पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को मानते थे इनसिक्योर

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे, उन्हें किडनी से संबंधित दिक्कतें थीं। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं। 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक CBFC के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से किसिंग सीन को छोटा कराने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार ‘उड़ता पंजाब’ में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। खून की उल्टियां होने पर, 5 साल पहले 29 दिनों तक एडमिट रहे थे पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “एक रात अचानक से 3 बजे मुझे बेचैनी होने लगी और खून की उल्टियां भी हुईं। मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। यह क्रोनिक फूड पॉइजनिंग का मामला था। लेकिन इमरजेंसी थी। शुरुआत में मुझे 5-6 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया।” “जब मैं आईसीयू से बाहर आया तो सोचा कि 2-3 दिन में मैं घर चला जाऊंगा। लेकिन लंबे समय तक मेरा टेम्प्रेचर कम नहीं हुआ। मुझे बुखार आ रहा था और शाम के वक्त पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था। डायग्नोसिस बढ़ता गया और यह चिंता का विषय बन गया।” गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक पहलाज निहलानी ने ही गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक दिया था। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर बात करते हुए कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी, तो मैंने उससे एक दिन मांगा। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो।’ आगे उन्होंने कहा, ‘लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। हालांकि उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा के पास काम नहीं था, तो दी गई शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज निहलानी ने आगे कहा, जब गोविंदा के पास काम नहीं था, ‘जब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी। क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता बहुत बड़े हीरो रहे हैं महबूब खान के। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती हैं। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’
रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड बचपन के दोस्त से इनसिक्योर है:कहता है, दोस्ती तोड़ लो, मुझे दोस्ती और प्यार दोनों चाहिए, क्या करूं?

सवाल- मेरी उम्र 23 साल है। मैं एक रिलेशनशिप में हूं। हमने साथ में अच्छा समय बिताया है, लेकिन पिछले कुछ समय से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रॉब्लम ये है कि मेरा पार्टनर मेरे एक बचपन के दोस्त को लेकर बहुत इनसिक्योर फील करता है। वह मुझसे बार-बार कहता है कि मुझे उसमें और अपने दोस्त में से किसी एक को चुनना होगा। मेरे लिए यह स्थिति बहुत मुश्किल है। मैं न तो अपने पार्टनर को खोना चाहती हूं और न ही अपने बचपन के दोस्त को छोड़ना चाहती हूं। मैं उसे कैसे समझाऊं और इस सिचुएशन को कैसे संभालूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। यह एक कॉमन सिचुएशन है। आपके सवाल से कई लोगों को अपनी सिचुएशन समझने और हैंडल करने में मदद मिलेगी। चलिए अब इसे समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं। ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल यह सिर्फ दोस्त और पार्टनर के बीच चुनाव का सवाल नहीं है, बल्कि ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल है। अगर पार्टनर कहता है कि ‘मुझे या दोस्त’ में से किसी एक को चुनो तो यह अल्टीमेटम जैसा है। इससे मन में ‘द्वंद’ (दोहरे विचार) पैदा हो सकते हैं। इसलिए इसे हैंडल करने में आपको मुश्किल हो रही है। इस स्थिति में मन में क्या सवाल आते हैं, ग्राफिक में देखिए- यह इनसिक्योरिटी है या कंट्रोल? पार्टनर का यह कहना कि ‘किसी एक को चुनो’ तो एक तरह का इमोशनल कंट्रोल या गहरे डर का संकेत है। ऐसा व्यवहार अक्सर उन लोगों में दिखता है, जिन्हें ‘छोड़ दिए जाने का डर’ होता है। पार्टनर ऐसा क्यों बिहेव कर रहा है, इसके सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- हेल्दी रिश्ते की क्या पहचान है? एक मेच्योर रिलेशनशिप में ‘मैं’ से ज्यादा ‘हम’ मायने रखता है। इसमें दोनों एक-दूसरे की अलग पहचान (व्यक्तित्व) को स्वीकार करते हैं। वे एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि समझते हैं। साथ रहते हुए भी अपनी सोच और पसंद को महत्व देते हैं। ऐसा रिश्ता भरोसा, बराबरी और समझ पर टिका होता है। हेल्दी रिश्ते के स्ट्रॉन्ग पिलर्स ग्राफिक में देखिए- कब समझें कि सीमा पार हो रही है? प्यार के नाम पर पार्टनर का कंट्रोलिंग बिहेवियर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ संकेत स्पष्ट तौर पर ‘रेड फ्लैग’ होते हैं। अगर पार्टनर का बिहेवियर नीचे दिए ग्राफिक से मैच कर रहा है, तो संभलने की जरूरत है- आपको क्या करना चाहिए? इस स्थिति में सबसे जरूरी संतुलन और क्लैरिटी रखना है। पार्टनर की इनसिक्योरिटी को समझना जरूरी है, लेकिन किसी भी रिश्ते में ‘दोस्ती और प्यार में एक चुनने’ का दबाव हेल्दी नहीं माना जाता। बेहतर होगा कि आप शांति से खुलकर बात करें। उन्हें भरोसा दिलाएं, साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि आपकी दोस्ती आपकी जिंदगी का हिस्सा है। अगर बॉयफ्रेंड इनसिक्योर हो तो ये करें- इसके कुछ पॉइंट्स डिटेल में समझें- रिश्ते में न करें ये कॉम्प्रोमाइज रिलेशनशिप में कुछ कॉम्प्रोमाइज होते हैं। आप अपने-सोने जागने का समय बदल सकते हैं। अपनी हॉबीज बदल सकते हैं, लेकिन ये तीन चीजें कॉम्प्रोमाइज नहीं करनी चाहिए- कोई फैसला लेने से खुद से पूछें सवाल ऐसी स्थिति में भावनाओं में बहकर तुरंत निर्णय लेना सही नहीं होता। थोड़ा ठहरकर अपनी जरूरतों, सीमाओं और रिश्ते की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। खुद से सही सवाल पूछने पर यह स्पष्ट होगा कि आपके लिए क्या सही है। अंतिम सलाह हर रिश्ते में कुछ समझौते होते हैं, लेकिन समझौते और ‘आत्मसमर्पण’ में फर्क होता है। अगर कोई आपसे बरसों पुरानी दोस्ती खत्म करने को कह रहा है तो वह आपके व्यक्तित्व को कंट्रोल करना चाहता है। निष्कर्ष रिश्ते में आपसी समझ और ‘स्पेस’ बहुत जरूरी है। अपने पार्टनर को विश्वास दिलाएं, लेकिन अपनी डिग्निटी (गरिमा) की कीमत पर नहीं। याद रखें, जो व्यक्ति आपको सच में प्यार करता है, वह आपको कभी भी ऐसी स्थिति में नहीं डालेगा, जहां आपको प्यार और दोस्ती के बीच चुनाव करना पड़े। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड कभी प्यार जताए, कभी गायब हो जाए: कभी बहुत बातें तो कभी मैसेज का जवाब भी नहीं, क्या ये नॉर्मल है सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रिलेशनशिप की शुरुआत में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार लगातार ऐसा ही बना हुआ है तो इसे मनोविज्ञान में ‘हॉट-एंड-कोल्ड बिहेवियर’ कहा जाता है। आगे पढ़िए…
रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड बचपन के दोस्त से इनसिक्योर है:कहता है, दोस्ती तोड़ लो, मुझे दोस्ती और प्यार दोनों चाहिए, क्या करूं

सवाल- मेरी उम्र 23 साल है। मैं एक रिलेशनशिप में हूं। हमने साथ में अच्छा समय बिताया है, लेकिन पिछले कुछ समय से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रॉब्लम ये है कि मेरा पार्टनर मेरे एक बचपन के दोस्त को लेकर बहुत इनसिक्योर फील करता है। वह मुझसे बार-बार कहता है कि मुझे उसमें और अपने दोस्त में से किसी एक को चुनना होगा। मेरे लिए यह स्थिति बहुत मुश्किल है। मैं न तो अपने पार्टनर को खोना चाहती हूं और न ही अपने बचपन के दोस्त को छोड़ना चाहती हूं। मैं उसे कैसे समझाऊं और इस सिचुएशन को कैसे संभालूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। यह एक कॉमन सिचुएशन है। आपके सवाल से कई लोगों को अपनी सिचुएशन समझने और हैंडल करने में मदद मिलेगी। चलिए अब इसे समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं। ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल यह सिर्फ दोस्त और पार्टनर के बीच चुनाव का सवाल नहीं है, बल्कि ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल है। अगर पार्टनर कहता है कि ‘मुझे या दोस्त’ में से किसी एक को चुनो तो यह अल्टीमेटम जैसा है। इससे मन में ‘द्वंद’ (दोहरे विचार) पैदा हो सकते हैं। इसलिए इसे हैंडल करने में आपको मुश्किल हो रही है। इस स्थिति में मन में क्या सवाल आते हैं, ग्राफिक में देखिए- यह इनसिक्योरिटी है या कंट्रोल? पार्टनर का यह कहना कि ‘किसी एक को चुनो’ तो एक तरह का इमोशनल कंट्रोल या गहरे डर का संकेत है। ऐसा व्यवहार अक्सर उन लोगों में दिखता है, जिन्हें ‘छोड़ दिए जाने का डर’ होता है। पार्टनर ऐसा क्यों बिहेव कर रहा है, इसके सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- हेल्दी रिश्ते की क्या पहचान है? एक मेच्योर रिलेशनशिप में ‘मैं’ से ज्यादा ‘हम’ मायने रखता है। इसमें दोनों एक-दूसरे की अलग पहचान (व्यक्तित्व) को स्वीकार करते हैं। वे एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि समझते हैं। साथ रहते हुए भी अपनी सोच और पसंद को महत्व देते हैं। ऐसा रिश्ता भरोसा, बराबरी और समझ पर टिका होता है। हेल्दी रिश्ते के स्ट्रॉन्ग पिलर्स ग्राफिक में देखिए- कब समझें कि सीमा पार हो रही है? प्यार के नाम पर पार्टनर का कंट्रोलिंग बिहेवियर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ संकेत स्पष्ट तौर पर ‘रेड फ्लैग’ होते हैं। अगर पार्टनर का बिहेवियर नीचे दिए ग्राफिक से मैच कर रहा है, तो संभलने की जरूरत है- आपको क्या करना चाहिए? इस स्थिति में सबसे जरूरी संतुलन और क्लैरिटी रखना है। पार्टनर की इनसिक्योरिटी को समझना जरूरी है, लेकिन किसी भी रिश्ते में ‘दोस्ती और प्यार में एक चुनने’ का दबाव हेल्दी नहीं माना जाता। बेहतर होगा कि आप शांति से खुलकर बात करें। उन्हें भरोसा दिलाएं, साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि आपकी दोस्ती आपकी जिंदगी का हिस्सा है। अगर बॉयफ्रेंड इनसिक्योर हो तो ये करें- इसके कुछ पॉइंट्स डिटेल में समझें- रिश्ते में न करें ये कॉम्प्रोमाइज रिलेशनशिप में कुछ कॉम्प्रोमाइज होते हैं। आप अपने-सोने जागने का समय बदल सकते हैं। अपनी हॉबीज बदल सकते हैं, लेकिन ये तीन चीजें कॉम्प्रोमाइज नहीं करनी चाहिए- कोई फैसला लेने से खुद से पूछें सवाल ऐसी स्थिति में भावनाओं में बहकर तुरंत निर्णय लेना सही नहीं होता। थोड़ा ठहरकर अपनी जरूरतों, सीमाओं और रिश्ते की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। खुद से सही सवाल पूछने पर यह स्पष्ट होगा कि आपके लिए क्या सही है। अंतिम सलाह हर रिश्ते में कुछ समझौते होते हैं, लेकिन समझौते और ‘आत्मसमर्पण’ में फर्क होता है। अगर कोई आपसे बरसों पुरानी दोस्ती खत्म करने को कह रहा है तो वह आपके व्यक्तित्व को कंट्रोल करना चाहता है। निष्कर्ष रिश्ते में आपसी समझ और ‘स्पेस’ बहुत जरूरी है। अपने पार्टनर को विश्वास दिलाएं, लेकिन अपनी डिग्निटी (गरिमा) की कीमत पर नहीं। याद रखें, जो व्यक्ति आपको सच में प्यार करता है, वह आपको कभी भी ऐसी स्थिति में नहीं डालेगा, जहां आपको प्यार और दोस्ती के बीच चुनाव करना पड़े। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड कभी प्यार जताए, कभी गायब हो जाए: कभी बहुत बातें तो कभी मैसेज का जवाब भी नहीं, क्या ये नॉर्मल है सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रिलेशनशिप की शुरुआत में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार लगातार ऐसा ही बना हुआ है तो इसे मनोविज्ञान में ‘हॉट-एंड-कोल्ड बिहेवियर’ कहा जाता है। आगे पढ़िए…








