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बालों की देखभाल के टिप्स: रूखे और बेजान बालों से आसानी से पाएं बाहर, स्प्लिट एंड्स से छुटकारा पाएं ये असरदार तरीके

बालों की देखभाल के टिप्स: रूखे और बेजान बालों से आसानी से पाएं बाहर, स्प्लिट एंड्स से छुटकारा पाएं ये असरदार तरीके

बालों की देखभाल संबंधी युक्तियाँ: बालों की खूबसूरती बनाए रखना आज के समय में किसी भी चुनौती से कम नहीं है, खासकर जब स्प्लिट एंड्स जैसी समस्या हो जाती है। बाल के बाल जब रूखे होते हैं तो दो मानकों में विभाजित होते हैं, तो इससे न सिर्फ बाल का लुक खराब होता है, बल्कि उनकी लम्बाई पर भी असर पड़ता है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे बालों को और ज्यादा नुकसान हो सकता है। ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर इस परेशानी से बचा जा सकता है। स्पट एंड्स से बचने के लिए स्टूडियो स्टूडियो के लिए काफी जरूरी मनी मिलती है। हर 6 से 8 में बालों को दिखाने के लिए दोमुंहे से रुकना पड़ता है और बाल बड़े होकर साफ हो जाते हैं। इससे बालों की बिक्री भी बेहतर होती है और उनका लुक भी ताजा नजर आता है। बालों पर अधिकतर हीट का इस्तेमाल करके उन्हें ख़राब बनाया जा सकता है। स्ट्रेटनर, कर्लर और ब्लो क्रिएटिव का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला बैल की दवा खत्म हो जाती है, जिससे स्प्लिट एंड्स की समस्या बढ़ जाती है। अगर इन टूल्स का इस्तेमाल जरूरी हो, तो पहले हीट अपॉइंटमेंट और रेट को कम रखें। बाल धोने और धोने का सही तरीका बालों की देखभाल में सही तरीकों से पालने और सुखाना में भी अहम भूमिका है। बालों को धोते समय ज्यादा राँचे से हिलाया जाता है और सुखाते समय मुलायम तौलिये का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा बालों में कील डालने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे बाल ज्यादा खराब हो जाते हैं और बर्बाद हो जाते हैं। बालों को अंदर से मजबूत बनाने के लिए बालों की ऑयलिंग और कंडीशनिंग जरूरी है। नारियल या बादाम तेल से मालिश करने से बालों को आवश्यक पोषण मिलता है। वहीं शैंपू के बाद नाइके का इस्तेमाल करने से बाल उगाए जाते हैं और प्रयोगात्मक बनाए जाते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)दोमुंहे बालों का इलाज(टी)बालों की देखभाल के टिप्स(टी)स्वस्थ बालों की दिनचर्या(टी)बालों के नुकसान को रोकें(टी)बाल ट्रिमिंग के लाभ(टी)हीट स्टाइलिंग क्षति(टी)बालों में तेल लगाने के टिप्स(टी)कंडीशनर के लाभ(टी)सूखे बालों का समाधान(टी)बालों के विकास की देखभाल

खोखले दांत भी बनेंगे फिर से मजबूत! जानिए कैविटी हटाने के 5 आसान और असरदार नुस्खे

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  दांतों में कीड़ा लगना या कैविटी होना आजकल एक आम समस्या बन गई है, जो न सिर्फ तेज दर्द का कारण बनती है बल्कि धीरे-धीरे दांत को कमजोर और खोखला भी कर देती है. गलत खानपान, मीठा ज्यादा खाना और सही तरीके से सफाई न करने की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है. ऐसे में लोग अक्सर तुरंत राहत पाने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपाय भी काफी असरदार साबित हो सकते हैं. Dr. Saleem Zaidi ने अपनी एक वीडियो में दांतों की कैविटी और दर्द से राहत पाने के लिए 5 आसान घरेलू नुस्खों के बारे में बताया है. ये उपाय न सिर्फ बनाने में सरल हैं, बल्कि दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन और इंफेक्शन को कम करने में भी मदद कर सकते हैं. अगर इन्हें सही तरीके से अपनाया जाए, तो दांतों की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है और ओरल हेल्थ बेहतर बनी रहती है.

पलाश के फूल के फायदे: लू, डायबिटीज और त्वचा रोग में असरदार

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Last Updated:March 15, 2026, 19:18 IST फागुन के महीने में तराई क्षेत्र में खिलने वाले टेसू यानी पलाश के फूल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में इसके फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग पेट के कीड़े, डायबिटीज, त्वचा रोग और गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है. गर्मियों में पलाश के फूलों से बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ लू से भी बचाने में मदद करता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में टेसू के पेड़ पाए जाते हैं. फागुन माह में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेसु के फूल के नाम से जाना जाता है. वही अब धीरे-धीरे पलाश के पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है. वहीं आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है.  पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है.  पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताएं कि गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है, इसके फूल बहुत ही ठंडे माने जाते हैं. जिस कारण गर्मियों में लोग शरबत बनाकर सेवन करते हैं. इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है साथ में गर्मी में लू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है. पलाश के फूलों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और हर सुबह ठंडे पानी के साथ इसका सेवन करें. यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ आंतरिक सफाई में मदद करता है. डायबिटीज जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. पलाश का फूल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. First Published : March 15, 2026, 19:18 IST

ब्यूटी टिप्स: डैल स्किन को हमेशा के लिए कहें तो, मुल्तानी मिट्टी से घर पर बनाएं ये असरदार DIY फेस पैक

ब्यूटी टिप्स: डैल स्किन को हमेशा के लिए कहें तो, मुल्तानी मिट्टी से घर पर बनाएं ये असरदार DIY फेस पैक

22 फरवरी 2026 को 20:46 IST पर अपडेट किया गया ब्यूटी टिप्स: अगर आपकी भी त्वचा खराब हो गई है, तो अब उसे देखने का समय आ गया है। मुल्तानी मिट्टी से आप घर पर बना सकते हैं ये विटवाई फेसपैक। आइए जानें आपको नौकरी कैसे मिलती है… (टैग्सटूट्रांसलेट) DIY फेस पैक (टी) मुल्तानी मिट्टी फेस पैक (टी) प्राकृतिक त्वचा देखभाल युक्तियाँ (टी) चमकती त्वचा के घरेलू उपचार (टी) रसायन मुक्त फेस पैक (टी) घर का बना फेस मास्क (टी) त्वचा को चमकदार बनाने के उपाय (टी) प्राकृतिक सौंदर्य टिप्स (टी) घर पर त्वचा की देखभाल की दिनचर्या

नाक से खून, कब्ज और पीसीओएस में मददगार, जानें आयुर्वेद में दूब का महत्व, कई बीमारियों में असरदार – Uttar Pradesh News

नाक से खून आना

Last Updated:February 21, 2026, 21:41 IST सनन्दन उपाध्याय/बलिया: हर जगह दिखने वाली साधारण घास, जो खेत से लेकर आंगन और आयुर्वेद से लेकर आस्था तक अपनी अलग पहचान रखती है. जी हां आमतौर पर पैरों तले बिछी रहने वाली यह घास औषधीय गुणों का खजाना है. इसका सही तरीके से प्रयोग कर कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. आगे विस्तार से जानिए… सेहत की दुनिया में दूब घास को प्राकृतिक उपचार के रूप में बेहद उपयोगी बताया गया है. इसे शीतल, रक्तस्तंभक और पाचन सुधारक भी कहा गया है. इसके अलावा, नकसीर यानी नाक से खून आने पर दूब का ताजा रस माथे पर लगाने और कुछ मात्रा में सेवन करने से राहत मिल सकती है. यहीं नहीं, गर्मियों में शरीर की आंतरिक गर्मी शांत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. दुर्वा यानी दूब महिलाओं के लिए भी फायदेमंद है. पीसीओएस जैसी हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में भी दूब का रस दही के साथ लेने से अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द में आराम मिल सकता है. ध्यान रखें कि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाना उचित नहीं होता है. हालांकि, ग्रामीण परंपराओं में इसका प्रयोग आज भी किया जाता है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ प्रियंका सिंह के अनुसार, दूब कब्ज से राहत दिलाने और पेट को साफ रखने में बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकती है. इसका हल्का काढ़ा बनाकर पीने से गैस और अपच में आराम मिलने की बात कही जाती है. इसके अलावा, इसमें प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मददगार हैं. Add News18 as Preferred Source on Google शुगर और खून की कमी जैसी समस्याओं में भी दूब का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके अर्क को ब्लड शुगर संतुलित करने में सहायक माना गया है. इसमें आयरन तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो खून की कमी दूर करने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है. धार्मिक दृष्टिकोण से दूब का अत्यंत पवित्र स्थान है. हिंदू परंपरा में इसे भगवान गणेश जी को अर्पित किया जाता है और शुभ का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा केवल आस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है. इस छोटी सी घास को भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव है. खेती और पशुपालन में भी दूब का महत्त्व कम नहीं है. लमसम 10 से 12% प्रोटीन युक्त यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करती है. सूखे की स्थिति में भी तेजी से उगने की इसकी क्षमता रखने के कारण किसानों का भरोसेमंद साथी भी है. कई जगहों पर तो प्राकृतिक चारे के रूप में भी इसको प्राथमिकता दी जाती है. दूब का पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका होती है. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं, जिससे कटाव रुक जाती है. यही कारण है कि इसे लॉन, पार्क और गोल्फ कोर्स में बड़े पैमाने पर लगाया जाता है. कम देखभाल में भी हरी-भरी रहने वाली यह घास सचमुच धरती की हरी और मजबूत ढाल है. First Published : February 21, 2026, 21:41 IST

बरगद के पत्तों के फायदे: पाचन, त्वचा व जोड़ों के दर्द में असरदार

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Last Updated:February 21, 2026, 21:28 IST वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते, छाल और कोपलें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोगाणुरोधी गुणों से भरपूर होती हैं. जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता  को मजबूती प्रदान करते हैं. इन पत्तियों का काढ़ा या अर्क संक्रमण से लड़ने, त्वचा रोगों, मधुमेह और श्वसन संबंधी समस्याओं में कारगर माना जाता है. जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वट वृक्ष यानी के बरगद के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जो पाचन में सुधार, त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द, सूजन और डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके कोमल पत्तों का लेप घावों को भरने में सहायक है और इनका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि बरगद के कोमल पत्ते (कूपल) और दूध दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार हैं. कसैले गुणों के कारण, यह आंतों की गति को नियंत्रित करते हैं और मल को बांधते हैं. इसके कूपलों को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने या दही के साथ सेवन करने से दस्त में तुरंत लाभ होता है. बरगद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, मोच और सूजन में कारगर हैं. सबसे असरदार उपाय में पत्तों पर घी/सरसों का तेल लगाकर गर्म करें और सूजन वाले स्थान पर बांधें. इसके ताजे पत्तों का लेप खुजली व लाल चकत्तों में आराम देता है. जो एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते और अन्य भाग हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें कैल्शियम और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने, जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने में सहायक हैं. यह दर्द से राहत और टूटी हड्डियों के उपचार में मदद करता है. बरगद के पत्ते औषधीय खजाना हैं. जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. इनमें ट्राइटरपेन्स, फ्रीडेलिन, सिटोस्टेरॉल, और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पत्ते मधुमेह नियंत्रण, त्वचा रोगों (दाग-धब्बे, खुजली), जोड़ों के दर्द, दस्त, और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं. बरगद के पत्ते जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा की समस्याओं और शरीर के दर्द में राहत देते है. ताजे पत्तों का लेप खुजली, मुंहासे और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है. जबकि पत्तों का गर्म काढ़ा जोड़ों के दर्द में उपयोगी है. First Published : February 21, 2026, 21:28 IST