भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…
भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…
‘मुसलमानों ने ममता को चुना, गरीबों ने मुझे जिताया’, भवानीपुर में जीत के बाद बोले शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ी हैं। बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 सीटों के अंतर से सीएम ममता को हराया। यह दूसरी बार है, जब उन्हें शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव के साथ ही एक बार फिर यह सीट प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी सीट से विधायक बनी हुई हैं। चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु ने कहा कि ममता बनर्जी का हराना जरूरी था। ‘मुसलमानों ने ममता को चुना, गरीबों ने मुझे जिताया’ बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी उम्मीदवार ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट पर भारी जीत हासिल करने के बाद अपनी जीत का चित्र दिखाया। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी को हराना बहुत जरूरी था। यह ममता बनर्जी की राजनीतिक नियुक्ति है। इस बार भी उन्हें 15,000 से ज्यादा की बढ़ोतरी का नुकसान हुआ। कैटरीना ने उन्हें दिल से वोट दिया। वार्ड क्रमांक 77 में वोट देने आये सभी दादी ने ममता को वोट दिया। आस्था, सिखों, जैनों और बौद्धों ने मुझे आशीर्वाद दिया और जिताया। यह ‘यूनिवर्सिटी की जीत है।’ सीपीएम सपोर्टर्स ने मुझे वोट दिया: शुभेंदु अधिकारी उन्होंने कहा, ‘सीपीएम के सभी मजबूत समर्थकों ने मुझे वोट दिया. भवानीपुर में सीपीएम को 13,000 वोट मिले और उन्हें कम से कम 10,000 मिले। मैं वहां के सीपीएम वोटर्स का भी शुक्रिया अदा करता हूं। सभी बंगाली आदिवासियों ने मुझे दिल से वोट दिया। उनके साथ, गुजरातियों, जैनों, मारवाड़ियों, पंथियों और सिख समुदाय ने भी मुझे दिल से वीडियो वोट दिया।’ शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे दो-तीन बार फोन किया. उन्होंने स्पष्ट रूप से भी भवानीपुर को लेकर कुछ चिंता व्यक्त की। मैंने उन्हें कुछ समय पहले बताया था. मैंने किसी और से बात नहीं की है. फ़ोन मुझे इस्तेमाल करने की इज़ाफ़ा नहीं था. मैं अभी उनका सुझाव देने जा रहा हूं। वह इंतज़ार कर रहे हैं. मुझे नंदीग्राम आश्रम भी लेना है।’ देहरादून के गढ़ में बीजेपी ने बनाया सेंध भवानीपुर सीट लंबे समय से मंदिर का गढ़ बनी हुई है। इस चुनाव में ममता बनर्जी की हार को देखें तो यह कुछ-कुछ 2021 विधानसभा चुनाव की तरह है। 2021 विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था। यहां से ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी ने हराया था. ममता बनर्जी के लिए शुभेंदु के हाथ मिल गए, इस कारण भी बड़ी बात यह थी कि एक समय अधिकारी ममता बनर्जी के खास सहयोगी शामिल थे। फिर, नंदीग्राम आंदोलन हो या सिंगूर में आंदोलन के माध्यम से ममता बनर्जी का समर्थन किया गया, लेकिन समय गुजरा और ममता बनर्जी से शुभेंदु अधिकारी ने अलग रास्ता अपनाया और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। लगातार दो चुनाव में ममता बनर्जी की हुई हार खास बात ये है कि किकांस्टीन के दो राजनेताओं में शहीद सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। 2021 में नंदीग्राम में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर का रुख किया और यहां के अखाड़े में जीत हासिल कर सत्य की बागडोर संभाली। इस बार के चुनाव में एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया. नतीजों से पहले ही बीजेपी नेता लगातार दावा कर रहे थे कि वे भवानीपुर से जीतेंगे और उनका दावा 4 मई की देर शाम को हकीकत में बदल गया। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे 2026: बंगाल में बीजेपी को प्रचंड बहुमत, किन रेस पर टीएमसी की जीत, बीजेपी ने दी पटखनी (टैग अनुवाद करने के लिए)ममता बनर्जी(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026(टी)क्या ममता बनर्जी ने अपनी सीट जीती(टी)ममता बनर्जी किस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं(टी)ममता बनर्जी निर्वाचन क्षेत्र परिणाम(टी)भबानीपुर चुनाव परिणाम(टी)भबानीपुर सीट किसने जीती(टी)ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी(टी)सुवेंदु(टी)ममता(टी)ममता बनर्जी समाचार(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)भवानीपुर(टी)शुभेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026
न आ रही हो नींद या मुंह में छाले…गुलाब का पंखुड़ियां चुटकियों में दिलाएंगी राहत, गोंडा के वैद्य से जानिए ट्रिक

Last Updated:May 04, 2026, 21:22 IST Rose flower benefits : गुलाब सिर्फ खूबसूरत फूल नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसके नियमित और सही तरीके से उपयोग से कई छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिल सकती है. गर्मियों में मुंह के छाले, जलन और ज्यादा प्यास लगना आम है. इनसे राहत के लिए गुलाब का सेवन रामबाण है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि यह फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर है. आयुर्वेद में गुलाब को ठंडा, मीठा और शरीर के लिए लाभकारी माना गया है. इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखते हैं. गुलाब के प्राकृतिक गुण पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं और आंतों को साफ रखने में सहायक हैं. गुलाब का फूल शरीर को ठंडक देने वाले गुण पाए जाते हैं. गर्मियों में मुंह के छाले, जलन और ज्यादा प्यास लगना आम है. इनसे राहत के लिए गुलाब का सेवन काफी फायदेमंद है. गुलकंद, जो गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार किया जाता है, शरीर को अंदर से ठंडक देता है और पेट की गर्मी को कम करता है. रोजाना एक चम्मच गुलकंद खाने से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या में भी राहत मिलती है. यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी परेशानियां ज्यादा होती हैं. लोकल 18 से बातचीत में गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि गुलाब का फूल सिर्फ अपनी खूबसूरती और खुशबू के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. पूजा में इस्तेमाल होने वाला यह फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर है. आयुर्वेद में गुलाब को ठंडा, मीठा और शरीर के लिए लाभकारी माना गया है. आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लौट रहे हैं, ऐसे में गुलाब का महत्त्व और भी बढ़ गया है. गुलाब जल प्राकृतिक टोनर की तरह काम करता है, जो त्वचा को साफ और उसमें ताजगी बनाए रखता है. दिन में एक या दो बार गुलाब जल चेहरे पर लगाने से धूल-मिट्टी और गंदगी साफ होती है, जिससे त्वचा में निखार आता है. यह त्वचा को ठंडक भी देता है, जिससे जलन और खुजली जैसी समस्याएं कम होती हैं. जिन लोगों को मुंहासे या एलर्जी की समस्या होती है, उनके लिए भी गुलाब जल फायदेमंद है. इसमें हल्के एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google गुलाब का फूल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. इसकी पंखुड़ियों से बनी चाय या गुलकंद का सेवन करने से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, एसिडिटी और अपच में राहत मिलती है. गुलाब में मौजूद प्राकृतिक गुण पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं और आंतों को साफ रखने में सहायक हैं. नियमित रूप से गुलकंद खाने से कब्ज की समस्या कम होती है और पेट हल्का महसूस होता है. यह भूख बढ़ाने में भी मदद करता है. गुलाब का फूल महिलाओं की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को अंदर से संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन की समस्याओं में राहत मिल सकती है. आयुर्वेद में गुलाब का उपयोग खासतौर पर पीरियड्स के दौरान होने वाली दिक्कतों को कम करने के लिए किया जाता है. गुलकंद या गुलाब की चाय का सेवन करने से पेट दर्द, जलन और बेचैनी जैसी समस्याओं में आराम मिल सकता है. यह शरीर को ठंडक देता है, जिससे इस दौरान होने वाली थकान और कमजोरी भी कम महसूस होती है. हालांकि, अगर समस्या ज्यादा गंभीर हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, लेकिन सामान्य परेशानियों में गुलाब एक प्राकृतिक और आसान उपाय के रूप में काम आ सकता है. गुलाब का फूल मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसकी हल्की और मनमोहक खुशबू दिमाग को शांत करने का काम करती है और तनाव को कम करने में मदद करती है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर काम के दबाव, चिंता और तनाव से घिरे रहते हैं, जिससे मानसिक थकान बढ़ जाती है. ऐसे में गुलाब की खुशबू एक प्राकृतिक थेरेपी की तरह काम करती है. गुलाब से बनी चाय पीने या इसके सुगंधित तेल का इस्तेमाल करने से मन को सुकून मिलता है और मूड बेहतर होता है. यह घबराहट और बेचैनी को कम करने में भी मदद करता है. नियमित रूप से गुलाब का उपयोग करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है. गुलाब का फूल आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है. आजकल लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर इस्तेमाल करने से आंखों में जलन, थकान और सूखापन आम समस्या बन गई है. ऐसे में गुलाब जल का उपयोग राहत देने में मदद करता है. अगर आंखों में जलन या थकान महसूस हो रही हो, तो गुलाब जल की 1 से 2 बूंदें डालने से ठंडक मिलती है और आंखों का लालपन भी कम होता है. कॉटन पर गुलाब जल लगाकर आंखों पर कुछ मिनट रखने से भी आंखों को आराम मिलता है और सूजन कम होती है. यह तरीका खासकर दिनभर की थकान के बाद काफी असरदार होता है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि गुलाब जल शुद्ध और केमिकल-फ्री हो, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो. गुलाब का उपयोग बालों की देखभाल में भी लाभकारी है. गुलाब जल को बालों और स्कैल्प पर लगाने से बालों को प्राकृतिक पोषण मिलता है और सिर की त्वचा ठंडी रहती है. इससे गर्मी के कारण होने वाली खुजली और जलन में भी राहत मिलती है. नियमित रूप से गुलाब जल का इस्तेमाल करने से बाल मुलायम, चमकदार और स्वस्थ दिखते हैं. यह स्कैल्प का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे डैंड्रफ (रूसी) की समस्या भी कम हो सकती है. गुलाब की हल्की खुशबू बालों को ताजगी का एहसास भी देती है, जिससे पूरे दिन फ्रेश महसूस होता है. गुलाब शरीर को प्राकृतिक तरीके से डिटॉक्स करने में मदद करता है. यह शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक है. आजकल
‘100 सीटें लूट ली गईं’: टीएमसी की हार के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी की ‘अनैतिक जीत’ की निंदा की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 21:13 IST पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर पश्चिम बंगाल में कम से कम 100 सीटें लूटने का आरोप लगाया पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी अपने आवास लौट आईं। (पीटीआई) भारी हार का सामना करते हुए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कम से कम 100 सीटें लूटने का आरोप लगाया और भगवा पार्टी के साथ मिलीभगत के लिए चुनाव आयोग पर निशाना साधा। “100 से ज्यादा सीटें बीजेपी ने लूट लीं. चुनाव आयोग बीजेपी का आयोग है. मैंने सीओ और मनोज अग्रवाल से भी शिकायत की, लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे हैं. क्या आपको लगता है कि यह जीत है?” उन्होंने भवानीपुर मतगणना केंद्र पर संवाददाताओं से कहा। #घड़ी | कोलकाता | पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का कहना है, “बीजेपी ने 100 से ज्यादा सीटें लूटीं. चुनाव आयोग बीजेपी का आयोग है. मैंने सीओ और मनोज अग्रवाल से भी शिकायत की, लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे. क्या आपको लगता है कि यह एक जीत है? यह एक अनैतिक जीत है, नहीं… pic.twitter.com/q0zelygU23– एएनआई (@ANI) 4 मई 2026 बनर्जी ने कहा कि भाजपा की जीत “अनैतिक” थी, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अनुचित तरीकों से तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए केंद्रीय बलों और चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “यह लूट है, लूट है, लूट है। हम वापसी करेंगे।” पश्चिम बंगाल परिणाम लाइव अपडेट देखें चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘100 सीटें लूट ली गईं’: टीएमसी की हार के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी की ‘अनैतिक जीत’ की निंदा की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)ममता बनर्जी(टी)भाजपा सीट लूट(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)चुनाव आयोग पूर्वाग्रह(टी)अनैतिक जीत(टी)नरेंद्र मोदी अमित शाह(टी)तृणमूल कांग्रेस की हार
स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल जनादेश पर विचार किया, इसे विकास के लिए वोट बताया | न्यूज18

सीएनएन नाम, लोगो और सभी संबंधित तत्व ® और © 2026 केबल न्यूज नेटवर्क एलपी, एलएलएलपी। एक टाइम वार्नर कंपनी। सर्वाधिकार सुरक्षित। सीएनएन और सीएनएन लोगो केबल न्यूज नेटवर्क, एलपी एलएलएलपी के पंजीकृत चिह्न हैं, जिन्हें अनुमति के साथ प्रदर्शित किया गया है। NEWS18.com पर या उसके हिस्से के रूप में CNN नाम और/या लोगो का उपयोग उनके संबंध में केबल न्यूज नेटवर्क के बौद्धिक संपदा अधिकारों का हनन नहीं करता है। © कॉपीराइट नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड 2026। सर्वाधिकार सुरक्षित। (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)भारतीय राजनीति समाचार(टी)कानून और व्यवस्था(टी)मतदान प्रतिशत(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम
भारतीय जनता पार्टी ने रचा इतिहास, बनी पश्चिम बंगाल में पहली पार्टी…

वह रिकॉर्ड जिसने यह सब शुरू किया: बंगाल पर विजय प्राप्त करने से बहुत पहले, भाजपा ने पहले ही कागज पर इतिहास बना दिया था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में प्रमाणित किया – यहां तक कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया – 2015 में 88 मिलियन सदस्यों और 2022 तक 170 मिलियन से अधिक सदस्यों के साथ। उस पैमाने की एक पार्टी हमेशा बंगाल में आने वाली थी। एकमात्र सवाल यही था कि कब। दस्तक के पीछे के आंकड़े: भाजपा की डिजिटल और संगठनात्मक मशीनरी – दुनिया में कहीं भी किसी भी राजनीतिक दल द्वारा बनाई गई सबसे बड़ी मशीनरी – ने बंगाल के बूथों, गलियों और मोहल्लों में चुपचाप प्रवेश करने में वर्षों बिताए। उसके लिए कोई गिनीज स्टिकर नहीं. लेकिन 4 मई को नतीजे किसी भी प्रमाणपत्र से ज़्यादा ज़ोर से बोले। बंगाल का अपना रिकॉर्ड: नतीजों से पहले ही बंगाल ने इतिहास रच दिया था. 2026 के चुनाव में दो चरणों में 92.47% मतदान हुआ – जो आज़ादी के बाद से राज्य में सबसे अधिक है, यहां तक कि 2011 के ऐतिहासिक चुनाव को भी पीछे छोड़ दिया, जिसने 34 साल के वामपंथी शासन को समाप्त कर दिया। रिकॉर्ड मतदान. एक रिकॉर्ड फैसला. 34 + 15 + 6 = एक ऐतिहासिक स्वीप: गणित करें। वाम मोर्चे ने बंगाल पर 34 वर्षों तक शासन किया। ममता बनर्जी की टीएमसी 15 के साथ दूसरे स्थान पर रही। साथ में, 49 वर्षों का अखंड वाम-झुकाव वाला प्रभुत्व – एक राजनीतिक किला जिसने कभी भी केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी को अपने द्वार से गुजरने नहीं दिया। आज तक. अमित शाह का वादा: चुनाव प्रचार के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने विशिष्ट सटीकता के साथ घोषणा की थी: “4 मई को, मतपेटियाँ सुबह 8 बजे खुलेंगी। दोपहर 1 बजे तक, दीदी सत्ता से बाहर हो जाएंगी – टाटा, अलविदा।” रैली के बाद रैली, रोड शो के बाद रोड शो – राज्य भर में लगभग 100 – शाह ने बंगाल को एक अभियान मुख्यालय की तरह चलाया, किसी प्रतियोगिता की तरह नहीं। यह दिखा. मोदी की गंगा, आखिरकार बंगाल तक पहुंच रही है: बीजेपी की बिहार जीत के बाद, प्रधान मंत्री मोदी ने कहा था: “गंगा जी बिहार से बंगाल तक बहती हैं – बिहार की जीत ने पश्चिम बंगाल में जीत का मार्ग प्रशस्त किया है।” नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं को कहे गए उन शब्दों को तब बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया गया था। 4 मई को, जब भाजपा लगभग 190 सीटों पर आगे चल रही थी, तो उनकी भविष्यवाणी पूरी हो गई। भगवा रंग में लिखा गया इतिहास: वामपंथियों ने 34 साल तक बंगाल पर शासन किया। टीएमसी ने 15 तक शासन किया। 4 मई, 2026 को, भारतीय जनता पार्टी ने सब कुछ ख़त्म कर दिया – बंगाल के इतिहास में सरकार बनाने वाली पहली केंद्र-अधिकारी पार्टी बन गई, जिसे आज़ादी के बाद से राज्य में सबसे नाटकीय राजनीतिक बदलाव कहा जा रहा है। एक गिनीज रिकॉर्ड ने उन्हें बड़े पैमाने पर ला खड़ा किया। बंगाल ने उन्हें सत्ता में पहुंचाया. (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल बीजेपी(टी)भारतीय जनता पार्टी(टी)चुनाव समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव
‘कोई जान नहीं गई’: पीएम मोदी ने बंगाल में ‘ऐतिहासिक’ मतदान की सराहना की, कहा लोकतंत्र की जीत हुई | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 20:04 IST दिल्ली में विजय भाषण को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत लोकतंत्र की जीत और तुष्टीकरण की राजनीति की हार है. विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते पीएम मोदी. (बीजेपी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक चुनाव की सराहना करते हुए कहा कि चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात राज्य में पहली बार किसी निर्दोष की जान नहीं गई। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय से अपने विजय भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “पिछले चुनावों के दौरान जिस तरह की खबरें सामने आती थीं – हिंसा, भय और निर्दोष लोगों की मौत को याद करें। हालांकि, इस बार, पूरे देश ने एक नया विकास देखा: पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान। इस बार कोई निर्दोष जान नहीं गई।” उनकी यह टिप्पणी भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत हासिल करने और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासनकाल को समाप्त करने के बाद आई है। भाजपा ने जीत हासिल कर ली है और 207 सीटों पर आगे चल रही है, जिससे टीएमसी 80 सीटों पर पीछे धकेल दी गई है। पश्चिम बंगाल चुनाव लाइव अपडेट पीएम मोदी ने बंगाल के फैसले को डर पर लोकतंत्र की जीत बताया और सभी राजनीतिक दलों से अतीत में हुई पीड़ा को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक हिंसा के चक्र को समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “राजनीतिक आदत में बदलाव होने दीजिए। भाजपा की जीत के बाद, ‘बदला’ (बदला) के बारे में बात न करके ‘बदलाव’ (परिवर्तन) के बारे में बात करें। आइए हिंसा के चक्र को तोड़ें।” और पढ़ें: पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी की बंगाल जीत ‘पोरीबोर्टन’ की शुरुआत करेगी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दृष्टिकोण को पूरा करेगी पीएम मोदी ने जीत का श्रेय बंगाल के लोगों को उनके लचीलेपन के लिए दिया। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट आयुष्मान भारत को मंजूरी देगी और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने हिंदुत्व आंदोलन के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं सोचता हूं कि आज डॉ. मुखर्जी की आत्मा को कितनी शांति मिली होगी। 1951 में जनसंघ की स्थापना करके उन्होंने हर कार्यकर्ता को यह संदेश दिया कि देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है। उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए एक बड़ी लड़ाई लड़ी।” “आज 4 मई 2026 को बंगाल की जनता ने हमें, भाजपा कार्यकर्ताओं को वो अवसर दिया है। बंगाल की नियति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। आज से बंगाल भयमुक्त है। ये विकास के विश्वास से भर गया है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘कोई जान नहीं गई’: पीएम मोदी ने बंगाल में ‘ऐतिहासिक’ मतदान की सराहना की, कहा लोकतंत्र की जीत हुई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल परिणाम(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)टीएमसी बंगाल में पीछे चल रही है(टी)बंगाल नतीजे(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा(टी)पश्चिम बंगाल गिनती(टी)बीजेपी की ऐतिहासिक जीत(टी)पीएम मोदी की जीत का भाषण(टी)बंगाल पर पीएम मोदी
‘मुझे बुलाया गया है, CAPF के लोगों ने मुझे मारा’, बंगाल में बीजेपी के प्रचंड की जीत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा आरोप

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित बीजेपी ने ममता बनर्जी के होटल को हराकर बंगाल में जीत दर्ज की। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर धक्का देने और मिशिगन का आरोप लगाया। अरेस्ट ने चुनाव आयोग पर कर्मचारियों की कमी और देरी का आरोप लगाया। लैंडस्केप ने दावा किया कि उनके मित्र क्रिस्टोफर की हत्या कर दी गई है। बंगाल चुनाव परिणाम 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रचंड की जीत हुई है। भाजपा मुख्मयंत्री ममता बनर्जी की शटरस्टॉक वर्कशॉप कांग्रेस (टीएमसी) को 125 वोटों से वोट देते हुए बंगाल में प्रचंड की जीत हुई है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार (4 मई, 2026) को बंगाल चुनाव के लिए सेना में सुरक्षा बलों को शामिल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एबीपी न्यूज से बातचीत करते हुए कहा कि आप केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को देख सकते हैं। उन्होंने मुझे धक्का दिया और मारा. सीआरपीएफ को लेकर क्या बोलें ममता बनर्जी? बिहार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और भवानीपुर विधानसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार ममता बनर्जी सोमवार (4 मई, 2026) को विधानसभा क्षेत्र के सखावत मेमोरियल गिनती हॉल आइलैंड। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय सेना ने मुझे भी अंदर नहीं जाने दिया।’ यह पूर्वनिर्धारित है. आप सीआरपीएफ को देख सकते हैं। उन्होंने मुझे धक्का दिया और मारा. सीआरपीएफ के ठीक सामने. वे हर जगह गुंडेप्लांट हैं। मैं उम्मीदवार हूं, फिर भी उन्होंने मुझे अंदर नहीं जाने दिया।’ उन्होंने कहा, ‘भाजपा दानवों की पार्टी है, उसने 100 से ज्यादा लोगों को लूटा और धोखा दिया।’ इलेक्शन कमीशन बीजेपी का कमीशन है. मैंने सीईओ मनोज अग्रवाल से भी शिकायत की, लेकिन वे कुछ नहीं कर रहे हैं। आपको क्या लगता है कि यह जीत गया है? यह एक क्लासिक जीत है, नैतिक जीत नहीं। इलेक्शन कमीशन ने सेंट्रल फोर्स, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मिलकर जो कुछ भी किया है, वह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह लूट, लूट और सिर्फ लूट है। हम वापस लौटेंगे।’ रेजिडेंट ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर तटरक्षक ने चुनाव आयोग पर लगाया बड़ा आरोप. उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने कार्मिक सेवा का भी पूरी तरह से त्याग कर दिया है। एल्बम प्रक्रिया में फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और उसे वेट ग्रैब के बाद, अब यह उन रेज़्यूमे में भी साक्ष्य पत्र जारी करने से इनकार कर रहा है जहां जीत स्पष्ट है- डायमंड हार्बर, मगराहाट पुरबा, मगराहाट पश्चिम, कुलपी, रायदीघी, स्टोन प्रतिमा, बसंती, बर्धमान उत्तर और सीताई। इससे पहले लोगों का एक समूह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के नजदीक पहुंचा और ‘जय श्री राम’ का नारा दिया, जिसके बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई। चुनाव अधिकारी ने कहा था, ‘हमें सूचना मिली है कि कुछ लोग ममता बनर्जी के ब्लैकघाट स्थित आवास और राज्य सचिवालय और नारा प्लांट हैं, जिसके बाद वहां सेंट्रल असेंबली का गठन किया गया है। हम कानून-व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहते।’ उन्होंने कहा, ‘हम कोई खतरा नहीं रखते और शांति भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ आरोप लगाया गया है कि उसके कार्यालय में कॉस्ट्यूम रखा गया है। देहाती कांग्रेस ने दावा किया कि कुछ घंटे बाद चुनावी रुझान स्पष्ट हो गया, दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर, कुश बिहार के स्टॉर्मगंज और उत्तर 24 परगना के पनिहाटी में स्थित उसकी आबादी के बाहर “उपद्रवी” जाम हो गई और वहां के मित्र बन गए। बरुईपुर में स्थानीय धार्मिक नेताओं ने आरोप लगाया कि गुंडागर्दी करने वालों ने पार्टी कार्यालय में लगे फ्लेक्स बोर्ड और बैनर झंडे दिए हैं और मुख्यमंत्री मैत्री टैगोर और शास्त्रीय धार्मिक नेता अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें जमीन पर खींची गई हैं। यह भी पढ़ें: पीएम मोदी का विजय भाषण: बंगाल की पहली सालगिरह में आयुष्मान योजना को हरी झंडी, समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई… पीएम मोदी के 5 बड़े ऐलान
पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बाद नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों पर कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 20:02 IST नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ भाजपा की प्रचंड जीत के बाद घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की कसम खाई। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी. “भले ही 4 मई की शाम ढल रही हो, लेकिन आज बंगाल की पवित्र भूमि पर एक नया सूर्योदय हुआ है, एक ऐसी सुबह जिसका पीढ़ियों को इंतजार था। भाजपा द्वारा जीती गई सीटों की संख्या केवल एक चुनावी आंकड़ा नहीं है; यह अटूट विश्वास की शानदार अभिव्यक्ति है जिसने भय, तुष्टिकरण और हिंसा की राजनीति को उखाड़ फेंका है। आज से, बंगाल के भविष्य के लिए एक नई यात्रा शुरू हो रही है, जहां विकास, दृढ़ विश्वास और नई उम्मीदें कदम दर कदम एक साथ आगे बढ़ेंगी।” ईसीआई परिणाम लाइव, चुनाव 2026 विजेताओं की सूची अपडेट प्रधानमंत्री ने बंगाल में हिंसा के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि बदले की नहीं बल्कि बदलाव की बात होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “..आज, जब भाजपा जीत गई है, तो ध्यान बदलाव पर होना चाहिए, न कि बदले पर। ध्यान भविष्य पर होना चाहिए, डर पर नहीं। मैं सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं: आइए हिंसा के इस अंतहीन चक्र को हमेशा के लिए खत्म करें।” प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बंगाल में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण का आश्वासन दिया, युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसरों का वादा किया और इस बात पर जोर दिया कि प्रवासन पर अंकुश लगाया जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया पश्चिम बंगाल में ‘कमल’ खिलते ही पीएम मोदी ने घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प लिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल घुसपैठिए(टी)नरेंद्र मोदी(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)बीजेपी की भारी जीत(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी हार(टी)घुसपैठ विरोधी नीति(टी)भारतीय प्रधान मंत्री






