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कॉफी अब सबसे महंगी आदतों में से एक:2020 में 4.3 डॉलर में मिलने वाला कॉफी पैकेट 9.6 डॉलर पहुंचा, पर मांग ठंडी नहीं पड़ी

कॉफी अब सबसे महंगी आदतों में से एक:2020 में 4.3 डॉलर में मिलने वाला कॉफी पैकेट 9.6 डॉलर पहुंचा, पर मांग ठंडी नहीं पड़ी

लंदन के कू ब्रिज पर विंटेज इतालवी कॉफी कार्ट के बाहर लंबी कतार है। दौड़ लगाने वाले, पर्यटक और डॉग वॉकर, सभी हाथ में कॉफी लिए दिन शुरू करना चाहते हैं। लेकिन कार्ट चलाने वाले एंथनी डकवर्थ की नजर ग्राहकों से ज्यादा कीमतों पर टिकी है। उनके यहां आइस्ड लाते 4.5 पाउंड (580 रुपए) में मिलती है। उनकी चिंता है कि कीमत 5 पाउंड (644 रुपए) न पहुंच जाए। यह चिंता पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था की है। आज एक कप कॉफी में जलवायु संकट, ट्रेड वॉर और बदलती उपभोक्ता संस्कृति सब दिखाई देने लगे हैं। दुनिया की कॉफी मुख्य रूप से दो बीन्स पर टिकी है- अरेबिका और रोबस्टा। अरेबिका ब्राजील, इथियोपिया और केन्या की ठंडी पहाड़ियों में उगती है, जबकि कैफीन से भरपूर रोबस्टा पर वियतनाम का दबदबा है। लेकिन पिछले दो वर्षों में मौसम ने दोनों फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। नतीजतन अरेबिका बीन्स की कीमत औसत 1.2 डॉलर प्रति पाउंड से 4 डॉलर (384 रुपए) से ऊपर निकल गई। कॉफी उद्योग के दिग्गज गुइसेप्पे लावाज्जा मानते हैं कि राहत जल्द मिलने वाली नहीं है। इस बीच, अमेरिकी टैरिफ ने संकट और गहरा दिया। ट्रम्प प्रशासन ने वियतनाम पर 46%, इंडोनेशिया पर 32% और ब्राजील पर 50% तक टैरिफ लगा दिया। अमेरिका में पिसी कॉफी की कीमत 17% और इंस्टेंट कॉफी 25% तक महंगी हो गई। आखिरकार बढ़ती नाराजगी के बाद कॉफी को टैरिफ से राहत देनी पड़ी। लेकिन मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। लाल सागर में हूती हमलों के कारण वियतनाम से यूरोप जाने वाले जहाज अब अफ्रीका का लंबा चक्कर लगा रहे हैं। यात्रा 4,000 मील बढ़ गई। ऊपर से यूरोप के नए नियमों के तहत कॉफी किसानों को यह साबित करना होगा कि काफी जंगल काटकर नहीं उगाई गई। कीमत बढ़ने पर भी खरीदारी, इसीलिए दाम नीचे नहीं आते दिलचस्प है महंगी होने के बावजूद कॉफी की मांग कम नहीं हुई। तस्वीर साफ है- सप्लाई चेन संकट में है, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीति कीमतें बढ़ा रहे हैं, लेकिन दुनिया का कॉफी प्रेम अडिग है। अब कॉफी सिर्फ ड्रिंक नहीं, बल्कि ‘एक्सपीरियंस’ बन चुकी है। चीनी कंपनी कॉफी डेटा और टेक्नोलॉजी के दम पर स्टारबक्स को चुनौती दे रही है, जबकि ब्रिटेन की ग्रेग्स ऑटोमेशन के जरिए सस्ती कॉफी बेचकर सबसे बड़ा कॉफी विक्रेता बन चुकी है।

नेतन्याहू का गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का आदेश:इजराइली PM बोले- धीरे-धीरे कंट्रोल में लेंगे; पहले 50% नियंत्रण था, अब 60% हुआ

नेतन्याहू का गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का आदेश:इजराइली PM बोले- धीरे-धीरे कंट्रोल में लेंगे; पहले 50% नियंत्रण था, अब 60% हुआ

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70% हिस्से पर सैन्य नियंत्रण लेने का आदेश दिया है। वेस्ट बैंक में गुरुवार को एक कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। अब हम गाजा पट्टी के 60% इलाके को कंट्रोल करते हैं। पहले हम 50% पर थे, फिर 60% पर पहुंचे। मैंने आदेश दिया है कि इसे बढ़ाकर…” तभी भीड़ में से किसी ने चिल्लाकर कहा, “100%।” इस पर नेतन्याहू ने कहा, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70% तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं। हम हर तरफ से उन पर दबाव बना रहे हैं और बाकी बचे लोगों से भी निपटेंगे।” इजराइल का एक्शन सीजफायर शर्तों के खिलाफ यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत माना जा रहा है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय ‘येलो लाइन’ के पीछे हटना था। इस लाइन के बाद गाजा का करीब 53% हिस्सा इजराइल के नियंत्रण में था। हमास का आरोप है कि इजराइल चुपचाप इस सीमा को और अंदर खिसका रहा है। अब कई रिपोर्टों के मुताबिक गाजा के करीब 60 से 64% इलाके पर इजराइल का नियंत्रण है। इजराइल-हमास के बीच शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल ठप पड़ी हुई है। 22 लाख लोगों को एक-तिहाई हिस्से में रहना पड़ सकता पहले से ही युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन की वजह से गाजा के ज्यादातर इलाके तबाह हो चुके हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इजराइल 70% इलाके पर कब्जा कर लेता है, तो गाजा के करीब 22 लाख लोगों को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहना पड़ेगा। यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले ही बेहद खराब हैं। उनके मुताबिक, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हैं। अगर इलाका और छोटा हुआ, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह ही नहीं बचेगी।” सीजफायर के 900 फिलिस्तीनियों की मौत इजराइल-हमास के बीच अक्टूबर 2025 में सीजफायर का ऐलान हुआ था। 7 महीने बीतने के बाद भी इजराइली सेना गाजा में हमले कर रही है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने ‘येलो लाइन’ के आसपास बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है। यहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानकर कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में भी बताया गया कि उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में टैंकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है और ड्रोन किसी भी हलचल को निशाना बना रहे हैं।

नेतन्याहू का गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का आदेश:इजराइली PM बोले- धीरे-धीरे कंट्रोल में लेंगे; पहले 50% नियंत्रण था, अब 60% हुआ

नेतन्याहू का गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे का आदेश:इजराइली PM बोले- धीरे-धीरे कंट्रोल में लेंगे; पहले 50% नियंत्रण था, अब 60% हुआ

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70% हिस्से पर सैन्य नियंत्रण लेने का आदेश दिया है। वेस्ट बैंक में गुरुवार को एक कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। अब हम गाजा पट्टी के 60% इलाके को कंट्रोल करते हैं। पहले हम 50% पर थे, फिर 60% पर पहुंचे। मैंने आदेश दिया है कि इसे बढ़ाकर…” तभी भीड़ में से किसी ने चिल्लाकर कहा, “100%।” इस पर नेतन्याहू ने कहा, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70% तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं। हम हर तरफ से उन पर दबाव बना रहे हैं और बाकी बचे लोगों से भी निपटेंगे।” इजराइल का एक्शन सीजफायर शर्तों के खिलाफ यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत माना जा रहा है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय ‘येलो लाइन’ के पीछे हटना था। इस लाइन के बाद गाजा का करीब 53% हिस्सा इजराइल के नियंत्रण में था। हमास का आरोप है कि इजराइल चुपचाप इस सीमा को और अंदर खिसका रहा है। अब कई रिपोर्टों के मुताबिक गाजा के करीब 60 से 64% इलाके पर इजराइल का नियंत्रण है। इजराइल-हमास के बीच शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल ठप पड़ी हुई है। 22 लाख लोगों को एक-तिहाई हिस्से में रहना पड़ सकता पहले से ही युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन की वजह से गाजा के ज्यादातर इलाके तबाह हो चुके हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इजराइल 70% इलाके पर कब्जा कर लेता है, तो गाजा के करीब 22 लाख लोगों को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहना पड़ेगा। यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले ही बेहद खराब हैं। उनके मुताबिक, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हैं। अगर इलाका और छोटा हुआ, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह ही नहीं बचेगी।” सीजफायर के बावजूद 900 फिलिस्तीनियों की मौत इजराइल-हमास के बीच अक्टूबर 2025 में सीजफायर का ऐलान हुआ था। 7 महीने बीतने के बाद भी इजराइली सेना गाजा में हमले कर रही है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने ‘येलो लाइन’ के आसपास बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है। यहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानकर कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में भी बताया गया कि उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में टैंकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है और ड्रोन किसी भी हलचल को निशाना बना रहे हैं।

कर्नाटक में केरल मॉडल? कांग्रेस नए मंत्रिमंडल के लिए युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण पर विचार कर रही है | भारत समाचार

People show their identity cards as they wait in a queue at a polling station to cast their votes during the Municipal Corporation elections, in Amritsar. (Source: PTI)

आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 10:42 IST कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद सहित 34 कैबिनेट पद हैं। दो इस्तीफों और एक मंत्री की मृत्यु के बाद वर्तमान में तीन सीटें खाली हैं। सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार सीएम बन सकते हैं। कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ प्रयोग के साथ समानताएं बनाते हुए, कांग्रेस आलाकमान कथित तौर पर सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कर्नाटक के लिए एक युवा और नए मंत्रिमंडल पर विचार कर रहा है। सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित कैबिनेट फेरबदल में युवा और अनुभवी नेताओं का मिश्रण होगा, जो वीडी सतीशन के नेतृत्व वाले केरल कैबिनेट में निहित एक मॉडल है। वर्तमान कर्नाटक कैबिनेट में कई वरिष्ठ मंत्रियों को नई सरकार में शायद सिद्धारमैया के डिप्टी डीके शिवकुमार के बाद जगह नहीं मिल पाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें कथित तौर पर समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा, ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज और गृह मंत्री जी परमेश्वर शामिल हैं। माना जाता है कि सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले मंत्रियों में बिरथी सुरेश, संतोष लाड, दिनेश गुंडू राव और बीजेड ज़मीर अहमद खान भी जांच के दायरे में हैं। पार्टी सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट के अनुसार, उनका यह कदम कांग्रेस सरकारों में युवा नेताओं के अधिक प्रतिनिधित्व के लिए राहुल गांधी के प्रयास के अनुरूप है। हालाँकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि नए कर्नाटक मंत्रिमंडल पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, उन्होंने कहा कि मंत्रियों के चयन में अनुभव एक महत्वपूर्ण कारक रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, आलाकमान वरिष्ठ और युवा नेताओं के संतुलित मिश्रण को चुन सकता है। वर्तमान सिद्धारमैया सरकार के लगभग 15 मौजूदा मंत्रियों और पांच युवा चेहरों को बरकरार रखा जा सकता है, जबकि शेष पद नए मुख्यमंत्री द्वारा चुने गए नए लोगों को दिए जा सकते हैं। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद सहित 34 कैबिनेट पद हैं, केएन राजन्ना और बी नागेंद्र के इस्तीफे और डी सुधाकर की मृत्यु के बाद वर्तमान में तीन रिक्तियां हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने पहले सिद्धारमैया को अपने मंत्रिमंडल में 50 वर्ष से कम उम्र के अधिक विधायकों को शामिल करने की सलाह दी थी और इस बार भी इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। हालाँकि, पूर्व मंत्री आरवी देशपांडे ने अनुभवी नेताओं को पूरी तरह से हटाने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कोई सरकार केवल नए चेहरों के साथ काम नहीं कर सकती और स्थिरता और निरंतरता के लिए अनुभवी मंत्रियों की जरूरत होती है। देशपांडे ने यह भी कहा कि वह कैबिनेट पद की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर पेशकश की गई तो इस पर विचार करेंगे। 79 वर्षीय डेसफांडे ने टीओआई से कहा, ”हमने अब तक नई कैबिनेट के बारे में कुछ नहीं सुना है, लेकिन अगर सरकार चलानी है तो केवल नए चेहरे ही नहीं हो सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा, ”हालांकि नए चेहरों का स्वागत है, लेकिन निरंतरता की जरूरत है और सरकार को काम करने के लिए अनुभवी हाथों की जरूरत है।” यूडीएफ कैबिनेट ने एक कैबिनेट की शुरुआत की जिसमें प्रमुख युवा कांग्रेस नेता और अनुभवी राजनेता शामिल थे। उल्लेखनीय शख्सियतों में कुंदरा का प्रतिनिधित्व करने वाले पीसी विष्णुनाथ थे, जो लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय हैं और केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष सहित विभिन्न भूमिकाओं में कार्यरत हैं। यूडीएफ का एक और नया चेहरा रोजी एम जॉन ने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और नेतृत्व अनुभव के साथ वादा निभाया। विविधता को शामिल करते हुए कैबिनेट में बिंदू कृष्णा और केए तुलसी जैसे नेता भी शामिल हैं, जो हाशिए पर रहने वाले समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कर्नाटक में केरल मॉडल? कांग्रेस नए मंत्रिमंडल के लिए युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण पर विचार कर रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कैबिनेट में फेरबदल(टी)कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)सिद्धारमैया बाहर निकलना(टी)डीके शिवकुमार(टी)युवा नेता कांग्रेस(टी)वरिष्ठ मंत्री कर्नाटक(टी)राहुल गांधी धक्का

नॉर्वे चेस- वर्ल्ड चैंपियन गुकेश लगातार तीसरा मैच हारे:चौथे राउंड में कार्लसन ने हराया, स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर आए

नॉर्वे चेस- वर्ल्ड चैंपियन गुकेश लगातार तीसरा मैच हारे:चौथे राउंड में कार्लसन ने हराया, स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर आए

भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश का नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में खराब दौर जारी है। उन्हें दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने हराया। गुरुवार को मिली इस हार के बाद गुकेश स्टैंडिंग में सबसे नीचे पहुंच गए हैं। 7 बार के नॉर्वे चेस चैंपियन कार्लसन ने काले मोहरों से खेलते हुए गुकेश को मात दी। शुरुआती तीन राउंड में संघर्ष करने वाले कार्लसन अब 4.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि गुकेश 3.5 अंकों के साथ आखिरी स्थान पर खिसक गए हैं। मैच के बाद कार्लसन ने कहा कि उन्हें गुकेश की ओपनिंग रणनीति देखकर आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी ने जरूरत से ज्यादा आक्रामक खेला, जिसका फायदा उन्हें मिला। प्रज्ञानानंदा ने 17 चाल में टाईब्रेक जीता आर प्रज्ञानानंदा ने विन्सेंट कीमर को आर्मगेडन टाईब्रेक में हराकर दूसरा स्थान बरकरार रखा है। उन्होंने विन्सेंट कीमर के खिलाफ क्लासिकल मैच ड्रॉ होने के बाद आर्मगेडन टाईब्रेक में 17 चालों में जीत दर्ज की। इस जीत से वे 6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा 8.5 अंकों के साथ शीर्ष पर कायम हैं। दिव्या को मुजिचुक ने हराया, हम्पी आखिरी स्थान पर महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख को पहली बार आर्मगेडन में हार मिली। डिफेंडिंग चैंपियन अन्ना मुजिचुक ने उन्हें हराया। दिव्या 5.5 अंकों के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर हैं। वहीं कोनेरू हम्पी आखिरी स्थान पर बनी हुई हैं। ————————————————–

नॉर्वे चेस- वर्ल्ड चैंपियन गुकेश लगातार तीसरा मैच हारे:चौथे राउंड में कार्लसन ने हराया, स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर आए

नॉर्वे चेस- वर्ल्ड चैंपियन गुकेश लगातार तीसरा मैच हारे:चौथे राउंड में कार्लसन ने हराया, स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर आए

भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश का नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में खराब दौर जारी है। उन्हें दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने हराया। गुरुवार को मिली इस हार के बाद गुकेश स्टैंडिंग में सबसे नीचे पहुंच गए हैं। 7 बार के नॉर्वे चेस चैंपियन कार्लसन ने काले मोहरों से खेलते हुए गुकेश को मात दी। शुरुआती तीन राउंड में संघर्ष करने वाले कार्लसन अब 4.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि गुकेश 3.5 अंकों के साथ आखिरी स्थान पर खिसक गए हैं। मैच के बाद कार्लसन ने कहा कि उन्हें गुकेश की ओपनिंग रणनीति देखकर आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी ने जरूरत से ज्यादा आक्रामक खेला, जिसका फायदा उन्हें मिला। प्रज्ञानानंदा ने 17 चाल में टाईब्रेक जीता आर प्रज्ञानानंदा ने विन्सेंट कीमर को आर्मगेडन टाईब्रेक में हराकर दूसरा स्थान बरकरार रखा है। उन्होंने विन्सेंट कीमर के खिलाफ क्लासिकल मैच ड्रॉ होने के बाद आर्मगेडन टाईब्रेक में 17 चालों में जीत दर्ज की। इस जीत से वे 6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा 8.5 अंकों के साथ शीर्ष पर कायम हैं। दिव्या को मुजिचुक ने हराया, हम्पी आखिरी स्थान पर महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख को पहली बार आर्मगेडन में हार मिली। डिफेंडिंग चैंपियन अन्ना मुजिचुक ने उन्हें हराया। दिव्या 5.5 अंकों के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर हैं। वहीं कोनेरू हम्पी आखिरी स्थान पर बनी हुई हैं। ————————————————–

सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार ने दिल्ली में राहुल, सोनिया से बातचीत की; एजेंडे पर कैबिनेट ओवरहाल | भारत समाचार

People show their identity cards as they wait in a queue at a polling station to cast their votes during the Municipal Corporation elections, in Amritsar. (Source: PTI)

आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 10:01 IST सिद्धारमैया ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की क्योंकि कांग्रेस कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार बनाने की योजना बना रही है। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की. (स्रोत: पीटीआई) कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शीर्ष पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से नई दिल्ली में 10 जनपथ पर मुलाकात की। बैठक में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने भाग लिया, जिसमें राज्य में अगली सरकार के गठन पर चर्चा हुई। नेताओं के आज दिन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि विचार-विमर्श में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप देना, विधान परिषद में नियुक्तियां और नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले संभावित कैबिनेट फेरबदल शामिल है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट में निवर्तमान सिद्धारमैया सरकार के कई मंत्रियों को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर भी विचार कर रहा है। राज्यपाल ने सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया इस बीच, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, इसके एक दिन बाद। यह भी पढ़ें: सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार, कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, कांग्रेस में बदलाव की प्रक्रिया पूरी बेंगलुरु में लोक भवन से जारी एक आधिकारिक संचार में कहा गया है कि राज्यपाल ने सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहेंगे. आधिकारिक आदेश में कहा गया, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत मुझे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनकी अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहेंगे।” कांग्रेस आलाकमान के आदेश पर सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा दे दिया. पद छोड़ने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, निवर्तमान मुख्यमंत्री ने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए कांग्रेस नेतृत्व और कर्नाटक के लोगों को धन्यवाद दिया। यह भी पढ़ें: ‘हाईकमान ने पूछा, मैंने इस्तीफा दे दिया’: सिद्धारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया उन्होंने कहा, “मैं एक राजनेता हूं और मैंने समझा है कि संविधान हमारा धर्म है। मतदाता प्रशंसक हैं, भगवान हैं। मुझे कन्नड़ नाडु के 7 करोड़ लोगों से बात करने का अवसर मिला। मुझे दो बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रति बहुत आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने यह अवसर प्रदान किया।” अनुभवी कांग्रेस नेता ने यह भी रेखांकित किया कि पार्टी को स्वतंत्र विधायकों के समर्थन से विधानसभा में आरामदायक बहुमत प्राप्त है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी ने 135+1 सीटें जीती हैं। इसके अलावा, दो निर्दलीय विधायकों ने भी हमारी सरकार को समर्थन दिया है। हम पूर्ण बहुमत में हैं।” इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘कावेरी’ में एक महत्वपूर्ण नाश्ते की बैठक हुई, जहाँ डीके शिवकुमार को सिद्धारमैया के पैर छूते और उन्हें सम्मानपूर्वक गले लगाते देखा गया, यह इशारा कई लोगों ने कर्नाटक में एक प्रतीकात्मक नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा। यह भी पढ़ें: सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार फिर दिल्ली पहुंचे: कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन में आगे क्या है? जब से कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाई है, राजनीतिक गलियारों में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच संभावित मुख्यमंत्री पद की व्यवस्था को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने कभी भी सार्वजनिक रूप से किसी भी सत्ता-साझाकरण समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन “2.5-वर्षीय सीएम फॉर्मूले” की अफवाहें बार-बार सामने आई हैं, खासकर दिल्ली में कर्नाटक के नेताओं और कांग्रेस आलाकमान के बीच प्रमुख बैठकों के दौरान। एएनआई से इनपुट के साथ चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार ने दिल्ली में राहुल, सोनिया से बातचीत की; एजेंडे में कैबिनेट ओवरहाल अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)कर्नाटक की राजनीति(टी)डीके शिवकुमार कैबिनेट(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)कर्नाटक के मुख्यमंत्री(टी)राहुल गांधी से मुलाकात(टी)सोनिया गांधी की भूमिका(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे

जेफ बेजोस की कंपनी का रॉकेट लॉन्चपैड पर फटा:आग का बड़ा गोला बनते देखा गया; बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, फिर कोशिश करेंगे

जेफ बेजोस की कंपनी का रॉकेट लॉन्चपैड पर फटा:आग का बड़ा गोला बनते देखा गया; बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, फिर कोशिश करेंगे

अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ का न्यू ग्लेन रॉकेट फ्लोरिडा में टेस्ट के दौरान लॉन्च पैड पर फट गया। फुटेज में रॉकेट के फटने से आग का एक बड़ा गोला बनते देखा गया। हॉटफायर टेस्ट के दौरान हादसा हुआ ब्लू ओरिजिन ने बताया कि फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में रात करीब 9:00 बजे हॉटफायर टेस्ट किया जा रहा था। इसी टेस्ट के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी आ गई और यह हादसा हो गया। यह टेस्ट आने वाले दिनों में होने वाले एक लॉन्च की तैयारी के सिलसिले में किया जा रहा था। हॉट फायर टेस्ट किसी रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने से पहले उसके इंजन की क्षमता जांचने की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया है। इसमें रॉकेट को लॉन्चपैड पर ही क्लैम्प्स की मदद से जमीन से कसकर बांध दिया जाता है। फिर तय समय के लिए उसके इंजनों को पूरी ताकत से चालू किया जाता है। जेफ बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, दोबारा कोशिश भरेंगे ब्लू ओरिजिन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि हादसे में सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हम हादसे की वजह का पता लगाने में जुट गए हैं। आज का दिन बेहद कठिन रहा, लेकिन जिस भी चीज को दोबारा बनाने की जरूरत होगी, हम उसे फिर से बनाएंगे और उड़ान पर वापस लौटेंगे। पब्लिक को कोई खतरा नहीं, जांच में जुटी अमेरिकी स्पेस फोर्स ब्रेवार्ड काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट के मुताबिक, लॉन्च पैड पर हुए इस विस्फोट से आम जनता को कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने जानकारी दी है कि इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स घटना स्थल पर मौजूद हैं। इसके साथ ही अधिकारी उपलब्ध डेटा का मूल्यांकन करने और इस अनोमली के सटीक कारण का पता लगाने के लिए ब्लू ओरिजिन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। नासा ने कहा- स्पेसफ्लाइट आसान नहीं, पूरी जांच का समर्थन करेंगे नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जारेड इसाकमैन ने कहा कि स्पेसफ्लाइट किसी को माफ नहीं करती है और नई हैवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता विकसित करना असाधारण रूप से कठिन काम है। हम इस अनोमली की पूरी जांच का समर्थन करने, आने वाले मिशनों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने और रॉकेट लॉन्चिंग पर वापस लौटने के लिए अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करेंगे। पिछले महीने भी ग्राउंडेड हुआ था नया रॉकेट ब्लू ओरिजिन के साथ पिछले कुछ समय में यह दूसरी बड़ी समस्या है। पिछले महीने ही फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक सैटेलाइट के असफल लॉन्च से जुड़े एक हादसे की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद कंपनी के ‘न्यू ग्लेन’ को ग्राउंडेड कर दिया गया था। नवंबर में बड़ी कामयाबी मिली थी इन हालिया मुश्किलों से पहले स्पेस कंपनी ने पिछले साल नवंबर में फ्लोरिडा से एक ‘न्यू ग्लेन’ रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। उस मिशन के दौरान कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर की सफल लैंडिंग कराने में कामयाबी हासिल की थी। ब्लू ओरिजिन ने करीब एक दशक का समय और अरबों डॉलर खर्च करके इस न्यू ग्लेन रॉकेट को तैयार किया है। यह 29 मंजिला ऊंची इमारत जितना बड़ा रॉकेट है, जिसके फर्स्ट स्टेज को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी यह रीयूजबेबल रॉकेट है। इसे इलॉन मस्क के फॉल्कन रॉकेट्स और शक्तिशाली स्टारशिप का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। मस्क के ‘स्टारलिंक’ को चुनौती देने की तैयारी थी दिलचस्प बात यह है कि इस घटना से ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार को ही ब्लू ओरिजिन ने घोषणा की थी कि वह न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए अमेजन के 48 ‘लियो’ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में भेजने की तैयारी कर रही है। अमेजन इन सैटेलाइट्स की मदद से दुनिया भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो सीधे तौर पर इलॉन मस्क के ‘स्टारलिंक’ नेटवर्क को टक्कर देगा। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस लॉन्चिंग की कोई तारीख तय नहीं की थी। रॉकेट विस्फोट का वीडियो सामने आने के बाद इलॉन मस्क ने X पर लिखा- “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट्स बनाना और उनका संचालन करना वाकई कठिन काम है।”

जेफ बेजोस की कंपनी का रॉकेट लॉन्चपैड पर ब्लास्ट:टेस्टिंग के दौरान हादसा; बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, फिर कोशिश करेंगे

जेफ बेजोस की कंपनी का रॉकेट लॉन्चपैड पर फटा:आग का बड़ा गोला बनते देखा गया; बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, फिर कोशिश करेंगे

अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट में टेस्ट के दौरान लॉन्च पैड पर ब्लास्ट हो गया। फुटेज में देखा जा सकता है कि धमाके के बाद रॉकेट आग के बड़े गोले में तब्दील हो गया। ब्लू ओरिजिन ने बताया कि फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में गुरुवार रात करीब 9:00 बजे हॉटफायर टेस्ट किया जा रहा था। इसी टेस्ट के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी आ गई और यह हादसा हो गया। यह टेस्ट आने वाले दिनों में होने वाले एक लॉन्चिंग की तैयारी के सिलसिले में किया जा रहा था। हॉट फायर टेस्ट किसी रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने से पहले उसके इंजन की क्षमता जांचने की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया है। इसमें रॉकेट को लॉन्चपैड पर ही क्लैम्प्स की मदद से जमीन से कसकर बांध दिया जाता है। फिर तय समय के लिए उसके इंजनों को पूरी ताकत से चालू किया जाता है। जेफ बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित, दोबारा कोशिश भरेंगे ब्लू ओरिजिन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि हादसे में सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हम हादसे की वजह का पता लगाने में जुट गए हैं। आज का दिन बेहद कठिन रहा, लेकिन जिस भी चीज को दोबारा बनाने की जरूरत होगी, हम उसे फिर से बनाएंगे और उड़ान पर वापस लौटेंगे। पब्लिक को कोई खतरा नहीं, जांच में जुटी अमेरिकी स्पेस फोर्स ब्रेवार्ड काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट के मुताबिक, लॉन्च पैड पर हुए इस विस्फोट से आम जनता को कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने जानकारी दी है कि इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स घटना स्थल पर मौजूद हैं। इसके साथ ही अधिकारी उपलब्ध डेटा का मूल्यांकन करने और घटना के सटीक कारण का पता लगाने के लिए ब्लू ओरिजिन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। नासा ने कहा- स्पेसफ्लाइट आसान नहीं, पूरी जांच का समर्थन करेंगे नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने कहा कि स्पेसफ्लाइट किसी को माफ नहीं करती। हैवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता विकसित करना असाधारण रूप से कठिन काम है। हम इस घटना की पूरी जांच का समर्थन करते हैं। आगामी मिशनों पर इसके प्रभावों का आकलन करने और रॉकेट लॉन्चिंग पर वापस लौटने के लिए अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करेंगे। पिछले महीने भी ग्राउंडेड हुआ था नया रॉकेट ब्लू ओरिजिन के साथ पिछले कुछ समय में यह दूसरी बड़ी समस्या है। पिछले महीने ही फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक सैटेलाइट की असफल लॉन्चिंग से जुड़े हादसे की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद कंपनी के न्यू ग्लेन को ग्राउंडेड कर दिया गया था। नवंबर में ब्लू ओरिजिन को बड़ी कामयाबी मिली थी पिछले साल नवंबर में ब्लू ओरिजिन ने फ्लोरिडा से एक ‘न्यू ग्लेन’ रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। उस मिशन के दौरान कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर की सफल लैंडिंग कराने में कामयाबी हासिल की थी। ब्लू ओरिजिन ने करीब 10 साल में अरबों डॉलर खर्च करके इस न्यू ग्लेन रॉकेट को तैयार किया है। यह रॉकेट 29 मंजिला ऊंची इमारत जितना बड़ा है, जिसके फर्स्ट स्टेज को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है यानी यह रीयूजेबल रॉकेट है। इसे इलॉन मस्क के फॉल्कन रॉकेट्स और शक्तिशाली स्टारशिप का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। मस्क के ‘स्टारलिंक’ को चुनौती देने की तैयारी थी दिलचस्प बात यह है कि इस घटना से ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार को ही ब्लू ओरिजिन ने घोषणा की थी कि हम न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए अमेजन के 48 ‘लियो’ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में भेजने की तैयारी कर रहे हैं। अमेजन इन सैटेलाइट्स की मदद से दुनिया भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो सीधे तौर पर इलॉन मस्क के ‘स्टारलिंक’ नेटवर्क को टक्कर देगा। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस लॉन्चिंग की कोई तारीख तय नहीं की थी। रॉकेट विस्फोट का वीडियो सामने आने के बाद इलॉन मस्क ने X पर लिखा- ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट्स बनाना और उनका ऑपरेशन करना वाकई कठिन काम है।’

ऑब्सेस के लिए पीटर ने खुद पर बड़ा दांव लगाया:एक्ट्रेस ईशा सिंह बोलीं- टैलेंट से पहले छोटे शहरों के कलाकारों की पहचान परखी जाती

ऑब्सेस के लिए पीटर ने खुद पर बड़ा दांव लगाया:एक्ट्रेस ईशा सिंह बोलीं- टैलेंट से पहले छोटे शहरों के कलाकारों की पहचान परखी जाती

टीवी एक्ट्रेस ईशा सिंह और अभिनेता-निर्देशक पीटर विल्सन की फिल्म ‘ऑब्सेस’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों ने अपने संघर्ष, छोटे शहरों से मुंबई तक के सफर और बिना किसी गॉडफादर के इंडस्ट्री में जगह बनाने की चुनौतियों पर खुलकर बात की। पीटर ने बताया कि फिल्म को बनाने के लिए उन्होंने अभिनय, निर्देशन और प्रोडक्शन की जिम्मेदारी एक साथ संभाली, जबकि ईशा ने कहा कि उन्होंने इस फिल्म के लिए कई जोखिम भरे स्टंट खुद किए। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: भोपाल और छोटे शहरों से मुंबई तक का सफर तय करके आज फिल्म ‘ऑब्सेस’ तक पहुंचने पर कैसा महसूस हो रहा है? जवाब/ईशा सिंह: अभी तक हम फिल्म की तैयारियों में इतने व्यस्त थे कि सफर के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला। लेकिन जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि हम बहुत दूर आ गए हैं। एक छोटे शहर से निकलकर यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। मैं ईश्वर की बहुत आभारी हूं। सवाल: पीटर, आपने इस फिल्म को डायरेक्ट भी किया है, प्रोड्यूस भी किया है और इसमें अभिनय भी किया है। यह कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/पीटर विल्सन: बहुत मुश्किल था। हमने पहले इस किरदार के लिए कई बड़े कलाकारों से बात की, लेकिन हमारे पास कोई बड़ा बैनर या इंडस्ट्री प्रोफाइल नहीं था। तब टीम ने कहा कि यह किरदार मुझे खुद निभाना चाहिए। मुझे इसके लिए 130-140 किलो तक वजन बढ़ाना पड़ा। एक डायरेक्टर के तौर पर मुझे तकनीकी और रचनात्मक दोनों पहलुओं पर ध्यान देना था। यह पूरी तरह जुनून और जिद का नतीजा है। सवाल: ईशा, जब आपको फिल्म का ऑफर मिला तो परिवार का क्या रिएक्शन था? जवाब/ईशा सिंह: यह मेरी दूसरी फिल्म है। इससे पहले मैंने ‘मिडिल क्लास लव’ की थी, जो एक रोमांटिक फिल्म थी। ‘ऑब्सेस’ पूरी तरह अलग है। जब मुझे कहानी सुनाई गई तो लगा कि यह कुछ नया और चुनौतीपूर्ण है। इसमें ग्लैमर कम और अभिनय की गुंजाइश ज्यादा थी। इसलिए मैंने तुरंत हां कह दी। सवाल: पीटर, आपने ईशा को इस किरदार के लिए क्यों चुना? जवाब/पीटर विल्सन: मुझे ऐसे कलाकार की तलाश थी जो किरदार के लिए पूरी तरह समर्पित हो। ईशा का थिएटर बैकग्राउंड और उनके काम के प्रति समर्पण मुझे पसंद आया। उन्होंने कहानी सुनते ही किरदार को समझ लिया था। मुझे भरोसा था कि वह इसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगी। सवाल: छोटे शहरों से आने वाले कलाकारों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? जवाब/ईशा सिंह: लोग अक्सर कहते हैं कि एक्टिंग कोई करियर नहीं है। खासकर लड़कियों को बहुत बातें सुननी पड़ती हैं। मुझे भी कहा गया कि यह बेवकूफी है। लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरा पूरा साथ दिया। अगर परिवार का भरोसा हो तो मुश्किल रास्ते भी आसान लगने लगते हैं। पीटर विल्सन: मैं पंजाब के एक छोटे से गांव से आता हूं। इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉडफादर नहीं था। कई बार लोगों ने मजाक उड़ाया और कहा कि फिल्म बनाकर दिखाओ, रिलीज करके दिखाओ। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरी टीम और साथियों ने मेरा पूरा साथ दिया। सवाल: क्या कभी रिजेक्शन या रिप्लेसमेंट का सामना करना पड़ा? जवाब/पीटर विल्सन: हां, कई बार ऐसा हुआ कि किसी प्रोजेक्ट में कास्ट होने के बाद भी मुझे रिप्लेस कर दिया गया। लेकिन इन अनुभवों ने मुझे और मजबूत बनाया। आज वही संघर्ष मेरी ताकत बन गया है। सवाल: आप दोनों के लिए ‘ऑब्सेशन’ का मतलब क्या है? जवाब/ईशा सिंह: मैं अपने काम को लेकर ऑब्सेस्ड हूं। मेरा मानना है कि मेहनत करते रहो और बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दो। समय हर सवाल का जवाब देता है। पीटर विल्सन: मैं फिल्मों को लेकर ऑब्सेस्ड हूं। हमेशा सपना था कि अपनी फिल्म बनाऊं और अपनी कंपनी शुरू करूं। उसी जुनून ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। सवाल: क्या कभी किसी फैन की दीवानगी डरावनी लगी? जवाब/ईशा सिंह: हां, एक फैन मेरी हर गतिविधि पर नजर रखता था। उसे पता होता था कि मैं कहां हूं और क्या कर रही हूं। बाद में उसने धमकियां देना शुरू कर दीं। हमें उसकी शिकायत करनी पड़ी। वह अनुभव काफी डरावना था। सवाल: फिल्म की शूटिंग के दौरान कोई यादगार या जोखिम भरा अनुभव? जवाब/ईशा सिंह: फिल्म में मैंने खुद ड्राइविंग और कई स्टंट किए हैं। एक बार शूटिंग के दौरान कार का बैलेंस बिगड़ गया था और बड़ा हादसा होते-होते बचा। उस समय मैं बहुत डर गई थी। पीटर विल्सन: हमने ज्यादातर स्टंट्स रियल लोकेशन्स पर शूट किए हैं। कई बार टीम और उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी खतरे पैदा हुए, लेकिन सौभाग्य से सब सुरक्षित रहा। सवाल: इंडस्ट्री से किस तरह का सपोर्ट मिला? जवाब/ईशा सिंह: मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मेरे आसपास बहुत अच्छे लोग हैं। मेरे दोस्तों और सहकर्मियों ने ट्रेलर देखकर काफी सराहना की। यह सपोर्ट मेरे लिए बहुत मायने रखता है। सवाल: फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगी? जवाब/ईशा सिंह: मेरे फैंस ने हमेशा मेरा साथ दिया है। वे मेरे लिए पोस्टर बनाते हैं, ट्रेंड चलाते हैं और हर मुश्किल समय में मेरे साथ खड़े रहते हैं। मैं दिल से उनका धन्यवाद करती हूं और उम्मीद करती हूं कि उन्हें ‘ऑब्सेस’ पसंद आएगी। सवाल: दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब/पीटर विल्सन: ‘ऑब्सेस’ एक इंडिपेंडेंट फिल्म है, जिसे हमने पूरी मेहनत और ईमानदारी से बनाया है। यह एक अलग तरह का, रियलिस्टिक और एक्सपेरिमेंटल सिनेमा है। मैं चाहूंगा कि दर्शक इसे देखें और अपना प्यार दें।