IPL के बीच शिमला पहुंचीं प्रीति जिंटा:किन्नौरी टोपी में शेयर की फोटो, बोली- 'गर्मी और आईपीएल से ब्रेक लेने आई हूं

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल की बेटी प्रीति जिंटा देश में IPL के रोमांच के बीच शिमला पहुंची हैं। प्रीति ने खुद सोशल मीडिया पर पहाड़ी एवं किन्नौर टोपी के साथ अपनी फोटो शेयर की। अब उनका यह पोस्ट खूब वायरल हो रहा है। इस पर कैप्शन लिखा कि ‘हिमाचल की अपनी छोटी, लेकिन प्यारी यात्रा के हर पल का मज़ा ले रही हूं, गर्मी और IPL से थोड़े आराम के लिए आई हूं। प्रीति आगे लिखती हैं- उफ़! ये पहाड़ तो सच में बहुत जादुई हैं। बर्फ के दौरान भी भावुक पोस्ट शेयर की थी पंजाब किंग्स की सह-मालकिन प्रीति जिंटा रोहड़ू से संबंध रखती हैं। वह जब भी हिमाचल आती हैं, अपनी पुरानी यादों को फिर से जीती नजर आती हैं। करीब तीन महीने पहले भी वह अपने बच्चों के साथ यहां आई थीं। उस दौरान उन्होंने बर्फबारी के बीच बिताए खास पलों को साझा करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखा था। उन्होंने लिखा था कि बच्चों के साथ मिलकर उन्होंने बर्फ से एक “स्नो गर्ल” बनाई, जिसे सुंदर स्नो स्कर्ट से सजाया गया। यह छोटा-सा अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा और उन्हें अपने बचपन के दिनों में ले गया। शिमला जिले से ताल्लुक रखने वाली प्रीति अक्सर अपनी जड़ों से जुड़ी दिखाई देती हैं। चाहे सोशल मीडिया हो या सार्वजनिक मंच, वह अपने पहाड़ी बचपन, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को गर्व के साथ साझा करती हैं। उनका ताजा पोस्ट भी इसी गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। प्राकृतिक आपदा में प्रीति ने 30 लाख रुपए का अंशदान दिया बीते साल हिमाचल में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान भी प्रीति जिंटा ने 30 लाख रुपए का योगदान दिया था। उनका यह कदम उनके राज्य के प्रति लगाव और जिम्मेदारी को दर्शाता है। कुल मिलाकर, प्रीति जिंटा की यह यात्रा सिर्फ एक ब्रेक नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और सुकून के पल तलाशने की एक खूबसूरत कहानी है-जहां पहाड़, यादें और अपनापन एक साथ नजर आते हैं।
गुलाब जल के अलावा इसके तेल के फायदे जानते हैं आप? जानिये इसको बनाने का सही तरीका

गुलाब जल (Rose Water) को सदियों से सुंदरता और सेहत के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन गुलाब का तेल (Rose Oil) उससे भी कहीं ज्यादा असरदार और कीमती माना जाता है. आयुर्वेद, यूनानी और अरोमा थेरेपी में गुलाब के तेल का विशेष स्थान है. इसकी खुशबू ही नहीं, इसके गुण भी मन और शरीर, दोनों पर गहरा असर डालते हैं. गुलाब का तेल क्या है?गुलाब के ताजे फूलों की पंखुड़ियों से निकाला गया यह तेल बेहद शुद्ध, सुगंधित और औषधीय होता है. इसे रोज एसेंशियल ऑयल भी कहा जाता है. इसका इस्तेमाल त्वचा, बाल, मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है. घर पर गुलाब का तेल बनाने का तरीकासामग्री: ताजे गुलाब की पंखुड़ियां – 2 कपनारियल तेल या तिल का तेल – 1 कपकांच का ढक्कन वाला जार विधि: गुलाब की पंखुड़ियों को पानी से धोकर पूरी तरह सुखा लें.कांच के जार में पंखुड़ियां डालें और ऊपर से इतना तेल डालें कि वे पूरी तरह डूब जाएं.जार को धूप वाली जगह पर 7–10 दिन रखें.रोज एक बार हल्का हिला दें.तय समय बाद तेल को छानकर बोतल में भर लें. यह हल्का‑सा गुलाब सुगंधित तेल तैयार हो जाएगा. गुलाब के तेल के फायदे 1. त्वचा के लिए वरदान त्वचा को गहराई से नमी देता है.झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करता है.मुंहासे और दाग‑धब्बों में राहत.त्वचा को नेचुरल ग्लो देता है. 2. मानसिक शांति और स्ट्रेस कमगुलाब के तेल की खुशबू दिमाग को शांत करती है. तनाव और घबराहट में आराम.नींद न आने की समस्या में मदद.मूड बेहतर बनाता है. 3. हार्मोन बैलेंस में सहायकमहिलाओं में पीरियड्स के दौरान दर्द, चिड़चिड़ापन और थकान में राहत देता है. 4. बालों के लिए फायदेमंद सिर की त्वचा को पोषण.रूसी कम करता है.बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है. 5. एंटी‑एजिंग गुणगुलाब का तेल एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है, जो समय से पहले बुढ़ापा आने से बचाता है. इस्तेमाल कैसे करें? चेहरे पर 2–3 बूंद किसी क्रीम या एलोवेरा जेल में मिलाकर.सोने से पहले कनपटी या तलवों पर मालिश.नहाने के पानी में 3–4 बूंद डालकर. सावधानियां सीधे त्वचा पर बहुत ज्यादा मात्रा न लगाएं.पहली बार इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. गुलाब का तेल सिर्फ खुशबू ही नहीं, बल्कि खूबसूरती, सेहत और सुकून का खजाना है. अगर सही तरीके से बनाया और इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी दिनचर्या का अमूल्य हिस्सा बन सकता है.
सिंगरौली के सुदागांव में मिला युवक का शव:खेत में संदिग्ध हालत में मिला; चेहरे-सिर पर चोट के निशान, हत्या की आशंका

सिंगरौली जिले के सुदा गांव में शुक्रवार को 35 वर्षीय भुवनेश्वर कोल का शव मिला। युवक का शव उसके घर के समीप बस्ती से कुछ दूरी पर एक खेत में पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही चितरंगी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। एफएसएल टीम ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य मामले की गंभीरता को देखते हुए बैढ़न जिला मुख्यालय से फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को मौके पर बुलाया गया। एफएसएल विशेषज्ञों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए हैं। चेहरे और सिर पर आई गंभीर चोट प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के चेहरे और सिर पर चोट के कई निशान पाए गए हैं। इन निशानों को देखते हुए पुलिस प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जता रही है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा मौत का खुलासा चितरंगी थाना प्रभारी सुदेश तिवारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों और समय का सटीक पता शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। स्थानीय लोगों से पूछताछ जारी पुलिस ने मामला दर्ज कर विभिन्न पहलुओं पर तफ्तीश तेज कर दी है। घटना के संबंध में आसपास के ग्रामीणों और परिजनों से पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या की स्थिति में संदिग्धों का सुराग लगाया जा सके।
झाल मुरी बनाम भेलपुरी: झारग्राम में रुकने को लेकर ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को दिया ऑफर | भारत समाचार

आखरी अपडेट:24 अप्रैल, 2026, 15:06 IST पश्चिम बंगाल में गुरुवार को विधानसभा के पहले चरण का मतदान हुआ, जिसमें राज्य में रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान झारग्राम में हाल ही में ‘झाल मुरी’ तोड़ने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्होंने कहा कि अगर वे जीते तो झाल मुरी खाएंगे, लेकिन मैं कहती हूं कि मैं आपको दिल्ली से भेलपुरी खिलाऊंगी।” बउबाजार में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी के रुकने का नाटक किया गया था. समाचार एजेंसी के हवाले से उन्होंने कहा, “उन्होंने सुरक्षा के लिए पहले टीवी कैमरे और सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। उन्होंने सुरक्षा चिंताओं के लिए घर से झाल मुरी तैयार की थी और दुकानदार को 10 रुपये दिए थे। वास्तव में, मैं कोई नोट नहीं रखती हूं।” एएनआई. ‘झाल मुरी’ संदर्भ का उपयोग करते हुए, सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “उन्होंने कहा कि अगर वे जीते तो झाल मुरी खाएंगे, लेकिन मैं कहती हूं कि मैं आपको दिल्ली से भेलपुरी खिलाऊंगी। पहले, उन्होंने एक ‘चाय-वाला’ दिखाया, और अब वे चुनाव जीतने के लिए झाल मुरी दिखा रहे हैं।” “हमें मसालेदार झाल मुरी खाने की आदत है, लेकिन क्या आपने कभी मछली और चिकन करी खाई है? मैं आपका ढोकला खाती हूं, मैं डोसा खाती हूं, मैं लिट्टी खाती हूं, मैं ठेकुआ खाती हूं, मैं सत्तू खाती हूं। मैं ईद के दौरान सेवइयां खाती हूं, और मैं हलवा खाती हूं। मुझे धर्म मत सिखाओ”, उन्होंने आगे कहा। विधानसभा चुनाव 2026 लाइव अपडेट पीएम का बंगाल से ‘झाल मुरी’ वादा इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने कृष्णानगर में एक रैली में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि 4 मई को नतीजे घोषित होने के बाद ‘झाल मुरी’ बांटी जाएगी। उन्होंने कहा था, “आपको पूरी ताकत से बीजेपी-एनडीए की जीत का झंडा लहराना है। 4 मई को बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न भी मनाया जाएगा, मिठाइयां भी बांटी जाएंगी और झाल मुरी भी बांटी जाएगी। झालमुरी ने भी कुछ लोगों को जोरदार झटका दिया है। मैंने झाल मुरी खाई, लेकिन झाल (मसाला) टीएमसी को लग गया।” पश्चिम बंगाल में गुरुवार को विधानसभा के पहले चरण का मतदान हुआ, जिसमें राज्य में रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछला रिकॉर्ड उच्च स्तर 84.72 प्रतिशत था, जब 2011 में टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्ता में आईं और सीपीआई (एम) के 34 साल के शासन को समाप्त कर दिया। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, वोटों की गिनती 4 मई को घोषित की जाएगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 24 अप्रैल, 2026, 15:05 IST न्यूज़ इंडिया झाल मुरी बनाम भेलपुरी: झारग्राम में रुकने को लेकर ममता बनर्जी के पास पीएम मोदी के लिए एक ऑफर है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी झाल मुरी टिप्पणी(टी)ममता बनर्जी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)झाल मुरी विवाद(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)कृष्णानगर रैली
अन्नू कपूर बोले-ओम पुरी ने मेरी बहन को धोखा दिया:फिर भी उसने अंतिम दिनों में उनकी देखभाल की, शादी के 8 महीने बाद छोड़ा था

एक्टर अन्नू कपूर ने हाल ही में दिवंगत एक्टर ओम पुरी पर उनकी बहन सीमा कपूर की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया। सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में अन्नू कपूर ने अपनी बहन सीमा कपूर और ओम पुरी के रिश्ते को याद करते हुए कहा कि ओम पुरी शानदार एक्टर थे, लेकिन निजी जीवन में उन्होंने एक महिला को धोखा दिया। अन्नू ने कहा, ‘वे किसी के पति बने और पति बनने के बाद उन्होंने एक महिला को धोखा दिया। यहीं से सब कुछ बिगड़ गया और मैं उस महिला का भाई हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ओम पुरी के अंतिम दिनों में उनकी बहन सीमा ने ही उनकी देखभाल की। उनके मुताबिक, जब ओम पुरी शारीरिक रूप से कमजोर हो गए थे, तब सीमा उनके साथ थीं। ओम पुरी ने 1991 में अन्नू कपूर की बहन सीमा कपूर से शादी की थी। यह शादी बहुत कम समय तक चली और महज 8 महीने बाद ही दोनों अलग हो गए। वहीं, सीमा कपूर से अलग होने के बाद 1993 में ओम पुरी ने जर्नलिस्ट नंदिता पुरी से शादी की। बता दें कि ओम पुरी का निधन 6 जनवरी 2017 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। अब मन में कोई द्वेष नहीं: अन्नू कपूर बातचीत के दौरान अन्नू कपूर ने यह भी कहा कि अब उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है। उन्होंने कहा कि ओम पुरी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका बेटा और पत्नी दूसरी पत्नी नंदिता हैं, जिनके लिए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की। हालांकि, उन्हें इस बात का अफसोस है कि उनकी बहन सीमा कपूर का जीवन बर्बाद हो गया। उन्होंने आगे कहा कि अगर वह इस रिश्ते से जुड़ी सारी बातें बताने लगेंगे तो मामला और गंभीर हो जाएगा क्योंकि उनके भीतर का भाई सामने आ जाएगा। अन्नू के मुताबिक, ओम पुरी भी उनसे बहुत घबराते थे क्योंकि वह हमेशा बेबाकी से अपनी बात रखते हैं।
अन्नू कपूर बोले-ओम पुरी ने मेरी बहन को धोखा दिया:फिर भी उसने अंतिम दिनों में उनकी देखभाल की; शादी के 8 महीने बाद छोड़ा था

एक्टर अन्नू कपूर ने हाल ही में दिवंगत एक्टर ओम पुरी पर उनकी बहन सीमा कपूर को धोखा देने का आरोप लगाया। सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में अन्नू कपूर ने कहा, ‘वे (ओम पुरी) किसी के पति बने और पति बनने के बाद उन्होंने एक महिला को धोखा दिया। यहीं से सब कुछ बिगड़ गया और मैं उस महिला का भाई हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि ओम पुरी के अंतिम दिनों में उनकी बहन सीमा ने ही उनकी देखभाल की। ओम पुरी ने 1991 में अन्नू कपूर की बहन सीमा कपूर से शादी की थी। यह शादी बहुत कम समय तक चली और महज 8 महीने बाद ही दोनों अलग हो गए। वहीं, सीमा कपूर से अलग होने के बाद 1993 में ओम पुरी ने जर्नलिस्ट नंदिता पुरी से शादी की। बता दें कि ओम पुरी का निधन 6 जनवरी 2017 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। अब मन में कोई द्वेष नहीं: अन्नू कपूर बातचीत के दौरान अन्नू कपूर ने यह भी कहा कि अब उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है। उन्होंने कहा कि ओम पुरी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका बेटा और दूसरी पत्नी नंदिता हैं, जिनके लिए उन्होंने भगवान से प्रार्थना की। हालांकि, उन्हें इस बात का अफसोस है कि उनकी बहन सीमा कपूर का जीवन बर्बाद हो गया। उन्होंने आगे कहा कि अगर वह इस रिश्ते से जुड़ी सारी बातें बताने लगेंगे तो मामला और गंभीर हो जाएगा क्योंकि उनके भीतर का भाई सामने आ जाएगा। अन्नू के मुताबिक, ओम पुरी भी उनसे बहुत घबराते थे क्योंकि वह हमेशा बेबाकी से अपनी बात रखते हैं।
क्लॉकवाइज घूमना चाहिए या एंटी क्लॉकवाइज, क्या सही, साइंस और मान्यताएं क्या कहती हैं

अक्सर जब आप किसी पार्क या ट्रैक पर एक सर्किल में घूम रहे हों तो कुछ लोग वहां क्लॉकवाइज दिशा में चलते नजर आते हैं और कुछ एंटी क्लॉकवाइज. कुछ लोग ये दावा करते हैं कि उनके घूमने की दिशा ही ठीक है, उसे लेकर वो अपने अपने तर्क भी देते हैं. आखिर किस दिशा में घूमना सही होता है. साइंस ने किसे सही माना है और इसके पीछे वजह क्या है. वैसे आपको बता दें कि अलग मान्यताएं भी इसे लेकर एकमत नहीं हैं. नई रिसर्च बताती है कि इसका असर दिमाग और शरीर की कोशिकाओं पर पड़ता है. तो अब हम आपको बताते हैं कि कौन सी दिशा में घूमना ज्यादा नेचुरल है. साइंटिस्टों ने लोगों के दिमाग को स्कैन करके पाया कि जब हम उल्टी दिशा में यानि एंटीक्लॉकवाइज घूमते हैं तो दिमाग का बायां हिस्सा एक्टिव होता है. यह वो हिस्सा है जो अच्छा लगना यानि पॉजिटिव फीलिंग्स से जुड़ा होता है. आपका दिमाग एंटी क्लॉकवाइज यानि उल्टी दिशा को ज्यादा आसान और अच्छा मानता है. सीधी दिशा में सोचने पर दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. हालांकि साइंस की वर्ष 2025 में आई नई रिसर्च कहती है, जब कोशिकाएं कमज़ोर होती हैं तो वे क्लॉकवाइज घूमती हैं. जब कोशिकाएं ताकतवर या ज्यादा एनर्जी लगाती हैं, तो वे एंटी क्लॉकवाइज घूमने लगती हैं. सुबह बहुत से लोग पार्क या मार्निंगवॉक ट्रैक पर क्लॉकवाइज वॉक करते दीखते हैं तो कई एंटी क्लॉकवाइज. (news18 ai image) वैसे भारत की हिंदू परंपरा में क्लॉकवाइज घूमना शुभ माना जाता है. वहीं इस्लाम में एंटीक्लॉकवाइज घूमने शुभ माना जाता है. दिमाग को क्या पसंद है साइंस कहती है आपके दिमाग को एंटीक्लॉकवाइज चलना ज्यादा पसंद है और ये ज्यादा नेचुरल है. वैसे साइंस ये भी कहती है कि आपका दिमाग पहले से जानता है कि आपका हाथ पैर कितना घूम सकता है और किधर घूम सकता है, किधर नहीं. हालांकि विज्ञान ये भी कहता है कि ‘सही’ दिशा जैसी कोई चीज़ नहीं है. घूमने की दिशा आपकी सुविधा पर निर्भर करती है. अगर आप उत्तरी ध्रुव के ऊपर से अंतरिक्ष में खड़े हों, तो पृथ्वी एंटी-क्लॉकवाइज घूमती है. यदि दक्षिणी ध्रुव से देखें तो क्लॉकवाइज. पंखे, स्क्रू, बोल्ट, घड़ी क्लॉककवाइज घूमती है, इसकी वजह ये होती है कि अधिकांश लोग दाएं हाथ से ज्यादा बल लगा पाते हैं. वैसे एंटी क्लॉकवाइज के समर्थन में ये भी कहा जाता है कि इस तरह वॉक करने से पृथ्वी के प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. कौन लोग क्लॉकवाइज घूमते हैं अगर आपने क्लॉकवाइज चलना स्वाभाविक रूप से अपनाया है, तो यह आपके शरीर के अपने ‘बैलेंसिंग मैकेनिज्म’ का हिस्सा हो सकता है. विज्ञान कहता है कि ज्यादातर लोग जिनका दाहिना पैर ज्यादा सक्रिय या मजबूत होता है, वे स्वाभाविक रूप से एंटी-क्लॉकवाइज मुड़ना पसंद करते हैं क्योंकि बायां पैर एक ‘धुरी’ का काम करता है. यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो…(news18 ai image) यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो या आपके शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र इस दिशा में खुद को बेहतर तरीके से संतुलित कर पा रहा हो. दिमाग हमेशा उस रास्ते को चुनता है जहां उसे कम ऊर्जा खर्च करनी पड़े. वैसे नई रिसर्च और स्पोर्ट्स साइंस अब किसी एक दिशा को “परफेक्ट” मानने के बजाय विविधता पर जोर देते हैं. अगर आप एक ही दिशा में रोज चलते हैं तो … अगर आप रोज एक ही दिशा में चलते हैं, तो आपके दाहिने पैर के जोड़ों और मांसपेशियों पर बाएं के मुकाबले ज्यादा तनाव पड़ता है. लंबे समय में यह शरीर के एलाइनमेंट में हल्का असंतुलन पैदा कर सकता है. दिशा बदलने से दिमाग को नया ‘चैलेंज’ मिलता है. जब आप अपनी आदत के विपरीत एंटी-क्लॉकवाइज चलते हैं, तो आपका मस्तिष्क और अधिक सतर्क हो जाता है, जिससे न्यूरल पाथवेज मजबूत होते हैं वैसे हृदय की स्थिति के कारण एंटी-क्लॉकवाइज को थोड़ा बेहतर माना गया है, लेकिन सामान्य वॉक के लिए ये अंतर इतना कम है कि इसे नजरअंदाज किया जा सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं अपने वॉक के समय को दो हिस्सों में बांटें. आधा समय क्लॉकवाइज चलें और आधा एंटी-क्लॉकवाइज. इससे दोनों पैरों की मांसपेशियों पर समान जोर पड़ेगा. अगर क्लॉकवाइज चलने में आपके घुटनों या कूल्हों में कोई दर्द नहीं है, तो आपकी बॉडी इस दिशा में अनुकूलित हो चुकी है. हिंदू धर्म में क्या मान्यता है हिंदू धर्म में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा को शुभ माना जाता है. मंदिरों में देवी-देवताओं की परिक्रमा दक्षिणावर्त की जाती है. ऐसा ही बौद्ध और जैन धर्म के मंदिरों में भी है. इसका अर्थ है सूर्य की गति का अनुसरण करना. विवाह, यज्ञ, और शुभ कार्यों में दाएं से बाएं घूमना शुभ होता है. एंटी-क्लॉकवाइज को अशुभ, प्रेत-योनि या अंतिम संस्कार की क्रिया से जोड़ा जाता है. इस्लाम में काबा की परिक्रमा एंटी-क्लॉकवाइज में की जाती है. हज के दौरान सात बार काबा का चक्कर बाईं ओर शुरू करके लगाया जाता है. यह इस्लाम की एक विशिष्ट परंपरा है जो एकेश्वरवादी आस्था का प्रतीक है. सुबह वॉक करें या शाम को सुबह पार्क में पैदल वाक करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है. दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. शाम की वाक भी तनाव कम करने में अच्छी है. सुबह खाली पेट वाक करने से फैट बर्निंग बेहतर होती है. मूड अच्छा रहता है. मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है पार्क में ताजी हवा मिलने से इम्युनिटी बढ़ती है. शाम को वाक से दिनभर का स्ट्रेस कम होता है. नींद अच्छी आती है. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. काम के बाद रिलैक्सेशन के लिए बेहतर. 40-45 मिनट तेज वाक करें, सीधी लाइन में चलें न कि गोल चक्कर लगा. मौसम के अनुसार समय चुनें—गर्मी में शाम बेहतर है.
West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers

Hindi News National West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers | Supreme Court CJI नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक बंगाल में पहले फेज की वोटिंग 23 अप्रैल को हुई, इसमें वोटिंग 93% रही। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई रिकॉर्ड वोटिंग की तारीफ की। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने राज्य में चुनावी हिंसा न होने पर संतोष जताया। CJI ने कहा- भारत के नागरिक के रूप में, मुझे मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुशी हुई। जब लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, कि वे लोग समाधान के लिए कोर्ट की तरफ से नियुक्त 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों से संपर्क करें। कोर्ट बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों से कहा कि वे उन लोगों को पहले सुनवाई का मौका दें, जो वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाते हैं। कोर्ट ने बंगाल चुनाव ड्यूटी में लोगों की याचिका सुनने से इनकार किया सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल को उन विभिन्न लोगों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से काट दिए गए थे; इनमें लगभग 65 चुनाव ड्यूटी अधिकारी भी शामिल थे। याचिकाकर्ता के वकील एमआर शमशाद ने कहा कि कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। उनके ड्यूटी ऑर्डर में एपिक नंबरों का उल्लेख है। अब उन नंबरों को हटा दिया गया है। अब चुनाव कराने वाले लोग वोट नहीं दे सकते। यह मनमाना है। कई मामलों में कारण भी नहीं बताए गए हैं।” इस पर जस्टिस बागची ने कहा, “इस चुनाव में शायद वे वोट नहीं दे पाएंगे। में उनका नाम बनाए रखने का महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित रखा जाएगा।” कोर्ट रूम लाइव एडवोकेट कल्याण बनर्जी: दायर की गई 27 लाख अपीलों में से 136 का ही निपटारा किया गया है। यह बहुत दुख की बात है। इस बार 92% मतदान हुआ। दूर-दूर से प्रवासी मजदूर मतदान करने आए हैं। हिंसा की कोई घटना भी नहीं हुई। CJI सूर्यकांत: मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। SG तुषार मेहता: यह ऐतिहासिक मतदान है। लेकिन मैं बनर्जी से सहमत हूं… कुछ घटनाओं को छोड़कर यह एक शांतिपूर्ण चुनाव था। जस्टिस बागची: राजाये राजाये जुद्धो होये, कुलो कांगरार जान जाए, यानी युद्ध राजाओं के बीच लड़े जाते हैं, लेकिन आम लोग अपनी जान गंवाते हैं। पहली बार चुनाव आयोग के मुवक्किल की सभी लोग सराहना कर रहे हैं। बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजह SIR: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर वोटिंग करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में करीब 82.17% रही थी। यानी कुल मतदाता घटे, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग बराबर या ज्यादा रही। एंटी इनकंबेंसी: राज्य में 15 साल से तृणमूल सरकार है। नेताओं से असंतोष, रोजगार, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट जैसे मुद्दे भी ज्यादा मतदान की वजह हो सकते हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल जिलों और सीमावर्ती इलाकों में यह SIR और NRC के डर से उपजी प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है। इस बार ध्रुवीकरण भी जबरदस्त है। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदू मतदाताओं का भी वोट प्रतिशत ज्यादा रहा होगा। प्रवासी कामगार: यह भी बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से केवल वोट डालने बंगाल लौटे हैं। उन्हें लगा कि इस बार वोट नहीं दिया, तो हमेशा के लिए अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेन भर कर वोट डालने के लिए लोगों को ला रही है। आयोग की सख्ती: निर्वाचन आयोग की अभूतपूर्व निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण मतदाताओं ने बिना किसी डर के मतदान किया। पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं को हटाने वाली SIR लिस्ट के पब्लिश होने के बाद चुनाव हो रहे हैं। गुरुवार को हुए मतदान में महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। महिला वोटर 92.69% रहीं, जबकि पुरुष वोटर 90.92% रहे। थर्ड जेंडर के वोटर का 56.79% थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मैहर में गैस संकट पर प्रदर्शन:खाली सिलेंडर लेकर सड़क पर बैठे, अमरपाटन-सतना मार्ग पर चक्काजाम

मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत से परेशान उपभोक्ताओं ने शुक्रवार की दोपहर विरोध प्रदर्शन किया। अमरपाटन-सतना मार्ग पर स्थित मानसी गैस एजेंसी के सामने बड़ी संख्या में लोग खाली सिलेंडर लेकर सड़क पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों से सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचे थे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें गैस उपलब्ध नहीं हो सकी। नाराज लोगों ने गैस की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर अमरपाटन पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। लगभग एक घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका। प्रदर्शन में शामिल उपभोक्ता शम्भू मिश्रा ने आरोप लगाया कि एजेंसी में सिलेंडर उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जानबूझकर नहीं दिए जा रहे हैं। पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति फिलहाल सामान्य हो गई है, लेकिन क्षेत्र में गैस संकट को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बनी हुई है। स्थानीय उपभोक्ताओं ने प्रशासन से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
एग्जिट पोल 2026 तारीख: पश्चिम बंगाल में पहला चरण खत्म, असम-केरल-तमिलनाडु में वोट पूरा, कब आएगा चुनावी पोल?

पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच राज्यों में मतदान हो रहा है। बंगाल में पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है, वहीं दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। वहीं, तमिल के सभी पोर्टफोलियो पर वोटिंग हो चुकी है। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को ही वोटिंग की पूरी प्रक्रिया होती है। ऐसे में लोगों को अब एलेक्टिट पोल का इंतजार है. आइए जानते हैं कि इन चुनावों का वोट पोल कब आएगा। असम, केरल, पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया 9 अप्रैल को पूरी हो गई थी। 23 अप्रैल को तमिल के सभी 234 क्वार्टरों में वोटिंग हुई, जबकि बंगाल के फर्स्ट स्टेज 152 में वोटिंग हुई। जहां पुडुचेरी में 89.87% वोटिंग हुई, वहीं असम में 85.91% और केरल में 78.27% वोटिंग हुई। अगर तमिल की बात करें तो यहां भी 84.69% वोटिंग हुई है। वहीं बंगाल में पहले चरण में 92.88 प्रतिशत वोटिंग हुई है। ये भी पढ़ें- बंगाल की जिन 5 पर हुई सबसे ज्यादा वोटिंग, वहां मुस्लिम, कौन बना-बिगाड़ कर सकता है ममता का खेल? आॅनॅमिट एक्जाम पोल कब? चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह से वोट पोल तक सार्वजनिक नहीं की जा सकती। इस पर निर्वाचन आयोग की रोक रहती है। जब तक अपना अंतिम वोट पोलिंग बूथ पर वोट नहीं डालता है, तब तक एकल पोल के स्टूडियो को सार्वजनिक नहीं किया जाता है। इसलिए पश्चिम बंगाल चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को पूरी होने के बाद एक्जिट पोल सामने आएगा। शाम छह बजे के बाद टीवी और अन्य माध्यमों के माध्यम से बताया गया। ये भी पढ़ें- बंगाल में 92% तो तमिलनाडु में 85% वोटिंग! बम्पर वोट के बारे में क्या, बेपरवाह मत के बारे में मत पूछो असर? ईवेंट पोल क्या होता है? एक्जालिट पोल ऐसे सर्वेक्षण होते हैं जो वोट के तुरंत बाद आम तौर पर मतदान के लिए बाहर निकल जाते हैं। इन का सर्वेक्षण उद्देश्य वोटों के रुझान को रेखांकित करता है और आधिकारिक नतीजे आने से पहले वोट के नतीजों का अनुमान लगाता है। मीडिया संस्थान और प्राइवेट बिजनेस ऐसे सर्वे आर्किटेक्चर हैं। इस सर्वेक्षण में कुछ चुनिंदा मतदाताओं के जवाब आधारित हैं।









