ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की:पुतिन से चर्चा के एक दिन बाद कीव पहुंचे; रूस से युद्ध खत्म कराने पर चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अहम बातचीत की। यह बातचीत रूस के साथ चल रहे युद्ध को खत्म कराने की अमेरिकी कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए हुई। दोनों की यह कीव की पहली यात्रा थी। इससे एक दिन पहले उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के बाद विटकॉफ ने कहा, हमने बहुत सार्थक और महत्वपूर्ण बातचीत की। यह काफी गंभीर चर्चा थी। हम इससे बहुत उत्साहित हैं और जब तक जरूरत होगी, बातचीत जारी रखेंगे। कुशनर ने कहा कि इस यात्रा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को काफी कुछ सीखने को मिला है। उम्मीद है कि इससे शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
आज का एक्सप्लेनर:ट्रम्प के दामाद, दोस्त से लेकर CIA डायरेक्टर तक, मॉस्को क्यों जा रहे; क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है

25 अगस्त को अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुखिया जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को की सीक्रेट विजिट की। 10 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले। आखिर अमेरिकी अधिकारी एक के बाद एक मॉस्को क्यों जा रहे, बंद कमरों में क्या बात हो रही और क्या रूस-यूक्रेन जंग खत्म होने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते दिनों ट्रम्प के किन अधिकारियों ने रूस का दौरा किया? जवाब: पिछले 2 हफ्तों में ट्रम्प के 3 बड़े अधिकारी मॉस्को पहुंचे… जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले रूस ने कीव पर 72 घंटे के लिए हमले रोकने का ऐलान किया था। यूक्रेन ने भी मॉस्को पर ड्रोन-मिसाइल हमले न करने की बात कही है। सवाल-2: CIA डायरेक्टर रास्ते बदल-बदलकर क्यों पहुंचे मॉस्को, हुआ क्या? जवाब: CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का मॉस्को दौर काफी सीक्रेट रहा। वे सामान्य प्लेन से सीधे मॉस्को नहीं पहुंचे, बल्कि उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट से सफर किया। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि रैटक्लिफ के C-17 ने अमेरिका के मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज से लातविया के रीगा के लिए उड़ान भरी। फिर वे 25 अगस्त को मॉस्को के व्नुकोवो एयरपोर्ट पहुंचे। सिर्फ 8 घंटे मॉस्को में रहे। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रैटक्लिफ ने रूसी इंटेलिजेंस SVR के मुखिया सर्गेई नारिश्किन और घरेलू सुरक्षा एजेंसी FSB के चीफ अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव से बात की। बाद में पुतिन को इसकी जानकारी दी गई। अमेरिकी न्यूज आउटलेट एक्सियोस, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से लिखा… सवाल-3: ट्रम्प के दामाद और दोस्त ने पुतिन से क्या बात की? जवाब: गाजा-इजराइल और रूस-यूक्रेन जंग को अमेरिका की ओर से ट्रम्प के 2 भरोसेमंद दूत संभाल रहे हैं। एक तो हैं- ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूसरे उनके 30 साल पुराने दोस्त स्टीव विटकॉफ हैं। जेरेड ट्रम्प की बेटी इवांका के पति और बिजनेसमैन हैं। वहीं स्टीव उनके रियल एस्टेट बिजनेस में पार्टनर हैं। जेरेड और स्टीव की जोड़ी मौजूदा डिप्लोमेसी की दुनिया में काफी मशहूर है। 5 सितंबर को ये जोड़ी मॉस्को पहुंची। एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने उनकी अगवानी की। इसके बाद दोनों क्रेमलिन गए, जहां वे पुतिन से मिले। 3 घंटे 10 मिनट मीटिंग चली और फिर डिनर भी हुआ। रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस मीटिंग को पॉजिटिव, भरोसेमंद और नतीजा देने वाली बताया। बैठक में आर्थिक मुद्दों और रूस-अमेरिका के जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर भी बात हुई। जेरेड और स्टीव के दौरे से पहले ट्रम्प ने कहा था कि दोनों जंग खत्म करने का नया प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं और यह अच्छा मौका है कि हम यह कर पाएं। लेकिन दिमित्री पेस्कोव ने मीटिंग में कोई नई बात या चर्चा होने से इनकार किया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में बड़ी बैठकें हो सकती हैं, जिनके अच्छे नतीजे होंगे। सवाल-4: अगर ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की साथ बैठे तो क्या बात हो सकती है? जवाब: ऐसी चर्चा पहली बार नहीं हो रही है कि ट्रम्प, पुतिन और जेलेंस्की बातचीत की मेज पर एक साथ आएं। पहले भी ट्रम्प और जेलेंस्की इसके लिए राजी थे, लेकिन पुतिन इसे टालते रहे। अब रैटक्लिफ ने फिर से ये पेशकश की है। ऐसे में अगर तीनों के बीच बैठक हुई तो 4 बड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है… सवाल-5: तो क्या जल्द ही रूस-यूक्रेन जंग रुकने वाली है? जवाब: खुद ईरान जंग में उलझा अमेरिका 8 महीने बाद फिर से रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए लामबंदी कर रहा है। जेरेड और स्टीव पहली बार कीव भी जा रहे हैं, जो अब तक सिर्फ मॉस्को जाते रहे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जंग खत्म हो सकती है। पिछले महीने जेलेंस्की ने उम्मीद जताई थी कि सितंबर में बहुत कुछ बदल सकता है। अमेरिकी और रूसी अधिकारियों ने भी संभावना जताई है कि आने वाले दिनों पर सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। 4 एक्सपर्ट्स से जानिए… ******* रिसर्च सहयोग- आदित्य रवि ———– ये भी खबर पढ़िए… क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा हाल ही में सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है भारत का पड़ोसी- बांग्लादेश। पूरी खबर पढ़िए…
8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा को खाली कराने की योजना पर बोले- यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, शांति प्रयासों को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि जबरन विस्थापन की मांग को आधिकारिक नीति या व्यवहारिक कदमों में बदलने के गंभीर नतीजे होंगे। उनके मुताबिक, इससे शांति कायम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे कहा अब इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' कहा:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कनाडा के साथ चल रही व्यापार वार्ता को लेकर आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका के हिसाब से उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। खबर लगातर अपडेट हो रही है…
अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। फॉक्स न्यूज ने जब बेसेंट से पूछा कि अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद का आगे क्या होगा, तो बेसेंट ने कहा, बेंसेट बोले- कनाडाई टैरिफ का अमेरिका पर कोई असर नहीं अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने ट्रेड वॉर से अमेरिका में कीमतें बढ़ने की आशंका को लेकर भी चिंता नहीं जताई। बेसेंट ने कहा, “मैं चाहता हूं कि कोई मुझे यह दिखाए कि कनाडा के टैरिफ का अमेरिकी कीमतों पर कोई महत्वपूर्ण सांख्यिकीय असर है। मैं इस मुद्दे पर किसी से भी बहस करने के लिए तैयार हूं।” बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से उनका और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का एक-दूसरे पर बयान देने का सिलसिला जारी है। इससे पहले भी बेसेंट ने कार्नी पर आरोप लगाया था कि वे कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बेहतर है, इसके बजाय अपनी राजनीतिक छवि की ज्यादा चिंता करते हैं। ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता न होने के बाद 22 अगस्त से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया था। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। पीएम कार्नी ने इस टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा, “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” कनाडा के अमेरिका पर जवाबी टैरिफ अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, इसलिए टैरिफ बढ़ने का असर दोनों देशों के कारोबार और सामान की कीमतों पर पड़ने का अनुमान है। —————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदला:’लेक ओंटारियो’ अब ‘लेक अमेरिका’ कहलाएगा; कनाडा बोला- हम पुराना नाम ही बोलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किया। पूरी खबर पढ़ें…
‘किंग’ का फाइनल कट लॉक नहीं:शूटिंग खत्म, लेकिन म्यूजिक-वीएफएक्स में काम अभी बाकी

शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन फिल्म का फाइनल कट अभी लॉक नहीं हुआ है। फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एडिटिंग के साथ म्यूजिक, बैकग्राउंड स्कोर, साउंड डिजाइन और वीएफएक्स का काम अभी जारी है। बड़े स्तर की एक्शन फिल्म में शूटिंग खत्म होने के बाद एडिटिंग टेबल पर कई अहम फैसले लिए जाते हैं। इसमें तय होता है कि कौन-सा सीन कितना लंबा रहेगा, किस शॉट पर कट होगा और एक्शन सीक्वेंस की रफ्तार कैसी रखी जाएगी। ‘किंग’ के कुछ प्रमुख सीक्वेंस की फाइनल लेंथ पर अभी काम चल रहा है। म्यूजिक लॉक नहीं, नए गानों की शूटिंग बाकी फिल्म के म्यूजिक पर भी अभी काम चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग धुनों और ट्रैक पर काम किया जा रहा है और फिल्म के सभी गाने अभी फाइनल नहीं हुए हैं। अब तक फिल्म की घोषणा के दौरान इस्तेमाल की गई थीम ट्यून ही सार्वजनिक तौर पर सामने आई है। नए गानों की शूटिंग अभी शुरू नहीं हुई है। पहली नजर में यह प्रोडक्शन में देरी लग सकती है, लेकिन बड़े बजट की फिल्मों में ऐसा क्रिएटिव वजहों से भी किया जाता है। गाना शूट करने से पहले कहानी पर फोकस बॉलीवुड में बड़े गानों की शूटिंग कई बार फिल्म की मुख्य कहानी के हिस्सों के बाद की जाती है। इसके बाद एडिटिंग टेबल पर फिल्म की असली रफ्तार और मूड सामने आता है। इससे यह तय करना आसान होता है कि गाना कहानी में कहां फिट होगा और उसका ट्रीटमेंट कैसा रखा जाए। अगर किसी हिस्से में इमोशनल असर बढ़ाने की जरूरत है तो गाने का म्यूजिक और विजुअल उसी हिसाब से तैयार किया जा सकता है। विजुअल्स पर काम अभी बाकी ‘किंग’ जैसी एक्शन-हैवी और इंटरनेशनल लोकेशन वाली फिल्म में वीएफएक्स का काम सिर्फ पोस्ट-प्रोडक्शन के आखिरी चरण में नहीं होता। शूटिंग के दौरान ही यह तय किया जाता है कि स्क्रीन पर क्या वास्तविक दिखेगा और किस हिस्से को डिजिटल तरीके से तैयार या बदला जाएगा। सेट का विस्तार, बैकग्राउंड बदलना, माहौल को बेहतर दिखाना, भीड़ बढ़ाना, गाड़ियों में डिजिटल बदलाव करना और दूसरे विजुअल सुधार जैसे काम वीएफएक्स का हिस्सा हो सकते हैं। एक्शन का फाइनल असर एडिटिंग और साउंड से बनेगा ‘किंग’ का फाइनल टोन और रफ्तार काफी हद तक एडिटिंग टेबल पर तय होगी। शाहरुख खान के एक्शन सीक्वेंस, अभिषेक बच्चन से जुड़े अहम नैरेटिव मोमेंट्स और दीपिका पादुकोण से जुड़े फ्लैशबैक को किस क्रम में रखा जाएगा, इसका सीधा असर फिल्म के सस्पेंस, इमोशनल इम्पैक्ट और पेसिंग पर पड़ेगा। यही वजह है कि सिर्फ शूट किए गए फुटेज के आधार पर किसी कलाकार के स्क्रीन टाइम का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
महिला क्रिकेट लीग के लिए जयपुर पहुंचे अभिनेता मनोज जोशी:बोले- जयपुर आना हमेशा खास, महिलाओं का खेलों से जुड़ना बेहद जरूरी

बॉलीवुड और रंगमंच के दिग्गज अभिनेता मनोज जोशी रविवार को एयर इंडिया की उड़ान से जयपुर पहुंचे हैं। जयपुर एयरपोर्ट पर बेटी प्रीमियर लीग के आयोजकों की ओर से उनका स्वागत किया गया। जोशी जयपुर में आयोजित होने वाली महिला क्रिकेट लीग के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने जयपुर से अपने पुराने जुड़ाव को याद किया और महिलाओं के खेलों से जुड़ने को महत्वपूर्ण बताया। मनोज जोशी ने कहा कि जयपुर आना हमेशा उनके लिए खास रहा है। इससे पहले भी वह शूटिंग और रंगमंच की प्रस्तुतियों के सिलसिले में जयपुर आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का खेलों से जुड़ना बेहद खास है और इसी पहल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वह जयपुर पहुंचे हैं। आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम है खेल उन्होंने महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के अवसर देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी माध्यम है। रंगमंच से शुरू हुआ अभिनय का सफर मनोज जोशी का अभिनय सफर रंगमंच से शुरू हुआ। उन्होंने मराठी रंगमंच के साथ-साथ गुजराती और हिंदी रंगमंच पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। उनकी शुरुआती चर्चित टेलीविजन भूमिकाओं में ‘चाणक्य’, ‘एक महल हो सपनों का’ और मराठी धारावाहिक ‘राऊ’ शामिल रहे। फिल्मों में उन्होंने ‘सरफरोश’ से अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘धूम’, ‘फिर हेरा फेरी’, ‘चुप चुप के’, ‘भागम भाग’, ‘भूल भुलैया’ और ‘बिल्लू’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। ‘कचरा सेठ’ से मिली अलग पहचान मनोज जोशी को हास्य और चरित्र भूमिकाओं के लिए खास तौर पर जाना जाता है। ‘फिर हेरा फेरी’ में निभाया गया ‘कचरा सेठ’ का किरदार उनके सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल है। इसके अलावा ‘हंगामा’, ‘भूल भुलैया’ और ‘ढोल’ जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय और हास्य अंदाज को दर्शकों ने पसंद किया। उन्होंने केवल हास्य भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। गंभीर और ऐतिहासिक किरदारों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। टेलीविजन धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में उन्होंने चाणक्य की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार में सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित मनोज जोशी को मराठी फिल्म ‘दशक्रिया’ में अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। इसके अलावा उन्हें टेलीविजन और गुजराती सिनेमा के लिए भी पुरस्कार मिले हैं। वर्ष 2018 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। अभिनय के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान और रंगमंच, टेलीविजन और फिल्मों में उनकी सक्रियता ने उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत में एक अलग पहचान दिलाई है। मनोज जोशी ने अभिनय के अलावा टेलीविजन पर एंकर के रूप में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। ‘स्वराज : भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा’ कार्यक्रम में उन्होंने एंकर की भूमिका निभाई और इसके लिए वर्ष 2023 में भारतीय टेली पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ एंकर का सम्मान प्राप्त किया।
हनुमान अंश पार्ट-2 में दिखेगा नैनीताल का कैंची धाम:1960 के बाद की कहानी; 2006 में डायरेक्टर ने टेका था माथा, कमाई 107 करोड़ के पार

बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश के पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो गई है। फिल्म के डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इसकी घोषणा की है। पार्ट-2 में कैंची धाम की कहानी भी दिखाई जाएगी। बाबा 1960 के दशक की शुरुआत में कैंची पहुंचे थे और 15 जून 1964 को यहां हनुमान मंदिर व आश्रम की स्थापना हुई। जीवन के अंतिम वर्षों में कैंची उनका प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा। डॉ. विशाल चतुर्वेदी 2006 के आसपास अपनी पोस्टिंग के दौरान कई बार कैंची धाम गए थे। यहीं उनका पहली बार नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से परिचय हुआ। इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और करीब दो दशकों बाद यही जुड़ाव ‘हनुमान अंश’ की कहानी की प्रेरणा बना। नैनीताल में भवाली के पास शिप्रा नदी के किनारे स्थित कैंची धाम बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नैनीताल में उनसे जुड़े चार प्रमुख धाम बताए जाते हैं- कैंची धाम, काकड़ीघाट, हनुमानगढ़ी और भूमियाधार। 2 करोड़ के बजट में बनी, 107 करोड़ के पार पहुंची कमाई ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री को भी चौंका दिया। करीब 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में सीमित स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। पहले सप्ताह में इसके शो और स्क्रीन घटकर करीब 25 रह गए थे। इसके बाद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की किस्मत बदल दी। चौथे सप्ताह तक फिल्म करीब 1,200 स्क्रीन तक पहुंच गई। अलग-अलग उद्योग स्रोतों में कमाई के आंकड़ों में अंतर है, लेकिन 4 सितंबर तक फिल्म करीब 107 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी थी। यानी फिल्म ने अपनी लागत से 50 गुना से ज्यादा कमाई की। इस तरह ‘हनुमान अंश’ बेहद कम बजट में बड़ी कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म के अहम चेहरों के बारे में जानिए… डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2013 की फिल्म वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में डॉ. राम नंदन भोसले का अहम रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शो में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे कई शो कर चुके हैं। सिंगर-सुनील लोधी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित वायरल गाने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ को सिंगर सुनील लोधी ने गाया है। 25 वर्षीय सुनील नेत्रहीन (दिव्यांग) हैं और वे मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव ‘अगरा’ के रहने वाले हैं। वर्षों तक सुनील ने अपने गांव, स्थानीय मेलों और यहां तक कि ट्रेनों में भी भजन व बुंदेली लोकगीत गाए हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका मिला। स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक बाबा नीम करोली के भक्त स्टीव जॉब्स: 1974 में बाबा से मिलने की चाह लेकर एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स भारत आए। तब तक बाबा के निधन को एक साल हो चुका था। जॉब्स कुछ दिन कैंची धाम में रहे। फिर वापस लौटकर 1976 में एप्पल की शुरुआत की। मार्क जकरबर्ग: 2015 में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान बताया था कि स्टीव जॉब्स ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी थी। यह नीम करौली बाबा का कैंची धाम ही था। जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स हिंदू धर्म मानती हैं। उन्होंने 2010 में एक इंटरव्यू में बताया था कि नीम करौली बाबा की एक तस्वीर देखकर उनकी हिंदू धर्म में रुचि जागी थी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली: एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा नीम करौली बाबा को अपना गुरु बता चुकी हैं। 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा बेटी के साथ कैंची धाम गए थे। मनोज बाजपाई: एक्टर मनोज बाजपाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ से पहले करीब एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। इसी समय वे फिल्म डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुगनुमा फिल्म की रिसर्च के लिए कैंची धाम गए थे। यहां ध्यान करके उन्हें शांति और नई राह मिली। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… बाबा नीब करौरी के थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी:हाथ जलने पर कंबल में दबाया, पलभर में गायब हुआ दर्द; बस हादसे में बची पूरी बारात कैंची धाम और बाबा नीब करौरी (आम बोलचाल में बाबा नीम करौली के नाम से भी जाने जाते हैं) से जुड़ी उनके भक्तों के जीवन में ऐसी अनेक घटनाएं दर्ज हैं, जिन्हें वे गुरु कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव मानते हैं। ऐसी ही एक कहानी दिल्ली निवासी रवींद्र जोशी उर्फ ‘रब्बू दादा’ की है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महाराजजी की सेवा में समर्पित कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)
संडे प्रोफाइल : मैथ्यू बर्गमैन:सोशल मीडिया कंपनियों केखिलाफ बर्गमैन की लड़ाई

अमेरिकी वकील मैथ्यू बर्गमैन इन दिनों बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान के खिलाफ अपनी कानूनी मुहिम के कारण चर्चा में हैं। वे सोशल मीडिया विक्टिम्स लॉ सेंटर के संस्थापक हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह में मेटा ने अमेरिका के दर्जनों राज्यों की ओर से दायर मामलों को निपटाने के लिए 18 अरब डॉलर यानी करीब 1.70 लाख करोड़ रुपए के समझौते पर सहमति दी। इन मुकदमों में आरोप है कि सोशल मीडिया की लत किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। बर्गमैन इस मुख्य मुकदमे की कार्रवाई में गहराई से जुड़े रहे हैं। बर्गमैन के मुताबिक, मेटा लगातार यह दलील देती रही है कि उसके प्लेटफॉर्म लोगों को लती नहीं बनाते। कंपनी का तर्क रहा है कि अगर बच्चों को कोई नुकसान हुआ है तो उसके लिए बच्चे या उनके माता-पिता जिम्मेदार हैं। इसके विपरीत बर्गमैन का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। बर्गमैन का लगभग पूरा समय अब सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमों में बीतता है। अमेरिका में कम्युनिकेशन डिसेंसी एक्ट की धारा 230 डिजिटल कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए काफी हद तक कानूनी जिम्मेदारी से छूट देती है। यह प्रावधान लंबे समय से माता-पिता, वकीलों और पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी बाधा रहा है। बर्गमैन ने इसी के खिलाफ अलग कानूनी रास्ता अपनाया है। पिछले चार वर्षों में बर्गमैन इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट समेत प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मामले लड़ चुके हैं। वे चार हजार से ज्यादा मुवक्किलों के करीब 1,500 मामलों से जुड़े हैं। सिएटल में पले-बढ़े बर्गमैन ने 1986 में ग्रेजुएशन के बाद कानून की डिग्री हासिल की। करिअर की शुरुआत उन्होंने सिएटल की एक बड़ी कानूनी फर्म से की। शुरुआत में वे एक एसबेस्टस कंपनी के वकील थे। बाद में उन्होंने पेसिफिक नॉर्थवेस्ट कंपनी बनाई, जो एसबेस्टस पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के मामले लड़ती थी। 2021 में उन्होंने सोशल मीडिया लॉ सेंटर शुरू किया, जिसका फोकस बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले सोशल मीडिया मामलों पर है। बर्गमैन सोशल मीडिया कंपनियों की तुलना एसबेस्टस कंपनियों से करते हैं। उनका कहना है कि एसबेस्टस कंपनियां अपने प्रोडक्ट के खतरों से परिचित थीं, फिर भी सबूत छिपाती और वैज्ञानिक जानकारी को तोड़-मरोड़कर पेश करती थीं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियां भी कुछ इसी तरह के सवालों का सामना कर रही हैं।

