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Kangana Ranaut Controversy | Gen Z Statement & Shabana Azmi Remark

Kangana Ranaut Controversy | Gen Z Statement & Shabana Azmi Remark

5 घंटे पहले कॉपी लिंक अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने ‘जेन जी’ (Gen Z) युवाओं पर अपने विवादित बयान पर सफाई दी है। कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में पूरे देश के युवा शामिल नहीं थे। वहां जुटी 10 हजार की भीड़ में आधे युवा थे, जबकि बाकी शबाना आजमी की उम्र के लोग थे। कंगना ने कहा कि उनका इरादा पूरी पीढ़ी को ‘गटर छाप’ कहने का नहीं था और उन पर युवा-विरोधी होने का झूठा एजेंडा चलाया जा रहा है। जंतर-मंतर पर 2 हजार युवा थे, शबाना आजमी का नाम घसीटा कंगना रनोट ने वीडियो में कहा कि देश में जेन जी की आबादी लगभग 30 से 35 करोड़ है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में केवल 10 हजार के करीब लोग मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर हर उम्र के लोग घूम रहे थे और आधे से ज्यादा भीड़ शबाना आजमी की उम्र की थी। कंगना ने चुनौती देते हुए कहा कि कोई उनका ऐसा बयान दिखाए जिसमें उन्होंने पूरी युवा पीढ़ी को निशाना बनाया हो। उन्होंने कहा किया कि वे खुद युवा हैं, राहुल गांधी की तरह 50 साल की युवा नहीं। ‘जेनरेशन गटर’ कहने पर हुआ था विवाद इससे पहले कंगना ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो को देखकर उल्टी आने की बात कही थी और वहां मौजूद लोगों की भाषा पर सवाल उठाए थे। कंगना ने ऐसे प्रदर्शनकारियों को ‘जेनरेशन गटर’ कहा था। उन्होंने बयान दिया था कि इन युवाओं के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ नहीं है और वे पढ़ाई-लिखाई में भी अच्छे नहीं हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी जमकर आलोचना हुई थी। अब कहा- खुद को कॉकरोच कहोगे तो गटर ही घर होगा अपने बयान पर मचे बवाल के बाद कंगना ने ANI से बातचीत में तर्क दिया था कि प्रदर्शनकारी खुद को कॉकरोच बता रहे थे। उन्होंने कहा था कि कॉकरोच का घर गटर ही होता है। अगर कोई खुद को कॉकरोच कहेगा तो वह गटर में ही रहेगा। कंगना ने कहा था कि वे खुद को कॉकरोच या गटर में रहने वाला नहीं मानती हैं। उनका कहना था कि वे पूरे देश के युवाओं की नहीं, बल्कि सिर्फ उस खास प्रदर्शन में शामिल लोगों की बात कर रही थीं। प्रदर्शन में शामिल हुए थे शबाना आजमी और प्रकाश राज मामले के बैकग्राउंड की बात करें तो 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान 75 साल की वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी और एक्टर प्रकाश राज प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने पहुंचे थे। दोनों कलाकार संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ ट्रक में सवार नजर आए थे। इसी प्रदर्शन के दौरान भीड़ और भाषा को लेकर कंगना ने विवादित टिप्पणी की थी। ये खबर भी पढ़ें नसीरुद्दीन शाह को लोमड़ी कहने पर कंगना की सफाई:बोलीं- जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में मरे रहते हैं; यह लव स्टोरी खत्म कब होगी? कंगना रनोट ने सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री का यह रवैया नया नहीं है। कंगना के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पर कई लोगों ने ‘घड़ियाली आंसू’ बहाए थे, लेकिन अब झारखंड में बच्चों के साथ कथित ज्यादती पर वही लोग चुप हैं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal OBC Certificate Cancellation News

West Bengal OBC Certificate Cancellation News

Hindi News Career West Bengal OBC Certificate Cancellation News | Current Affairs 14 August 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयसोलॉ भारत आईं 13 अगस्त को लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयसोलॉ न्यांती दो दिन की यात्रा पर भारत आईं। सारा इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलेंगी और द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। सारा की ये यात्रा भारत और लाइबेरिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों और ग्लोबल साउथ पार्टनरशिप को मजबूत करने का कदम मानी जा रही है। भारत और लाइबेरिया व्यापार, निवेश, खनन, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। लाइबेरिया प्राकृतिक संसाधनों, खासकर लौह अयस्कों और दूसरे मिनरल्स के कारण भारत के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। लाईबेरिया विदेश मंत्री की भारत यात्रा से भारत की चीन और अमेरिका जैसे देशों पर मिनरल्स को लेकर निर्भरता कम होगी। इस चर्चा का प्रमुख उद्देश्य भारत-लाइबेरिया के मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करना है। भारत और लाइबेरिया के बीच 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 390 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। लाइबेरिया में 2007 से 2016 के दौरान भारतीय शांति सैनिकों की तैनाती हुई थी। साथ ही CRPF की पहली ऑल-फीमेल फॉर्मड पुलिस युनिट दोनों देशों के संबंधों में विशेष सद्भावना पैदा की। 26 जुलाई 1847 को आजाद हुआ यह देश अफ्रीका का पहला लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 2. भारत और मलेशिया के बीच उदार शक्ति 2026 एक्सरसाइज हुई 14 अगस्त को भारत और मलेशिया के बीच चल रही जॉइंट एक्सरसाइज ‘उदार शक्ति 2026’ मलेशिया में सुबांग एयर बेस पर आयोजित की जाएगी। ये पांच दिवसीय एक्सरसाइज 10 अगस्त से शुरू हुई है। इसमें भारत की IAF और मलेशिया की रॉयल एयर फोर्स (RMAF) शामिल है। इस एक्सरसाइज में एयर वॉरफेयर सेंटर में इसकी शुरुआत के साथ ही ऑपरेशनल लर्निंग को परखा गया। इस एक्सरसाइज में इंडियन एयरफोर्स का सुखोई एसयू-30 भी शामिल हुआ। सैनिक सुखोई एसयू-30 के साथ नजर आए। इस एक्सरसाइज की शुरुआत रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के एक्सरसाइज डायरेक्टर कर्नल शम्सुल शाहरीन बिन ईसा और भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन पारिजात झा ने की। इस एक्सरसाइज का उद्घाटन दोनों ग्रुप कैप्टन ने प्रतीकात्मक पैच भेंट करके किया । इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, सामरिक समन्वय और हवाई युद्ध कौशल को मजबूत करना है। इस अभ्यास में दोनों देशों के लड़ाकू विमान संयुक्त प्रशिक्षण और एयर-कॉम्बैट ड्रिल में हिस्सा ले रहे हैं। उदार शक्ति का पिछला संस्करण अगस्त 2024 में कुआंतान, मलेशिया में आयोजित हुआ था, जिसमें भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ भाग लिया था। ‘उदार शक्ति’ भारत और मलेशिया के बीच नियमित द्विपक्षीय वायु अभ्यास है। 3. भारतीय मूल के गौतम रंगराजन ब्रिटेन पीएम के एड्वाइजर बने 12 अगस्त को भारतीय मूल के गौतम रंगराजन ब्रिटेन पीएम एंडी बर्नहम के एक्सपर्ट एड्वाइजर अपॉइंट हुए। रंगराजन ब्रिटिश सरकार की संरचना, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए सलाह देना। रंगराजन कॉर्पोरेट रणनीति, संगठनात्मक बदलाव और ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े काम देखेंगे। रंगराजन हाल ही में बनाए गए नए 10 डाउनिंग स्ट्रीट में अपना कार्यभार संभालेंगे। बर्नहैम, जिन्होंने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला रंगराजन भारतीय मूल के रणनीतिकार और मीडिया एग्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने BBC में लगभग 31 सालों तक काम किया। रंगराजन BBC में ग्रुप डायरेक्टर ऑफ स्ट्रेटजी एंड परफॉर्मेंस रहे हैं। स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. खेल मंत्रालय ने टेबल टेनिस फेडरेशन को सस्पेंड किया 13 अगस्त को भारतीय खेल मंत्रालय ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी, TTFI को सस्पेंड कर दिया। मंत्रालय ने फेडरेशन में मैनेजमेंट और शासन व्यवस्था से जुड़ी खामियों को इसकी वजह बताया है। मंत्रालय ने भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) को देशभर में टेबल टेनिस का एडमिनिस्ट्रेशन संभालने के लिए एक कमिटी बनाने का निर्देश भी दिया है। ये कमिटी TTFI में शासन व्यवस्था बहाल होने तक फेडरेशन के कामकाज की देखरेख करेगी। TTFI की मान्यता निलंबित करने की एक बड़ी वजह तय समय सीमा के भीतर फेडरेशन के चुनाव नहीं कराना है। तय समय में चुनाव नहीं होने की वजह से मंत्रालय ने पहले भी TTFI को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। फेडरेशन ने नोटिस के जवाब में अपना पक्ष रखा था। हालांकि, मंत्रालय ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं पाया और सस्पेंड कर दिया। फरवरी 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने फेडरेशन की एक्जीक्यूटिव कमेटी को सस्पेंड किया था। ये कार्रवाई स्टार प्लेयर मनिका बत्रा की याचिका के बाद हुई थी। 5. कलकत्ता हाईकोर्ट ने OBC प्रमाण-पत्रों को रद्द किया 13 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पुराने सभी OBC प्रमाण-पत्रों को रद्द कर दिया। दरअसल कोर्ट ने ये फैसला तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दौरान संशोधित नियमों के तहत जारी OBC-A और OBC-B प्रमाण-पत्रों को रद्द करने का निर्देश दिया है। न्‍यायमूर्ति राजशेखर मांथा और न्‍यायमूर्ति अनुज सिंह की खण्‍ड पीठ ने कहा कि OBC-A और OBC-B वर्गीकरण अब राज्‍य में लागू नहीं रहेगा। इस फैसले के बाद OBC के जारी प्रमाण पत्रों की वैधता समाप्‍त हो गई है। ऐसे प्रमाण पत्र वाले व्‍यक्तियों को अब जनरल कैटेगरी में माना जाएगा। OBC क्लासिफिकेशन का ये विवाद साल 2010 के बाद का है। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार ने OBC कैटेगरी को दो कैटेगरी OBC-A और OBC-B में बांटा गया था। इसके बाद OBC प्रमाण पत्र जारी करने में अनिमितता और भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे थे और इसे कानूनी चुनौती दी गई थी। साल 2024 में कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने 66 समुदायों को ओबीसी सूची में रखा जाना रद्द कर दिया था और उन्‍हें जारी प्रमाण पत्र निरस्‍त कर दिए थे। न्‍यायालय ने राज्‍य सरकार को फिर से सर्वेक्षण कराने और नई OBC लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया था। OBC A, OBC B OBC-A – ज्यादा पिछड़ी कैटेगरी है। इस कैटेगरी में उन कम्युनिटी को रखा गया था जिन्हें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से ज्यादा पिछड़ा माना गया है। इस कैटेगरी में आने वालों को स्टेट सर्विस में 10% आरक्षण का प्रावधान था। OBC-B- इस कैटेगरी में कम पिछड़ी कैटेगरी को शामिल किया गया है, इसके तहत स्टेट सर्विस में 7% आरक्षण का प्रावधान था। अब ये

Shammi Kapoor Interesting Facts; Yahoo Company – Neila Devi Geeta Bali

Shammi Kapoor Interesting Facts; Yahoo Company - Neila Devi Geeta Bali

21 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था। उनका पूरा नाम शमशेर राज कपूर था। शम्मी कपूर को ‘याहू’ की गूंज, बेफिक्र अंदाज और खुलकर नाचने वाले हीरो के तौर पर पूरी पीढ़ी ने याद किया। लेकिन उनके जीवन के कई किस्से स्टारडम से भी ज्यादा दिलचस्प हैं। एक दौर में उनकी ‘Yahoo’ पहचान इतनी मशहूर हो गई थी कि लोग उन्हें याहू कंपनी का मालिक समझने लगे थे। परिवार में भी कन्फ्यूजन था। रणधीर कपूर ने उनसे पूछ लिया था- “अंकल, आपने कंपनी खोली और बताया भी नहीं?” शम्मी कपूर की 15वीं डेथ एनिवर्सरी पर रजा मुराद और अरुण बख्शी ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। जिस स्टार की फिल्म देखने के लिए घंटों लाइन लगती थी शम्मी कपूर के स्टारडम को समझने के लिए रजा मुराद की कहानी काफी है। जिस अभिनेता के साथ बाद में उन्होंने स्क्रीन शेयर की, कभी उसी की फिल्म देखने के लिए उन्हें घंटों एडवांस बुकिंग की लाइन में खड़ा होना पड़ता था। रजा मुराद बताते हैं कि शम्मी कपूर उनके पसंदीदा सितारों में थे। ‘जंगली’, ‘जानवर’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘राजकुमार’ और ‘सच्चाई’ जैसी फिल्मों के लिए दर्शकों में जबरदस्त क्रेज रहता था। करंट बुकिंग में टिकट मिलना मुश्किल होता था। इसलिए एडवांस बुकिंग के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ती थी। नकल नहीं की, अपना अंदाज बनाया शम्मी कपूर की खासियत सिर्फ उनकी लोकप्रियता नहीं थी। उन्होंने किसी दूसरे अभिनेता की नकल करके अपना स्टाइल नहीं बनाया। उनकी अपनी बॉडी लैंग्वेज, ऊर्जा और आत्मविश्वास था। यही वजह थी कि भीड़ में भी वह तुरंत अलग नजर आते थे। फैन से को-स्टार तक का सफर वक्त बदला और वही रजा मुराद फिल्म ‘प्रेम रोग’ के सेट पर शम्मी कपूर के साथ खड़े थे, जिनकी फिल्में देखने के लिए वह कभी लाइन में लगा करते थे। रजा के लिए यह सपने के सच होने जैसा था। लेकिन शम्मी कपूर ने उन्हें कभी छोटा महसूस नहीं कराया। जूनियर कलाकार होने के बावजूद वह उनसे सहजता और बराबरी के भाव से पेश आते थे। रजा मुराद के मुताबिक, शम्मी कपूर की आंखों में आखिरी दौर तक वही शरारत और चमक बनी रही, जो उनकी जवानी के दिनों की पहचान थी। रजा मुराद कहते हैं- सेट पर वह प्रैंक और मजाक करते रहते थे। कई बार किसी से आधी बात कहकर अचानक चुप हो जाते। सामने वाला सोचता रह जाता कि आखिर बात क्या है। फिर कुछ देर बाद शम्मी कपूर हंसते हुए बताते कि वह मजाक कर रहे थे। कैमरे का एंगल तक याद रहता था उनके भीतर का बच्चा उम्र के साथ बड़ा नहीं हुआ था। कैमरे के सामने भी वह सजग रहते थे। उन्हें पता रहता था कि कैमरा किस एंगल से उन्हें देख रहा है और फ्रेम में उनका चेहरा किस तरह नजर आएगा। अच्छा खाना उन्हें पसंद था और दोस्तों को खिलाना भी। घर पर दोस्तों के लिए दावतें करना उनके स्वभाव का हिस्सा था। स्टारडम के बावजूद जिंदगी को भरपूर जीने का यह अंदाज आखिरी दौर तक बना रहा। कश्मीर से था खास रिश्ता शम्मी कपूर और कश्मीर का रिश्ता हिंदी सिनेमा की यादों में खास जगह रखता है। ‘जंगली’, ‘कश्मीर की कली’ और ‘जानवर’ जैसी फिल्मों ने कश्मीर की खूबसूरती देशभर के दर्शकों तक पहुंचाई। ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’, ‘कश्मीर की कली हूं मैं’ और ‘मेरे यार शब्बा खैर’ जैसे गीतों में नजर आईं वादियां और शम्मी कपूर का मस्तमौला अंदाज दर्शकों के दिल में बस गया। कश्मीर के पर्यटन में भी योगदान रजा मुराद मानते हैं कि कश्मीर के पर्यटन को लोकप्रिय बनाने में शम्मी कपूर की फिल्मों का बड़ा योगदान था। उनका कहना था कि शम्मी कपूर के नाम पर वहां कोई सड़क, बगीचा या मोहल्ला होना चाहिए। वह चाहते थे कि कश्मीर एयरपोर्ट का नाम भी शम्मी कपूर के नाम पर रखा जाता तो यह उनके योगदान का शानदार सम्मान होता। रजा के लिए शम्मी कपूर का पूरा व्यक्तित्व एक ही बात में समाया था- या तो सबसे अच्छे बनो या सबसे अलग। शम्मी कपूर निश्चित रूप से सबसे अलग थे। गीता बाली से मुलाकात और चार महीने का प्यार शम्मी कपूर की निजी जिंदगी का खूबसूरत अध्याय अभिनेत्री गीता बाली से जुड़ा था। दोनों की मुलाकात फिल्मी माहौल में हुई। ‘रंगीली रातें’ की शूटिंग के दौरान दोनों करीब आए। शम्मी कपूर ने गीता बाली के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने तुरंत हां नहीं की। करीब चार महीने तक दोनों इस बारे में बातचीत करते रहे। फिर एक रात गीता बाली ने कहा कि अगर शादी करनी है तो अभी करनी है। आधी रात मंदिर पहुंचे, पुजारी ने कहा- भगवान सो चुके हैं दोनों अपने दोस्त जॉनी वॉकर और निर्माता हरि वालिया की मदद से बाणगंगा मंदिर पहुंचे। रात काफी हो चुकी थी। पुजारी ने उनसे कहा कि भगवान सो चुके हैं, सुबह करीब चार बजे आइए। दोनों लौटे और सुबह फिर मंदिर पहुंचे। इसके बाद शादी हुई। लिपस्टिक से भरी मांग इस शादी की सादगी भी शम्मी-गीता के रिश्ते जैसी थी। गीता बाली के पास सिंदूर नहीं था। उन्होंने पर्स से लिपस्टिक निकाली और शम्मी कपूर से कहा कि उसी से उनकी मांग भर दें। 1955 में हुई इस शादी से दोनों के दो बच्चे हुए। करीब दस साल बाद गीता बाली की असमय मौत ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए तोड़ दिया। गीता के जाने के बाद टूट गए थे शम्मी 1965 में गीता बाली के निधन के बाद शम्मी कपूर की जिंदगी का मुश्किल दौर शुरू हुआ। नीला देवी ने विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह इस सदमे से लंबे समय तक बाहर नहीं निकल पाए। करीब छह महीने तक वह राज कपूर के घर रहे। कृष्णा कपूर ने उनके बच्चों की देखभाल में मदद की। दर्द में शराब और सिगरेट का सहारा नीला देवी के मुताबिक, इस दौर में शम्मी कपूर ने शराब और सिगरेट का सहारा लिया। एक समय वह दिन में करीब 100 सिगरेट तक पीते थे और काफी शराब लेते थे। गीता बाली की याद उनके जीवन से कभी अलग नहीं हुई। 21 दिन गीता की याद में शराब से दूरी नीला

Shammi Kapoor Interesting Facts; Yahoo Company – Neila Devi Geeta Bali

Shammi Kapoor Interesting Facts; Yahoo Company - Neila Devi Geeta Bali

3 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था। उनका पूरा नाम शमशेर राज कपूर था। शम्मी कपूर को ‘याहू’ की गूंज, बेफिक्र अंदाज और खुलकर नाचने वाले हीरो के तौर पर पूरी पीढ़ी ने याद किया। लेकिन उनके जीवन के कई किस्से स्टारडम से भी ज्यादा दिलचस्प हैं। एक दौर में उनकी ‘Yahoo’ पहचान इतनी मशहूर हो गई थी कि लोग उन्हें याहू कंपनी का मालिक समझने लगे थे। परिवार में भी कन्फ्यूजन था। रणधीर कपूर ने उनसे पूछ लिया था- “अंकल, आपने कंपनी खोली और बताया भी नहीं?” शम्मी कपूर की 15वीं डेथ एनिवर्सरी पर रजा मुराद और अरुण बख्शी ने उनसे जुड़ी यादें साझा कीं। जिस स्टार की फिल्म देखने के लिए घंटों लाइन लगती थी शम्मी कपूर के स्टारडम को समझने के लिए रजा मुराद की कहानी काफी है। जिस अभिनेता के साथ बाद में उन्होंने स्क्रीन शेयर की, कभी उसी की फिल्म देखने के लिए उन्हें घंटों एडवांस बुकिंग की लाइन में खड़ा होना पड़ता था। रजा मुराद बताते हैं कि शम्मी कपूर उनके पसंदीदा सितारों में थे। ‘जंगली’, ‘जानवर’, ‘ब्लफ मास्टर’, ‘राजकुमार’ और ‘सच्चाई’ जैसी फिल्मों के लिए दर्शकों में जबरदस्त क्रेज रहता था। करंट बुकिंग में टिकट मिलना मुश्किल होता था। इसलिए एडवांस बुकिंग के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ती थी। नकल नहीं की, अपना अंदाज बनाया शम्मी कपूर की खासियत सिर्फ उनकी लोकप्रियता नहीं थी। उन्होंने किसी दूसरे अभिनेता की नकल करके अपना स्टाइल नहीं बनाया। उनकी अपनी बॉडी लैंग्वेज, ऊर्जा और आत्मविश्वास था। यही वजह थी कि भीड़ में भी वह तुरंत अलग नजर आते थे। फैन से को-स्टार तक का सफर वक्त बदला और वही रजा मुराद फिल्म ‘प्रेम रोग’ के सेट पर शम्मी कपूर के साथ खड़े थे, जिनकी फिल्में देखने के लिए वह कभी लाइन में लगा करते थे। रजा के लिए यह सपने के सच होने जैसा था। लेकिन शम्मी कपूर ने उन्हें कभी छोटा महसूस नहीं कराया। जूनियर कलाकार होने के बावजूद वह उनसे सहजता और बराबरी के भाव से पेश आते थे। रजा मुराद के मुताबिक, शम्मी कपूर की आंखों में आखिरी दौर तक वही शरारत और चमक बनी रही, जो उनकी जवानी के दिनों की पहचान थी। रजा मुराद कहते हैं- सेट पर वह प्रैंक और मजाक करते रहते थे। कई बार किसी से आधी बात कहकर अचानक चुप हो जाते। सामने वाला सोचता रह जाता कि आखिर बात क्या है। फिर कुछ देर बाद शम्मी कपूर हंसते हुए बताते कि वह मजाक कर रहे थे। कैमरे का एंगल तक याद रहता था उनके भीतर का बच्चा उम्र के साथ बड़ा नहीं हुआ था। कैमरे के सामने भी वह सजग रहते थे। उन्हें पता रहता था कि कैमरा किस एंगल से उन्हें देख रहा है और फ्रेम में उनका चेहरा किस तरह नजर आएगा। अच्छा खाना उन्हें पसंद था और दोस्तों को खिलाना भी। घर पर दोस्तों के लिए दावतें करना उनके स्वभाव का हिस्सा था। स्टारडम के बावजूद जिंदगी को भरपूर जीने का यह अंदाज आखिरी दौर तक बना रहा। कश्मीर से था खास रिश्ता शम्मी कपूर और कश्मीर का रिश्ता हिंदी सिनेमा की यादों में खास जगह रखता है। ‘जंगली’, ‘कश्मीर की कली’ और ‘जानवर’ जैसी फिल्मों ने कश्मीर की खूबसूरती देशभर के दर्शकों तक पहुंचाई। ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’, ‘कश्मीर की कली हूं मैं’ और ‘मेरे यार शब्बा खैर’ जैसे गीतों में नजर आईं वादियां और शम्मी कपूर का मस्तमौला अंदाज दर्शकों के दिल में बस गया। कश्मीर के पर्यटन में भी योगदान रजा मुराद मानते हैं कि कश्मीर के पर्यटन को लोकप्रिय बनाने में शम्मी कपूर की फिल्मों का बड़ा योगदान था। उनका कहना था कि शम्मी कपूर के नाम पर वहां कोई सड़क, बगीचा या मोहल्ला होना चाहिए। वह चाहते थे कि कश्मीर एयरपोर्ट का नाम भी शम्मी कपूर के नाम पर रखा जाता तो यह उनके योगदान का शानदार सम्मान होता। रजा के लिए शम्मी कपूर का पूरा व्यक्तित्व एक ही बात में समाया था- या तो सबसे अच्छे बनो या सबसे अलग। शम्मी कपूर निश्चित रूप से सबसे अलग थे। गीता बाली से मुलाकात और चार महीने का प्यार शम्मी कपूर की निजी जिंदगी का खूबसूरत अध्याय अभिनेत्री गीता बाली से जुड़ा था। दोनों की मुलाकात फिल्मी माहौल में हुई। ‘रंगीली रातें’ की शूटिंग के दौरान दोनों करीब आए। शम्मी कपूर ने गीता बाली के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने तुरंत हां नहीं की। करीब चार महीने तक दोनों इस बारे में बातचीत करते रहे। फिर एक रात गीता बाली ने कहा कि अगर शादी करनी है तो अभी करनी है। आधी रात मंदिर पहुंचे, पुजारी ने कहा- भगवान सो चुके हैं दोनों अपने दोस्त जॉनी वॉकर और निर्माता हरि वालिया की मदद से बाणगंगा मंदिर पहुंचे। रात काफी हो चुकी थी। पुजारी ने उनसे कहा कि भगवान सो चुके हैं, सुबह करीब चार बजे आइए। दोनों लौटे और सुबह फिर मंदिर पहुंचे। इसके बाद शादी हुई। लिपस्टिक से भरी मांग इस शादी की सादगी भी शम्मी-गीता के रिश्ते जैसी थी। गीता बाली के पास सिंदूर नहीं था। उन्होंने पर्स से लिपस्टिक निकाली और शम्मी कपूर से कहा कि उसी से उनकी मांग भर दें। 1955 में हुई इस शादी से दोनों के दो बच्चे हुए। करीब दस साल बाद गीता बाली की असमय मौत ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए तोड़ दिया। गीता के जाने के बाद टूट गए थे शम्मी 1965 में गीता बाली के निधन के बाद शम्मी कपूर की जिंदगी का मुश्किल दौर शुरू हुआ। नीला देवी ने विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह इस सदमे से लंबे समय तक बाहर नहीं निकल पाए। करीब छह महीने तक वह राज कपूर के घर रहे। कृष्णा कपूर ने उनके बच्चों की देखभाल में मदद की। दर्द में शराब और सिगरेट का सहारा नीला देवी के मुताबिक, इस दौर में शम्मी कपूर ने शराब और सिगरेट का सहारा लिया। एक समय वह दिन में करीब 100 सिगरेट तक पीते थे और काफी शराब लेते थे। गीता बाली की याद उनके जीवन से कभी अलग नहीं हुई। 21 दिन गीता की याद में शराब से दूरी नीला

Imran Khan Jail Medical Treatment Plea

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इस्लामाबाद31 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई तय की है। तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। इसमें जस्टिस शाहिद वाहिद, जस्टिस नईम अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं। कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को नोटिस जारी कर दिया है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मामले चल रहे हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिरने के बाद से उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लगातार उनकी रिहाई और मुलाकात की मांग करती रही है। इमरान मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए थे। तब ही वह आखिरी बार दिखे थे। पाकिस्तानी पत्रकार ने इमरान की मौत का दावा किया था अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने एक वीडियो जारी कर इमरान की मौत की आशंका जाहिर की थी। वजाहत ने कहा कि इमरान की मौत की आशंका सेना के अफसरों की सूचनाओं के आधार पर किया गया एक आकलन था। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद इमरान की बहनों ने भी सवाल उठाया कि उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इमरान की पार्टी बोली- सड़कों पर उतरेंगे इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि अगर उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने कहा कि PTI का केंद्रीय और प्रांतीय लीडरशिप और उसके सहयोगी दल इस फैसले पर साथ हैं। उन्होंने कहा कि मार्च का मकसद सिर्फ इमरान खान की रिहाई नहीं, बल्कि पार्टी संस्थापक तक पहुंच और उनसे मुलाकात सुनिश्चित करना है। नवंबर 2025 में इमरान से मिली थीं बहनें इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। जेल से बाहर आकर उज्मा ने बताया था कि भाई इमरान पूरी तरह ठीक हैं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा था- इमरान खान की सेहत बिल्कुल ठीक है, लेकिन वे बेहद गुस्से में हैं। उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है और इस सब के लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार हैं। उनकी बाहरी दुनिया तक कोई पहुंच नहीं है। इमरान की बहन उज्मा ने पिछले साल उनसे मिलने के बाद मीडिया से बात की थी। पिछली बार मई 2024 में नजर आए थे इमरान इमरान खान पिछली बार 16 मई 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनाव से 5 दिन पहले मुझे अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया, जिससे मैं चुनाव से दूर रहूं। इमरान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- केजरीवाल को भी भारत में चुनाव के दौरान कैंपेन के लिए जमानत दी गई थी। इमरान पर चल रहे केस के बारे में जानिए… ————– यह खबर भी पढ़ें… लाल किला धमाका अलकायदा ने कराया:UN की रिपोर्ट में दावा, NIA की जांच में भी यही निकला था; 11 मौतें हुई थीं लाल किले के पास हुए धमाके में अलकायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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इस्लामाबाद6 घंटे पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई तय की है। तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। इसमें जस्टिस शाहिद वाहिद, जस्टिस नईम अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं। कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को नोटिस जारी कर दिया है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मामले चल रहे हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिरने के बाद से उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लगातार उनकी रिहाई और मुलाकात की मांग करती रही है। इमरान मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए थे। तब ही वह आखिरी बार दिखे थे। पाकिस्तानी पत्रकार ने इमरान की मौत का दावा किया था अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने एक वीडियो जारी कर इमरान की मौत की आशंका जाहिर की थी। वजाहत ने कहा कि इमरान की मौत की आशंका सेना के अफसरों की सूचनाओं के आधार पर किया गया एक आकलन था। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद इमरान की बहनों ने भी सवाल उठाया कि उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इमरान की पार्टी बोली- सड़कों पर उतरेंगे इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि अगर उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने कहा कि PTI का केंद्रीय और प्रांतीय लीडरशिप और उसके सहयोगी दल इस फैसले पर साथ हैं। उन्होंने कहा कि मार्च का मकसद सिर्फ इमरान खान की रिहाई नहीं, बल्कि पार्टी संस्थापक तक पहुंच और उनसे मुलाकात सुनिश्चित करना है। नवंबर 2025 में इमरान से मिली थीं बहनें इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। जेल से बाहर आकर उज्मा ने बताया था कि भाई इमरान पूरी तरह ठीक हैं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा था- इमरान खान की सेहत बिल्कुल ठीक है, लेकिन वे बेहद गुस्से में हैं। उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है और इस सब के लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार हैं। उनकी बाहरी दुनिया तक कोई पहुंच नहीं है। इमरान की बहन उज्मा ने पिछले साल उनसे मिलने के बाद मीडिया से बात की थी। पिछली बार मई 2024 में नजर आए थे इमरान इमरान खान पिछली बार 16 मई 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनाव से 5 दिन पहले मुझे अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया, जिससे मैं चुनाव से दूर रहूं। इमरान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- केजरीवाल को भी भारत में चुनाव के दौरान कैंपेन के लिए जमानत दी गई थी। इमरान पर चल रहे केस के बारे में जानिए… ————– यह खबर भी पढ़ें… लाल किला धमाका अलकायदा ने कराया:UN की रिपोर्ट में दावा, NIA की जांच में भी यही निकला था; 11 मौतें हुई थीं लाल किले के पास हुए धमाके में अलकायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…