Wednesday, 23 Sep 2026 | 02:05 AM

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भारत ने पाक में हिंदू मंदिर गिराने की निंदा की:पंजाब में 100 साल पुराने मंदिर की जगह मदरसा बनाने का आरोप

भारत ने पाक में हिंदू मंदिर गिराने की निंदा की:पंजाब में 100 साल पुराने मंदिर की जगह मदरसा बनाने का आरोप

भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 100 साल से भी ज्यादा पुराने हिंदू मंदिर को गिराए जाने की कड़ी निंदा की है। अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मंदिर की जमीन पर या उसके पास मदरसा बनाने के लिए इसे गिराया गया। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल पर चिंता पैदा करने वाला हमला बताया है। भारत के मुताबिक, यह धार्मिक धरोहर की सुरक्षा में अधिकारियों की चिंताजनक नाकामी को दिखाता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:विदेश मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी

इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:विदेश मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी

इजराइल ने गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को हटाने की योजना तैयार कर ली है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बुधवार को कहा कि सरकार अमेरिका के यह तय करने का इंतजार कर रही है कि उन्हें कहां ले जाया जाएगा। काट्ज ने इजराइली न्यूज साइट Ynet और अखबार Yedioth Ahronoth की कॉन्फ्रेंस में कहा, “गाजा का कोई वास्तविक समाधान अंत में इस पलायन के बिना नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा, “सरकार उन्हें बाहर निकालने के लिए संगठित और तैयार है। उन्हें समुद्र, हवा या हर संभव तरीके से बाहर ले जाया जाएगा।” अमेरिका की मंजूरी का इंतजार अमेरिकी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध को वॉशिंगटन स्थित विदेश विभाग के पास भेज दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में दुनिया के कई देशों को चौंकाते हुए कहा था कि गाजा पट्टी से सभी 20 लाख फिलिस्तीनियों को चले जाना चाहिए। ट्रम्प ने इजराइली बमबारी से तबाह भूमध्यसागरीय इलाके को लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात कही थी। यह बमबारी 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुई थी। मिस्र के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प ट्रम्प को इस प्रस्ताव पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसमें मिस्र भी शामिल था, जो इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव की निंदा की। उनके लिए अपनी जमीन से जबरन हटाने की कोई भी कोशिश 1948 में इजराइल के बनने के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन की याद दिलाती है, जिसे “नकबा” यानी तबाही कहा जाता है। अक्टूबर में गाजा युद्धविराम का ऐलान करते समय ट्रम्प ने इस इलाके के लिए 20 बिंदुओं की योजना बताई थी। इसमें जबरन विस्थापन नहीं करने की बात शामिल थी। काट्ज बोले- योजना रद्द नहीं हुई अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले काट्ज ने कहा कि ट्रम्प ने इस विचार को सिर्फ “फ्रीज” किया है। वे फिलिस्तीनियों को रखने वाले देशों की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि मिस्र विकल्प नहीं है। काट्ज ने कहा, “योजना रद्द नहीं हुई है। इस पर हर समय चर्चा हो रही है, अभी भी हो रही है। मुझे लगता है कि सभी की भलाई के लिए कोई दूसरा समाधान नहीं है।” उन्होंने कहा, “लेकिन इसे लागू करने के लिए हमें अमेरिका की जरूरत है। हमें उसकी मंजूरी कब मिलेगी? जब यह साफ हो जाएगा कि युद्धविराम के तहत हमास अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर रहा है।” काट्ज का दावा- गाजा के 80% लोग जाना चाहते हैं काट्ज ने अपने दावे का कोई स्रोत बताए बिना कहा कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि हमास उन्हें रोक रहा है। कब्जे वाले इलाके में आम लोगों को जबरन हटाना जेनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और काट्ज के पूर्ववर्ती योआव गैलेंट के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इजराइल और अमेरिका दोनों इन आरोपों से इनकार करते हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के अभूतपूर्व हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय हमास के अधीन काम करता है और उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिस्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं है सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। सुपरसोनिक मिसाइल कम से कम करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज जा सकती हैं। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। 3 साल तक जारी रहा काम FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरानी सेना में तैनात हो चुकी है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन थाईलैंड पहुंचा:पटाया में छुट्टी मनाएंगे 5000 अमेरिकी सैनिक; पुलिस ने सेक्स ट्रेड के खिलाफ कार्रवाई शुरू की

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन थाईलैंड पहुंचा:पटाया में छुट्टी मनाएंगे 5000 अमेरिकी सैनिक; पुलिस ने सेक्स ट्रेड के खिलाफ कार्रवाई शुरू की

नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताने के बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन बुधवार को थाईलैंड के लैम चाबांग बंदरगाह पहुंचा। इसके साथ करीब 5 हजार अमेरिकी नौसैनिक और मरीन भी पहुंचे हैं। उनके आने से पहले पटाया में पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और सेक्स वर्कर्स के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया। समुद्र तट व नाइटलाइफ वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने मानव तस्करी, नाबालिगों के शोषण, ड्रग्स और दूसरी अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अभियान शुरू किया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया रिपोर्ट्स के अनुसार, सार्वजनिक जगहों पर ग्राहकों की तलाश करने के आरोप में कम से कम 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। इनमें थाईलैंड के अलावा लाओस और युगांडा की महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ रिपोर्टों में ऐसी कार्रवाई में कुल 40 से 50 लोगों को पकड़े जाने की बात कही गई है। पुलिस का कहना है कि बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों के आने से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से समुद्र तट, बार और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाई गई है। अमेरिकी नौसैनिकों को भी दी गई सलाह 31 अगस्त को पटाया सिटी हॉल में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अमेरिकी अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें अमेरिकी नौसैनिकों की सुरक्षा और शहर में उनके आने-जाने को लेकर चर्चा की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौसैनिकों को ड्रग्स और कैनबिस बेचने वाली दुकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। उन्हें नाइटलाइफ इलाकों में जाने से नहीं रोका गया है, लेकिन देर रात तक बार और मनोरंजन स्थलों में रुकने से बचने को कहा गया है। कारोबारियों को कमाई की उम्मीद अमेरिकी नौसैनिकों के आने से पटाया के कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। होटल, रेस्तरां, बार और दूसरे पर्यटन कारोबारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि एक अमेरिकी नौसैनिक रोज अच्छी-खासी रकम खर्च कर सकता है। ऐसे में हजारों नौसैनिकों के आने से शहर में करोड़ों बाहत का कारोबार होने की उम्मीद है। पटाया और अमेरिकी सेना का पुराना कनेक्शन पटाया शहर का अमेरिकी सेना से रिश्ता 1960 और 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के समय से है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक छुट्टियां मनाने और आराम करने के लिए यहां आते थे। इससे स्थानीय होटल, बार, रेस्तरां और दूसरे कारोबार तेजी से बढ़े। धीरे-धीरे यह छोटा मछुआरा गांव दुनिया भर के पर्यटकों के बीच मशहूर शहर बन गया। यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड क्यों आया? यूएसएस अब्राहम लिंकन हाल ही में वेस्ट एशिया में लंबी तैनाती पूरी करके लौटा है। यह अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जिसने नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताया। इस दौरान यह ईरान से जुड़े तनाव के बीच वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक सेहत और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं। अब थाईलैंड में पांच दिन के इस पड़ाव के दौरान जहाज को जरूरी सप्लाई दी जाएगी, रखरखाव का काम होगा और हजारों नौसैनिकों को लंबे समय बाद आराम का मौका मिलेगा।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के पहले सिख एंकर के दफ्तर पर रेड:बोले- पुलिस ने वर्करों को पीटा, सामान चुराया; इमरान खान की खबर चलाने पर लगा था बैन

पाकिस्तान के 79 साल के इतिहास में सिख समुदाय से पहले टेलीविजन एंकर और पत्रकार के तौर पर पहचान बनाने वाले हरमीत सिंह के डिजिटल स्टूडियो पर इस्लामाबाद पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमीत सिंह ने वीडियो जारी कर बताया, करीब दो दिन पहले पुलिस ने उनके स्टूडियो में रेड कर वहां काम कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। पुलिस वाले सामान चुराकर ले गए। हरमीत सिंह ने पाकिस्तान सरकार, पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर आरोप लगाते हुए कहा- टीवी से बैन और नौकरी जाने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से डिजिटल स्टूडियो खड़ा किया था, लेकिन अब पत्रकारिता जारी रखने के लिए उनके पास न नौकरी बची है और न जरूरी संसाधन। हालांकि हरमीत सिंह के आरोपों के बाद पुलिस का कोई बयान सामने नहीं आया। हरमीत सिंह सिख परिवार से हैं और 1947 को बंटवारे के समय हरमीत सिंह का परिवार पाकिस्तान में रह गया। इनके कई रिश्तेदार भारतीय पंजाब में रहते हैं। मौजूदा समय में वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चाकेसर (शांगला) शहर के रहने वाले हैं। पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस की ओर से की गई बर्बरता को बताते हुए हरमीत सिंह ने क्या कहा, जानिए… टीवी से बैन के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया…6 बड़ी बातें… 1. टीवी स्क्रीन से बैन और नौकरी गई 31 अगस्त को वीडियो जारी कर हरमीत सिंह ने बताया कि वह सिख समुदाय के पहले पत्रकार हैं, जिन्होंने मुख्यधारा के पाकिस्तानी मीडिया में जगह बनाई। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। लेकिन संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, कानून के शासन और पीड़ित लोगों की आवाज उठाने के कारण सत्ताधारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें टीवी स्क्रीन पर आने से रोक दिया गया और नौकरी भी चली गई। 2. जमा-पूंजी से बनाया डिजिटल स्टूडियो टीवी में काम के रास्ते बंद होने के बाद हरमीत सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और कुछ फिल्मों से मिले पैसों से दो-तीन दोस्तों के साथ मिलकर छोटा दफ्तर और डिजिटल स्टूडियो शुरू किया। इसका मकसद व्लॉग और पॉडकास्ट के जरिए अपना काम जारी रखना और आजीविका कमाना था। 3. स्टूडियो पर रेड कर सामान जब्त किया हरमीत सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके दफ्तर पर 30 अगस्त को रेड की और वहां रखा सामान अपने साथ चुराकर ले गई। इसमें 5 कंप्यूटर सिस्टम, कैमरे, पॉडकास्ट माइक, स्टैंड, प्रॉम्प्टर और बैटरियां शामिल थीं। उनका आरोप है कि स्टूडियो में काम करने वाले मुल्तान निवासी सैफ और सहयोगी रजी ताहिर को हिरासत में लिया गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व प्रताड़ना की गई। 4. हरमीत ने कार्रवाई पर उठाए सवाल हरमीत सिंह ने सवाल उठाया कि अगर उनके सहयोगी रजी ताहिर ने पत्रकार के तौर पर कश्मीर (पीओके) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, तो इसके लिए पूरे स्टूडियो का सामान और अन्य कर्मियों के कंप्यूटर जब्त करने का क्या औचित्य था। 5. परिवार ने देश छोड़ने की सलाह दी हरमीत ने बताया कि उनकी सिख बिरादरी और परिवार के लोग उन्हें कोई दूसरा कारोबार करने या देश छोड़ने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता के कारण उनकी जान को खतरा है और परिवार की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा पाकिस्तान में रहकर काम करना पसंद किया। 6. मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील हरमीत सिंह ने कहा कि अब उनके पास न नौकरी है और न ही काम जारी रखने के लिए जरूरी सामान। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उनके कैमरों और कंप्यूटर सिस्टम का क्या करेगी। उनका आरोप है कि पत्रकारों को आर्थिक रूप से खत्म किया जा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों से पत्रकारों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और जब्त सामान वापस दिलाने की अपील की। हरमीत की प्रशासन से तनातनी…2 केस केस-1 केस-2

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।