लाल फूल का सुपर ड्रिंक, गर्मी में शरीर के लिए AC, पेट के लिए वरदान, दिल-लिवर भी रहेंगे दुरुस्त!

Last Updated:April 08, 2026, 19:49 IST Summer Health Tips: गर्मी के मौसम में गुड़हल का शरबत एक बेहतरीन नेचुरल कूलिंग ड्रिंक माना जा रहा है. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ हाइड्रेट रखने में मदद करता है. पाचन तंत्र मजबूत होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, लिवर भी स्वस्थ बना रहता है, जानें इसकी रेसिपी… Gudhal Sharbat Recipe: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. आमतौर पर लोग नींबू पानी, शर्बत या ग्लूकोज का सेवन करते हैं, लेकिन इन सबके बीच गुड़हल के फूलों का शरबत सेहतमंद विकल्प बनकर उभर रहा है. यह पारंपरिक पेय न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देता है. आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम समस्या है. ऐसे में गुड़हल के फूलों का शरबत नियमित रूप से पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. यह थकान को दूर करता है और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. गुड़हल का शरबत केवल ठंडक ही नहीं देता, बल्कि यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है. ऐसे बनता है ये शरबतगुड़हल का शरबत बेचने वाले प्रमोद कुशवाहा ने बताया, एक कप गुड़हल के फूल, स्वादानुसार चीनी पाउडर, 2-3 चम्मच नींबू का रस, 4-5 कप पानी, बर्फ के टुकड़े और पुदीने के पत्तों की जरूरत होती है. सबसे पहले एक पैन में पानी गर्म करें और उसमें गुड़हल के फूल व पुदीना डालकर करीब 10 मिनट तक उबालें. इसके बाद मिश्रण को ठंडा कर छान लें. फिर इसमें चीनी और नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह घोलें. अंत में बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. शरबत पीने के इतने फायदेडॉ. विपिन सिंह ने बताया, आयुर्वेद में गुड़हल को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है. इसके फूल, पत्ते और जड़ें कई रोगों के उपचार में उपयोगी होती हैं. यह विशेष रूप से पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है और त्वचा, बाल, हृदय व पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. गुड़हल के फूलों का उपयोग बालों के लिए भी फायदेमंद है. इसका पेस्ट या तेल लगाने से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं, डैंड्रफ कम होता है और समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या में भी राहत मिलती है. गुड़हल की चाय भी कमाल!गुड़हल की चाय उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने, पाचन संबंधी समस्याओं जैसे गैस, अपच और कब्ज से राहत दिलाने में भी सहायक मानी जाती है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और गले की खराश, खांसी व फ्लू जैसी समस्याओं में भी लाभ पहुंचाता है. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 08, 2026, 19:49 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
आपके चेहरे पर भी लालपन? गोरेपन की चाह में खराब हो रही किडनी, कानपुर में ये कैसी आफत

कानपुर. खूबसूरत और गोरा दिखने की चाहत में महिलाएं तरह-तरह की क्रीम का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यही क्रीम धीरे-धीरे उनकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से ज्यादा ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी त्वचा खराब होने के पीछे स्टेरॉयड और हेवी मेटल वाली क्रीम का इस्तेमाल सामने आ रहा है. त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी शिवहरे के मुताबिक, शुरुआत में ये क्रीम चेहरे को साफ और चमकदार जरूर बना देती हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इसके गंभीर साइड इफेक्ट सामने आते हैं. अंदर से नुकसान डॉक्टरों के अनुसार, बाजार में मिलने वाली कई फेयरनेस क्रीम में स्टेरॉयड, पारा (Mercury), सीसा (Lead) जैसे हेवी मेटल्स मिले होते हैं. ये तत्व त्वचा की ऊपरी परत को पतला कर देते हैं. इससे शुरुआत में चेहरा गोरा और चमकदार दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे त्वचा कमजोर हो जाती है. मरीजों में लालपन, जलन, मुंहासे, दाग-धब्बे और चेहरे पर छोटे-छोटे बाल उगने जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. कई मामलों में त्वचा इतनी संवेदनशील हो जाती है कि हल्की धूप में भी जलन होने लगती है. कैसे खराब होगी किडनी डॉ. शिवहरे कहते हैं कि इन क्रीम का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं है. लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इनमें मौजूद केमिकल शरीर के अंदर जाकर किडनी और लीवर को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ऐसे केस भी सामने आए हैं, जहां मरीजों को किडनी और लीवर से जुड़ी बीमारियों की शिकायत हुईं. खासकर पारा (Mercury) जैसे तत्व शरीर में जमा होकर धीरे-धीरे अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. इनसे बचे कैसे डॉ. डीपी शिवहरे कहते हैं कि किसी भी क्रीम को बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर क्रीम लगाने के बाद त्वचा में जलन, लालपन या खुजली हो, तो तुरंत उसका इस्तेमाल बंद कर दें. बचाव के लिए कुछ आसान उपाय अपनाएं जा सकते हैं. बहुत ज्यादा “इंस्टेंट फेयरनेस” का दावा करने वाली क्रीम से बचें. प्राकृतिक उपाय जैसे एलोवेरा, हल्दी और संतुलित आहार अपनाए. धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. खूब पानी पिएं और हेल्दी लाइफस्टाइल रखें. ये चाहत गलत नहीं लेकिन… डॉ. शिवहरे का कहना है कि सुंदर दिखने की चाहत गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए गलत और खतरनाक उत्पादों का इस्तेमाल करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. अपनी त्वचा के साथ प्रयोग करने से बचें और किसी भी समस्या में विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती छीन सकती है, बल्कि शरीर के अंदरूनी अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
बंगाली एक्टर की मौत पर सौरव गांगुली का बयान:बोले- वे पानी में गए ही क्यों; एक्ट्रेस बोलीं- आप AC में रहते हो, मजबूरी नहीं समझोगे

बंगाली एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की मौत के मामले में पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली का एक बयान विवादों में आ गया है। दरअसल राहुल की मौत ओडिशा में शूटिंग के दौरान पानी में डूबने से हुई थी, जिस पर सौरव ने सवाल उठाया था कि वे पानी में गए ही क्यों। इस पर एक्ट्रेस स्वस्तिका मुखर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। स्वस्तिका ने कहा कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते सौरव गांगुली को पता होना चाहिए कि वे क्या बोल रहे हैं। सौरव गांगुली ने क्या कहा था? कुछ दिन पहले जब सौरव गांगुली से राहुल की मौत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे ‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया। लेकिन उन्होंने आगे यह भी जोड़ दिया, “मुझे समझ नहीं आता कि शूटिंग के लिए भी वह पानी में क्यों गए?” सौरव के इसी ‘क्यों’ वाले सवाल पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एक्ट्रेस बोलीं- आपको जमीन की हकीकत नहीं पता’ स्वस्तिका मुखर्जी ने एक इंटरव्यू में सौरव को जवाब देते हुए कहा, सौरव गांगुली अपना नॉन-फिक्शन शो AC फ्लोर पर शूट करते हैं। उन्हें वो सब कुछ मिल जाता है जिसकी उन्हें जरूरत होती है क्योंकि वो सौरव गांगुली हैं। उन्हें नहीं पता कि जमीन पर असल में शूटिंग कैसे होती है। स्वस्तिका ने आगे कहा कि अगर राहुल पानी में नहीं जाते, तो मेकर्स उनकी जगह किसी और को ले आते। काम की मजबूरी और रिस्क सबको समझ नहीं आता। मजबूरी में करना पड़ता है रिस्क वाला काम स्वस्तिका ने सौरव के लहजे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आप किसी के काम पर इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो आप उसके काम को छोटा दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, हर कोई सौरव गांगुली नहीं होता जिसे सारी सुविधाएं मिलें। एक आम एक्टर के लिए उसका काम ही उसकी कमाई का जरिया है। अगर वह मना करेगा तो उसका करियर खत्म हो सकता है। किसी की मौत पर ऐसे सवाल उठाना संवेदनहीनता है। कैसे हुई थी राहुल बनर्जी की मौत? यह हादसा 29 मार्च को ओडिशा में हुआ था। राहुल वहां अपने बंगाली शो ‘भोलेबाबा पार करेगा’ की शूटिंग कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सीन के दौरान राहुल और उनकी को-एक्ट्रेस श्वेता मिश्रा घुटने तक पानी में खड़े थे। अचानक उनका पैर फिसला और वे पास ही बने एक गहरे गड्ढे में चले गए। दोनों को तुरंत दीघा के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने राहुल को मृत घोषित कर दिया। श्वेता की जान बच गई, लेकिन राहुल को नहीं बचाया जा सका। बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में हड़ताल राहुल की मौत ने फिल्म सेट पर सुरक्षा के इंतजामों की पोल खोल दी है। इसके विरोध में और बेहतर सुरक्षा नियमों की मांग को लेकर बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री ने 7 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कलाकारों और टेक्नीशियंस का कहना है कि जब तक सेट पर सुरक्षा के कड़े मानकतय नहीं किए जाते, तब तक काम बंद रहेगा।
गर्भावस्था में क्या न खाएं… प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए पूरी गाइड, वरना करवानी पड़ सकती है अनचाही डिलीवरी!

Last Updated:April 08, 2026, 18:31 IST गर्भावस्था के दौरान मां के खान-पान का सीधा असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है. इस समय सही और सुरक्षित आहार लेना बहुत जरूरी है. गलत भोजन से संक्रमण, जन्मजात समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं. इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि प्रेग्नेंट महिलाएं किन चीज़ों से बचें और सुरक्षित खान-पान अपनाएं. गर्भावस्था का समय महिलाओं के जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण होता है. इस दौरान मां के खान-पान का सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर पड़ता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि वे क्या खाती हैं और क्या नहीं. कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो बच्चे और मां दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. कच्चा या अधपका खाना: गर्भावस्था में कच्चा या अधपका मांस, अंडा और समुद्री भोजन खाने से बचना चाहिए. इनमें बैक्टीरिया या परजीवी हो सकते हैं, जो मां और बच्चे दोनों को संक्रमण दे सकते हैं. विशेष रूप से लिस्टेरिया और साल्मोनेला संक्रमण गर्भ में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं. ज्यादा कैफीन और कोला ड्रिंक्स: चाय, कॉफी और कोला जैसी कैफीन युक्त चीजें गर्भावस्था में बहुत अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए. अत्यधिक कैफीन के सेवन से गर्भ में बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है और यह समय से पहले जन्म का जोखिम भी बढ़ा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google अल्कोहल और धूम्रपान: गर्भावस्था में शराब और सिगरेट का सेवन पूरी तरह से मना है. शराब से भ्रूण में विकास संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे हृदय की कमजोरियों या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं. धूम्रपान से बच्चा कम वजन का हो सकता है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है. असुरक्षित डेयरी उत्पाद: पाश्चुरीकृत न किए गए दूध, क्रीम और पनीर जैसी चीजें खाने से बचें. इनमें बैक्टीरिया होने की संभावना होती है जो गर्भावस्था में संक्रमण पैदा कर सकते हैं. हमेशा पाश्चुरीकृत और अच्छी क्वालिटी वाले डेयरी उत्पाद ही लें. अधिक तैलीय और जंक फूड: तली-भुनी चीजें, फास्ट फूड और अत्यधिक मसालेदार भोजन गर्भावस्था में सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं. यह खाने से पेट की समस्याएं, एसिडिटी और मोटापे की समस्या बढ़ सकती है. ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड शुगर: शुगर की अधिक मात्रा गर्भावस्था में डायबिटीज या बच्चे का असामान्य वजन बढ़ने का कारण बन सकती है. मिठाई और पैकेज्ड फूड सीमित मात्रा में ही खाएं. कुछ विशेष फल और जड़ी-बूटियां: कुछ जड़ी-बूटियां और खट्टे फल जैसे पपीता (कच्चा), अनार के बीज या लस्सी में अत्यधिक मसाले गर्भ में बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना हर्बल सप्लीमेंट्स न लें. गर्भावस्था में संतुलित और पोषक आहार का सेवन करना बहुत जरूरी है. कच्चा खाना, अल्कोहल, जंक फूड और अत्यधिक कैफीन से बचना चाहिए. हमेशा ताजा, साफ और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें. यह ध्यान रखने से माँ और बच्चे दोनों स्वस्थ रहेंगे और गर्भावस्था की कठिनाइयां कम होंगी. First Published : April 08, 2026, 18:31 IST
Healthy Body Signs: शरीर में दिख रहे ये 10 संकेत, तो इसका मतलब आप पूरी तरह स्वस्थ हैं

Last Updated:April 08, 2026, 18:07 IST Healthy Body Sign: जब हमारी सेहत बिगड़ती है या शरीर के कोई अंग ठीक से काम करना बंद कर देते हैं, तो कुछ चेतावनी के संकेत दिखाई देते हैं. ऐसे ही जब आपका शरीर ठीक तरह से काम कर रहा होता है, तो इससे संबंधित भी संकेत नजर आते हैं. यहां हम आपको ऐसे ही 10 संकेतों के बारे में बता रहे हैं, जो यह बताता हैं कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं. अगर हमारी सेहत खराब हो रही हो या शरीर के किसी अंग में कोई दिक्कत हो तो कुछ तरह के चेतावनी संकेत नजर आते हैं. सिरदर्द, वजन कम या ज्यादा होना, मुंहासे, पेट फूलना, पेट दर्द, नाक बहना जैसी कुछ लक्षणों से हम शरीर की सेहत का अंदाजा लगाते हैं. लेकिन, यह जानना भी जरूरी है कि जब हम पूरी तरह स्वस्थ हैं, तब भी शरीर कुछ संकेत देता है. इनमें से कुछ संकेत थोड़े अजीब लग सकते हैं, लेकिन ये अच्छे स्वास्थ्य का संकेत होते हैं. पॉपुलर गट एक्सपर्ट डॉक्टर सेठी ने बताया कि शरीर के स्वस्थ होने के 10 अजीब संकेत कौन-कौन से हैं. उन्होंने ये संकेत अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किए हैं. आइए जानते हैं वे कौन से संकेत हैं. नाक बहना कई लोगों को परेशान करता है. लेकिन अगर ठंडे मौसम में बार-बार नाक बहती है तो इसका मतलब है कि आप स्वस्थ हैं. ठंडी हवा जब फेफड़ों में जाती है तो शरीर उसे गर्म और नम बनाने के लिए म्यूकस बनाता है. यह एक हेल्दी और प्रोटेक्टिव रिएक्शन है. इस प्रक्रिया में नाक बहना आम बात है. कई बार जब हम कोई काम कर रहे होते हैं, तो अचानक कान से मैल बाहर आ जाता है. यह चिपचिपा सा दिखने वाला मैल देखकर लोग असहज महसूस करते हैं. लेकिन यह एक स्वस्थ शरीर का संकेत है. यह धूल, बैक्टीरिया और अन्य कणों को रोककर कान की सुरक्षा करता है. यह गंदगी नहीं है, बल्कि कान के लिए एक सुरक्षा कवच है. कान के अंदर की गंदगी को साफ करने के लिए अलग से मेहनत करने की जरूरत नहीं है. Add News18 as Preferred Source on Google पेशाब का रंग हमारे स्वास्थ्य के बारे में कई राज खोलता है. अगर इसका रंग हल्का पीला है तो इसका मतलब है कि शरीर में पानी की मात्रा सही है और किडनी ठीक से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर कर रही हैं. लेकिन अगर पेशाब का रंग नारंगी, लाल, नीला, हरा या गहरा भूरा हो जाए तो सतर्क हो जाएं और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. खाना खाने के बाद डकार आना एक आम बात है. खासतौर पर, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीने के बाद बहुत से लोगों को बार-बार डकार आती है. इसके लिए शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है. यह याद रखना चाहिए कि यह प्रक्रिया पेट में जमा अतिरिक्त गैस को बाहर निकालकर पेट की गैस और भारीपन को कम करने में मदद करती है. पेट में गड़बड़ी होना, आंतों में मरोड़ जैसा महसूस होना थोड़ी परेशानी जरूर देता है. लेकिन यह अच्छी सेहत का संकेत भी हो सकता है. आंतें सक्रिय रूप से काम करते हुए खाना और गैस को बाहर निकालने की प्रक्रिया में यह समस्या हो सकती है. इसे लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है. कभी-कभी, जब त्वचा को चुटकी से दबाया जाता है, तो वह तुरंत अपनी मूल स्थिति में लौट आती है. ‘त्वचा की लोच’ इस बात का एक अच्छा संकेत है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा है. यह दर्शाता है कि शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी (हाइड्रेशन) मौजूद है और त्वचा की लोच स्वस्थ है. थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है. गैस पास करना एक स्वस्थ पाचन तंत्र की निशानी है. गैस तब निकलती है जब पाचन तंत्र के अंदर मौजूद बैक्टीरिया भोजन को तोड़ते हैं. यह एक बहुत ही आम बात है. इसके अलावा, यह इस बात का संकेत है कि आपका पाचन तंत्र पूरी तरह से काम कर रहा है. अगर आपसे गलती से गैस निकल जाती है—चाहे झुकते समय हो या सोते समय—तो आपको शर्मिंदा महसूस नहीं करना चाहिए. इसके बजाय, आपको इसे एक ऐसे ज़ोरदार संकेत के तौर पर देखना चाहिए जो यह बताता है कि आपका पाचन तंत्र खुश और स्वस्थ है. नियमित और लगातार मल त्याग होना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है. यह दर्शाता है कि आपका पाचन तंत्र अपनी 100% क्षमता पर काम कर रहा है. दिन में तीन बार से लेकर हफ़्ते में तीन बार तक मल त्याग होना आम बात है; यह एक स्वस्थ पाचन तंत्र की मौजूदगी को दर्शाता है. स्वस्थ मसूड़े होना अच्छी सेहत की निशानी है. खास तौर पर, दांत ब्रश करते समय आपके मसूड़ों से खून नहीं आना चाहिए. अगर खून आता है, तो यह सूजन या मुंह की ठीक से सफाई न होने का संकेत हो सकता है. मसूड़ों से खून आना शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का लक्षण भी हो सकता है. हर दिन ब्रश करते समय, एक पल निकालकर अपने मसूड़ों को ध्यान से देखें. पसीना आना इस बात का अच्छा संकेत है कि शरीर पसीना बहा रहा है. खासकर, व्यायाम या शारीरिक गतिविधि के दौरान पसीना आना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है. पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होता है. First Published : April 08, 2026, 18:02 IST
अमृतसर के हरिमंदिर साहिब पहुंचे ईरानी प्रतिनिधि:दिल्ली में खामेनेई की याद में आयोजित कार्यक्रम के लिए SGPCअध्यक्ष व जत्थेदार को दिया निमंत्रण, अमेरिका को 11वें दिन हमले की चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि के उप-प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियायेनिया आज सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे और नतमस्तक हुए। इस मौके पर उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के अधिकारियों से मुलाकात की और SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी तथा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को दिल्ली में होने वाले विशेष कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। डॉ. जियायेनिया ने बताया कि 12 अप्रैल को दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में ईरान के आयतुल्लाह सैय्यद अली हुसैन खामेनेई की शहादत के 40वें दिन उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिख धर्म और इस्लाम में ‘शहादत’ का महत्व अत्यंत गहरा है और दोनों धर्म मानते हैं कि शहीद हमेशा अमर रहता है। डॉ. जियायेनिया ने पंजाब विधानसभा द्वारा ईरान के समर्थन में पास किए गए प्रस्ताव की सराहना की और भारत-ईरान के 5,000 साल पुराने संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ईरान स्थायी शांति चाहता है, लेकिन पिछले वर्षों में हुए हमलों में उसके मासूम बच्चों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया। अमेरिका को 10 दिन की चेतावनी उन्होंने अमेरिका के दावों पर हमला करते हुए कहा कि जो व्यक्ति दिन में ईरान को नक्शे से मिटाने की बातें करता है, वह रात में युद्ध रोकने की भीख मांगता है। डॉ. जियायेनिया ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका को अपनी 10 शर्तों को मानने के लिए 10 दिन की मोहलत दी है। यदि 10 दिनों के भीतर शर्तें नहीं मानी गईं और नुकसान की भरपाई नहीं हुई, तो ईरान 11वें दिन अमेरिका और इजराइल पर पहले से 100 गुना अधिक मिसाइलों से हमला करेगा।
अचानक मुंह में मक्खी या मच्छर चले जाने पर घबराएं नहीं, जानिये एक्सपर्ट की सलाह

अक्सर टहलते समय, बात करते हुए या गाड़ी चलाते हुए अचानक मच्छर या मक्खी मुंह में चली जाती है. यह स्थिति डराने वाली हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छोटे कीड़े गलती से निगल लेना आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता, क्योंकि हमारा पाचन तंत्र उन्हें संभाल सकता है. 1) तुरंत क्या करें शांत रहें: घबराने से खांसी या उल्टी जैसा रिफ्लेक्स बढ़ सकता है.मुंह खोलकर थूक दें: अगर कीड़ा अभी मुंह में है तो तुरंत बाहर थूकें.पानी से कुल्ला करें: सादा पानी या हल्का नमक‑पानी गले की जलन कम करता है.धीरे‑धीरे पानी पिएं: इससे गले में अटकन का एहसास कम होता है. 2) क्या यह खतरनाक हो सकता है? सामान्य मक्खी/मच्छर: अधिकतर मामलों में सुरक्षित. पेट का एसिड कीड़ों को नष्ट कर देता है.बीमारी का खतरा: मच्छर‑जनित बीमारियां काटने से फैलती हैं, निगलने से नहीं.अपवाद: अगर मधुमक्खी/ततैया जैसे डंक मारने वाले कीड़े अंदर चले जाएं, तो गले में सूजन हो सकती है, यह स्थिति गंभीर हो सकती है. 3) किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं सांस लेने में दिक्कतहोंठ, जीभ या गले में तेज सूजनलगातार उल्टी, चक्कर या बेहोशीत्वचा पर पित्ती/एलर्जी के लक्षणये संकेत एलर्जिक रिएक्शन (एनाफिलैक्सिस) के हो सकते हैं और तुरंत इलाज ज़रूरी है. 4) एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं उल्टी कराने की कोशिश न करें, इससे जलन बढ़ सकती है.अगर खांसी से बाहर न आए और सांस में रुकावट लगे, तो इमरजेंसी मदद लें.अस्थमा या एलर्जी वाले लोग विशेष सावधानी रखें. 5) भविष्य में कैसे बचें बाहर खाते‑पीते समय गिलास ढकेंसाइक्लिंग/जॉगिंग के दौरान मुंह बंद रखेंमच्छर‑रोधी उपाय अपनाएं अचानक मच्छर या मक्खी मुंह में चले जाना एक आम घटना है और ज़्यादातर मामलों में हानिरहित ही है. सही कदम उठाएं, लक्षणों पर नज़र रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सक की सहायता लें.
गर्मियों में Cold Drink नहीं, गर्म चाय देती है लंबी ठंडक! जानें कैसे काम करता है ये अनोखा फॉर्मूला

Hot Tea In Summer: गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले हमारी लाइफस्टाइल बदल जाती है. ठंडा पानी, जूस और कोल्ड ड्रिंक्स अचानक हमारी पहली पसंद बन जाते हैं, और चाय जैसे गर्म पेय से लोग दूरी बनाने लगते हैं. अक्सर ये माना जाता है कि चाय पीने से शरीर और ज्यादा गर्म हो जाता है, इसलिए इसे गर्मियों में कम पीना चाहिए, लेकिन अगर आप चाय के शौकीन हैं और हर मौसम में “एक कप चाय” के बिना दिन अधूरा लगता है, तो आपके लिए एक दिलचस्प बात है. क्या हो अगर हम कहें कि गर्मियों में चाय पीना आपको ठंडक भी दे सकता है? सुनने में ये थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे एकदम साफ साइंस काम करता है. शरीर का अपना एक कूलिंग सिस्टम होता है, जो सही तरीके से एक्टिव हो जाए तो गर्मी में भी राहत मिल सकती है. इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि गर्म चाय पीने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, कब ये फायदा देती है और किन हालात में इससे बचना बेहतर है. क्या कहता है साइंस? समझें आसान भाषा मेंजब आप गर्म चाय पीते हैं, तो आपके शरीर का अंदरूनी तापमान थोड़ा बढ़ता है. जैसे ही ऐसा होता है, शरीर तुरंत रिएक्ट करता है और खुद को ठंडा करने की कोशिश शुरू कर देता है. इस प्रोसेस में सबसे बड़ा रोल होता है पसीने का. शरीर ज्यादा पसीना निकालता है, और जब ये पसीना स्किन से सूखता है, तो वह गर्मी को अपने साथ ले जाता है. यही वजह है कि कुछ समय बाद आपको ठंडक महसूस होती है. यानी सीधी बात ये है कि गर्म चाय शरीर के नैचुरल कूलिंग सिस्टम को एक्टिव कर देती है. अदरक और इलायची वाली चाय क्यों होती है खासभारतीय चाय सिर्फ चाय पत्ती तक सीमित नहीं होती. इसमें अदरक, इलायची और कई बार काली मिर्च भी डाली जाती है. अदरक पेट को आराम देता है और डाइजेशन को बेहतर बनाता है. गर्मियों में जब खाने-पीने से जुड़ी दिक्कतें बढ़ती हैं, तब ये काफी मददगार होता है. इलायची बॉडी को हल्का महसूस कराती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है. यानी मसाला चाय सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि शरीर को अंदर से संतुलित रखने में भी काम आती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हर जगह काम नहीं करती ये ट्रिकअब जरूरी बात ये है कि चाय से ठंडक मिलने वाला फॉर्मूला हर जगह काम नहीं करता, अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहां हवा सूखी होती है और पसीना जल्दी सूख जाता है, तो चाय पीना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अगर आप ऐसी जगह हैं जहां उमस ज्यादा है और पसीना सूखता नहीं, तो चाय पीने से उल्टा चिपचिपाहट और बेचैनी बढ़ सकती है. जिन लोगों को कम पसीना आता है, उनके लिए भी ये तरीका ज्यादा असरदार नहीं होता. चाय पीते समय इन बातों का रखें ध्यान-बहुत ज्यादा गर्म चाय न पिएं, इससे गले को नुकसान हो सकता है-चाय को जरूरत से ज्यादा न उबालें, वरना उसमें कड़वाहट और एसिडिटी बढ़ सकती है-दिन में सीमित मात्रा में ही चाय पिएं-अच्छी क्वालिटी की चाय पत्ती का इस्तेमाल करें चाय vs कोल्ड ड्रिंक -कौन बेहतर?कोल्ड ड्रिंक पीते ही शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है, लेकिन ये असर थोड़ी देर का होता है.वहीं चाय धीरे-धीरे शरीर के कूलिंग सिस्टम को एक्टिव करती है, जिससे लंबे समय तक राहत मिल सकती है. इसलिए तुरंत ठंडक के बजाय अगर आप लंबे समय की राहत चाहते हैं, तो चाय एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है.
फुटबॉल में इक्विटी, बास्केटबॉल में रेवेन्यू शेयरिंग से कमाई:महंगे खिलाड़ियों का बिजनेस मॉडल, कई खेलों में संन्यास के बाद भी सैलरी

खेल की दुनिया का एक सीधा सच है कि जो खिलाड़ी जितना मशहूर है, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा है। मौजूदा दौर में सुपरस्टार एथलीट्स सिर्फ अपनी टीमों के लिए खेलने वाले मोहरे नहीं रह गए हैं। वे खुद ग्लोबल ब्रांड हैं। यही वजह है कि लियोनेल मेसी या क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज करियर के ढलान पर होने के बावजूद दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एथलीट हैं। इन खिलाड़ियों को पैसे देने का बिजनेस मॉडल काफी अलग है। कहीं ‘डिफर्ड मनी’ (भविष्य में भुगतान) से टैक्स बचाया जा रहा है, तो कहीं ‘लेवरेज’ (दबाव) का इस्तेमाल कर खिलाडी मनचाही कीमत वसूल रहे हैं। फुटबॉल – मेसी को अमेरिकन क्लब इंटर मियामी में सैलरी के साथ हिस्सेदारी भी मिली 38 साल के लियोनेल मेसी जब यूरोप छोड़कर अमेरिकी लीग की टीम इंटर मियामी से जुड़े, तो उन्हें सिर्फ 800 करोड़ रुपए की सालाना सैलरी ही नहीं मिली, बल्कि क्लब में ‘इक्विटी’ (हिस्सेदारी) और लीग के ब्रॉडकास्ट पार्टनर के रेवेन्यू में से एक तय हिस्सा भी दिया गया। वहीं, रोनाल्डो सऊदी क्लब अल-नासर क्लब में सालाना 2000 करोड़ रुपए कमा रहे हैं। यह पैसा सऊदी के ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड’ से आता है। रोनाल्डो की स्टार पावर का इस्तेमाल कर सऊदी अरब अपनी छवि सुधारना चाहता है। बेसबॉल – शोहेई ओटानी के साथ ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल, क्लब की टैक्स बचाने की डील मेजर लीग बेसबॉल में कोई सैलरी कैप नहीं है, लेकिन एक तय सीमा से ज्यादा खर्च करने पर ‘लग्जरी टैक्स’ देना पड़ता है। जापानी सुपरस्टार शोहेई ओटानी ने लॉस एंजिलिस डोजर्स के साथ 10 साल के लिए करीब 6450 करोड़ रुपए का करार किया। ओटानी हर साल करीब 18.5 करोड़ रुपए की सैलरी लेंगे। बाकी के करीब 6300 करोड़ उन्हें उनके रिटायरमेंट के बाद (2034 से 2043 तक) किश्तों में दिए जाएंगे। इस ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल ने टीम को लग्जरी टैक्स से बचा लिया। एनएफएल व बास्केटबॉल – कमाई में हिस्सा और टीम पर दबाव बनाकर राशि बढ़वाना एनएफएल में डलास काउबॉयज के डैक प्रेस्कॉट (4 साल के लिए 2230 करोड़) सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। प्रेस्कॉट लीग के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने सही समय पर टीम पर दबाव बनाया। टीम के पास दूसरा विकल्प नहीं था, इसलिए उन्हें ऐतिहासिक डील देनी पड़ी। वहीं, एनबीए में रेवेन्यू खिलाड़ियों और मालिकों के बीच 50-50 बंटता है। 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले सुपरस्टार्स सैलरी कैप का 35% तक ले सकते हैं। इसलिए स्टीफन करी जैसे खिलाड़ी इस सीजन में करीब 550 करोड़ रुपए कमा रहे है। बॉक्सिंग – खिलाड़ी की मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू सबसे अहम बॉक्सिंग में मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू की ताकत है। मैक्सिकन बॉक्सर अल्वारेज को हाल ही में टेरेंस क्रॉफर्ड के खिलाफ हार मिली। इसके बावजूद, कैनेलो को इस फाइट के लिए करीब 910 करोड़ रुपए मिले। वहीं, विजेता क्रॉफर्ड को करीब 92 करोड़ राशि मिली। गोल्फ – सऊदी का नया टूर्नामेंट बना तगड़ी कमाई का आधार वर्ल्ड नंबर-1 स्कॉटी शेफलर ने 2024 व 2025 में हर साल करीब 280 करोड़ कमाए। दूसरी तरफ, जॉन रैम ने 2025 में एक भी टूर्नामेंट नहीं जीता लेकिन सऊदी फंडेड ‘LIV Golf’ में खेलने के कारण शुरुआती साइनिंग बोनस करीब 3 हजार करोड़ रुपए मिला।
लेटेंट विवाद पर समय रैना के बड़े खुलासे:कहा- कपिल शर्मा मेरे अगले एपिसोड में आने वाले थे; सुनील पाल, मुकेश खन्ना पर कसा तंज

स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना ने अपने नए यूट्यूब स्पेशल ‘समय रैना- स्टिल अलाइव’ के साथ वापसी की है। पिछले साल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो को लेकर हुए भारी विवाद के बाद यह उनका पहला बड़ा वीडियो है। मंगलवार को रिलीज हुए इस 1 घंटे 21 मिनट के स्पेशल में समय ने उन सभी सेलेब्स को जवाब दिया है जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनकी आलोचना की थी। साथ ही उन्होंने अपने फैंस को बताया कि वे जल्द ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 लेकर आ रहे हैं। समय ने लेटेंट विवाद को ‘क्रॉस फायर’ बताया है, जिसमें एक कश्मीरी होने के नाते वे बीच में फंस गए। मुकेश खन्ना और बी प्राक पर साधा निशाना विवाद के दौरान मुकेश खन्ना (शक्तिमान) और सिंगर बी प्राक ने समय की काफी आलोचना की थी। इस पर पलटवार करते हुए समय ने कहा, “शक्तिमान कह रहे थे कि ऐसे कंटेंट का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा। भाई, जब शक्तिमान आता था, तब हर दूसरे महीने खबर आती थी कि किसी बच्चे ने शक्तिमान समझकर छत से छलांग लगा दी। आपने तो बच्चे मारे हैं, आप क्या बोल रहे हो?” वहीं बी प्राक के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें किसी ने पॉडकास्ट पर बुलाया भी नहीं था, फिर भी वे बीच में कूद पड़े। सुनील पाल और कपिल शर्मा का जिक्र समय ने कॉमेडियन सुनील पाल पर भी तंज कसा। उन्होंने बताया कि सुनील पाल उन्हें टीवी पर कपिल शर्मा से सीखने की सलाह दे रहे थे, जबकि असलियत में कपिल समय के अगले एपिसोड में आने वाले थे। समय ने दावा किया कि कपिल उन्हें मैसेज करके शो की तारीफ करते थे और खुद को उनका बड़ा फैन बताते थे। समय ने कहा कि एक ‘साफ-सुथरा’ किरदार निभाना उनके लिए बनावटी है और वे अपनी डार्क कॉमेडी के अंदाज को नहीं छोड़ेंगे। रणवीर अल्लाहबादिया पर किया खुलासा समय रैना ने अपने स्पेशल में उस FIR पर खुलकर बात की जो यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया के एक कमेंट के कारण हुई थी। समय ने बताया कि उस विवादित एपिसोड में रणवीर ने एक कंटेस्टेंट के माता-पिता को लेकर अभद्र सवाल एक बार नहीं, बल्कि 8 बार पूछा था। समय ने मजाक में कहा, “मैंने एडिट के दौरान उन 8 में से 7 सवाल हटा दिए थे। मैंने तो अपनी तरफ से 99% कीटाणु मार दिए थे, पर एक परसेंट रह गए और विवाद हो गया।” उन्होंने रणवीर की ‘क्लीन इमेज’ पर तंज कसते हुए उन्हें ‘द मंक हू सोल्ड माई फेरारी’ कहा। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 आएगा वीडियो के आखिरी हिस्से में समय ने अपने फ्यूचर प्रोजेक्ट का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ खत्म हो गया है? समय ने कहा, “सीजन 1 इससे बेहतर हाई पॉइंट पर खत्म नहीं हो सकता था। लेकिन मैं सीजन 2 जरूर लाऊंगा क्योंकि मुझे वह काम करने में मजा आता है। अब मैं दुनिया में जब तक हूं, बस मजे करना चाहता हूं।” उन्होंने वादा किया कि अगला सीजन और भी ‘वाइल्ड’ होगा। क्या था 2025 का विवाद? साल 2025 में समय रैना का शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ अपनी डार्क कॉमेडी और अश्लील चुटकुलों के कारण विवादों में घिर गया था। शो में गेस्ट बनकर आए रणवीर अल्लाहबादिया ने एक कंटेस्टेंट के परिवार पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पुलिस में FIR दर्ज हुई। भारी दबाव और कानूनी कार्रवाई के चलते समय को वह एपिसोड डिलीट करना पड़ा था और माफी भी मांगनी पड़ी थी।







