Tuesday, 20 Oct 2026 | 01:03 PM

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ग्रीस एयर शो में करतब दिखा रहा जेट क्रैश:2 पायलट सवार थे, मौत की जानकारी नहीं

ग्रीस एयर शो में करतब दिखा रहा जेट क्रैश:2 पायलट सवार थे, मौत की जानकारी नहीं

ग्रीस की वायुसेना का दो सीटों वाला फैंटम F-4 जेट शनिवार को एयर शो के दौरान क्रैश हो गया। हादसा एथेंस के उत्तर में स्थित तानाग्रा एयर फोर्स बेस पर हुआ। विमान के गिरते ही आसमान में काले धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। हादसे के वक्त एयर शो देखने के लिए कई हजार लोग मौजूद थे। हालांकि, दर्शकों में किसी के घायल होने की तत्काल खबर नहीं है। वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि विमान में सवार दोनों पायलटों का क्या हुआ, यह अभी साफ नहीं है। यह भी पता नहीं चल पाया है कि वे हादसे से पहले विमान से इजेक्ट कर पाए थे या नहीं। आग बुझाने में जुटी रेस्क्यू टीम जेट के क्रैश होते ही घटनास्थल पर आग लग गई। आग बुझाने के लिए एक हेलिकॉप्टर काफी देर तक मौके के ऊपर मंडराता रहा और पानी का छिड़काव करता रहा। जमीन पर मौजूद बचाव दल भी आग पर काबू पाने में जुटे रहे। हादसा तानाग्रा एयर फोर्स बेस पर आयोजित सालाना ‘एथेंस फ्लाइंग वीक’ एयर शो के दौरान हुआ। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि फैंटम F-4 किस वजह से क्रैश हुआ। हादसे की जांच की जा रही है। खबर अपेडट हो रही है…

रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 72 घंटे तक हमले रोकने का आदेश दिया है। क्रेमलिन ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। पुतिन का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मॉस्को पहुंचे हैं। दोनों रुकी हुई शांति वार्ता को फिर शुरू कराने की कोशिश करेंगे। यूक्रेन पहले ही दोनों के दौरे की जानकारी दे चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी दूतों के यूक्रेन दौरे के दौरान उनकी सेना हवाई हमले रोक देगी। उन्होंने रूस से भी ऐसा ही करने को कहा था। ईरान जंग की वजह से अमेरिका का यूक्रेन पर फोकस हटा अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, पिछले छह महीनों में इन कोशिशों की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसकी एक वजह अमेरिका का ईरान युद्ध पर ज्यादा फोकस करना भी बताई गई है। विटकॉफ और कुशनर इससे पहले जनवरी में मॉस्को पहुंचे थे। तब दोनों ने क्रेमलिन में पुतिन से मुलाकात की थी। अब एक बार फिर दोनों के मॉस्को पहुंचने पर रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने उनका स्वागत किया। रूस ने हाल में कीव पर हमले बढ़ाए रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इस बीच, कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर रूसी हवाई हमले तेज हुए हैं। यूक्रेन भी रूस के अंदर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। शुक्रवार को एक रूसी ड्रोन ने कीव में यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU के मुख्यालय को निशाना बनाया। SBU रूस के अंदर किए जाने वाले यूक्रेन के कई लंबी दूरी के हमलों में भी भूमिका निभाती है। उधर, यूक्रेन रूस के सैन्य ठिकानों के अलावा तेल रिफाइनरियों और ई-कॉमर्स केंद्रों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध क्षमता और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है। शनिवार को जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात में कीव और बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि ये हमले उस वक्त हुए, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के यूक्रेन पहुंचने की तैयारी चल रही थी। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने रूस के इन हमलों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का हवाई क्षेत्र अब ड्रोन और मिसाइलों की वजह से खतरनाक हो चुका है। हालांकि, अमेरिकी दूतों की शांति कोशिशों के लिए यूक्रेन की तरफ से कोई खतरा नहीं है। 3 घंटे हमले रोकने का आदेश कितना असरदार होगा? पुतिन का 72 घंटे तक कीव पर हमले रोकने का आदेश अमेरिकी दूतों की मॉस्को और फिर कीव यात्रा के दौरान बातचीत के लिए कुछ समय जरूर दे सकता है। हालांकि, इसे रूस-यूक्रेन के बीच पूरा युद्धविराम नहीं माना जा सकता। यह आदेश सिर्फ कीव पर रूसी हमले रोकने तक सीमित है। दूसरे इलाकों में दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रह सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन 72 घंटों में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर कोई सहमति बन पाएगी, या समय खत्म होते ही रूस फिर हमले शुरू कर देगा। इसलिए अब सबकी नजर विटकॉफ और कुशनर की मॉस्को-कीव यात्रा पर है। अगर दोनों पक्ष किसी अहम मुद्दे पर सहमत होते हैं, तो यह 72 घंटे की रोक आगे की बातचीत का रास्ता खोल सकती है। लेकिन फिलहाल इसे युद्ध खत्म होने की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।

Pentagon Probes Leak: Military Officers Undergo Polygraph Test

Pentagon Probes Leak: Military Officers Undergo Polygraph Test

वॉशिंगटन डीसी22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी लीक होने की जांच तेज हो गई है। यह पता लगाने के लिए कि जानकारी किसने मीडिया तक पहुंचाई, पेंटागन ने करीब 50 सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है। टेस्ट के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी पत्रकारों या मीडिया से जुड़े लोगों को दी थी। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के घटते भंडार से जुड़ी कोई जानकारी बाहर साझा की थी। पॉलीग्राफ को आम भाषा में झूठ पकड़ने वाला टेस्ट कहा जाता है। इसमें धड़कन, सांस और पसीने जैसे बदलावों को रिकॉर्ड कर सच-झूठ का पता लगाया जाता है। अगस्त में हथियार लीक होने की खबर मीडिया में लीक हुई थी यह कार्रवाई अगस्त में आई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद हुई, जिनमें बताया गया था कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ जरूरी हथियारों का भंडार कम हुआ है। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर भी शामिल थे। जॉइंट स्टाफ में करीब 1,500 से 2,000 अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यह अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के लिए दुनिया भर में चल रहे सैन्य अभियानों, नीतियों और युद्ध की योजनाओं के बीच तालमेल बनाने वाली प्रमुख संस्था है। 50 सैन्य अधिकारियों का टेस्ट कराया जाना असामान्य माना जा रहा है। जांच से जुड़े जानकारों के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट का मकसद सिर्फ यह पता लगाना नहीं था कि सीक्रेट जानकारी किसने लीक की। इससे दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी भविष्य में ऐसी जानकारी मीडिया तक पहुंचाने से रोकने का मैसेज दिया गया। ट्रम्प ने लीक करने वालों पर सख्ती के संकेत दिए ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ने की खबरें लगातार सामने आने लगीं। कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने बताया कि युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे हथियारों का भंडार कम हो रहा है। कुछ खबरों में यह भी सामने आया कि ईरान के खिलाफ युद्ध की रणनीति को लेकर अमेरिकी प्रशासन के अंदर ही चिंता और मतभेद हैं। इन खबरों के सामने आने के बाद ट्रम्प प्रशासन ने यह पता लगाने की कोशिश तेज कर दी कि सीक्रेट जानकारी मीडिया तक कौन पहुंचा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिकारियों पर लीक करने वालों को खोजने के लिए सख्त कार्रवाई का दबाव बनाया। ट्रम्प ने युद्ध की रणनीति और हथियारों की कमी को लेकर सरकार की आलोचना करने वाली मीडिया रिपोर्ट्स पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसी रिपोर्टिंग को देशद्रोही तक बता दिया। हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन में बढ़ा लीक का विवाद जॉइंट स्टाफ की जांच ऐसे समय में हो रही है, जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन के अंदर गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले लगातार सामने आए हैं। इन मामलों की जांच भी चल रही है। मौजूदा और पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, लगातार हो रही इन जांचों का असर पेंटागन के माहौल पर भी पड़ा है। वहां अब एक-दूसरे पर शक और भरोसे की कमी बढ़ गई है। हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाने या उनकी पदोन्नति रोकने के फैसलों को लेकर भी विवाद हुआ है। पिछले साल की शुरुआत से मीडिया में किसी लीक की खबर सामने आने के बाद पेंटागन ने कई बार जांच शुरू की है। इनमें ऐसी खबरें भी शामिल हैं, जिनमें हेगसेथ के नेतृत्व और उनके फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। खास बात यह है कि हेगसेथ खुद भी गोपनीय जानकारी लीक होने के विवाद में घिर चुके हैं। पिछले साल यमन में अमेरिकी हमलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक सिग्नल ग्रुप में साझा किए जाने के मामले में उनकी काफी आलोचना हुई थी। 5 मई के बाद ईरान युद्ध पर प्रेस ब्रीफिंग नहीं की हेगसेथ ने 5 मई के बाद से ईरान युद्ध को लेकर पेंटागन के पत्रकारों के सामने कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं की है। उनके कार्यकाल में पत्रकारों की पेंटागन तक पहुंच को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है। इस नीति के खिलाफ न्यूयॉर्क टाइम्स ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पिछले महीने रक्षा विभाग ने स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ को भी उनके पद से हटा दिया। यह अमेरिकी सेना से जुड़ा और सरकार द्वारा वित्त पोषित समाचार संस्थान है। दोनों पत्रकारों का आरोप था कि उन्हें हटाने का फैसला USS अब्राहम लिंकन पर बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर उनकी रिपोर्टिंग के बाद लिया गया। यानी पेंटागन में मीडिया की पहुंच और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरानी टैंकर पर मिसाइल दागी:खार्ग आइलैंड के पास धमाका अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया। मीडिया के मुताबिक, खार्ग आइलैंड के पास ईरान का तेल ले जा रहे टैंकर पर अमेरिका ने 4 मिसाइलें दागीं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Pentagon Probes Leak: Military Officers Undergo Polygraph Test

Pentagon Probes Leak: Military Officers Undergo Polygraph Test

वॉशिंगटन डीसी6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी लीक होने की जांच तेज हो गई है। यह पता लगाने के लिए कि जानकारी किसने मीडिया तक पहुंचाई, पेंटागन ने करीब 50 सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है। टेस्ट के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी पत्रकारों या मीडिया से जुड़े लोगों को दी थी। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के घटते भंडार से जुड़ी कोई जानकारी बाहर साझा की थी। पॉलीग्राफ को आम भाषा में झूठ पकड़ने वाला टेस्ट कहा जाता है। इसमें धड़कन, सांस और पसीने जैसे बदलावों को रिकॉर्ड कर सच-झूठ का पता लगाया जाता है। अगस्त में हथियार लीक होने की खबर मीडिया में लीक हुई थी यह कार्रवाई अगस्त में आई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद हुई, जिनमें बताया गया था कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ जरूरी हथियारों का भंडार कम हुआ है। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर भी शामिल थे। जॉइंट स्टाफ में करीब 1,500 से 2,000 अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यह अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के लिए दुनिया भर में चल रहे सैन्य अभियानों, नीतियों और युद्ध की योजनाओं के बीच तालमेल बनाने वाली प्रमुख संस्था है। 50 सैन्य अधिकारियों का टेस्ट कराया जाना असामान्य माना जा रहा है। जांच से जुड़े जानकारों के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट का मकसद सिर्फ यह पता लगाना नहीं था कि सीक्रेट जानकारी किसने लीक की। इससे दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी भविष्य में ऐसी जानकारी मीडिया तक पहुंचाने से रोकने का मैसेज दिया गया। ट्रम्प ने लीक करने वालों पर सख्ती के संकेत दिए ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ने की खबरें लगातार सामने आने लगीं। कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने बताया कि युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे हथियारों का भंडार कम हो रहा है। कुछ खबरों में यह भी सामने आया कि ईरान के खिलाफ युद्ध की रणनीति को लेकर अमेरिकी प्रशासन के अंदर ही चिंता और मतभेद हैं। इन खबरों के सामने आने के बाद ट्रम्प प्रशासन ने यह पता लगाने की कोशिश तेज कर दी कि सीक्रेट जानकारी मीडिया तक कौन पहुंचा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिकारियों पर लीक करने वालों को खोजने के लिए सख्त कार्रवाई का दबाव बनाया। ट्रम्प ने युद्ध की रणनीति और हथियारों की कमी को लेकर सरकार की आलोचना करने वाली मीडिया रिपोर्ट्स पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसी रिपोर्टिंग को देशद्रोही तक बता दिया। हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन में बढ़ा लीक का विवाद जॉइंट स्टाफ की जांच ऐसे समय में हो रही है, जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन के अंदर गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले लगातार सामने आए हैं। इन मामलों की जांच भी चल रही है। मौजूदा और पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, लगातार हो रही इन जांचों का असर पेंटागन के माहौल पर भी पड़ा है। वहां अब एक-दूसरे पर शक और भरोसे की कमी बढ़ गई है। हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाने या उनकी पदोन्नति रोकने के फैसलों को लेकर भी विवाद हुआ है। पिछले साल की शुरुआत से मीडिया में किसी लीक की खबर सामने आने के बाद पेंटागन ने कई बार जांच शुरू की है। इनमें ऐसी खबरें भी शामिल हैं, जिनमें हेगसेथ के नेतृत्व और उनके फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। खास बात यह है कि हेगसेथ खुद भी गोपनीय जानकारी लीक होने के विवाद में घिर चुके हैं। पिछले साल यमन में अमेरिकी हमलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक सिग्नल ग्रुप में साझा किए जाने के मामले में उनकी काफी आलोचना हुई थी। 5 मई के बाद ईरान युद्ध पर प्रेस ब्रीफिंग नहीं की हेगसेथ ने 5 मई के बाद से ईरान युद्ध को लेकर पेंटागन के पत्रकारों के सामने कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं की है। उनके कार्यकाल में पत्रकारों की पेंटागन तक पहुंच को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है। इस नीति के खिलाफ न्यूयॉर्क टाइम्स ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पिछले महीने रक्षा विभाग ने स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ को भी उनके पद से हटा दिया। यह अमेरिकी सेना से जुड़ा और सरकार द्वारा वित्त पोषित समाचार संस्थान है। दोनों पत्रकारों का आरोप था कि उन्हें हटाने का फैसला USS अब्राहम लिंकन पर बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर उनकी रिपोर्टिंग के बाद लिया गया। यानी पेंटागन में मीडिया की पहुंच और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरानी टैंकर पर मिसाइल दागी:खार्ग आइलैंड के पास धमाका अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया। मीडिया के मुताबिक, खार्ग आइलैंड के पास ईरान का तेल ले जा रहे टैंकर पर अमेरिका ने 4 मिसाइलें दागीं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mirzapur The Movie Box Office Record

Mirzapur The Movie Box Office Record

1 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘मिर्जापुर द मूवी’ में पंकज त्रिपाठी ने बाहुबली ‘कालीन भैया’ (अखिलेशानंद त्रिपाठी) का मुख्य किरदार निभाया है। मिर्जापुर द मूवी ने पहले दिन ₹25.75 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। जिसके बाद यह एक्सेल एंटरटेनमेंट के 25 साल के इतिहास में सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई। सैक्निल्क के मुताबिक, फिल्म ने 8 साल से कायम फिल्म गोल्ड का रिकॉर्ड तोड़ा है। गोल्ड ने पहले दिन ₹25.25 करोड़ कमाए थे। इस तरह मिर्जापुर द मूवी ने नया रिकॉर्ड ₹0.50 करोड़ के अंतर से बनाया है। एक्सेल की बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ा मिर्जापुर द मूवी ने एक्सेल एंटरटेनमेंट की पिछली बड़ी फिल्मों गोल्ड, रईस, गली बॉय और फुकरे 3 से बेहतर शुरुआत की है। यह स्टूडियो के 25 साल के इतिहास में नंबर-1 ओपनर बन गई। फिल्म की ओपनिंग रईस से ₹5 करोड़ से ज्यादा, गली बॉय से ₹6 करोड़ से ज्यादा और डॉन 2 से ₹10 करोड़ से ज्यादा आगे है। एक्सेल एंटरटेनमेंट की प्रमुख फिल्में एक्सेल एंटरटेनमेंट ने 2001 में दिल चाहता है के साथ शुरुआत की थी। इसके बाद स्टूडियो ने लक्ष्य, डॉन और रॉक ऑन!! जैसी फिल्में दीं। 2011 से 2019 के दौर में स्टूडियो की प्रमुख फिल्मों में जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, फुकरे, दिल धड़कने दो, रईस और गली बॉय शामिल रहीं। 2020 से 2023 के OTT दौर में तूफान, हैलो चार्ली, फोन भूत और फुकरे 3 रिलीज हुईं। 2024 से 2026 के थिएट्रिकल रिसर्जेंस दौर में मडगांव एक्सप्रेस, सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव और मिर्जापुर द मूवी प्रमुख फिल्में हैं। मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। 2018 में शुरुआत के बाद मिर्जापुर भारतीय स्ट्रीमिंग की सबसे ज्यादा चर्चित, मीम्स में इस्तेमाल होने वाली और दोबारा देखी जाने वाली सीरीज में शामिल रही है। फिल्म की रिलीज से पहले नेशनल चेन्स में एडवांस बुकिंग 55,000 से ज्यादा टिकट तक पहुंच गई थी। शुरुआती ट्रैकर्स ने फिल्म के ₹25 करोड़ से ज्यादा की ओपनिंग करने की संभावना जताई थी। फिल्म ने यह आंकड़ा लगभग उसी स्तर पर हासिल किया। नोट: यहां आंकड़े सिर्फ हिंदी भाषा के पहले दिन के नेट कलेक्शन के हैं। दूसरी ओर शुक्रवार को ‘हनुमान अंश’ ने 5,055 शोज के साथ ₹10.00 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹97.77 करोड़ और नेट कलेक्शन ₹82.88 करोड़ हो गया। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण जौहर ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” करण जौहर की स्टोरी। गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। …………. यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

IIT Dhanbad Alumni Abhijeet Anand Success Story

IIT Dhanbad Alumni Abhijeet Anand Success Story

Hindi News Career IIT Dhanbad Alumni Abhijeet Anand Success Story | AbCoffee Startup Journey 9 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिजीत आनंद ने IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में पढ़ाई की। उसके बाद करीब साढ़े 8 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। 2021 में भारत लौटने के बाद उन्होंने 20 शहरों और 12 राज्यों में जाकर करीब 10,000 लोगों, कैफे के मालिकों और किसानों से बात कर कॉफी मार्केट को समझा। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर 2022 में abCoffee शुरू किया। उनका पहला आउटलेट जून 2022 में मुंबई के वर्सोवा में खुला। इस काम में शुरुआती खर्च करीब 13 लाख रुपए था जो उन्होंने अपनी बचत किए पैसों से भरा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उन्होंने 12 राज्यों/20 शहरों की यात्रा कर करीब 10,000 लोगों से बातचीत कर कॉफी मार्केट को समझा। abCoffee का मॉडल बड़े, महंगे कैफे के बजाय छोटे आउटलेट्स पर आधारित है, जिससे किराया और इंटीरियर जैसी लागत कम रखी जा सके। कंपनी के कॉफी या ड्रिंक्स की कीमतें आम तौर पर 119–209 रुपए के बीच है। शुरुआती दौर में पहला आउटलेट महीने में लगभग 1 लाख रुपए का कारोबार करता था। अब कंपनी करीब साढ़े 3 लाख कप हर महीने बेचती है। उन्होंने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में 95+ आउटलेट्स खोले। कंपनी ने हाल में ₹61 करोड़ का pre-Series B फंडिंग राउंड भी जुटाया है। उनका मुख्य उद्देश्य प्रीमियम और बेहतरीन स्वाद वाली कॉफी को आम लोगों के लिए किफायती और हर दिन की आदत बनाना था। इसके लिए उन्होंने महंगे कैफे सेटअप के बजाय छोटे, कुशल ‘ग्रैब-एंड-गो’ (Grab-and-Go) आउटलेट्स पर ध्यान दिया। अभिजीत बिहार के जमालपुर में केशवपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई जमालपुर से पूरी की। इसके बाद IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बीटेक किया। वर्ष 2013 में पेट्रोलियम सेक्टर की जानी-मानी कंपनी स्लमबर्जर ने उन्हें करीब 30 लाख सालाना के पैकेज पर नौकरी ऑफर की। इसके बाद अभिजीत ने देश और विदेश के कई शहरों में कॉर्पोरेट जॉब की। रोमानिया में नौकरी के दौरान उन्हें कॉफी पीने की आदत लगी। मुंबई लौटने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया। ये खबर भी पढ़ें टीचर दो, टीचर दो-आज दो, अभी दो:इंटर लेवल में टीचर के सभी 9 पद खाली, गेस्ट और PTR टीचर के बल पर चल रही कक्षाएं नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेतालघाट में टीचर की कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 3 सितंबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं ने टीचर्स की पोस्टिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Isha Rikkhi Confirms Divorce From Rapper Badshah

Isha Rikkhi Confirms Divorce From Rapper Badshah

18 मिनट पहले कॉपी लिंक ईशा रिखी और बादशाह ने फरवरी में सीक्रेट शादी की थी। पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने रैपर-सिंगर बादशाह से अलग होने की पहली बार पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों अलग हो चुके हैं, लेकिन वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक तमाशा नहीं बनाना चाहतीं। ईशा रिखी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “कहने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहती। यह सब अतीत में है और मैं अपनी जिंदगी के इस अध्याय को सम्मान के साथ खत्म करना चाहती हूं।” ईशा ने कहा, “मैं सार्वजनिक तौर पर अपनी निजी जिंदगी का तमाशा नहीं बनाना चाहती। मैं लोगों के सामने अपने निजी रिश्ते की गंदगी नहीं फैलाऊंगी, क्योंकि मैं ऐसी नहीं हूं।” जब उनसे बादशाह के साथ मौजूदा रिश्ते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत जटिल है। मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं इस बारे में पूरी तरह बात कर सकूं। जब मुझमें सभी सवालों का सामना करने और उनके जवाब देने की ताकत होगी। लेकिन अभी मैं ऐसी लड़ाई लड़ रही हूं।” ईशा ने कहा, “मैं सिर्फ इसलिए कड़वी इंसान नहीं बनना चाहती, क्योंकि मेरे साथ कुछ खराब चीजें हुईं। लेकिन मुझे पता है कि मुझे ठीक होने में काफी समय लग सकता है।” सोशल मीडिया के जरिए की तलाक की घोषणा रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने सोशल मीडिया के जरिए सीक्रेट शादी के 5 महीने बाद ही एक-दूसरे से अलग होने का ऐलान कर दिया है। बादशाह ने लिखा, “हमारा यह फैसला आपसी सहमति से लिया गया है। हम सभी से गुजारिश करते हैं कि इस समय हमारी प्राइवेसी का ध्यान रखें। इस मुद्दे पर हमारा यह पहला और आखिरी बयान है, इसलिए हमारी रिलेशनशिप को लेकर आगे कोई अंदाजा न लगाया जाए।” ईशा रिखी ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यही बयान शेयर किया है। बादशाह और ईशा रिखी की इंस्टाग्राम पोस्ट। बादशाह और ईशा ने 5 महीने पहले शादी की थी। जुलाई से सामने आ रही थीं अनबन की खबरें बादशाह और ईशा रिखी के रिश्ते में तनाव की खबरें जुलाई के महीने में आनी शुरू हुई थीं। 26 जुलाई को ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कई तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने ‘हर तूफान एक सीख है’ लिखकर दिल टूटने वाला इमोजी लगाया था। इसके बाद ईशा ने एक नोट में लिखा था कि वे लंबे समय तक डर की वजह से चुप रहीं, लेकिन अब वे अपने आत्मसम्मान के लिए बोल रही हैं। इसी बीच ईशा की मां पूनम रिखी ने भी सोशल मीडिया पर कर्म से जुड़ी पोस्ट शेयर की थीं। 26 जुलाई को ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कई तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी थी। जून में ही किया था शादी का खुलासा ईशा रिखी ने इसी साल जून में इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन के दौरान बादशाह के साथ अपनी शादी की पुष्टि की थी। हालांकि शादी के बाद भी दोनों सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के बारे में ज्यादा बात करने से बचते रहे। वहीं अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईशा रिखी जल्द ही सलमान खान के रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ का हिस्सा बन सकती हैं। बादशाह का दूसरा तलाक, पहली पत्नी से है एक बेटी यह रैपर बादशाह का दूसरा तलाक है। इससे पहले उन्होंने 2012 में जैस्मिन मसीह से शादी की थी। साल 2017 में दोनों की एक बेटी हुई, जिसका नाम जेसेमी ग्रेस मसीह सिंह है। हालांकि मतभेदों के बाद बादशाह और जैस्मिन साल 2020 में एक-दूसरे से अलग हो गए थे। इसके बाद बादशाह की जिंदगी में ईशा रिखी की एंट्री हुई थी। बादशाह और उनकी पहली पत्नी जैस्मिन मसीह। तलाक के ऐलान के बीच बादशाह का नया गाना रिलीज बादशाह, जिनका असली नाम आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया है, ने अपने संगीत सफर की शुरुआत साल 2006 में ‘माफिया मुंडीर’ ग्रुप से की थी। साल 2013 में दिलजीत दोसांझ के साथ आए पंजाबी गाने ‘प्रॉपर पटोला’ और साल 2015 के ‘डीजे वाले बाबू’ से उन्हें देशभर में बड़ी पहचान मिली। इसके बाद साल 2014 में उन्होंने फिल्म ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ के गाने ‘सैटरडे सैटरडे’ और ‘खूबसूरत’ के गाने ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ से बॉलीवुड में कदम रखा। पर्सनल लाइफ में चल रही हलचल के बीच बादशाह का नया मराठी हिप-हॉप गाना ‘चिमना’ 31 अगस्त को रिलीज हुआ है। इसमें उन्होंने दिव्या कुमार और मराठी लोक कलाकार नागेश मोरवेकर के साथ काम किया है। बादशाह के करियर से जुड़े विवाद ‘गेंदा फूल’ गाना और क्रेडिट विवाद (2020) मार्च 2020 में रिलीज हुए बादशाह के गाने ‘गेंदा फूल’ को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। इस गाने में इस्तेमाल की गई बंगाली पंक्तियां ‘बोरोलोकेर बीती लो’ 1970 के दशक के लोक कलाकार रतन कहार की लिखी हुई थीं। शुरुआत में गाने में रतन कहार को कोई क्रेडिट नहीं दिया गया था। विवाद बढ़ने पर बादशाह ने सफाई दी कि आधिकारिक रिकॉर्ड्स में यह पारंपरिक बंगाली फोक सॉन्ग के रूप में दर्ज था। बाद में बादशाह ने रतन कहार से संपर्क किया और उन्हें 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी। फेक व्यूज और फर्जी फॉलोअर्स का मामला (2020) अगस्त 2020 में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोशल मीडिया पर फेक फॉलोअर्स और व्यूज बेचने वाले रैकेट की जांच की थी। इस दौरान पुलिस ने बादशाह से लंबी पूछताछ की। पुलिस अधिकारियों का दावा था कि 24 घंटे में रिकॉर्ड बनाने के लिए बादशाह ने अपने गाने ‘पागल’ पर 7.2 करोड़ फेक व्यूज खरीदे थे और इसके लिए 72 लाख रुपए चुकाए थे। हालांकि बादशाह ने पुलिस के इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने ऐसी किसी सर्विस का इस्तेमाल नहीं किया है। बादशाह और हनी सिंह के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। ‘माफिया मुंडीर’ ग्रुप और हनी सिंह से विवाद करियर की शुरुआत में बादशाह रैपर यो यो हनी सिंह के साथ ‘माफिया मुंडीर’ ग्रुप का हिस्सा थे। इस ग्रुप के तहत कई गाने आए, लेकिन गानों के क्रेडिट को लेकर दोनों के बीच

Kangana Ranaut Scolds BDOs in Mandi Meeting Over MP Fund Usage

Kangana Ranaut Scolds BDOs in Mandi Meeting Over MP Fund Usage

मंडी की सांसद कंगना रनोट जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक करते हुए। हिमाचल के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट ने शनिवार को अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद निधि के फंड का इस्तेमाल नहीं होने पर कंगना भड़क गईं। . उन्होंने अंग्रेजी में कहा- ‘इट बिकम ए ब्लडी जोक’ (यह एक मजाक बनकर रह गया है) , मैं नेशनल मीडिया में इस बारे में कुछ बोल नहीं पा रही हूं। लोग मुझे निठल्ला कहते हैं। कंगना ने इसके बाद बैठक में सभी BDO को खड़ा कर कहा- सांसद का काम फंड उपलब्ध कराना है, जबकि उसे खर्च करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए बैठकों में न आएं, बल्कि पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर भी काम करें। उन्होंने सवाल किया कि पिछली बैठक में जिन मुद्दों और सुझावों पर चर्चा हुई थी, उन पर अब तक उम्मीद के मुताबिक काम क्यों नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल सुझाव और योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा। इन सुझावों को जमीन पर लागू करना जरूरी है। 11 करोड़ रुपए में से अभी भी आधी राशि का इस्तेमाल नहीं हुआ है। लोग मुझे निठल्ला कहते, लेकिन आप यहां केवल सैलरी उठाने आ जाते। दिशा कमेटी की मीटिंग लेते हुए सांसद कंगना। पढ़िए बैठक में और क्या बोलीं कंगना… पिछली बैठक के फैसले आगे क्यों नहीं बढ़े? कंगना रनोट ने मीटिंग में सभी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) से नाराजगी जताते हुए कहा कि हर दिशा बैठक में वही बातें दोहराई जा रही हैं, लेकिन उन पर आगे काम नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि सुझाव देने के बाद उन्हें लागू करना जरूरी है, तभी अगली स्टेज पर जाकर कमियां और चुनौतियां सामने आएंगी। उन्होंने हर विभाग में एक जैसा पैटर्न होने पर सवाल उठाया और कहा कि यह सब अब नहीं चलेगा। पूरे देश में मंडी की परफॉर्मेंस का मजाक बन रहा कंगना ने कहा कि देशभर में मंडी संसदीय क्षेत्र की कार्यप्रणाली को लेकर खबरें चल रही हैं कि सांसद ने 11 करोड़ रुपए दिए, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि खराब परफॉर्मेंस के लिए जिम्मेदार कौन है। कंगना ने कहा कि वह राष्ट्रीय मीडिया के सामने अधिकारियों के वर्क एथिक को लेकर क्या जवाब दें। फंड लेकर बैठे लोग, न जमीन-न परमिशन कंगना ने आरोप लगाया कि कई लोगों ने फंड लेने के बावजूद काम शुरू नहीं किया। कुछ के पास जमीन या जरूरी परमिशन तक नहीं हैं और गलत या अधूरे दस्तावेजों के आधार पर फंड लिया गया। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे लोगों पर दबाव बनाकर जनता का पैसा वापस लेने को कहा। साथ ही कहा कि जिनके काम पूरे हो चुके हैं, उनका डेटा और खर्च भी सही तरीके से अपलोड नहीं किया जा रहा। ‘क्या मैं इडियट की तरह पैसा देती जाऊं?’ कंगना ने कहा कि 11 करोड़ के फंड का बड़ा हिस्सा अब भी लंबित है और मंडी क्षेत्र में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए के कार्यों का बैकलॉग बना हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए कहा कि पुराना पैसा और काम लंबित रहते हुए वह नए फंड कैसे जारी करती रहें। कंगना ने सवाल किया कि फंड की मॉनिटरिंग और अधूरे काम पूरे करवाना सांसद का काम है या प्रशासन का। फंड के इस्तेमाल पर मांगा जवाब कंगना ने अधिकारियों से पूछा कि केंद्र से पैसा मिलने के बावजूद कई विकास कार्य आगे क्यों नहीं बढ़ रहे। उन्होंने कहा कि कहीं जमीन की समस्या है तो कहीं मंजूरी और NOC के कारण फंड अटका हुआ है। ऐसे सभी मामलों की पूरी स्थिति सामने लाने को कहा। हर काम की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश कंगना ने कहा कि हर काम की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। कितने काम 40, 50, 60 या 80 प्रतिशत तक पूरे हुए हैं, इसकी अलग-अलग सूची बनाई जाए। साथ ही अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए समयबद्ध प्लान तैयार किया जाए। देखिए, मीटिंग से जुड़े कुछ PHOTOS… दिशा कमेटी मीटिंग के लिए जाते हुए सांसद कंगना रनोट। दिशा कमेटी मीटिंग की मीटिंग से पहले DC मंडी सांसद कंगना का स्वागत करते हुए। दिशा कमेटी की मीटिंग में मौजूद अधिकारी। ————— यह भी पढ़ें- BJP सांसद कंगना रनोट के 5 विवादित बयान:सार्वजनिक माफी और सफाई देनी पड़ी, अब ‘गटरछाप’ वाले बयान पर दिया स्पष्टीकरण विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाली मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट को गटर जनरेशन और गटरछाप वाले बयान पर सफाई देनी पड़ी है। यह पहला मौका नहीं, जब कंगना को सार्वजनिक तौर पर माफी या फिर सफाई देनी पड़ी हो। सांसद किसान आंदोलन, जावेद अख्तर से कानूनी विवाद और महिंदर कौर मामले में खेद जता चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…

RRB NTPC Recruitment 2026 | Apply Online for 5165 Vacancies

RRB NTPC Recruitment 2026 | Apply Online for 5165 Vacancies

13 मिनट पहले कॉपी लिंक रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने NTPC में 5165 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : 12वीं पास, ग्रेजुएशन की डिग्री एग्जाम पैटर्न : जारी नहीं फीस : जारी नहीं एज लिमिट : अधिकतम 33 साल सैलरी : पे लेवल – 2 से 6 तक अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आधार कार्ड सिग्नेचर वोटर आईडी पासपोर्ट साइज फोटो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर निवास प्रमाण पत्र 10वीं का प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.rrbapply.gov.in पर जाएं। नई रजिस्ट्रेशन के विकल्प पर क्लिक करें। आपके सामने रेलवे जोन की लिस्ट खुल जाएगी। जिस जोन के लिए फॉर्म भरना चाहते हैं, उस पर क्लिक करें। Check Ability पर क्लिक करके आगे बढ़ें। अप्लाई के बटन पर क्लिक करें। मांगी गई सभी डिटेल्स दर्ज करके फॉर्म भरें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस भरकर फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंट आउट लेकर रखें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ये खबर भी पढ़ें हॉस्टल में खराब खाने, बदहाली के खिलाफ छात्राओं का प्रदर्शन:छात्राओं ने रामधुन गाकर किया विरोध, खाने में प्लास्टिक, सिगरेट के टुकड़े मिले सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। ‘पद्मावत’ (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। ‘द केरला स्टोरी’ (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। ‘लक्ष्मी’ (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। ‘आदिपुरुष’ (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी