पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन:सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, शाम को ऑस्ट्रेलिया के तीसरे दौरे पर होंगे रवाना

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन है। पीएम बुधवार को यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। इससे पहले मंगलवार को जकार्ता में भारत-इंडोनेशिया के बीच 20 समझौते हुए। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेंगे पीएम इंडोनेशिया के बाद, पीएम 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। पीएम मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान PM के इंडोनेशिया दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास को निशाना बनाया; होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में आग लग गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी रडार, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और कुछ बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने कहा कि ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाया, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस होने के दावे पर बोलीं हेमा मालिनी:आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिला, पैसों के लिए काम नहीं किया

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने 1970 और 80 के दशक में इंडस्ट्री की सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावे को खारिज कर दिया है। ‘हिंदी रश’ पॉडकास्ट में हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें कभी भी आज के स्टार्स जितनी मोटी फीस नहीं मिली। उन्होंने साफ किया कि वे पैसों के लिए काम नहीं करती थीं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ फीस में केवल मामूली बढ़ोतरी होती थी। एक्ट्रेस के मुताबिक, उनके काम को निर्माताओं ने पसंद किया, लेकिन कमाई से ज्यादा उनके लिए फिल्मों का अनुभव और पहचान मायने रखती थी। आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिलता था हेमा मालिनी ने इंटरव्यू में पूछा कि यह किसने कहा कि वे सबसे महंगी एक्ट्रेस थीं? उन्होंने बताया कि उनके दौर में बहुत कम पैसे मिलते थे। आज के दौर के कलाकारों को जो बड़ी रकम मिलती है, उन्हें उसका एक छोटा हिस्सा भी नहीं मिलता था। एक्ट्रेस ने कहा कि निर्देशक और निर्माता उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उन्होंने कभी पैसों को सामने रखकर काम नहीं किया। जैसे-जैसे नाम बढ़ता गया, मेकर्स अपनी मर्जी से भुगतान थोड़ा बढ़ा देते थे। लिफाफा मिलता, उसे दीक्षा की तरह मानती थीं हेमा मालिनी ने बताया कि उनके काम का पूरा मैनेजमेंट उनकी मां संभालती थीं। उनकी मां निर्माताओं को लेकर बहुत उदार थीं। अगर कोई निर्माता आकर कहता था कि वह इस फिल्म के लिए ज्यादा पैसे नहीं दे सकता, तो उनकी मां बिना किसी आपत्ति के मान जाती थीं। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए यह शर्त नहीं रखी कि इतनी फीस मिलने पर ही काम करेंगी। निर्माता जो भी छोटा-मोटा लिफाफा दे दे थे, उसे वे दीक्षा की तरह स्वीकार कर लेती थीं। पैसों से बढ़कर उनके लिए फिल्मों से मिलने वाला सम्मान था। ‘सपनों का सौदागर’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर हेमा मालिनी ने साल 1968 में आई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद 1970 और 1980 के दशक में वे एक बड़ी स्टार बनकर उभरीं। उन्होंने ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘सत्ते पे सत्ता’ और ‘बागबान’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दर्शकों के बीच उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्हें बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कहा जाने लगा। राजनीति में सक्रिय हैं और मिल चुका है पद्म श्री फिल्मों के अलावा हेमा मालिनी एक कुशल भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्तमान में वे राजनीति में सक्रिय हैं और लोकसभा सदस्य (सांसद) के रूप में काम कर रही हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2000 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2012 में सर पदमपत सिंहानिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी थी। अभिनय के बाद निर्देशन में भी आजमाया हाथ अभिनय में सफलता पाने के बाद हेमा मालिनी ने निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने साल 1992 में फिल्म ‘दिल आशना है’ का निर्देशन और निर्माण किया था। इस फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने अपनी भतीजी मधू और सुदेश बेरी को लेकर फिल्म ‘मोहिनी’ बनाई थी। बाद में उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया और क्लासिकल डांस के साथ टीवी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया।
हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस होने के दावे पर बोलीं हेमा मालिनी:आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिला, पैसों के लिए काम नहीं किया

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने 1970 और 80 के दशक में इंडस्ट्री की सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावे को खारिज कर दिया है। ‘हिंदी रश’ पॉडकास्ट में हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें कभी भी आज के स्टार्स जितनी मोटी फीस नहीं मिली। उन्होंने साफ किया कि वे पैसों के लिए काम नहीं करती थीं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ फीस में केवल मामूली बढ़ोतरी होती थी। एक्ट्रेस के मुताबिक, उनके काम को निर्माताओं ने पसंद किया, लेकिन कमाई से ज्यादा उनके लिए फिल्मों का अनुभव और पहचान मायने रखती थी। आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिलता था हेमा मालिनी ने इंटरव्यू में पूछा कि यह किसने कहा कि वे सबसे महंगी एक्ट्रेस थीं? उन्होंने बताया कि उनके दौर में बहुत कम पैसे मिलते थे। आज के दौर के कलाकारों को जो बड़ी रकम मिलती है, उन्हें उसका एक छोटा हिस्सा भी नहीं मिलता था। एक्ट्रेस ने कहा कि निर्देशक और निर्माता उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उन्होंने कभी पैसों को सामने रखकर काम नहीं किया। जैसे-जैसे नाम बढ़ता गया, मेकर्स अपनी मर्जी से भुगतान थोड़ा बढ़ा देते थे। लिफाफा मिलता, उसे दीक्षा की तरह मानती थीं हेमा मालिनी ने बताया कि उनके काम का पूरा मैनेजमेंट उनकी मां संभालती थीं। उनकी मां निर्माताओं को लेकर बहुत उदार थीं। अगर कोई निर्माता आकर कहता था कि वह इस फिल्म के लिए ज्यादा पैसे नहीं दे सकता, तो उनकी मां बिना किसी आपत्ति के मान जाती थीं। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए यह शर्त नहीं रखी कि इतनी फीस मिलने पर ही काम करेंगी। निर्माता जो भी छोटा-मोटा लिफाफा दे दे थे, उसे वे दीक्षा की तरह स्वीकार कर लेती थीं। पैसों से बढ़कर उनके लिए फिल्मों से मिलने वाला सम्मान था। ‘सपनों का सौदागर’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर हेमा मालिनी ने साल 1968 में आई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद 1970 और 1980 के दशक में वे एक बड़ी स्टार बनकर उभरीं। उन्होंने ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘सत्ते पे सत्ता’ और ‘बागबान’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दर्शकों के बीच उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्हें बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कहा जाने लगा। राजनीति में सक्रिय हैं और मिल चुका है पद्म श्री फिल्मों के अलावा हेमा मालिनी एक कुशल भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्तमान में वे राजनीति में सक्रिय हैं और लोकसभा सदस्य (सांसद) के रूप में काम कर रही हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2000 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2012 में सर पदमपत सिंहानिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी थी। अभिनय के बाद निर्देशन में भी आजमाया हाथ अभिनय में सफलता पाने के बाद हेमा मालिनी ने निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने साल 1992 में फिल्म ‘दिल आशना है’ का निर्देशन और निर्माण किया था। इस फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने अपनी भतीजी मधू और सुदेश बेरी को लेकर फिल्म ‘मोहिनी’ बनाई थी। बाद में उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया और क्लासिकल डांस के साथ टीवी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया।
कृति सेनन ने फिल्म 'मिमी' के समय एग्स फ्रीज कराए:बोलीं- शादी या बच्चे अपनी मर्जी से होने चाहिए, मां बनने का कोई दबाव नहीं चाहती

बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘मिमी’ की तैयारी के दौरान अपने एग्स फ्रीज कराए थे। ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ को दिए एक इंटरव्यू में कृति ने बताया कि इस फिल्म के रोल के लिए उन्हें वजन बढ़ाना था। चूंकि एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में शरीर में भारीपन आता है, इसलिए उन्होंने इस समय का समझदारी से इस्तेमाल किया। 35 साल की कृति ने कहा कि वे बायोलॉजिकल क्लॉक या किसी तरह के सामाजिक दबाव के कारण शादी या बच्चे का फैसला नहीं करना चाहती हैं। वजन बढ़ाने के समय को किया इस्तेमाल कृति सेनन ने बताया कि फिल्म ‘मिमी’ के लिए उन्हें एक बड़ा फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन करना था। उन्हें अपने किरदार के लिए काफी वजन बढ़ाना था। इसी दौरान उन्होंने एग फ्रीजिंग कराने का फैसला किया। कृति के मुताबिक, उन्हें किसी ने सलाह दी थी कि अगर आप ऐसा कर सकती हैं, तो यह खुद को दिया जाने वाला सबसे अच्छा तोहफा है। यह बात उनके दिमाग में बैठ गई थी और जब उन्हें फिल्म के लिए वजन बढ़ाने को कहा गया, तो उन्हें लगा कि यह एग फ्रीजिंग कराने का सबसे सही समय है। शादी और बच्चों के लिए नहीं चाहतीं कोई दबाव एग फ्रीजिंग कराने की वजह बताते हुए कृति ने कहा कि वे भविष्य में मां बनने के समय को लेकर किसी तरह के दबाव में नहीं रहना चाहती हैं। वे कभी भी इस बात से बंधना नहीं चाहतीं कि उन्हें उम्र के कारण अभी शादी करनी है या अभी बच्चे पैदा करने हैं। कृति ने कहा कि शादी या बच्चे का फैसला इंसान को तब करना चाहिए जब वह अंदर से इसके लिए पूरी तरह तैयार महसूस करे। यह फैसला किसी घड़ी की सुई या दबाव को देखकर नहीं होना चाहिए। क्या होती है एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया? एग फ्रीजिंग एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें महिला के एग्स को निकालकर उन्हें बिना फर्टिलाइज किए फ्रीज कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें भविष्य में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित स्टोर किया जाता है। यह तकनीक उन महिलाओं की मदद करती है जो किसी वजह से अपनी प्रेग्नेंसी या मदरहुड को कुछ समय के लिए टालना चाहती हैं। कृति ने इस प्रक्रिया के हार्मोनल और इमोशनल असर पर भी बात की और इसे महिलाओं के लिए एक बेहतर विकल्प बताया। हाल ही में हिट रही फिल्म ‘कॉकटेल 2’ वर्कफ्रंट की बात करें तो कृति सेनन को आखिरी बार फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था। इस फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में थे। होमी अडजानिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी लव रंजन और तरुण जैन ने लिखी थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी और इसने दुनिया भर में 130 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी।
कंगना की क्वीन 2 विवादों में:फैंटम स्टूडियो ने जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ का मुकदमा किया, आरोप- फिल्म के राइट्स

कंगना रनोट ने हाल ही में 2018 में रिलीज हुई हिट फिल्म क्वीन के सीक्वल क्वीन 2 के शूटिंग पूरी की है। शूटिंग खत्म होते ही फिल्म विवादों में आ गई। फिल्म के 50 प्रतिशत राइट्स रखने वाले प्रोडक्शन हाउस ने ये सीक्वल बना रहे जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ रुपए का मुकदमा दायर किया है। फैंटम स्टूडियो ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ का मुकदमा दायर कर आरोप लगाए हैं कि क्वीन 2 बिना परमिशन के बनाई जा रही है। मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम स्टूडियोज के पास फिल्म ‘क्वीन’ के 50% राइट्स हैं, जिनमें फिल्म का सीक्वल बनाने का अधिकार भी शामिल है। कंपनी का दावा है कि उसने अब तक किसी भी सीक्वल, एडेप्शन या डेरिवेटिव वर्क के लिए अपनी सहमति नहीं दी है। मुकदमा दायर करने से पहले मांगा था जवाब रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम स्टूडियोज ने इस विवाद को सुलझाने के लिए कई बार जियोस्टार से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से किसी भी अनुरोध का जवाब नहीं दिया गया। इस बीच, साल की शुरुआत में फ्लोर पर गई ‘क्वीन 2’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है। जब कई बार कोशिश करने के बावजूद हल नहीं निकला तो फैंटम स्टूडियो ने कानूनी कार्रवाई शुरू की। कंगना रनोट ने पूरी की क्वीन 2 की शूटिंग ‘क्वीन 2’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। शूटिंग इसी साल की शुरुआत में शुरू हुई थी और फिल्म अब पोस्ट-प्रोडक्शन के चरण में पहुंच गई है। फैंटम प्रोडक्शन के बारे में जानिए- फिल्म क्वीन 2018 में रिलीज हुई थी, जिसे फैंटम फिल्म्स ने बनाया था। इस प्रोडक्शन हाउस को डायरेक्टर विकास बहल, अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी और मधु मंटेना ने शुरू किया था। मीटू मूमेंट के बाद विकास बहल और कंपनी के संस्थापकों के बीच मतभेद शुरू हो गए और 2019 में फैंटम प्रोडक्शन बंद कर दिया गया। 2021 में प्रोडक्शन कंपनी दोबारा शुरू की गई। इसी समय रिलायंस ने फिल्म के शेयर खरीदे थे। ये प्रोडक्शन हाउस अब तक क्वीन, हंसी तो फंसी, अगली, हंटर, बॉम्बे वेलवेट, मसान, शानदार, उड़ता पंजाब, मनमर्जियां, सुपर 30 जैसी फिल्में प्रोड्यूस कर चुका है।
दिलीप कुमार की 5वीं पुण्यतिथि पर भावुक हुईं सायरा बानो:लिखा- साहब मुझे यादों का खजाना देकर गए, उनके बिना जिंदगी में खालीपन है

दिग्गज अभिनेता दिवंगत दिलीप कुमार की आज पांचवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनकी पत्नी और पूर्व एक्ट्रेस सायरा बानो ने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर किया है। 81 साल की सायरा बानो ने इंस्टाग्राम पर दिलीप कुमार के साथ अपनी कई पुरानी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा कि दिलीप साहब भले ही उनकी नजरों से दूर हो गए हैं, लेकिन वे उनकी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। सायरा ने दिलीप कुमार के साथ बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल हिस्सा बताया। यादों को बताया सबसे वफादार साथी सायरा बानो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि यादों में बनी रहती है। समय के उलट, यादें सबसे वफादार साथी होती हैं। वे बिना बुलाए लौट आती हैं और हर मुस्कान, हर नजर और हर शब्द को इस तरह वापस ले आती हैं जैसे कुछ भी नहीं खोया हो। किसी को याद रखना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि उन्हें कभी भुलाया नहीं गया। दिलीप साहब देकर गए यादों का खजाना सायरा ने दिलीप कुमार को याद करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि साहब ने इस दुनिया को छोड़ने से पहले मुझे एक बड़ा खजाना दिया है। यह खजाना उनकी यादों का है, जो इतना समृद्ध है कि मैं अपनी बाकी की जिंदगी इन्हीं यादों के बीच रहकर बिता दूंगी। उन्होंने आगे लिखा कि 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को छोड़कर चले गए थे जो उनसे प्यार करती थी। उनके जाने से परिवार, दोस्तों और सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नजरों से दूर हुए, जिंदगी से नहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए लिखा कि वे दुनिया के लिए एक बड़े स्टार थे, लेकिन मेरे लिए वे मेरी जिंदगी का सहारा और मेरी शांत ताकत थे। हमारी जिंदगी सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से सफल थी। साहब के जाने को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वे मेरी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। ऐसा गहरा प्यार समय के सामने नहीं झुकता। वे हर रोज मेरी यादों में रहते हैं। 12-13 साल की उम्र में ही दिलीप कुमार को दिल दे बैठीं सायरा इससे पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सायरा जी ने कहा था, ‘12-13 साल की थी, जब पहली बार उन्हें देखा था। पहली बार देखते ही मैंने अपनी मां से कहा कि जब बड़ी हो जाऊंगी तो इसी शख्स से शादी करूंगी। वे जब सफेद कुर्ते पजामे में हाथ फोल्ड करके निकलते थे, तो ऐसा लगता था कि इंसान नहीं फरिश्ता आ रहा है। मैं बहुत लकी हूं कि उनसे शादी कर पाई, वर्ना देश में उस वक्त तमाम खूबसूरत लड़कियां थीं, जो उनके लिए मर-मिटने को तैयार थीं।’ दोनों की जोड़ी को माना जाता है मिसाल दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी को बॉलीवुड की सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक माना जाता है। दोनों ने साल 1966 में शादी की थी और दिलीप कुमार के आखिरी समय तक सायरा हमेशा उनके साथ रहीं। दिलीप कुमार के बीमार रहने के दौरान भी सायरा ने पूरी तरह उनका ख्याल रखा। जब दिलीप कुमार जीवित थे, तब आमिर खान और शाह रुख खान जैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स अक्सर उनके घर उनसे मिलने आया करते थे। लंबी बीमारी के बाद 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार का निधन हो गया था।
दिलीप कुमार की 5वीं पुण्यतिथि पर भावुक हुईं सायरा बानो:लिखा- साहब मुझे यादों का खजाना देकर गए, उनके बिना जिंदगी में खालीपन है

दिग्गज अभिनेता दिवंगत दिलीप कुमार की आज पांचवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनकी पत्नी और पूर्व एक्ट्रेस सायरा बानो ने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर किया है। 81 साल की सायरा बानो ने इंस्टाग्राम पर दिलीप कुमार के साथ अपनी कई पुरानी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा कि दिलीप साहब भले ही उनकी नजरों से दूर हो गए हैं, लेकिन वे उनकी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। सायरा ने दिलीप कुमार के साथ बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल हिस्सा बताया। यादों को बताया सबसे वफादार साथी सायरा बानो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि यादों में बनी रहती है। समय के उलट, यादें सबसे वफादार साथी होती हैं। वे बिना बुलाए लौट आती हैं और हर मुस्कान, हर नजर और हर शब्द को इस तरह वापस ले आती हैं जैसे कुछ भी नहीं खोया हो। किसी को याद रखना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि उन्हें कभी भुलाया नहीं गया। दिलीप साहब देकर गए यादों का खजाना सायरा ने दिलीप कुमार को याद करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि साहब ने इस दुनिया को छोड़ने से पहले मुझे एक बड़ा खजाना दिया है। यह खजाना उनकी यादों का है, जो इतना समृद्ध है कि मैं अपनी बाकी की जिंदगी इन्हीं यादों के बीच रहकर बिता दूंगी। उन्होंने आगे लिखा कि 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को छोड़कर चले गए थे जो उनसे प्यार करती थी। उनके जाने से परिवार, दोस्तों और सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नजरों से दूर हुए, जिंदगी से नहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए लिखा कि वे दुनिया के लिए एक बड़े स्टार थे, लेकिन मेरे लिए वे मेरी जिंदगी का सहारा और मेरी शांत ताकत थे। हमारी जिंदगी सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से सफल थी। साहब के जाने को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वे मेरी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। ऐसा गहरा प्यार समय के सामने नहीं झुकता। वे हर रोज मेरी यादों में रहते हैं। 12-13 साल की उम्र में ही दिलीप कुमार को दिल दे बैठीं सायरा इससे पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सायरा जी ने कहा था, ‘12-13 साल की थी, जब पहली बार उन्हें देखा था। पहली बार देखते ही मैंने अपनी मां से कहा कि जब बड़ी हो जाऊंगी तो इसी शख्स से शादी करूंगी। वे जब सफेद कुर्ते पजामे में हाथ फोल्ड करके निकलते थे, तो ऐसा लगता था कि इंसान नहीं फरिश्ता आ रहा है। मैं बहुत लकी हूं कि उनसे शादी कर पाई, वर्ना देश में उस वक्त तमाम खूबसूरत लड़कियां थीं, जो उनके लिए मर-मिटने को तैयार थीं।’ दोनों की जोड़ी को माना जाता है मिसाल दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी को बॉलीवुड की सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक माना जाता है। दोनों ने साल 1966 में शादी की थी और दिलीप कुमार के आखिरी समय तक सायरा हमेशा उनके साथ रहीं। दिलीप कुमार के बीमार रहने के दौरान भी सायरा ने पूरी तरह उनका ख्याल रखा। जब दिलीप कुमार जीवित थे, तब आमिर खान और शाह रुख खान जैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स अक्सर उनके घर उनसे मिलने आया करते थे। लंबी बीमारी के बाद 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार का निधन हो गया था।
जूनियर NTR की नई फिल्म पर विवाद शुरू:बैन की मांग, भगवान मुरुगन से प्रेरित हो सकती है कहानी

साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की नई फिल्म एक माइथो ड्रामा होगी। यह अभी फ्लोर पर भी नहीं पहुंची है, लेकिन एक पोस्टर और उसकी टैगलाइन ने इसे देशभर में बहस का विषय बना दिया है। भगवान मुरुगन के कथित चित्रण और पोस्टर में किए गए ‘उत्तर में जन्म’ संबंधी दावे पर तमिलनाडु में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई हैं। ‘नाम तमिलर काची’ के प्रमुख सीमान ने फिल्म पर राज्य में प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए मेकर्स को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर पक्ष-विपक्ष की बहस तेज हो गई है, जबकि मेकर्स ने अभी तक विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 29 जून को इस नए मेगा प्रोजेक्ट का हुआ था ऐलान जूनियर एनटीआर और निर्देशक त्रिविक्रम श्रीनिवास ने 29 जून को अपने इस नए मेगा प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। पोस्टर में त्रिशूल और भाले को डीएनए की आकृति में दिखाया गया है और कैप्शन में लिखा गया कि यह कहानी ऐसे देवता की है, जिसका जन्म उत्तर में हुआ, जिसने देश के मध्य में आकार लिया और दक्षिण में जिसकी पूजा होती है। इसी पंक्ति पर विवाद खड़ा हो गया। तमिल समाज के एक वर्ग का कहना है कि भगवान मुरुगन तमिल संस्कृति और पहचान के केंद्र में हैं, इसलिए उन्हें ‘उत्तर भारत में जन्मा’ बताना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ है। हालांकि फिल्म की कहानी और टाइटल का अब तक आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) से प्रेरित फिल्म हो सकती है। फिल्म के कंटेंट पर भी रोक लगाने की मांग फिल्म को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब रविवार को सीमान ने सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिल इतिहास और धार्मिक परंपराओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि कला के नाम पर भगवान मुरुगन के बारे में मनगढ़ंत कथाएं न दिखाएं। सीमान ने तमिलनाडु सरकार से भी अपील की कि यदि विवादित पहलुओं में बदलाव नहीं किया जाता है तो फिल्म के तमिल और तेलुगु वर्जन्स पर रोक लगे। ‘ड्रैगन’: अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर है बेस्ड वहीं जूनियर एनटीआर, निर्देशक प्रशांत नील की फिल्म ‘ड्रैगन’ में भी नजर आएंगे। यह फिल्म 11 जून 2027 को रिलीज होगी। 1967 की पृष्ठभूमि पर बनी यह पीरियड एक्शन ड्रामा अंतरराष्ट्रीय अफीम तस्करी, गोल्डन ट्रायंगल और अपराध जगत के खूनी सत्ता संघर्ष की कहानी दिखाएगी। निर्देशक प्रशांत के मुताबिक यह उनके करियर की अब तक की सबसे यथार्थवादी फिल्म है।
नौकरी के लिए अब केवल डिग्री और अनुभव काफी नहीं:रेस्तरां में उम्मीदवार के व्यवहार, ड्रिंक ऑर्डर करने के तरीके से भी तय हो रही किस्मत

नौकरी के लिए इंटरव्यू में अब सिर्फ डिग्री या अनुभव काफी नहीं है। रेस्तरां में आपका व्यवहार और ड्रिंक ऑर्डर करने का तरीका भी चयन का पैमाना हो सकता है। करीब 2.38 लाख करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली हेल्थकेयर कंपनी बूपा के सीईओ इनाकी एरेनियो 45 मिनट के पारंपरिक इंटरव्यू को काफी नहीं मानते। वे बड़े पदों के लिए तीन मुलाकातों में कुल छह घंटे का मूल्यांकन करते हैं। इसमें उम्मीदवार का आत्मविश्वास, पहल करने की क्षमता और दूसरों के प्रति सम्मान परखा जाता है। पहले चरण में दफ्तर में दो घंटे तक उम्मीदवार के सीवी और अनुभव पर विस्तार से चर्चा होती है। दूसरे चरण में रेस्तरां में नाश्ता या लंच किया जाता है। यहां एरेनियो देखते हैं कि उम्मीदवार खुद पहल करता है या दूसरों का अनुसरण करता है। यदि वे केवल पानी मंगाते हैं और उम्मीदवार अपने लिए वाइन ऑर्डर करता है, तो इससे वे उसका आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता आंकते हैं। वे दूसरों की नकल करने वाले उम्मीदवारों को पसंद नहीं करते। एरेनियो ऐसे अकेले सीईओ नहीं हैं। करीब 2.95 लाख करोड़ की कंपनी ट्विलियो के सीईओ खोजेमा शिपचैंडलर वरिष्ठ उम्मीदवारों का 45 मिनट का डिनर इंटरव्यू लेते हैं। वे देखते हैं कि काम के बाद व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है। बातचीत में बार-बार ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल टीम भावना की कमी का संकेत माना जाता है। वे उम्मीदवारों को सवाल पूछने के लिए 20 मिनट अलग से देते हैं। इस दौरान कोई सवाल न पूछना अयोग्यता माना जाता है। कुछ सीईओ ऐसे उम्मीदवारों को भी तुरंत खारिज कर देते हैं, जो खाना चखे बिना ही उसमें नमक डाल देते हैं। उनके अनुसार यह बिना सोचे-समझे फैसले करने की आदत दर्शाता है। वेटर से लेकर गार्ड तक से आपके व्यवहार पर गौर कर रहे कंपनियों के सीईओ एक सीईओ इंटरव्यू में वेटर से जानबूझकर गलत खाना सर्व करवाकर उम्मीदवार के गुस्से को परखा गया। एपल के स्टीव जॉब्स का मशहूर ‘बियर टेस्ट’ भी इसी सोच पर आधारित था। वे उम्मीदवार को दफ्तर से बाहर टहलाने ले जाते थे और देखते थे कि क्या उसके साथ सहज होकर समय बिताया जा सकता है। इससे वे समझते थे कि उम्मीदवार टीम में घुलने-मिलने और साथ काम करने के अनुकूल है या नहीं। ‘डायरी ऑफ अ सीईओ’ के फाउंडर स्टीवन बार्टलेट ने बिना अनुभव वाली एक महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी दी क्योंकि उसने बिल्डिंग के गार्ड को नाम लेकर धन्यवाद कहा था।







