सावन साड़ी डिज़ाइन: सावन और तीज के त्योहार में चार चांद लगाएगी ये स्टाइलिश सा साड़ी, यहां देखें लेटेस्ट डिजाइंस और ट्रेंडी लुक

21 जुलाई 2026 को 18:34 IST पर अद्यतन किया गया सावन साड़ी डिज़ाइन: सावन के महीने में ही चारों तरफ हरियाली नजर आती है। हिंदू धर्म के अनुसार हरा रंग खुशहाली, प्रेम और स्वर का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि सावन, तीज और अन्य शुभ स्टॉकहोम पर महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनना पसंद करती हैं। इस मौसम में हरियाली बेरोजगारी पर महिलाओं की पहली पसंद बन जाती है। यहां महिलाएं भारी-भरकम साडारियों की जगह आरामदायक, आरामदायक और स्टाइलिश सा-दिखावा सबसे ज्यादा पसंद कर रही हैं। अगर आप भी सावन में कुछ अलग और खूबसूरत खूबसूरत तस्वीरें हैं, तो इन ट्रेंडी साड़ियों में अनुसरण करना : बनारसी और ऑर्केस्ट्रा रोल: ट्रेडिशनल और एलिगेंट लुक चाहते हैं, तो यहां रंग की बनारसी या अपील एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। जरी बॉर्डर और खूबसूरत डिजाइन वाली ये सा साड़ी हमेशा फैशन में बनी रहती है। छवि: एआई लहरिया और बांधानी खेती: लहरिया और बंदानी साड़ियों की मांग काफी बढ़ जाती है। रंग-बिरंगे पैटर्न वाली ये सा खूबसूरत खूबसूरत खूबसूरत हैं। गोटा-पट्टी वर्कशॉप वाली ये रॉयल लुक स्टॉक्स है। छवि: एआई फ्लोरल ऑर्गेन्ज़ा रोज़गार: सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक पसंद है, तो फ्लोरल प्रिंट वाली ऑर्गेंजा लगाई जा सकती हैं। इस तरह की साड़ियां पर बने फूलों के डिजाइन सावन के मौसम में बेहद प्यारे दोस्त बने हुए हैं। छवि: एआई सीक्वेंस और नट रोज़गार: फीचर के लिए सीक्वेंस वर्कशॉप वाली सा शान काफी पसंद की जा रही हैं। पेस्टल ग्रीन और ऑलिव ग्रीन जैसे शेड्स इन दिनों ट्रेंड में हैं। ऐसी सा भव्य मूर्तियां और खूबसूरत लुक वाली रियासतें हैं। छवि: एआई रफल्स और फ्रिल्स रोजगार: ट्रेडिशनल लुक से हटकर कुछ वेस्टर्न-आर्टिजेस्ट कस्टमर इच्छुक हैं, तो रफल्स या फ्रिल्स डिजाइन वाली हरी रोज़गार चुनी जा सकती हैं। यंग लड़कियों के बीच ये स्टाइल काफी लोकप्रिय हो रहा है। छवि: एआई गोटापट्टी कार्यशाला चंदेरी रोज़गार: इस सावन में चंदेरी साड़ियों का ट्रेडिशनल गोटा-पट्टी का काम चार चांद लगा देगा। मॉडलों में प्राकृतिक दिखते हैं, देखने में अनोखे ही उत्तम दर्जे के और शाही दिखते हैं। छवि: एआई मिनिमल एम्ब्रायडरी जॉर्जेट नौकरी: जंगली- सोबर सा पेड़ पसंद हैं, तो मिनिमल एम्ब्रायडरी जॉर्जेट सा फूल आकर्षक झूला। यह आपके लिए एक ग्रेसफुल और एलिगेंट लुक वाले पूरे दिन के लिए उपलब्ध है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 21 जुलाई 2026 18:34 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सावन साड़ी डिज़ाइन(टी)सावन के लिए हरी साड़ी(टी)बनारसी सिल्क साड़ी(टी)लेहरिया साड़ी(टी)ऑर्गेंज़ा साड़ी(टी)टीज फैशन(टी)भारतीय एथनिक पहनावा(टी)स्टाइलिश हरी साड़ी
मारुति की कारें अगस्त से ₹30,000 तक महंगी हो जाएंगी:2 महीने में दूसरी बार कीमतें बढ़ाईं, कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से फैसला लिया

देश की सबसे बड़ी पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। कंपनी अपनी कारों के दाम 30,000 रुपए तक बढ़ाएगी। नई कीमतें अगस्त 2026 से लागू होंगी। कंपनी ने 21 जुलाई, मंगलवार को शेयर बाजारों को भेजी जानकारी यानी रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग दाम बढ़ाए जाएंगे। कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से लेना पड़ा फैसला कंपनी ने बताया कि लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी ने अपने स्तर पर लागत घटाने की कोशिश की, ताकि ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े। हालांकि, महंगाई दर ऊंची रहने और कारोबारी माहौल अनुकूल न होने की वजह से बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना मजबूरी हो गया है। 2 महीने में दूसरी बार बढ़ेंगे दाम इस साल मारुति सुजुकी की तरफ से यह पहली बढ़ोत्तरी नहीं है। इससे पहले कंपनी ने जून 2026 में भी अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 30,000 रुपए तक का इजाफा किया था। उस बढ़ोत्तरी का ऐलान 21 मई 2026 को किया गया था। उस समय भी कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को ही मुख्य वजह बताया था। अगस्त से लागू होने वाला नया संशोधन जून में हुई बढ़ोतरी के ऊपर अतिरिक्त इजाफा होगा। ₹3.50 लाख से ₹25 लाख तक के वाहन बेचती है कंपनी मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल हैचबैक से लेकर प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियां बेचती है। इनमें एंट्री-लेवल मॉडल S-Presso से लेकर प्रीमियम MPV इनविक्टो शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के पोर्टफोलियो की एक्स-शोरूम कीमतें ₹3.50 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख तक जाती हैं। अगस्त से होने वाली बढ़ोतरी के बाद एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों सेगमेंट की कारें महंगी हो जाएंगी। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है।
पेटीएम का शेयर दिन के ऊपरी स्तर से 5% फिसला:बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को उतार-चढ़ाव । बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह दिन के ऊपरी स्तर से 5% तक टूट गया। विजय शेखर शर्मा की अगुआई वाली इस फिनटेक कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 79% बढ़कर 220 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। लेकिन बोनस शेयर टलने की खबर से बिकवाली का दबाव बढ़ा है। पेटीएम ने 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया कंपनी के शेयर ने बीते 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया है। हालांकि, मार्केट डेब्यू के करीब 5 साल बाद भी यह शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹2,150 से नीचे है। Q1 नतीजे: जून तिमाही में रेवेन्यू ₹2,448 करोड़ रहा 30 जून 2026 को समाप्त हुई इस तिमाही में ऑपरेशन्स से पेटीएम का रेवेन्यू 28% बढ़कर ₹2,448 करोड़ पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में ₹1,918 करोड़ था। वहीं कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा है। कंपनी को अपने पेमेंट बिजनेस, मर्चेंट सब्सक्रिप्शन और फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रीब्यूशन में लगातार ग्रोथ से यह मुनाफा हासिल हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में पेटीएम को ₹123 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं, मार्च तिमाही में ₹183 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पेटीएम मनी में ₹100 करोड़ के निवेश को मंजूरी पेटीएम के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी ‘पेटीएम मनी’ में राइट्स इश्यू के जरिए ₹100 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दी है। इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी में निवेश, रेगुलेटरी कैपिटल जरूरतों को पूरा करने और कंपनी के इन्वेस्टमेंट व वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस के विस्तार के लिए किया जाएगा। आईपीओ के बचे ₹1,686 करोड़ के इस्तेमाल का प्लान बदला कंपनी के बोर्ड ने आईपीओ से मिली अनयूज्ड ₹1,686 करोड़ की बची हुई रकम के इस्तेमाल और उसकी समय-सीमा में बदलाव का प्रस्ताव भी पास किया है। बोर्ड ने इस रकम के उपयोग का समय बढ़ाकर 31 मार्च 2029 तक करने के लिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी लेने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि इस फ्लेक्सिबिलिटी से उसे पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज इकोसिस्टम को मजबूत करने और ग्रोथ के नए मौकों को हासिल करने में मदद मिलेगी। बोनस शेयर का प्लान क्यों टला? कंपनी के बोर्ड ने बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव टाल दिया है। बोर्ड ने कहा कि लॉन्ग-टर्म शेयरहोल्डर वैल्यू के नजरिए से प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। बोर्ड का मानना है कि कंपनी को अभी अपनी ग्रोथ बढ़ाने और प्रॉफिटेबिलिटी को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि शेयरधारकों के लिए बेहतर वैल्यू क्रिएट हो सके।” एक्सपर्ट व्यू: कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी के दौर में पहुंची INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के मुताबिक, पेटीएम का Q1 FY27 रिजल्ट इस बात का साफ सबूत है कि कंपनी अब टर्नअराउंड फेज से निकलकर प्रॉफिटेबिलिटी फेज में आ चुकी है। 28% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹203 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही EBITDA और ₹220 करोड़ का मुनाफा दिखाता है कि कंपनी का कॉस्ट स्ट्रक्चर अब मजबूत हो चुका है। अब बढ़ता रेवेन्यू सीधे मुनाफे में बदल रहा है। उनका मानना है कि आने वाली दो तिमाहियों में यह तय होगा कि कंपनी का 8% मार्जिन अब एक स्टेबल बेस बन चुका है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है ‘राइट्स इश्यू’ और बोनस शेयर?
पेटीएम का शेयर दिन के ऊपरी स्तर से 5% फिसला:बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को उतार-चढ़ाव । बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह दिन के ऊपरी स्तर से 5% तक टूट गया। विजय शेखर शर्मा की अगुआई वाली इस फिनटेक कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है। पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 79% बढ़कर 220 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। लेकिन बोनस शेयर टलने की खबर से बिकवाली का दबाव बढ़ा है। पेटीएम ने 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया कंपनी के शेयर ने बीते 2 सालों में निवेशकों का पैसा लगभग तीन गुना किया है। हालांकि, मार्केट डेब्यू के करीब 5 साल बाद भी यह शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹2,150 से नीचे है। Q1 नतीजे: जून तिमाही में रेवेन्यू ₹2,448 करोड़ रहा 30 जून 2026 को समाप्त हुई इस तिमाही में ऑपरेशन्स से पेटीएम का रेवेन्यू 28% बढ़कर ₹2,448 करोड़ पर पहुंच गया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में ₹1,918 करोड़ था। वहीं कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा है। कंपनी को अपने पेमेंट बिजनेस, मर्चेंट सब्सक्रिप्शन और फाइनेंशियल सर्विसेज डिस्ट्रीब्यूशन में लगातार ग्रोथ से यह मुनाफा हासिल हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में पेटीएम को ₹123 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं, मार्च तिमाही में ₹183 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पेटीएम मनी में ₹100 करोड़ के निवेश को मंजूरी पेटीएम के बोर्ड ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी ‘पेटीएम मनी’ में राइट्स इश्यू के जरिए ₹100 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दी है। इस फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी में निवेश, रेगुलेटरी कैपिटल जरूरतों को पूरा करने और कंपनी के इन्वेस्टमेंट व वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस के विस्तार के लिए किया जाएगा। आईपीओ के बचे ₹1,686 करोड़ के इस्तेमाल का प्लान बदला कंपनी के बोर्ड ने आईपीओ से मिली अनयूज्ड ₹1,686 करोड़ की बची हुई रकम के इस्तेमाल और उसकी समय-सीमा में बदलाव का प्रस्ताव भी पास किया है। बोर्ड ने इस रकम के उपयोग का समय बढ़ाकर 31 मार्च 2029 तक करने के लिए शेयरहोल्डर्स से मंजूरी लेने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि इस फ्लेक्सिबिलिटी से उसे पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज इकोसिस्टम को मजबूत करने और ग्रोथ के नए मौकों को हासिल करने में मदद मिलेगी। बोनस शेयर का प्लान क्यों टला? कंपनी के बोर्ड ने बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव टाल दिया है। बोर्ड ने कहा कि लॉन्ग-टर्म शेयरहोल्डर वैल्यू के नजरिए से प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। बोर्ड का मानना है कि कंपनी को अभी अपनी ग्रोथ बढ़ाने और प्रॉफिटेबिलिटी को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि शेयरधारकों के लिए बेहतर वैल्यू क्रिएट हो सके।” एक्सपर्ट व्यू: कंपनी अब प्रॉफिटेबिलिटी के दौर में पहुंची INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी के मुताबिक, पेटीएम का Q1 FY27 रिजल्ट इस बात का साफ सबूत है कि कंपनी अब टर्नअराउंड फेज से निकलकर प्रॉफिटेबिलिटी फेज में आ चुकी है। 28% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹203 करोड़ का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही EBITDA और ₹220 करोड़ का मुनाफा दिखाता है कि कंपनी का कॉस्ट स्ट्रक्चर अब मजबूत हो चुका है। अब बढ़ता रेवेन्यू सीधे मुनाफे में बदल रहा है। उनका मानना है कि आने वाली दो तिमाहियों में यह तय होगा कि कंपनी का 8% मार्जिन अब एक स्टेबल बेस बन चुका है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है ‘राइट्स इश्यू’ और बोनस शेयर?
नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय मानचित्र हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। कैबिनेट ने नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) की नई डिजाइन को मंजूरी देने से इनकार करते हुए संशोधन के लिए वापस भेज दिया। सरकार ने निर्देश दिया है कि नए सिक्के पर लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर के साथ नेपाल का आधिकारिक राष्ट्रीय मानचित्र भी शामिल किया जाए। यही वह मानचित्र है, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों और नेपाल राष्ट्र बैंक के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। नेपाल राष्ट्र बैंक की नोट और सिक्का डिजाइन समिति ने एक रुपये के सिक्के पर मुस्तांग के ऐतिहासिक लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। NRB बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के जरिए अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा गया था। 22020 के नक्शे के बाद उठा विवाद नेपाल ने 2020 में संविधान संशोधन के जरिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया था। इसके बाद यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, 1 और 2 रुपये के सिक्कों तथा 100 रुपये के नोट पर इस्तेमाल हो रहा है। नए प्रस्ताव की जानकारी सामने आते ही सवाल उठने लगे कि सिक्के से राष्ट्रीय मानचित्र हटाने का क्या संदेश जाएगा। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक और प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी भी राजनीतिक मंशा से इनकार किया है। NRB बोला- बौद्ध विरासत को भी देना चाहते थे जगह अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। मकसद करेंसी पर सांस्कृतिक विरासत को संतुलित तरीके से दिखाना था। NRB का कहना है कि मौजूदा नोटों और सिक्कों पर पशुपतिनाथ और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जबकि बौद्ध विरासत कम दिखाई देती है। इसी वजह से नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में शामिल लो घेकर मठ को चुना गया। इससे मुस्तांग में पर्यटन बढ़ने की भी उम्मीद है। अब सिक्के की सिर्फ डिजाइन नहीं, धातु भी बदलेगी नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय मानचित्र और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपये के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। फिलहाल एक रुपये का सिक्का बनाने में 2 रुपये से ज्यादा खर्च आता है। लागत कम करने के लिए इसे सफेद धातु से बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 10 रुपये के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:सरकार ने नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया; इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया

नेपाल सरकार ने एक रुपये के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। कैबिनेट ने नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) की नई डिजाइन को मंजूरी देने से इनकार करते हुए संशोधन के लिए वापस भेज दिया। सरकार ने निर्देश दिया है कि नए सिक्के पर लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर के साथ नेपाल का आधिकारिक राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। यही वह नक्शा है, जिसमें भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। यह जानकारी सरकारी अधिकारियों और नेपाल राष्ट्र बैंक के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। नेपाल राष्ट्र बैंक की नोट और सिक्का डिजाइन समिति ने एक रुपये के सिक्के पर मुस्तांग के ऐतिहासिक लो घेकर (घर) मठ की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। NRB बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसे वित्त मंत्रालय के जरिए अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा गया था। 22020 के नक्शे के बाद उठा विवाद नेपाल ने 2020 में संविधान संशोधन के जरिए लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को आधिकारिक नक्शा में शामिल किया था। इसके बाद यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, 1 और 2 रुपये के सिक्कों तथा 100 रुपये के नोट पर इस्तेमाल हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। मकसद करेंसी पर सांस्कृतिक विरासत को संतुलित तरीके से दिखाना था। NRB का कहना है कि मौजूदा नोटों और सिक्कों पर पशुपतिनाथ और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जबकि बौद्ध विरासत कम दिखाई देती है। इसी वजह से नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में शामिल लो घेकर मठ को चुना गया। इससे मुस्तांग में पर्यटन बढ़ने की भी उम्मीद है। अब सिक्के की सिर्फ डिजाइन नहीं, धातु भी बदलेगी नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपये के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। फिलहाल एक रुपये का सिक्का बनाने में 2 रुपये से ज्यादा खर्च आता है। लागत कम करने के लिए इसे सफेद धातु से बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 10 रुपये के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचार चल रहा है।
पाकिस्तान में पेट्रोल 35 पैसे सस्ता, डीजल 5.71 रुपया महंगा:पेट्रोल 315.80 और डीजल 360.06 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 21 जुलाई से लागू

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है, जबकि हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 5.71 रुपया लीटर बढ़ा दी है। नई दरें 21 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 315.80 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 360.06 रुपया प्रति लीटर हो गई है। भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.89 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है। अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं: अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे। डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।
पाकिस्तान में पेट्रोल 35 पैसे सस्ता, डीजल 5.71 रुपया महंगा:पेट्रोल 315.80 और डीजल 360.06 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 21 जुलाई से लागू

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है, जबकि हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 5.71 रुपया लीटर बढ़ा दी है। नई दरें 21 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 315.80 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 360.06 रुपया प्रति लीटर हो गई है। भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.89 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है। अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं: अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे। डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।
कॉकरोच हटाने के टिप्स: बारिश में घर के कोने-कोने से निकल रहे हैं कॉकरोच, यहां पाने के लिए काम आएगा ये देसी जुगाड़

20 जुलाई 2026 को 23:05 IST पर अपडेट किया गया बरसात के मौसम में कॉकरोच से कैसे छुटकारा पाएं: बरसात के मौसम में कॉकरोच की समस्या से बचने के लिए आपकी रसोई में मौजूद 5 शानदार और असरदार देसी जुगाड़ यहां दिए गए हैं। अनुसरण करना : लौंग की तेज महक:बारिश में कॉकरोच से संबंधित हैं? अपनी रसोई की दराजों, प्राचीन काल और जनजातियों में कुछ लौंग की दराजें। इसकी तेज महक से कॉकरोच तुरंत दूर भागते हैं। छवि: फ्रीपिक बोरिक एसिड का रामबाण इलाज: बोरिक एसिड कॉकरोच भगने की सबसे अचूक सब्जी है। रात को सोने से पहले किचन के सिंक, डस्टबिन और नाक के पास थोड़ा सा बोरिक पाउडर छिड़कें। कॉकरोच गायब हो जाएगा। छवि: फ्रीपिक हल्दी का जादू: हल्दी सिर्फ खाने में ही नहीं, कॉकरोच भागने में भी काम आती है। रात को सोने से पहले किचन के किशोर और सिंक के पास थोड़ा सा हल्दी पाउडर छिड़कें। कॉकरोच पास नहीं आएगा। छवि: फ्रीपिक नीम का प्रभावशाली प्रभाव: नीम की तेज़ गंध कॉकरोच को बिल्कुल पसंद नहीं है। पानी में छोटा सा नीम का तेल एक बड़ा सितारा या ताजी दोस्त नाव में रख दें। यह बिल्कुल सुरक्षित जुगाड़ है। छवि: फ्रीपिक तेज़पत्ता का स्मोक या पाउडर: तेजपत्ता हर भारतीय रसोई में होता है। इसका गंध कॉकरोच बिल्कुल पसंद नहीं है। कुछ तेजपत्तों को पीसकर पाउडर बनाएं और देशी में डालें। यह एक बेहद सुरक्षित जुगाड़ है। छवि: फ्रीपिक घर में आपकी साफ-सफाई और बारिश में ज्यादा देर तक पानी न दिखाई देना। साथ ही, रामबाण को भी नहीं मिला। ऐसा करने से घर पर रहेंगे और कॉकरोच भी नहीं आएंगे। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 20 जुलाई 2026 23:05 IST पर
यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत:भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना निंदनीय; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह निंदनीय है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है। उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई। जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए। वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…








