Tuesday, 21 Jul 2026 | 01:07 AM

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'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

फिल्म ‘रामायण: प्रथम संकल्प’ का ट्रेलर शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इवेंट में लॉन्च किया गया। इस मौके पर डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा और फिल्म की स्टार कास्ट मौजूद रही। मेकर्स ने घोषणा की कि ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। इवेंट में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेराय सहित अन्य कलाकार शामिल हुए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने सनी देओल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। करीब चार मिनट के ट्रेलर में फिल्म के भव्य विजुअल्स, बड़े पैमाने पर तैयार की गई दुनिया और प्रमुख किरदारों की पहली विस्तृत झलक दिखाई गई। बता दें कि रामायण: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि रामायण: पार्ट 2 दिवाली 2027 में रिलीज की जाएगी। कार्यक्रम में बाबा रामदेव और कुमार विश्वास भी थे। इवेंट में बाबा रामदेव ने मंच पर योग भी करके दिखाया। वहीं, बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि इस फिल्म का बजट 4000 करोड़ रुपये है, तो यह सुनकर उनकी समाधि लग गई। इस पर मंच पर मौजूद कवि कुमार विश्वास ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्वामी जी, आपका खुद का पतंजलि साम्राज्य तो 2 लाख करोड़ रुपए का है।” कुमार विश्वास की इस बात पर रणबीर कपूर समेत पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, बाबा रामदेव ने अपने खास अंदाज में योग और अध्यात्म से जुड़ी बातें भी साझा कीं, जिन्हें सुनकर रणबीर कपूर मुस्कुराते नजर आए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच पर जाकर बाबा रामदेव का अभिवादन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने काला चश्मा पहना हुआ था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि ये काला चश्मा पहनने के लिए मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ है, पर आज इस शुभ अवसर पर मेरे दिल में सिर्फ अफेक्शन (प्यार) है।” सनी देओल ने कहा, ‘मैं वाहेगुरु जी का शुक्रिया करता हूं कि मुझे हनुमान जी के किरदार को निभाने का मौका मिला। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं सही तरह से इसे निभा सकूं, क्योंकि हनुमान जी का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन मजा बहुत आएगा, क्योंकि वो नटखट, मासूम, ताकतवर हैं, आप सबके प्यारे हैं और राम जी के भक्त हैं।’ फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें- फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 के टीवी शो ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा।

'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

फिल्म ‘रामायण: प्रथम संकल्प’ का ट्रेलर शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इवेंट में लॉन्च किया गया। इस मौके पर डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा और फिल्म की स्टार कास्ट मौजूद रही। मेकर्स ने घोषणा की कि ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। इवेंट में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेराय सहित अन्य कलाकार शामिल हुए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने सनी देओल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। करीब चार मिनट के ट्रेलर में फिल्म के भव्य विजुअल्स, बड़े पैमाने पर तैयार की गई दुनिया और प्रमुख किरदारों की पहली विस्तृत झलक दिखाई गई। बता दें कि रामायण: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि रामायण: पार्ट 2 दिवाली 2027 में रिलीज की जाएगी। कार्यक्रम में बाबा रामदेव और कुमार विश्वास भी थे। इवेंट में बाबा रामदेव ने मंच पर योग भी करके दिखाया। वहीं, बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि इस फिल्म का बजट 4000 करोड़ रुपये है, तो यह सुनकर उनकी समाधि लग गई। इस पर मंच पर मौजूद कवि कुमार विश्वास ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्वामी जी, आपका खुद का पतंजलि साम्राज्य तो 2 लाख करोड़ रुपए का है।” कुमार विश्वास की इस बात पर रणबीर कपूर समेत पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, बाबा रामदेव ने अपने खास अंदाज में योग और अध्यात्म से जुड़ी बातें भी साझा कीं, जिन्हें सुनकर रणबीर कपूर मुस्कुराते नजर आए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच पर जाकर बाबा रामदेव का अभिवादन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने काला चश्मा पहना हुआ था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि ये काला चश्मा पहनने के लिए मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ है, पर आज इस शुभ अवसर पर मेरे दिल में सिर्फ अफेक्शन (प्यार) है।” सनी देओल ने कहा, ‘मैं वाहेगुरु जी का शुक्रिया करता हूं कि मुझे हनुमान जी के किरदार को निभाने का मौका मिला। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं सही तरह से इसे निभा सकूं, क्योंकि हनुमान जी का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन मजा बहुत आएगा, क्योंकि वो नटखट, मासूम, ताकतवर हैं, आप सबके प्यारे हैं और राम जी के भक्त हैं।’ फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें- फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 के टीवी शो ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा।

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले:85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले:85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर

अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।

Meham Chaubisi Khap Panchayat | Haryana Gun Culture Protest & Meeting

Meham Chaubisi Khap Panchayat | Haryana Gun Culture Protest & Meeting

महम चौबीसी सर्व खाप के प्रधान तुलसी ग्रेवाल ने घोषणा की है कि 25 जुलाई को उत्तर भारत की महापंचायत आयोजित की जाएगी। धर्मेंद्र हुड्डा ने सपना चौधरी पर वीडियो बना अश्लील कंटेंट का मुद्दा उठाया था। हरियाणा में सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता और गन कल्चर के खिलाफ धर्मेंद्र हुड्डा की मुहिम को अब खाप पंचायतों का समर्थन मिला है। महम चौबीसी सर्व खाप ने 25 जुलाई को उत्तर भारत की महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है, जिसमें विभिन्न खाप पंचायतों और सामाजिक स . सर्व खाप के प्रधान तुलसी ग्रेवाल ने घोषणा की है कि 25 जुलाई को सुबह 10 बजे महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत होगी। इसमें हरियाणवी व बॉलीवुड कलाकारों को भी बुलाया जाएगा। पूरे अभियान की शुरुआत जाट आंदोलन दंगों के भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा की ओर से की गई थी। हुड्डा ने वीडियो जारी कर कहा था कि सपना चौधरी, अनु बालियान और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रिया रेवाड़ी जैसी हरियाणवी कलाकारों के कारण हमारी लड़कियां बिगड़ रही हैं। हालांकि, सपना ने भी पोस्ट कर हुड्डा को अपने अंदाज में जवाब दिया था। इसके बाद हुड्डा ने तुलसी ग्रेवाल से फोन पर बात कर महापंचायत करने की अपील की। कॉल के बाद तुलसी ग्रेवाल ने कहा- पंचायत में सभी निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे और समाज में फैल रही बुराइयों के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी। डांसर सपना चौधरी और प्रिया रेवाड़ी की कुछ PHOTOS… पहले पढ़िए सर्व खाप के प्रधान ने क्या कहा… धर्मेंद्र हुड्डा की अपील के बाद बनी सहमति तुलसी ग्रेवाल ने बताया कि धर्मेंद्र हुड्डा के सोशल मीडिया वीडियो और फोन कॉल के बाद महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर उत्तर भारत की महापंचायत बुलाने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को प्रभावित कर रहे ‘गन और गंदा’ कल्चर समेत सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होना है। 25 जुलाई को होगी उत्तर भारत की महापंचायत ग्रेवाल ने कहा- 25 जुलाई सुबह 10 बजे महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत होगी। इसमें विभिन्न खाप पंचायतों, किसान, महिला, छात्र संगठनों और हरियाणवी व बॉलीवुड कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा। सभी फैसले सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे। 12 हजार लोगों के बैठने की क्षमता, भोजन की भी व्यवस्था उन्होंने बताया कि महम चौबीसी सर्व खाप का ऐतिहासिक चबूतरा बिना कुर्सियों के करीब 12 हजार लोगों के बैठने की क्षमता रखता है। महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा लोग आए इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी रहेगी। इन मुद्दों पर होगी चर्चा महापंचायत में गन कल्चर, सोशल मीडिया पर अश्लीलता, नशा, सट्टा बाजार, अश्लील डांस, अभद्र भाषा और समाज में फैल रही अन्य बुराइयों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अश्लील कंटेंट को बैन करने की मांग की जाएगी। रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकार को सौंपेंगे ज्ञापन महापंचायत से पहले रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी रूपरेखा साझा की जाएगी। महापंचायत के बाद संवैधानिक तरीके से कानून बनाने की मांग को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने तथा बड़े नेताओं से मिलकर विधानसभा में मुद्दा उठाने की कोशिश की जाएगी। महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत होगी। तुलसी ग्रेवाल ने कहा कि खाप पंचायत का आयोजन समान आसन पर होता है। इस मंच पर जो भी व्यक्ति बैठेगा, वह अपने पद और प्रतिष्ठा को छोड़कर आम व्यक्ति की तरह बैठेगा। हरियाणा में 100 से ज्यादा खाप पंचायतें सक्रिय तुलसी ग्रेवाल ने कहा- हरियाणा में 100 से अधिक अलग-अलग खाप पंचायतें हैं। पहले क्षेत्र के आधार पर खाप पंचायतें होती थीं, लेकिन अब अलग-अलग बिरादरियों की अलग-अलग खाप पंचायतें बनने से उनकी संख्या बढ़ गई है। इसलिए सभी से अलग-अलग बातचीत कर उन्हें इस महापंचायत में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। तुलसी ग्रेवाल ने भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा की तारीफ की थी। अब जानिए, धर्मेंद्र हुड्डा ने लाइव आकर क्या कहा था… गांव के प्रधान और ठेकेदार भी जिम्मेदार: धर्मेंद्र ने कहा- असली गलती गांव के उन प्रधानों और ठेकेदारों की है, जो गले में मोटी-मोटी सोने की चेन पहनकर घूमते हैं। ये लोग गांवों में बड़े-बड़े स्टेज लगवाकर डांसरों को बुलाते हैं। नाचने वालों को तो सिर्फ पैसा चाहिए, जो बुलाएगा वे वहीं चली जाएंगी। अगर गांव के प्रधान और लोग ऐसे कार्यक्रम देखना बंद कर दें, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होगी। भाइयों की गोद में बैठकर वीडियो बना रहीं: धर्मेंद्र हुड्डा ने दावा किया कि अश्लील डांस और रील्स के बढ़ते चलन ने हरियाणा की युवतियों और महिलाओं की सोच को प्रभावित किया है। इससे यह धारणा बनी है कि मेहनत किए बिना सिर्फ डांस के जरिए भी पैसा कमाया जा सकता है। इसी कारण लड़कियां छतों पर नाचते हुए वीडियो बना रही हैं और हरियाणा की संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही हैं। अब कुछ लड़कियां अपने भाइयों की गोद में बैठकर वीडियो बना रही हैं और गांवों से लड़कों के साथ भागने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। सपना चौधरी से माफी के लिए रखी शर्त: धर्मेंद्र हुड्डा ने कहा- अगर सपना चौधरी मीडिया के सामने आकर यह स्वीकार कर लें कि उनके डांस और काम से हरियाणा की संस्कृति को नुकसान पहुंचा है और वह आगे ऐसा फूहड़ कंटेंट नहीं बनाएंगी, तभी वह अपने शब्द वापस ले लेंगे और सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे कि उस शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। डांसरों के बच्चों को लेकर भी की टिप्पणी: धर्मेंद्र हुड्डा ने सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो के जरिए कमाई करने वालों के भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। कहा कि जब ऐसे लोगों के बच्चे स्कूल जाएंगे, तो अच्छे परिवारों के माता-पिता अपने बच्चों को उनके साथ बैठने नहीं देंगे। इससे समाज में ऐसी स्थिति पैदा होगी कि बदनामी और सामाजिक दबाव के कारण इन डांसरों के बच्चे डिप्रेशन में आकर सुसाइड तक करने को मजबूर हो सकते हैं। सपना ने हुड्डा को दिया ये जवाब हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी ने भी हुड्डा के बयानों पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट साझा कर धर्मेंद्र हुड्डा को इशारों-इशारों में जवाब दिया है। लिखा- सुंदरता सिर्फ ध्यान खींचती है, मगर इंसान का अच्छा चरित्र दिल जीत लेता है। सपना चौधरी ने

India Private Rocket Launch Success

India Private Rocket Launch Success

नई दिल्ली15 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर रिलायंस से जुड़ी रही। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज रविवार की छुट्‌टी के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN: फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को जरूरी कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा: पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़: पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी की स्थापना 2018 में दो दोस्तों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। विक्रम-1 को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा में इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च किया गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल मार्केट बंद था तो शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

भास्कर ​रिसर्च: खरीदारी का तरीका बदल रहा:सोफा-टीवी से आरओ तक मासिक किराए पर लेने का दौर, घरेलू चीजों का रेंटल मार्केट 33500 करोड़ पहुंचा

भास्कर ​रिसर्च: खरीदारी का तरीका बदल रहा:सोफा-टीवी से आरओ तक मासिक किराए पर लेने का दौर, घरेलू चीजों का रेंटल मार्केट 33500 करोड़ पहुंचा

आजकल सामान खरीदने के बजाय उसे किराये (सब्सक्रिप्शन) पर लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती महंगाई और बार-बार शहर बदलने की मजबूरी ने लोगों की सोच बदल दी है। अब लोग सोफा, बेड, टीवी, फ्रिज, एसी और कार जैसी महंगी चीजों का मालिक बनने के बजाय, हर महीने एक निश्चित किराया देकर उनका उपयोग करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रेंटोमोजो और फर्लेंको जैसी कंपनियां इस सुविधा को आसान बना रही हैं। फर्नीचर और घरेलू उपकरणों का रेंटल बाजार भी पीछे नहीं है। रेडसीर के अनुसार, यह बाजार अभी 33,500 करोड़ रु. का है। जानकारों का अनुमान है कि 2032 तक यह 46,000 करोड़ रु. के पार निकल जाएगा। यह नया ट्रेंड बताता है कि भारतीय परिवारों के लिए अब चीजों के मालिकाना हक से ज्यादा ‘सुविधा’ और ‘किफायत’ जरूरी हो गई है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि लाइफस्टाइल को अपग्रेड करना भी आसान हो गया है। एक स्टडी के मुताबिक, देश में औसत सब्सक्रिप्शन 13 महीने का होता है। देश में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी की शुरुआत ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से हुई थी। इसी ने लोगों के बीच मासिक सब्सक्रिप्शन की आदत डाली। एक्सप्लेनर: चीन के बाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही हमारी सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी छोटे फर्नीचर 79 रु./माह से शुरू, कारें 600 रु./दिन पर हैं 1. किराए पर सामान लेने से क्या फायदा है? यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो बार-बार शहर बदलते हैं या भारी निवेश के बिना अच्छी लाइफस्टाइल चाहते हैं। 2. आखिर ये किराया कितना किफायती है? यह बहुत सस्ता है। छोटे फर्नीचर ₹79/माह और अप्लायंसेज ₹149/माह से शुरू होते हैं। 1BHK का पूरा सेटअप भी ₹514-₹570 रु./माह के आसपास मिल सकता है। 3. डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का क्या होता है? डिलीवरी और इंस्टॉलेशन का शुल्क चेकआउट पर अलग से जुड़ता है। बेड, गद्दे, फ्रिज और वॉशिंग मशीन का इंस्टॉलेशन आमतौर पर मुफ्त होता है। 4. क्या मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ग्राहक की है? नहीं, सामान की मरम्मत और मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। 5. क्या कोई अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है? हर सब्सक्रिप्शन के साथ लगभग ₹1,000 का ‘डैमेज-वेवर’ चार्ज जुड़ता है। कंपनियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। 6. क्या इन कंपनियों में कोई ऑफर होता है? कुछ कंपनियां पहले महीने के किराए पर किड्स फर्नीचर पर 22% (₹1,100 तक) की छूट जैसे शुरुआती ऑफर्स देती हैं। 7. कार सब्सक्रिप्शन का शुरुआती किराया? शॉर्ट-टर्म सेल्फ-ड्राइव में किराया ₹499/दिन, जबकि प्रीमियम एसयूवी में ₹999/दिन से शुरू है। आमतौर पर बजट कारों का रोजाना रेंट 600-800 रु. के बीच है। 8. लंबी अवधि में कार लेने का रेंट क्या है? लॉन्ग-टर्म सब्सक्रिप्शन के लिए किराया ₹15,000 प्रति माह से शुरू होता है। 9. कंपनियां क्या-क्या खर्च वहन करती हैं? कार की कीमत, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और सर्विसिंग यानी ओनरशिप का झंझट कंपनी संभालती है। हालांकि इंश्योरेंस क्लेम में जो रकम कंपनी सेटल नहीं करती, वो पैसे और क्लेम-फाइलिंग चार्ज ग्राहक देते हैं। 10. ग्राहक को जेब से क्या-क्या देना होता है? ईंधन (पेट्रोल/डीजल), टोल टैक्स, पार्किंग और राज्यों की एंट्री फीस का भुगतान ग्राहक को खुद करना पड़ता है। 11. ये कंपनियां कितने शहरों में उपलब्ध हैं? ये कंपनियां देशभर के 21-30 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही हैं, जिनमें इंदौर, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ शामिल हैं। 12. सब्सक्रिप्शन बीच में बंद कर सकते हैं? हां, सब्सक्रिप्शन ट्रांसफर कर सकते हैं या सामान लौटा सकते हैं, पर अर्ली चार्ज है। 13. आरओ का सब्सक्रिप्शन कितने का है? आरओ खरीदने में 10,000-30,000 रु. खर्च होते हैं। लिवप्योर जैसी कंपनियां आरओ 429 रु./महीने के सब्सक्रिप्शन पर दे रहीं। इसमें मशीन, इंस्टॉलेशन, फिल्टर बदलना और सर्विसिंग भी शामिल होती है। 14. रेंटल कंपनियों तक कैसे पहुंच सकते हैं? ऑर्डर एप/साइट से बुक होते हैं। टीम घर पर डिलीवरी-इंस्टॉलेशन करती है। शहर बदलने पर सामान फ्री में शिफ्ट करते हैं। भारत में सालाना ग्रोथ 16.6% है… फ्यूचर मार्केट इनसाइट्स के मुताबिक, भारत की सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी हर साल करीब 16.6% बढ़ रही है। यह चीन (18%) के बाद दुनिया की सबसे तेज वृद्धि दरों में से एक है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में और ज्यादा कंपनियां ‘प्रोडक्ट बेचने’ के बजाय ‘सर्विस मॉडल’ पर काम करने के लिए मजबूर होंगी। लेकिन ये मॉडल हर जगह सफल नहीं… अमेरिका में कैडिलैक, ऑडी, बीएमडब्ल्यू और वॉल्वो जैसी कंपनियों ने कार सब्सक्रिप्शन सर्विस शुरू कीं, लेकिन ऊंची लागत और जटिल ढांचे के कारण अधिकांश स्कीम्स बंद करनी पड़ीं। चीन में कपड़ों की सब्सक्रिप्शन कंपनी वाईक्लोजेट भी इसी वजह से नहीं टिक सकी। इस मामले में ओटीटी सबसे सफल मॉडल रहा। बेहतर मौके खोजने वाले युवाओं में ट्रेंड बढ़ रहा है भास्कर एक्सपर्ट: संजय छाबड़ा- एमडी, लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स हाल के वर्षों में सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी तेजी से बढ़ी है। लेकिन यह अब भी मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है। दरअसल मौजूदा दौर में युवा लगातार बेहतर मौके की तलाश में रहते हैं। इसके चलते उन्हें कुछ ही साल के अंतर पर शहर बदलना पड़ता है। इसलिए वे घर के सामान खरीदने की बजाय किराए पर लेना पसंद करते हैं। खास तौर पर कोविड के बाद यह नया बिजनेस मॉडल ट्रेंड में आया है। हमारे आंकड़े कहते हैं कि 5 साल पहले तक 76% ग्राहक कैश में इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते थे। अब 20% ही कैश पेमेंट करते हैं। बाकी ग्राहक ईएमआई पर सामान लेते हैं। जाहिर है, उन पर मासिक किस्तों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यदि सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी बढ़ रही है तो ये स्वाभाविक ही है। लेकिन छोटे-मझोले शहरों में इस मॉडल ने अब भी जोर नहीं पकड़ा है।

अमेरिका का लगातार 8वीं रात ईरान पर हमला:ट्रम्प बोले- जॉर्डन में 2 सैनिकों की मौत के जवाब में कार्रवाई की

अमेरिका का लगातार 8वीं रात ईरान पर हमला:ट्रम्प बोले- जॉर्डन में 2 सैनिकों की मौत के जवाब में कार्रवाई की

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात भी ईरान पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने खुद इन हमलों को मंजूरी दी थी और यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि इस बार हमलों का मुख्य निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने, हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर रहे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलों और डिसैलिनेशन प्लांट पर भी हमले की बात कही गई है, लेकिन CENTCOM ने इसकी पुष्टि नहीं की है। जंग में में दो और सैनिकों की मौत जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका के साथ समझौते से पीछे हटा ईरान: ईरान ने अमेरिका के साथ एक महीने पहले हुए समझौते से पीछे हटने का ऐलान किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने खुद समझौते का उल्लंघन किया, इसलिए वे भी उसकी शर्तों का पालन नहीं करेंगे। 2. अमेरिकी हमलों में 50 लोगों की मौत, 500 घायल: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि 27 जून से 18 जुलाई के बीच अमेरिकी हवाई हमलों में 50 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 3. जंग में डिसैलिनेशन प्लांट बने निशाना: कुवैत ने दावा किया कि ईरान ने उसके एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया है। वहीं, ईरान ने भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के होर्मोजगान में एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया है। 4. अमेरिकी हमलों में दो पुल क्षतिग्रस्त: अमेरिकी हमले में बंदर अब्बास-रूदान मार्ग पर स्थित दो पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। साथ ही, जस्क के पास एक इलाके पर भी सैन्य हमला हुआ। 5. होर्मुज में जहाजों की आवाजाही निचले स्तर पर: होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। शिप ट्रैकिंग वेबसाइट मरीन ट्रैफिक के मुताबिक, गुरुवार को स्ट्रेट से सिर्फ 8 जहाज गुजरे। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

लहर-लहर:हमारा दिमाग आधुनिक है, लेकिन सोच सदियों पुराने यकीनों पर चल रही है

लहर-लहर:हमारा दिमाग आधुनिक है, लेकिन सोच सदियों पुराने यकीनों पर चल रही है

इंसान ने शायद अपनी पूरी तारीख में कभी इतनी तरक्की नहीं की, जितनी पिछले सौ-दो सौ सालों में की है। उसने समंदर की गहराइयां नाप लीं, आसमान की ऊंचाइयां छू लीं, चांद पर कदम रख दिया और अरबों किलोमीटर दूर मौजूद ग्रहों तक अपने यान भेज दिए। उसने परमाणु की बनावट समझ ली, इंसानी जीनोम को पढ़ लिया और ऐसी मशीनें बना लीं जो सीख भी सकती हैं और फैसले भी कर सकती हैं। लेकिन इन सब उपलब्धियों के बीच एक सवाल अब भी हमारे सामने खड़ा है- क्या हमारी सोच भी उतनी ही आगे बढ़ी है, जितनी हमारी तकनीक? यहीं इक्कीसवीं सदी का सबसे बड़ा विरोधाभास दिखाई देता है। हमारा दिमाग आधुनिक है, लेकिन हमारी मानसिक दुनिया का एक हिस्सा अब भी सदियों पुराने यकीनों पर चलता है। ऐसा लगता है कि एक ही इंसान के भीतर दो अलग-अलग दुनिया रहती हैं। एक दुनिया प्रयोगशाला की है, जहां हर बात का आधार गणना, प्रयोग और प्रमाण है। दूसरी दुनिया परंपराओं, प्रतीकों और उन धारणाओं की है जिन्हें हमने विरासत में पाया है। जरा इस विडंबना पर गौर कीजिए। एक वैज्ञानिक वर्षों की मेहनत, गणित, भौतिकी और हजारों प्रयोगों के सहारे अंतरिक्ष यान को लाखों किलोमीटर दूर किसी ग्रह या उपग्रह पर ठीक उसी जगह पहुंचा देता है, जहां उसे पहुंचाना निर्धारित किया गया है। अगर रॉकेट की कामयाबी विज्ञान, गणना और प्राकृतिक नियमों पर निर्भर है, तो फिर किसी दूसरी अलौकिक व्यवस्था की जरूरत कहां से आ जाती है? और अगर वह अलौकिक व्यवस्था ही निर्णायक है, तो फिर विज्ञान की इतनी लंबी तैयारी और इतने कठोर परीक्षणों का अर्थ क्या रह जाता है? 21वीं सदी के पहले ऐसा कभी हुआ ही नहीं कि आपका ज्ञान और आपकी आस्था एक-दूसरे के विरोधी हैं और दोनों आप ही के अंदर हैं। शायद यही हमारे समय का सबसे बड़ा बौद्धिक अंतर्विरोध है- हमारी जानकारी एक दिशा में खड़ी है और हमारी आस्था दूसरी दिशा में। दोनों एक ही इंसान के भीतर रहती हैं, लेकिन एक-दूसरे से कभी सवाल नहीं करतीं। धर्मों को समझने के लिए इंसान को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में देखना होगा। वो उस जमाने में जन्मा, जब इंसान के पास प्रकृति की वैज्ञानिक व्याख्या नहीं थी। बिजली क्यों चमकती है, भूकंप क्यों आते हैं, महामारी कैसे फैलती है, ग्रहण क्यों लगता है, बारिश कैसे होती है- इन सवालों के जवाब उसके पास नहीं थे। इसलिए उसने अपनी समझ, कल्पना और अनुभव के आधार पर उनके उत्तर खोजे। अपने समय के हिसाब से वे उत्तर स्वाभाविक भी थे। लेकिन ज्ञान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह ठहरा हुआ नहीं रहता। हर नई खोज हमें पुरानी धारणाओं पर फिर से सोचने के लिए मजबूर करती है। इसलिए समय के साथ हमारी समझ का बदलना भी उतना ही स्वाभाविक है। समस्या तब पैदा होती है, जब हम इक्कीसवीं सदी के विज्ञान का लाभ तो पूरी तरह उठाना चाहते हैं, लेकिन उसी विज्ञान की सबसे बुनियादी आदत- हर दावे को सवाल, तर्क और प्रमाण की कसौटी पर परखने-अपनाने से हिचकते हैं। तब हमारी ज़िंदगी दो हिस्सों में बंट जाती है। हमारे हाथ में आधुनिक तकनीक होती है, लेकिन हमारी सोच का एक हिस्सा अब भी मध्ययुगीन धारणाओं से चिपका रहता है। तकनीक हमें आधुनिक बना सकती है, लेकिन आधुनिक मानसिकता केवल वैज्ञानिक दृष्टि ही दे सकती है। अगर केवल धर्म ही इंसान को नेक और नैतिक बना देता, तो मध्य-पूर्व आज दुनिया का सबसे शांत इलाका होता। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कोई भी सभ्यता केवल इसलिए जिंदा नहीं रहती कि उसने अपने अतीत को संभालकर रखा है। वह इसलिए आगे बढ़ती है कि अपने अतीत का सम्मान करते हुए उससे सवाल पूछने का साहस भी रखती है। विरासत का मतलब उसे सिर पर उठाकर ढोना नहीं, बल्कि उसे समझना, परखना और हर दौर की नई रोशनी में देखना है। जो धारणाएं तर्क, अनुभव और प्रमाण की कसौटी पर खरी उतरती हैं, उन्हें बचाने के लिए किसी आग्रह की जरूरत नहीं होती; वे अपने दम पर जीवित रहती हैं। लेकिन किसी विचार को केवल इसलिए सच मानते रहना कि वह सदियों पुराना है, अतीत का सम्मान नहीं, उसके बोझ तले दब जाना है। सभ्यता की पहचान इस बात से नहीं होती कि वह अपने पूर्वजों की हर बात दोहराती रहे, बल्कि इस बात से होती है कि वह उनकी विरासत में अपने विवेक का भी इजाफा करे। मैं खुद नास्तिक हूं। मेरी कोई धार्मिक आस्था नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मुझे दूसरों की आस्था से आपत्ति है। आपत्ति तब होती है, जब निजी विश्वास सार्वजनिक निर्णयों की जगह लेने लगते हैं। आधुनिक समाज की असली चुनौती विज्ञान और आस्था के बीच कोई युद्ध खड़ा करना नहीं है। चुनौती यह है कि दोनों की सीमाएं साफ-साफ समझी जाएं। आस्था व्यक्ति का निजी अधिकार है, लेकिन जहां ज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, कानून या सार्वजनिक नीति का सवाल हो, वहां फैसले विश्वास से नहीं, प्रमाण, तर्क और परीक्षण के आधार पर होने चाहिए। निजी जीवन को आस्था सहारा दे सकती है, लेकिन समाज को आगे बढ़ाने का काम विवेक और ज्ञान ही करते हैं। अध्यात्म की भी मेरी समझ कुछ ऐसी ही है। अगर अध्यात्म का मतलब अपने भीतर झांकना, अपनी जिंदगी का हिसाब करना और अपनी कमजोरियों व खूबियों को पहचानना है, तो इसमें किसी को क्या एतराज हो सकता है? और अगर अध्यात्म का अर्थ धर्म, जाति, नस्ल और पंथ की दीवारों से ऊपर उठकर पूरी इंसानियत से मोहब्बत करना है, तो मुझे उससे भी कोई आपत्ति भी नहीं। बस मैं उसे अध्यात्म नहीं, मानवता कहता हूं। आज के दौर में अध्यात्म अमीरों के लिए एक तरह का ट्रैंक्विलाइजर बन गया है। यह टिप्पणी अध्यात्म पर नहीं, उसके बाजारीकरण पर है। यही वजह है कि आज के तथाकथित गुरु और बुद्ध में फर्क साफ दिखाई देता है। गौतम बुद्ध महल छोड़कर सत्य की तलाश में जंगल गए थे। आज के अनेक गुरु जंगल से निकलकर महलों में पहुंच जाते हैं। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)

Trump Administration Deportation Policy | Indian Immigrants Face Removal

Trump Administration Deportation Policy | Indian Immigrants Face Removal

न्यूयॉर्क2 मिनट पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली कॉपी लिंक 5 फरवरी 2025 को अमेरिकी सैन्य विमान 104 भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़कर अमृतसर लाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डिपोर्टेशन का बड़ा अभियान छेड़ने की तैयारी कर ली है। अमेरिका में 18 हजार अनडॉक्युमेंटेड (बिना दस्तावेज) भारतीय निशाने पर आ गए हैं। इस बार भी ट्रम्प प्रशासन डिपोर्टेशन के लिए सैन्य विमानों के इस्तेमाल की तैयारी में है, जो उनकी सख्त इमिग्रेशन नीति की सबसे चर्चित तस्वीर बन चुका है। अनडॉक्युमेंटेड भारतीयों को न अपील, न दलील और न ही वकील करने का मौका मिलेगा। ट्रम्प की आईसीई (इमिग्रेशन कस्टम्स एंड एनफोर्समेंट) की टीमें लगातार छापे मार रही हैं। भास्कर ने अमेरिका के 4 शहरों- न्यूयॉर्क, टेक्सास, कैलिफोर्निया और न्यूजर्सी—से ग्राउंड रिपोर्ट की। इसमें सामने आया कि डिपोर्टेशन अभियान ने बिना दस्तावेज वाले भारतीयों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। डिटेंशन सेंटर में बंद लोगों के साथ दुर्व्यवहार की कहानियां भी सामने आईं। डिपोर्टेशन के लिए दो नए डिटेंशन सेंटर तैयार ट्रम्प प्रशासन ने डिपोर्ट किए जाने वाले प्रवासियों को रखने के लिए एल पासो में एक और कैलिफोर्निया में दो वेयरहाउस खरीदे हैं। इन पर करीब 16,500 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इन्हें डिटेंशन सेंटर में बदलकर आईसीई को सौंप दिया गया है। यहां करीब 12 हजार प्रवासियों को रखा जा रहा है। वकील बोले- पहले सुनवाई होती थी, अब सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा न्यूयॉर्क के इमिग्रेशन अटॉर्नी ग्रेग सिस्किंड कहते हैं, “मैं 30 साल से प्रवासियों के केस लड़ता रहा हूं। बिना दस्तावेज वाले किसी भी प्रवासी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है, लेकिन अब आईसीई के छापों के बाद लोगों को सीधे डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है।” उनका कहना है कि अमेरिका में संघीय व्यवस्था के कारण हर राज्य में मानवाधिकारों से जुड़े अलग-अलग कानून हैं, लेकिन आईसीई किसी भी राज्य में जाकर कार्रवाई कर रही है। 2025 में 3,567 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में दी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। इस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगी थीं। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में विवाद हुआ। संसद में भी हंगामा हुआ था। यह सोशल मीडिया पर पोस्ट किए वीडियो का स्क्रीन ग्रैब, इसमें प्लेन में चढ़ते लोगों के पैरों में चेन बंधी हुई थीं। ———————————— अमेरिका-भारत से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सांसद बोले-भारत से 30 साल में सबसे खराब रिश्ते:ट्रम्प के एकतरफा फैसले ने भरोसा तोड़ा, यकीन न हो तो जयशंकर से पूछिए भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं।वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

जफ्फी डालो, प्यार करो पर शहनाज गिल ट्रोल:पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' के ट्रेलर लॉन्चिंग पर बयान देकर फंसी; पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बोला- कहानी फर्जी

जफ्फी डालो, प्यार करो पर शहनाज गिल ट्रोल:पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' के ट्रेलर लॉन्चिंग पर बयान देकर फंसी; पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बोला- कहानी फर्जी

एक्टर जय रंधावा और एक्ट्रेस शहनाज गिल की अपकमिंग पंजाबी फिल्म ‘इश्कनामा’ रिलीज से पहले ही विवादों में आ गई है। 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म की कहानी भारतीय पंजाबी सिख युवक निम्मा और पाकिस्तानी पंजाबी युवती नसीमा के प्रेम पर आधारित है। 14 जुलाई को ट्रेलर रिलीज होने के बाद बहस छिड़ी गई। फिल्म की कहानी और किरदारों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर का दावा है कि यह एक फर्जी कहानी है और पाकिस्तान में ‘नसीमा’ नाम नहीं होता। लोग या तो नसीम नाम रखते या सीमा। नसीमा नाम पहली बार सुना है। इसके अलावा ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान में शहनाज गिल के बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। शहनाज ने कहा कि अगर निम्मा को नसीमा मिल जाए तो वह दोनों को एक कमरे में छोड़ देंगी, उनके हाथ बांध देंगी और कहेंगी कि जफ्फी डाल लो और आज जी भरकर प्यार कर लो। इस बयान के बाद शहनाज गिल को भी ट्रोल किया जा रहा है। अधूरे प्यार की कहानी ‘इश्कनामा’ शहनाज गिल और जय रंधावा की आगामी फिल्म इश्कनामा’ पाकिस्तानी पंजाबी युवती नसीमा और भारतीय पंजाबी सिख युवक निम्मा के प्यार की अधूरी कहानी से इंस्पायर है, जिसमें 1981 और 1988 के बीच दो अलग मुल्क में रहने वाले दो आशिकों की कहानी को ट्रेलर में उतारा गया है। कहानी एक सिख लड़के कवि निम्मा की है, जो पाकिस्तान जाता है, वहां उसकी मुलाकात नसीमा नाम की लड़की से होती है, जो मुस्लिम है। दोनों के बीच प्यार पनपता है और नसीमा एक दिन निम्मा से हिंदुस्तान घूमने की इच्छा व्यक्त करती है। वह उसे भारत घुमा भी देता है और उसे छोड़ने आता है, लेकिन जब दोनों की इस लव स्टोरी के बारे में नसीमा के पिता को पता लगता है, तो वह पाकिस्तान में लड़के को बुरी तरह से मारता है। अंत में दोनों को एक-दूसरे से दूर कर दिया जाता है। फिल्म में जय रंधावा ने निम्मा की भूमिका और शहनाज गिल ने नसीमा की भूमिका निभाई है। शूटिंग के दौरान घायल हुए थे जय रंधावा जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए थे। जनवरी में शूटिंग के समय एक जंप सीन करते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए थे। इस दौरान उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया था। इस घटना का 8 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया था। उनकी अस्पताल से एक फोटो भी सामने आई थी। जिसमें MRI करते हुए दिखाया गया था। लेकिन, रंधावा ने जल्द ही सेट पर वापसी की और शूटिंग को खत्म किया। अब ये फिल्म 24 जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म पर जय रंधावा की 2 बड़ी बातें फिल्म पर शहनाज गिल की 2 बड़ी बातें इश्कनामा फिल्म पर ट्रोलर्स ने क्या कहा ************ ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी एक्टर घायल, दीवार से सिर टकराया: फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के वक्त हादसा, जंप सीन करते वक्त क्रेन में खराबी आई पंजाबी एक्टर जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए। शूटिंग के समय एक जंप सीन करते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए। इस दौरान उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया। (पढ़ें पूरी खबर)