Tuesday, 22 Sep 2026 | 11:13 PM

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UN में पहली बार महिला चीफ बन सकती है:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे

UN में पहली बार महिला चीफ बन सकती है:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे

संयुक्त राष्ट में अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं। महासचिव बनने की रेस में इस समय कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। यानी UN के 80 साल के इतिहास में यह पहली बार हो सकता है जब कोई महिला महासचिव बने। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। अब उनके बाद अगला महासचिव चुना जाना है। UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए। भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे। —————— यह खबर भी पढ़ें… संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे संयुक्त राष्ट्र (UN) में शुक्रवार को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी सूची में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक-यात्रा पर रोक

पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी सूची में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक-यात्रा पर रोक

पाकिस्तान ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और शोधकर्ता डेनिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ किसी खास आतंकवादी गतिविधि का आरोप या अदालत का कोई फैसला सामने नहीं आया है। इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में हुए प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को प्रमुखता से कवर किया था। अब उनका नाम उस सूची में डाला गया है, जिसमें सरकार उन लोगों को रखती है, जिन्हें वह आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर डेनिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उन्हें फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध आदेश में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। डेनिश इरशाद कौन हैं? डेनिश इरशाद रावलपिंडी में रहने वाले पत्रकार और शोधकर्ता हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। इसके बाद से वे लगातार PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति, इतिहास और वहां के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर काम कर रहे हैं। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। बीबीसी उर्दू के पत्रकार रोहान अहमद ने उन्हें पेशेवर पत्रकार और शोधकर्ता बताया है। उनके मुताबिक, इरशाद उन लोगों की आवाज सामने लाने की कोशिश करते रहे हैं, जिन्हें अपनी बात रखने के लिए मदद की जरूरत होती है। इरशाद ने ऐसा क्या किया? पाकिस्तान के जिस आदेश के आधार पर डेनिश इरशाद का नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया है, उसमें उनके खिलाफ कोई खास आरोप नहीं बताया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया, जिसे आतंकवाद से जोड़कर देखा गया। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, इरशाद का नाम PoK के 24 लोगों की सूची में 12वें नंबर पर है। आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेके-जेएएसी से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को जून में प्रतिबंधित कर दिया था। हाल के महीनों में इरशाद ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टिंग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों और वहां की स्थिति को कवर करने के साथ उन परिवारों से भी बातचीत की, जिनके बच्चों के पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने का आरोप है। यानी उनकी रिपोर्टिंग में आंदोलनकारियों और प्रभावित परिवारों का पक्ष भी सामने आया। हालांकि, सरकार के आदेश में यह नहीं बताया गया कि उनकी ऐसी कौन सी रिपोर्टिंग या गतिविधि फोर्थ शेड्यूल में नाम डालने का आधार बनी। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। उन्हें सरकार की तरफ से सीधे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें विदेश यात्रा पर रोक, पासपोर्ट से जुड़ी पाबंदियां, बैंक खातों पर कार्रवाई, कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी और हथियार का लाइसेंस लेने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में डाला जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जाती। इससे उस व्यक्ति की आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। PoK में क्या चल रहा है? डेनिश इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। यह आंकड़ा संगठन का दावा है। इसी दौरान डेनिश इरशाद लगातार PoK के हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा प्रभावित परिवारों से भी बात की। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी रिपोर्टिंग और आंदोलन को कवर करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? डेनिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया? सिर्फ

एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती:डेंगू से संक्रमित होने के बाद लीलावती अस्पताल में चल रहा इलाज

एक्ट्रेस पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती:डेंगू से संक्रमित होने के बाद लीलावती अस्पताल में चल रहा इलाज

वेटरन एक्ट्रेस और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों डेंगू से संक्रमित होने के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। उनका पिछले कई दिनों से अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह जानकारी पत्रकार विक्की ललवानी ने सोशल मीडिया के जरिए शेयर की। उन्होंने बताया कि पूनम ढिल्लों से सुबह मैसेज पर बात हुई और एक्ट्रेस ने अपनी तबीयत में सुधार की जानकारी दी। विक्की ललवानी ने लिखा कि पूनम ढिल्लों कई दिनों से अस्पताल में हैं और अब रिकवरी कर रही हैं। उन्होंने एक्ट्रेस के जल्द पूरी तरह ठीक होने की कामना भी की। गौरतलब है कि पूनम ढिल्लों हाल ही में CINTAA को लेकर भी चर्चा में रही हैं। CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 सदस्यों ने हाल ही में अपने पदों और कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों ने आरोप लगाया था कि उन्हें संगठन की मौजूदा लीडरशिप पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी की थी। वहीं, पूनम ढिल्लों ने अपने और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ लगे आरोपों को बहुत आपत्तिजनक बताया था। पूनम ढिल्लों ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा था, बात यह थी कि चीजें उनके हिसाब से नहीं हो रही थीं। वे CAWT (सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट) के जरिए CINTAA सदस्यों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे थे। जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने हमारे खिलाफ अजीब और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पूनम ने आरोपों की भाषा पर नाराजगी जताते हुए कहा था, आप यकीन नहीं करेंगे कि आरोप कितने अश्लील थे। वे इतने आपत्तिजनक थे कि अगर हम चाहते तो इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार कर सकते थे। ऐसे आरोप, दुख पहुंचाने वाले बयान और आपत्तिजनक भाषा बड़े स्तर पर फैलाई गई। पूनम ने बताया था कि इस विवाद का उन पर इमोशनल असर पड़ा और उन्होंने कई बार कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि दो या तीन लोग, जिन्हें उन्होंने पेड प्रवक्ता बताया, इसी तरह की बातें करते थे। उन्होंने कहा था कि उनमें से एक या दो CINTAA के सदस्य भी थे। उन्होंने बहुत अनुचित और दुख पहुंचाने वाले बयान दिए। फिर भी हमने चुप रहना चुना। पूनम ने आत्मसम्मान को सबसे जरूरी बताया पूनम ने कहा था कि मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी। मेरा आत्मसम्मान और ईमानदारी मेरे लिए बहुत जरूरी है। हमने जो कुछ वर्षों में कमाया है, वह एक-दो साल में नहीं कमाया। हमने अपने व्यवहार, गरिमा, मौजूदगी और लोगों के साथ व्यवहार व बातचीत के तरीके से दशकों में अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान बनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक और इंटरव्यू में पूनम ने कहा कि वह और पद्मिनी CINTAA के लिए गुडविल बनाने के लिए अपने रिसोर्स और कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पर्सनल फायदा नहीं है। पूनम ने कहा कि संगठन के सदस्यों के लिए कुछ करने की पहल कोई और नहीं कर रहा था, इसलिए मैं उनके आरोपों से हैरान हूं। CAWT और कार्यक्रम से जुटाई रकम पर सफाई पूनम ने कहा था कि इस्तीफा देने वाले सदस्य CAWT को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रस्ट दिवंगत दिलीप कुमार, अमरीश पुरी, अमजद खान और दूसरे वरिष्ठ कलाकारों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट ने सदस्यों को मेडिकल सुविधाएं देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पूनम के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में मौजूदा समिति के किसी सदस्य ने CAWT के लिए रकम नहीं जुटाई। उन्होंने बताया कि हाल में एक कार्यक्रम के जरिए रकम जुटाई गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली कलाकार कविता कृष्णमूर्ति और मधुश्री को साड़ियां दी गईं, जबकि बिना फीस प्रस्तुति देने वाले नितिन मुकेश को कुर्ता दिया गया। पूनम ने कहा, इस्तीफा देने वाले सदस्य हम पर साड़ियां खरीदने का आरोप लगा रहे हैं। क्या हमने वे साड़ियां अपने लिए खरीदी थीं? हम यह मानते हैं कि इन कलाकारों ने बिना फीस हमारे लिए प्रस्तुति दी थी, इसलिए उन्हें ये उपहार दिए गए। पद्मिनी और मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और अपने अनुरोध पर उनसे प्रस्तुति करवाई थी। इन गायकों ने CINTAA के लिए मदद की। हमने इन परफॉर्मेंस से 1 करोड़ रुपए जुटाए। ऐसे में अगर हम कलाकारों के उपहारों पर 1 लाख रुपए खर्च करते हैं तो इसमें समस्या क्या है? ‘42 साल से इंडस्ट्री में हूं, क्या ऐसा विश्वासघात कर सकती हूं’ पूनम ने सवाल किया था कि फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बाद क्या उन पर संगठन से विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था, हम इस इंडस्ट्री में 42 साल से हैं। कुछ लोग 45 साल से और कुछ 48 साल से इसका हिस्सा हैं। क्या आपको सच में लगता है कि इतने वर्षों बाद हम ऐसा विश्वासघात कर सकते हैं? मैं आपके साथ एक बहुत निजी बात साझा करना चाहती हूं। पिछले एक या डेढ़ साल में कई बार ऐसा लगा कि CINTAA की कार्यकारी समिति से इस्तीफा देकर अलग हो जाऊं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि इन लोगों ने हमारा जीवन बहुत मुश्किल बना दिया था। हर एक चीज का विरोध किया गया। हर पहल का विरोध किया गया।

अमेरिका ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत के बाद समझौता नहीं हुआ

अमेरिका ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत के बाद समझौता नहीं हुआ

अमेरिका ने कनाडा से आने वाले 20 अरब डॉलर से ज्यादा के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। यह कदम दोनों देशों के ट्रेड बातचीत के बाद समझौता नहीं होने के बाद उठाया गया। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय समय सीमा शनिवार को खत्म हो गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश इन नए टैरिफ का जवाब “डॉलर फॉर डॉलर” देगा। यानी कनाडा भी अमेरिका के सामान पर उतने ही मूल्य का टैरिफ लगाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह कनाडा के अमेरिका को सालाना निर्यात का 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ हफ्तों में बातचीत में अच्छी प्रगति हुई थी, लेकिन वह कनाडा के हितों को पूरा करने के लिए काफी नहीं थी। आखिरी समय में अमेरिका ने डील की शर्तें बदल दीं। इससे किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल हो गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में बुधवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई है। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। यह सगाई दोनों के डेटिंग शुरू करने के छह साल बाद हुई थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर इलाहाबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

53 साल के अर्जुन रामपाल ने दूसरी शादी की:14 साल छोटी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला से शादी रजिस्टर कराई, रिलेशनशिप से दो बेटे हैं

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियड्स से शादी कर ली है। गोवा में शुक्रवार को यह शादी रजिस्टर्ड कराई गई। दोनों ने उत्तरी गोवा के मापुसा स्थित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी की कानूनी प्रक्रिया पूरी की। PTI के मुताबिक, इस दौरान उनके करीबी दोस्त मौजूद थे। स्थानीय कानून के तहत पहले और दूसरे हस्ताक्षर के बीच 15 दिन का इंतजार जरूरी होता है। इस अवधि को माफ कराने के लिए कपल ने स्थानीय कोर्ट के असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से विशेष अनुमति ली थी। सब-रजिस्ट्रार सूरज वर्नेकर ने बताया कि शादी गोवा के यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत रजिस्टर्ड हुई। अर्जुन और गैब्रिएला शाम करीब 4 बजे ऑफिस पहुंचे थे। दोनों इस मौके पर कैजुअल कपड़ों में थे। 2018 से रिश्ते में हैं अर्जुन और गैब्रिएला अर्जुन और गैब्रिएला 2018 से रिश्ते में हैं। यह रिश्ता एक्टर के पूर्व पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद शुरू हुआ था। शादी से 7 साल पहले यानी 2019 में अर्जुन और गैब्रिएला के पहले बेटे एरिक का जन्म हुआ था। इसके चार साल बाद उनके दूसरे बेटे एरिव का जन्म हुआ। 2025 में अर्जुन ने गैब्रिएला से अपनी सगाई की जानकारी दी थी। दो बच्चों के बाद शादी नहीं करने पर यह कहा था अर्जुन ने इससे पहले रणवीर अलाहबादिया के यूट्यूब चैनल पर बताया था कि दो बच्चों के माता-पिता होने के बावजूद उन्होंने गैब्रिएला से शादी क्यों नहीं की थी? एक्टर ने कहा था कि यह न मेरी वजह से है और न उसकी वजह से। शादी आखिर है क्या? एक कागज ही तो है। मुझे लगता है कि हम पहले से शादीशुदा हैं और मेरे मन में इसे लेकर कोई शक नहीं है, लेकिन कभी-कभी वह कागज आपको बदल भी सकता है क्योंकि आपको लगता है कि अब सब स्थायी है, जबकि असल में यह एक गलत धारणा है और आप कानूनी तौर पर बंध जाते हैं। उन्होंने आगे कहा था, इससे एक-दूसरे के प्रति आपका रवैया बदल सकता है। मुझे लगता है कि हम दोनों ऐसा ही महसूस करते हैं। हमारे बीच जो कुछ हुआ, वह बहुत स्वाभाविक था। मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि मैं इसे नजर न लगने देना चाहता हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे किसी को इस बात का जवाब देना जरूरी है। हमारे लिए यह बहुत खूबसूरत है। आपको जब तक संभव हो, इसे महसूस करते रहना चाहिए। हम दोनों के मन में एक-दूसरे से शादी हो चुकी है। हम एक-दूसरे को सही दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड भी हैं। हालांकि, अर्जुन रामपाल ने यह भी साफ किया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं हैं। अर्जुन की पहली शादी मेहर जेसिया से हुई थी अर्जुन रामपाल की पहली शादी पूर्व सुपरमॉडल मेहर जेसिया से 1998 में हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां माहिका और मायरा हुईं। 20 साल साथ रहने के बाद, मई 2018 में उन्होंने अलग होने की घोषणा की और नवंबर 2019 में दोनों का तलाक हो गया।

कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा साहिब परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसी नंबर से कनाडा के ही सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी मिली है। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैलगरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और समुदाय या दोनों में से किसी भी गुरुद्वारा साहिब को किसी सक्रिय खतरे की संभावना नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था? पहले पार्किंग खाली करने को कहा, फिर इमारत ढहाने की धमकी दशमेश कल्चर सेंटर के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय में लगातार दो संदिग्ध फोन कॉल्स आईं। पहली कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग खाली कराने को कहा। उसने दावा किया कि वहां कुछ तार बिछाने का काम किया जाना है। जबकि, कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का CEO बताया। उसने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार से बात की और सीधे गुरुद्वारा भवन को गिराने की धमकी दी। रणबीर ने बताया कि उसी नंबर से कनाडा के सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी भरी कॉल आई। कैलगरी पुलिस कर रही मामले की जांच कैलगरी पुलिस सर्विस ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केवल दशमेश कल्चर सेंटर ही नहीं, बल्कि एक अन्य नजदीकी गुरुद्वारे को भी इसी तरह का धमकी भरा फोन कॉल आया था। पुलिस कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने और नंबरों को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई शरारत थी या इसके पीछे कोई नफरती मानसिकता थी। समाज सेवा से जुड़ा है गुरुद्वारा स्थानीय संगत और नियमित आने वाले लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा सभी धर्मों के लिए खुला है और समाज सेवा, फूड बैंक और कपड़े बांटने जैसे काम करता है। दुनिया में पहले से तनाव है, ऐसे में देश के भीतर नफरत फैलाने के बजाय प्यार बांटना चाहिए। मेयर और नेताओं को दी गई सूचना घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी ने पुलिस के साथ-साथ अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर के कार्यालय, स्थानीय पार्षदों, सांसदों और विधायकों को सूचित किया है। कैलगरी के मेयर जेरेमी फारकस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सिख समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया है। सिख संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बयान गुरुद्वारा प्रबंधन के प्रतिनिधि अमनप्रीत सिंह परमार ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए फूड बैंक और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक कार्य चलाता है। जब दुनिया में पहले से ही इतनी जंग चल रही है, तो हमें देश के भीतर आंतरिक युद्ध शुरू नहीं करने चाहिए, बल्कि प्यार फैलाना चाहिए। वहीं, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, दशमेश कल्चर सेंटर राज सिद्धू ने बताया कि धमकी भरे फोन के समय परिसर में काफी संख्या में परिवार और बच्चे मौजूद थे। यह घटना परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि एकजुट होने और संवाद करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के दरवाजे हमेशा की तरह सभी संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के लिए खुले रहेंगे। गुरुद्वारा अध्यक्ष हरपाल सिंह और अन्य सदस्यों ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ तीखी और अनियंत्रित बयानबाजियां इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति को भी आमंत्रित किया कि वह गुरुद्वारे आए और सिख समुदाय के बारे में करीब से जाने। कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय में गुस्सा बता दें, दशमेश कल्चर सेंटर का इतिहास गौरवमयी है और 46 साल पहले इसकी नींव रखी गई थी। यह गुरुद्वारा अब 15 हजार से अधिक पंजीकृत सदस्यों और कैलगरी के करीब एक लाख से अधिक सिख प्रवासियों की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे धार्मिक स्थान को गिराने की धमकी से कैलगरी ही नहीं पूरे कनाडा में बसे पंजाबियों में गुस्सा है। यही कारण है कि इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। मेयर ने घटना की निंदी की कैलगरी के मेयर मेयर जेरोमी फारकास ने भी इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कैलगरी में नफरत, डर या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। फिलहाल, दशमेश कल्चर सेंटर और दूसरे गुरुद्वारे में अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और आने-जाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

मनोज मुंतशिर बोले- श्रीकृष्ण थे दुनिया के पहले साइकोलॉजिस्ट:भगवद्गीता हर दुख का इलाज; राधा-कृष्ण के एक ना होने का कारण बताया

गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का नाट्य शो ‘राधा से रणभूमि तक’ आज 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में मंचित होने जा रहा है। नीलम मुंतशिर और विक्रम मेहरा ने इस शो का निर्माण किया है। पुनीत जे। पाठक के निर्देशन में बने इस शो में श्रीकृष्ण की अनकही यात्रा को जीवंत किया गया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मनोज मुंतशिर ने श्रीकृष्ण के मनोविज्ञान, 50 से अधिक किताबों के अध्ययन से जुड़ी 2 साल की लेखन यात्रा, राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम और आज की जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के लिए श्रीकृष्ण के संदेशों पर खुलकर बात की। सवाल: ‘राधा से रणभूमि तक’ पहुंचते-पहुंचते कृष्ण में सबसे बड़ा बदलाव क्या पाते हैं? जवाब:कृष्ण में कुछ बदला ही नहीं। कृष्ण सदैव से ही पूर्ण थे प्रेम में भी, नीति में भी, युद्ध में भी और दर्शन में भी। जो पूर्ण हो वो बदलेगा कैसे? सवाल: दर्शक यह शो क्यों देखें? जवाब: हमारा शो किसी रेस में नहीं है। हम किसी से अच्छा या बेहतर बनने की कोशिश नहीं कर रहे। हम बस कृष्ण की एक ऐसी यात्रा आपके सामने रखना चाहते हैं, जो आपने इससे पहले किसी मंच, सिनेमा या टेलीविजन पर नहीं देखी होगी। शो में कुछ ऐसे पल हैं, जिनपर मैंने दर्शकों की हिचकियां सुनी हैं, उनका रोना सुना है, वहीं अनेक ऐसे पल भी हैं जहां लोग सीट्स से उठकर नाचते हैं। राधा-कृष्ण की अंतिम मुलाकात, गांधारी का श्राप, कृष्ण की मृत्यु, द्रौपदी का चीरहरण और जिस तरह हम गीता सार प्रस्तुत कर पाए। ये सभी क्षण अविस्मरणीय बन के उभरे हैं। और सबसे बड़ी बात, यह पूरे परिवार के लिए एक मनोरंजक और भावनात्मक अनुभव है। बच्चे इसे युद्ध के भव्य दृश्यों के लिए देख सकते हैं, बड़े इसके संगीत और वैभव के लिए और बुजुर्ग गीता सार के दौरान भावुक हुए बिना शायद रह ही नहीं पाएंगे। इस शो को लिखने के लिए मैंने 50 से अधिक किताबें पढ़ीं। श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण सहित अनेक शास्त्रों और कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथों का अध्ययन किया और दो साल से अधिक की लेखन यात्रा के बाद इसे आकार दिया। मैं आपसे सिर्फ एक बार यह शो देखने का आग्रह करता हूं। उसके बाद दर्शक खुद इसे सात-आठ बार देखने वापस आते हैं। मुंबई में हमें कई ऐसे लोग मिले जो लगातार आठवीं बार शो देखने आए थे। हमारे निर्माता श्री विक्रम मेहरा और नीलम मुंतशिर और निर्देशक पुनीत जे। पाठक ने मिलकर ऐसा शो तैयार किया है, जिसपर मुझे आकाश भर गर्व है। सवाल: प्ले के नाम में ही एक पूरी यात्रा है। आपके लिए कृष्ण क्या हैं प्रेमी, रणनीतिकार, दार्शनिक या योद्धा? जवाब: मेरे कृष्ण पूर्ण परमेश्वर हैं। वो मनुष्य योनि में जन्मे, इसलिए प्रेमी भी हैं, सखा भी, गुरु भी, बेटे भी और पिता भी। लेकिन मेरे लिए कृष्ण सबसे बड़े दार्शनिक योद्धा हैं, जो कहते हैं कि “वो शांति निंदनीय है जो युद्ध से घबराये और वो युद्ध वंदनीय है जो शांति के लिए लड़ा जाए”। सवाल: इस कहानी में आपकी सबसे बड़ी अनकही बात क्या है? जवाब:एक ऐसा प्रश्न है जो मुझे हमेशा व्यथित करता रहा। जब कृष्ण अपने अंतिम क्षणों में मृत्यु के सामने थे, तब उनके मन में क्या चल रहा था? भगवान क्या सोच रहे थे? हमने उसी अनकहे क्षण को समझने और महसूस करने की कोशिश की है। सवाल: कृष्ण की यात्रा में आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली घटना कौन-सी है? जवाब: कोई एक हो तो बताऊं। लेकिन दो बातें मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करती हैं, युद्ध और शांति के बीच वो संतुलन जो कृष्ण बना पाये। आज की दुनिया यही संतुलन बना पाने में असफल हो रही है। और दूसरी बात, सफलता को सुख समझने की हमारी भूल। कृष्ण की जीवन यात्रा से आप समझेंगे की सफलता और सुख में अंतर है। एक बार कृष्ण की और लौटिए, सारे उत्तर मिल जाएंगे। सवाल: राधा और कृष्ण कभी एक क्यों नहीं हो पाए? जवाब: राधा और कृष्ण एक कैसे होते, जब दो थे ही नहीं! कृष्ण कभी राधा से दूर गए ही नहीं। वे सर से पांव तक स्वयं राधा बन गए थे। आज भी अगर आपको कृष्ण को बुलाना हो, तो राधा रानी का नाम लेना पड़ता है। ‘राधे-राधे बोले, चले आएंगे बिहारी।’ सवाल:कृष्ण का सबसे बड़ा हथियार क्या था बुद्धि, नीति या मनोविज्ञान? जवाब:कृष्ण का सबसे बड़ी सुपरपावर था मनोविज्ञान। कृष्ण दुनिया के सबसे पहले मनोवैज्ञानिक चिकित्सक थे। पश्चिम का ये दावा एकदम आधारहीन है कि मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रायड थे। फ्रायड से 5000 पहले मनोविज्ञान का सबसे बड़ा शास्त्र अवतरित हो चुका था जिसे हम श्रीमद्भगवद्गीता कहते हैं। 700 श्लोकों का एक कैप्सूल है भगवद्गीता, जो संसार के हर दुख की दवा है। गीता को सहजता से समझना है तो एक बार राधा से रणभूमि तक देखिए, गीता का इस से भावुक रूप शायद आपने अब तक नहीं देखा होगा। सवाल:अगर कृष्ण स्वयं आपसे पूछें ‘मेरी कहानी लिखते समय मुझे कितना समझा?’ तो आप क्या कहेंगे? जवाब:मैं कृष्ण को समझने का दावा बिल्कुल नहीं करता। एक ही दावा है मेरा और वो अभिमान की हद तक है। मैं कृष्ण में विश्वास करता हूं, मैंने उनके हाथ पकड़ लिए हैं, वो जहां चाहे ले जाएं। मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों से एक ही आग्रह करता हूं। कृष्ण का हाथ पकड़ के चलिए, जीवन में कभी किसी के पांव पकड़ने की नौबत नहीं आएगी। सवाल:लेखक के तौर पर क्या डर लगा कि कहीं आस्था आड़े न आ जाए या कल्पना मर्यादा न लांघ जाए? जवाब: मैंने पहले खुद को कृष्ण के बारे में जितना संभव हो सका, उतना भरा और उसके बाद लिखना शुरू किया। 50 से अधिक किताबें पढ़ीं, कृष्ण पर लिखे गए ग्रंथ पढ़े, गीता पढ़ी और पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस यात्रा में उतरा। और जब हमारे साथ श्रीनाथजी का आशीर्वाद हो, तो फिर चिंता किस बात की? हमने पूरे देश में लगभग 30 हाउसफुल शो किए हैं और हर जगह से सिर्फ प्रशंसा ही सुनने को मिली। यह कृष्ण जी की ही कृपा है। अब 22 और 23 अगस्त को इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में चार शो हैं। माँ अहिल्याबाई