इमरान की नौ महीने बाद बहन नूरीन की मुलाकात:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM को हॉस्पिटल शिफ्ट किए जाएंगे

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी ने मंगलवार को अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। करीब 9 महीने बाद हुई इस मुलाकात के लिए नोरीन सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद जेल पहुंचीं, जिसमें इमरान को परिवार से हर हफ्ते मिलने की अनुमति दी गई है। करीब 15 मिनट चली मुलाकात में नोरीन ने इमरान की सेहत के बारे में पूछा। उन्होंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जानकारी भी दी, जिसमें इमरान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने को कहा गया है। दोनों ने कुछ कानूनी मामलों पर भी बात की। इमरान ने अपनी पत्नी बुशरा बीबी से भी मुलाकात की। दोनों करीब 30 से 35 मिनट साथ रहे। इससे पहले बुशरा ने अपनी बेटी मुबाशरा शेख और ननद मेहरुन्निसा से मुलाकात की थी। पुलिस सिर्फ ने नोरीन को मिलने दिया नोरीन अपनी बहनों अलीमा खान और उजमा खान के साथ अडियाला जेल के रास्ते में डहगल चेकपॉइंट पहुंची थीं। पुलिस ने तीनों को रोक लिया, लेकिन बाद में सिर्फ नोरीन को इमरान से मिलने के लिए जेल जाने दिया। करीब 15 मिनट की मुलाकात के बाद नोरीन ने इमरान से मिलने की पुष्टि की। हालांकि, कोर्ट में दिए भरोसे के मुताबिक उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। कोर्ट ने कहा- परिवार से मिलना अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इमरान के परिवार से हर हफ्ते मुलाकात कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि परिवार से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले 3 साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। उनके बेटों से हुई बातचीत और फोन कॉल की जानकारी देने को भी कहा गया है। इमरान को अस्पताल भेजने का भी आदेश सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को इलाज और मेडिकल जांच के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने उनके इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है, जिसमें उनके निजी डॉक्टर और बहन डॉ. उजमा खान को शामिल किया जाएगा। अडियाला जेल की मेडिकल रिपोर्ट में इमरान के ब्लड प्रेशर और तनाव को लेकर चिंता जताई गई थी। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… PAK सुप्रीम कोर्ट बोला-इमरान को 2 दिन में अस्पताल भेजें:कहा- बहनों से मिलना उनका अधिकार; 2023 से जेल में हैं पूर्व PM पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को 48 घंटे में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका में 27 साल रही भारतवंशी महिला हिरासत में:ICE ने पूछताछ के बाद किया डिटेन; वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड

अमेरिका में 27 साल से रह रहीं भारतीय मूल की वेंकटा वासमसेट्टी को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया। 11 अगस्त को शार्लोट स्थित ICE कार्यालय में नियमित चेक-इन के दौरान पूछताछ के बाद उन्हें डिटेन किया गया। वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड है और वह नॉर्थ कैरोलिना के सरकारी स्कूल में स्पेशल-नीड्स बच्चों को पढ़ाती हैं। भारत जाने के बाद ग्रीन कार्ड पर सवाल उठा वेंकटा जुलाई 2022 में बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं। वहां उन्हें कोविड हुआ और करीब दो हफ्ते अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह फरवरी 2023 में करीब 7 महीने बाद अमेरिका लौटीं। अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी लंबी गैर-मौजूदगी को आधार बनाकर सवाल उठाया कि क्या उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ दिया था। वेंकटा के वकीलों ने कहा कि उनका घर, नौकरी और परिवार अमेरिका में है और उन्होंने स्थायी रूप से भारत लौटने का इरादा नहीं किया था। ग्रीन कार्डधारक 180 दिन से ज्यादा अमेरिका से बाहर रहें तो इमिग्रेशन अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि उन्होंने अमेरिका को अपना स्थायी घर बनाए रखा है या नहीं। मई में जज ने डिपोर्टेशन केस खत्म किया वेंकटा के खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई चल रही थी और उन्हें नियमित रूप से ICE के सामने पेश होना पड़ता था। 19 मई को इमिग्रेशन जज ने केस खत्म कर दिया। जज ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट और ठोस सबूत नहीं दे पाई कि वेंकटा को अमेरिका से बाहर किया जा सकता है। इसके बावजूद 11 अगस्त को ICE कार्यालय में चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल उन्हें जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। डायबिटीज की मरीज, वकीलों ने कोर्ट में चुनौती दी वेंकटा को गंभीर डायबिटीज है और उनके वकील के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के समय उनके पास इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सप्लाई नहीं थीं। उनके वकीलों ने हिरासत को फेडरल कोर्ट में चुनौती दी है। 13 अगस्त को जज ने ICE से तीन दिन में यह बताने को कहा कि वेंकटा को हिरासत में रखने का कानूनी आधार क्या है। वेंकटा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उनकी दो बेटियां और दो पोते-पोतियां अमेरिकी नागरिक हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- रूस सीक्रेट रूट से ईरान को हथियार भेज रहा:मिसाइल-ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल; ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Shatrughan Sinha Defends Sonakshi Amid Jharkhand Controversy

31 मिनट पहले कॉपी लिंक शत्रुघ्न सिन्हा की सोनाक्षी सबसे छोटी यानी तीसरी संतान हैं। उनके दो बड़े जुड़वां भाई हैं, जिनके नाम लव सिन्हा और कुश सिन्हा हैं। एक्टर और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में कहा है कि उनकी बेटी सोनाक्षी सिन्हा की ऑनलाइन ट्रोलिंग के पीछे बीजेपी का IT सेल है। एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में उनसे सोनाक्षी के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी एक समझदार लड़की हैं और उन्हें पता है कि कब और किस मुद्दे पर अपनी बात रखनी है। इंटरव्यू में शत्रुघ्न सिन्हा से पूछा गया कि सोनाक्षी पर आरोप लगे कि उन्होंने CJP के जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर खुलकर राय रखी थी, लेकिन झारखंड में छात्रों से जुड़े हालिया मामले में वह चुप नजर आईं। इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कुछ ही दिन पहले सोनाक्षी की ओर से झारखंड के बच्चों के समर्थन में बहुत जबरदस्त, बहुत वोकल और बहुत स्ट्रॉन्ग सपोर्ट आया था। सोनाक्षी के राजनीति में आने पर भी रिएक्ट किया सोनाक्षी के भविष्य में राजनीति में आने के सवाल पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैं कह नहीं सकता, लेकिन उन्होंने आगे कहा कि सोनाक्षी वर्थी फादर (काबिल पिता) की मोस्ट वर्थी डॉटर (सबसे काबिल बेटी) हैं। सोनाक्षी की सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी शत्रुघ्न सिन्हा ने दावा किया कि उनकी बेटी के खिलाफ होने वाली ट्रोलिंग पेड ट्रोल्स की तरफ से होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोग और IT सेल ऐसे ट्रोल्स के जरिए विरोध करने वालों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे ट्रोल्स को खुद नहीं पता होता कि उन्हें क्या लिखना है। उनके मुताबिक, उन्हें तैयार कंटेंट या ड्राफ्ट दिया जाता है और वे उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने पुराने सोशल मीडिया ट्रेंड्स का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पहले भी कई फिल्म स्टार्स और स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के ट्वीट एक जैसे नजर आते थे। उन्होंने कहा कि कई बार उनके शब्द, विराम चिह्न और यहां तक कि डॉट-कॉमा तक एक जैसे होते थे। उन्होंने कहा कि सोनाक्षी इन ट्रोल्स को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं। शत्रुघ्न के मुताबिक, सोनाक्षी ने भी कहा है कि वह ट्रोलिंग को देखती ही नहीं हैं। बता दें कि सोनाक्षी ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में कई पोस्ट किए थे। वहीं अभिनेत्री ने झारखंड के छात्र प्रदर्शन को लेकर भी समर्थन जताया था। रांची में छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे थे। तब सोनाक्षी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “हमारे देश के छात्रों को इस तरह परेशान होते देख दुख होता है। ये कब रुकेगा?” सोनाक्षी की पोस्ट। …………… सोनाक्षी सिन्हा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सोनाक्षी सिन्हा ने कान पकड़कर लगाई दंड-बैठक:धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जेन Z से माफी मांगी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर जेन Z की तारीफ की थी। वीडियो में सोनाक्षी ने कहा था कि उन्होंने पहले जेन Z को हल्के में लिया था, लेकिन अब उनकी सोच बदल गई है। उन्होंने कैमरे के सामने कान पकड़कर दंड-बैठक भी की और कहा कि अब वह भी जेन Z जैसी बनना चाहती हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Shatrughan Sinha Defends Sonakshi Amid Jharkhand Controversy

1 घंटे पहले कॉपी लिंक शत्रुघ्न सिन्हा की सोनाक्षी सबसे छोटी यानी तीसरी संतान हैं। उनके दो बड़े जुड़वां भाई हैं, जिनके नाम लव सिन्हा और कुश सिन्हा हैं। एक्टर और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में कहा है कि उनकी बेटी सोनाक्षी सिन्हा की ऑनलाइन ट्रोलिंग के पीछे बीजेपी का IT सेल है। एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में उनसे सोनाक्षी के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी एक समझदार लड़की हैं और उन्हें पता है कि कब और किस मुद्दे पर अपनी बात रखनी है। इंटरव्यू में शत्रुघ्न सिन्हा से पूछा गया कि सोनाक्षी पर आरोप लगे कि उन्होंने CJP के जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर खुलकर राय रखी थी, लेकिन झारखंड में छात्रों से जुड़े हालिया मामले में वह चुप नजर आईं। इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कुछ ही दिन पहले सोनाक्षी की ओर से झारखंड के बच्चों के समर्थन में बहुत जबरदस्त, बहुत वोकल और बहुत स्ट्रॉन्ग सपोर्ट आया था। सोनाक्षी के राजनीति में आने पर भी रिएक्ट किया सोनाक्षी के भविष्य में राजनीति में आने के सवाल पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैं कह नहीं सकता, लेकिन उन्होंने आगे कहा कि सोनाक्षी वर्थी फादर (काबिल पिता) की मोस्ट वर्थी डॉटर (सबसे काबिल बेटी) हैं। सोनाक्षी की सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी शत्रुघ्न सिन्हा ने दावा किया कि उनकी बेटी के खिलाफ होने वाली ट्रोलिंग पेड ट्रोल्स की तरफ से होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोग और IT सेल ऐसे ट्रोल्स के जरिए विरोध करने वालों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे ट्रोल्स को खुद नहीं पता होता कि उन्हें क्या लिखना है। उनके मुताबिक, उन्हें तैयार कंटेंट या ड्राफ्ट दिया जाता है और वे उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने पुराने सोशल मीडिया ट्रेंड्स का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पहले भी कई फिल्म स्टार्स और स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के ट्वीट एक जैसे नजर आते थे। उन्होंने कहा कि कई बार उनके शब्द, विराम चिह्न और यहां तक कि डॉट-कॉमा तक एक जैसे होते थे। उन्होंने कहा कि सोनाक्षी इन ट्रोल्स को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं। शत्रुघ्न के मुताबिक, सोनाक्षी ने भी कहा है कि वह ट्रोलिंग को देखती ही नहीं हैं। बता दें कि सोनाक्षी ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में कई पोस्ट किए थे। वहीं अभिनेत्री ने झारखंड के छात्र प्रदर्शन को लेकर भी समर्थन जताया था। रांची में छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे थे। तब सोनाक्षी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “हमारे देश के छात्रों को इस तरह परेशान होते देख दुख होता है। ये कब रुकेगा?” सोनाक्षी की पोस्ट। …………… सोनाक्षी सिन्हा से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सोनाक्षी सिन्हा ने कान पकड़कर लगाई दंड-बैठक:धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जेन Z से माफी मांगी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर जेन Z की तारीफ की थी। वीडियो में सोनाक्षी ने कहा था कि उन्होंने पहले जेन Z को हल्के में लिया था, लेकिन अब उनकी सोच बदल गई है। उन्होंने कैमरे के सामने कान पकड़कर दंड-बैठक भी की और कहा कि अब वह भी जेन Z जैसी बनना चाहती हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Arjuna Award Winners List & Airtel Payments Bank Chairperson Appointment

Hindi News Career Arjuna Award Winners List & Airtel Payments Bank Chairperson Appointment 24 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. शबनम सिन्हा एयरटेल पेमेंट्स बैंक की नई चेयरपर्सन 18 अगस्त को एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने नए चेयरपर्सन के नाम का ऐलान किया। शबनम सिन्हा एयरटेल पेमेंट्स बैंक की नई चेयरपर्सन होंगी। शबनम 1 अक्टूबर 2026 से चेयरपर्सन का पद संभालेंगी और वे नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सुनील भारती मित्तल की जगह लेंगी। सुनील मित्तल का कार्यकाल 30 सितंबर को पूरा हो रहा है। इसके बाद वे बोर्ड से हट जाएंगे। शबनम सिन्हा के पास बैंकिंग, गवर्नेंस और डिजिटल बदलाव का 30 से ज्यादा सालों का ग्लोबल अनुभव है। शबनम ने 2010-2025 तक वर्ल्ड बैंक में बतौर लीड स्पेशलिस्ट काम किया है। शबनम USAID व NCERT के साथ भी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। शबनम ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका में 4 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹38,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। शबनम फिलहाल एयरटेल पेमेंट्स बैंक, वेदांता और भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन जैसे बड़े संस्थानों के बोर्ड में शामिल हैं। शबनम वर्ल्ड बैंक से पहले IL&FS एजुकेशन की CEO रह चुकी हैं। स्पोर्ट्स (SPORTS) 2. राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 का ऐलान 18 अगस्त को खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 का ऐलान किया। इस साल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड के लिए चुना गया है। अर्जुन अवार्ड में चेस खिलाड़ी दिव्या देशमुख, विदित गुजराती, एथलीट तेजस्विन शंकर और बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद व तृषा जॉली जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ ही फुटबॉल के दिग्गज 84 साल के आई. अरुमायनायगम को अर्जुन अवॉर्ड की लाइफटाइम कैटेगरी में चुना गया है। इसायाह 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। इसके साथ ही एथलेटिक्स कोच परवीर सिंह, बॉक्सिंग कोच छोटे लाल यादव और शूटिंग कोच नेहा नंदकुमार चव्हाण को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया जाएगा। तेजस्विन शंकर ने 17 साल की उम्र में 2.26 मीटर की छलांग लगाकर सीनियर नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा था। चेस में दिव्या देशमुख और विदित गुजराती को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दिव्या ने 2025 में FIDE विमेंस वर्ल्ड कप का खिताब जीता था। 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी खिलाड़ी को खेल रत्न नहीं दिया गया हो। इससे पहले 2014 में ऐसा हुआ था। 1991-92 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत की थी। तब इसका नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार था। 2021 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया गया। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकैंडे हिचिलेमा दोबारा निर्वाचित हुए 18 अगस्त को हाकैंडे हिचिलेमा अफ्रीकी महाद्वीप जाम्बिया के राष्ट्रपति चुने गए। वे लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं। हिचिलेमा हिचिलेमा यूनाइटेड पार्टी फॉर नेशनल डेवलपमेंट (UPND) से हैं और उन्हें 61.4% वोट मिले। हिचिलेमा पहली बार 2021 में जाम्बिया के राष्ट्रपति चुने गए थे और 2021 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति एडगर लुंगु को हराया था। जाम्बिया की अर्थव्यवस्था में कॉपर उद्योग बेहद महत्वपूर्ण है। ये देश के निर्यात और GDP में बड़ा योगदान देता है। जाम्बिया दक्षिणी अफ्रीका में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण और खनिज समृद्ध लैंडलॉक्ड देश माना जाता है। हिचिलेमा पहली बार 2021 में जाम्बिया के राष्ट्रपति चुने गए थे। समझौता (AGREEMENT) 4. टाटा पावर और IIT बॉम्बे ने क्लीन एनर्जी रिसर्च समझौता किया 18 अगस्त को टाटा पावर और IIT बॉम्बे ने एक मास्टर रिसर्च एग्रीमेंट साइन किया। ये एग्रीमेंट IIT बॉम्बे कैंपस में टाटा पावर के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ प्रवीर सिन्हा, IIT बॉम्बे के डीन प्रो. श्रीकृष्ण वी कुलकर्णी और IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रो. शीरीष कडारे ने किया। इस MoU का मकसद IIT बॉम्बे की रिसर्च क्षमताओं और टाटा पावर की इंडस्ट्री से जुड़ी विशेषज्ञता को मिलाकर सोल्यूशन्स विकसित करना है। इन सोल्यूशन्स को स्मार्ट ग्रिड, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, साइबर सिक्योरिटी में यूज किया जाएगा। साथ ही पावर सिस्टम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ग्रिड टेक्नोलॉजी, कार्बन कैप्चर और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इस पार्टनरशिप का मकसद लैब में होने वाली रिसर्च और कमर्शियल रिसर्च के बीच के अंतर को कम करना है। इस पार्टनरशिप से भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन (स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव) में मदद मिलेगी। साथ ही इस समझौते से एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ावा मिलेगा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पूरे हो सकेंगे। ये समझौता नई और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी को तेजी से बाजार में लाने में मदद करेगा। 5. भारत और आर्मेनिया ने समझौता किया 18 अगस्त को भारत और यूरेशियाई देश आर्मेनिया के बीच रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग के लिए समझौता हुआ। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की आर्मेनिया यात्रा के दौरान ये समझौता हुआ। 17 अगस्त को भारत के रक्षा सचिव सिंह और आर्मेनिया के रक्षा मंत्री सुरेन पापिक्यान ने मुलाकात की थी, इस मुलाकात में दोनों देश सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के बीच सहयोग के लिए एक नया ढांचा बनाने पर सहमत हुए हैं। जनरल स्टाफ का मतलब उन सैन्य अधिकारियों से है जो प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के कामकाज को संभालते हैं। भारत और आर्मेनिया दोनों देश एक दूसरे को रक्षा सहयोग करते हैं, जिसमें ट्रेनिंग, सैन्य टेक्नोलॉजी और डिफेंस इंडस्ट्री भी शामिल हैं। भारत ने आर्मेनिया को पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, स्वदेशी रडार और मिसाइल प्रणालियों सहित कई रक्षा उपकरणों की आपूर्ति की है। दोनों देशों के संबंधों में खासतौर पर रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरे हैं। भारत और आर्मेनिया के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे और हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख आधार बना है। भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह 16 अगस्त को दो दिवसीय यात्रा पर आर्मेनिया पहुंचे थे। मिसलीनियस (Miscellaneous) 6. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 31 ECMS को मंजूरी दी 18 अगस्त को केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलैक्ट्रॉनिक्स कॉमपोनेंटस मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 31 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल ₹7,877 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। ये
ट्रंप बोले-ईरान डील के लिए तैयार हो, तभी होगी बातचीत:नेगोसिएटिंग टीम से वार्ता रोकने को कहा; होर्मुज को लेकर तनाव जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी नेगोसिएटिंग टीम से ईरान के साथ वार्ता रोकने को कहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक तेहरान किसी डील के लिए तैयार नहीं हो जाता। अमेरिकी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच अब तक सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन ट्रम्प ने आगे की बातचीत शुरू करने से पहले इंतजार करने का फैसला किया। ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया था। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- नया अमेरिकी क्षेत्र ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक ग्राफिक पोस्ट किया, जिसके ऊपर ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ लिखा था। इस मैप में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास का समुद्री इलाका दिखाया गया था। इसमें ईरान, ओमान और UAE के हिस्से भी नजर आ रहे थे। ट्रम्प बोले- होर्मुज में नाकाबंदी जारी ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज को लेकर कहा कि वहां अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी पूरी तरह लागू है। होर्मुज खुला है और वहां आवाजाही जारी है। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के अपना वादा पूरी करने तक ईरान होर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा। ट्रम्प के कहने से होर्मुज अमेरिका का हिस्सा हो जाएगा? सीधा जवाब है- नहीं। होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। इस रास्ते से दुनिया के कई देशों के तेल और गैस से भरे जहाज गुजरते हैं। इसलिए इस पर सिर्फ किसी एक देश का अधिकार नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के जहाजों को इस रास्ते से आने-जाने का अधिकार है। इसी वजह से कोई भी देश सिर्फ अपने दम पर इस समुद्री मार्ग पर कब्जे का दावा नहीं कर सकता। इसलिए ट्रम्प का मैप एक राजनीतिक दावा या मैसेज माना जा सकता है, लेकिन इससे अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर अपने आप कोई नया कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है? होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है? खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। इसी वजह से अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौते में किए गए वादे पूरे नहीं करता, तब तक यह रास्ता नहीं खोला जाएगा। ————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की लोकप्रियता घटी, सिर्फ 33% लोगों की पसंद:ईरान युद्ध के चलते गिरावट; 80% अमेरिकी बोले- जंग लंबी चलेगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता ईरान युद्ध के बीच लगातार घट रही है। रॉयटर्स/इप्सोस के ताजा सर्वे में सिर्फ 33% अमेरिकियों ने ट्रम्प के कामकाज को मंजूरी दी। पूरी खबर पढ़ें…
ट्रम्प बोले-ईरान डील के लिए तैयार हो, तभी होगी बातचीत:नेगोसिएटिंग टीम से वार्ता रोकने को कहा; होर्मुज को लेकर तनाव जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी नेगोसिएटिंग टीम से ईरान के साथ वार्ता रोकने को कहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक तेहरान किसी डील के लिए तैयार नहीं हो जाता। अमेरिकी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच अब तक सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन ट्रम्प ने आगे की बातचीत शुरू करने से पहले इंतजार करने का फैसला किया। ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया था। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- नया अमेरिकी क्षेत्र ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक ग्राफिक पोस्ट किया, जिसके ऊपर ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ लिखा था। इस मैप में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास का समुद्री इलाका दिखाया गया था। इसमें ईरान, ओमान और UAE के हिस्से भी नजर आ रहे थे। ट्रम्प बोले- होर्मुज में नाकाबंदी जारी ट्रम्प ने मंगलवार को होर्मुज को लेकर कहा कि वहां अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी पूरी तरह लागू है। होर्मुज खुला है और वहां आवाजाही जारी है। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के अपना वादा पूरी करने तक ईरान होर्मुज को दोबारा नहीं खोलेगा। ट्रम्प के कहने से होर्मुज अमेरिका का हिस्सा हो जाएगा? सीधा जवाब है- नहीं। होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। इस रास्ते से दुनिया के कई देशों के तेल और गैस से भरे जहाज गुजरते हैं। इसलिए इस पर सिर्फ किसी एक देश का अधिकार नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के जहाजों को इस रास्ते से आने-जाने का अधिकार है। इसी वजह से कोई भी देश सिर्फ अपने दम पर इस समुद्री मार्ग पर कब्जे का दावा नहीं कर सकता। इसलिए ट्रम्प का मैप एक राजनीतिक दावा या मैसेज माना जा सकता है, लेकिन इससे अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट पर अपने आप कोई नया कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है? होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है? खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है। फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। इसी वजह से अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्द से जल्द सामान्य हो। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौते में किए गए वादे पूरे नहीं करता, तब तक यह रास्ता नहीं खोला जाएगा। ————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की लोकप्रियता घटी, सिर्फ 33% लोगों की पसंद:ईरान युद्ध के चलते गिरावट; 80% अमेरिकी बोले- जंग लंबी चलेगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता ईरान युद्ध के बीच लगातार घट रही है। रॉयटर्स/इप्सोस के ताजा सर्वे में सिर्फ 33% अमेरिकियों ने ट्रम्प के कामकाज को मंजूरी दी। पूरी खबर पढ़ें…







