ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात की:पुतिन से चर्चा के एक दिन बाद कीव पहुंचे; रूस से युद्ध खत्म कराने पर चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर और दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अहम बातचीत की। यह बातचीत रूस के साथ चल रहे युद्ध को खत्म कराने की अमेरिकी कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए हुई। दोनों की यह कीव की पहली यात्रा थी। इससे एक दिन पहले उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बैठक के बाद विटकॉफ ने कहा, हमने बहुत सार्थक और महत्वपूर्ण बातचीत की। यह काफी गंभीर चर्चा थी। हम इससे बहुत उत्साहित हैं और जब तक जरूरत होगी, बातचीत जारी रखेंगे। कुशनर ने कहा कि इस यात्रा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को काफी कुछ सीखने को मिला है। उम्मीद है कि इससे शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते मिलेंगे। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा को खाली कराने की योजना पर बोले- यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, शांति प्रयासों को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि जबरन विस्थापन की मांग को आधिकारिक नीति या व्यवहारिक कदमों में बदलने के गंभीर नतीजे होंगे। उनके मुताबिक, इससे शांति कायम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
8 मुस्लिम देशों ने इजराइली मंत्रियों की निंदा की:गाजा खाली कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, कहा- इससे शांति को खतरा

8 मुस्लिम बहुल देशों ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना बनाने की बात कही थी। सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन हैं। ये फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा हैं। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर गाजा के लोगों को जबरन हटाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इससे शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 2 सितंबर को कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। उन्होंने आगे कहा अब इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' कहा:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कनाडा के साथ चल रही व्यापार वार्ता को लेकर आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका के हिसाब से उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। खबर लगातर अपडेट हो रही है…
अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को 'छोटा भौंकने वाला कुत्ता' बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। फॉक्स न्यूज ने जब बेसेंट से पूछा कि अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद का आगे क्या होगा, तो बेसेंट ने कहा, बेंसेट बोले- कनाडाई टैरिफ का अमेरिका पर कोई असर नहीं अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने ट्रेड वॉर से अमेरिका में कीमतें बढ़ने की आशंका को लेकर भी चिंता नहीं जताई। बेसेंट ने कहा, “मैं चाहता हूं कि कोई मुझे यह दिखाए कि कनाडा के टैरिफ का अमेरिकी कीमतों पर कोई महत्वपूर्ण सांख्यिकीय असर है। मैं इस मुद्दे पर किसी से भी बहस करने के लिए तैयार हूं।” बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से उनका और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का एक-दूसरे पर बयान देने का सिलसिला जारी है। इससे पहले भी बेसेंट ने कार्नी पर आरोप लगाया था कि वे कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बेहतर है, इसके बजाय अपनी राजनीतिक छवि की ज्यादा चिंता करते हैं। ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता न होने के बाद 22 अगस्त से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया था। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। पीएम कार्नी ने इस टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा, “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” कनाडा के अमेरिका पर जवाबी टैरिफ अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, इसलिए टैरिफ बढ़ने का असर दोनों देशों के कारोबार और सामान की कीमतों पर पड़ने का अनुमान है। —————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदला:’लेक ओंटारियो’ अब ‘लेक अमेरिका’ कहलाएगा; कनाडा बोला- हम पुराना नाम ही बोलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किया। पूरी खबर पढ़ें…
हनुमान अंश पार्ट-2 में दिखेगा नैनीताल का कैंची धाम:1960 के बाद की कहानी; 2006 में डायरेक्टर ने टेका था माथा, कमाई 107 करोड़ के पार

बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश के पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो गई है। फिल्म के डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इसकी घोषणा की है। पार्ट-2 में कैंची धाम की कहानी भी दिखाई जाएगी। बाबा 1960 के दशक की शुरुआत में कैंची पहुंचे थे और 15 जून 1964 को यहां हनुमान मंदिर व आश्रम की स्थापना हुई। जीवन के अंतिम वर्षों में कैंची उनका प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा। डॉ. विशाल चतुर्वेदी 2006 के आसपास अपनी पोस्टिंग के दौरान कई बार कैंची धाम गए थे। यहीं उनका पहली बार नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से परिचय हुआ। इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और करीब दो दशकों बाद यही जुड़ाव ‘हनुमान अंश’ की कहानी की प्रेरणा बना। नैनीताल में भवाली के पास शिप्रा नदी के किनारे स्थित कैंची धाम बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नैनीताल में उनसे जुड़े चार प्रमुख धाम बताए जाते हैं- कैंची धाम, काकड़ीघाट, हनुमानगढ़ी और भूमियाधार। 2 करोड़ के बजट में बनी, 107 करोड़ के पार पहुंची कमाई ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री को भी चौंका दिया। करीब 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में सीमित स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। पहले सप्ताह में इसके शो और स्क्रीन घटकर करीब 25 रह गए थे। इसके बाद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की किस्मत बदल दी। चौथे सप्ताह तक फिल्म करीब 1,200 स्क्रीन तक पहुंच गई। अलग-अलग उद्योग स्रोतों में कमाई के आंकड़ों में अंतर है, लेकिन 4 सितंबर तक फिल्म करीब 107 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी थी। यानी फिल्म ने अपनी लागत से 50 गुना से ज्यादा कमाई की। इस तरह ‘हनुमान अंश’ बेहद कम बजट में बड़ी कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म के अहम चेहरों के बारे में जानिए… डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2013 की फिल्म वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में डॉ. राम नंदन भोसले का अहम रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शो में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे कई शो कर चुके हैं। सिंगर-सुनील लोधी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित वायरल गाने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ को सिंगर सुनील लोधी ने गाया है। 25 वर्षीय सुनील नेत्रहीन (दिव्यांग) हैं और वे मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव ‘अगरा’ के रहने वाले हैं। वर्षों तक सुनील ने अपने गांव, स्थानीय मेलों और यहां तक कि ट्रेनों में भी भजन व बुंदेली लोकगीत गाए हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका मिला। स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक बाबा नीम करोली के भक्त स्टीव जॉब्स: 1974 में बाबा से मिलने की चाह लेकर एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स भारत आए। तब तक बाबा के निधन को एक साल हो चुका था। जॉब्स कुछ दिन कैंची धाम में रहे। फिर वापस लौटकर 1976 में एप्पल की शुरुआत की। मार्क जकरबर्ग: 2015 में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान बताया था कि स्टीव जॉब्स ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी थी। यह नीम करौली बाबा का कैंची धाम ही था। जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स हिंदू धर्म मानती हैं। उन्होंने 2010 में एक इंटरव्यू में बताया था कि नीम करौली बाबा की एक तस्वीर देखकर उनकी हिंदू धर्म में रुचि जागी थी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली: एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा नीम करौली बाबा को अपना गुरु बता चुकी हैं। 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा बेटी के साथ कैंची धाम गए थे। मनोज बाजपाई: एक्टर मनोज बाजपाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ से पहले करीब एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। इसी समय वे फिल्म डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुगनुमा फिल्म की रिसर्च के लिए कैंची धाम गए थे। यहां ध्यान करके उन्हें शांति और नई राह मिली। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… बाबा नीब करौरी के थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी:हाथ जलने पर कंबल में दबाया, पलभर में गायब हुआ दर्द; बस हादसे में बची पूरी बारात कैंची धाम और बाबा नीब करौरी (आम बोलचाल में बाबा नीम करौली के नाम से भी जाने जाते हैं) से जुड़ी उनके भक्तों के जीवन में ऐसी अनेक घटनाएं दर्ज हैं, जिन्हें वे गुरु कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव मानते हैं। ऐसी ही एक कहानी दिल्ली निवासी रवींद्र जोशी उर्फ ‘रब्बू दादा’ की है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महाराजजी की सेवा में समर्पित कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)
मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।
अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।



