Meta Launches Muse AI Agent in US

Hindi News Business Meta Launches Muse AI Agent In US | Shopping And Business Planning Tools न्यूयॉर्क13 मिनट पहले कॉपी लिंक म्यूज का एनिमेटेड वीडियो, मेटा ने X पर शेयर किया है। मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में मदद करेगा। मेटा के मुताबिक, यह लंबे समय के टारगेट को एक्शन प्लान में बदलने में भी मदद कर सकता है। म्यूज अभी सिर्फ US में उपलब्ध है। मेटा ने इसके सेफ्टी और प्राइवेसी फीचर्स पर जोर दिया है। कंपनी के अनुसार, यह एजेंट एक अलग और सुरक्षित वर्चुअल मशीन पर चलता है, जिसमें एजेंट और यूजर का डेटा दोनों सुरक्षित रहते हैं। यूजर म्यूज के अलग ऐप पर या वॉट्सऐप के जरिए उससे बात कर सकते हैं। यह ईमेल भेजने और यात्रा बुक करने जैसे छोटे काम कर सकता है। साथ ही, सालभर का एक्सरसाइज प्लान बनाने या नया बिजनेस शुरू करने जैसे लंबे समय के लक्ष्यों पर भी काम कर सकता है। ऐसे काम करेगा म्यूज यूजर जब म्यूज के साथ अपना लक्ष्य शेयर करेगा, तो यह उसके लिए पर्सनलाइज्ड प्लान बनाने में मदद करेगा। इसके बाद यह यूजर के समय और संसाधनों को व्यवस्थित कर काम को आगे बढ़ाएगा। मेटा ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि म्यूज ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है और यूजर की ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन भी कर सकता है। टेक कंपनियां AI एजेंट्स को चैटबॉट्स के बाद की अगली तकनीक बता रही हैं। चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं और जानकारी खोज सकते हैं, लेकिन वे यूजर की ओर से काम नहीं करते। चैटबॉट से कैसे अलग है AI एजेंट अपने सबसे सामान्य रूप में AI एजेंट एक पारंपरिक कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह काम करता है। ऐसा प्रोग्राम किसी काम को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जैसे कोई ऐप खोलना। जब इसे AI के लार्ज लैंग्वेज मॉडल के साथ जोड़ा जाता है, तो यह बिना हर कदम का निर्देश दिए काम पूरा करने के लिए जरूरी जानकारी खोज सकता है। उदाहरण के लिए, यह सिर्फ ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद नहीं करेगा। यह सहकर्मी का मैसेज पढ़कर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि यूजर क्या जवाब देना चाहता है और फिर अपने आप जवाब भेज सकता है। मार्क जुकरबर्ग का AI विजन मेटा के लिए यह एजेंट CEO मार्क जुकरबर्ग के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें AI सुपरइंटेलिजेंस हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो। उन्होंने पिछले महीने ऑनलाइन प्रकाशित 6,500 शब्दों के एक निबंध में अपना विजन बताया था। आलोचकों ने इस दस्तावेज को कल्पनाओं से भरा हुआ बताया। जुकरबर्ग ने इसमें लिखा कि मेटा ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां हर व्यक्ति के पास नए बिजनेस बनाने, Ph.D.-स्तर की पढ़ाई में मदद लेने और अपनी जरूरत के मुताबिक लाइफस्टाइल सलाह पाने के टूल होंगे। जुकरबर्ग ने लिखा, “हर व्यक्ति के पास एक बेहद सक्षम पर्सनल एजेंट होगा, जो आपको, आपके लक्ष्यों और आपकी हर अहम चीज को समझेगा। आपका एजेंट आपके रिश्तों, सेहत, करियर, वित्त, घर के काम, शौक और दूसरी चीजों को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपकी ओर से काम करेगा।” उन्होंने आगे लिखा कि यह एजेंट उन चीजों के लिए समय बचाएगा, जिन्हें लोग पसंद करते हैं और उन्हें वह हासिल करने में मदद करेगा, जो वे इसके बिना नहीं कर पाते। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या लोग वास्तव में इसका इस्तेमाल करेंगे। यह जानकारी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

10 मिनट पहले कॉपी लिंक जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन AfD की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD पार्टी की चीफ एलिस वीडेल खुद लेस्बियन हैं। उनकी शादी श्रीलंका में जन्मी एक महिला से हुई है। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडेल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडेल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? AfD चीफ एलिस वीडल चुनाव के बाद रविवार को बर्लिन स्थित पार्टी मुख्यालय में जर्मनी का झंडा लहराती हुईं। बचपन: नाजी अतीत वाले फैमिली में जन्म जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई और उन्हें जज बना दिया गया। उनका परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो उनका परिवार सिलेसिया से भागकर पश्चिमी जर्मनी आ गया। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। 1985 में जब वीडल के दादा की मौत हुई, तब वह सिर्फ छह साल की थीं। वीडल के मुताबिक, उनके दादा ने नाजी शासन के दौरान जो काम किए थे, उस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, “वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए वह कभी-कभी अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं।” स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनकी सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और इसके बाद जर्मनी लौट आईं। राजनीति में आने से पहले वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री 45 साल की एलिस वीडल की शादी एक श्रीलंकाई मूल की महिला से हुई है। उनकी पत्नी फिल्ममेकर हैं। साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और बचपन में एक स्विस परिवार ने उन्हें गोद ले लिया था। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई और 2009 से वे साथ रहने लगीं। आज वीडल और सारा स्विट्जरलैंड में अपने दो गोद लिए हुए बेटों के साथ रहती हैं। दोनों बच्चों की परवरिश साथ मिलकर करती हैं। सारा के मुताबिक वह खुद घर में पत्नी की जिम्मेदारियां निभाती हैं। दोनों ने अपने रिश्ते को काफी निजी रखा है और उनकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई। राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं एलिस वीडल 5 जुलाई 2026 को एरफुर्ट में पार्टी कांग्रेस के दौरान भाषण देती हुईं। 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गई थीं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की राजनीति, शरणार्थी बने बड़ा मुद्दा फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध तब तक और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए सीरिया के लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे







