अगस्त के पहले-हफ्ते में FPI ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए:जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में ₹12,921 करोड़ का भारी निवेश किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतर होती स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरें घटने की उम्मीद, कच्चे तेल के गिरते दाम और स्थिर रुपए के कारण विदेशी निवेशकों की लिवाली जारी है। जुलाई में हुए ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजार में पॉजिटिव फंड फ्लो देखा जा रहा है। लगातार 4 महीने की बिकवाली के बाद ट्रेंड बदला जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.17 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड बिकवाली के बाद जुलाई से बाजार में ट्रेंड बदला है। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से जून तक लगातार चार महीनों की बिकवाली से पहले FPIs ने फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। इसके बाद जुलाई में ₹20,200 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जिससे भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। 2026 में अब तक ₹2.41 लाख करोड़ निकाले हालिया खरीदारी के बावजूद, विदेशी निवेशक 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी में कुल मिलाकर नेट सेलर बने हुए हैं। इस साल अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से ₹2.41 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ रुपए की कुल बिकवाली से भी ज्यादा हो चुका है। सेकेंडरी मार्केट और लिस्टेड कंपनियों में रुचि बढ़ी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने बताया कि हालिया निवेश बाजार में सुधरते सेंटिमेंट का नतीजा है। अमेरिका में रेट कट की उम्मीद, कच्चे तेल की घटती कीमतें और स्थिर रुपए ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। वेदांत गुप्ते ने कहा कि RBI द्वारा ग्रोथ और महंगाई को लेकर दिए गए बेहतर आउटलुक ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी फिलहाल निचले स्तर पर है, जिससे नए फंड्स के लिए काफी गुंजाइश बची हुई है। इसके अलावा, हालिया खरीदारी का बड़ा हिस्सा सिर्फ IPO के बजाय सेकेंडरी मार्केट से आ रहा है, जो लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की गहरी रुचि को दर्शाता है। भू-राजनीतिक तनाव घटने से सेंटिमेंट सुधरा बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का मानना है कि FIIs और DIIs की ओर से लगातार जारी खरीदारी के पीछे भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव का कम होना एक मुख्य वजह है। तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों का सेंटिमेंट पॉजिटिव हुआ है, जिससे भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा मिला है। ऑटो-हेल्थकेयर सेक्टर बने पहली पसंद जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने बताया कि FPIs की खरीदारी में एक खास ट्रेंड देखा जा रहा है। विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं और इनमें तेजी से अलॉटमेंट बढ़ा रहे हैं। डेट मार्केट में भी पैसा लगा रहे विदेशी निवेशक शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय डेट मार्केट में भी लगातार बना हुआ है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान FPIs ने जनरल रूट के जरिए भारतीय डेट मार्केट में ₹622 करोड़ का निवेश किया है। क्या होता है फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट? ऐसे विदेशी निवेशक या संस्थाएं जो किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डेट मार्केट में वित्तीय लाभ के लिए पैसा लगाते हैं। वे कंपनियों में सीधे मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल नहीं लेते। क्या होता है सेकेंडरी मार्केट? वह वित्तीय बाजार जहां पहले से लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री निवेशकों के बीच होती है (जैसे BSE या NSE)। इसमें पैसा सीधे कंपनी को न जाकर बेचने वाले निवेशक के पास जाता है।
FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation

4 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। इस तिमाही यानी जुलाई-सितेबर में कंपनियां सीधे तौर पर रेट बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का सहारा ले रही हैं। यानी सामान की कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा यानी वजन कम कर दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। भारत में प्रमुख FMCG कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी, नेस्ले, डाबर, ब्रिटानिया आदि इन प्रोडक्ट्स में सक्रिय हैं। FMCG वे रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान हैं जो जल्दी बिकते और खर्च हो जाते हैं। ब्रिटानिया: ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी ब्रिटानिया चालू तिमाही में ‘श्रिंकफ्लेशन’ के जरिए कीमतों में 1.5 से 2% की और बढ़ोतरी कर सकती है। यह कटौती मुख्य रूप से कंपनी के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैक्स में देखने को मिलेगी। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने बताया कि चीनी और पाम ऑयल जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ काफी हद तक श्रिंकफ्लेशन पर निर्भर थी। चालू तिमाही में भी इस ट्रेंड को जारी रखना पड़ेगा। हालांकि, मार्केट में डिमांड का माहौल अभी भी काफी मजबूत दिख रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड: 2 से 5% तक बढ़ सकती है महंगाई हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी अपने अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2 से 5% प्र गोदरेज कंज्यूमर: क्रूड के स्थिर होने का इंतजार गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5% दाम बढ़ाए थे। कंपनी का कहना है कि वह चालू तिमाही में फिलहाल तुरंत बड़े प्राइस हाइक से बच रही है और कमोडिटी मार्केट के स्थिर होने का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति ने बताया कि गोदरेज के कई इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर क्रूड इसी रेंज में रहता है तो हमें किसी बड़े प्राइस हाइक की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम FY27 के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को आसानी से हासिल कर लेंगे। डाबर इंडिया: वॉल्यूम पर दिख सकता है असर डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती लागत आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है। कंपनियों के पास इस लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है। टाटा कंज्यूमर और नेस्ले: वेस्ट एशिया संकट और एल-नीनो पर नजर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के एमडी सुनील डी’सूजा ने बताया कि लागत का असर काफी डायनेमिक है। अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी आगे कीमतों में बदलाव करेगी। वहीं नेस्ले इंडिया ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में सचेत किया है कि शॉर्ट-टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन थोड़ा सुस्त हो सकता है। कंपनी ने कहा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष और मानसून पर एल-नीनो का संभावित असर फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। आगे क्या: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बेहतर डिलीवरी से मार्जिन बचाने की कोशिश कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी सेक्टर को भरोसा है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत बनी रहेगी। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को घटाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपने मार्जिन को बरकरार रख सकें। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation

36 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। इस तिमाही यानी जुलाई-सितेबर में कंपनियां सीधे तौर पर रेट बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का सहारा ले रही हैं। यानी सामान की कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा यानी वजन कम कर दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। भारत में प्रमुख FMCG कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी, नेस्ले, डाबर, ब्रिटानिया आदि इन प्रोडक्ट्स में सक्रिय हैं। FMCG वे रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान हैं जो जल्दी बिकते और खर्च हो जाते हैं। ब्रिटानिया: ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी ब्रिटानिया चालू तिमाही में ‘श्रिंकफ्लेशन’ के जरिए कीमतों में 1.5 से 2% की और बढ़ोतरी कर सकती है। यह कटौती मुख्य रूप से कंपनी के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैक्स में देखने को मिलेगी। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने बताया कि चीनी और पाम ऑयल जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ काफी हद तक श्रिंकफ्लेशन पर निर्भर थी। चालू तिमाही में भी इस ट्रेंड को जारी रखना पड़ेगा। हालांकि, मार्केट में डिमांड का माहौल अभी भी काफी मजबूत दिख रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड: 2 से 5% तक बढ़ सकती है महंगाई हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी अपने अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2 से 5% प्र गोदरेज कंज्यूमर: क्रूड के स्थिर होने का इंतजार गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5% दाम बढ़ाए थे। कंपनी का कहना है कि वह चालू तिमाही में फिलहाल तुरंत बड़े प्राइस हाइक से बच रही है और कमोडिटी मार्केट के स्थिर होने का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति ने बताया कि गोदरेज के कई इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर क्रूड इसी रेंज में रहता है तो हमें किसी बड़े प्राइस हाइक की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम FY27 के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को आसानी से हासिल कर लेंगे। डाबर इंडिया: वॉल्यूम पर दिख सकता है असर डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती लागत आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है। कंपनियों के पास इस लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है। टाटा कंज्यूमर और नेस्ले: वेस्ट एशिया संकट और एल-नीनो पर नजर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के एमडी सुनील डी’सूजा ने बताया कि लागत का असर काफी डायनेमिक है। अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी आगे कीमतों में बदलाव करेगी। वहीं नेस्ले इंडिया ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में सचेत किया है कि शॉर्ट-टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन थोड़ा सुस्त हो सकता है। कंपनी ने कहा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष और मानसून पर एल-नीनो का संभावित असर फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। आगे क्या: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बेहतर डिलीवरी से मार्जिन बचाने की कोशिश कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी सेक्टर को भरोसा है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत बनी रहेगी। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को घटाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपने मार्जिन को बरकरार रख सकें। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
संडे प्रोफाइल : मोहम्मद बिन सलमान:सुधारों, कूटनीति से सल्तनत का चेहरा बदलते एमबीएस

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इन दिनों सक्रिय कूटनीति को लेकर चर्चा में हैं। जुलाई में अमेरिका से परमाणु समझौते और 7 अगस्त को सऊदी, पाकिस्तान व तुर्किये के रक्षा करार में उनकी सक्रियता दिखी है। राजनेता को कई चेहरे लगाकर राजकाज चलाना पड़ता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) इसका उदाहरण हैं। एक तरफ वे सऊदी समाज में बदलाव और आधुनिकता लाने की कोशिश करते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता पर पकड़ मजबूत रखने के लिए सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जनवरी 2015 में किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के सत्ता संभालने के बाद एमबीएस को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इसके बाद वे तेजी से सत्ता के केंद्र में पहुंचे। आज 41 साल की उम्र में वे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। हाल के दिनों में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और पाकिस्तान-तुर्किये के साथ रक्षा गठजोड़ ने उनकी सक्रिय कूटनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। इन कदमों के जरिए वे एक तरफ ईरान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ चीन, रूस और अमेरिका के बीच संतुलन साधते नजर आते हैं। एमबीएस ने सत्ता में आने के बाद सामाजिक बदलावों पर भी जोर दिया। धार्मिक पुलिस के अधिकार सीमित किए गए। महिलाओं को लेकर कई पुरानी पाबंदियां हटाई गईं। स्कूलों में लड़कियों के खेलने पर लगी रोक खत्म हुई और करीब 40 साल बाद 2018 में देश में सिनेमा फिर शुरू हुआ। 2019 में महिलाओं को पुरुष अभिभावक के बिना यात्रा और काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिली। विश्व बैंक के अनुसार 2025 में सऊदी अरब की लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 35% थी। आर्थिक मोर्चे पर एमबीएस ने तेल पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू कीं। निओम का हाईटेक शहर, लाल सागर के पर्यटन प्रोजेक्ट और खेलों को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा हैं। रियाद में 2024 में ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कप हुआ। सऊदी अरब 2030 में एक्सपो और 2034 में फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी की तैयारी भी कर रहा है। हालांकि एमबीएस का दूसरा चेहरा विवादों से जुड़ा है। सत्ता मजबूत करने के दौरान उनके कई रिश्तेदारों और विरोधियों पर कार्रवाई हुई। पत्रकार जमाल खाशोगी की 2018 में हत्या के मामले में भी उन पर गंभीर आरोप लगे। मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी सरकार की आलोचना की है। एमबीएस की निजी छवि भी पारंपरिक सऊदी शासकों से अलग है। उन्हें वीडियो गेम, फॉर्मूला-1 और मोटरसाइकिलों में दिलचस्पी है। वे आम लोगों के साथ सेल्फी लेते भी नजर आते हैं। हालांकि, एक दशक से अधिक समय से सत्ता के केंद्र में रहने के बावजूद सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब भी तेल पर काफी निर्भर है। यही उनकी महत्वाकांक्षी योजनाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
Natasa Stankovic Juhu Mumbai | Paparazzi Controversy Alexander Ilic

2 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पंड्या की एक्स-वाइफ नताशा स्टेनकोविक पैपराजी पर भड़क गईं। यह घटना शनिवार रात हुई, जब नताशा को मुंबई के जुहू इलाके में स्पॉट किया गया था। नताशा अपने करीबी दोस्त और मॉडल अलेक्जेंडर एलेक्स इलिक के साथ नजर आईं। पैपराजी ने उन्हें कैमरे में कैद करने के लिए घेर लिया और लगातार तस्वीरें लेने लगे। इस दौरान नताशा असहज नजर आईं। वह पैपराजी के लगातार तस्वीरें लेने और प्राइवेसी में दखल देने से नाराज दिखीं। हार्दिक पंड्या से तलाक लेने के बाद, नताशा को कई मौकों पर मुंबई में अलेक्जेंडर के साथ स्पॉट किया गया है। भीड़ और कैमरों के बीच अलेक्जेंडर उन्हें आगे ले जाते और भीड़ से बचाते नजर आए। हार्दिक ने 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी बता दें कि हार्दिक ने मई 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी। उसी साल नताशा ने बेटे अगस्त्य को 30 जुलाई 2020 को जन्म दिया। साल 2024 में दोनों अलग हो गए। हार्दिक इन दिनों माहिका शर्मा को डेट कर रहे हैं। हार्दिक और माहिका का रिश्ता पिछले साल अक्टूबर में पब्लिक हुआ था। वहीं, हार्दिक पंड्या ने फरवरी के महीने में बेटे अगस्त्य पंड्या को शनिवार को एक लग्जरी कार गिफ्ट की थी। कार डिलीवरी के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। हार्दिक ने बेटे को लैंड रोवर डिफेंडर गिफ्ट की थी, जिसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए बताई गई थी। दरअसल, लैंड रोवर मुंबई के इंस्टाग्राम पेज पर तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया था, ‘हार्दिक पंड्या ने एक बार फिर अपनी डिफेंडर खरीदने के लिए नवनीत मोटर्स को चुना। भरोसे पर बना रिश्ता। उत्कृष्टता पर टिका फैसला। मुंबई में डिलीवर, लैंड रोवर डिफेंडर। अगस्त्य पंड्या और स्टेनकोविक को प्रेजेंट। दमदार परफॉर्मेंस के लिए तैयार। आगे बढ़कर नेतृत्व करने वालों के लिए बनाई गई।’ लैंड रोवर मुंबई की पोस्ट। तलाक के बाद हार्दिक पंड्या और नताशा बेटे अगस्त्य की को-पेरेंटिंग कर रहे हैं। हार्दिक पंड्या भी पैपराजी पर भड़के थे बता दें कि हार्दिक ने दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर अपनी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा की तस्वीरों को लेकर नाराजगी जताई थी। दरअसल, कुछ पैपराजी ने माहिका की फोटो गलत एंगल से क्लिक की, जब वह मुंबई के बांद्रा इलाके में एक रेस्टोरेंट की सीढ़ियों से नीचे उतर रही थीं। हार्दिक ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक लंबा नोट लिखकर कहा था, ‘मैं समझता हूं कि पब्लिक फिगर होने का मतलब है कि लोगों का ध्यान मुझ पर रहेगा और मेरी हरकतों पर नजर रखी जाएगी। यह मेरे काम और मेरी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन आज जो हुआ, वह बिल्कुल गलत था। माहिका बस सीढ़ियों से उतर रही थी, तभी कुछ फोटोग्राफर्स ने गलत एंगल से उसकी फोटो खींची। किसी भी महिला की तस्वीर इस तरह से नहीं लेनी चाहिए। यह एक प्राइवेट मोमेंट था, जिसे सस्ती पब्लिसिटी बना दिया गया।’ पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
न्यूजीलैंड में अमेरिका से आधे खर्च में पढ़ाई:भारतीय छात्र 1 साल में 33% बढ़े, छात्रों को पढ़ाई के बाद 3 साल का वर्क वीजा भी

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्ती और वहां महंगी पढ़ाई से भारतीय छात्र नए देश तलाश रहे हैं। न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश बना है। यहां अमेरिका के मुकाबले लगभग आधे खर्च में पढ़ाई और फिर बाद में 3 साल का वर्क वीजा मिलता है। इसके कारण यहां 1 साल में भारतीय छात्रों की संख्या में 33% बढ़ी है। ऑफर… 4 यूनिवर्सिटी में मेरिट से स्कॉलरशिप न्यूजीलैंड में 4 यूनिवर्सिटी- वाइकातो, कैंटरबरी, विक्टोरिया और वेलिंगटन में मेरिट बेस से भारतीय स्टूडेंट्स को फुल स्कॉलरशिप का ऑफर भी शुरू किया गया है। एनजेड स्कॉलरशिप: पीएचडी वाले भारतीय छात्रों के लिए 14 लाख रुपए तक की फीस माफी। साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप: फीस, रहन-सहन, यात्रा कवर। साप्ताहिक भत्ता भी। एक्सीलेंस अवॉर्ड: साढ़े 5 लाख रुपए की एकमुश्त राशि छात्रों को दी जाती है। हाई अचीवर्स स्कॉलरशिप: मेधावी भारतीय छात्रों को फीस में 11 लाख छूट। राहत…यहां इमिग्रेशन फोर्स की धरपकड़ का डर नहीं वेलिंगटन में रहने वाले छात्र आकाश का कहना है कि न्यूजीलैंड में इमिग्रेशन फोर्स का खतरा नहीं होता है। आकाश का कहना है कि अमेरिका में रहने वाले उनके साथी छात्र बताते हैं कि कैसे इमिग्रेशन की धरपकड़ का डर रहता है। भारतीय छात्रों को वहां हमेशा अपने वीसा, पासपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट्स साथ रखने पड़ते हैं। स्टूडेंट ट्रैकर आईसीईएफ के अनुसार 2025 में 12 हजार छात्रों की तुलना में इस साल जुलाई दाखिले में ये संख्या 16 हजार पहुंचेगी। अमेरिका में फीस, कॉस्ट ऑफ लिविंग व हेल्थ इंश्योरेंस का खर्च 85 लाख रुपए पड़ता है। इसकी तुलना में न्यूजीलैंड में ये खर्च लगभग 44 लाख रुपए ही बैठता है। गारंटी… पार्टटाइम और फुलटाइम जॉब आसान ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के छात्र गौरव शर्मा कहते हैं कि न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान पार्ट टाइम जॉब भी आसानी से मिल जाती है। छात्र हर हफ्ते 25 घंटे काम कर सकता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद न्यूजीलैंड में हेल्थकेयर, आईटी, कंस्ट्रक्शन और एग्री सेक्टर की ग्रीन लिस्ट में ढेरों जॉब ऑफर होते हैं।
न्यूजीलैंड में अमेरिका से आधे खर्च में पढ़ाई:भारतीय छात्र 1 साल में 33% बढ़े, छात्रों को पढ़ाई के बाद 3 साल का वर्क वीजा भी

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्ती और वहां महंगी पढ़ाई से भारतीय छात्र नए देश तलाश रहे हैं। न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश बना है। यहां अमेरिका के मुकाबले लगभग आधे खर्च में पढ़ाई और फिर बाद में 3 साल का वर्क वीजा मिलता है। इसके कारण यहां 1 साल में भारतीय छात्रों की संख्या में 33% बढ़ी है। ऑफर… 4 यूनिवर्सिटी में मेरिट से स्कॉलरशिप न्यूजीलैंड में 4 यूनिवर्सिटी- वाइकातो, कैंटरबरी, विक्टोरिया और वेलिंगटन में मेरिट बेस से भारतीय स्टूडेंट्स को फुल स्कॉलरशिप का ऑफर भी शुरू किया गया है। एनजेड स्कॉलरशिप: पीएचडी वाले भारतीय छात्रों के लिए 14 लाख रुपए तक की फीस माफी। साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप: फीस, रहन-सहन, यात्रा कवर। साप्ताहिक भत्ता भी। एक्सीलेंस अवॉर्ड: साढ़े 5 लाख रुपए की एकमुश्त राशि छात्रों को दी जाती है। हाई अचीवर्स स्कॉलरशिप: मेधावी भारतीय छात्रों को फीस में 11 लाख छूट। राहत…यहां इमिग्रेशन फोर्स की धरपकड़ का डर नहीं वेलिंगटन में रहने वाले छात्र आकाश का कहना है कि न्यूजीलैंड में इमिग्रेशन फोर्स का खतरा नहीं होता है। आकाश का कहना है कि अमेरिका में रहने वाले उनके साथी छात्र बताते हैं कि कैसे इमिग्रेशन की धरपकड़ का डर रहता है। भारतीय छात्रों को वहां हमेशा अपने वीसा, पासपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट्स साथ रखने पड़ते हैं। स्टूडेंट ट्रैकर आईसीईएफ के अनुसार 2025 में 12 हजार छात्रों की तुलना में इस साल जुलाई दाखिले में ये संख्या 16 हजार पहुंचेगी। अमेरिका में फीस, कॉस्ट ऑफ लिविंग व हेल्थ इंश्योरेंस का खर्च 85 लाख रुपए पड़ता है। इसकी तुलना में न्यूजीलैंड में ये खर्च लगभग 44 लाख रुपए ही बैठता है। गारंटी… पार्टटाइम और फुलटाइम जॉब आसान ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के छात्र गौरव शर्मा कहते हैं कि न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान पार्ट टाइम जॉब भी आसानी से मिल जाती है। छात्र हर हफ्ते 25 घंटे काम कर सकता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद न्यूजीलैंड में हेल्थकेयर, आईटी, कंस्ट्रक्शन और एग्री सेक्टर की ग्रीन लिस्ट में ढेरों जॉब ऑफर होते हैं।
Piyush Mishra in Ranchi | Student Protest Support & Aarambh Hai Prachand

37 मिनट पहले कॉपी लिंक झारखंड की राजधानी रांची में परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शन के 16वें दिन अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा धरना स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने अभ्यर्थियों के बीच बैठकर उनका समर्थन किया। मीडिया से बातचीत में पीयूष मिश्रा ने कहा कि वे छात्रों के इंटरव्यू देखकर और उनकी आंखों में दर्द देखकर यहां आए हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्म ‘गुलाल’ का प्रसिद्ध गाना ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे पूरे परिसर में उत्साह दिखाई दिया। छात्रों को देखकर आया, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं मीडिया से बातचीत में पीयूष मिश्रा ने रांची आने की वजह बताई। उन्होंने कहा कि उनका यहां आने का कोई अन्य मकसद नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारी छात्रों के इंटरव्यू देखे थे। छात्रों की आंखों में दर्द, तकलीफ और आंसू देखकर उनसे रहा नहीं गया। दो दिन का समय खाली मिलते ही वे सीधे रांची आ गए। पीयूष मिश्रा ने कहा कि वे युवाओं को पसंद करते हैं और उन्हीं के लिए काम और सिंगिंग करते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि यह आंदोलन बिना किसी राजनीतिक झंडे या एजेंडे के शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। खाने से लेकर तिरपाल और आर्थिक मदद देने का ऐलान गैंग्स ऑफ वासेपुर फेम अभिनेता ने बताया कि वे केवल मंच पर बोलने नहीं आए हैं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार छात्रों की मदद भी कर रहे हैं। उन्होंने अपनी टीम और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की ओर से आंदोलन स्थल पर भोजन, गद्दे, तिरपाल और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। पीयूष मिश्रा ने कहा कि वे कोई बहुत बड़े धन सेठ नहीं हैं, लेकिन उनसे जितना बन पड़ेगा, उतनी मदद लगातार करते रहेंगे। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपील की कि आंदोलन को इसी तरह मर्यादित, अनुशासित और बिना किसी अभद्रता या अपशब्द के आगे बढ़ाएं। ‘आरंभ है प्रचंड’ गाया तो गूंज उठा प्रदर्शन स्थल धरना स्थल पर मौजूद युवाओं के बीच पीयूष मिश्रा ने निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गुलाल’ (2009) का अपना प्रसिद्ध गाना ‘आरंभ है प्रचंड’ गाया। गाना शुरू होते ही पूरे स्टेडियम में मौजूद सैकड़ों छात्र-छात्राएं उनके साथ मिलकर पंक्तियां दोहराने लगे। गाना खत्म होने पर मैदान तालियों से गूंज उठा। इस भावुक पल ने प्रदर्शनकारी युवाओं में नया जोश भर दिया। पीयूष मिश्रा के अलावा बॉलीवुड के अन्य कलाकारों जैसे सोनाक्षी सिन्हा, इमरान खान, भूमि पेडनेकर और अनुपम खेर ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। जानिए क्या है अभ्यर्थियों का पूरा विवाद झारखंड में छात्र 29 जुलाई से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ आंदोलित हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य में लंबे समय से परीक्षाएं समय पर नहीं हो रही हैं और जो परीक्षाएं आयोजित होती हैं, उनके पेपर लीक हो जाते हैं। छात्र 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को रद्द करने, पूरे मामले की सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। सरकार के प्रतिनिधियों और मंत्रियों के साथ कई दौर की वार्ता के बाद भी अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Home Buying Tips 2026 | Check Property Strength & Low Interest Rates

2 मिनट पहले कॉपी लिंक अगर आप घर या प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे है, तो बारिश का मौसम इसके लिए सही समय रहेगा। इस मौसम में मकान और उसके आसपास के इलाके वैसे नहीं रह जाते जैसे ये सालभर दिखाई देते हैं। इस मौसम में घर और प्रॉपर्टी को सही तरह से परखा जा सकता है। साथ ही, इस समय बैंक की होम लोन की ब्याज दरें भी कम हैं। इन 4 कारणों से जाने इस समय घर खरीदना कैसे बेहतर है… 1. मकान की बनावट का नहीं मजबूती का भी पता चलेगा मकान की खूबसूरत से ज्यादा उसकी मजबूती जरूरी है। बरसात में प्रॉपर्टी की क्वालिटी का सही पता लगाया जा सकता है। छत या दीवारों पर सीलन, जमीन, खिड़की, दरवाजों और खासतौर पर बाथरूम में नमी नजर आ रही है, तो न खरीदना ही बेहतर होगा। वहीं बरसात में कई जगहों पर पानी भरने की समस्या रहती है इसीलिए ये देखे की पानी निकासी की व्यवस्था है या नहीं। 2. रास्ते की सही स्थिति पता चलेगी घर खरीदते वक्त आसपास की सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना चाहिए। बारिश के मौसम में कुछ सड़कों पर पानी भरने, ट्रैफिक और बिजली की समस्या होती है। खासतौर पर मकान या कॉलोनी निर्माताओं द्वारा मुख्य सड़क जोड़े रखने वाली अच्छी सड़क के कई वादे किए जाते हैं, पर असलियत कई बार यह नहीं होती। सड़क असुविधाजनक या जोख़िम भरी हुई तो नहीं है, इसका ध्यान ज़रूर रखें। इन सुविधाओं का अंदाजा बारिश में ही लग सकता है। 3. होम लोन की ब्याज दरों में कटौती पिछले साल 4 बार RBI के रेपो रेट में कटौती के बाद कई बैंकों ने होम लोन की ब्याज में कटौती की। बैंक ऑफ इंडिया 7.10% की सालाना ब्याज दर पर होम लोन दे रहा है। देश का सबसे बड़ा बैंक SBI भी इस समय 7.25% सलाना ब्याज पर लोन दे रहा है। 4. बिजली की परेशानी पर दें ध्यान कई बार देखा जाता है कि बरसात होते ही बिजली चली जाती है। कुछ इलाके ऐसे हैं जहां कई घंटों तक बिजली भी गुल रहती है। आप जिस प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं वहां ऐसी हालत तो नहीं है इसका पता करें। अगर बिजली जाती भी है तो कैंपस और पार्किंग के लिए जनरेटर की सुविधा है या नहीं इस पर सवाल कर सकते हैं। खासतौर पर जब आप आउटर या शांत इलाके में मकान ले रहे हैं तो इसे नजर अंदाज न करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kajal Raghwani Controversy | Bhojpuri Stars Nirahua & Aamrapali Statement

4 मिनट पहले कॉपी लिंक भोजपुरी बवाल शो में भोजपुरी स्टार्स में जारी जुबानी जंग के बीच अभिनेत्री काजल राघवानी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे पर तीखा हमला बोला है। काजल ने निरहुआ के अपनी पत्नी को लेकर दिए गए हालिया बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो इंसान अपने संघर्ष के दिनों में साथ देने वाली पत्नी का सम्मान नहीं कर सकता, वह किसी और की क्या इज्जत करेगा। इसके साथ ही काजल ने आम्रपाली दुबे के करियर, नीलम गिरी के बयानों और अपनी अंग्रेजी को लेकर बनाए जा रहे मजाक पर भी अपनी बात रखी। इस विवाद की शुरुआत भोजपुरी बवाल शो के दौरान कलाकारों द्वारा एक-दूसरे के करियर, पर्सनल लाइफ और काम न देने के आरोपों से हुई थी। अभिनेत्री काजल राघवानी। निरहुआ के ‘फर्ज’ वाले बयान पर उठाया सवाल काजल राघवानी ने सोशल मीडिया लाइव में निरहुआ के उस इंटरव्यू का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी मंशा यादव के लिए कहा था कि “प्यार नहीं करता, यह मेरा फर्ज है।” काजल ने कहा कि निरहुआ की पत्नी ने उनके मुश्किल दौर में साथ दिया। शादी के 20-25 साल बाद और बच्चे होने के बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं। काजल के मुताबिक, जो व्यक्ति अपनी ही पत्नी को अपने लायक नहीं समझता, वह एक अभिनेता या नेता के रूप में चाहे कितना भी बड़ा हो, इंसानियत और रिश्तों के मामले में एकदम खोखला है। भोजपुरी एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे। आम्रपाली को दिया जवाब, कहा- आपने सीधे हीरो पकड़ा आम्रपाली दुबे द्वारा कॉम्पिटिशन की बात कहे जाने पर काजल ने कहा कि दोनों के करियर की शुरुआत अलग रही है। काजल ने कहा कि आम्रपाली ने इंडस्ट्री में आते ही बड़े स्टार के साथ काम करना शुरू कर दिया था, जबकि उन्होंने खुद छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर अपनी पहचान बनाई है। काजल ने सेट के अनुशासन का जिक्र करते हुए कहा कि जब डायरेक्टर और पूरी टीम शॉट के लिए इंतजार करती थी, तब 4-4 असिस्टेंट डायरेक्टर्स को कलाकारों को बुलाने के लिए कमरे तक भेजना पड़ता था। अंग्रेजी बोलने पर तंज का दिया करारा जवाब अपनी पढ़ाई और अंग्रेजी को लेकर बन रहे मजाक पर काजल ने कहा कि उनके माता-पिता की जितनी क्षमता थी, उन्होंने उसी स्कूल में पढ़ाया। उन्हें अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी पर कोई शर्मिंदगी नहीं है। काजल ने कहा कि इंडस्ट्री में कई ऐसे बड़े स्टार्स हैं जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती। अगर किसी को बहुत अच्छी अंग्रेजी आती है, तो उसे विदेशों में जाकर काम करना चाहिए। जानिए क्या है भोजपुरी इंडस्ट्री का यह पूरा विवाद भोजपुरी इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से कलाकारों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। निरहुआ और आम्रपाली दुबे की जोड़ी पर अक्सर इंडस्ट्री में अन्य कलाकारों को काम न करने देने के आरोप लगते रहे हैं। काजल राघवानी ने पहले भी आरोप लगाया था कि निरहुआ उनके साथ काम नहीं करना चाहते। इसके जवाब में निरहुआ और आम्रपाली के बयानों के बाद अब काजल ने लाइव आकर अपनी बात रखी है। पवन सिंह, निरहुआ और तेज प्रताप यादव एक साथ इस शो में भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह, अभिनेता दिनेश लाल यादव (निरहुआ), आम्रपाली दुबे, काजल राघवानी और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक साथ नजर आ रहे हैं। शो का प्रसारण 2 अगस्त को जियो हॉटस्टार पर शुरू हो चुका है। ये खबर भी पढ़ें भोजपुरी एक्ट्रेसेज ने उड़ाया बॉलीवुड अभिनेत्रियों की सर्जरी का मजाक:कहा- हमारा सब कुछ नैचुरल, बॉलीवुड में होते तो बतख जैसे होंठ कराने पड़ते भोजपुरी एक्ट्रेसेज आम्रपाली दुबे और रानी चटर्जी ने बॉलीवुड अभिनेत्रियों के सर्जरी कराने का मजाक उड़ाया है। वे रियलिटी शो ‘भोजपुरी बवाल’ के सेट पर ये बातें करती नजर आईं। दैनिक भास्कर के पास इस बात बातचीत का अनकट वीडियो पहुंचा है। इसमें रानी चटर्जी, आम्रपाली दुबे और उनकी साथी एक्ट्रेस मेकअप रूम में बैठी नजर आ रही हैं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔






