अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था

अमेरिकी राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। दरअसल, शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर किया था। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पहले 500%टैरिफ का प्रस्ताव था 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। व्हाइट हाउस ने पहले भी रूस पर पाबंदियां लगाने की कोशिश की थी। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज बंद हुआ, तो तेल का संकट आ गया। इस वजह से अमेरिकी प्रशासन को तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए छूट देनी पड़ी थी। भारत ने जून में आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। अमेरिका के प्रतिबंध पूरे असरदार नहीं अमेरिका के प्रतिबंध और टैरिफ से कई देशों की अर्थव्यवस्था और कारोबार पर असर पड़ा, लेकिन राजनीतिक मकसद हमेशा पूरे नहीं हुए। 1. क्यूबा: 1960 से अमेरिका ने 1960 में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए। छह दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी ये प्रतिबंध क्यूबा की सरकार को बदलने में सफल नहीं हुए। क्यूबा ने 2023 में संयुक्त राष्ट्र में कहा कि इन प्रतिबंधों से उसे अब तक 159 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है। 2. इराक: 1990 से इराक पर 1990 में आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। इनका उसकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ा। तेल से होने वाली कमाई और जरूरी सामान के आयात पर असर पड़ा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रतिबंधों के दौरान भूख, बीमारी और गरीबी बढ़ने की बात कही गई। 3. ईरान: 2012 से 2012 में कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ईरान का तेल निर्यात करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया। उसकी अर्थव्यवस्था लगातार दो साल तक मंदी में रही। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2012-14 के दौरान प्रतिबंधों से ईरान के निर्यात को 17.1 अरब डॉलर, यानी उसकी GDP के करीब 4.5% का नुकसान हुआ। 4. चीन: 2018 से अमेरिका ने 2018 में चीन से आने वाले करीब 250 अरब डॉलर के सामान पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाया। 2019 में चीन से अमेरिका आने वाला सामान 16.2% घटकर 452.2 अरब डॉलर रह गया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 17.6% कम हुआ। लेकिन अमेरिकी व्यापार आयोग के मुताबिक, इन टैरिफ का ज्यादातर खर्च अमेरिकी कंपनियों और खरीदारों ने उठाया। 5. रूस: 2022 से यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और दूसरे देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इससे रूस के लिए विदेशों से पैसा जुटाना, कारोबार करना और जरूरी तकनीक हासिल करना मुश्किल हुआ। IMF ने अप्रैल 2022 में अनुमान लगाया था कि उस साल रूस की अर्थव्यवस्था 8.5% घट सकती है। लेकिन रूस ने तेल समेत अपना सामान दूसरे देशों में बेचकर नुकसान को कुछ कम कर लिया। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दावा- अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की बात झूठी:पड़ोसी देश की हरकतों पर भारतीय सेना की नजर; विदेश मंत्रालय बोला- अरुणाचल हमारा अटूट हिस्सा

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के सूत्रों ने दावा किया कि चीनी घुसपैठ की बातें झूठी हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने मंगलवार को कहा कि सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस लगातार चीन की हरकतों पर नजर रखे हुए है और सोशल मीडिया पर किए जा रहे घुसपैठ के दावे गलत हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट हिस्सा है। MEA ने यह बात चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को चीनी नाम देने की कोशिशों के बीच कही है। चीन अरुणाचल को ‘साउथ तिब्बत’ बताता रहा है ANI के मुताबिक, चीन अरुणाचल प्रदेश पर ‘साउथ तिब्बत’ के नाम से दावा करता रहा है। 1960 की सीमा वार्ता में चीन ने अरुणाचल प्रदेश की करीब 69,000 वर्ग किमी जमीन पर दावा किया था। भारत ने चीन के इस दावे को कई बार खारिज किया है। भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया था। इस पर चीन ने कहा कि भारत का अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को अपने मैप पर दिखाना गलत है। यह अमान्य’ है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता।
FSSAI Bans Plastic Packaging for Pan Masala & Gutkha

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक FSSAI यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है। नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ प्लास्टिक-मुक्त पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक कर बेच सकेंगी। FSSAI ने इस संबंध में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। 10 अगस्त को भारत के राजपत्र में प्रकाशित होते ही ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। पैकेजिंग रेगुलेशन में 3 बड़े बदलाव FSSAI ने कहा कि नया नोटिफिकेशन सिर्फ पैकेजिंग से जुड़े नियमों के लिए है। यानी सरकार ने पान मसाला प्रोडक्ट पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि इसके पैकेजिंग मटेरियल की लिस्ट में 3 बड़े बदलाव किए हैं… नया एंट्री शेड्यूल: साल 2018 के खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ‘पान मसाला’ को भी उस लिस्ट (शेड्यूल 4) में शामिल कर लिया गया है, जिसके लिए सरकार तय करती है कि सामान किस चीज में पैक होकर बिकेगा। प्लास्टिक और पॉलीथीन पूरी तरह बैन: गुटखे की पैकिंग में अब पॉलीथीन, पीवीसी (PVC), पॉलिस्टर या किसी भी तरह के नकली प्लास्टिक (सिंथेटिक पॉलीमर) और लैमिनेशन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जा सकेगा। अंदरूनी लेयर्स भी होंगी प्लास्टिक फ्री: अगर कोई कंपनी नियमों से बचने के लिए ऊपर से तो कागज की पैकिंग लगाती है, लेकिन पाउच के अंदर प्लास्टिक या चमकीली एल्युमिनियम लेयर (मैटेलाइज्ड लेयर) का इस्तेमाल करती है, तो उसे भी गैरकानूनी माना जाएगा। अंदर-बाहर दोनों तरफ से पैकिंग पूरी तरह प्लास्टिक-फ्री होनी चाहिए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या घटी, प्रति व्यक्ति एवरेज नुकसान बढ़ा सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सेबी के नए नियमों का बाजार पर सीधा असर दिखा। इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले यूनिक इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 98.10 लाख थी, जो 2025-26 में घटकर 78.60 लाख रह गई। हालांकि, कम निवेशकों के बाद भी प्रति व्यक्ति औसत नुकसान में मामूली बढ़त देखी गई है। FY26 में F&O में ट्रेड करने वाले हर व्यक्ति का औसत घाटा बढ़कर 1.16 लाख रुपए हो गया, जो FY25 में 1.14 लाख रुपए था। 1. सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाए कड़े कदम वित्त मंत्रालय ने बताया कि सेबी ने स्टॉक मार्केट में स्थिरता लाने और आम निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई रेगुलेटरी और सर्विलांस उपाय लागू किए हैं। इसमें सबसे पहले प्लेटफॉर्म पर रिस्क डिस्क्लोजर को अनिवार्य किया गया। अब जब भी कोई यूजर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करता है, तो ब्रोकर को यह चेतावनी दिखाना जरूरी है कि FY22 में F&O में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ था। 2. नवंबर 2024 से लागू हुए 7 बड़े बदलाव F&O सेगमेंट को मजबूत करने के लिए सेबी ने नवंबर 2024 के बाद से एक पूरा रोडमैप लागू किया था… वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को तार्किक बनाना। ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन टेल रिस्क कवरेज को बढ़ाना। इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज में बढ़ोतरी करना। मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को सही ढंग से व्यवस्थित करना। बायर्स से ऑप्शंस प्रीमियम का अग्रिम (अपफ्रंट) कलेक्शन सुनिश्चित करना। एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना। पोजीशन लिमिट्स की इंट्राडे मॉनिटरिंग लागू करना। 3. मई 2025 में सेबी ने लिए और भी कड़े फैसले मई 2025 में सेबी ने बाजार में जोखिम को और बेहतर ढंग से मॉनिटर करने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके तहत अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग-अलग डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिनों को स्ट्रीमलाइन किया गया। साथ ही पोजीशन लिमिट्स के लिए उपयुक्त रिस्क मैट्रिक्स लागू किए गए, जिससे F&O सेगमेंट में जोखिमों का खुलासा और उनकी निगरानी आसान हो सके। 4. F&O में STT से सरकार की कमाई बढ़कर ₹27,695 करोड़ हुई वित्त मंत्रालय ने बताया कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT को एक मॉडर्न और टेक्नोलॉजी-ऑपरेटेड कलेक्शन मैकेनिज्म के रूप में तैयार किया गया है। यह टैक्स सीधे रेगुलेटेड सिक्योरिटीज मार्केट के इंफ्रास्ट्रक्चर में एम्बेडेड यानी जुड़ा होता है। इससे टैक्स चोरी और लीकेज की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, F&O ट्रेड्स पर लगने वाले STT से सरकार का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27,695 करोड़ रुपए हो गया। यह FY25 के 22,225 करोड़ रुपए के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर FY22 से तुलना करें तो उस वक्त सालाना STT कलेक्शन महज 6,634 करोड़ रुपए था। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O? F&O यानी ‘फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस’ शेयर बाजार का एक डेरिवेटिव सेगमेंट है। इसमें निवेशक सीधे शेयर खरीदने के बजाय किसी शेयर या इंडेक्स जैसे- निफ्टी या सेंसेक्स के भविष्य के दाम पर दांव लगाते हैं। यह काफी जोखिम भरा यानी हाई-रिस्क ट्रेडिंग मॉडल होता है, जिसमें कम समय में भारी मुनाफा या बड़ा घाटा हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Jhalawar School Flood Rescue | Students Rescued From Manoharthana School

Hindi News Career Jhalawar School Flood Rescue | Students Rescued From Manoharthana School 4 मिनट पहले कॉपी लिंक झालावाड़ के एक गांव में बने सरकारी स्कूल में रोजाना की तरह कक्षाएं चल रही थीं। तब ही पास बहने वाले बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। कुछ ही देर में नाले का गंदा और तेज पानी स्कूल परिसर में घुसने लगा। देखते ही देखते पूरा स्कूल पानी से घिर गया और अंदर मौजूद बच्चों में चीख-पुकार मच गई। यह घटना झालावाड़ के मनोहरथाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टोडरी मीरा के झिकनी गांव की है। गांव वासियों की मदद से तकरीबन 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ये हालात तेज बारिश के बीच बच्चों को स्कूल से समय पर नहीं छोड़ने के चलते बने। टीचर्स और गांव वालों ने बच्चों को घर पहुंचाया बच्चों को सुरक्षित स्कूल ने निकालने के लिए स्कूल के 7 टीचर्स और ग्रामीणों ने साहस दिखाया और उन्हें बाहर निकाला। टीचर्स और गांव वालों की मदद से सभी बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। वहीं, नाले के तेज बहाव की चपेट में आने से स्कूल की करीब 50 फीट लंबी बाउंड्री टूट गई। चेन बनाकर तेज बहते पानी से निकाले बच्चे इस रेस्क्यू के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि बच्चों को अकेले बाहर निकालना खतरनाक था। इसलिए शिक्षकों और गांव वालों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लोगों की चेन बनाई। इसी के सहारे बच्चों को एक-एक करके तेज बहते पानी से बाहर निकाला गया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर नाराजगी जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा – ‘ये कोई झरना नहीं, झालावाड़ के सरकारी स्कूल की तस्वीर है। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करती है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं और जल निकासी तक नहीं है। यह शिक्षा व्यवस्था की बदहाली नहीं तो और क्या है?’ वहीं दूसरे यूजर ने लिखा – ‘पिछले साल जिन भवनों को जमीदोंज किया, अभी तक उनके बनाने के बारे में कोई योजना नहीं है न बजट की स्वीकृति। जबकि शिक्षा मंत्री जी ने उनके विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में बागेश्वर बाबा के लिए करोड़ो रुपये खर्च किये। इतने बजट में तो पूरी विधानसभा के स्कूलों का कायाकल्प हो जाता। इसी साल गिर चुकी है झालावाड़ के एक स्कूल की छत इसी साल जुलाई में झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से 7 छात्रों की मौत हो गई थी। जबकि 17 बच्चे घायल हुए थे। इसके बाद भी कुछ बच्चों के मलबे मे दबे होने की आशंका है। क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे। इस मामले में स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है। जानकारी के मुताबिक बच्चों के बार-बार कहने पर भी कि मलबा गिर रहा है, शिक्षकों ने ध्यान नहीं दिया. इसलिए उनके खिलाफ एक्शन लिया गया है। बता दें कि स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे। मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने लगे। छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो। ———— ये खबर भी पढ़ें… 180 छात्र हॉस्टल छोड़कर 12 किमी पैदल घर निकले: कमरों में ठूंसकर रखे गए, खाने में कीड़ों की शिकायत, प्रिंसिपल का हुआ ट्रांसफर ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
'मिर्जापुर द मूवी' का ट्रेलर रिलीज:मुन्ना भैया और बबलू पंडित की दमदार वापसी; 4 सितंबर को रिलीज होगी फिल्म

‘मिर्जापुर द मूवी’ का ऑफिशियल ट्रेलर मंगलवार (11 अगस्त) को जारी कर दिया गया है। ट्रेलर में मुन्ना भैया यानी दिव्येंदु शर्मा की दमदार वापसी दिखाई गई है। ट्रेलर में मिर्जापुर की सत्ता, बदले और खून-खराबे का नया अध्याय दिखाया गया है। इस फिल्म के जरिए बबलू पंडित के किरदार की भी वापसी हुई है। वेब सीरीज की सफलता के बाद अब यह फ्रैंचाइजी बड़े पर्दे पर आ रही है। यह फिल्म 4 सितंबर 2026 को हिंदी और तेलुगु भाषा में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है। बबलू पंडित के रोल में जितेंद्र कुमार वेब सीरीज में बबलू पंडित का किरदार निभाने वाले विक्रांत मैसी की जगह फिल्म में अभिनेता जितेंद्र कुमार यह रोल निभा रहे हैं। इससे पहले मेकर्स ने फिल्म के नए पोस्टर्स भी जारी किए थे। इनमें कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी), मुन्ना भैया (दिव्येंदु), गुड्डू पंडित (अली फजल) और बबलू पंडित (जितेंद्र कुमार) का जबरदस्त लुक दिखाया गया है। 4 सितंबर को थिएटर्स में लगेगी फिल्म ट्रेलर के साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की भी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। इसे हिंदी के साथ-साथ तेलुगु भाषा में भी पैन-इंडिया लेवल पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे पहले मेकर्स ने चार कैरेक्टर पोस्टर जारी किए थे, जिन्होंने ट्रेलर को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी थी। रवि किशन और अभिषेक बनर्जी समेत दिखेगी बड़ी स्टारकास्ट फिल्म में मुख्य किरदारों के अलावा एक बड़ी स्टारकास्ट शामिल है। इसमें रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुगल, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, प्रमोद पाठक, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता शेखर गौड़, श्वेता त्रिपाठी, सोनल एस. चौहान, अनंग्शा बिस्वास, शाजी चौधरी, सत्येंद्र सोनी, कुलभूषण खरबंदा और सुशांत सिंह नजर आ रहे हैं। फिल्म को पुनीत कृष्णा ने लिखा है, जबकि रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर (एक्सेल एंटरटेनमेंट) ने इसे प्रोड्यूस किया है।
Dehradun NIEPVD Protest | Blind Students Alleged Assault Hunger Strike

राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून में दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं बीते पांच दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ये बच्चे अच्छी शिक्षा, शिक्षक और किताबों जैसी सुविधाओं को लेकर सिस्टम के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। . 10 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में छात्रों ने संस्थान में हो रहे बुरे बर्ताव और शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक छात्रा के अनुसार, अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए अलग-अलग देखभाल और स्पेशल स्टाफ की जरूरत है, लेकिन ऐसी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों को चोट पहुंचाई जाती है और लात-घूंसों से मारपीट की जाती है। स्कॉलरशिप दोबारा शुरू करने की मांग देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए 12वीं के बाद सरकार से मिलने वाली स्कॉलरशिप भी बंद कर दी गई है, जिससे काफी मदद मिलती थी। ये स्कॉलरशिप फिर से शुरू की जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि अगर समय रहते उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्हें मजूबरन भूख हड़ताल पर बैठना पड़ेगा। देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में दृष्टिबाधित छात्र सस्ती किताबों की मांग भी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी है। NIEPVD का देहरादून मॉडल स्कूल नर्सरी से कक्षा 12वीं तक दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा देता है। इस समय वहां 247 बच्चे पढ़ रहे हैं। छात्राओं ने बताया कि संस्थान में किताबों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और स्थायी निदेशक जैसी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डिस्पेंसरी में उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और छात्रावास के खाने की क्वालिटी लगातार खराब बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, किताबों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी छात्र परेशान हैं। मल्टी डिसेबल बच्चों के लिए अलग यूनिट नहीं प्रदर्शन में शामिल एक दिव्यांग छात्रा ने कहा कि इस बार मल्टी डिसेबल बच्चों को एडमिशन दिया गया है। उनकी केयर करने के लिए अलग से कोई यूनिट नहीं है। एक दूसरी छात्रा ने कहा – इन बच्चों के लिए अलग टीचर होता है, गाइड करने वाले अगल होते हैं लेकिन जो टीचर यहां आए हैं, वो बच्चो को चोट पहुंचा रहे हैं। बच्चों के साथ मारपीट तक हो रही है। लात-घूसे मारे जाते हैं। यहां अलग डिसेबिलिटी वाले बच्चे बहुत परेशान हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स इन छात्रों का समर्थन करते हुए अपनी राय दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा – दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आंदोलन और भूख हड़ताल की नौबत आना किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। मंत्रालय और संस्थान को तुरंत बातचीत कर उनकी जायज मांगों का समाधान करना चाहिए। अधिकार मांगना अपराध नहीं है। छात्रा ने बताया कि इस संस्थान के छात्र काफी पहले से सुविधाओं की मांग कर रहे थे। लिखित में भी रिक्वेस्ट की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के बाद छात्रों ने प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है। हालांकि, प्रदर्शन के बाद कुछ चीजें ठीक हुई हैं, लेकिन अब भी बहुत सारी चीजों में सुधार की जरूरत है। छात्रों ने 6 प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक उन्हें प्रशासन से कोई समाधान नहीं मिला है। मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र भूख हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। 26 अप्रैल 2023 को खराब मोबाइल का किया विरोध NIEPVD के कक्षा 12वीं के छात्रों ने ADIP योजना के तहत मिले मोबाइल खराब होने को लेकर विरोध किया। छात्रों के अनुसार नवंबर 2020 में उन्हें जो फोन दिए गए थे, मार्च 2021 से उसमें तकनीकी समस्याएं आने लगीं। छात्रों ने कई बार शिकायत की। दिसंबर 2021 में अधिकारियों ने नए फोन देने का आश्वासन दिया। नवंबर 2022 में फिर CSR फंड से नए फोन देने की बात कही गई। लेकिन अप्रैल 2023 तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ये खबर भी पढ़ें 180 छात्र हॉस्टल छोड़कर 12 किमी पैदल घर निकले:कमरों में ठूंसकर रखे गए, खाने में कीड़ों की शिकायत, प्रिंसिपल का हुआ ट्रांसफर ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। पूरी खबर यहां पढ़ें
हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला:2 पाकिस्तानी समेत 3 की मौत; रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया

यमनी सरकार से जुड़े मीडिया के मुताबिक, ईरान समर्थित हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में एक जहाज पर हमला किया। इस हमले में तीन क्रू मेंबर मारे गए, जिनमें दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक था। यमनी सरकार समर्थित मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अल-जुम्हूरिया टीवी ने बताया कि यमन के हूतियों के हमले में दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत हुई है। जहाज का नाम नहीं बताया गया अल-जुम्हूरिया टीवी ने हमले में निशाना बनाए गए जहाज का नाम नहीं बताया। ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए के मुताबिक, यह सऊदी जहाज था और उसे मिसाइल से निशाना बनाया गया। सऊदी अरब की नाकाबंदी का ऐलान करने के बाद हूती संगठन उसके आसपास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर हमले कर रहा है। संगठन ने सऊदी अरब के अंदर भी हमले किए हैं। इन हमलों का केंद्र बाब अल-मंदेब स्ट्रेटरहा है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर असर हूतियों के हमलों से सऊदी अरब का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। समुद्री यातायात पर भी असर पड़ा है, जिसके चलते जहाज सुरक्षा कारणों से लाल सागर और स्वेज नहर से बच रहे हैं। अब जहाज पश्चिमी देशों तक पहुंचने के लिए अफ्रीका के चारों ओर से जा रहे हैं। इससे सामान की डिलीवरी धीमी हो रही है, सामान की कमी बढ़ रही है, सप्लाई लाइन का संकट बन रहा है और रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है। यमन में ईरान और सऊदी अरब आमने-सामने ईरान और सऊदी अरब यमन में छद्म युद्ध लड़ रहे हैं। दोनों देश वहां विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि ईरान हूतियों के साथ है। हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है। हूतियों ने 2023 और 2024 में भी लाल सागर में नियमित रूप से जहाजों पर हमले किए थे। इससे समुद्री यातायात पर असर पड़ा था। इस समय हूतियों के हमलों का असर इसलिए ज्यादा महसूस हो रहा है, क्योंकि दुनिया पहले से ही होर्मुज स्ट्रेटके बंद होने से जूझ रही है। होर्मुज और स्वेज नहर में यातायात धीमा ईरान जहाजों को होर्मुज स्ट्रेटसे गुजरने की अनुमति नहीं दे रहा है। वहीं, हूती संगठन अब लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर रहा है। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की आवाजाही होर्मुज स्ट्रेटसे होती है। लाल सागर में मौजूद स्वेज नहर पूर्वी गोलार्ध को पश्चिमी गोलार्ध से जोड़ती है। अब दोनों जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही बहुत धीमी हो गई है।
हाईटेक चीन में ‘मान्यताओं’ से तय होते करोड़ों के प्रोजेक्ट:सरकारी से लेकर सैन्य अफसर तक परंपराओं में उलझे; सैकड़ों, हाईवे-पुल प्रभावित

चीन की युआनयांग में नए औद्योगिक पार्क और उससे जुड़ने वाले फोर-लेन हाईवे की योजना मंजूर हो चुकी थी। इंजीनियर नक्शे व बजट को अंतिम रूप दे चुके थे, पर शिलान्यास से पहले ताओवादी फेंग शुई मास्टर ने दावा किया कि प्रस्तावित मार्ग की उत्तर-पूर्व दिशा ली वेई की जन्मतिथि के अनुसार अशुभ है और इससे करिअर प्रभावित हो सकता है। इसके बाद वेई ने हाईवे का रूट बदलवा दिया। इसके लिए अतिरिक्त जमीन लेनी पड़ी। प्रोजेक्ट 14 महीने लेट हुआ और 21 करोड़ रुपए लागत बढ़ गई। इसी तरह जियांग्शी प्रांत में पुल का निर्माण 20% हो चुका था। इसी दौरान अधिकारी झेंग गुआंगझोउ ने फेंग शुई सलाहकार से परामर्श लिया। सलाहकार ने दावा किया कि पुल का पिलर क्षेत्र की कथित ‘ड्रैगन वेंस’ (प्राकृतिक ऊर्जा) को काट रहा है, जिससे झेंग को जेल हो सकती है। उन्होंने निर्माण रुकवा दिया और पिलर 50 मीटर आगे बढ़वा दिया। पहले से बने पिलर भी तोड़ने पड़े। प्रोजेक्ट दो साल तक अटका रहा और 29 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। चीन में फेंग शुई और कई मान्यताएं सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रशासनिक फैसलों और प्रोजेक्ट को भी प्रभावित कर रही है। दिलचस्प यह है कि इन मान्यताओं का खुलकर विरोध करने वाली ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ के अफसर और मेयर ही इनके घोर समर्थक बने हुए हैं। वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट के अनुसार इन मान्यताओं के कारण बीते एक दशक में सैकड़ों हाईवे, पुल व औद्योगिक पार्क प्रभावित हुए। नक्शे बदलने व तोड़-फोड़ से प्रोजेक्ट्स 3 से 4 साल लेट हुए। एक ही मामले में 23 में से 16 बड़े प्रोजेक्ट बीच में ही रद्द या ठप कर दिए गए। सेना को ऑडिट कराना पड़ा – चीन की सबसे संवेदनशील रॉकेट फोर्स और रक्षा तंत्र में हुई बड़ी कार्रवाई के पीछे भ्रष्टाचार के अलावा इन पारंपरिक मान्यताओं को भी बड़ी वजह बताया गया। जांच में पता चला कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी आधुनिक सैन्य जरूरतों के बजाय ताओवादी भविष्यवाणियों (ताओ धर्म की विद्या के आधार पर अनुमान) प्राचीन ग्रंथों और गणनाओं के आधार पर फैसले ले रहे थे। इनके चलते कई रक्षा प्रोजेक्ट्स व रणनीतिक ढांचों की मंजूरी में महीनों की देरी हुई। हालात इतने गंभीर हो गए कि 2023-24 में चीन को रक्षा बजट और प्रमुख प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराना पड़ा। ‘अशुभ दिशा’ मानकर निवेश कम, जीडीपी औसतन 2.3% कम बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2000 से 2018 के बीच 300 चीनी मेयरों की जन्मतिथियों व उनकी कथित ‘अशुभ’ दिशाओं की स्टडी की। ताकि पता चल सके कि वे जन्मतिथि व मान्यताओं के आधार पर किस तरह फैसले लेते हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिन क्षेत्रों को मेयर अशुभ दिशा में मानते थे, वहां कम निवेश करते थे। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा और उन जिलों की जीडीपी औसतन 2.3% कम रही। रोजगार व निजी निवेश भी घटे। इससे चीन को हर साल कुल जीडीपी का 0.1% का घाटा हुआ। दस साल में यह नुकसान 15 लाख करोड़ रु. रहा।
कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें:5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके

कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? RBI के नए डिस्क्लोजर नियमों और केएफएस यानी की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स के तहत अब ग्राहकों को लोन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी लोग बिना सोचे-समझे साइन कर देते हैं। सवाल-जवाब में जानिए वे गलतियां जो आपकी कार को बेवजह महंगी बना देती हैं और इनसे कैसे बचा जाए… सवाल: कार लोन लेते समय खरीदार सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं? जवाब: कार फाइनेंस कराते समय सबसे आम गलती यह होती है कि खरीदार लोन की कुल लागत देखने के बजाय केवल मंथली EMI देखकर बजट तय करते हैं। उदाहरण के लिए ₹15,000 की EMI सुनने में आसान लग सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कितने साल तक चुकाएंगे। लोन की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 या 7 साल करने पर आपकी हर महीने की किस्त तो कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज की रकम कई गुना बढ़ जाएगी। डीलर की दिखाई गई EMI पर तुरंत हां करने के बजाय, हमेशा यह कैलकुलेट करें कि लोन के आखिरी में आप कुल कितना पैसा बैंक को वापस कर रहे हैं। सवाल: डीलर जो पहला लोन ऑफर दे, उसे ही स्वीकार कर लेना नुकसानदेह क्यों है? जवाब: कार शोरूम में सुविधा के नाम पर डीलर जिस बैंक या NBFC का लोन ऑफर दिखाता है, लोग बिना तुलना किए उसे मान लेते हैं। डीलर के पास कई बैंकों के टाई-अप होते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि पहला ऑफर आपके लिए सबसे सस्ता हो। अलग-अलग बैंकों और NBFCs की ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज में अंतर होता है। RBI के नियमों के अनुसार, बैंकों को लोन की ऑल-इन कॉस्ट यानी कुल लागत पारदर्शी रूप से बतानी होती है। ब्याज दर में महज 0.5% से 1% का अंतर भी 5 साल के लोन में आपके हजारों रुपए बचा सकता है। सवाल: कम डाउन पेमेंट करने से क्या नुकसान होता है? जवाब: शुरुआत में कम डाउन पेमेंट करना काफी आकर्षक लगता है, क्योंकि बैंक खाते में ज्यादा नकदी बची रहती है। लेकिन डाउन पेमेंट कम होने का सीधा मतलब है- बड़ा लोन। लोन की रकम जितनी ज्यादा होगी, आपको उतना ही ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा और आपकी EMI भी बड़ी होगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपना सारा इमरजेंसी फंड खत्म न करें। एक सही बैलेंस बनाएं, जहां आपका लोन भी छोटा रहे और आपकी बचत और सिक्योरिटी फंड भी बरकरार रहे। सवाल: कार लोन के हिडन चार्जेस और फाइन प्रिंट में क्या देखना चाहिए? जवाब: ज्यादातर खरीदार सिर्फ ब्याज दर यानी इंटरेस्ट रेट पर ध्यान देते हैं और बाकी पेपर्स को बिना पढ़े साइन कर देते हैं। प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, इंश्योरेंस-लिंक्ड कॉस्ट और समय से पहले लोन बंद करने के चार्ज (प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्जेस) लोन को महंगा बना देते हैं। आरबीआई के नए नियमों के तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को की-फैक्ट्स स्टेटमेंट यानी KFS के जरिए सभी लागू चार्ज और पेनल्टी चार्ज की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होती है। लोन फाइनल करने से पहले बैंक से पूरे फी-शेड्यूल की लिखित कॉपी जरूर मांगें। सवाल: लोन लेने से पहले प्री-पेमेंट और फोरक्लोजर नियमों को जानना क्यों जरूरी है? जवाब: कार खरीदने के 1 या 2 साल बाद आपकी वित्तीय स्थिति बदल सकती है। आपको इंसेंटिव, बोनस या सैलरी हाइक मिल सकता है और आप अपना लोन जल्दी खत्म करना चाह सकते हैं। अगर आपने पहले से लोन एग्रीमेंट नहीं जांचा है, तो पार्ट-पेमेंट या प्री-क्लोजर पर बैंक भारी पेनल्टी लगा सकते हैं। फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट लोन के नियम अलग-अलग होते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले ही जान लें कि पेनल्टी-फ्री प्री-पेमेंट का विकल्प उपलब्ध है या नहीं। सवाल: क्या कार की कुल लागत में सिर्फ कार की कीमत और लोन का ब्याज ही शामिल होता है? जवाब: नहीं, यही दूसरी सबसे बड़ी गलतफहमी है। कार का वास्तविक खर्च केवल EMI और ऑन-रोड प्राइस तक सीमित नहीं होता। जब आप फाइनेंस पर कार लेते हैं, तो आपकी जेब पर EMI के अलावा इंश्योरेंस, फ्यूल का खर्च, रूटीन मेंटेनेंस, सर्विसिंग, और अचानक आने वाले रिपेयर खर्च का भी बोझ पड़ता है। अगर आपकी EMI आपके टेक-होम पे का बहुत बड़ा हिस्सा ले लेती है, तो अन्य जरूरी खर्चों और निवेश के लिए पैसे कम पड़ जाएंगे। सवाल: RBI का डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क खरीदारों की मदद कैसे करता है? जवाब: RBI ने ग्राहकों को पारदर्शिता देने के लिए की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS) और डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत बैंकों को लोन की एनुअल परसेंटेज रेट (APR), कुल ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और सभी हिडन चार्ज एक ही पेज पर स्पष्ट भाषा में लिखकर देने होते हैं। इस नियम का मकसद खरीदार को लोन के सभी वित्तीय पहलुओं से रूबरू कराना है ताकि वह सोच-समझकर फैसला ले सके। हालांकि, जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी अलग-अलग ऑफर्स की तुलना करना खुद खरीदार की जिम्मेदारी है। क्या होता है की-फैक्ट्स स्टेटमेंट्स (KFS)? KFS एक ऐसा दस्तावेज है जो बैंक या लोन देने वाली संस्था को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को देना अनिवार्य होता है। इसमें एक ही जगह पर लोन की रकम, ब्याज दर, एनुअल परसेंटेज रेट (APR), प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट पेनल्टी और प्री-पेमेंट चार्ज लिखे होते हैं। इसे पढ़कर आप तुरंत समझ सकते हैं कि आपका लोन वास्तव में कितना महंगा है।







