Monday, 05 Oct 2026 | 12:48 AM

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HCL प्रदूषण पर ग्रामीणों ने सांसद से लगाई गुहार:बोले-धूल और जहरीली हवा से बढ़ रही बीमारियां; मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन

HCL प्रदूषण पर ग्रामीणों ने सांसद से लगाई गुहार:बोले-धूल और जहरीली हवा से बढ़ रही बीमारियां; मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन

बालाघाट में सांसद भारती पारधी ने रविवार को मलाजखंड में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने एचसीएल के संचालन से उत्पन्न गंभीर प्रदूषण और उसके जनजीवन व पर्यावरण पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि एचसीएल की खनन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और जहरीले तत्वों के कारण मलाजखंड में सांस लेना दूर्लभ हो गया है। वायु प्रदूषण के चलते हर घर में लोग श्वसन और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। एचसीएल प्रदूषण से पानी संकट, सड़कें जर्जर हुई उन्होंने आरोप लगाया कि एचसीएल के कारण उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव, खराब सड़कें और दूषित वातावरण मिल रहा है। कंपनी से निकलने वाले प्रदूषित तत्वों ने जलस्रोतों को दूषित कर दिया है, जिससे पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि एचसीएल के प्रदूषित तत्वों और दूषित हवा के कारण बुजुर्गों और बच्चों में गंभीर बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। सांसद बोलीं-जनस्वास्थ्य-पर्यावरण से समझौता नहीं सांसद भारती पारधी ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी प्रबंधन जनमानस के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पर्यावरण सुरक्षा और जनता का स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदूषण पर केंद्र तक मुद्दा उठाने की चेतावनी सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एचसीएल के उच्च प्रबंधन के समक्ष भी मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर केंद्र स्तर पर भी इस समस्या के ठोस समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की बात कही। सांसद पारधी ने इस मामले को अब केवल एक क्षेत्रीय शिकायत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की लड़ाई बताया। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो मलाजखंड एक बड़े मानवीय और पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ सकता है।

बागेश्वर बाबा के बयान पर भड़के रितेश देशमुख:कहा था- जिम्मेदारी छोड़ना चाहते थे शिवाजी महाराज, एक्टर बोले- अपमान बर्दाश्त नहीं; बाबा ने माफी मांगी

बागेश्वर बाबा के बयान पर भड़के रितेश देशमुख:कहा था- जिम्मेदारी छोड़ना चाहते थे शिवाजी महाराज, एक्टर बोले- अपमान बर्दाश्त नहीं; बाबा ने माफी मांगी

बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख, बागेश्वर बाबा के उस बयान पर भड़क गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज युद्ध से थककर जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे। अब एक्टर ने इस पर रिएक्ट करते हुए कहा है कि ये अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि विवाद बढ़ने पर बागेश्वर बाबा ने माफी मांग ली है। क्या था बागेश्वर बाबा का बयान नागपुर में आयोजित एक इवेंट में बागेश्वर बाबा ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान देते हुए कहा, शिवाजी महाराज युद्ध से थककर अपनी जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे। वो अपने गुरू समर्थ रामदास के पास मुकुट लेकर पहुंचे थे। बयान सामने आने के बाद से बागेश्वार बाबा की जमकर आलोचना की जाने लगी। इस पर रितेश देशमुख भी भड़क गए, जो जल्द ही छत्रपति शिवाजी महाराज पर बनी फिल्म राजा शिवाजी में नजर आने वाले हैं। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से मराठी में लिखा है, जब कोई आकर हमारे पूज्य देवता के बारे में गलत और उल्टा-सीधा बोलता है, तो एक शिव-प्रेमी और शिव-भक्त के लिए यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है और गुस्सा आना स्वाभाविक है। आगे उन्होंने लिखा, ‘ऐसी बेकार कोशिशें, जो उन्हें किसी दायरे में बांधने की कोशिश करती हैं, समय के साथ खत्म हो जाएंगी। लेकिन जैसे सह्याद्रि की पर्वत श्रृंखलाएं लाखों सालों से कायम हैं, वैसे ही वह एक नाम आने वाले करोड़ों सालों तक बना रहेगा। और वह नाम है, प्रताप पुरंदर, क्षत्रिय कुल के, सिंहासन के स्वामी, सम्राटों के सम्राट, धन्य राजाशिव छत्रपति शिवाजी महाराज।’ बागेश्वार बाबा ने मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद अब बागेश्वर बाबा ने भी माफी मांग ली है। नागपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। वो किसी भी तरह से छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान नहीं करना चाहते थे। उन्होंने कहा, हमने कुछ अनुचित नहीं कहा। हमने संतों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से ये बात कही। इसके बावजूद हमने खेद व्यक्त किया और माफी मांगी है। कुछ लोगों ने मेरी बात गलत तरह पेश की। मेरी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुईं तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं। मैं शिवाजी महाराज के लिए जीता और मरता हूं। शिवाजी महाराज पर बनी फिल्म में नजर आएंगे रितेश रितेश देशमुख, जेनेलिया डिसूजा, संजय दत्त स्टारर फिल्म राजा शिवाजी 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज पर बनी है। फिल्म को रितेश देशमुख ने ही डायरेक्ट किया है।

वॉशिंगटन हिल्टन होटल में 45 साल बाद हिस्ट्री रिपीट:हीरोइन को इम्प्रेस करने के लिए शख्स ने राष्ट्रपति रीगन पर चलाई थी गोली

वॉशिंगटन हिल्टन होटल में 45 साल बाद हिस्ट्री रिपीट:हीरोइन को इम्प्रेस करने के लिए शख्स ने राष्ट्रपति रीगन पर चलाई थी गोली

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में शनिवार रात सालाना व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान फायरिंग हो गई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी मौजूद थे। यह घटना वॉशिंगटन हिल्टन होटल में हुई। करीब 60 साल पुराना यह होटल अपने एम (M) आकार के डिजाइन के लिए जाना जाता है। यहां लंबे समय से व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर होता आ रहा है। इसके अलावा फर्स्ट लेडी लंच और नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट जैसे बड़े कार्यक्रम भी यहीं आयोजित होते हैं। इस होटल का इतिहास भी काफी चर्चित रहा है। करीब 45 साल पहले यहीं तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हमला जॉन डब्ल्यू हिंकली जूनियर ने किया था। उसने एक फिल्म अभिनेत्री को प्रभावित करने के लिए राष्ट्रपति पर छह गोलियां चला दी थीं। रीगन पांच बार बचे, छठी गोली का निशाना बने घटना 30 मार्च 1981 की है। रीगन वाशिंगटन डीसी में एक मीटिंग में शामिल होने के बाद अपनी कार की तरफ जा रहे थे। उनके चारों तरफ मीडिया और लोगों की भीड़ थी। अचानक उसी भीड़ से निकलकर एक शख्स ने रीगन पर फायरिंग शुरू कर दी। रीगन पर पांच गोलियां दागी गईं, लेकिन वे हर गोली से बच गए। छठी गोली से भी वे बच ही गए थे, लेकिन वह बुलेटप्रूफ कार के शीशे से टकराकर फिर से रीगन के पास लौटी और उनके सीने में जा धंसी। रीगन जमीन पर गिर गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनके सीने से गोली समय पर निकाल ली जिससे उनकी जान बच गई। इस घटना में रीगन के 3 सहयोगियों को भी गोली लगी, लेकिन वे भी रीगन की तरह बच गए। गोली चलाने वाले जॉन हिंक्ली को मौके पर ही पकड़ लिया गया। हिंक्ली ने 18 बार टैक्सी ड्राइवर फिल्म देखी थी गोली चलाने वाला हिंकली लंबे समय से मानसिक समस्याओं से जूझ रहा था। उसे पहचान बनाने और मशहूर होने की बहुत इच्छा थी। वह 1976 में आई फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ ने उस पर खूब असर डाला था। इस फिल्म का एक किरदार प्रेसिडेंशियल कैंडिटेट को मारने की कोशिश करता है। चूंकि उसने एक भ्रष्ट नेता को मारने की कोशिश की थी, लोगों की नजर में एक हीरो बन जाता है। उसने यह फिल्म 18 बार देखी थी। वह फिल्म की अभिनेत्री जोड़ी फोस्टर का दीवाना हो गया। वह उसे प्रभावित करना चाहता था। उसने उसे कई चिट्ठियां लिखीं, फोन किए, यहां तक कि उसका पीछा भी किया, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला। धीरे-धीरे उसने यह सोच बना ली कि अगर वह किसी बड़े नेता पर हमला करेगा, तो वह दुनियाभर में चर्चित हो जाएगा और जोड़ी फोस्टर को इम्प्रेस कर पाएगा। पहले राष्ट्रपति कार्टर को मारने की कोशिश की हिंकली ने 1980 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रेसिडेंट जिमी कार्टर का पीछा किया। इस दौरान वह अलग-अलग रैलियों में उन्हें मारने के मकसद से जाता रहा। टेनेसी के एक कार्यक्रम में वह कार्टर के बिल्कुल करीब पहुंच गया था। लेकिन उसके हाथ में एक बैग देख पुलिस को शक हुआ। पुलिस ने तलाशी ली तो उसमें 3 हैंडगन रखी हुई थीं। इसके बाद उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। उस पर गैरकानूनी हथियार रखने का मामला बना, लेकिन यह सीधे ‘राष्ट्रपति पर हमला’ करने का केस नहीं बन पाया, क्योंकि उसने गोली चलाने की कोशिश नहीं की थी। उसे कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया, लेकिन बाद में जमानत मिल गई। जेल से निकलने के बाद रीगन पर हमला किया जेल से निकलने के बाद अमेरिका में सत्ता बदल चुकी थी। रोनाल्ड रीगन राष्ट्रपति बन चुके थे। उसने रीगन पर ही हमला करने का फैसला किया। हालांकि उसके पकड़े जाने के बाद वकील ने कोर्ट में अपनी दलीलों से यह साबित कर दिया कि हिंक्ली मानसिक रूप से ठीक नहीं है और राष्ट्रपति पर हमला करने का दोषी सिर्फ हिंकली नही, वह फिल्म भी है। कोर्ट ने मानसिक रूप से अस्थिर मानते हुए जेल भेजने के बजाय मानसिक अस्पताल में रखा। वहां वह करीब 30-35 साल तक इलाज और निगरानी में रहा। उसे 2016 में सख्त शर्तों के साथ अस्पताल से बाहर रहने की इजाजत दी गई।

नगर पालिका अध्यक्ष भारती पाटील ने PIC भंग की:कहा- नगर विकास की गति को बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के लिए नई पीआईसी का गठन

नगर पालिका अध्यक्ष भारती पाटील ने PIC भंग की:कहा- नगर विकास की गति को बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के लिए नई पीआईसी का गठन

बुरहानपुर नगर पालिका अध्यक्ष भारती विनोद पाटील ने साढ़े तीन साल पहले गठित प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल (पीआईसी) को भंग कर दिया है। उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ मोहन सिंह अलावा को एक पत्र सौंपा है। पत्र में अध्यक्ष ने कहा है कि नगर विकास की गति को बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई पीआईसी का गठन करने का निर्णय लिया गया है। अध्यक्ष पाटील ने 26 अप्रैल की शाम को दिए गए पत्र में सीएमओ को सूचित किया कि उनके द्वारा गठित पीआईसी को तत्काल प्रभाव से भंग किया जा रहा है। यह पीआईसी नगर पालिका प्रशासन के राज्य शासन के नियमों के तहत गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य परिषद में विकास कार्यों से संबंधित निर्णय लेना था। इस फैसले के पीछे अध्यक्ष भारती विनोद पाटील और उनकी ही पार्टी कांग्रेस के पार्षदों के बीच चल रहा विरोध भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पिछले काफी समय से कांग्रेस के पार्षद अपनी ही अध्यक्ष का विरोध कर रहे थे। कुछ समय पहले नगर के चार वार्डों की महिला पार्षदों ने नगर पालिका कार्यालय के सामने 10 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि उनके वार्डों में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। बाद में नगर पालिका इंजीनियर ने लिखित में आश्वासन दिया था कि विकास कार्य कराए जाएंगे, जिसके बाद हाल ही में उन वार्डों में काम शुरू हुए हैं। हाल ही में हुई पीआईसी बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष ने बजट और 20 अन्य प्रस्तावों पर सभी सदस्यों की सहमति की बात कही थी। हालांकि, बाद में चार पार्षदों ने इस बात से पलटते हुए कहा था कि उन्होंने केवल बजट पर सहमति दी थी, अन्य प्रस्तावों पर नहीं। माना जा रहा है कि पार्षदों के इस पलटवार के कारण ही अध्यक्ष ने पीआईसी भंग करने का निर्णय लिया है। हालांकि, अध्यक्ष ने आधिकारिक तौर पर ‘शहर विकास की गति को बढ़ाने के लिए बदलाव’ को ही इसका कारण बताया है।

2022 में राघव चड्ढा ने दल-बदल के दरवाजे बंद करने की कोशिश की. 4 साल बाद, वह इसके माध्यम से बाहर चला गया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 08:22 IST वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत, किसी पार्टी में दो-तिहाई बहुमत वाले विधायक अयोग्यता का सामना किए बिना अलग हो सकते हैं और किसी अन्य पार्टी में विलय कर सकते हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (तस्वीर में) बीजेपी में शामिल हो गए हैं. राघव चड्ढा और छह अन्य आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसदों के नाटकीय निकास ने न केवल दलबदल के बारे में, बल्कि चड्ढा द्वारा प्रस्तावित सुधार के बारे में भी राजनीतिक और कानूनी बहस शुरू कर दी है। विवाद के मूल में एक विरोधाभास है: यदि दल-बदल विरोधी नियमों को कड़ा करने के लिए चड्ढा का अपना विधेयक पारित हो गया होता, तो उनके द्वारा उठाया गया कदम संभव नहीं होता। प्रस्ताव द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राघव चड्ढा ने 2022 में एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था, जिसमें पार्टी के विधायकों के “कानूनी विभाजन” की सीमा को दो-तिहाई से बढ़ाकर तीन-चौथाई करने की मांग की गई थी। यह भी पढ़ें | AAP का नुकसान, बीजेपी का फायदा: पंजाब में राघव चड्ढा फैक्टर को समझना वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत, किसी पार्टी में दो-तिहाई बहुमत वाले विधायक अयोग्यता का सामना किए बिना अलग हो सकते हैं और किसी अन्य पार्टी में विलय कर सकते हैं। समय के साथ, यह अपवाद, जो मूल रूप से वास्तविक राजनीतिक पुनर्गठन की अनुमति देने के लिए था, अक्सर तकनीकी रूप से कानून के भीतर रहते हुए बड़े पैमाने पर दलबदल करने के लिए उपयोग किया जाता है। व्यावहारिक रूप से, जिस सदन में AAP के 10 सांसद थे, चड्ढा को सुरक्षित रूप से पार्टी छोड़ने के लिए सात सांसदों (दो-तिहाई) की आवश्यकता थी, जो उन्होंने हासिल कर लिया। लेकिन उनके अपने प्रस्ताव के तहत, उन्हें कम से कम आठ सांसदों की आवश्यकता होगी, जिससे संभवतः यह कदम और अधिक कठिन हो जाएगा। बाहर जाएं पिछले हफ्ते, चड्ढा ने आप के छह अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ घोषणा की थी कि वे पार्टी छोड़ रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय कर रहे हैं। इसे व्यक्तिगत दलबदल के रूप में नहीं बल्कि समूह विलय के रूप में तैयार किया गया था, जो कानून के तहत महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में AAP के 10 सांसद थे. जैसे ही सात लोग एक साथ चले, दो-तिहाई का आंकड़ा पार करते हुए, इसने उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा का दावा करने की अनुमति दी। यह भी पढ़ें | क्यों संदीप पाठक का जाना AAP के लिए राघव चड्ढा से भी बड़ा झटका है? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सोचा-समझा कदम था, जिसे संवैधानिक ढांचे के भीतर पूरी तरह से फिट करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, यह देखते हुए कि अगर चड्ढा अकेले चले जाते, तो उन्हें अपनी सीट गंवानी पड़ती। लेकिन अब, एक समूह में छोड़ने से उसे इसे बनाए रखने में मदद मिलती है। कानून क्या कहता है दसवीं अनुसूची में भारत का दल-बदल विरोधी कानून राजनीतिक खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए था। हालाँकि, इसका एक प्रमुख अपवाद है: यदि कोई विधायक दल बदल लेता है तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है, लेकिन यदि विधायक दल के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं तो उसे अयोग्य नहीं ठहराया जाता है। यह कानून के पैराग्राफ 4 में संहिताबद्ध है। कानून में इससे भी अधिक महत्वपूर्ण “माननीय प्रावधान” है, जिसका अर्थ है कि यदि दो-तिहाई सहमत होते हैं, तो इसे कानूनी रूप से पार्टी विलय के रूप में माना जाता है, भले ही मूल पार्टी का विलय न हुआ हो। आउटलुक के अनुसार, कानून (1985 के संशोधन के माध्यम से) सत्ता या कार्यालय द्वारा प्रेरित दलबदल को रोकने के लिए बनाया गया था। लेकिन व्यवहार में, यह एक विरोधाभास पैदा करता है जहां व्यक्तिगत दलबदल को दंडित किया जाता है लेकिन सामूहिक दलबदल को संरक्षित किया जाता है। जैसा कि एक विश्लेषण में कहा गया है, कानून व्यक्तिगत असहमति पर समन्वित निकास को पुरस्कृत करता है। चड्ढा क्यों हुए शिफ्ट? जबकि कानूनी मार्ग ने इस कदम को संभव बनाया, राजनीतिक ट्रिगर भीतर से आए। News18 ने AAP नेतृत्व के भीतर बढ़ती दरार के बारे में रिपोर्ट की थी, जिसके कारण अंततः चड्ढा को इस महीने की शुरुआत में राज्यसभा के उपनेता के पद से हटा दिया गया और उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया। विडंबना यह है कि मित्तल उस गुट का हिस्सा थे जिसने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ दी और भाजपा से हाथ मिला लिया। यह भी पढ़ें | कांग्रेस की पंजाब पहेली: राघव चड्ढा का जाना, AAP की मुश्किलें जश्न का कारण क्यों नहीं जैसा कि चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी “गलत रास्ते पर आगे बढ़ रही है” और दिल्ली से बाहर निकलने के कारणों में से एक के रूप में भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया, AAP ने दबाव की रणनीति और प्रलोभन का आरोप लगाया, और नेताओं को लुभाने के लिए भाजपा द्वारा ‘ऑपरेशन लोटस’ का उपयोग करने के अपने दावों को दोहराया। हालाँकि, भाजपा ने किसी भी गलत काम से इनकार किया और बाहर निकलने को स्वैच्छिक राजनीतिक पुनर्गठन बताया। AAP की चुनौती काम क्यों नहीं कर सकती? आप ने सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है, लेकिन उसे कानूनी बाधा का सामना करना पड़ रहा है: दो-तिहाई नियम पहले ही पूरा हो चुका है और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अयोग्यता की संभावना नहीं है। हालाँकि, टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अभी भी कुछ संदेहास्पद मुद्दे बहस के अधीन हैं: क्या विलय के लिए मूल पार्टी की मंजूरी की आवश्यकता है? क्या सिर्फ एक सदन के सांसद विलय का दावा कर सकते हैं? ये प्रश्न अभी भी कानूनी रूप से अनसुलझे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2026, 08:20 IST न्यूज़ इंडिया 2022 में राघव चड्ढा ने दल-बदल के दरवाजे बंद करने की कोशिश की. 4 साल बाद, वह इससे बाहर चला गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को

राइटर मधु किश्वर दो नोटिस के बाद नहीं हुई पेश:हैदराबाद से एक गिरफ्तार, फर्जी वीडियो किया वायरल, चंडीगढ़ पुलिस-साइबर सेल ने झाड़ा पल्ला

राइटर मधु किश्वर दो नोटिस के बाद नहीं हुई पेश:हैदराबाद से एक गिरफ्तार, फर्जी वीडियो किया वायरल, चंडीगढ़ पुलिस-साइबर सेल ने झाड़ा पल्ला

फेमस राइटर मधु किश्वर को चंडीगढ़ पुलिस द्वारा इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन करने के लिए दूसरा नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुईं। वहीं इस मामले में कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए फर्जी वीडियो प्रसारित करने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के रूप में हुई है, जो हैदराबाद (तेलंगाना) का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी वीडियो प्रसारित कर लोगों को गुमराह कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर उसे ट्रेस कर गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी को आज अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने एक दिन का रिमांड हासिल किया है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर इस पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराएं 66(C), 66(D), 67 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 196, 318, 336(1), 336(3), 336(4), 340, 353 और 356 के तहत मामला दर्ज है। समाज में भ्रम फैलाया गया दरअसल, मधु किश्वर समेत अन्य लोगों पर चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाने में 20 अप्रैल को ही एक शिकायत पर FIR दर्ज की गई। शिकायत में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने एक वीडियो को गलत पहचान के साथ वायरल किया और उसमें अश्लील व भ्रामक शब्द जोड़कर पेश किया। इससे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश की गई और समाज में भ्रम फैलाया गया। एक-दूसरे पर झाड़ रही पुलिस पल्ला राइटर मधु किश्वर व अन्य के खिलाफ पुलिस स्टेशन-26 में 19 अप्रैल 2026 को आईटी एक्ट की धाराएं 66(C), 66(D), 67 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 196, 318, 336(1), 336(3), 336(4), 340, 353 और 356 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसकी जानकारी चंडीगढ़ पुलिस ने खुद मीडिया को प्रेस रिलीज भेजकर दी थी। उसके बाद जब मीडिया द्वारा थाना-26 पुलिस से मामले संबंधी पूछा गया तो उनका जवाब था कि इस मामले में उनके पुलिस स्टेशन में सिर्फ DDR दर्ज हुई है और जांच साइबर सेल कर रहा है। जब साइबर सेल इंचार्ज से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि उनके पास तो केस ही दर्ज नहीं हुआ, तो जांच कैसे कर सकते हैं। उनके पास इस केस की जांच नहीं है। चंडीगढ़ पुलिस रात में दिल्ली पहुंची दिल्ली में मधु किश्वर के दफ्तर में उनके और पुलिस अधिकारियों के बीच बात हुई। इस दौरान मधु किश्वर ने कहा कि न उनकी तरफ से कोई दुर्भावना थी और न दूसरी तरफ से। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस से पूछा कि क्या वह स्थानीय पुलिस के साथ नहीं आए हैं? इस पर चंडीगढ़ से आई महिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि उनकी टीम साथ आई है। मधु किश्वर ने इस टीम को कानून का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं के घर पर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस न तो आ सकती है और न ही उन्हें अरेस्ट कर सकती है। उन्होंने इस मुद्दे पर पुलिस टीम के सीनियर अधिकारी से भी बात की तो उसने बताया कि ये टीम चंडीगढ़ में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में सिर्फ नोटिस देने आई है। इस पर उन्होंने कहा कि कानून का पालन करते हुए दिन में आना चाहिए। मधु किश्वर के मुताबिक, दोनों पक्षों ने शालीनता और शिष्टाचार बनाए रखा। जैसे ही उन्हें एफआईआर की कॉपी मिलेगी, वह चंडीगढ़ में दर्ज इस केस में शामिल होंगी। 3 पॉइंट में जानिए पूरा मामला भ्रामक पोस्ट-क्लिप शेयर की जा रही: दरअसल, 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी का एक फर्जी और भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसे लेकर चंडीगढ़ पुलिस ने लेखिका मधु किश्वर के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस की एक टीम देर रात उनको नोटिस देने पहुंची थी। यह मामला सेक्टर-26 पुलिस स्टेशन चंडीगढ़ में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। SHO बोले- राइटर पर शेयर करने का आरोपः सेक्टर 19 चंडीगढ़ की SHO सरिता रॉय ने कहा कि 19 अप्रैल को सेक्टर 26 पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई है। यह एक वीडियो से जुड़ी है, जिसे एक्स पर पोस्ट किया गया था। मधु किश्वर पर इसे रीपोस्ट करने का आरोप है। हम उन्हें 35.3 BNSS का नोटिस देने आए थे। उन्हें पुलिस स्टेशन में पेश होने का नोटिस दिया गया है। अश्लील शब्द यूज किए, नुकसान पहुंचाने का मकसद: शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सब जानबूझकर किया गया, जिसमें अश्लील शब्दों का उपयोग करते हुए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं। आरोप है कि संबंधित लोगों को यह जानकारी थी या उन्हें विश्वास करने का पर्याप्त कारण था। उनका उद्देश्य किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। हर बार की तरह उस पार्टी में भी विनोद ने सबका ध्यान खींच लिया। सुनील दत्त की नजरें भी बार-बार विनोद पर पड़ीं। उस समय सुनील अपने भाई सोम दत्त को लॉन्च करने वाले थे। अगले दिन सुनील दत्त ने विनोद को दफ्तर में बुलाया और फिल्म ऑफर कर दी। कोई भी ये सुनकर बेहद खुश होता, लेकिन विनोद घबराए हुए थे। वो जानते थे पिता कभी राजी नहीं होंगे। उस शाम वो घर पहुंचे और हिम्मत जुटाकर पिता से कहा, ‘मुझे फिल्म में काम मिला है।’ पिता ने आव देखा न ताव सीधे बंदूक तान दी और कहा- ‘अगर फिल्मों में गए तो गोली मार दूंगा।’ मां ने किसी तरह पिता को खूब समझाया। आखिरकार पिता का दिल पिघला और उन्होंने शर्त रखी, ‘2 साल का वक्त दे रहा हूं, फिल्मों में कुछ हुआ तो ठीक वर्ना बिजनेस संभालना।’ इस तरह 1968 में विनोद खन्ना का फिल्मों से रिश्ता जुड़ा, जो उनके निधन तक कायम रहा। 27 अप्रैल 2017 में विनोद खन्ना का 70 साल की उम्र में निधन हुआ था। आज उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके करियर, अमिताभ बच्चन से राइवलरी और स्टारडम छोड़ संन्यासी बनने से जुड़े चुनिंदा किस्से- किस्सा-1 जब अमिताभ ने फेंककर मारा ग्लास, लगाने पड़े टांके विनोद खन्ना की पहली फिल्म मन का मीत (1968) फ्लॉप रही, लेकिन विनोद खन्ना को इसकी बदौलत कई बड़ी फिल्मों में काम मिलने लगे। 1970 में विनोद राजेश खन्ना के साथ सच्चा झूठा, आन मिलो सजना में और मनोज कुमार के साथ पूरब पश्चिम में नजर आए। तीनों फिल्में सुपरहिट रहीं और विनोद खन्ना को स्टारडम हासिल हो गया। आगे बतौर लीड हीरो मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, दो यार, हाथ की सफाई, इम्तिहान जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में शुमार किया। 1977 में विनोद खन्ना को मल्टीस्टारर फिल्म अमर अकबर एंथोनी में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के साथ कास्ट किया गया। ये उस दौर की अपनी तरह की इकलौती फिल्म थी, जिसमें अमिताभ-विनोद जैसे फिल्म इंडस्ट्री के दो ऐसे स्टार्स थे, जिनके बीच टॉप एक्टर की होड़ मची थी। दोनों में राइवलरी थी। ये फिल्म हिट रही, तो दोनों को फिर मुकद्दर का सिकंदर में साथ कास्ट किया गया। फिल्म के एक सीन के लिए अमिताभ बच्चन को बार में खड़े होकर विनोद पर कांच का ग्लास फेंकना था और विनोद को बचना था। जैसे ही एक्शन बोला गया, अमिताभ ने ग्लास फेंक दिया, लेकिन वो विनोद खन्ना के चेहरे पर लगा। खूब खून बहा और एक्टर का टांके लगवाने पड़े। अमिताभ बच्चन ही उन्हें अस्पताल लेकर गए और बाद में घर छोड़ा। घर छोड़ते हुए भी उन्होंने विनोद और पत्नी से माफी मांगी। लेकिन लोगों का मानना था कि इस हादसे से उनकी गहरी दोस्ती टूट गई और दोनों में कुछ समय के लिए बातचीत बंद हो गई। ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने गलाटा इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि ओशो को लगता था कि विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन से चिढ़ते हैं। उन्होंने विनोद को अमिताभ के खिलाफ चुनाव में खड़े होने का भी सुझाव दिया था। किस्सा-2 परिवार में हो रहीं मौतों से डरे, दोस्त महेश भट्ट के कहने पर ओशो के आश्रम गए एक दौर में महेश भट्ट और विनोद खन्ना की दोस्ती चर्चा में थी। महेश भट्ट के स्ट्रगल के दिनों में विनोद खन्ना कई बार उनका खर्चा भी उठाते थे। 1971 में विनोद ने गीतांजलि से शादी की थी। 1975 में पत्नी ने बेटे अक्षय खन्ना को जन्म दिया। उसी समय 6 महीनों के अंतराल में ही एक-एक कर परिवार में 4 मौतें हो गईं। जिसमें उनकी मां कमला खन्ना और एक बहन भी शामिल थीं। ये देखउन्हें मौत का आभास होने लगा। वो डरने लगे कि कहीं उनकी भी मौत न हो जाए। इस समय उन्हें दोस्त महेश भट्ट ने ओशो के आश्रम जाने का सुझाव दिया। कुछ समय के लिए वो पुणे स्थित आश्रम जाकर रहे। 1977 में एक दिन विनोद खन्ना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंडस्ट्री छोड़ संन्यासी बनने की घोषणा की। इससे उन्हें फिल्ममेकर्स की आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके पास कई फिल्में थीं। विनोद ने वादा किया कि वो सभी फिल्में पूरी करेंगे। फिल्में पूरी होते ही वो 1981 में यूएसए के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाकर रहने लगे। किस्सा-3 महेश भट्ट ने माला कमोड में फेंकी, तो दी धमकी विनोद खन्ना के साथ महेश भट्ट भी ओशो के आश्रम गए थे। वहां उन्हें माला पहनाई गई थी, जिसमें ओशो की तस्वीर थी। कुछ दिनों बाद जब महेश भट्ट लौटे, तो उन्होंने वो माला तोड़कर टॉयलेट में फेंक दी। जैसे ही ये बात विनोद को पता चली, वो बहुत गुस्सा हुए। उन्हें एक दिन महेश भट्ट को फिल्मिस्तान स्टूडियो बुलाया और कहा- भगवान तुमसे बहुत नाराज हैं। महेश ने पूछा क्यों?, तो जवाब मिला- क्योंकि तुमने माला तोड़ दी और कमोड में फेंक दी। महेश ने फिर कहा- मुझे वो कुत्ते के पट्टे की तरह लगती थी। विनोद ने ये सुनकर कहा- उन्होंने (कथित तौर पर ओशो ने) कहा है कि महेश से कहो कि वो खुद मुझे वो माला लाकर दे। आगे विनोद ने खुसफुसाते हुए कहा- उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया, तो वो तुम्हें बर्बाद कर देंगे। ये किस्सा खुद महेश भट्ट ने अरबाज खान के चैट शो द इन्विन्सिबल विद अरबाज खान में सुनाया था। किस्सा- 4 ओशो के आश्रम में टॉयलेट साफ किए, तंग कमरे में गुजारे कई दिन विनोद खन्ना आश्रम में

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। हर बार की तरह उस पार्टी में भी विनोद ने सबका ध्यान खींच लिया। सुनील दत्त की नजरें भी बार-बार विनोद पर पड़ीं। उस समय सुनील अपने भाई सोम दत्त को लॉन्च करने वाले थे। अगले दिन सुनील दत्त ने विनोद को दफ्तर में बुलाया और फिल्म ऑफर कर दी। कोई भी ये सुनकर बेहद खुश होता, लेकिन विनोद घबराए हुए थे। वो जानते थे पिता कभी राजी नहीं होंगे। उस शाम वो घर पहुंचे और हिम्मत जुटाकर पिता से कहा, ‘मुझे फिल्म में काम मिला है।’ पिता ने आव देखा न ताव सीधे बंदूक तान दी और कहा- ‘अगर फिल्मों में गए तो गोली मार दूंगा।’ मां ने किसी तरह पिता को खूब समझाया। आखिरकार पिता का दिल पिघला और उन्होंने शर्त रखी, ‘2 साल का वक्त दे रहा हूं, फिल्मों में कुछ हुआ तो ठीक वर्ना बिजनेस संभालना।’ इस तरह 1968 में विनोद खन्ना का फिल्मों से रिश्ता जुड़ा, जो उनके निधन तक कायम रहा। 27 अप्रैल 2017 में विनोद खन्ना का 70 साल की उम्र में निधन हुआ था। आज उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके करियर, अमिताभ बच्चन से राइवलरी और स्टारडम छोड़ संन्यासी बनने से जुड़े चुनिंदा किस्से- किस्सा-1 जब अमिताभ ने फेंककर मारा ग्लास, लगाने पड़े टांके विनोद खन्ना की पहली फिल्म मन का मीत (1968) फ्लॉप रही, लेकिन विनोद खन्ना को इसकी बदौलत कई बड़ी फिल्मों में काम मिलने लगे। 1970 में विनोद राजेश खन्ना के साथ सच्चा झूठा, आन मिलो सजना में और मनोज कुमार के साथ पूरब पश्चिम में नजर आए। तीनों फिल्में सुपरहिट रहीं और विनोद खन्ना को स्टारडम हासिल हो गया। आगे बतौर लीड हीरो मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, दो यार, हाथ की सफाई, इम्तिहान जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में शुमार किया। 1977 में विनोद खन्ना को मल्टीस्टारर फिल्म अमर अकबर एंथोनी में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के साथ कास्ट किया गया। ये उस दौर की अपनी तरह की इकलौती फिल्म थी, जिसमें अमिताभ-विनोद जैसे फिल्म इंडस्ट्री के दो ऐसे स्टार्स थे, जिनके बीच टॉप एक्टर की होड़ मची थी। दोनों में राइवलरी थी। ये फिल्म हिट रही, तो दोनों को फिर मुकद्दर का सिकंदर में साथ कास्ट किया गया। फिल्म के एक सीन के लिए अमिताभ बच्चन को बार में खड़े होकर विनोद पर कांच का ग्लास फेंकना था और विनोद को बचना था। जैसे ही एक्शन बोला गया, अमिताभ ने ग्लास फेंक दिया, लेकिन वो विनोद खन्ना के चेहरे पर लगा। खूब खून बहा और एक्टर का टांके लगवाने पड़े। अमिताभ बच्चन ही उन्हें अस्पताल लेकर गए और बाद में घर छोड़ा। घर छोड़ते हुए भी उन्होंने विनोद और पत्नी से माफी मांगी। लेकिन लोगों का मानना था कि इस हादसे से उनकी गहरी दोस्ती टूट गई और दोनों में कुछ समय के लिए बातचीत बंद हो गई। ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने गलाटा इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि ओशो को लगता था कि विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन से चिढ़ते हैं। उन्होंने विनोद को अमिताभ के खिलाफ चुनाव में खड़े होने का भी सुझाव दिया था। किस्सा-2 परिवार में हो रहीं मौतों से डरे, दोस्त महेश भट्ट के कहने पर ओशो के आश्रम गए एक दौर में महेश भट्ट और विनोद खन्ना की दोस्ती चर्चा में थी। महेश भट्ट के स्ट्रगल के दिनों में विनोद खन्ना कई बार उनका खर्चा भी उठाते थे। 1971 में विनोद ने गीतांजलि से शादी की थी। 1975 में पत्नी ने बेटे अक्षय खन्ना को जन्म दिया। उसी समय 6 महीनों के अंतराल में ही एक-एक कर परिवार में 4 मौतें हो गईं। जिसमें उनकी मां कमला खन्ना और एक बहन भी शामिल थीं। ये देखउन्हें मौत का आभास होने लगा। वो डरने लगे कि कहीं उनकी भी मौत न हो जाए। इस समय उन्हें दोस्त महेश भट्ट ने ओशो के आश्रम जाने का सुझाव दिया। कुछ समय के लिए वो पुणे स्थित आश्रम जाकर रहे। 1977 में एक दिन विनोद खन्ना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंडस्ट्री छोड़ संन्यासी बनने की घोषणा की। इससे उन्हें फिल्ममेकर्स की आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके पास कई फिल्में थीं। विनोद ने वादा किया कि वो सभी फिल्में पूरी करेंगे। फिल्में पूरी होते ही वो 1981 में यूएसए के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाकर रहने लगे। किस्सा-3 महेश भट्ट ने माला कमोड में फेंकी, तो दी धमकी विनोद खन्ना के साथ महेश भट्ट भी ओशो के आश्रम गए थे। वहां उन्हें माला पहनाई गई थी, जिसमें ओशो की तस्वीर थी। कुछ दिनों बाद जब महेश भट्ट लौटे, तो उन्होंने वो माला तोड़कर टॉयलेट में फेंक दी। जैसे ही ये बात विनोद को पता चली, वो बहुत गुस्सा हुए। उन्हें एक दिन महेश भट्ट को फिल्मिस्तान स्टूडियो बुलाया और कहा- भगवान तुमसे बहुत नाराज हैं। महेश ने पूछा क्यों?, तो जवाब मिला- क्योंकि तुमने माला तोड़ दी और कमोड में फेंक दी। महेश ने फिर कहा- मुझे वो कुत्ते के पट्टे की तरह लगती थी। विनोद ने ये सुनकर कहा- उन्होंने (कथित तौर पर ओशो ने) कहा है कि महेश से कहो कि वो खुद मुझे वो माला लाकर दे। आगे विनोद ने खुसफुसाते हुए कहा- उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया, तो वो तुम्हें बर्बाद कर देंगे। ये किस्सा खुद महेश भट्ट ने अरबाज खान के चैट शो द इन्विन्सिबल विद अरबाज खान में सुनाया था। किस्सा- 4 ओशो के आश्रम में टॉयलेट साफ किए, तंग कमरे में गुजारे कई दिन विनोद खन्ना आश्रम में

इंदौर में ACP से बजरंग दल कार्यकर्ता की बहस:बारात के चलते गाड़ी को नहीं मिला रास्ता; विवाद बढ़ा तो टीआई ने खुलवाया जाम

इंदौर में ACP से बजरंग दल कार्यकर्ता की बहस:बारात के चलते गाड़ी को नहीं मिला रास्ता; विवाद बढ़ा तो टीआई ने खुलवाया जाम

इंदौर के हीरानगर में शनिवार रात बजरंग दल के जिला संयोजक के भतीजे की बारात में जमकर हंगामा हो गया। एसीपी की गाड़ी को रास्ता नहीं देने पर वह बिफर गईं। सड़क पर ही बहस करने लगीं। इसके चलते वहां ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई। बाद में टीआई मौके पर पहुंचे और मामले को शांत किया। मामला गौरी नगर के पास एक्सिस बैंक के पास का है। यहां बजरंग दल के जिला संयोजक जयेश मौर्य की बारात निकल रही थी। इस दौरान व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए बाउंसर भी लगाए गए थे। तभी वहां से महिला एसीपी रूबिना मिजवानी अपनी जीप से गुजर रही थीं। सड़क पर जाम से नाराज हो गईं सड़क पर जाम की स्थिति होने के चलते महिला एसीपी गुस्सा हो गईं। उन्होंने कुछ युवकों को धक्का दे दिया। इस दौरान कुछ हिंदूवादियों ने महिला एसीपी से कह दिया कि वह पाकिस्तान जाकर बारात निकालें। महिला एसीपी का कहना था कि बारात के चलते सड़क पर जाम लग रहा है। उन्होंने यहां करीब आधे घंटे तक बारात को नहीं निकलने दिया। टीआई ने खुलवाया जाम जानकारी मिलने के बाद टीआई सुशील पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवकों को समझाया और बारात को मौके से रवाना किया। बताया जा रहा है कि हिंदूवादियों ने साफ तौर पर कहा कि अगर शादी नहीं होती तो वे बताते। हालांकि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों तक एसीपी के व्यवहार को लेकर शिकायत करने की बात कही। बाणगंगा में भी हो चुका है विवाद इससे पहले भी महिला एसीपी से चेकिंग के दौरान एक कार में सवार महिला ने भी बदतमीजी की थी। तब भी महिला एसीपी ने मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। हालांकि सोशल मीडिया पर इसका मैसेज वायरल हुआ था। ऑफिस शिफ्ट होने के बाद होती है दिक्कत हीरानगर एसीपी रूबिना मिजवानी का ऑफिस पहले गौरी नगर सब्जी मंडी में था, लेकिन 6 माह से वह हीरानगर थाने के ऊपर बैठने लगी हैं। इसके चलते अफसरों ने उन्हें कुछ दिन पहले नया ऑफिस ढूंढने के लिए कहा था, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उन्हें इस ऑफिस में आने-जाने के दौरान कई बार जाम में फंसना पड़ता है।

CM का 4 मई को ग्वालियर में प्रस्तावित कार्यक्रम:कलेक्टर-SP ने लिया जायजा, ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन में होंगे शामिल

CM का 4 मई को ग्वालियर में प्रस्तावित कार्यक्रम:कलेक्टर-SP ने लिया जायजा, ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन में होंगे शामिल

ग्वालियर शहर में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तावित ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। 4 मई को शीतला माता मंदिर, शिवपुरी लिंक रोड पर आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए रविवार को कलेक्टर रुचिका चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रशासन द्वारा आयोजन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं, मंच व्यवस्था, वीआईपी प्रोटोकॉल, पेयजल, स्वच्छता, पार्किंग और आमजन की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं पुलिस प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर, एसडीएम अतुल सिंह, एसडीएम नरेन्द्र बाबू यादव, अपर आयुक्त नगर निगम मुनीष सिकरवार, अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. रत्नम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विश्वविद्यालय से जुड़े पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।