Friday, 25 Sep 2026 | 08:28 PM

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मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइडांस के को-फाउंडर झांग यिमिंग मुकेश अंबानी को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, झांग की संपत्ति अब 8.9 लाख करोड़ रुपए (93 बिलियन डॉलर) हो गई है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी की संपत्ति 8.31 लाख करोड़ रुपए (86 बिलियन डॉलर) रह गई है। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी हैं। एशिया के टॉप 5 सबसे अमीर व्यक्ति एआई चैटबॉट डौबाओ के सफलता से बढ़ी झांग की दौलत झांग की दौलत बाइडांस की वैल्युएशन बढ़ने और एआई चैटबॉट डौबाओ की सफलता से बढ़ी है। यह भारत और दुनियाभर में मशहूर ओपनएआई के चैटजीपीटी और गूगल के जेमिनाई जैसा ही एडवांस्ड एआई असिस्टेंट है। चीन में इस चैटबॉट के 30 करोड़ यूजर्स हैं। 7 सालों में 7 गुना बढ़ी संपत्ति झांग 2019 में 1.24 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक थे। बीते 7 साल में उनकी संपत्ति सात गुना ये ज्यादा बढ़ चुकी है। अमेरिका में टिकटॉक का बिजनेस बिकने से कंपनी का संकट दूर हो गया। ब्लूमबर्ग ने इसकी वैल्यू में 25% कटौती घटाकर 10% कर दी है। इससे ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे निवेशकों के विश्लेषण के बाद झांग की संपत्ति 2.30 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। कंपनी एआई सेक्टर में इस साल 6.7 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। बहरहाल, गौतम अदाणी 11.19 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। इलॉन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क की कुल संपत्ति 69 लाख करोड़ रुपए (726 बिलियन डॉलर) है। वहीं इस मामले में दूसरे नंबर पर गूगल के फाउंडर लैरी पेज और तीसरे पर लैरी एलिशन हैं।

मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

मुकेश अंबानी से आगे निकले टिकटॉक के सह-संस्थापक:यिमिंग एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने, अंबानी तीसरे नंबर पर खिसके

टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइडांस के को-फाउंडर झांग यिमिंग मुकेश अंबानी को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, झांग की संपत्ति अब 8.9 लाख करोड़ रुपए (93 बिलियन डॉलर) हो गई है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानी की संपत्ति 8.31 लाख करोड़ रुपए (86 बिलियन डॉलर) रह गई है। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी हैं। एशिया के टॉप 5 सबसे अमीर व्यक्ति एआई चैटबॉट डौबाओ के सफलता से बढ़ी झांग की दौलत झांग की दौलत बाइडांस की वैल्युएशन बढ़ने और एआई चैटबॉट डौबाओ की सफलता से बढ़ी है। यह भारत और दुनियाभर में मशहूर ओपनएआई के चैटजीपीटी और गूगल के जेमिनाई जैसा ही एडवांस्ड एआई असिस्टेंट है। चीन में इस चैटबॉट के 30 करोड़ यूजर्स हैं। 7 सालों में 7 गुना बढ़ी संपत्ति झांग 2019 में 1.24 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक थे। बीते 7 साल में उनकी संपत्ति सात गुना ये ज्यादा बढ़ चुकी है। अमेरिका में टिकटॉक का बिजनेस बिकने से कंपनी का संकट दूर हो गया। ब्लूमबर्ग ने इसकी वैल्यू में 25% कटौती घटाकर 10% कर दी है। इससे ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे निवेशकों के विश्लेषण के बाद झांग की संपत्ति 2.30 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। कंपनी एआई सेक्टर में इस साल 6.7 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। बहरहाल, गौतम अदाणी 11.19 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। इलॉन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क की कुल संपत्ति 69 लाख करोड़ रुपए (726 बिलियन डॉलर) है। वहीं इस मामले में दूसरे नंबर पर गूगल के फाउंडर लैरी पेज और तीसरे पर लैरी एलिशन हैं।

सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:74,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 50 अंक चढ़ा; ऑटो और फार्मा शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:74,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 50 अंक चढ़ा; ऑटो और फार्मा शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 4 जून को बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक की बढ़त के साथ 74,400 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 50 अंक की तेजी है, ये 23,400 के स्तर पर है। आज ऑटो, फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल में ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में भी आज गिरावट कल अमेरिकी बाजारों में गिरावट रही विदेशी निवेशकों ने कल 5,617 करोड़ के शेयर बेचे कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 3 जून को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 303 अंक की गिरावट के साथ 74,346 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 77 अंकों की गिरावट रही, ये 23,405 पर बंद हुआ था।

कुवैत पर ईरानी हमले से भड़के खाड़ी देश:कहा- ऐसे कायराना हमले से तनाव बढ़ा; ट्रम्प बोले- ईरान पर अटैक मेरा फैसला

कुवैत पर ईरानी हमले से भड़के खाड़ी देश:कहा- ऐसे कायराना हमले से तनाव बढ़ा; ट्रम्प बोले- ईरान पर अटैक मेरा फैसला

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने बुधवार को कुवैत और बहरीन पर हुए हमलों को लेकर ईरान की कड़ी आलोचना की। संगठन ने इन हमलों को कायराना बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। GCC के महासचिव जासिम मोहम्मद अलबुदैवी ने कहा कि ईरान लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जो खाड़ी देशों की सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता के लिए खतरा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के हालिया हमले अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन हैं। ऐसे कदमों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सख्त रुख अपनाना चाहिए। खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC में कुवैत, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान और UAE शामिल हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई का फैसला उन्होंने खुद लिया था। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें ऐसा करने के लिए प्रभावित किया था। एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा, किसी ने मुझे बहकाया नहीं। यह फैसला मेरा अपना था। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. कुवैत एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन-मिसाइल हमला: हमले में 1 व्यक्ति की मौत हुई, 63 लोग घायल हुए। एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा और उड़ानें अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं। 2. ईरान ने कुवैत और बहरीन को चेतावनी दी: तेहरान ने कहा कि अगर किसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। 3. ट्रम्प ने कहा- ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की शर्त मानी: अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि प्रस्तावित समझौते में ईरान परमाणु बम नहीं बनाने का वादा करेगा। 4. नेतन्याहू पर ट्रम्प भड़के, ‘पागल’ तक कहा: रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान में इजराइली हमलों और बढ़ते तनाव को लेकर ट्रम्प ने नेतन्याहू से नाराजगी जताई। 5. लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई तेज: हिजबुल्लाह ने 13 हमलों का दावा किया, जबकि इजराइल ने कई इलाकों पर हवाई हमले किए और लोगों को घर खाली करने के आदेश दिए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

उनके जन्मदिन पर, सभी की निगाहें अन्नामलाई के अगले कदम पर हैं: क्या वह आज एक राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे? | भारत समाचार

New Delhi: Firefighters at the site after a fire broke out at a bed-and-breakfast in a five-storey building (Photos: PTI)

आखरी अपडेट:04 जून, 2026, 05:32 IST कोयंबटूर और मदुरै सहित तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अन्नामलाई के समर्थन वाले पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य भाजपा नेताओं की तस्वीर नहीं है। अन्नामलाई 2020 में भाजपा में शामिल हुए और 10 महीने के भीतर, पार्टी की तमिलनाडु इकाई के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए। (एक्स) तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई गुरुवार को 42 साल के हो गए, इन अटकलों के बीच कि वह एक नई राजनीतिक पार्टी या आंदोलन की घोषणा कर सकते हैं, संभावित रूप से भारतीय जनता पार्टी के बाहर एक स्वतंत्र राजनीतिक पाठ्यक्रम तैयार कर सकते हैं। यह चर्चा 2 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अन्नामलाई की मुलाकात के कुछ दिनों बाद आई है। हालांकि बैठक के बाद कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि भाजपा नेतृत्व ने उनसे अपने इस्तीफे की योजना को रोकने के लिए कहा था। न्यूज18 ने पहले खबर दी थी कि अन्नामलाई ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात के दौरान पार्टी से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. पूर्व आईपीएस अधिकारी ने खुद को राजनीतिक संकट में पाया है क्योंकि भाजपा ने उनकी जगह तमिलनाडु इकाई के प्रमुख के रूप में नैनार नागेंद्रन को नियुक्त किया है और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अन्नाद्रमुक के साथ अपने गठबंधन को पुनर्जीवित किया है। अटकलों को और हवा देते हुए, अन्नामलाई ने हाल ही में संवाददाताओं से कहा कि वह दो दिनों के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने कहा, “कृपया इंतजार करें। हम दो दिन में बैठेंगे और बात करेंगे।” यह भी पढ़ें | नीली आंखों वाले लड़के से अकेले योद्धा तक: भाजपा में अन्नामलाई का उत्थान और पतन अन्नामलाई की बीजेपी यात्रा अन्नामलाई 2020 में भाजपा में शामिल हुए और 10 महीने के भीतर, पार्टी की तमिलनाडु इकाई के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए। हालाँकि वह 2021 का विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने राज्य में भाजपा के पदचिह्न का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में, पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनावों में चार सीटें जीतीं, जिससे दो दशकों के बाद तमिलनाडु विधानसभा में उसकी वापसी हुई। उन्हें तमिलनाडु में 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के वोट शेयर को 2019 में 3.66 प्रतिशत से बढ़ाकर 11.24 प्रतिशत करने का श्रेय भी दिया गया। इसके विपरीत, पार्टी नैनार नागेंद्रन के नेतृत्व में 2026 के चुनावों में केवल एक सीट जीतने में सफल रही। पोस्टरों ने अटकलों को जन्म दिया साज़िश को बढ़ाते हुए, कोयंबटूर और मदुरै सहित तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अन्नामलाई का समर्थन करने वाले पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य भाजपा नेताओं की तस्वीर नहीं है। कुछ पोस्टरों में अन्नामलाई को अभिनेता रजनीकांत और अजित के साथ दिखाया गया है, जिससे इन अटकलों को बल मिलता है कि उनके समर्थक एक स्वतंत्र राजनीतिक मार्ग का समर्थन कर रहे हैं। कोयंबटूर, तमिलनाडु: कोयंबटूर में भाजपा नेता के अन्नामलाई के समर्थन वाले पोस्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य भाजपा नेताओं की छवियों के बिना दिखाई दिए हैं। इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि वह 4 जून को अपने जन्मदिन पर कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। pic.twitter.com/p9cJfs7GQi– आईएएनएस (@ians_india) 2 जून, 2026 अनिश्चितता ने भाजपा के भीतर चिंता पैदा कर दी है। कई पार्टी कार्यकर्ताओं, विशेषकर युवा मोर्चा ने, नेतृत्व से अन्नामलाई की स्थिति स्पष्ट करने और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम को रोकने का आग्रह किया है। भाजपा युवा मोर्चा के राज्य सचिव आर योगेश ने कहा, “अन्नामलाई के बाहर निकलने की अफवाहों के बाद, भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति का सामना कर रही है। कई लोग चिंतित हैं, और कुछ खुद को पार्टी से दूर करने पर भी विचार कर रहे हैं।” इस बेचैनी के परिणाम पहले ही दिखने लगे हैं। अन्नामलाई के भविष्य पर अटकलें तेज होने पर भाजपा मछुआरा विंग के प्रदेश अध्यक्ष एमसी मुनुसामी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। समर्थकों के उनके अगले कदम का इंतजार करने और भाजपा नेतृत्व के चुप्पी बनाए रखने के साथ, सभी की निगाहें अब इस पर हैं कि क्या अन्नामलाई अपने जन्मदिन का उपयोग एक बड़ी राजनीतिक घोषणा करने के लिए करते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया उनके जन्मदिन पर, सभी की निगाहें अन्नामलाई के अगले कदम पर हैं: क्या वह आज एक राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)के अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी(टी)के अन्नामलाई बीजेपी(टी)तमिलनाडु बीजेपी राजनीति(टी)अन्नामलाई इस्तीफे की अटकलें(टी)बीजेपी एआईएडीएमके गठबंधन(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)बीजेपी नेतृत्व संकट(टी)राजनीतिक पोस्टर तमिलनाडु

पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया:सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा

ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया:सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा

मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। एटीएफ की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने के लिए यह फैसले लिए गए हैं। बुधवार (3 जून) को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में इस फंड को मंजूरी दी गई है। यह फंड ATF की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करेगा। इस फंड का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के हवाई ऑपरेशन्स के लिए किया जाएगा। मार्च से मई के बीच 2.5 गुना बढ़े दाम, ₹75.6 पर कैपिंग सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ATF की कीमत जो 60.5 रुपए प्रति लीटर थी, वह मई 2026 में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 142 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत को 75.6 रुपए प्रति लीटर पर कैप (अधिकतम सीमा तय) कर दिया है। एयरलाइंस कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग खर्च में अकेले ATF की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है। ऐसे में कीमतों में आए इस तेज उछाल ने एयरलाइंस और तेल कंपनियों दोनों पर बड़ा आर्थिक दबाव बना दिया था। नए फंड से होने वाले 6 बड़े फायदे सरकार ने बताया है कि ₹10,000 करोड़ के इस नए फंड की मदद से एविएशन सेक्टर को यह 6 बड़े फायदे मिलेंगे… ओएमसी को ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में मिलेगी बजटीय सहायता केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने शेड्यूल्ड इंडियन एयरलाइंस को उनके घरेलू और इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट देने का फैसला किया है। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अधिकतम ₹10,000 करोड़ तक की वन-टाइम बजटीय सहायता मंजूर की गई है। यह बजटीय सहायता ओएमसी को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर सरकार वापस लेगी पैसा सरकार की यह सहायता पूरी तरह अस्थायी है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें कम (मॉडरेट) हो जाएंगी, तब ओएमसी से अंतर की राशि (डिफरेंशियल अमाउंट) वापस वसूल ली जाएगी। इस वसूली गई रकम को भारत के कंसोलिडेटेड फंड में वापस जमा किया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि पूरी सहायता राशि को पूरी तरह से रिकवर और सेटल नहीं कर लिया जाता। ओएमसी और एयरलाइंस के बीच MoU होगा यह स्कीम उन सभी शेड्यूल्ड इंडियन कैरियर्स (एयरलाइंस) के लिए उपलब्ध होगी जो इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं। यह लाभ घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के ऑपरेशंस पर मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए भाग लेने वाली भारतीय एयरलाइंस और ओएमसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस MoU में हस्ताक्षरकर्ता होंगे। 3 साल तक सिर्फ ओएमसी से ही एटीएफ खरीद सकेंगी एयरलाइंस इस वन-टाइम अरेंजमेंट के तहत, योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस अधिकतम तीन साल की अवधि तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ की खरीद करेंगी। हालांकि, यह व्यवस्था वार्षिक समीक्षा (एनुअल रिव्यू) के अधीन होगी। यदि सरकार द्वारा दिया गया एडवांस अमाउंट तीन साल से पहले ही पूरी तरह रिकवर हो जाता है, तो यह व्यवस्था उसी समय समाप्त हो जाएगी। क्या होता है प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF)? प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड यानी मूल्य स्थिरता कोष सरकार द्वारा बनाया गया एक विशेष फंड होता है, जिसका उद्देश्य किसी जरूरी वस्तु (जैसे इस मामले में हवाई ईंधन) की कीमतों में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो इस फंड के पैसों का इस्तेमाल कंपनियों और आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है। चूंकि यह एक ‘रिवॉल्विंग फंड’ है, इसलिए यह स्थिति सामान्य होने पर वापस खुद को री-फंड या री-जेनरेट कर लेता है। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है: अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ें यह QA रिपोर्ट… पूरी खबर पढ़ें…

आरएएस-2026 में 607 पदों पर भर्ती, आवेदन कल से:3 जुलाई लास्ट डेट; जानिए-एपीपी के 371 पद व अन्य भर्ती में कब से कर सकेंगे अप्लाई

आरएएस-2026 में 607 पदों पर भर्ती, आवेदन कल से:3 जुलाई लास्ट डेट; जानिए-एपीपी के 371 पद व अन्य भर्ती में कब से कर सकेंगे अप्लाई

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से निकाली गई राजस्थान राज्य और अधीनस्थ सेवाएं (RAS) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2026 के 607 पदों के लिए आवेदन कल (4 जून) से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा 29 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इस भर्ती में राज्य सेवा के 192 पद और अधीनस्थ सेवा के 415 पद शामिल हैं। 1 जनवरी 2027 को अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए। अभ्यर्थियों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि मुख्य परीक्षा में वर्णनात्मक प्रश्न होंगे। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। राज्य सेवाएं (192 पद) अधीनस्थ सेवाएं (415 पद) सहायक अभियोजन-अधिकारी, पद 371, आवेदन 8 जून से शुरू होंगे राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) सहायक अभियोजन अधिकारी (गृह विभाग-अभियोजन) के 371 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 8 जून से आमंत्रित कर रहा है। आवेदन 7 जुलाई तक किए जा सकेंगे। इस भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 2 सितंबर को आयोजित की जाएगी। 1 जनवरी 2027 को न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। आयोग ने इन पदों को 2024 में विज्ञापित किया था, जिसके बाद आयु की गणना 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर की गई थी। चूंकि इन पदों के लिए कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया गया है, इसलिए अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में एक वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। अभ्यर्थियों का चयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होगा, जो दो चरणों में आयोजित की जाएगी: प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा। 11 जून से कर सकेंगे आवेदन, 3 डिवीजन में भर्ती राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के कुल 3 पदों पर भर्ती होगी। इसमें टॉक्सिकोलॉजी, फिजिक्स और बैलिस्टिक्स डिवीजन में 1-1 पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन 11 जून से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 रात 12 बजे तक कर सकेंगे। खास बात ये है कि अगर कोई अभ्यर्थी एक से ज्यादा डिवीजन के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे हर पद के लिए अलग-अलग फॉर्म भरना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। परीक्षा तिथि बाद में घोषित होगी। शैक्षणिक योग्यता व वर्गवार जानकारी आयोग की वेबसाइट http://rpsc.rajasthan.gov.in पर देखी जा सकती है। लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती प्रोसेस जारी राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन सोमवार से शुरू कर दिए हैं। कैंडिडेट्स 30 जून 2026 की रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कैंडिडेट की उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे। कैंडिडेट का सिलेक्शन एग्जाम के माध्यम से होगा। परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में अलग से जारी की जाएगी। (अधिक जानकारी के लिए करें क्लिक) पढें ये खबर भी….

शॉर्ट्स और बनियान में मंदिर पहुंचे वरुण धवन:पहनावे पर उठे सवाल; फैंस बोले- भगवान के घर तो ढंग के कपड़े पहनते

शॉर्ट्स और बनियान में मंदिर पहुंचे वरुण धवन:पहनावे पर उठे सवाल; फैंस बोले- भगवान के घर तो ढंग के कपड़े पहनते

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन मुंबई के एक मंदिर में शॉर्ट्स और सैंडो बनियान पहने नजर आए। वरुण अपनी आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ की रिलीज से पहले मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। लेकिन अब वे अपने इस पहनावे की वजह से शल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उनके माथे पर तिलक लगा था और उन्होंने पैपराजी को देखकर मुस्कुराते हुए पोज भी दिए। हालांकि, उनका यह पहनावा कई लोगों को पसंद नहीं आया और लोगों ने मंदिर की मर्यादा का ध्यान रखने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने वरुण के लुक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा, “कम से कम मंदिर के लिए तो ढंग के कपड़े पहन लेते।” दूसरे यूजर ने कमेंट किया, “प्रभु शर्ट तो पहन लेते, कुछ तो ढंग का पहन लेते, तुम मंदिर आए हो। सिर्फ बताने के लिए जबरदस्ती क्यों आते हो यार।” वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि इस तरह कपड़े पहनकर मंदिर कौन जाता है। 5 जून को रिलीज हो रही है नई फिल्म वरुण धवन इन दिनों अपनी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के प्रमोशन में बिजी हैं। यह फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसका निर्देशन उनके पिता डेविड धवन ने किया है। फिल्म में वरुण के साथ पूजा हेगड़े, मृणाल ठाकुर और मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म को एक फैमिली एंटरटेनर के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें डेविड धवन का पुराना कॉमेडी स्टाइल देखने को मिलेगा। फिल्म रिलीज से पहले कानूनी विवाद में फंसी रिलीज से ठीक पहले यह फिल्म एक कानूनी विवाद में भी घिर गई है। प्रोड्यूसर वाशु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रमेश तौरानी, कुमार एस तौरानी और डायरेक्टर डेविड धवन के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। विवाद 1999 की फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के मशहूर गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल को लेकर है। आरोप है कि इस गाने को बिना इजाजत नई फिल्म में इस्तेमाल किया गया है।