Friday, 16 Oct 2026 | 01:39 PM

Trending :

अमेरिका का ईरान पर नया हमला:चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप को निशाना बनाया; US बोला- हमारे सैनिकों को निशाना बनाने के बदले किया

अमेरिका का ईरान पर नया हमला:चाबहार, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप को निशाना बनाया; US बोला- हमारे सैनिकों को निशाना बनाने के बदले किया

ईरानी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि दक्षिणी ईरान में सोमवार को कई जगह धमाकों की खबर है। इनमें रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, चाबहार और केश्म द्वीप शामिल हैं। धमाकों को लेकर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने या नुकसान की भी पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर IRGC के हालिया हमलों की कोशिशों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की घटनाओं के बाद किए गए हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….

Trump Thanks Bangladesh PM Rahman for Boeing Deal

Trump Thanks Bangladesh PM Rahman for Boeing Deal

वॉशिंगटन डीसी/ढाका1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2017 में बोइंग की साउथ कैरोलिना फैक्ट्री का दौरा किया था। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ट्रम्प बोइंग विमान खरीदने पर क्यों जोर देते हैं अमेरिका में बड़े यात्री विमान बनाने वाली मुख्य कंपनी बोइंग ही है। वहां दूसरी विमान कंपनियां भी हैं, लेकिन वे ज्यादातर सैन्य या छोटे विमानों के कारोबार में हैं। बड़े यात्री विमानों के मामले में बोइंग ही अमेरिका की बड़ी कंपनी है और उसका सबसे बड़ा मुकाबला यूरोप की एयरबस से है। ट्रम्प की व्यापार नीति का सबसे बड़ा मकसद ही यही है कि दूसरे देश अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदें। इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम हो सकता है और अमेरिकी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। यहां बोइंग बहुत काम आती है, क्योंकि एक यात्री विमान की कीमत ही करोड़ों डॉलर होती है। अगर कोई देश 50, 100 या 200 विमान खरीदने का सौदा करता है तो अमेरिका से होने वाली खरीद का आंकड़ा एक झटके में अरबों डॉलर बढ़ जाता है। इसका फायदा सिर्फ बोइंग को नहीं मिलता। इनके निर्माण से वहां की फैक्ट्रियों, इंजीनियरों और दूसरे कामगारों को रोजगार मिलता है। उदाहरण के लिए, व्हाइट हाउस ने दक्षिण कोरिया की 103 बोइंग विमानों की डील को करीब 36.2 अरब डॉलर का बताया और कहा कि इससे अमेरिका में करीब 1.35 लाख नौकरियों को मदद मिलेगी। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Delhi Nursery Girl Sexual Harassment; School Cab Driver Vikas

Delhi Nursery Girl Sexual Harassment; School Cab Driver Vikas

Hindi News Career Delhi Nursery Girl Sexual Harassment; School Cab Driver Vikas | POCSO Act Safety Advisory 11 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के उत्तरी जिले के पूठ खुर्द स्थित एक निजी स्कूल में 3 साल की नर्सरी छात्रा की सुरक्षा को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल का कैब ड्राइवर विकास बच्ची को चॉकलेट देकर उसे गलत तरीके से छूता था। शुरुआती पुलिस जांच में सामने आया है कि उसने बच्ची के साथ चार बार गलत व्यवहार किया। प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान से शक हुआ पुलिस के मुताबिक, मामला 19 अगस्त को सामने आया, जब परिवार ने बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान देखे। पूछने पर बच्ची ने अपनी मां से ‘बैड अंकल’ का जिक्र किया। दरअसल बच्ची आरोपी का नाम नहीं बता पा रही थी, इसलिए परिवार ने स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी दी। 24 अगस्त को स्कूल में बच्ची को कुछ तस्वीरें और CCTV फुटेज दिखाई गई। बच्ची ने फुटेज के आधार पर कैब ड्राइवर विकास की पहचान की। इसके बाद परिवार ने बवाना पुलिस को सूचना दी और मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। कैमरे में बच्ची के पीछे वॉशरूम तक जाता दिखा आरोपी पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब 8 महीने से स्कूल के लिए कैब चला रहा था। एक अधिकारी ने बताया कि वो बच्ची के पीछे बाथरूम तक गया और वहां उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। जांच में फोन में छोटे बच्चों को चॉकलेट देते हुए उसके कई वीडियो मिले हैं। पॉक्सो के तहत मामला दर्ज, एडवाइजरी भी जारी की रिपोर्ट के मुताबिक BNS की धारा 74 के साथ POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, स्कूल परिसर के CCTV कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) भेजी जा रही है। मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) भी बनाई गई है। घटना के बाद पुलिस ने स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि कुछ स्कूल बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बिना पुलिस वेरिफिकेशन वाले कर्मचारियों और निजी या नॉन-कमर्शियल वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्कूलों को सलाह दी गई है कि ड्राइवर, हेल्पर, गार्ड और ग्रुप-D कर्मचारियों समेत सिर्फ पुलिस-वेरिफाइड स्टाफ को ही काम पर रखा जाए। साथ ही बच्चों के ट्रांसपोर्ट के लिए बिना वेरिफाइड या नॉन-कमर्शियल वाहनों के बजाय रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहन और वैध परमिट वाले वाहन इस्तेमाल किए जाएं। CCTV और बैकअप की बेहतर व्यवस्था हो स्कूलों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा ग या है कि CCTV कैमरे चालू हालत में हों और उनका बैकअप मौजूद रहे। बच्चों की निगरानी के लिए महिला स्टाफ की तैनाती की भी सलाह दी गई है। ——————- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

IBPS Bank Recruitment 2026 | Apply Online 13706 Vacancies Salary

IBPS Bank Recruitment 2026 | Apply Online 13706 Vacancies Salary

Hindi News Career IBPS Bank Recruitment 2026 | Apply Online 13706 Vacancies Salary 17 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) राष्ट्रीय बैंकों में 13,706 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ibpsonline.ibps.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : पद के अनुसार, ग्रेजुएशन की डिग्री, सीए, न्यूनतम 50% अंकों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स/कंप्यूटर साइंस/इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में डिग्री। संबंधित राज्य की स्थानीय भाषा को 8वीं या उससे ज्यादा पढ़ा होना चाहिए। अगर उम्मीदवार ने संबंधित स्थानीय भाषा आठवीं तक नहीं पढ़ी है, तो उसे नियुक्ति के बाद छह महीने के अंदर स्थानीय भाषा सीखना होगी। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल एससी, एसटी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट उम्र की गणना 1 अगस्त 2026 के अनुसार की जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 850 रुपए एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक : 175 रुपए सैलरी : ऑफिसर स्केल-1 : 60,000 – 61,000 रुपए प्रतिमाह ऑफिसर स्केल : 75,000 – 77,000 रुपए प्रतिमाह ऑफिसर स्केल : 80,000 – 90,000 रुपए प्रतिमाह ऑफिस असिस्टेंट : 35,000 – 37,000 रुपए प्रतिमाह एग्जाम पैटर्न : जरूरी डॉक्यूमेंट्स : ग्रेजुएशन की मार्कशीट उम्मीदवार का आधार कार्ड जाति प्रमाण पत्र मूल निवासी प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी पासपोर्ट साइज फोटो पर सिग्नेचर ऐसे करें आवेदन : उम्मीदवार वेबसाइट ibpsonline.ibps.in पर जाएं। अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करें। मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। इसका प्रिंट आउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें पोस्ट ऑफिस में 25,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती:रेलवे में 1599 वैकेंसी; इस हफ्ते निकलीं 27 हजार से ज्यादा नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं इंडिया पोस्ट ऑफिस और रेलवे सहित कई विभागों में 27,260 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मौनी रॉय ने बताया पहला रोल मिलने का किस्सा:सड़क पर चलते हुए ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिला था मौका

मौनी रॉय ने बताया पहला रोल मिलने का किस्सा:सड़क पर चलते हुए ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिला था मौका

एक्ट्रेस मौनी रॉय ने हाल ही में बताया कि उन्हें पहले टीवी शो में रोल सड़क पर चलते हुए मिला था। मौनी ने फराह खान के व्लॉग के लिए हुई बातचीत में बताया कि उन्होंने टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में कृष्णा तुलसी का किरदार निभाकर डेब्यू किया था। यूनिवर्सिटी के बाहर एकता कपूर की टीम ने देखा हाल ही में फराह खान मौनी के मुंबई स्थित घर पहुंची थीं, जहां एक्ट्रेस ने अपने पहले एक्टिंग मौके से जुड़ी बातें शेयर कीं। मौनी ने बताया कि वह अपनी यूनिवर्सिटी के बाहर पैदल चल रही थीं, तभी प्रोड्यूसर एकता कपूर की टीम के किसी व्यक्ति ने उन्हें देखा। फराह यह सुनकर हैरान रह गईं। उन्होंने कहा, “सच में ऐसा हुआ था? क्या बात कर रही है? हम तो ऐसी कहानियां ही सुनते हैं कि कोई कैफे में बैठा था और किसी ने उसे देख लिया।” मौनी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “लेकिन यह सच में हुआ था। बिल्कुल इसी तरह यह मौका मिला था। यह शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ था।” कृष्णा तुलसी का किरदार और कहानी मौनी ने यह भी बताया कि शो में कृष्णा तुलसी की कहानी दिलचस्प थी और उनके आने से तुलसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया था। कृष्णा तुलसी के किरदार को एक अनाथ बच्ची के रूप में दिखाया गया था। शो में तुलसी का किरदार स्मृति ईरानी ने निभाया था। जब तुलसी अपनी जान कुर्बान करने के लिए खुद को गंगा नदी में समर्पित करने का फैसला करती है, तब उसे गंगा में तैरती हुई यह बच्ची मिलती है। इसके बाद इस किरदार का नाम तुलसी के नाम पर कृष्णा तुलसी रखा गया था। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मौनी रॉय की जोड़ी पहले पुलकित सम्राट के साथ बनाई गई थी। बाद में शो में उनकी जोड़ी आकाशदीप सहगल के साथ भी दिखाई गई। इस शो के बाद मौनी ने कई लोकप्रिय टीवी शो में काम किया। उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में ‘देवों के देव महादेव’ शामिल है, जिसमें उन्होंने सती का किरदार निभाया था। मौनी ने ‘नागिन’ के दो सीजन में भी काम किया। इसमें उन्होंने रूप बदलने वाली नागिनों शिवन्या और शिवांगी के किरदार निभाए थे। एकता कपूर ने कई कलाकारों को मौका दिया गौरतलब है कि एकता कपूर ने टीवी इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकारों को मौका दिया है, जिन्होंने आगे चलकर बड़ा नाम बनाया। उन्होंने जैसा मौका सड़क पर चलते हुए मौनी रॉय को दिया था, वैसा ही कुछ करण कुंद्रा के साथ फेसबुक के जरिए किया था। एकता कपूर ने खुद बताया था कि उन्होंने करण कुंद्रा को कैसे डिस्कवर किया था। करण कुंद्रा एक्टिंग में नहीं आना चाहते थे और जालंधर में अपना पारिवारिक बिजनेस संभाल रहे थे। उन्होंने फेसबुक पर अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं। एकता कपूर की नजर उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर पड़ी। उन्हें करण का लुक और एटीट्यूड इतना पसंद आया कि उन्होंने उन्हें मुंबई बुला लिया। इसके बाद एकता ने उन्हें साल 2009 में अपने बड़े शो ‘कितनी मोहब्बत है’ में ‘अर्जुन पुंज’ का मुख्य किरदार देकर लॉन्च किया। सुशांत को एकता ने नाटक के दौरान देखा था वहीं, एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को एकता कपूर ने बालाजी के एक नाटक के दौरान बैकग्राउंड में देखा था। चैनल वाले सुशांत को ‘पवित्र रिश्ता’ में ‘मानव’ के लीड रोल के लिए रिजेक्ट कर रहे थे क्योंकि उनका लुक हीरो जैसा नहीं लग रहा था, लेकिन एकता अपनी जिद पर अड़ गईं और कहा, “इस लड़के की मुस्कान करोड़ों दिलों को जीतेगी।” और वैसा ही हुआ। स्मृति ईरानी को ‘मिस इंडिया’ प्रतियोगिता में रिजेक्ट कर दिया गया था। जब वह बालाजी के दफ्तर में किसी और रोल के लिए आई थीं, तो एकता कपूर ने उन्हें सिर्फ चलते हुए देखा और अपनी टीम से कहा, “यह लड़की हमारी अगली बड़ी स्टार ‘तुलसी’ बनेगी।” टीम के मना करने के बावजूद एकता ने उन्हें कास्ट किया।

रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। लुहांस्क: करीब 99.8% हिस्से पर रूस का नियंत्रण डोनेत्स्क: करीब 80% हिस्से पर रूस का नियंत्रण पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। रूस के ताकतवर लोगों में बढ़ रही नाराजगी? द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों की चिंता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध में सफलता तक सीमित नहीं है। उनमें यह सवाल भी उठने लगा है कि इस युद्ध में करीब पांच साल बर्बाद हो गए और आखिर हासिल क्या हुआ। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” आसान भाषा में इसका मतलब है कि सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं रह गई हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की राजनीति में लोगों को काफी हद तक हिंसा मंजूर हो सकती है, लेकिन हार या नाकामी आसानी से स्वीकार नहीं की जाती। यही वजह है कि पुतिन को कथित तौर पर लगता है कि अगर वह डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करते हैं, तो इसे उनकी हार माना जा सकता है। इससे रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने और उनकी सत्ता को चुनौती मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए युद्ध खत्म करना पुतिन के लिए बड़ी चुनौती एक तरफ युद्ध जारी रखने से रूस को आर्थिक नुकसान और यूक्रेन के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, युद्ध रोकने पर पुतिन को अपनी छवि और सत्ता को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यूक्रेन युद्ध खत्म करने का फैसला पुतिन के लिए सिर्फ रूस की विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि उनकी अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। उनका मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। एस्टोनिया के खुफिया प्रमुख काउपो रोसिन ने भी हाल में कहा था कि अगर पुतिन अभी या आने वाले समय में युद्ध रोकते हैं तो उन्हें रूस में कमजोर नेता के तौर पर देखा जा सकता है। पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। रूस के ताकतवर लोगों में बढ़ रही नाराजगी? द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों की चिंता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध में सफलता तक सीमित नहीं है। उनमें यह सवाल भी उठने लगा है कि इस युद्ध में करीब पांच साल बर्बाद हो गए और आखिर हासिल क्या हुआ। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” आसान भाषा में इसका मतलब है कि सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं रह गई हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की राजनीति में लोगों को काफी हद तक हिंसा मंजूर हो सकती है, लेकिन हार या नाकामी आसानी से स्वीकार नहीं की जाती। यही वजह है कि पुतिन को कथित तौर पर लगता है कि अगर वह डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करते हैं, तो इसे उनकी हार माना जा सकता है। इससे रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने और उनकी सत्ता को चुनौती मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए युद्ध खत्म करना पुतिन के लिए बड़ी चुनौती एक तरफ युद्ध जारी रखने से रूस को आर्थिक नुकसान और यूक्रेन के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, युद्ध रोकने पर पुतिन को अपनी छवि और सत्ता को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यूक्रेन युद्ध खत्म करने का फैसला पुतिन के लिए सिर्फ रूस की विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि उनकी अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

Mandla School Viral Video | Dilapidated Building Students Study Under Tarpaulin

Mandla School Viral Video | Dilapidated Building Students Study Under Tarpaulin

Hindi News Career Mandla School Viral Video | Dilapidated Building Students Study Under Tarpaulin कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक मप्र के मंडला के एक स्कूल का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्कूल के बच्चे, स्कूल के जर्जर भवन के बाहर तिरपाल (पॉलिथीन की छत) लगाकर पढ़ रहे हैं। ये वीडियो मंडला के तलैया टोला का है। इसमें स्कूल बिल्डिंग पर लिखा है स्कूल चलें हम। जबकि बच्चे एक तिरपाल के नीचे बैठे हुए हैं, साथ ही टीचर्स भी उनके पास ही बैठे हैं। पास ही धूप में एक व्हाइट बोर्ड लगा है और यही बोर्स इन सभी बच्चों का भविष्य है क्योंकि सभी इसी बोर्ड के भरोसे पढ़ रहे हैं। 1-5 तक की क्लासेस एक ही जगह लग रहीं रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कूल में पहली क्लास से लेकर पांचवी क्लास के बच्चे हैं। हालांकि इस छात्रों की संख्या कम है लेकिन ये सभी छात्र एक साथ बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल मे लगभग 25-28 छात्र हैं और स्कूल में दो शिक्षक हैं। दीवारों पर बड़े-बड़े क्रेक, छत भी टपकती है वीडियो देखकर किसी को भी लग सकता है कि भला ये बच्चे बिल्डिंग होने के बाद भी तिरपाल के नीचे क्यों पढ़ रहे हैं। दरअसल ये स्कूल पूरी तरह जर्जर है। दीवारों पर बड़े-बड़े क्रेक हैं। बारिश में किताबें भीगी सुखाने के लिए रखीं, जिससे बच्चों की सुरक्षा दांव पर है। बरसात में स्कूल की छत भी टपकती है। इसी वजह से टीचर्स छात्रों को बाहर बैठाकर पढ़ा रहे हैं। स्कूल में छत और दीवारों से सीमेंट की पपड़ी भी गिरती रहती है। कई बार सरकार को लिख चुके हैं चिट्ठी रिपोर्ट के मुताबिक टीचर्स ने कहा- बच्चे पढ़ना चाहते हैं लेकिन कोई व्यवस्था नहीं है। हम उन्हें पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हम कई बार भवन की मरम्मत करने के लिए गुहार लगा चुके हैं पर अब तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई है। टीचर्स रोज खुद बांधते हैं तिरपाल टीचर्स का कहना है कि हम पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चों को सुरक्षित रख सकें। स्कूल की जर्जर हालत की वजह से हम रोज खुद ही तिरपाल बांधते हैं और पढ़ाने के बाद उसके अगले दिन के लिए खोलकर रखते हैं। यहां सांप-बिच्छू के आने का भी खतरा है, कई बार निकल भी आते हैं। हम बस कोशिश कर रहे हैं कि स्कूल आते इन बच्चों को अपनी पूरी कोशिश कर बेहतर शिक्षा दे पाएं। ——————– ये खबर भी पढ़ें.. दिल्ली के प्ले-स्कूल में बच्चे को कुर्सी से बांधकर पीटा:पेरेंट्स ने कहा- 3 साल के बच्‍चे को लात मारी, थप्‍पड़ मारे; CCTV में दर्ज हुई मारपीट उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर स्थित एक प्लेस्कूल में तीन साल के बच्चे को कुर्सी से बांधकर कथित तौर पर बेरहमी से पीटने का एक वीडियो सामने आया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

6-Year-Old Aditya Kumar Viral Video Controversy

6-Year-Old Aditya Kumar Viral Video Controversy

Hindi News Career BPSC Protest Patna: 6 Year Old Aditya Kumar Viral Video Controversy 4 मिनट पहले कॉपी लिंक पटना में BPSC TRE-4 उम्मीदवारों के प्रदर्शन के दौरान 6 साल के बच्चे का वीडियो पहले ही दिन से खूब वायरल हुआ। इस बच्चे का नाम आदित्य कुमार है। वह पहली कक्षा का छात्र है। आदित्य का आरोप है कि 25 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान उसे और उसके माता-पिता को जब पुलिस ले गई तो थाने में पुलिस ने उनकी पिटाई की। आदित्य ने आरोप लगाया गया है कि BPSC आंदोलन के दौरान उसे करीब आठ घंटे तक अवैध तरीके से थाने में रखा गया। इस दौरान उसे अपने माता-पिता से मिलने नहीं दिया गया। दशरथ मांझी का उदाहरण देते हुए आदित्य ने कहा – जैसे मांझी ने पहाड़ का घमंड तोड़ा, वैसे ही मैं सरकार का घमंड तोड़ूंगा। आदित्य कुमार गर्दनीबाग धरना स्थल पर हाथों में अंग्रेजी में लिखित भारतीय संविधान की किताब लेकर बैठा है। उसका कहना है कि वह संविधान पढ़ रहा है। संविधान के अनुसार वह अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। इस धरना स्थल पर आदित्य के पिता जितेंद्र कुमार और मां मुन्नी कुमारी भी मौजूद रहे। इसके अलावा शिवनंदन भारती जैसे कुछ वकीलों ने भी उसका सपोर्ट किया। उसकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उससे मुलाकात करने का समय दें ताकि वह पटना पुलिस की शिकायत कर सके। हालांकि इस बात को लेकर वह बिहार के डीजीपी से पहले ही शिकायत कर चुका है। 31 अगस्त की देर रात को पप्पू यादव आदित्य से मिलने पहुंचें और आदित्य का धरना खत्म करवाया। उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी का संदेश लेकर आदित्य से मिलने पहुंचे है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी आदित्य से मिलने आएंगे। सांसद ने कहा कि आदित्य के परिवार के साथ गलत हुआ है। इस मामले में न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा। अपनी बेबाक बातों से चर्चा में आया आदित्य बिहार छात्र आंदोलन में आदित्य ने माइक के सामने छात्रों के समर्थन में बात की थी। उसने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से युवाओं के लिए नौकरी देने की मांग उठाई। आदित्य ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग भी की थी। आदित्य हाथ में तिरंगा लेकर बस की छत पर चढ़ गया और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग करते हुए पुलिस से सवाल किया – आप सुरक्षा करते हैं या मर्डर करते हैं? इसके बाद पुलिस उसे सुरक्षा के लिए थाने ले गई। पहले भी प्रदर्शन में पहुंच चुका है आदित्य आदित्य इससे पहले पेपर लीक और सिवान में AK-47 मामले को लेकर तेजस्वी यादव के लोकभवन मार्च में भी शामिल हुआ था। इसके अलावा गर्दनीबाग में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच भी वह पहुंचा था। वहां उसने कहा था कि वह भी छात्र है और भविष्य में उसके साथ भी ऐसी समस्या हो सकती है। ———————————————————————————————— ये खबर भी पढ़ें पोस्ट ऑफिस में 25,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती:रेलवे में 1599 वैकेंसी; इस हफ्ते निकलीं 27 हजार से ज्यादा नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं इंडिया पोस्ट ऑफिस और रेलवे सहित कई विभागों में 27,260 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔