110 करोड़ की एडवेंचर थ्रिलर फिल्म 'नागबंधम- द सीक्रेट ट्रेजर':अभिषेक ने बताया- फिल्म में सिर्फ खजाने की खोज नहीं, मंदिरों-रहस्यों से भरी दुनिया भी दिखेगी

फिल्म ‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ अपने माइथो कंटेंट को लेकर चर्चा में हैं। इसमें भगवान शिव को खास तरीके से प्रेजेंट किया गया है। यह 3 जुलाई को रिलीज होगी। निर्देशक अभिषेक नामा ने मेकिंग से जुड़ी रोचक बातें शेयर कीं… अभिषेक बताते हैं…‘नागबंधम द सीक्रेट ट्रेजर’ एक भव्य एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है, जो सदियों से छिपे एक रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में एक ऐसी जर्नी दिखाई गई है, जिसमें पौराणिक कथाएं, पवित्र मंदिर, भूले-बिसरे योद्धा, ब्रह्मकमल और एक खजाना शामिल है, जो मानवता की किस्मत बदल सकता है। यह फिल्म 5 भाषाओं तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में बनी है।’ अभिषेक ने बताया, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ देश के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति रुचि से आया आइडिया अभिषेक साझा करते हैं…‘नागबंधम का मूल आइडिया भारत के प्राचीन इतिहास और रहस्यमयी खजानों के प्रति मेरी गहरी रुचि से आया। कई वर्षों तक मैंने पवित्र मंदिरों, नाग परंपराओं, खो चुकी सभ्यताओं से जुड़ी कहानियों पर रिसर्च की। कई एडवेंचर से भरी कहानियों ने प्रेरित किया।’ हर किरदार के व्यक्तित्व के हिसाब से एक्टर्स को फिल्म में चुना गया है अभिषेक कहते हैं…‘फिल्म के हर किरदार के लिए एक खास व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस की जरूरत थी। विराट कर्ण को इसलिए चुना गया, क्योंकि उनके भीतर मुख्य किरदार की जर्नी को दिखाने की क्षमता थी। महेश मांजरेकर और मुरली शर्मा जैसे अनुभवी कलाकारों ने फिल्म को गहराई और विश्वसनीयता दी। वहीं नाभा नटेश और दक्षा नागरकर अपने किरदारों में मजबूती और आकर्षण लाईं। जब ये कलाकार जुड़े तो हमें लगा कि ‘नागबंधम’ की दुनिया के लिए हमें बिल्कुल सही टीम मिल गई है। विराट कर्ण उन पहले कलाकारों में शामिल थे, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़े, क्योंकि पूरी कहानी उनके किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है। ’ करीब 110 करोड़ रुपए है लागत अभिषेक कहते हैं…‘नागबंधम’ का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है। हर सेट, कॉस्ट्यूम, हथियार और फ्रेम को भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और जुनून के साथ तैयार किया गया है। सिर्फ ट्रेजर हंट नहीं, देश की संस्कृति से लोगों को परिचय भी कराना है। इसका बजट करीब 110 करोड़ रुपए है।’ शूटिंग लोकेशन – हैदराबाद में विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो अभिषेक के मुताबिक, ‘फिल्म की शूटिंग कई जगहों पर की गई, जिनमें हैदराबाद, विशेष रूप से तैयार किए गए स्टूडियो सेट, जंगल, पानी वाले लोकेशन और बड़े आउटडोर क्षेत्र शामिल हैं, जिन्हें कहानी की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दुनिया और समय को दर्शाने के लिए तैयार किया गया। सभी शेड्यूल, एक्शन सीक्वेंस, गानों और अन्य कामों को मिलाकर इस फिल्म को पूरा करने में एक साल से अधिक का समय लगा।’ 10 बड़े सेट में तैयार हुई फिल्म की दुनिया ‘नागबंधम’ के लिए करीब 10 बड़े सेट तैयार किए गए। ‘फिल्म के हर हथियार और कॉस्ट्यूम को अलग तरीके से डिजाइन किया गया है। एक्शन और क्लोजअप सीन्स के लिए हथियारों के अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए। फिल्म के इमोशन को शिद्दत से दिखाएंगे 5 भव्य गाने अभिषेक ने बताया ‘फिल्म का हर गीत इसकी कहानी को आगे बढ़ाने के साथ इससे जुड़ी अलग-अलग भावनाओं को भी दिखाता है। – एक भव्य भक्ति गीत, जो दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिकता का उत्सव पर है। – दूसरा रोमांटिक गीत है, जो मुख्य किरदारों के इमोशल रिश्ते को दिखाता है। – तीसरा इमोशनल गीत है, जिसमें दर्द, त्याग और आंतरिक संघर्ष नजर आएगा। – चौथा सनातन धर्म और नागा साधुओं की दुनिया से प्रेरित गीत है। – पांचवें गाने में पारिवारिक उत्सव है, जिसमें खुशी, अपनापन और परंपरा दिखेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान को किया बर्थडे विश:भड़कीं कुनिका सदानंद, कहा- ये शर्मनाक नहीं लगता, एक ही दिल है, कितनी बार तोड़ोगे

NEET पेपर लीक के बाद से विवादों में घिरे हुए धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई देने पर एक्ट्रेस कुनिका सदानंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भड़क गई हैं। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं और सख्त शब्दों में इसकी आलोचना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह कैबिनेट मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य भारत को ज्ञान, शिक्षा और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं। नरेंद्र मोदी की पोस्ट सामने आने के बाद कुनिका सदानंद ने भड़कते हुए लिखा है, “क्या किसी और को भी यह बेहद शर्मनाक नहीं लगता? जिस देश में लगभग 1 करोड़ छात्रों के साथ अन्याय हुआ हो, वहां के प्रधानमंत्री शिक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी पर एक ट्वीट तक नहीं करते। जब युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और कुछ छात्रों ने अपनी जान तक गंवा दी है, तब भी वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहते। लेकिन उनके पास अपने कैबिनेट मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का समय है। वही मंत्री, जिन्हें देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मोदी जी, एक ही दिल है, आखिर कितनी बार तोड़ेंगे?” धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी NEET पेपर लीक होने के बाद से ही देश भर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी भी लगातार देश भर के कई शहरों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। देखिए धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की चुनिंदा तस्वीरें- कुनिका सदानंद के बारे में-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान को किया बर्थडे विश:भड़कीं कुनिका सदानंद, कहा- ये शर्मनाक नहीं लगता, एक ही दिल है, कितनी बार तोड़ोगे

NEET पेपर लीक के बाद से विवादों में घिरे हुए धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई देने पर एक्ट्रेस कुनिका सदानंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भड़क गई हैं। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं और सख्त शब्दों में इसकी आलोचना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह कैबिनेट मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य भारत को ज्ञान, शिक्षा और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं। नरेंद्र मोदी की पोस्ट सामने आने के बाद कुनिका सदानंद ने भड़कते हुए लिखा है, “क्या किसी और को भी यह बेहद शर्मनाक नहीं लगता? जिस देश में लगभग 1 करोड़ छात्रों के साथ अन्याय हुआ हो, वहां के प्रधानमंत्री शिक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी पर एक ट्वीट तक नहीं करते। जब युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और कुछ छात्रों ने अपनी जान तक गंवा दी है, तब भी वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहते। लेकिन उनके पास अपने कैबिनेट मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का समय है। वही मंत्री, जिन्हें देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मोदी जी, एक ही दिल है, आखिर कितनी बार तोड़ेंगे?” धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी NEET पेपर लीक होने के बाद से ही देश भर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी भी लगातार देश भर के कई शहरों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। देखिए धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की चुनिंदा तस्वीरें- कुनिका सदानंद के बारे में-
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं

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इंपैक्ट फीचर:एलपीयू ने 2.5 करोड़ रुपए के प्लेसमेंट, उद्योग आधारित डिग्री और वैश्विक तकनीकी अनुभव के साथ इंजीनियरिंग शिक्षा को दी नई दिशा

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) भविष्य केंद्रित शैक्षणिक व्यवस्था, उद्योग आधारित बी.टेक पाठ्यक्रमों, वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अनुभव और उत्कृष्ट प्लेसमेंट उपलब्धियों के माध्यम से भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान लगातार स्थापित कर रही है। विश्वविद्यालय ने हाल ही में 2.5 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट पैकेज दर्ज किया, जो किसी भारतीय विश्वविद्यालय के छात्र द्वारा प्राप्त सबसे बड़े पैकेजों में से एक है। यह उपलब्धि एलपीयू से निकलने वाले उद्योग के लिए तैयार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की वैश्विक मांग को दर्शाती है। प्लेसमेंट और करियर के मौके यहां देखें यह उपलब्धि ऐसे प्लेसमेंट सत्र के दौरान सामने आई, जिसमें 2,225 से अधिक भर्तीकर्ता कंपनियों ने भाग लिया और विभिन्न क्षेत्रों में 6,000 से अधिक नौकरी प्रस्ताव दिए गए। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, सर्विसनाउ, इंटेल, आईबीएम, सिस्को, एसएपी लैब्स, पालो ऑल्टो नेटवर्क्स और ऑटोडेस्क जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने विश्वविद्यालय से भर्ती की। कंप्यूटर साइंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस तथा अन्य इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विद्यार्थियों को व्यापक अवसर प्राप्त हुए। एलपीयू की उद्योग से जुड़ी इंजीनियरिंग शिक्षा पद्धति एलपीयू के इंजीनियरिंग स्नातक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन और डाटा इंजीनियरिंग जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में लगातार अवसर हासिल कर रहे हैं। इन सफलताओं के पीछे एलपीयू की उद्योग से जुड़ी इंजीनियरिंग शिक्षा पद्धति एक प्रमुख कारण है। विश्वविद्यालय 50 से अधिक विशेषीकृत पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जिन्हें गूगल क्लाउड, आईबीएम, इंटेल, कॉम्पटिया, जेबिया, क्वांटिफाई, पेटीएम और गीक्सफॉरगीक्स जैसी वैश्विक कंपनियों के सहयोग से तैयार किया गया है। इन पाठ्यक्रमों में कक्षा शिक्षण के साथ उद्योग प्रमाणपत्र, लाइव परियोजनाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और कंपनी आधारित तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है, जिससे विद्यार्थी शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक पेशेवर कौशल भी प्राप्त करते हैं। ग्लोबल टेक इमर्शन कार्यक्रम अपनी वैश्विक इंजीनियरिंग दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए एलपीयू ने बी.टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सिस्टम डिजाइन के अंतर्गत “ग्लोबल टेक इमर्शन” कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और दुबई जैसे प्रमुख तकनीकी केंद्रों का अनुभव प्राप्त होता है, जहां वे स्टार्टअप संस्थापकों, मुख्य तकनीकी अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम डिजाइन से जुड़े वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करते हैं। इसके साथ ही एलपीयू के 80 से अधिक देशों में स्थित 500 से अधिक साझेदार विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर, सेमेस्टर एक्सचेंज और संयुक्त शोध के अवसर प्रदान करते हैं। 2025 में भारत के शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को NAAC द्वारा A++ मान्यता प्राप्त है तथा एनआईआरएफ 2025 में इसे भारत के शीर्ष 50 संस्थानों और इंजीनियरिंग श्रेणी में शीर्ष 48 संस्थानों में स्थान दिया गया है। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2026 में भी वैश्विक स्तर पर प्रमुख संस्थानों में शामिल किया गया है। एलपीयू लगातार शोध, नवाचार, वैश्विक सहयोग और उद्योग आधारित शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। अर्न योर फी बैक पहल विद्यार्थी केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करते हुए एलपीयू की “अर्न योर फी बैक” पहल योग्य विद्यार्थियों को सफल प्लेसमेंट के माध्यम से अपनी शैक्षणिक फीस वापस प्राप्त करने का अवसर देती है। यह पहल विश्वविद्यालय की करियर केंद्रित शिक्षा और निवेश पर बेहतर प्रतिफल देने की सोच को मजबूत करती है। एलपीयू की “अर्न योर फी बैक” अवधारणा शिक्षा को वास्तविक जीवन के परिणामों से जोड़ते हुए सीखने की प्रक्रिया को नया स्वरूप देती है। “एडू रिवोल्यूशन” के अंतर्गत विद्यार्थी लाइव परियोजनाओं, हैकाथॉन और उद्योग से जुड़े आय उत्पन्न करने वाले कार्यों में पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में भाग लेते हैं। इससे विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल मजबूत होते हैं और उन्हें अपनी डिग्री पूरी होने से पहले ही शिक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई करने के पर्याप्त अवसर प्राप्त होते हैं। वीडियो में देखें कैसे पढ़ाई के साथ हो रही है कमाई 2026 के लिए प्रवेश अब खुले हैं। सीमित सीटें और नज़दीक आती अंतिम तिथियों को देखते हुए, यह सही समय है कि आप भारत के सबसे गतिशील और परिणाम-आधारित शिक्षा इकोसिस्टम में अपनी जगह सुरक्षित करें। परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए, इच्छुक छात्र यहां विजिट कर सकते हैं
इंपैक्ट फीचर:एलपीयू ने 2.5 करोड़ रुपए के प्लेसमेंट, उद्योग आधारित डिग्री और वैश्विक तकनीकी अनुभव के साथ इंजीनियरिंग शिक्षा को दी नई दिशा

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) भविष्य केंद्रित शैक्षणिक व्यवस्था, उद्योग आधारित बी.टेक पाठ्यक्रमों, वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी अनुभव और उत्कृष्ट प्लेसमेंट उपलब्धियों के माध्यम से भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान लगातार स्थापित कर रही है। विश्वविद्यालय ने हाल ही में 2.5 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट पैकेज दर्ज किया, जो किसी भारतीय विश्वविद्यालय के छात्र द्वारा प्राप्त सबसे बड़े पैकेजों में से एक है। यह उपलब्धि एलपीयू से निकलने वाले उद्योग के लिए तैयार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की वैश्विक मांग को दर्शाती है। प्लेसमेंट और करियर के मौके यहां देखें यह उपलब्धि ऐसे प्लेसमेंट सत्र के दौरान सामने आई, जिसमें 2,225 से अधिक भर्तीकर्ता कंपनियों ने भाग लिया और विभिन्न क्षेत्रों में 6,000 से अधिक नौकरी प्रस्ताव दिए गए। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, सर्विसनाउ, इंटेल, आईबीएम, सिस्को, एसएपी लैब्स, पालो ऑल्टो नेटवर्क्स और ऑटोडेस्क जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने विश्वविद्यालय से भर्ती की। कंप्यूटर साइंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस तथा अन्य इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विद्यार्थियों को व्यापक अवसर प्राप्त हुए। एलपीयू की उद्योग से जुड़ी इंजीनियरिंग शिक्षा पद्धति एलपीयू के इंजीनियरिंग स्नातक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन और डाटा इंजीनियरिंग जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में लगातार अवसर हासिल कर रहे हैं। इन सफलताओं के पीछे एलपीयू की उद्योग से जुड़ी इंजीनियरिंग शिक्षा पद्धति एक प्रमुख कारण है। विश्वविद्यालय 50 से अधिक विशेषीकृत पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जिन्हें गूगल क्लाउड, आईबीएम, इंटेल, कॉम्पटिया, जेबिया, क्वांटिफाई, पेटीएम और गीक्सफॉरगीक्स जैसी वैश्विक कंपनियों के सहयोग से तैयार किया गया है। इन पाठ्यक्रमों में कक्षा शिक्षण के साथ उद्योग प्रमाणपत्र, लाइव परियोजनाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और कंपनी आधारित तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है, जिससे विद्यार्थी शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक पेशेवर कौशल भी प्राप्त करते हैं। ग्लोबल टेक इमर्शन कार्यक्रम अपनी वैश्विक इंजीनियरिंग दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए एलपीयू ने बी.टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सिस्टम डिजाइन के अंतर्गत “ग्लोबल टेक इमर्शन” कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और दुबई जैसे प्रमुख तकनीकी केंद्रों का अनुभव प्राप्त होता है, जहां वे स्टार्टअप संस्थापकों, मुख्य तकनीकी अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा और सिस्टम डिजाइन से जुड़े वास्तविक परियोजनाओं पर कार्य करते हैं। इसके साथ ही एलपीयू के 80 से अधिक देशों में स्थित 500 से अधिक साझेदार विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर, सेमेस्टर एक्सचेंज और संयुक्त शोध के अवसर प्रदान करते हैं। 2025 में भारत के शीर्ष 50 संस्थानों में शामिल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को NAAC द्वारा A++ मान्यता प्राप्त है तथा एनआईआरएफ 2025 में इसे भारत के शीर्ष 50 संस्थानों और इंजीनियरिंग श्रेणी में शीर्ष 48 संस्थानों में स्थान दिया गया है। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2026 में भी वैश्विक स्तर पर प्रमुख संस्थानों में शामिल किया गया है। एलपीयू लगातार शोध, नवाचार, वैश्विक सहयोग और उद्योग आधारित शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। अर्न योर फी बैक पहल विद्यार्थी केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करते हुए एलपीयू की “अर्न योर फी बैक” पहल योग्य विद्यार्थियों को सफल प्लेसमेंट के माध्यम से अपनी शैक्षणिक फीस वापस प्राप्त करने का अवसर देती है। यह पहल विश्वविद्यालय की करियर केंद्रित शिक्षा और निवेश पर बेहतर प्रतिफल देने की सोच को मजबूत करती है। एलपीयू की “अर्न योर फी बैक” अवधारणा शिक्षा को वास्तविक जीवन के परिणामों से जोड़ते हुए सीखने की प्रक्रिया को नया स्वरूप देती है। “एडू रिवोल्यूशन” के अंतर्गत विद्यार्थी लाइव परियोजनाओं, हैकाथॉन और उद्योग से जुड़े आय उत्पन्न करने वाले कार्यों में पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में भाग लेते हैं। इससे विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल मजबूत होते हैं और उन्हें अपनी डिग्री पूरी होने से पहले ही शिक्षा पर होने वाले खर्च की भरपाई करने के पर्याप्त अवसर प्राप्त होते हैं। वीडियो में देखें कैसे पढ़ाई के साथ हो रही है कमाई 2026 के लिए प्रवेश अब खुले हैं। सीमित सीटें और नज़दीक आती अंतिम तिथियों को देखते हुए, यह सही समय है कि आप भारत के सबसे गतिशील और परिणाम-आधारित शिक्षा इकोसिस्टम में अपनी जगह सुरक्षित करें। परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए, इच्छुक छात्र यहां विजिट कर सकते हैं
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को कारोबारी सेशन में माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन कुछ समय के लिए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा प्लेटफॉर्म्स और टेस्ला से भी ज्यादा हो गया। मजबूत तिमाही अनुमानों (गाइडेंस) के बाद निवेशकों के बढ़े भरोसे से कंपनी के शेयर इंट्राडे में 18.4% तक उछल गए। मेटा-टेस्ला के बिल्कुल करीब बंद हुआ मार्केट कैप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को कारोबार खत्म होने पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 15.8% की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार बंद होने पर माइक्रोन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.37 ट्रिलियन डॉलर रहा। इसकी तुलना में मेटा प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप 1.38 ट्रिलियन डॉलर और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला का मार्केट कैप 1.41 ट्रिलियन डॉलर था। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान आई बड़ी तेजी से माइक्रोन कुछ समय के लिए इन दोनों कंपनियों से आगे निकल गया था। चौथी तिमाही में $50 बिलियन रेवेन्यू का अनुमान माइक्रोन की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कंपनी का चौथी तिमाही (अगस्त में समाप्त होने वाली तिमाही) के लिए जारी किया गया मजबूत रेवेन्यू अनुमान है। कंपनी ने इस तिमाही में करीब 50 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का अनुमान जताया है। यह वॉल स्ट्रीट के 43.2 बिलियन डॉलर के अनुमान से काफी ज्यादा है। इस शानदार परफॉर्मेंस ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि हाइपरस्केलर्स के कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर जारी चिंताओं के बावजूद AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च मजबूत बना हुआ है। भविष्य की सप्लाई के लिए $22 बिलियन के एडवांस ऑर्डर चिप मार्केट में मची इस होड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रोन को भविष्य में मेमोरी चिप्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के कमिटमेंट (एडवांस ऑर्डर) मिल चुके हैं। यह हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और अन्य AI फोकस्ड प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड को दर्शाता है। 2027 के बाद तक बनी रहेगी चिप की किल्लत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) संजय मेहरोत्रा ने एनालिस्ट्स से बात करते हुए कहा कि फिलहाल मांग के मुकाबले सप्लाई पूरी होने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। बाजार में यह तंग स्थिति (शॉर्टेज) कैलेंडर वर्ष 2027 के बाद भी बने रहने की आशंका है। चिप की उपलब्धता में केवल 2028 से धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना है। मई में छुआ था $1 ट्रिलियन का पड़ाव माइक्रोन ने इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया था। इस आंकड़े को छूकर कंपनी दुनिया की चुनिंदा दिग्गज टेक कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई थी। इस अर्निंग रिपोर्ट के आने के बाद से अब तक कंपनी का शेयर 15% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में कुल 326% की भारी बढ़त दर्ज की जा चुकी है। सेमीकंडक्टर और स्टोरेज शेयरों में आई चौतरफा तेजी माइक्रोन के शानदार नतीजों का असर पूरी इंडस्ट्री पर देखने को मिला। गुरुवार को फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.2% चढ़ गया। एलएसईजी (LSEG) के डेटा के मुताबिक, यह इंडेक्स अब तक के अपने सबसे मजबूत तिमाही प्रदर्शन की राह पर है। माइक्रोन की कॉम्पिटिटर कंपनियों में सैंडिस्क का शेयर 22%, वेस्टर्न डिजिटल 7.4% और सीगेट टेक्नोलॉजी 4.3% मजबूत हुआ। वहीं क्वालकॉम के शेयरों में भी तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने अपने AI-फोकस्ड डेटा-सेंटर बिजनेस के लिए महत्वाकांक्षी ग्रोथ प्लान पेश किया है। एप्पल के कारण टेक सेक्टर में दिखा मिला-जुला रुख माइक्रोन के ब्लॉकबस्टर नतीजों के बावजूद ग्लोबल टेक सेक्टर में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हाइपरस्केलर्स द्वारा AI पर किया जा रहा भारी खर्च कब तक टिक पाएगा। इसी बीच एपल ने मेमोरी और स्टोरेज चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया। एपल के इस कदम से कंपनी के शेयरों में 6.1% की गिरावट आई और बाजार में एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर बूम की इस बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरी में कौन उठाएगा। क्या होते हैं हाइपरस्केलर्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी? हाइपरस्केलर्स: ये वे बड़ी क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमेजन और मेटा) होती हैं, जो बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करती हैं। इनके द्वारा किया जाने वाला खर्च पूरी टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करता है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी: यह एक एडवांस और सुपर-फास्ट मेमोरी चिप होती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से AI और डीप लर्निंग के प्रोसेस को तेजी से चलाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग इस समय दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। ये खबर भी पढ़ें… सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार: गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के कारण सोमवार को ये गिरावट के साथ खुल सकता है। आज दक्षिण कोरिया का बाजार कोस्पी 8% नीचे हैं और गिफ्ट निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूट गया है। पूरी खबर पढ़ें…
जैवलिन थ्रो छोड़ रग्बी में चमकीं अमनदीप कौर:ऑक्शन में 11 घंटे नहीं चुनी गईं, फिर बनीं बेस्ट प्लेयर; लक्ष्य भारत को गोल्ड जिताना

पंजाब की 24 वर्षीय अमनदीप कौर कभी जैवलिन थ्रो में करियर बनाने के लिए मेहनत करती थीं, लेकिन इस खिलाड़ी ने हाल ही में आयोजित रग्बी प्रीमियर लीग 2026 में ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब जीत लिया है। हालांकि, ऐसा करना आसान नहीं था। अप्रैल में इस लीग के पहले सीजन की नीलामी के दिन अमनदीप को सुबह 9 बजे से रात 8 बजे जब किसी टीम ने नहीं चुना, तो वह काफी निराश हो गईं। लेकिन तभी रात करीब 8 बजे उनकी एक दोस्त ने इंस्टाग्राम पर देखकर खुशखबरी दी कि उन्हें ‘चेन्नई बुल्स’ ने खरीद लिया है। 1.6 लाख रुपए की बोली के साथ वह नीलामी में संयुक्त रूप से तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी बनीं। उनका यह चयन सही साबित हुआ, क्योंकि उनके शानदार खेल की बदौलत चेन्नई बुल्स लीग चरण में शीर्ष पर रही और टूर्नामेंट की उपविजेता बनी। अमनदीप का रग्बी तक पहुंचने का सफर भी आसान नहीं था। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब की श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएशन करने वाली अमनदीप शुरुआत में एक जैवलिन थ्रोअर थीं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों और अपने कोच के सेंटर बदल जाने के कारण उन्हें ट्रेनिंग में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान न्यूजीलैंड की स्टार प्लेयर पोर्टिया वुडमैन की ताकत और खेल में दिखने वाली आक्रामकता ने उन्हें रग्बी की ओर खींचा। अमनदीप ने रग्बी के मैदान को अपना गुस्सा और ऊर्जा निकालने का जरिया माना। हालांकि, परिवार को समझाना मुश्किल था। उनके भाई, जो खुद एक पहलवान हैं, चाहते थे कि अमनदीप किसी टीम गेम की बजाय व्यक्तिगत खेल पर ध्यान दें। रग्बी खेलते हुए अमनदीप को काफी चोटें आईं। कभी सिर में टांके लगे तो कभी हाथ में फ्रैक्चर हुआ। उन्होंने अपनी चोटें और सर्जरी की बात परिवार से छिपाई, क्योंकि उन्हें डर था कि घरवाले खेलने से रोक देंगे। लेकिन अब परिवार का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका है। अमनदीप के हौसले भी बुलंद हैं और उनका अगला लक्ष्य अब आगामी एशियन गेम्स में भारत को मेडल जिताना है। जिनके वीडियो देखकर खेल सीखा, उन्हीं की कप्तानी में खेलीं 2025 में अमनदीप को पहली बार भारतीय टीम के नेशनल कैंप में बुलाया गया। जब चीन और श्रीलंका दौरे के लिए अंतिम 14 खिलाड़ियों का चयन होना था, तो मीटिंग में सबसे पहला नाम अमनदीप का ही पुकारा गया। चीन में एशियन रग्बी सेवन सीरीज में उन्होंने पहली बार भारत की जर्सी पहनी। इस दौरान उन्हें अपनी आदर्श और भारतीय कप्तान शिखा यादव के साथ खेलने का मौका भी मिला, जिनके वीडियो देखकर वह खेल सीखा करती थीं।






