रूमर्ड गर्लफ्रेंड संग दिखे गोविंदा, पत्नी का बयान आया:सुनीता आहूजा बोलीं- इंसानों को जितना प्यार करो, कोई फायदा नहीं, धोखा ही देते हैं

गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा को अभिनेत्री और रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करते देखा गया। इसके बाद सुनीता आहूजा का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इंसानों को धोखेबाज बताते हुए जानवरों से प्यार को बेहतर बताया। हालांकि, सुनीता ने अपने बयान में गोविंदा का नाम नहीं लिया। दरअसल, मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनीता अपने पालतू कुत्ते विंटर के साथ थीं। पैपराजी से बात करते हुए सुनीता ने कहा कि इंसानों को जितना भी प्यार करो, कोई फायदा नहीं है। धोखा ही देते हैं। इनको प्यार करो, देखो, हमेशा चिपके रहते हैं। विंटर मुझे हमेशा छोड़ने आता है ना। उसको कैमरे में देखना भी बराबर आता है। इंसानों से अच्छे तो जानवर होते हैं भाई। जानवरों से प्यार करो, इंसानों से नहीं। धोखेबाज होते हैं इंसान। लालबागचा राजा के दरबार में कोमल के साथ दिखे गोविंदा गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान वह अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ नजर आए थे। दोनों ने गणपति बप्पा के दर्शन किए। गणपति उत्सव में भी अलग नजर आया परिवार इस साल गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता साथ नजर नहीं आए। गणेश चतुर्थी के मौके पर सुनीता आहूजा के घर गणपति बप्पा का स्वागत किया गया। गणेशोत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता के बेटे यशवर्धन और बेटी टीना भी मौजूद थे। हालांकि, इस दौरान गोविंदा नजर नहीं आए। गणेश चतुर्थी के दिन सुनीता ने कहा था कि गोविंदा फिलहाल अमेरिका में हैं और रात तक वापस आएंगे। उन्होंने कहा था कि अगर सफर के बाद वह थके होंगे, तो आज बप्पा के दर्शन करने नहीं आएंगे। कल दर्शन करने जरूर आएंगे। बाद में गोविंदा दर्शन के लिए घर गए। वहां उनके बच्चे टीना और यशवर्धन नजर आए। हालांकि, गोविंदा पब्लिकली सुनीता के साथ नजर नहीं आए। वहीं, गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले रविवार को सुनीता आहूजा गणपति बप्पा को घर लेकर आईं। इस दौरान वह अकेली ही ढोल की थाप पर डांस करती नजर आईं। तब भी गोविंदा उनके साथ नजर नहीं आए थे। गौरतलब है कि पिछले एक साल से गोविंदा और सुनीता की शादीशुदा जिंदगी खबरों में है। पिछले महीने सुनीता ने गोविंदा के खिलाफ दायर तलाक की याचिका वापस ले ली है। दरअसल, पिछले साल गणेशोत्सव के कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट में दावा किया था कि सुनीता ने गोविंदा से तलाक की याचिका दायर की थी। हालांकि, गणेशोत्सव के दौरान दोनों साथ नजर आए थे। देखिए गोविंदा- सुनीता के पिछले साल के सेलिब्रेशन की झलक- वहीं, गणेश चतुर्थी से पहले सुनीता ने जूम को दिए एक इंटरव्यू में इस साल के गणेशोत्सव को लेकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि इस बार वह खुद गणपति बप्पा को घर लेकर आएंगी। उन्होंने इसकी वजह भी बताई थी। सुनीता ने कहा था कि पिछले साल उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया और बप्पा के आशीर्वाद से उन्हें दो टीवी शोज में काम करने का मौका मिला। उन्होंने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने बेटे के साथ एक फिल्म की है। सुनीता ने यह भी बताया था कि उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा तब लगता है, जब लोग उनके घर आकर गणपति बप्पा के दर्शन करते हैं। इस साल उन्होंने बप्पा से अपनी और परिवार की खुशियों के लिए प्रार्थना की है। इंटरव्यू में सुनीता आहूजा ने यह भी बताया था कि वह इस साल गणपति बप्पा से क्या मांगना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह और उनके बच्चे यशवर्धन आहूजा और टीना आहूजा अच्छे लोगों के साथ काम करते रहें। सुनीता ने कहा, “अगले गणपति तक मुझे अपना खुद का घर लेना है। ये मैं बप्पा से मांगूंगी। मुझे बस अपने बच्चों की सफलता, अपनी सफलता और खुशी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि वह अपनी जिंदगी में किसी तरह का तनाव नहीं चाहतीं। सुनीता ने बप्पा से प्रार्थना की कि उनकी और उनके बच्चों की जिंदगी से सभी नेगेटिव लोग दूर हो जाएं। साथ ही उन्हें अच्छे लोगों के साथ अच्छा काम करने का मौका मिलता रहे। सुनीता आहूजा का वर्क फ्रंट वर्क फ्रंट की बात करें तो सुनीता आहूजा जल्द एक्टिंग में डेब्यू करने वाली हैं। वह डायरेक्टर साजिद खान की फिल्म से एक्टिंग की शुरुआत करेंगी। फिल्म में उनके बेटे यशवर्धन आहूजा, नितांशी गोयल और जेमी लीवर भी नजर आएंगे। यह फिल्म 7 जनवरी 2027 को रिलीज होने वाली है। गोविंदा की पत्नी सुनीता का भी बप्पा के आगमन का जश्न मनाते हुए एक वीडियो वायरल हो रहा है। हालांकि इस दौरान न गोविंदा दिखे और न ही उनके बच्चे। उन्होंने इस दौरान चप्पल भी नहीं पहन रखी थी।
अल्लू अर्जुन की फिल्म 'राका' ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड:37 लोगों का एक साथ रियल-टाइम मोशन कैप्चर किया; 92 कैमरों का किया गया इस्तेमाल

साउथ एक्टर अल्लू अर्जुन और डायरेक्टर एटली की फिल्म ‘राका’ ने रिलीज से पहले ही बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म ने ‘मोस्ट पीपल मोशन-कैप्चर्ड इन रियल-टाइम’ के लिए आधिकारिक तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया है। एक सिंगल सेशन के दौरान एक साथ 37 कलाकारों के मोशन को रियल-टाइम में ट्रैक और कैप्चर किया गया। इस रिकॉर्ड प्रक्रिया में 4 साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग कलाकार तक शामिल थे। इस बड़े पैमाने के सेटअप को तैयार करने के लिए मेकर्स ने लॉस एंजिल्स से आधुनिक तकनीक और उपकरण मंगवाकर भारत में अपना बेस तैयार किया था। 92 मोशन कैप्चर कैमरों का किया गया इस्तेमाल फिल्म के मोशन कैप्चर सेशन को पूरा करने के लिए 92 ऑप्टिकल मोशन-कैप्चर कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही रियल-टाइम अनरियल विजुअलाइजेशन, फेसियल कैप्चर और एडवांस नेटवर्क सिस्टम को एक साथ सिंक किया गया था। सन पिक्चर्स के वीडियो में मोशन कैप्चर टेक्निकल डायरेक्टर ब्रायन रौश ने बताया कि लोग समझते हैं कि सिर्फ एक बटन दबाने से एनीमेशन मिल जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। वहीं सिनेमैटोग्राफर जीके विष्णु ने बताया कि फिल्म में कई मोशन-कैप्चर कैरेक्टर हैं, जिनके बीच आपस में काफी एक्शन और इंटरेक्शन देखने को मिलेगा। लॉस एंजिल्स से मंगाए गए आधुनिक उपकरण डायरेक्टर एटली ने बताया कि भारत में मोशन-कैप्चर स्टेशन मौजूद थे, लेकिन ‘राका’ के बड़े विजन के लिए ज्यादा कैपेसिटी वाले सेटअप की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने सन पिक्चर्स के प्रोड्यूसर कलानिधि मारन से बात की। प्रोड्यूसर की मंजूरी मिलने के बाद लॉस एंजिल्स से सभी जरूरी उपकरण भारत मंगाए गए और एक नया बेस स्थापित किया गया। इसके बाद फिल्म के VFX प्रोड्यूसर ने ‘राका’ की जरूरतों के हिसाब से एक नया मोशन-कैप्चर पाइपलाइन और वर्कफ्लो तैयार किया। अल्लू अर्जुन बोले- विजन को हकीकत में बदलना बड़ी बात इस उपलब्धि पर अल्लू अर्जुन ने कहा कि कई लोगों के पास विचार और विजन होता है, लेकिन उसे इस स्तर की क्वालिटी के साथ पूरा करना बड़ी बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय डायरेक्टर एटली, पूरी टेक्निकल टीम और इतने बड़े प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए सन पिक्चर्स को दिया। फिल्म में 4 रोल निभा सकते हैं अल्लू अर्जुन ‘राका’ एक बड़े बजट की साइंस-फिक्शन एक्शन ड्रामा फिल्म है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में अल्लू अर्जुन चार अलग-अलग किरदार निभाते नजर आ सकते हैं, जिनमें दादा, पिता और दो बेटों का रोल शामिल है। चर्चा यह भी है कि फिल्म की कहानी पैरेलल यूनिवर्स के कॉन्सेप्ट पर आधारित हो सकती है, हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिल्म में दीपिका पादुकोण, रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। अल्लू अर्जुन और एटली पहली बार किसी प्रोजेक्ट में एक साथ काम कर रहे हैं।
नेशनल अवॉर्ड जीतकर भावुक कार्तिक आर्यन:कहा- ऐसे माहौल में एक्टर बनने का सपना देखा, जहां लोग हंसते हैं; छोटे शहर के लड़के का सपना पूरा हुआ

कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया है। सेरेमनी मंगलवार को गुजरात के एकता नगर में हुई, जहां राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कार्तिक को अवॉर्ड दिया। ये कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है। इसे जीतने के बाद उन्होंने भावुक अंदाज में एक छोटे शहर से निकलकर सपने पूरे करने के सफर को याद किया है। कार्तिक ने नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी की कुछ तस्वीरों के साथ लिखा है, ‘ग्वालियर के उस मम्मा के लाड़ले लड़के को आज प्यार से मुस्कुराते हुए याद कर रहा हूं, जिसने ऐसे माहौल में अभिनेता बनने का सपना देखने की हिम्मत की, जहां लोग अक्सर ऐसे सपनों पर हंसकर आगे बढ़ जाते हैं। आखिरकार वह पल मेरी आंखों के सामने था, जिसे मैंने जिया भी और महसूस भी किया। आज भी उत्साह और घबराहट के कारण यकीन नहीं हो रहा है।’ आगे कार्तिक ने लिखा, ‘एक छोटे शहर के लड़के का सपना, देश के हर अभिनेता का सपना, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान। ‘चंदू नहीं, चैंपियन है मैं।’ मैं हमेशा कबीर सर और साजिद सर का आभारी रहूंगा, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे भारत के पहले पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर सर का किरदार बड़े पर्दे पर निभाने की जिम्मेदारी दी। यह सफर बेहद मुश्किल और दर्द भरा रहा, लेकिन इसका नतीजा रस मलाई की तरह मीठा है। मैं एक साथ बहुत भावुक और खुद को बेहद सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।’ ‘इस लंबे सफर में मेरा सबसे बड़ा सहारा रहा, खुद पर मेरा विश्वास, मेरे माता-पिता का आशीर्वाद, उनका बिना शर्त प्यार और साथ, दोस्तों का हर कदम पर हौसला, खासकर तब जब मैं खुद उम्मीद खोने लगा था। मेरी पूरी टीम का भी धन्यवाद, जो मेरी प्रोफेशनल जिंदगी को आसान बनाने के लिए लगातार मेहनत करती है। इस असंभव से लगने वाले सफर का हिस्सा बनने वाले हर व्यक्ति का मैं दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।’ आखिर में कार्तिक लिखते हैं, ‘मैं अपना यह सबसे बड़ा सम्मान देश के हर पैरालंपियन और उन सभी लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं, जो असंभव सपने देखने की हिम्मत करते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए कभी हार नहीं मानते। सम्मानित ज्यूरी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और माननीय राष्ट्रपति जी का इस खास पल के लिए दिल से धन्यवाद। आखिर में मैं यही कहना चाहूंगा कि यह सिर्फ शुरुआत है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे कई और मुकाम हासिल करूंगा।’ देखिए नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी से कार्तिक आर्यन की चुनिंदा तस्वीरें-
नेशनल अवॉर्ड जीतकर भावुक कार्तिक आर्यन:कहा- ऐसे माहौल में एक्टर बनने का सपना देखा, जहां लोग हंसते हैं; छोटे शहर के लड़के का सपना पूरा हुआ

कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया है। सेरेमनी मंगलवार को गुजरात के एकता नगर में हुई, जहां राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कार्तिक को अवॉर्ड दिया। ये कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है। इसे जीतने के बाद उन्होंने भावुक अंदाज में एक छोटे शहर से निकलकर सपने पूरे करने के सफर को याद किया है। कार्तिक ने नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी की कुछ तस्वीरों के साथ लिखा है, ‘ग्वालियर के उस मम्मा के लाड़ले लड़के को आज प्यार से मुस्कुराते हुए याद कर रहा हूं, जिसने ऐसे माहौल में अभिनेता बनने का सपना देखने की हिम्मत की, जहां लोग अक्सर ऐसे सपनों पर हंसकर आगे बढ़ जाते हैं। आखिरकार वह पल मेरी आंखों के सामने था, जिसे मैंने जिया भी और महसूस भी किया। आज भी उत्साह और घबराहट के कारण यकीन नहीं हो रहा है।’ आगे कार्तिक ने लिखा, ‘एक छोटे शहर के लड़के का सपना, देश के हर अभिनेता का सपना, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान। ‘चंदू नहीं, चैंपियन है मैं।’ मैं हमेशा कबीर सर और साजिद सर का आभारी रहूंगा, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे भारत के पहले पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर सर का किरदार बड़े पर्दे पर निभाने की जिम्मेदारी दी। यह सफर बेहद मुश्किल और दर्द भरा रहा, लेकिन इसका नतीजा रस मलाई की तरह मीठा है। मैं एक साथ बहुत भावुक और खुद को बेहद सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।’ ‘इस लंबे सफर में मेरा सबसे बड़ा सहारा रहा, खुद पर मेरा विश्वास, मेरे माता-पिता का आशीर्वाद, उनका बिना शर्त प्यार और साथ, दोस्तों का हर कदम पर हौसला, खासकर तब जब मैं खुद उम्मीद खोने लगा था। मेरी पूरी टीम का भी धन्यवाद, जो मेरी प्रोफेशनल जिंदगी को आसान बनाने के लिए लगातार मेहनत करती है। इस असंभव से लगने वाले सफर का हिस्सा बनने वाले हर व्यक्ति का मैं दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।’ आखिर में कार्तिक लिखते हैं, ‘मैं अपना यह सबसे बड़ा सम्मान देश के हर पैरालंपियन और उन सभी लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं, जो असंभव सपने देखने की हिम्मत करते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए कभी हार नहीं मानते। सम्मानित ज्यूरी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और माननीय राष्ट्रपति जी का इस खास पल के लिए दिल से धन्यवाद। आखिर में मैं यही कहना चाहूंगा कि यह सिर्फ शुरुआत है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे कई और मुकाम हासिल करूंगा।’ देखिए नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी से कार्तिक आर्यन की चुनिंदा तस्वीरें-
सेंधवा के अभय जोधपुरकर को मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार:मराठी गीत ‘नवसाची गौरी माझी’ के लिए राष्ट्रपति ने दिया रजत कमल; एआर रहमान के संगीत स्कूल से पढ़े

बड़वानी जिले के सेंधवा निवासी पार्श्व गायक अभय जोधपुरकर को मंगलवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में हुए समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें रजत कमल से सम्मानित किया। अभय को फिल्म ‘घरात गणपति’ के मराठी गीत ‘नवसाची गौरी माझी’ के लिए यह सम्मान मिला है। पहली बार दिल्ली से बाहर हुआ समारोह 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर में आयोजित किया गया। समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशभर के फिल्म कलाकारों और तकनीशियनों को पुरस्कार प्रदान किए। अभय के पिता मनोज जोधपुरकर और माता अमिता जोधपुरकर भी समारोह में मौजूद रहे। एआर रहमान के संगीत विद्यालय से पढ़ाई अभय ने संगीतकार ए.आर. रहमान के संगीत विद्यालय केएम म्यूजिक कंजरवेटरी से संगीत की पढ़ाई की है। उन्होंने 2012 में कन्नड़ फिल्म ‘गॉड फादर’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की थी। इसके बाद मणिरत्नम की तमिल फिल्म ‘कदल’ के गीत ‘मूंगिल थोट्टम’ से उन्हें पहचान मिली। इस गीत के लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला था। ‘मेरे नाम तू’ से हिंदी सिनेमा में मिली पहचान हिंदी सिनेमा में अभय को शाहरुख खान की फिल्म ‘जीरो’ के गीत ‘मेरे नाम तू’ से लोकप्रियता मिली। इस गाने के लिए उन्हें 2019 में मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड्स में ‘अपकमिंग मेल वोकलिस्ट ऑफ द ईयर’ का सम्मान मिला था। अभय ने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और मराठी भाषाओं में भी गाने गाए हैं। कई पुरस्कारों के बाद राष्ट्रीय सम्मान अभय को 2013 में ‘कदल’ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का सम्मान मिला था। 2017 में ‘वनमगन’ के गीत के लिए भी उन्हें अवॉर्ड मिला। 2019 में ‘मेरे नाम तू’ के लिए मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड मिला। 2022 में उन्हें मराठी संगीत के लिए मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड भी मिला था। अब ‘नवसाची गौरी माझी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार उनके करियर की उपलब्धियों में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की विजेता सूची में अभय जोधपुरकर को सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक घोषित किया गया है। उनकी उपलब्धि से सेंधवा में खुशी का माहौल है।
रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; बंगाली सिनेमा में प्लेबैक सिंगर थीं

बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार दोपहर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यशराज फिल्म्स (YRF) ने आधिकारिक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी है। कृष्णा मुखर्जी बंगाली सिनेमा की जानी-मानी प्लेबैक सिंगर रह चुकी हैं। वे अक्सर अपनी बेटी रानी के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आती थीं। मां के निधन से मुखर्जी परिवार में दुख का माहौल है। परिवार ने इस मुश्किल समय में मीडिया और फैंस से प्राइवेसी बनाए रखने की अपील की है। यशराज फिल्म्स ने जारी किया आधिकारिक बयान यशराज फिल्म्स ने बयान जारी करते हुए लिखा, ‘भारी दिल से हम यह जानकारी दे रहे हैं कि रानी मुखर्जी की मां श्रीमती कृष्णा मुखर्जी का आज दोपहर निधन हो गया। वे 75 वर्ष की थीं। परिवार आप सभी के प्यार, प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए गहराई से आभारी है। इस बेहद मुश्किल समय में परिवार आपसे प्राइवेसी की अपील करता है।’ कृष्णा मुखर्जी ने हर मोड़ पर बेटी का साथ दिया कृष्णा मुखर्जी का भारतीय सिनेमा, विशेषकर बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से गहरा जुड़ाव रहा। वे खुद एक पेशेवर प्लेबैक सिंगर थीं और उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में गाने गाए थे। संगीत से जुड़े रहने के कारण उन्होंने अपनी बेटी रानी मुखर्जी को भी कला और अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। रानी अपनी मां के बेहद करीब थीं और कई मौकों पर वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दे चुकी हैं। दोनों के बीच मजबूत बॉन्डिंग देखने को मिलती थी। अपने करियर की शुरुआत से ही रानी जब भी किसी अवॉर्ड फंक्शन, फिल्म स्क्रीनिंग या सार्वजनिक कार्यक्रम में जाती थीं, कृष्णा मुखर्जी उनके साथ जरूर नजर आती थीं। पति राम मुखर्जी के निधन के बाद भी कृष्णा अपनी बेटी रानी के साथ रहकर परिवार की भूमिका निभतीं थीं। ‘मर्दानी 3’ में नजर आई थीं रानी मुखर्जी वर्कफ्रंट की बात करें तो रानी मुखर्जी ने अपने लंबे करियर में ‘गुलाम’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’ और ‘ब्लैक’ जैसी कई मशहूर फिल्में दी हैं। रानी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मर्दानी 3’ में नजर आई थीं। इस फिल्म में उनके शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया था।
‘कच्चा बादाम गर्ल’ बनीं सीता तो मचा बवाल:अंजली अरोड़ा ने ट्रोलर्स को जवाब दिया, बोलीं- पुरानी छवि मेरी पूरी जिंदगी नहीं

अंजली अरोड़ा इन दिनों फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभाने को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके लुक और किरदार की तारीफ हो रही है, वहीं सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। वजह उनकी पुरानी सोशल मीडिया इमेज, खासकर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर वायरल हुईं डांसिंग रील्स हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजली ने ट्रोलिंग और पुरानी छवि पर बात की। वहीं श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने कहा कि किसी के किए गए काम का असर उसकी पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। ‘कच्चा बादाम’ वाली इमेज को लेकर ट्रोल हो रही हैं अंजली अंजली अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर डांसिंग रील्स से पहचान बनाई थी। खासतौर पर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर उनका डांस वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं। बाद में उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 1’ में हिस्सा लिया। अब जब वह ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभा रही हैं, सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग उनकी ग्लैमरस और बिंदास सोशल मीडिया इमेज की तुलना सीता के किरदार से कर रहे हैं। इसी वजह से उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि डांसिंग और ग्लैमरस इमेज के लिए पहचानी जाने वाली अंजली सीता जैसे पवित्र किरदार को कैसे निभा सकती हैं। कुछ कमेंट्स में उन्हें ‘कच्चा बादाम गर्ल’ कहकर ट्रोल किया गया, तो कुछ यूजर्स ने लिखा कि ‘सीता के रोल में शूर्पणखा’। अंजली बोलीं- ‘वो मेरी पूरी जिंदगी नहीं है’ ट्रोलिंग को लेकर अंजली ने दैनिक भास्कर से कहा कि लोगों के पास किसी को जज करने का अधिकार है, लेकिन किसी की पुरानी जिंदगी उसकी पूरी पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “लोगों का काम है जज करना और उनके पास हक है। जो चीजें हैं, वो हैं ही। हम किसी भी चीज को अपनी लाइफ का एक पार्ट कह सकते हैं, लेकिन वो हमारी पूरी लाइफ नहीं होती।” अंजली ने कहा कि अगर लोग उन्हें पुरानी सोशल मीडिया इमेज के लिए याद करते हैं तो वह भी ठीक है, लेकिन उन्होंने इसके अलावा भी बहुत काम किया है और आगे भी करना चाहती हैं। उनके मुताबिक, “मैं चाहती हूं कि लोग मेरी पर्सनालिटी को अलग रखकर इस सिनेमा में मेरे किरदार को देखें और फिर जज करें।” ‘सीता’ के किरदार को लेकर अंजली ने की तैयारी सीता का किरदार मिलने पर अंजली खुद हैरान थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि वह यह किरदार कैसे निभा पाएंगी और उन्हें ही सीता का रोल क्यों दिया गया। डायरेक्टर के विजन और भरोसे के बाद उन्होंने खुद पर काम शुरू किया। शूटिंग के दौरान उन्होंने सीता के किरदार की कई चीजें अपनाने की कोशिश की। अंजली के मुताबिक, सीता उनके लिए धैर्य, त्याग और सादगी की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद सीता ने धैर्य नहीं खोया और गुस्से में ऐसा फैसला नहीं लिया जिससे किसी और को नुकसान पहुंचे। ‘मैं आजकल की लड़की हूं, सीता से तुलना नहीं करूंगी’ जब अंजली से पूछा गया कि सीता के व्यक्तित्व से उनमें कितनी समानताएं हैं, उन्होंने खुद की तुलना सीता से करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह आज की पीढ़ी की लड़की हैं और उनके अपने विचार और लाइफस्टाइल हैं। हालांकि वह अपने धर्म और विश्वास से जुड़ी हुई हैं। अंजली ने कहा कि उनका विश्वास है कि जो उनका है, वह उनके पास जरूर आएगा और जो उनका नहीं है, वह पास आकर भी चला जाएगा। बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना जरूरी अंजली अरोड़ा ने आज की पीढ़ी की परवरिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक सोच और लाइफस्टाइल के साथ आगे बढ़ने की आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों की जानकारी भी होनी जरूरी है। अंजली ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अपने धर्म से जुड़े रहने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ना सिखाया है। उनका मानना है कि आज के माता-पिता को भी बच्चों को समझाना चाहिए कि वे किस संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार इंसान की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। व्यक्ति कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, उसके संस्कार उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बने रहते हैं। अंजली के मुताबिक, इंसान देश में रहे या विदेश में, किसी भी जगह काम करे या किसी भी तरह की जिंदगी जिए, उसके संस्कार हमेशा उसके साथ रहते हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही परिवार, धर्म, संस्कृति और अच्छे मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। देव शर्मा बोले- ट्रोलिंग किसी की जिंदगी पर डाल सकती है असर फिल्म में श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने ट्रोलिंग के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि रामायण से मिलने वाली सबसे बड़ी सीखों में से एक यह है कि इंसान को अपने हर काम के असर के बारे में सोचना चाहिए। देव ने कहा, “ट्रोलिंग या किसी का मजाक उड़ाना तब होता है, जब हम उसके आफ्टर इफेक्ट्स के बारे में नहीं समझते। हम उस समय काम कर देते हैं, लेकिन उसका इम्पैक्ट किसी इंसान की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है।” उन्होंने कहा कि रामायण और दूसरे ग्रंथों की सीख यही है कि इंसान जाने-अनजाने ऐसा काम न करे, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी प्रभावित हो। शील वर्मा बोले- रामायण को सुपरहीरो फिल्म की तरह नहीं दिखाया फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे शील वर्मा ने बताया कि ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ को ज्यादा वीएफएक्स और भव्यता के सहारे पेश करने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मेकर्स का फोकस रामायण की कहानी को सरलता और मूल भावना के साथ दिखाने पर रहा है। शील के मुताबिक, फिल्म को सुपरहीरो या मार्वल जैसी ग्रैंड फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि “सिंप्लिसिटी हम परोस रहे हैं। रामायण को रामायण की तरह दिखा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों ने बचपन से जिस रामायण को देखा और
नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज:कार्तिक आर्यन, यामी को मिलेगा अवॉर्ड, दिल्ली की जगह गुजरात में होने पर विवाद; जानिए इतिहास, विवाद और इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज गुजरात में आयोजित हो रही है। इतिहास में पहली बार नई दिल्ली के विज्ञान भवन की बजाए ये सेरेमनी गुजरात के केवड़िया में यानी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास होगी, जिस पर विवाद है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने इस फैसले की आलोचना की है। वहीं, शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है। विवाद के बीच सेरेमनी की तैयारियां पूरी हो रही हैं। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुग’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है, जिसके लिए वह गुजरात पहुंच चुके हैं। बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए मिलेगा, जबकि बेस्ट हिंदी फिल्म ‘श्रीकांत’ और बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड ‘आर्टिकल 370’ को दिया जाएगा। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को चुकी है, आज राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू अवॉर्ड वितरण करेंगी। 72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी से पहले जानिए, विजेताओं की लिस्ट, सेरेमनी पर विवाद, इतिहास, इससे जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स और किस्से- इस साल इन फिल्मों और कलाकारों को मिलेगा अवॉर्ड, देखिए पूरी लिस्ट- नई दिल्ली की जगह गुजरात में सेरेमनी होने पर विवाद- नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी नई दिल्ली की जगह गुजरात में आयोजित होने पर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने कड़ी निंदा की। वहीं, शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है। राज ठाकरे ने आपत्ति जताते हुए लिखा, ‘आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व कम करने की कोशिश के बाद अब क्या देश की राजधानी दिल्ली की अहमियत भी धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश हो रही है?’ शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि ये गुजरात से जुड़ा कोई प्रोग्राम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार है, तो इसकी लोकेशन गुजरात क्यों रखी गई। इसे राजधानी में ही रखना था, जैसा पिछले कई सालों से चला आ रहा है। उन्होंने अन्य सेलेब्स से इस इवेंट में न जाने और इसे बॉयकॉट करने की अपील की है। पिछले साल शाहरुख खान-रानी मुखर्जी ने जीता नेशनल अवॉर्ड शाहरुख खान ने 40 साल के करियर में पिछले साल फिल्म जवान के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता। उनके साथ विक्रांत मैसी को भी 12वीं फेल के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। जबकि रानी मुखर्जी को मिसेस चटर्जी वर्सेस नॉर्वे के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। पिछले साल मोहनलाल को इस साल अनंत नाग को मिला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग (अनंत नागरकट्टे) कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित और दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं। कन्नड़ के अलावा अनंत नाग ने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है। कन्नड़ सुपरस्टार यश की ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF के दोनों पार्ट में वह नजर आए थे। नेशनल अवॉर्ड से जुड़े ये किस्से भी पढ़िए- ऑक्सीजन मास्क लगाकर अवॉर्ड लेने पहुंचे राज कपूर, राष्ट्रपति की एंबुलेंस दी गई साल 1972 में पृथ्वीराज कपूर को मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2 मई 1988 को हुई अवॉर्ड सेरेमनी में उनकी जगह ये अवॉर्ड लेने उनके बेटे राज कपूर पहुंचे थे। राज कपूर इतने बीमार रहते थे कि वो ऑक्सीजन सिलेंडर लिए और मास्क लगाए सेरेमनी में बैठे थे। जिस समय पृथ्वीराज कपूर का नाम अनाउंस हुआ, तो राज कपूर की हालत इतनी बिगड़ गई कि वो कुर्सी से उठ नहीं सके। ऐसे में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने सेरेमनी का प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद उनकी कुर्सी तक जाकर अवॉर्ड दिया। कुछ ही देर में राज कपूर को सेरेमनी में ही अस्थमा का अटैक पड़ा। राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए अपनी गाड़ी दी। राज कपूर को दिल्ली के AIIMS में भर्ती करवाया गया था। 2 महीने तक चले इलाज के बाद उनका 2 जून 1988 को निधन हो गया। ये किस्सा राज कपूर की बेटी रीमा ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में सुनाया था। फिल्म ब्लैक के नेशनल अवॉर्ड जीतने पर हुई थी कंट्रोवर्सी 53वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक को बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था, जो हॉलीवुड फिल्म द मिरेकल वर्क की कहानी से प्रेरित थी। नेशनल अवॉर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी एडेप्शन फिल्म को अवॉर्ड नहीं दिया जा सकता। ऐसे में ज्यूरी मेंबर में शामिल देब बनर्जी ने आरोप लगाए कि फिल्म को फेवरिज्म कर अवॉर्ड दिया गया है। देव बनर्जी ने पिटीशन भी फाइल की थी, हालांकि कोई कार्यवाही नहीं हुई। फिल्म ब्लैक ने 3 नेशनल अवॉर्ड जीते, जिमें बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी), बेस्ट एक्टर (अमिताभ बच्चन) और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन (सब्यसाची मुखर्जी) शामिल हैं। अवॉर्ड सेरेमनी पर लगे पक्षपात के आरोप इसी साल फिल्म परजानिया के लिए राहुल ढोलकिया को बेस्ट डायेरक्टर, सारिका को बेस्ट एक्ट्रेस और फिल्म परिणीता के लिए प्रदीप सरकार को बेस्ट डायरेक्टर डेब्यू का अवॉर्ड दिए जाने पर भी विवाद रहा। कोलकाता बेस्ड क्रिटिक और ज्यूरी में शामिल देब बनर्जी ने इनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल की थी। उनका आरोप था कि पक्षपात के जरिए इन कैटेगरी में अवॉर्ड दिए गए हैं। किरण खैर का नेशनल अवॉर्ड विवादों से रहा बंगाली फिल्म बरीवाली के लिए किरण खैर को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था। इस फिल्म के नॉमिनेशन के दौरान भरे गए फॉर्म में कहा गया था कि किरण खैर ने अपनी आवाज खुद डब की है, हालांकि डबिंग आर्टिस्ट और एक्ट्रेस रीता कोइराला ने आरोप लगाए कि फिल्म में उन्होंने किरण खैर के लिए बंगाली डबिंग की थी, जिसको नॉमिनेशन फॉर्म में मेंशन नहीं किया गया था। 65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी में 68 विजेताओं ने सेरेमनी में आने से इनकार किया था 65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी 68 विजेताओं के सेरेमनी में न पहुंचने से विवादों में रही थी। विजेताओं को मिले इन्विटेशन कार्ड में
नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज:कार्तिक आर्यन, यामी को मिलेगा अवॉर्ड, दिल्ली की जगह गुजरात में होने पर विवाद; जानिए इतिहास, विवाद और इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज गुजरात में आयोजित हो रही है। इतिहास में पहली बार नई दिल्ली के विज्ञान भवन की बजाए ये सेरेमनी गुजरात के केवड़िया में यानी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास होगी, जिस पर विवाद है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने इस फैसले की आलोचना की है। शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है। विवाद के बीच सेरेमनी की तैयारियां पूरी हो रही हैं। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुग’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है, जिसके लिए वह गुजरात पहुंच चुके हैं। बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए मिलेगा, जबकि बेस्ट हिंदी फिल्म ‘श्रीकांत’ और बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड ‘आर्टिकल 370’ को दिया जाएगा। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को चुकी है, आज राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू अवॉर्ड वितरण करेंगी। 72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी से पहले जानिए, विजेताओं की लिस्ट, सेरेमनी पर विवाद, इतिहास, इससे जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स और किस्से- इस साल इन फिल्मों और कलाकारों को मिलेगा अवॉर्ड, देखिए पूरी लिस्ट- नई दिल्ली की जगह गुजरात में सेरेमनी होने पर विवाद- नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी नई दिल्ली की जगह गुजरात में आयोजित होने पर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने कड़ी निंदा की। वहीं, शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है। राज ठाकरे ने आपत्ति जताते हुए लिखा, ‘आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व कम करने की कोशिश के बाद अब क्या देश की राजधानी दिल्ली की अहमियत भी धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश हो रही है?’ शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि ये गुजरात से जुड़ा कोई प्रोग्राम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार है, तो इसकी लोकेशन गुजरात क्यों रखी गई। इसे राजधानी में ही रखना था, जैसा पिछले कई सालों से चला आ रहा है। उन्होंने अन्य सेलेब्स से इस इवेंट में न जाने और इसे बॉयकॉट करने की अपील की है। पिछले साल शाहरुख खान-रानी मुखर्जी ने जीता नेशनल अवॉर्ड शाहरुख खान ने 40 साल के करियर में पिछले साल फिल्म जवान के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता। उनके साथ विक्रांत मैसी को भी 12वीं फेल के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। जबकि रानी मुखर्जी को मिसेस चटर्जी वर्सेस नॉर्वे के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। पिछले साल मोहनलाल को इस साल अनंत नाग को मिला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग (अनंत नागरकट्टे) कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित और दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं। कन्नड़ के अलावा अनंत नाग ने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है। कन्नड़ सुपरस्टार यश की ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF के दोनों पार्ट में वह नजर आए थे। नेशनल अवॉर्ड से जुड़े ये किस्से भी पढ़िए- ऑक्सीजन मास्क लगाकर अवॉर्ड लेने पहुंचे राज कपूर, राष्ट्रपति की एंबुलेंस दी गई साल 1972 में पृथ्वीराज कपूर को मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2 मई 1988 को हुई अवॉर्ड सेरेमनी में उनकी जगह ये अवॉर्ड लेने उनके बेटे राज कपूर पहुंचे थे। राज कपूर इतने बीमार रहते थे कि वो ऑक्सीजन सिलेंडर लिए और मास्क लगाए सेरेमनी में बैठे थे। जिस समय पृथ्वीराज कपूर का नाम अनाउंस हुआ, तो राज कपूर की हालत इतनी बिगड़ गई कि वो कुर्सी से उठ नहीं सके। ऐसे में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने सेरेमनी का प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद उनकी कुर्सी तक जाकर अवॉर्ड दिया। कुछ ही देर में राज कपूर को सेरेमनी में ही अस्थमा का अटैक पड़ा। राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए अपनी गाड़ी दी। राज कपूर को दिल्ली के AIIMS में भर्ती करवाया गया था। 2 महीने तक चले इलाज के बाद उनका 2 जून 1988 को निधन हो गया। ये किस्सा राज कपूर की बेटी रीमा ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में सुनाया था। फिल्म ब्लैक के नेशनल अवॉर्ड जीतने पर हुई थी कंट्रोवर्सी 53वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक को बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था, जो हॉलीवुड फिल्म द मिरेकल वर्क की कहानी से प्रेरित थी। नेशनल अवॉर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी एडेप्शन फिल्म को अवॉर्ड नहीं दिया जा सकता। ऐसे में ज्यूरी मेंबर में शामिल देब बनर्जी ने आरोप लगाए कि फिल्म को फेवरिज्म कर अवॉर्ड दिया गया है। देव बनर्जी ने पिटीशन भी फाइल की थी, हालांकि कोई कार्यवाही नहीं हुई। फिल्म ब्लैक ने 3 नेशनल अवॉर्ड जीते, जिमें बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी), बेस्ट एक्टर (अमिताभ बच्चन) और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन (सब्यसाची मुखर्जी) शामिल हैं। अवॉर्ड सेरेमनी पर लगे पक्षपात के आरोप इसी साल फिल्म परजानिया के लिए राहुल ढोलकिया को बेस्ट डायेरक्टर, सारिका को बेस्ट एक्ट्रेस और फिल्म परिणीता के लिए प्रदीप सरकार को बेस्ट डायरेक्टर डेब्यू का अवॉर्ड दिए जाने पर भी विवाद रहा। कोलकाता बेस्ड क्रिटिक और ज्यूरी में शामिल देब बनर्जी ने इनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल की थी। उनका आरोप था कि पक्षपात के जरिए इन कैटेगरी में अवॉर्ड दिए गए हैं। किरण खैर का नेशनल अवॉर्ड विवादों से रहा बंगाली फिल्म बरीवाली के लिए किरण खैर को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था। इस फिल्म के नॉमिनेशन के दौरान भरे गए फॉर्म में कहा गया था कि किरण खैर ने अपनी आवाज खुद डब की है, हालांकि डबिंग आर्टिस्ट और एक्ट्रेस रीता कोइराला ने आरोप लगाए कि फिल्म में उन्होंने किरण खैर के लिए बंगाली डबिंग की थी, जिसको नॉमिनेशन फॉर्म में मेंशन नहीं किया गया था। 65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी में 68 विजेताओं ने सेरेमनी में आने से इनकार किया था 65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी 68 विजेताओं के सेरेमनी में न पहुंचने से विवादों में रही थी। विजेताओं को मिले इन्विटेशन कार्ड में
‘कच्चा बादाम गर्ल’ बनीं सीता तो मचा बवाल:अंजली अरोड़ा ने ट्रोलर्स को जवाब दिया, बोलीं- पुरानी छवि मेरी पूरी जिंदगी नहीं

अंजली अरोड़ा इन दिनों फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभाने को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके लुक और किरदार की तारीफ हो रही है, वहीं सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। वजह उनकी पुरानी सोशल मीडिया इमेज, खासकर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर वायरल हुईं डांसिंग रील्स हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजली ने ट्रोलिंग और पुरानी छवि पर बात की। वहीं श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने कहा कि किसी के किए गए काम का असर उसकी पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। ‘कच्चा बादाम’ वाली इमेज को लेकर ट्रोल हो रही हैं अंजली अंजली अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर डांसिंग रील्स से पहचान बनाई थी। खासतौर पर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर उनका डांस वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं। बाद में उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 1’ में हिस्सा लिया। अब जब वह ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभा रही हैं, सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग उनकी ग्लैमरस और बिंदास सोशल मीडिया इमेज की तुलना सीता के किरदार से कर रहे हैं। इसी वजह से उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि डांसिंग और ग्लैमरस इमेज के लिए पहचानी जाने वाली अंजली सीता जैसे पवित्र किरदार को कैसे निभा सकती हैं। कुछ कमेंट्स में उन्हें ‘कच्चा बादाम गर्ल’ कहकर ट्रोल किया गया, तो कुछ यूजर्स ने लिखा कि ‘सीता के रोल में शूर्पणखा’। अंजली बोलीं- ‘वो मेरी पूरी जिंदगी नहीं है’ ट्रोलिंग को लेकर अंजली ने दैनिक भास्कर से कहा कि लोगों के पास किसी को जज करने का अधिकार है, लेकिन किसी की पुरानी जिंदगी उसकी पूरी पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “लोगों का काम है जज करना और उनके पास हक है। जो चीजें हैं, वो हैं ही। हम किसी भी चीज को अपनी लाइफ का एक पार्ट कह सकते हैं, लेकिन वो हमारी पूरी लाइफ नहीं होती।” अंजली ने कहा कि अगर लोग उन्हें पुरानी सोशल मीडिया इमेज के लिए याद करते हैं तो वह भी ठीक है, लेकिन उन्होंने इसके अलावा भी बहुत काम किया है और आगे भी करना चाहती हैं। उनके मुताबिक, “मैं चाहती हूं कि लोग मेरी पर्सनालिटी को अलग रखकर इस सिनेमा में मेरे किरदार को देखें और फिर जज करें।” ‘सीता’ के किरदार को लेकर अंजली ने की तैयारी सीता का किरदार मिलने पर अंजली खुद हैरान थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि वह यह किरदार कैसे निभा पाएंगी और उन्हें ही सीता का रोल क्यों दिया गया। डायरेक्टर के विजन और भरोसे के बाद उन्होंने खुद पर काम शुरू किया। शूटिंग के दौरान उन्होंने सीता के किरदार की कई चीजें अपनाने की कोशिश की। अंजली के मुताबिक, सीता उनके लिए धैर्य, त्याग और सादगी की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद सीता ने धैर्य नहीं खोया और गुस्से में ऐसा फैसला नहीं लिया जिससे किसी और को नुकसान पहुंचे। ‘मैं आजकल की लड़की हूं, सीता से तुलना नहीं करूंगी’ जब अंजली से पूछा गया कि सीता के व्यक्तित्व से उनमें कितनी समानताएं हैं, उन्होंने खुद की तुलना सीता से करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह आज की पीढ़ी की लड़की हैं और उनके अपने विचार और लाइफस्टाइल हैं। हालांकि वह अपने धर्म और विश्वास से जुड़ी हुई हैं। अंजली ने कहा कि उनका विश्वास है कि जो उनका है, वह उनके पास जरूर आएगा और जो उनका नहीं है, वह पास आकर भी चला जाएगा। बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना जरूरी अंजली अरोड़ा ने आज की पीढ़ी की परवरिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक सोच और लाइफस्टाइल के साथ आगे बढ़ने की आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों की जानकारी भी होनी जरूरी है। अंजली ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अपने धर्म से जुड़े रहने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ना सिखाया है। उनका मानना है कि आज के माता-पिता को भी बच्चों को समझाना चाहिए कि वे किस संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार इंसान की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। व्यक्ति कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, उसके संस्कार उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बने रहते हैं। अंजली के मुताबिक, इंसान देश में रहे या विदेश में, किसी भी जगह काम करे या किसी भी तरह की जिंदगी जिए, उसके संस्कार हमेशा उसके साथ रहते हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही परिवार, धर्म, संस्कृति और अच्छे मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। देव शर्मा बोले- ट्रोलिंग किसी की जिंदगी पर डाल सकती है असर फिल्म में श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने ट्रोलिंग के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि रामायण से मिलने वाली सबसे बड़ी सीखों में से एक यह है कि इंसान को अपने हर काम के असर के बारे में सोचना चाहिए। देव ने कहा, “ट्रोलिंग या किसी का मजाक उड़ाना तब होता है, जब हम उसके आफ्टर इफेक्ट्स के बारे में नहीं समझते। हम उस समय काम कर देते हैं, लेकिन उसका इम्पैक्ट किसी इंसान की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है।” उन्होंने कहा कि रामायण और दूसरे ग्रंथों की सीख यही है कि इंसान जाने-अनजाने ऐसा काम न करे, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी प्रभावित हो। शील वर्मा बोले- रामायण को सुपरहीरो फिल्म की तरह नहीं दिखाया फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे शील वर्मा ने बताया कि ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ को ज्यादा वीएफएक्स और भव्यता के सहारे पेश करने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मेकर्स का फोकस रामायण की कहानी को सरलता और मूल भावना के साथ दिखाने पर रहा है। शील के मुताबिक, फिल्म को सुपरहीरो या मार्वल जैसी ग्रैंड फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि “सिंप्लिसिटी हम परोस रहे हैं। रामायण को रामायण की तरह दिखा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों ने बचपन से जिस रामायण को देखा और









