Saturday, 17 Oct 2026 | 04:49 PM

Trending :

बंगला टूटने की खबरों के बीच दुर्गा पंडाल पहुंचीं काजोल:मां तनुजा, बहन तनिषा और बच्चों के साथ दिखीं; जया-श्वेता बच्चन भी आईं नजर बंगला टूटने की खबरों के बीच दुर्गा पंडाल पहुंचीं काजोल:मां तनुजा, बहन तनिषा और बच्चों के साथ दिखीं; जया-श्वेता बच्चन भी आईं नजर Kavya Maran Anirudh Ravichander Wedding रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर संगीतकार देवा का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर संगीतकार देवा का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत जयपुर में ‘आश्रम-4’ की शूटिंग पूरी, बॉबी देओल मुंबई रवाना:एयरपोर्ट पर मीडिया और फैंस का जताया आभार; पिंकसिटी में एक महीने चला शूटिंग शेड्यूल
EXCLUSIVE

Nashik Adivasi Student Protest Vs Maharashtra Politics; Congress BJP

Nashik Adivasi Student Protest Vs Maharashtra Politics; Congress BJP

Hindi News Career Nashik Adivasi Student Protest Vs Maharashtra Politics; Congress BJP | Tribal Dept Corruption 1 मिनट पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी विकास विभाग में भ्रष्ट, अव्यवस्थित कामकाज, आश्रमशालाओं और छात्रावासों में छात्रों की लगातार हो रही मौतों को नजरंदाज करने वाली सरकार के विरोध में मंगलवार को राज्य भर के आदिवासी छात्रों ने आंदोलन किया। मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर हजारों छात्रों ने जिलाधिकारी कार्यालय और आदिवासी विकास भवन तक मार्च निकाला। मांगें पूरी होने तक पीछे न हटने का संकल्प लेते हुए उन्होंने सरकार की चुप्पी का विरोध किया। 2 साल में 584 छात्रों की मौत हुई है राज्य की आश्रमशालाओं में दो वर्षों के भीतर विभिन्न कारणों से लगभग 584 छात्रों की मृत्यु हुई है। छात्रों ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके इस्तीफा की मांग की। इस मांग के साथ-साथ अन्य विभिन्न मांगों को लेकर छात्रों ने 18 अगस्त से नासिक के हुतात्मा अनंत कान्हेरे मैदान में आंदोलन शुरू किया है। आमरण अनशन कर रहे तीन छात्रों का स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने दो बार आदिवासी विकास भवन तक मोर्चा निकाला, फिर भी सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदा किया। इसी वजह से मंगलवार को ‘सकल आदिवासी विद्यार्थी कृति समिति’ की ओर से विशाल ‘उलगुलान मोर्चा’ निकाला गया। कांग्रेस नेताओं ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, नेता विजय वडेट्टीवार, डॉ. विक्रांत भूरिया और वसंत पुरके समेत कई बड़े नेताओं ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की मांगें सुनीं और उनका पूरा साथ देने का वादा किया। 10 दिन से ज्यादा समय से भूख हड़ताल पर छात्र इस बीच, छात्रों की भूख हड़ताल पिछले 10 दिनों से ज्यादा समय से जारी है। कई छात्रों की सेहत बिगड़ने की खबर है, कुछ का जिला सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है, तो कुछ स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें.. बच्चे स्कूल के बाहर तिरपाल के नीचे पढ़ रहे:शिक्षक बोले- स्कूल कभी भी गिर सकता है, छत से पानी भी टपक रहा; वीडियो वायरल मप्र के मंडला के एक स्कूल का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्कूल के बच्चे, स्कूल के जर्जर भवन के बाहर तिरपाल (पॉलिथीन की छत) लगाकर पढ़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

भारत ने पाक में हिंदू मंदिर गिराने की निंदा की:पंजाब में 100 साल पुराने मंदिर की जगह मदरसा बनाने का आरोप

भारत ने पाक में हिंदू मंदिर गिराने की निंदा की:पंजाब में 100 साल पुराने मंदिर की जगह मदरसा बनाने का आरोप

भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 साल से भी ज्यादा पुराने हिंदू मंदिर को गिराए जाने की कड़ी निंदा की है। अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मंदिर की जमीन पर या उसके पास मदरसा बनाने के लिए इसे गिराया गया। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल पर चिंता पैदा करने वाला हमला बताया है। भारत के मुताबिक, यह धार्मिक धरोहर की सुरक्षा में अधिकारियों की चिंताजनक नाकामी को दिखाता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:विदेश मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी

इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:विदेश मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी

इजराइल ने गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना तैयार कर ली है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बुधवार को कहा कि सरकार अमेरिका के यह तय करने का इंतजार कर रही है कि उन्हें कहां ले जाया जाएगा। काट्ज ने इजराइली न्यूज साइट Ynet और अखबार Yedioth Ahronoth की कॉन्फ्रेंस में कहा, “गाजा का कोई वास्तविक समाधान अंत में इस पलायन के बिना नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा, “सरकार उन्हें बाहर निकालने के लिए संगठित और तैयार है। उन्हें समुद्र, हवा या हर संभव तरीके से बाहर ले जाया जाएगा।” अमेरिका की मंजूरी का इंतजार अमेरिकी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध को वॉशिंगटन स्थित विदेश विभाग के पास भेज दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में दुनिया के कई देशों को चौंकाते हुए कहा था कि गाजा पट्टी से सभी 20 लाख फिलिस्तीनियों को चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने इजराइली बमबारी से तबाह भूमध्यसागरीय इलाके को लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। यह बमबारी 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुई थी। मिस्र के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प ट्रम्प को इस प्रस्ताव पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसमें मिस्र भी शामिल था, जो इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव की निंदा की। उनके लिए अपनी जमीन से जबरन हटाने की कोई भी कोशिश 1948 में इजराइल के बनने के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन की याद दिलाती है, जिसे “नकबा” यानी तबाही कहा जाता है। अक्टूबर में गाजा युद्धविराम का ऐलान करते समय ट्रम्प ने इस इलाके के लिए 20 बिंदुओं की योजना बताई थी। इसमें जबरन विस्थापन नहीं करने की बात शामिल थी। काट्ज बोले- योजना रद्द नहीं हुई अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले काट्ज ने कहा कि ट्रम्प ने इस विचार को सिर्फ “फ्रीज” किया है। वे फिलिस्तीनियों को रखने वाले देशों की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि मिस्र विकल्प नहीं है। काट्ज ने कहा, “योजना रद्द नहीं हुई है। इस पर हर समय चर्चा हो रही है, अभी भी हो रही है। मुझे लगता है कि सभी की भलाई के लिए कोई दूसरा समाधान नहीं है।” उन्होंने कहा, “लेकिन इसे लागू करने के लिए हमें अमेरिका की जरूरत है। हमें उसकी मंजूरी कब मिलेगी? जब यह साफ हो जाएगा कि युद्धविराम के तहत हमास अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर रहा है।” काट्ज का दावा- गाजा के 80% लोग जाना चाहते हैं काट्ज ने अपने दावे का कोई स्रोत बताए बिना कहा कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि हमास उन्हें रोक रहा है। कब्जे वाले इलाके में आम लोगों को जबरन हटाना जेनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और काट्ज के पूर्ववर्ती योआव गैलेंट के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इजराइल और अमेरिका दोनों इन आरोपों से इनकार करते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के अभूतपूर्व हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय हमास के अधीन काम करता है और उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिस्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Darshan Jariwala Statement On Wife Apra Mehta Controversy

Darshan Jariwala Statement On Wife Apra Mehta Controversy

10 मिनट पहले कॉपी लिंक अपरा मेहता और दर्शन जरीवाला की शादी 1980 में हुई थी। दोनों 2003 से अलग रह रहे हैं, लेकिन उनका कानूनी तलाक कभी नहीं हुआ। सीनियर एक्टर दर्शन जरीवाला ने अलग रह रहीं पत्नी और एक्ट्रेस अपरा मेहता के उन्हें बदसूरत कहने के आरोपों पर सफाई दी। दरअसल, कुछ समय पहले अपरा मेहता ने दर्शन जरीवाला से सेपरेशन पर बात की थी। हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि दर्शन घर छोड़कर चले गए थे और उन्हें अब तक की सबसे बदसूरत महिला कहा था। अपरा ने यह भी कहा था कि दर्शन ने उनसे कहा था कि उनका प्यार खत्म हो गया है। अब दर्शन ने अपनी अलग रह रहीं पत्नी के इन आरोपों पर जवाब दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… सिद्धार्थ कनन से बातचीत में दर्शन ने अपरा की बताई घटनाओं को गलत बताया। दर्शन ने कहा, “एक न्यूरोलॉजिकल घटना होती है, जिसमें समय के साथ किसी घटना की याद बदलती रहती है। मैं बहुत उदारता से कह सकता हूं कि यह गलत याददाश्त का मामला है। जिस तरह से इसे बताया गया है, वैसा कुछ हुआ ही नहीं था।” दर्शन ने रूप-रंग पर टिप्पणी से इनकार किया अभिनेता ने इस बात से भी इनकार किया कि उन्होंने अपरा के रूप-रंग पर कोई टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें उनके स्वभाव से मेल नहीं खातीं। दर्शन ने कहा, “मैं ऐसा आदमी नहीं हूं, जो किसी साधारण दिखने वाली महिला से भी कहे कि वह बदसूरत है। ऐसा कहना बिल्कुल गैरजरूरी होता। अगर मैं खुद को अच्छी तरह जानता हूं, तो मैं व्यक्ति के अंदर की बात करता, उसके बाहरी रूप की नहीं।” दर्शन ने कहा कि अपरा विक्टिम कार्ड खेलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अपने अतीत से आगे बढ़ चुके हैं और आज अपनी जिंदगी में बहुत खुश हैं। दर्शन जरीवाला 2010 से इंटीरियर डिजाइनर और आर्किटेक्ट अनाहिता इटालिया के साथ रिश्ते में हैं। दर्शन बोले-इतने साल बाद अब ये बातें क्यों? दर्शन ने सवाल उठाया कि सेपरेशन के कई दशक बाद ये आरोप अब क्यों सामने आए। उन्होंने कहा, “मैं समझ ही नहीं सकता कि अलग होने के 23 साल बाद वह इन बातों पर क्यों बोलना चाहती हैं। इससे पहले कभी नहीं। अगर यही इतिहास है और उन्हें इसे मीडिया तक ले जाने का मौका मिला था, तो अब क्यों?” उन्होंने आगे कहा, “हम उनके दिमाग में बैठकर उनकी नीयत का फैसला नहीं कर सकते। मैं अपना सच जानता हूं। मेरा सच मेरा सच है। झूठ की कोई सीमा नहीं होती। मैं उनकी मंशा का अंदाजा भी नहीं लगा सकता।” दर्शन ने कहा, “जो लोग मुझे सच में जानते हैं, वे पूरी कहानी अच्छी तरह जानते हैं, क्योंकि मेरी बात कभी नहीं बदलती। सच के कई वर्जन नहीं होते।” दर्शन के मुताबिक, 1982 में शादी के बाद धीरे-धीरे दोनों की प्राथमिकताएं और सोच अलग होती गईं। उन्होंने कहा कि निजी हालात, करियर और आर्थिक स्थिति में बदलाव ने भी रिश्ते में दरार की वजह बनाई। एक्टर ने कहा, “दो लोग समय के साथ अलग तरह से बढ़ते हैं। अगर आप दो पौधे साथ लगाते हैं, तो वे अलग-अलग तरह से बढ़ेंगे। उनकी प्राथमिकताएं अलग थीं और मेरी अलग।” उन्होंने कहा, “मेरे हालात बदल गए थे, क्योंकि मैं एक फेल बिजनेस प्लान में शामिल था। हम अपने करियर को किस तरह आगे ले जाना चाहते थे, इस पर भी हमारी सोच अलग थी।” दर्शन ने कहा कि दोनों अपनी बेटी को अच्छा बचपन देने को लेकर साफ थे। उन्होंने कहा, “रिश्ता कभी-कभी बदलावों से गुजरता है।” तलाक के लिए कागज दिए, जज ने आवेदन खारिज किया दर्शन ने यह भी बताया कि उनकी शादी कानूनी रूप से खत्म क्यों नहीं हुई। उनके मुताबिक, उन्होंने तलाक की अर्जी दी थी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा, “मैंने तलाक के कागज दिए थे, लेकिन जज ने आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी सहमति नहीं दी।” दर्शन ने दावा किया, “वह तलाक के लिए राजी हो गई थीं, लेकिन जज के सामने आखिरी समय पर उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। शायद वह खुद को एक अच्छी और पीड़ित महिला के रूप में पेश कर रही हैं।” दर्शन ने सांताक्रूज वेस्ट स्थित घर छोड़ने की बात भी बताई। उन्होंने कहा कि वह घर से चले गए और अपरा व अपनी बेटी को वहीं रहने दिया। उन्होंने कहा, “मैं बस अपना घर छोड़कर चला गया था। मेरे पास उन्हें देने के लिए जितना था, मैंने दे दिया। अगर किसी को गुजारा भत्ता मांगना चाहिए था, तो वह मैं होता, क्योंकि उस समय मेरे हालात ऐसे थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।” दर्शन ने कहा कि उनके पास दूसरा घर नहीं था और घर छोड़ने के तुरंत बाद किराए का मकान लेने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। इसलिए वह कुछ समय तक दोस्तों के साथ रहे और बाद में एक छोटा-सा घर किराए पर ले सके। उन्होंने कहा, “हालात ऐसे थे कि मुझे यह सब दर्द झेलना पड़ा।” बेटी के साथ अपने रिश्ते को दर्शन ने करीबी बताया इंटरव्यू में दर्शन ने अपनी बेटी के साथ रिश्ते पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों लगातार संपर्क में रहते हैं और उनके बीच करीबी रिश्ता है। दर्शन ने कहा, “मैं एक अच्छा पिता हूं। मैं उसके संपर्क में रहता हूं। उसकी जिंदगी में होने वाली सभी बातों की मुझे अच्छी जानकारी रहती है। मेरे साथ उसका बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। उसके पास मेरा दिया हुआ डेबिट कार्ड भी है।” अपरा मेहता और दर्शन जरीवाला की बेटी का नाम खुशाली जरीवाला है। वह एक थिएटर कलाकार, अभिनेत्री और लेखिका हैं। दर्शन ने अपरा के इस दावे को भी खारिज किया कि उन्होंने अपनी बेटी की परवरिश अकेले की। उन्होंने कहा कि लोग कई बार अपने भावनात्मक अनुभवों के आधार पर अतीत को अलग तरह से देखते हैं। उन्होंने कहा, “कभी-कभी हम अपनी जिंदगी के खालीपन को भरने की कोशिश करते हैं। जहां कुछ नहीं होता, वहां जानबूझकर या अनजाने में अजीब चीजें रख देते हैं।” दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Malaria Tablet Tragedy; Andhra Pradesh 7 Year Old Girl Death Case

Malaria Tablet Tragedy; Andhra Pradesh 7 Year Old Girl Death Case

Hindi News Career Malaria Tablet Tragedy; Andhra Pradesh 7 Year Old Girl Death Case | Chloroquine 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आंध्र प्रदेश के पोलावरम जिले के गोल्लागुप्पा गांव में मंगलवार, 2 सितंबर को मलेरिया से बचाव के लिए बांटी गई क्लोरोक्वीन (chloroquine) की गोलियां खाने के बाद एक 7 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मलेरिया के मामले सामने आने पर दी गोलियां चिंतूर के सहायक आदिवासी कल्याण अधिकारी तुलसी दास के मुताबिक, मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे गोल्लागुप्पा गांव के एक प्राथमिक विद्यालय में 71 छात्रों को क्लोरोक्वीन की गोलियां दी गई थीं। ये दवाईयां गांव में मलेरिया के मामले सामने आने के बाद सुरक्षा के तौर पर दी गई थीं। जिला जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, ये मामला लक्ष्मीपुरम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का है, क्योंकि मंगलवार तक गांव में कम से कम 6 मलेरिया पॉजिटिव मामले सामने आ चुके थे। घर लौटने के बाद कई छात्रों को उल्टी और बाकी लक्षण दिखने लगे। स्कूल रिमोट एरिया में होने से एम्बुलेंस पहुंचना मुश्किल है, इसलिए अभिभावक बच्चों को ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल बांदिरेवु जंक्शन तक ले गए, जहां से उन्हें पहले लक्ष्मीपुरम PHC और फिर तेलंगाना के भद्राचलम एरिया अस्पताल भेजा गया। 7 साल की बच्ची बेहोश हुई, फिर मौत दूसरी कक्षा की छात्रा, 7 वर्षीय मडिवि जमुना- जो कोया आदिवासी समुदाय से थी। गोली खाने के बाद वो बेहोश हो गई। बच्ची को ये बेहोशी शुगर लो होने की वजह से आई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि मौत की सटीक वजह की जांच अभी भी जारी है। दवा लेने के बाद कुल 53 लोग बीमार रिपोर्ट्स के मुताबिक, दवा खाने के बाद 52-53 लोग बीमार पड़े हैं, जिनमें से 47 बच्चे हैं। इनमें से 29 को तेलंगाना के एक अस्पताल में और 24 को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। जिला कलेक्टर दिनेश कुमार के मुताबिक, ‘इलाज जारी है मरीजों की सेहत स्थिर है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।’ जांच के लिए फॉरेसिंक लैब भेजी गई दवाएं जिला कलेक्टर के मुताबिक, क्लोरोक्वीन गोलियों का क्वालिटी-कंट्रोल टेस्ट संतोषजनक मिला है। हालांकि, घटना की सटीक वजह जानने के लिए गांव में दी गई गोलियों का वही बैच विशाखापत्तनम स्थित फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। सीएम नायडू ने दिए जांच के आदेश जिला प्रशासन ने तीन बाल रोग विशेषज्ञों समेत विशेषज्ञ मेडिकल टीमें तैनात की हैं। एक मेडिकल कैंप लगाया और मरीजों की निगरानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को बेहतर से बेहतर इलाज और जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सीनियर स्वास्थ्य अधिकारियों और जिला कलेक्टर से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। मामला क्यों गंभीर सवाल खड़ा करता है सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक दवा की खुराक हर व्यक्ति के वजन के अनुसार अलग-अलग तय होनी चाहिए- खासकर बच्चों के लिए। पोलावरम में 71 लोगों को एक साथ गोलियां बांटे जाने और इनमें से एक 7 साल की बच्ची की मौत होने की घटना यह सवाल उठाती है कि क्या इसे बांटने के दौरान उम्र/वजन के हिसाब से खुराक तय करने के नियमों का पालन किया गया? फिलहाल जांच जारी है। ——————– ये खबर भी पढ़ें.. 1- दिल्ली के प्ले-स्कूल में बच्चे को कुर्सी से बांधकर पीटा:पेरेंट्स ने कहा- 3 साल के बच्‍चे को लात मारी, थप्‍पड़ मारे; CCTV में दर्ज हुई मारपीट उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर स्थित एक प्लेस्कूल में तीन साल के बच्चे को कुर्सी से बांधकर कथित तौर पर बेरहमी से पीटने का एक वीडियो सामने आया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Asim Munir Military Powers; Pakistan Army Chief Dictatorship Strategy Explained

Asim Munir Military Powers; Pakistan Army Chief Dictatorship Strategy Explained

पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। . इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं? जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई… 20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे। नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं। डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें… CDF मुनीर की अगुवाई में एक ‘डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर’ बनेगा, जो तीनों सेनाओं के कामकाज और जंग से जुड़े फैसले लेगा। CDF के पास सेना प्रमुखों को छोड़कर तीनों सेनाओं के बाकी सारे ऑफिसर्स को रिटायर करने, हटाने, सर्विस खत्म करने या बनाए रखने या रिटायरमेंट में छूट देने का हक होगा। CDF नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस के मामलों में पीएम के प्रमुख सलाहकार होंगे। सरकार और CDF सेना से जुड़े कानूनों में बदलाव भी कर सकते हैं। नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें… CDF मुनीर के पास परमाणु हथियारों का कंट्रोल बढ़ जाएगा। इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ न्यूक्लियर हथियारों की नेशनल कमांड अथॉरिटी के मेंबर होते थे। इसकी अध्यक्षता पीएम के जिम्मे होती है। CDF को राष्ट्रपति के बराबर कानूनी सुरक्षा मिलेगी, यानी पूरी जिंदगी कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता। सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए? जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ। पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी। क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की। उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया। ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल के दिनों आसिम मुनीर की तस्वीर। 1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी 25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली। जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे। आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे। PoK में सीमा के पास सिंगल बैरल रॉकेट लॉन्चर का इंस्पेक्शन करते आर्मी चीफ मुनीर (दाएं)। सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा 25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा। मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था। 30 अगस्त 2018 को मुनीर से हाथ मिलाते तब के पाक पीएम इमरान खान। इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है। हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया। मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे। मुनीर के आर्मी चीफ बनने के बाद इमरान ने पाक सेना पर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। ट्रक पर मुनीर की ये तस्वीर अगस्त 2023 की है, जब

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं है सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। सुपरसोनिक मिसाइल कम से कम करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज जा सकती हैं। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। 3 साल तक जारी रहा काम FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरानी सेना में तैनात हो चुकी है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।

Kareena Kapoor Education List | Kapoor Family Members Academic Qualifications

Kareena Kapoor Education List | Kapoor Family Members Academic Qualifications

8 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने हाल ही में बताया कि उन्होंने 11वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। हनुमान दास के यूट्यूब चैनल में बातचीत में करीना ने कहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की, जिसका अफसोस उन्हें सफलता मिलने के बाद भी रहा। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और यह बात मेरे साथ बनी रही। मुझे मौका मिला था, लेकिन फिल्मों में आ गई और क्लास 11 के बाद आगे पढ़ाई नहीं की।” करीना ने माना कि लोग उनके पढ़ाई छोड़ने के फैसले पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन वह एक्ट्रेस के तौर पर खुद को साबित करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वह अपने दिल की सुनकर आगे बढ़ना चाहती थीं। करीना ने साफ कहा कि शिक्षा पूरी न करना आज भी उनके लिए पछतावे की बात है। उन्होंने कहा, “एजुकेशन ऐसी चीज है, जिसे पूरा न करने का मुझे अफसोस है।” बच्चों को पहले पढ़ाई पूरी करने की सलाह दी करीना ने बताया कि उनके अपने अनुभव का असर इस बात पर भी पड़ा है कि वह अपने बेटों की परवरिश किस तरह करती हैं। वह चाहती हैं कि तैमूर और जेह अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ें, लेकिन उससे पहले अपनी शिक्षा पूरी करें। उन्होंने कहा, “इसीलिए मैंने अपने बेटों पर पहले अपनी शिक्षा पूरी करने और फिर अपने दिल की सुनने के लिए जोर दिया है।” तैमूर का जन्म 20 दिसंबर 2016 को और जेह (जहांगीर) का जन्म 21 फरवरी 2021 को हुआ था। बता दें कि करीना कपूर की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के जमनाबाई नरसी स्कूल और देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल से हुई थी इसके बाद उन्होंने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई की। हालांकि, उन्होंने कॉलेज की डिग्री पूरी नहीं की। करीना ने हार्वर्ड समर स्कूल से माइक्रो कंप्यूटर का तीन महीने का कोर्स भी किया था। इसके बाद उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन एक्टिंग में करियर बनाने के लिए उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी। करीना शिक्षा के लिए काम करती हैं करीना ने बताया कि भारत में युवा लड़कियों की शिक्षा को सपोर्ट करने के लिए UNICEF से जुड़ने की एक वजह उनका अपना अनुभव भी है। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा यह अफसोस रहा कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की थी। करीना 2014 से UNICEF इंडिया से जुड़ी हुई हैं और लड़कियों की शिक्षा, जेंडर इक्वालिटी और बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए काम कर रही हैं। करीना के वर्कफ्रंट की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म सिंघम अगेन (2024) में नजर आई थीं। वहीं वो जल्द मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म दायरा में दिखाई देंगी। दायरा में करीना एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आएंगी। दायरा 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। …………….. करीना से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… करीना कपूर ने प्रेग्नेंसी की अफवाहों पर रिएक्शन दिया:फूले पेट की तस्वीर शेयर की, पैपराजी से बोलीं- ‘तुम लोग पागल कर देते हो’ करीना कपूर खान ने हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की अफवाहों पर मजाकिया अंदाज में जवाब दिया था। करीना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर मेकअप आर्टिस्ट मितेश राजानी की एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो अपना फूला हुआ पेट दिखा रहे हैं। पोस्ट के बैकग्राउंड में फिल्म ‘हम आपके हैं कौन..!’ का गाना ‘चॉकलेट लाइम जूस’ चल रहा था और इसके साथ हंसने वाले और पिज्जा वाले इमोजी लगाए गए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔