चांदी ₹6,543 गिरकर ₹2.18 लाख पर आई:इस साल ₹12 हजार सस्ती हो चुकी, सोने के दाम में आज ₹1,907 की गिरावट

सोने-चांदी की कीमतों में 28 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 6,543 रुपए सस्ती होकर 2.18 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,907 रुपए गिरकर 1.43 लाख रुपए पर आ गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 12 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.18 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।
देश में 576 अरबपति, 5 साल में चार गुना बढ़े:सरकार को नहीं पता अरबपतियों के पास कितनी संपत्ति, दावा- बेरोजगारी और गरीबी घटी

देश में पिछले पांच साल में अरबपतियों की संख्या में चार गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है। साल 2021-22 में 142 अरबपति थे। 2025-26 में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 576 हो गई है। सरकार ने अरबपतियों की संख्या बताई है, लेकिन अलग-अलग अरबपतियों की कुल आय का ब्योरा नहीं दिया है। दौसा से कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीणा के सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि आयकर एक्ट में अरबपति शब्द की कोई वैधानिक परिभाषा नहीं है। लेकिन आयकर विवरण (ITR) में सालाना 100 करोड़ या इससे ज्यादा की आय दिखाने वालों का ब्योरा दिया है। सरकार के पास अरबपतियों की कुल संपत्ति का ब्योरा नहीं सरकार के पास अरबपतियों की कुल संपत्ति का ब्योरा नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार के पास करदाताओं की कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक या संकलित डेटा नहीं है। इसका कारण यह है कि संपत्ति कर अधिनियम, 1957 को एक अप्रैल 2016 से खत्म कर दिया गया। घरेलू खर्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर कम जवाब के अनुसार, घरेलू खर्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर कम हो रहा है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गिनी गुणांक (लोगों के बीच आय या धन की असमानता) 0.237 और शहरी क्षेत्रों के लिए 0.284 दर्ज किया गया है। यह 2022-23 के आंकड़ों से कम है, जो यह दिखाता है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम हो रहा है। 13.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के श्रम बाजार कोविड-पूर्व स्तर से बेहतर स्थिति में हैं। 15 साल और इससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% हो गई है। नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के निष्कर्ष बताते हैं कि साल 2015-16 और 2019-21 के बीच देश में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 24.85% से घटकर 14.96% रह गया है। इस अवधि में लगभग 13.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। असमानता कम करने के लिए ज्यादा आय वालों पर सरचार्ज लगाया वित्त राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि देश में असमानता कम करने और रोजगार सृजन के लिए सरकार ने कई मोर्चों पर सुधारात्मक कदम उठाए हैं। अत्यधिक आय वाले व्यक्तियों पर सामान्य टैक्स के अलावा सरचार्ज लगाया है।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
शहनाज गिल और जय रंधावा पहुंचे गोल्डन टेंपल:गुरु घर में नतमस्तक हुए; इश्कनामा की सफलता के लिए वाहेगुरु का किया शुकराना

पंजाबी फिल्म इश्कनामा की सफलता के बाद अभिनेता जय रंधावा और अभिनेत्री शहनाज गिल अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) में माथा टेकने पहुंचे। दोनों कलाकारों ने सोमवार रात अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी तस्वीरें साझा कीं। गुरु घर में नतमस्तक होकर उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए वाहेगुरु का शुकराना अदा किया। फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और दर्शकों से मिल रहे सकारात्मक रिस्पॉन्स के बाद दोनों कलाकार आशीर्वाद लेने अमृतसर पहुंचे। शहनाज गिल ने सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में सफेद सूट पहना हुआ है, सिर पर दुपट्टा ओढ़े वह हाथ जोड़कर श्रद्धा भाव में नजर आ रही हैं। वहीं, जय रंधावा जींस-टीशर्ट में फिल्म के रियल किरदार निम्मा के साथ गुरु घर में नतमस्तक दिखाई दिए। निम्मा और नसीमा की प्रेम कहानी फिल्म इश्कनामा 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर रहने वाले एक सिख युवक निम्मा और मुस्लिम युवती नसीमा की प्रेम कहानी को दिखाया गया है। कहानी में बताया गया है कि कैसे सीमाएं, धर्म और उस दौर के राजनीतिक हालात उनके रिश्ते के बीच बाधा बनने की कोशिश करते हैं। शूटिंग के दौरान घायल हुए थे जय रंधावा जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए थे। जनवरी में शूटिंग के समय एक जंप सीन फिल्माते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके कारण जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए। सिर दीवार से जोर से टकरा गया था इस हादसे में उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया था। घटना का 8 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया था, जबकि अस्पताल से उनकी एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें वह MRI करवाते नजर आए थे। हालांकि, रंधावा ने जल्द ही स्वस्थ होकर सेट पर वापसी की और फिल्म की शूटिंग पूरी की।
हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा एक और चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह चेहरा था हरियाणा के चरखी दादरी निवासी और एक्टर सुधीर सांगवान का। सुधीर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’, फिल्म ‘RAAKH’ और कई OTT प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके हैं। मामला लीगल सीरिज में SHO पेप्सू से उन्हें पहचान मिली। एक्टिंग के साथ-साथ वे इन दिनों CJP की संस्थापक कोर टीम के सदस्य भी हैं। चरखी दादरी के छोटे से गांव छप्पर से निकलकर सुधीर ने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। किसान परिवार से आने वाले सुधीर ने आर्थिक तंगी के दौर में मेडिकल स्टोर हेल्पर पर 200 रुपए के लिए नौकरी की। इसके बाद सिम कार्ड हॉकर, डीजे, ट्रांसपोर्ट कंपनी कर्मचारी और बैंकिंग सेक्टर में भी काम किया। दैनिक भास्कर ने सुधीर सांगवान से बातचीत कर उनके गांव से OTT तक के सफर और CJP से जुड़ने की पूरी कहानी जानी। बैंकों में काम करने से लेकर खुद के स्टार्टअप तक शुरू किए सुधीर सांगवान का जन्म 9 नवंबर 1988 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव के किसान परिवार में हुआ। शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बाद में राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़े। आर्थिक तंगी के कारण भिवानी के सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्पर बने, जहां रोजाना ₹200 मिलते थे। अतिरिक्त कमाई के लिए रात में डीजे बजाते और फोटोग्राफी भी करते थे। साल 2006 में ₹3,500 महीने की सैलरी पर ट्रांसपोर्ट कंपनी में असिस्टेंट बने। दो साल बाद एक विदेशी कार्गो कंपनी में सुपरवाइजर बने और 2010 तक काम किया। इसके बाद HDFC बैंक में कैशियर के रूप में बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा। 2016 में कोटक महिंद्रा बैंक में ब्रांच मैनेजर बने। इसी साल इक्विटस बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) बने, जहां उनकी सैलरी ₹1.24 लाख महीने तक पहुंच गई। नौकरी के साथ उन्होंने MoneyMind.com और LoanWon.com नाम से लोन सर्विस स्टार्टअप शुरू किए। 2019 में MyMistri.com लॉन्च किया, जिसे बाद में करीब ₹40 लाख में बेच दिया। इसके बाद ‘तुरंत डील’ नाम से प्रॉपर्टी स्टार्टअप और कोरोना काल में ZORKA Grocery शुरू की, लेकिन घाटे के कारण दोनों कारोबार बंद करने पड़े। 2019 में एक्टिंग लाइन में आए, हरियाणवी वेब सीरिज से शुरुआत सुधीर सांगवान बताते हैं कि 2019 में फिल्म निर्माता राहुल दहिया से मुलाकात के बाद एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई। पहला मौका हरियाणवी वेब सीरीज ‘विरोध’ में मिला। इसके बाद ‘मायाजाल’, ‘ब्याह के लड्डू’, ‘अखाड़ा’ और ‘स्कैम’ जैसी वेब सीरीज में अलग-अलग किरदार निभाए। मुंबई में 100 से ज्यादा ऑडिशन दिए। ज्यादातर काम उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन से मिला। नेटफ्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ में SHO जयवंत पेप्सू के रोल से देशभर में पहचान मिली। अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन अभियान में मनोज बाजपेयी के साथ भी नजर आए। उनकी फिल्म ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। अन्ना आंदोलन में शामिल हुए, CJP के मूवमेंट से जुड़े सुधीर ने बताया कि 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के लोकेश से हुई। बाद में दोनों ने स्टैंड विद नेचर नाम से एक NGO शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ शब्द की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए मूवमेंट से जुड़े। शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने CJP के अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए। उस दिन भीड़ को संभालने के लिए उन्होंने खुद आगे आकर व्यवस्था संभाली। प्रोटेस्ट के दौरान ये समझ नहीं आ रहा था कि वह बड़े स्पीकर को कहां रखें। भीड़ के बीच जब जगह नहीं मिली तो स्पीकर कंधे पर रखकर लोगों के बीच घूमता रहा। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। 15 जून को जयपुर और 20 जून को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में CJP के प्रमुख आशुतोष रानका ने मंच से उनका परिचय कराया। इसके बाद उन्हें CJP की संस्थापक कोर टीम का सदस्य बनाया गया। पूरे देश में टीम तैयार कर रही CJP सांगवान ने बताया कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार कर रहा है। शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में संगठन की इकाइयों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।
सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी
सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी
देश में जल्द चलेंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक-नोट:ट्रायल के लिए 200 करोड़ नोट छपेंगे; कागज के नोट भी चलेंगे

बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। यह प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल है, अगर यह सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी। पॉलिमर बैंकनोट के ट्रायल सफल होने के बाद RBI ₹10 और ₹20 दोनों वैल्यू के नोटों को रेगुलर तौर पर जारी करेगा। हालांकि कागज की मौजूदा करेंसी भी चलती रहेगी। इसे बंद नहीं किया जाएगा। 10 दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि RBI जल्द ही देश में पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने के RBI के प्लान का अगला कदम है। नए नोट के साथ पुराने कागजी नोट भी चलेंगे भारतीय बाजार में पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत चलन से बाहर हो जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि नई करेंसी पुराने पेपर नोटों की जगह नहीं लेगी। RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है। नोटों की उम्र बढ़ाने और बढ़ती मांग के लिए कदम मई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि आरबीआई नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और पिछले कुछ सालों में बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए पॉलिमर बैंकनोट्स छापने पर विचार कर रहा था। इसके बाद जून में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की थी कि पॉलिमर बैंकनोट्स का प्रस्ताव विचाराधीन है और केंद्रीय बैंक इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन कर रहा है। दुनिया के 60 देशों में पहले से चल रहे पॉलीमर नोट दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलिमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। भारत ने पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए 2012 में पॉलिमर बैंकनोट्स लाने का प्रयास किया था। हालांकि, उस समय तकनीकी चुनौतियों के कारण इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था। नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं। पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा। 2024-25 में छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च हुए RBI की वित्त वर्ष 2024-25 की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ का खर्च आया। पिछले वित्त वर्ष (FY24) में यह खर्च ₹5,101.4 करोड़ था। छपाई के खर्च में बढ़ोतरी के कारण इस खर्च में इजाफा दर्ज किया गया है। क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट्स? ये नोट कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। क्या होता है एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट? यह एक तरह का ग्लोबल टेंडर डॉक्यूमेंट होता है, जिसके जरिए रिजर्व बैंक दुनिया भर की अनुभवी और योग्य कंपनियों को प्रोजेक्ट के लिए अपनी क्षमता, तकनीक और कीमतों के साथ प्रस्ताव भेजने का न्योता देता है।
मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती सीधे इस लड़ाई में शामिल होने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में शामिल होने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान को ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक ताकत और पकड़ और मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी यमन में 2022 हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच स्थायी शांति समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इससे तनाव बना रहा, लेकिन दोनों पक्ष दोबारा बड़े युद्ध से बचना चाहते थे। खासकर सऊदी अरब, क्योंकि कई साल के युद्ध में उसे भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। हालात तब बदले, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया। ईरान हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। इस वजह से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और इसका असर यमन पर भी पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ने लगा है और एक बार फिर से जंग का खतरा बढ़ गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ दोबारा युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला युद्ध है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने भारी पैसा खर्च किया, लेकिन उसे कोई बड़ा फायदा नहीं मिला। उल्टा उसकी छवि खराब हुई और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि अगर वे सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाते हैं तो उन्हें फायदा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश में ज्यादा राजनीतिक ताकत चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, “हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं।” ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” ईरान के समर्थन से उन्होंने 2014 में गृहयुद्ध शुरू किया और राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। यमन की उत्तरी सीमा से लगे सऊदी अरब को अपने पड़ोस में ईरान समर्थित हूती संगठन का मजबूत होना बड़ा खतरा लगा। साल 2015 में सऊदी अरब ने 8 और अरब देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग छेड़ दी। इसका मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर से सत्ता में लाना था, जिसे हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से हटा दिया था। करीब 8 साल तक जंग लड़ने के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूती को हराना संभव नहीं है। इसलिए 2022 के बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से भी संपर्क शुरू किया। फिलहाल हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर अपना प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वहीं दक्षिणी यमन पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कंट्रोल है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। आज भी यमन के कई अहम मामलों में सऊदी अरब का प्रभाव बना हुआ है। गाजा जंग की वजह से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते की बातचीत आगे बढ़ी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों से चला आ रहा युद्ध खत्म हो सके। इस बातचीत में







