Saturday, 22 Aug 2026 | 12:44 PM

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दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…

ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर

ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की लॉ ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ‘डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ (D.Litt.) की मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया है। स्टेज पर यह सम्मान लेते व्यक्त रानी मुखर्जी भावुक दिखाई दीं। मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वेयर में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) 2026 के दौरान 14 अगस्त को आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। उन्हें तीन दशक के करियर और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में योगदान के लिए रानी को यह सर्वोच्च उपाधि मिली है। वे शाहरुख खान के बाद ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार बन गई हैं। शाहरुख के बाद सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने इससे पहले साल 2019 में शाहरुख खान को सिनेमा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट दी थी और उनके नाम पर पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा की थी। यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉन ब्रम्बी एओ ने कहा कि रानी मुखर्जी के काम ने सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे विषयों पर चर्चा शुरू की है। यूनिवर्सिटी ने महिलाओं, बच्चों और वंचित समुदायों के लिए उनके निरंतर काम की सराहना की। शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने: रानी मुखर्जी समारोह में सम्मान स्वीकार करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे विनम्र और भावुक पलों में से एक है। बचपन में वे अपने माता-पिता और देश को गौरवान्वित करना चाहती थीं और सिनेमा उस सपने को पूरा करने का माध्यम बन गया। रानी ने बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने हैं। वे हमेशा ऐसी कहानियों का हिस्सा बनीं, जिन्होंने सबसे पहले उनके दिल को छुआ और लोगों को प्रेरित किया। एक्टिंग में एक्सीलेंस के लिए भी विशेष सम्मान आईएफएफएम 2026 में रानी मुखर्जी को उनकी बेहतरीन एक्टिंग और वैश्विक पहचान के लिए एक विशेष प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा कि यह सम्मान रानी की कला और सिनेमा की उस ताकत का जश्न है जो दो देशों को जोड़ती है। 13 से 23 अगस्त तक चलने वाले इस फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों और कहानियों के प्रभाव को दिखाया जा रहा है। तीन दशक का करियर और सामाजिक मुद्दों पर फिल्में रानी मुखर्जी ने 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने ‘गुलाम’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’, ‘बंटी और बबली’ और ‘युवा’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘ब्लैक’, ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘हिचकी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ जैसी फिल्मों के जरिए लैंगिक न्याय, महिलाओं के अधिकार, दिव्यांगों के समावेश और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को बड़े पर्दे पर मजबूती से रखा।

सर्वे- भारत-पाक एक-दूसरे को सबसे बड़ा खतरा मान रहे:दोनों देशों में अच्छे रिश्ते की उम्मीद, लेकिन भरोसा नहीं; रूस और चीन को सहयोगी माना

सर्वे- भारत-पाक एक-दूसरे को सबसे बड़ा खतरा मान रहे:दोनों देशों में अच्छे रिश्ते की उम्मीद, लेकिन भरोसा नहीं; रूस और चीन को सहयोगी माना

अमेरिका के थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के नए सर्वे में भारत और पाकिस्तान के लोगों की सोच में गहरा अंतर सामने आया है। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को अपना सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। सर्वे के मुताबिक, दोनों देशों के लोग अपने पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं मानते कि दूसरा देश भी रिश्ते सुधारना चाहता है। भारत में 36% लोगों ने रूस को अपना सबसे जरूरी सहयोगी बताया। अमेरिका को 16% लोगों ने चुना। वहीं, पाकिस्तान में 75% लोगों ने चीन को अपना बड़ा सहयोगी माना। 12% ने सऊदी अरब को देश का दोस्त बताया। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान पर पॉजिटिव राय रखी प्यू के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पाकिस्तान को लेकर नेगेटिव सोच कोई नई बात नहीं है। हालांकि, भारत के अलग-अलग समुदायों में राय एक जैसी नहीं है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के बारे में पॉजिटिव राय जताई। हिंदुओं में यह आंकड़ा 6% रहा। खतरे के सवाल पर भी अंतर दिखा। 34% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा बताया, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57% था। दूसरी ओर, सर्वे में करीब 10 में 9 पाकिस्तानियों की भारत को लेकर सोच नेगेटिव है। भारत को लेकर यह नेगेटिव सोच पाकिस्तान के अलग-अलग सोशल ग्रुप्स में ज्यादा दिखाई दिया है। पहलगाम हमले के बाद रिश्ते और बिगड़े सर्वे में भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भी जिक्र है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। इसके बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। सिंधु जल संधि से जुड़ा विवाद पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है। पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। भारतीय रूस और पाकिस्तानी चीन को सहयोगी मान रहा अमेरिका रूस चीन भारत की विदेश नीति किसी एक देश के साथ नहीं जुड़ी सर्वे से भारत की विदेश नीति की एक और अहम बात सामने आती है। भारत में किसी एक विदेशी देश को लेकर पाकिस्तान जैसी एकतरफा मजबूत पसंद नहीं दिखती। भारत की विदेश नीति में कई बड़े देशों के साथ एक साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश दिखाई देती है। भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश कई मुद्दों पर साथ भी काम करते हैं। इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मल्टी-अलाइनमेंट की नीति से जोड़कर देखा जा सकता है। यानी भारत किसी एक बड़े देश के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। ——————- पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे: कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

RPSC Assistant Professor Recruitment 2026

RPSC Assistant Professor Recruitment 2026

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 को लेकर चल रहा कानूनी विवाद शुक्रवार को समाप्त हो गया, इसे लेकर अब पूरी तरह से रास्ता साफ हो गया है। . जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ में धर्मवीर मीणा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली है। इसके बाद 922 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया के आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है। आयोग की ओर से अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाबदावा पेश किया। इसमें याचिकाकर्ता की ओर से गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए उनके खिलाफ शास्ति (जुर्माना) लगाए जाने की मांग की गई। इसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रिट याचिका वापस ले ली। आयोग के अनुसार, याचिका वापस लिए जाने के साथ ही कॉलेज शिक्षा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है और भर्ती का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। भर्ती और इंटरव्यू प्रक्रिया नहीं रुकी 30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ की ओर से दिए गए अंतरिम आदेश के बावजूद आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया। आयोग की ओर से इस भर्ती के तहत इंटरव्यू के लिए सफल अभ्यर्थियों के परिणाम लगातार जारी किए गए और भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया जारी रखी गई। आयोग ने गलत तथ्य रखने का उठाया मुद्दा मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। आयोग ने न्यायालय से आग्रह किया कि गलत तथ्य प्रस्तुत करने और बिना आधार के कोर्ट का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के कारण याचिकाकर्ता पर शास्ति(जुर्माना) लगाई जाए। 574 पदों के विज्ञापन के बाद बढ़कर 922 हुए पद यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026, धर्मवीर मीणा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य से जुड़ा था। 30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद आयोग ने अंतरिम आदेश को निरस्त करवाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत स्टे वेकेशन एप्लीकेशन और जवाबदावा पेश किया। आयोग ने न्यायालय को बताया कि याचिका और स्टे एप्लीकेशन में बताए गए तथ्य पूरी तरह भ्रामक हैं। आयोग के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2025 का विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि कार्मिक विभाग की अधिसूचना 21 जुलाई 2025 को जारी की जा चुकी थी। कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के अनुसार, सेवा नियमों में संशोधन कर अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई थी। ऐसे में 574 पदों के मूल विज्ञापन के विरुद्ध 348 पदों की वृद्धि कर कुल 922 पद किए जाने के लिए 13 मई 2026 को जारी शुद्धि पत्र और भर्ती में की गई पदों की वृद्धि नियमानुसार थी। तथ्य सामने आने के बाद याचिका वापस आयोग के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष भर्ती से जुड़े तथ्यों और नियमों को विस्तार से रखा। आयोग के अनुसार, इसके बाद याचिकाकर्ता के पास याचिका जारी रखने का कोई वैधानिक आधार नहीं बचा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए तत्काल रिट याचिका वापस ले ली। एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली भर्ती में पहले ही कैविएट भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को कानूनी विवाद के कारण अचानक बाधित होने से बचाने के लिए आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देश पर निर्णय लिया गया है कि एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों के मामलों में आयोग की ओर से संबंधित न्यायालय में पहले ही कैविएट दायर की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी स्तर पर बिना आयोग का पक्ष सुने भर्ती प्रक्रिया पर एकतरफा आदेश के कारण अनावश्यक रोक न लगे। करीब 3000 न्यायिक मामलों की व्यक्तिगत निगरानी आयोग के अनुसार, वर्तमान में उसके करीब 3000 न्यायिक प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। इनके तुरंत और समुचित निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह प्रत्येक मामले को आयोग की लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से डिस्कस कर रहे हैं। इससे न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

Delhi Agniveer Reservation | Fire Service Jail Recruitment Job News

Delhi Agniveer Reservation | Fire Service Jail Recruitment Job News

Hindi News Career Delhi Agniveer Reservation | Fire Service Jail Recruitment Job News 8 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने पूर्व अग्निवीरों को राहत देते हुए दिल्ली सरकार के 2 प्रमुख विभागों में सीधी भर्ती के दौरान 20% आरक्षण देने का फैसला मंजूर कर लिया है। यह निर्णय भारत सरकार की तरफ से पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए बनाई गई नीति के तहत लिया गया है। दिल्ली गृह विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस फैसले से न केवल युवाओं को सेना से आने के बाद दिल्ली में स्थायी सरकारी नौकरी मिलेगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में उम्र सीमा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में भी विशेष छूट मिलेगी। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत उपराज्यपाल ने भर्ती नियमों में यह प्रावधान दिया है। संबंधित विभाग तय करेंगे PET में छूट पूर्व अग्निवीरों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में कितनी छूट दी जाएगी, इसका फैसला संबंधित विभाग खुद तय करेंगे। अगर किसी भर्ती में योग्य अग्निवीर पर्याप्त संख्या में नहीं मिलते हैं तो भारत सरकार की हॉरिजॉन्टल आरक्षण गाइडलाइंस के अनुसार उन सीटों को भरा जाएगा। CAPF में 50% आरक्षण की घोषणा पिछले महीने ही केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (GD) और राइफलमैन (GD) के पदों पर 50% आरक्षण देने की घोषणा की थी। इसके साथ ही कई राज्य सरकारों जैसे हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने अपनी पुलिस व अन्य सुरक्षा सेवाओं में भी अग्निवीरों के लिए विशेष आरक्षण और आयु सीमा में छूट की घोषणा की है। गृह मंत्रालय के अनुसार, पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से भी छूट दी जाएगी। यानी उनकी भर्ती प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया गया है। गृह मंत्रालय में बनाया गया ‘स्पेशल विंग’ पूर्व अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने एक्स-अग्निवीर विंग की भी स्थापना की है। यह विंग विभिन्न सुरक्षा बलों में उनकी नियुक्ति और अन्य अवसरों के लिए को ऑर्डिनेशन का काम करेगा। हरियाणा में पूर्व अग्निवीरों के लिए ग्रुप – B में 1%, ग्रुप-C में 5% और पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में 20% आरक्षण का प्रावधान है। कार्यकाल पूरा होने से पहले ही घोषणा ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भर्ती किए गए पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल इस साल के अंत तक पूरा होगा। सरकार ने उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए पहले से ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और असम राइफल्स में रोजगार का रास्ता तैयार कर दिया है। ये खबर भी पढ़ें… SBI में 9124 पदों पर निकली भर्ती: सैलरी 64 हजार के साथ अलाउंस भी मिलेंगे, ग्रेजुएट्स करें अप्लाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 9000 से अधिक पदों पर जूनियर एसोसिएट्स यानी क्लर्क की वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

'बेटी की उम्र की लड़की के साथ घूम रहा है':शर्म आनी चाहिए, शुगर डैडी बन गया; गोविंदा पर भड़कीं पत्नी सुनीता आहूजा

'बेटी की उम्र की लड़की के साथ घूम रहा है':शर्म आनी चाहिए, शुगर डैडी बन गया; गोविंदा पर भड़कीं पत्नी सुनीता आहूजा

अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा ने अपने पति पर तीखा हमला बोला है। सुनीता ने गोविंदा के एक्ट्रेस कोमल रॉय के साथ एयरपोर्ट पर दिखने पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनीता ने कहा कि गोविंदा को बेटी की उम्र की लड़की के साथ इस तरह घूमने पर थोड़ी शर्म आनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कोमल के कपड़ों पर भी तंज कसा। सुनीता ने कहा कि बिना फिल्म बने कोई प्रमोशन नहीं होता, यह सब घटिया सोच को दिखाता है। ‘बेटी की उम्र की लड़की को लेकर घूम रहा है’ सुनीता से गोविंदा के कोमल रॉय के साथ दोबारा नजर आने पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कड़े शब्दों में जवाब दिया। सुनीता ने कहा कि फिल्म बनने के बाद ही उसका प्रमोशन किया जाता है, बिना किसी फिल्म के यह सब करने का क्या मतलब है। इसके बाद उन्होंने आगे कहा कि गोविंदा अपनी बेटी की उम्र की लड़की को लेकर घूम रहे हैं और उन्हें इस बात पर थोड़ी शर्म आनी चाहिए। तुम्हारा शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कपड़े ढंग के पहनो सुनीता आहूजा ने केवल गोविंदा ही नहीं, बल्कि उनके साथ दिख रही कोमल के ड्रेसिंग सेंस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर सामने वाले का शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कम से कम कपड़े तो ढंग के पहनने चाहिए। इंसान का अपना एक स्टैंडर्ड होना चाहिए। सुनीता ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिए कि वे किस तरह स्टाइल के साथ रहते हैं। उन्होंने पूरे वाकये को बहुत खराब और घटिया सोच करार दिया। को-एक्ट्रेस के साथ गोविंदा स्पॉट हुए थे गोविंदा हाल ही में एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एयरपोर्ट पर दूसरी बार स्पॉट हुए थे। बता दें कि सुनीता ने कुछ समय पहले ही कहा था कि उन्हें कोमल नाम से नफरत है। गोविंदा को एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ 7 अगस्त को एयरपोर्ट पर एक साथ स्पॉट किया गया था। सुनीता ने मिस मालिनी को दिए इंटरव्यू में गोविंदा के अफेयर रूमर्स पर बात करते हुए कहा था कि जवानी में गलतियां होती हैं, लेकिन 63 की उम्र में ये सब सुनना ठीक नहीं है। करियर के चलते गोविंदा ने सुनीता से शादी को लगभग दो साल तक दुनिया से छिपाकर रखा था। सुनीता ने कहा था, ‘ये नाम थोड़ा गड़बड़ है। मुझे कोमल नाम से नफरत है। एक है कोमल, एक्स वाय जेड है कोई। मुझे उससे नफरत है।’ गोविंदा के साथ बॉलीवुड डेब्यू करने वाली हैं कोमल गोविंदा 7 साल बाद बॉलीवुड कमबैक कर रहे हैं और अपने प्रोडक्शन की इस फिल्म से कोमल को भी लॉन्च कर रहे हैं। सिर्फ यही नहीं कोमल के गोविंदा की दूसरी फिल्म दुनियादारी में होने की भी खबरें हैं। गोविंदा ने जुलाई में अपकमिंग फिल्म रूपा से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोमल का मीडिया से परिचय करवाया और तारीफ कर कहा कि फिल्म देखने के बाद दर्शक उन्हें अच्छी एक्ट्रेस मानेंगे। गोविंदा ने हाल ही में सुनीता के उन आरोपों पर जवाब दिया, जिनमें उन्होंने उनके अफेयर्स की बात कही थी। सुनीता के लगाए हुए अफेयर के आरोपों पर ANI से बातचीत में गोविंदा ने कहा, वह मुझे बहुत प्यार से गाली देती हैं और मैं उनके हाथ से खाता भी हूं। मुझे लगता है कि जो लोग जहां हैं और भगवान ने उन्हें जो भी भूमिका दी है, अगर वो वहां नहीं होते हम कामयाब नहीं हो सकते थे। गोविंदा बोले- दूरी बनाने के लिए आरोप लगाना जरूरी नहीं गोविंदा ने इशारा किया कि उनके बारे में खुलकर बोलने के बाद सुनीता को स्टारडम मिला। उन्होंने कहा, बहुत सी बातें ऐसी होती हैं, जो बयां नहीं की जातीं। क्या दूरी बनाने के लिए आरोप लगाने की जरूरत है क्या? लेकिन लोग मानते हैं कि ये निकलने का आसान रास्ता है। उन्होंने सवाल किया कि कामयाबी के लिए अपने ही लोगों की बुराई जरूरी है क्या? यह थोड़ा आसान है। सुनीता तारीफ करती है फिर एक बुराई करती है। मुझे इसमें ज्यादा प्यार दिखाई देता है। सुनीता ने कहा था- गोविंदा के कई अफेयर्स रहे सुनीता आहूजा हाल ही में शो ‘लॉक अप 2’ की कंटेस्टेंट बनी थीं। शो के दौरान उन्होंने गोविंदा के कथित अफेयर्स पर बात की थी। उन्होंने कहा था, “प्यार में आपको हर चीज सहन करने में सक्षम होना चाहिए। चीची (गोविंदा) के जवानी में कई अफेयर्स रहे हैं। तब मैंने नजरअंदाज किया था, लेकिन अब नहीं करूंगी।” 1987 में हुई थी गोविंदा और सुनीता की शादी गोविंदा और सुनीता आहूजा ने 1987 में एक प्राइवेट समारोह में शादी की थी। उस समय गोविंदा बॉलीवुड स्टार बन चुके थे। दोनों ने गोविंदा के करियर के लिए करीब दो साल तक अपनी शादी की बात छिपाकर रखी थी। बेटी टीना आहूजा के जन्म के बाद उन्होंने शादी को सार्वजनिक किया था। इसके बाद दोनों के बेटे यशवर्धन आहूजा का जन्म हुआ।

बच्चन परिवार की लीगेसी पर कोर्ट में सवाल:ऐश्वर्या-अभिषेक की बेटी आराध्या ने मौत की खबरों के खिलाफ किया था केस, जानिए क्या है मामला

बच्चन परिवार की लीगेसी पर कोर्ट में सवाल:ऐश्वर्या-अभिषेक की बेटी आराध्या ने मौत की खबरों के खिलाफ किया था केस, जानिए क्या है मामला

बॉलीवुड के दिग्गज बच्चन परिवार का नाम दशकों से हिंदी सिनेमा की पहचान और विरासत से जुड़ा रहा है। अब इसी नाम और उसकी प्रतिष्ठा से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद अहम सवाल उठाए हैं। आराध्या बच्चन की सेहत को लेकर फैलाई गई झूठी खबरों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को एक लीगेसी माना जा सकता है? अगर हां, तो क्या यह लीगेसी अगली पीढ़ियों तक कानूनी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ सकती है? आराध्या बच्चन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को लेकर अहम सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा को लीगेसी की तरह अगली पीढ़ियों तक कानूनी सुरक्षा मिल सकती है? अगर मिल सकती है, तो यह सुरक्षा कितनी पीढ़ियों तक जारी रहेगी? जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि किसी ट्रेडमार्क की पहचान उसके प्रोडक्ट या सर्विस की वजह से बनती है। लेकिन किसी व्यक्ति या परिवार के नाम की पहचान उसकी उपलब्धियों, काम और समाज में उसकी प्रतिष्ठा से बनती है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह प्रतिष्ठा भी परिवार की लीगेसी की तरह आगे बढ़ सकती है। कोर्ट ने तीन बड़े सवाल उठाए- पहला सवाल- क्या परिवार की प्रतिष्ठा अगली पीढ़ियों तक जा सकती है? कोर्ट यह देखेगा कि अगर किसी परिवार के नाम की प्रतिष्ठा ट्रेडमार्क जैसी मानी जाए, तो क्या यह प्रतिष्ठा अगली पीढ़ियों तक बनी रह सकती है? अगर हां, तो इसकी कानूनी सीमा क्या होगी? दूसरा सवाल- क्या फेक न्यूज भी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन है? कोर्ट यह भी देखेगा कि अगर किसी सेलिब्रिटी या उसके परिवार को लेकर बेहद आपत्तिजनक और झूठी खबरें फैलाई जाती हैं, तो क्या इसे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन माना जा सकता है? तीसरा सवाल- क्या मानहानि को भी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जोड़ा जा सकता है? कोर्ट यह समझने की कोशिश करेगा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली मानहानि को क्या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के तहत लाया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि ये सवाल अंतिम नहीं हैं और मामले में आगे और मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। बच्चन परिवार की लीगेसी का भी मुद्दा आराध्या की तरफ से पेश वकील प्रवीण आनंद ने कहा कि मामला सिर्फ आराध्या की प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि पूरे बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा का है। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा कि बच्चन परिवार की तस्वीरों और ‘बच्चन’ नाम का इस्तेमाल कर ऐसे वीडियो बनाए गए, जिनमें आराध्या की मौत या कैंसर जैसी झूठी बातें कही गईं। इससे परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। यही वजह है कि अब कोर्ट के सामने एक बड़ा सवाल है कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को एक लीगेसी माना जा सकता है और क्या उस लीगेसी को कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है? 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा। इस दौरान परिवार की प्रतिष्ठा, फेक न्यूज, मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े सवालों पर आगे चर्चा होगी। इस मामले का फैसला सिर्फ बच्चन परिवार के लिए नहीं, बल्कि दूसरे सेलिब्रिटी परिवारों के लिए भी अहम हो सकता है। इससे यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किसी परिवार के नाम, पहचान, तस्वीर और प्रतिष्ठा को ऑनलाइन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर कानून किस तरह सुरक्षा देता है।

Samay Raina Supreme Court Relief

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4 मिनट पहले कॉपी लिंक इंजियाज गॉट लेटेंट विवाद में यूट्यूबर और कॉमेडियन समय रैना समेत पांच कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज केस को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इन पर शो में दिव्यांग बच्चे पर गलत कमेंट करने का आरोप था। समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर को भी राहत मिली है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट ने इन पांचों की ओर से दिव्यांग लोगों के लिए जागरूकता और फंड जुटाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। कोर्ट ने कहा कि ये सभी युवा और प्रतिभाशाली हैं और अगर उन्होंने अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाई है, तो इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। हालांकि, दिव्यांग लोगों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि ऑनलाइन और मनोरंजन से जुड़े कंटेंट में दिव्यांग लोगों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए किस तरह के नियम या दिशा-निर्देश बनाए जा सकते हैं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद इंडियाज गॉट लेटेंट के एक एपिसोड से जुड़ा है। शो में दिव्यांग लोगों और SMA (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) जैसी गंभीर बीमारी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायतें और आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ऐसे मजाक और टिप्पणियां दिव्यांग लोगों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। साथ ही ऑनलाइन कंटेंट को लेकर बेहतर नियम बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था? नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और चार अन्य कॉमेडियन को दिव्यांग लोगों के लिए काम करने और SMA से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए फंड जुटाने के लिए महीने में कम से कम दो कार्यक्रम करने का निर्देश दिया था। उन्हें अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग लोगों को शामिल करने और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने के लिए भी कहा गया था। बाद में कोर्ट को बताया गया कि इन कॉमेडियन ने कई कार्यक्रम आयोजित किए और दिव्यांग लोगों को उनमें शामिल किया। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए SMA से पीड़ित लोगों के लिए जागरूकता फैलाने और फंड जुटाने की कोशिश की गई। हालांकि, जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और बाकी चार कॉमेडियन पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने माना था कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Samay Raina Supreme Court Relief

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12 मिनट पहले कॉपी लिंक इंजियाज गॉट लेटेंट विवाद में यूट्यूबर और कॉमेडियन समय रैना समेत पांच कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज केस को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इन पर शो में दिव्यांग बच्चे पर गलत कमेंट करने का आरोप था। समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर को भी राहत मिली है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट ने इन पांचों की ओर से दिव्यांग लोगों के लिए जागरूकता और फंड जुटाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। कोर्ट ने कहा कि ये सभी युवा और प्रतिभाशाली हैं और अगर उन्होंने अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाई है, तो इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। हालांकि, दिव्यांग लोगों से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि ऑनलाइन और मनोरंजन से जुड़े कंटेंट में दिव्यांग लोगों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए किस तरह के नियम या दिशा-निर्देश बनाए जा सकते हैं। समय रैना समेत 5 कॉमेडियन पर 5 मई 2025 को दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप लगा था। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी गंभीर बीमारी का मजाक बनाया था यह विवाद इंडियाज गॉट लेटेंट के एक एपिसोड से जुड़ा है। शो में दिव्यांग लोगों और SMA (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) जैसी गंभीर बीमारी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ऐसे मजाक और टिप्पणियां दिव्यांग लोगों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। साथ ही ऑनलाइन कंटेंट को लेकर बेहतर नियम बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने दिव्यांगों के लिए फंड जुटाने का आदेश दिया था नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और चार अन्य कॉमेडियन को दिव्यांग लोगों के लिए काम करने और SMA से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए फंड जुटाने के लिए महीने में कम से कम दो कार्यक्रम करने का निर्देश दिया था। उन्हें अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग लोगों को शामिल करने और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने के लिए भी कहा गया था। बाद में कोर्ट को बताया गया कि इन कॉमेडियन ने कई कार्यक्रम आयोजित किए और दिव्यांग लोगों को उनमें शामिल किया। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए SMA से पीड़ित लोगों के लिए जागरूकता फैलाने और फंड जुटाने की कोशिश की गई। हालांकि, जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और बाकी चार कॉमेडियन पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने माना था कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। स्टिल अलाइव से समय रैना ने किया कमबैक, लेटेंट 2 भी शुरू विवाद के बाद समय रैना ने 17 अप्रैल 2026 को स्टैंड-अप कॉमेडी शो स्टिल अलाइव से कमबैक किया। शो में उन्होंने विवाद और केस पर बात की। शो के बीच में समय भावुक भी हो गए। इस वीडियो को उनके यूट्यूब चैनल पर 71 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। जून 2026 में नेटफ्लिक्स ने इंडियाज गॉट लेटेंट 2 की घोषणा की। 20 जून 2026 में नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर एक साथ लेटेंट 2 का पहला एपिसोड स्ट्रीम किया गया, जिसमें आलिया भट्ट और शरवरी वाघ बतौर पैनल गेस्ट पहुंचीं। पहले ही एपिसोड को सिर्फ यूट्यूब में 65 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। आगे शो में करण औजला, कीकू शारदा, चंदन प्रभाकर, राघव जुयाल, बादशाह जैसे कई सेलेब्स पहुंच रहे हैं। ये शो लगातार ट्रेंड में है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sunny Deol Kolkata Visit | Oggy and the Cockroaches Dialogue Video

Sunny Deol Kolkata Visit | Oggy and the Cockroaches Dialogue Video

10 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेता सनी देओल अपनी नई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के सिलसिले में कोलकाता पहुंचे थे। फिल्म की स्टारकास्ट और डायरेक्टर राजकुमार संतोषी के साथ आयोजित एक कार्यक्रम में सनी ने फैंस से सीधी बातचीत की। इस दौरान एक फैन के कहने पर उन्होंने मशहूर एनिमेटेड शो ‘ऑगी एंड द कॉकरोचेज’ का एक डायलॉग अपनी आवाज में बोलकर सुनाया। हिंदी में डब हुए इस कार्टून शो में जैक नाम के किरदार की आवाज सनी देओल की मिमिक्री स्टाइल में रखी गई है। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बिना शो देखे बोले ‘मैं पापा हूं, दुनिया का पापा’ कोलकाता के ऑडिटोरियम में हुए इस कार्यक्रम के दौरान एक फैन ने सनी देओल से कार्टून शो से जुड़ा एक डायलॉग बोलने का निवेदन किया। फैन ने एक्टर को बताया कि ‘ऑगी एंड द कॉकरोचेज’ शो में उनकी आवाज जैसी डबिंग में एक लाइन है, ‘ओये मैं पापा हूं, दुनिया का पापा’। सनी देओल ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने यह शो कभी नहीं देखा है, लेकिन वे कोशिश करते हैं। इसके बाद सनी ने अपने सिग्नेचर पंजाबी और हिंदी अंदाज में जोर से यह डायलॉग बोला, जिसे सुनकर पूरे हॉल में मौजूद फैंस ने जमकर तालियां बजाईं। भारत में ‘ऑगी एंड द कॉकरोचेज’ की डबिंग का कनेक्शन ‘ऑगी एंड द कॉकरोचेज’ मूल रूप से कनाडा का एक लोकप्रिय एनिमेटेड शो है, जिसे जीन-इवेस रायमबॉड ने बनाया था। 1998 से 2019 के बीच इसके 7 सीजन प्रसारित हुए थे। भारत में यह शो साल 2009 में निकलोडियन चैनल पर पहली बार दिखाया गया था। इसके बाद 2012 में जब यह कार्टून नेटवर्क पर आया, तो इसके किरदारों को बॉलीवुड स्टार्स की मिमिक्री आवाज में डब किया गया। इसमें जैक नाम की हरी बिल्ली के किरदार की आवाज सनी देओल की स्टाइल में रखी गई थी, जो भारत के बच्चों और युवाओं के बीच काफी मशहूर हुई थी। सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘बंटवारा 1947’ सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं, जो देश के विभाजन के समय पाकिस्तान चला जाता है। वहां उसे अपने नए घर में एक हिंदू महिला मिलती है, जिसका किरदार शबाना आजमी ने निभाया है। फिल्म की कहानी में सनी उस महिला और अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते नजर आते हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म में प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल, अभिमन्यु सिंह और कनिष्का कपूर ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। ये खबर भी पढ़ें मूवी रिव्यूः बंटवारा 1947:सनी देओल की दमदार परफॉर्मेंस, भारत-पाक बंटवारे की दर्दनाक, इंसानियत भरी कहानी जो दिल दहला दे राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी जब साथ आती है तो उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। घायल, दामिनी और घातक के बाद बटवारा 1947 में यह जोड़ी 1947 के बंटवारे की पृष्ठभूमि में फिर से नजर आती है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔