स्कॉलरशिप मिलती थी। स्कॉलरशिप मिलती उससे पहले ही पिता का ट्रांसफर इंदौर हो गया। न फ्रेंच ऑनर्स हुआ और न स्कॉलरशिप के रुपए मिले। इंदौर के क्रिश्चन कॉलेज में इंग्लिश ऑनर्स में एडमिशन लिया, साथ ही कॉलेज के हिंदी विभाग की गोष्ठियों में भी जाती रहीं। ममता बचपन से ही बच्चों के लिए कहानियां लिखती थीं, लेकिन वे मानती हैं कि इंदौर ने एक लेखिका के बतौर उन्हें खूब सजाया और संवारा है। वे कहती हैं, ‘इंदौर ने मेरी रचनात्मक्ता को पंख दिया।’ चुनौती स्वीकार कविताओं से कहानियों की ओर मुड़ीं कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही ‘प्रयोगवादी प्रियतम’ शीर्षक से पहली कविता ‘जागरण’ के संडे एडिशन में छपी। तब घरवालों को पहली बार पता चला कि ममता भी लिखने लगी है। ये 1960 का दौर था जब ‘नई दुनिया’, ‘जागरण’ अखबार और ‘धर्मयुग’, ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’, ‘निहारिका’, ‘कादम्बिनी’ और ‘ज्ञानोदय’ जैैसी अन्य पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएं छपने लगीं। तभी अजमेर से छपने वाली ‘लहर’ पत्रिका के संपादक प्रकाश जैन ने ममता से कहानी पर हाथ आजमाने को कहा। और ऐसे उन्होंने छुटपुट कहानियां लिखना भी शुरू किया। 1964 में ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’ की कहानी प्रतियोगिता में ममता की कहानी श्रेष्ठ कहानी चुनी गई। कविताओं से लेखन की शुरुआत करने वाली ममता 1965 में हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रविन्द्र कालिया से पहली मुलाकात के बाद कहानियों की ओर रुख कर गईं। दौलतराम कॉलेज में पढ़ाने के दौरान 1965 में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के बुलावे पर चंडीगढ़ के एक सम्मेलन में गई थीं। वहीं रविन्द्र कालिया से पहली बार मिलीं। जिस लेखक से तकरार फिर उसी से प्यार रवि से मिलने की कहानी भी काफी फिल्मी है। चंडीगढ़ में 30 जनवरी 1965 की शाम। ममता उसी सम्मेलन से दिल्ली लौट रही थीं। जिस बस में ममता कालिया चढ़ीं, उसमें सिर्फ एक ही सीट खाली थी, वो भी रविन्द्र के बगल वाली। वो न चाहते हुए भी बैठ गईं। पास बैठे सोचने लगीं कि इस आदमी ने मेरी उपेक्षा की, सारा दिन सम्मेलन में बात तक नहीं की और अब साथ जा रहा है। बड़ी देर चुप्पी के बाद रवि ममता से बोले- ‘सिर्फ कविता-वविता लिखती हैं? कहानी नहीं लिखतीं क्या?’ ये तंज ममता को बर्दाश्त नहीं हुआ। इसे उन्होंने एक चैलेंज के रूप में लिया और फिर खूब कहानियां लिखनी शुरू की। कहानियां वे पहले भी लिख चुकी थीं, पर अब रवि को दिखाने के लिए लिखने लगीं कि ये कोई बहुत मुश्किल काम नहीं। वे उनका गुरूर तोड़ना चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने 200 से ज्यादा कहानियां और ‘बेघर’, ‘नरक-दर-नरक’, ‘दौड़’, ‘दुक्खम सुक्खम’, ‘सपनों की होम डिलिवरी’, ‘कल्चर-वल्चर’ जैसे उपन्यास लिख डाले। इसके साथ-साथ ‘अ ट्रिब्यूट टू पापा एंड अदर पोयम्स’, ‘पोयम्स 78’, ‘खांटी घरेलू औरत’, ‘कितने प्रश्न करूं’ और ‘पचास कविताएं’ कविता संग्रह भी प्रकाशित हुईं। उन्होंने ‘जीते जी इलाहाबाद’ के अलावा ‘कल परसों के बरसों’, ‘सफर में हमसफर’, ‘कितने शहरों में कितनी बार’ और ‘अन्दाज-ए-बयां उर्फ रवि कथा’ संस्मरण भी लिखे। संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए ममता कालिया को नई दिल्ली के कमानी सभागार में साहित्य अकादमी पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया। अपने लिखे को वापस नहीं पढ़तीं ममता इसके बाद उनकी रवि से दोस्ती बढ़ती गई और 11 महीने के भीतर ही 12 दिसंबर 1965 को ममता ने रवि से शादी की। शादी के तुरंत बाद रवि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) के साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में नौकरी के लिए मुंबई चले गए। ममता दिल्ली में ही रह गईं। यही वो समय था जब कॉलेज से खाली वक्त में उन्होंने एक धुन में ‘बेघर’ उपन्यास लिख दिया था। ममता कालिया कोई भी रचना एक बार में लिखती हैं और अपने लिखे को वापस नहीं पढ़तीं। उनका मानना है कि अगर वे दोबारा पढ़ें तो वो या तो कुछ नहीं बदलेंगी या फिर उसे छपने ही नहीं देंगी। उन्होंने लिखने के लिए कभी नौकरी नहीं छोड़ी। ममता कहती हैं कि ‘अगर मैं नौकरी न कर रही होती तो भूखी मर जाती’। इसीलिए वे अक्सर रात में लिखतीं जब घर में सब सो जाते। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि नौकरी बस जीविका









