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ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

मराठी एक्टर पुष्कर जोग ने हाल ही में बताया कि 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ की शूटिंग के दौरान एक्टर ऋषि कपूर ने उन्हें डांट दिया था। उस समय पुष्कर की उम्र सिर्फ 7 साल थी। वह पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे और घटना के बाद रोने लगे थे। पुष्कर ने बताया कि इसके बाद नाना पाटेकर ने उनका बचाव किया। उन्होंने ऋषि कपूर को बच्चे से इस तरह बात करने पर फटकार लगाई थी। पुष्कर ने यह बात हाल ही में ‘गलाटा इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में बताई। पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे पुष्कर जोग ने कहा, ऋषि कपूर सर ने उस समय मुझे डांटा था। मैं सिर्फ 7 साल का बच्चा था। मुझे कुछ नहीं पता था। मैं पहली बार 100-150 लोगों वाले हिंदी फिल्म के सेट पर गया था।” उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर ने बिना ऑडिशन के उन्हें यह फिल्म दिलाई थी। नाना ने कहा था, “मेरा पुणे का बच्चा है, वो ही यह रोल करेगा।” पुष्कर ने कहा कि सेट पर सभी लोग ऋषि कपूर से डरे रहते थे। उन्होंने बताया, “मैं शूटिंग के लिए पहुंचा। पहले दिन मैंने देखा कि ऋषि कपूर सर बहुत रिजर्व रहते थे और ज्यादा बात नहीं करते थे। उनका एक अलग रुतबा था। सभी उनसे डरते थे। वह बहुत सीधे और सख्त थे। मैं भी डर गया था, क्योंकि वह काफी सख्त और डरावने लगते थे।” रिहर्सल के दौरान सिर पर गिरा दीं फूलों की पंखुड़ियां पुष्कर ने बताया कि यह घटना एक गाने की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस गाने में ऋषि कपूर, कोरियोग्राफर फराह खान और एक्ट्रेस पूजा भट्ट काम कर रहे थे। फराह खान ने उन्हें पहले ही अच्छे से काम करने के लिए कहा था, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर ऋषि कपूर नाराज हो सकते थे। पुष्कर ने उनसे कहा था कि वह अच्छा काम करेंगे। सीक्वेंस में पुष्कर एक गैरेज में काम करते हैं। ऋषि कपूर और पूजा भट्ट नई कार से वहां पहुंचते हैं। रिहर्सल शॉट के दौरान पुष्कर ने गलती से उन्हें दी गईं सभी फूलों की पंखुड़ियां ऋषि कपूर के सिर पर गिरा दीं। पुष्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उन्हें किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन कट के बाद उन्होंने मुझ पर गुस्सा किया। मैं वहीं रोने लगा। उन्होंने कहा, ‘तुम लोग इसे सेट पर किसे लेकर आए हो? यह कौन है? इसे यहां लाने से पहले कम से कम कुछ सिखा तो देते।”’ फराह खान ने संभाला, मां भी डर गई थीं पुष्कर के रोने के बाद फराह खान ने उन्हें शांत कराया और वैन में ले गईं। उन्होंने बताया कि उनकी मां भी सेट पर थीं और वह भी डर गई थीं। पुष्कर ने कहा, “उन्हें अक्सर गुस्सा आता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्यों। मैंने यह बात नाना सर को बताई, क्योंकि मैं उनके करीब था। उन्होंने पूरी बात सुनी और कहा कि वह कुछ करेंगे।” नाना पाटेकर अगले दिन ऋषि कपूर से भिड़े पुष्कर के मुताबिक, अगले दिन नाना पाटेकर की शूटिंग नहीं थी। इसके बावजूद वह ऋषि कपूर को फटकारने के लिए सेट पर आए। पुष्कर ने बताया, “उन्होंने ऋषि कपूर सर को खूब सुनाया और उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘आप चाहे जो भी हों, क्या आपको नहीं पता कि बच्चे से कैसे पेश आते हैं? वह 7 साल का बच्चा है। उसे टेक और रिहर्सल के बारे में कैसे पता होगा? आप उस पर क्यों चिल्ला रहे हैं?’” पुष्कर ने कहा कि नाना पाटेकर में ऋषि कपूर के सामने यह बात कहने की हिम्मत और दयालुता थी। उन्होंने आगे कहा, “भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, लेकिन मेरे पास उनके साथ जुड़ी यह अप्रिय याद है। हम सभी आज भी उनसे प्यार और सम्मान करते हैं।” ‘हम दोनों’ में ये कलाकार थे 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ में ऋषि कपूर, नाना पाटेकर, पूजा भट्ट, आलोक नाथ और मोहन जोशी ने काम किया था। यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म दो सौतेले भाइयों की कहानी थी, जिन्हें अपनी विरासत के लिए साथ आना पड़ता है। इस दौरान उन्हें अपने लालची रिश्तेदारों की ओर से हत्या की कोशिशों का सामना करना पड़ता है। फिल्म का निर्देशन शफी इनामदार ने किया था। इसे रवि मल्होत्रा, टीनू पांडे और शब्बुद्दीन चौधरी ने आर एम फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। कौन है पुष्कर जोग? पुष्कर जोग मराठी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता हैं। वह एक्टर होने के साथ-साथ डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और डांसर भी हैं। उन्होंने मराठी फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में भी काम किया है। पुष्कर ने करीब 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग शुरू की थी। बचपन में उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डेंटिस्ट्री की डिग्री हासिल की। हालांकि, बाद में उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर चुना। साल 2007 में फिल्म ‘जबरदस्त’ से पुष्कर ने बतौर लीड एक्टर मराठी सिनेमा में कदम रखा। फिल्म की सफलता से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘सत्या’, ‘ती आणि ती’, ‘अदृश्य’, ‘सासूचा स्वयंवर’ और ‘बापमाणूस’ जैसी फिल्मों में काम किया। पुष्कर ने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स में निर्देशन और प्रोडक्शन का काम भी किया। इससे फिल्म इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक मल्टी-टैलेंटेड कलाकार के तौर पर बनी। हिंदी सिनेमा में भी पुष्कर ने काम किया। वह संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘ईएमआई: लिया है तो चुकाना पड़ेगा’ में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने ‘हफ! इट्स टू मच’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’ और ‘गुडबड्डी गड़बड़ी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। टीवी पर भी पुष्कर ने अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2018 में उन्होंने ‘बिग बॉस मराठी’ के पहले सीजन में हिस्सा लिया। वह इस शो के फर्स्ट रनर-अप रहे। पुष्कर ने ‘माझा अराउंड द वर्ल्ड’ नाम का ट्रैवल शो होस्ट और प्रोड्यूस भी किया।

ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

ऋषि कपूर ने बाल कलाकार को डांटा था:7 साल के पुष्कर जोग रो पड़े थे, फिर नाना पाटेकर ने ऋषि को फटकार लगाई थी

मराठी एक्टर पुष्कर जोग ने हाल ही में बताया कि 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ की शूटिंग के दौरान एक्टर ऋषि कपूर ने उन्हें डांट दिया था। उस समय पुष्कर की उम्र सिर्फ 7 साल थी। वह पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे और घटना के बाद रोने लगे थे। पुष्कर ने बताया कि इसके बाद नाना पाटेकर ने उनका बचाव किया। उन्होंने ऋषि कपूर को बच्चे से इस तरह बात करने पर फटकार लगाई थी। पुष्कर ने यह बात हाल ही में ‘गलाटा इंडिया’ को दिए इंटरव्यू में बताई। पहली बार हिंदी फिल्म के सेट पर पहुंचे थे पुष्कर जोग ने कहा, ऋषि कपूर सर ने उस समय मुझे डांटा था। मैं सिर्फ 7 साल का बच्चा था। मुझे कुछ नहीं पता था। मैं पहली बार 100-150 लोगों वाले हिंदी फिल्म के सेट पर गया था।” उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर ने बिना ऑडिशन के उन्हें यह फिल्म दिलाई थी। नाना ने कहा था, “मेरा पुणे का बच्चा है, वो ही यह रोल करेगा।” पुष्कर ने कहा कि सेट पर सभी लोग ऋषि कपूर से डरे रहते थे। उन्होंने बताया, “मैं शूटिंग के लिए पहुंचा। पहले दिन मैंने देखा कि ऋषि कपूर सर बहुत रिजर्व रहते थे और ज्यादा बात नहीं करते थे। उनका एक अलग रुतबा था। सभी उनसे डरते थे। वह बहुत सीधे और सख्त थे। मैं भी डर गया था, क्योंकि वह काफी सख्त और डरावने लगते थे।” रिहर्सल के दौरान सिर पर गिरा दीं फूलों की पंखुड़ियां पुष्कर ने बताया कि यह घटना एक गाने की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस गाने में ऋषि कपूर, कोरियोग्राफर फराह खान और एक्ट्रेस पूजा भट्ट काम कर रहे थे। फराह खान ने उन्हें पहले ही अच्छे से काम करने के लिए कहा था, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर ऋषि कपूर नाराज हो सकते थे। पुष्कर ने उनसे कहा था कि वह अच्छा काम करेंगे। सीक्वेंस में पुष्कर एक गैरेज में काम करते हैं। ऋषि कपूर और पूजा भट्ट नई कार से वहां पहुंचते हैं। रिहर्सल शॉट के दौरान पुष्कर ने गलती से उन्हें दी गईं सभी फूलों की पंखुड़ियां ऋषि कपूर के सिर पर गिरा दीं। पुष्कर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि उन्हें किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन कट के बाद उन्होंने मुझ पर गुस्सा किया। मैं वहीं रोने लगा। उन्होंने कहा, ‘तुम लोग इसे सेट पर किसे लेकर आए हो? यह कौन है? इसे यहां लाने से पहले कम से कम कुछ सिखा तो देते।”’ फराह खान ने संभाला, मां भी डर गई थीं पुष्कर के रोने के बाद फराह खान ने उन्हें शांत कराया और वैन में ले गईं। उन्होंने बताया कि उनकी मां भी सेट पर थीं और वह भी डर गई थीं। पुष्कर ने कहा, “उन्हें अक्सर गुस्सा आता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्यों। मैंने यह बात नाना सर को बताई, क्योंकि मैं उनके करीब था। उन्होंने पूरी बात सुनी और कहा कि वह कुछ करेंगे।” नाना पाटेकर अगले दिन ऋषि कपूर से भिड़े पुष्कर के मुताबिक, अगले दिन नाना पाटेकर की शूटिंग नहीं थी। इसके बावजूद वह ऋषि कपूर को फटकारने के लिए सेट पर आए। पुष्कर ने बताया, “उन्होंने ऋषि कपूर सर को खूब सुनाया और उन्हें उसी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘आप चाहे जो भी हों, क्या आपको नहीं पता कि बच्चे से कैसे पेश आते हैं? वह 7 साल का बच्चा है। उसे टेक और रिहर्सल के बारे में कैसे पता होगा? आप उस पर क्यों चिल्ला रहे हैं?’” पुष्कर ने कहा कि नाना पाटेकर में ऋषि कपूर के सामने यह बात कहने की हिम्मत और दयालुता थी। उन्होंने आगे कहा, “भगवान उनकी आत्मा को शांति दे, लेकिन मेरे पास उनके साथ जुड़ी यह अप्रिय याद है। हम सभी आज भी उनसे प्यार और सम्मान करते हैं।” ‘हम दोनों’ में ये कलाकार थे 1995 की फिल्म ‘हम दोनों’ में ऋषि कपूर, नाना पाटेकर, पूजा भट्ट, आलोक नाथ और मोहन जोशी ने काम किया था। यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म दो सौतेले भाइयों की कहानी थी, जिन्हें अपनी विरासत के लिए साथ आना पड़ता है। इस दौरान उन्हें अपने लालची रिश्तेदारों की ओर से हत्या की कोशिशों का सामना करना पड़ता है। फिल्म का निर्देशन शफी इनामदार ने किया था। इसे रवि मल्होत्रा, टीनू पांडे और शब्बुद्दीन चौधरी ने आर एम फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। कौन है पुष्कर जोग? पुष्कर जोग मराठी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता हैं। वह एक्टर होने के साथ-साथ डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और डांसर भी हैं। उन्होंने मराठी फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में भी काम किया है। पुष्कर ने करीब 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग शुरू की थी। बचपन में उन्होंने मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और डेंटिस्ट्री की डिग्री हासिल की। हालांकि, बाद में उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर चुना। साल 2007 में फिल्म ‘जबरदस्त’ से पुष्कर ने बतौर लीड एक्टर मराठी सिनेमा में कदम रखा। फिल्म की सफलता से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘सत्या’, ‘ती आणि ती’, ‘अदृश्य’, ‘सासूचा स्वयंवर’ और ‘बापमाणूस’ जैसी फिल्मों में काम किया। पुष्कर ने सिर्फ एक्टिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी फिल्मों और दूसरे प्रोजेक्ट्स में निर्देशन और प्रोडक्शन का काम भी किया। इससे फिल्म इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक मल्टी-टैलेंटेड कलाकार के तौर पर बनी। हिंदी सिनेमा में भी पुष्कर ने काम किया। वह संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘ईएमआई: लिया है तो चुकाना पड़ेगा’ में नजर आए। इसके अलावा उन्होंने ‘हफ! इट्स टू मच’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’ और ‘गुडबड्डी गड़बड़ी’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। टीवी पर भी पुष्कर ने अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2018 में उन्होंने ‘बिग बॉस मराठी’ के पहले सीजन में हिस्सा लिया। वह इस शो के फर्स्ट रनर-अप रहे। पुष्कर ने ‘माझा अराउंड द वर्ल्ड’ नाम का ट्रैवल शो होस्ट और प्रोड्यूस भी किया।

शोभिनव सत्या बोले- डायरेक्टर की जिद पर बनी हनुमान अंश:नीम करौली बाबा का रोल निभाने वाले एक्टर ने कहा- टीम छोड़ने लगी थी

शोभिनव सत्या बोले- डायरेक्टर की जिद पर बनी हनुमान अंश:नीम करौली बाबा का रोल निभाने वाले एक्टर ने कहा- टीम छोड़ने लगी थी

मुंबई से यूपी आने के लिए पूरी टीम को ट्रेन से सफर करना था लेकिन टिकट नहीं मिल रहा था। टीम ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। टीम मेंबर भी काम छोड़कर जाने लगे थे। लेकिन डायरेक्टर की जिद थी कि फिल्म हर हाल में पूरी करेंगे। ये बातें फिल्म हनुमान अंश में नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्या ने कही। बुधवार को हनुमान अंश फिल्म की टीम कानपुर में थी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में टीम ने मीडिया से बातचीत के साथ छात्रों से संवाद भी किया। लोग काम छोड़कर जाने लगे थे अभिनेता शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के आशीर्वाद के बिना इस किरदार को निभाना और एक भी शब्द बोल पाना मुमकिन नहीं था। शोभिनव सत्या ने कहा- बाबा के किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि आस्था और जिम्मेदारी का विषय था। फिल्म में किरदार को जीवंत करने के लिए टीम ने काफी मेहनत की है। केवल डिवोशनल फिल्म नहीं, कई सीन देखने को मिलेंगे फिल्म के निर्देशक, प्रोड्यूसर और लेखक विशाल चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। यदि फिल्म दर्शकों को पसंद आती है और अच्छा प्रदर्शन करती है तो इसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हनुमान अंश केवल डिवोशनल फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे सीन हैं जो दर्शकों को अलग अनुभव देंगे। कानपुर के कई कलाकार भी फिल्म का हिस्सा विशाल चतुर्वेदी ने बताया- फिल्म में कानपुर और आसपास के कई कलाकारों ने काम किया है। फिल्म की कहानी नीम करौली बाबा यानी महाराज जी से जुड़ी है। इसमें महाराज जी की कहानी के साथ उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को पर्दे पर दिखाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में महाराज जी का मैजिक और पूरी टीम की मेहनत देखने को मिलेगी। फिल्म का दूसरा पार्ट भी आएगा फिल्म के राइटर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 साल से महाराज जी के बारे में पढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में उनके साथ कुछ ऐसे वाकिये हुए, जिनसे उन्हें महाराज जी पर फिल्म बनाने में रुचि पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अभी कहानी कानपुर तक नहीं पहुंची है और फिल्म में वर्ष 1943 तक की कहानी को दिखाया गया है। उन्होंने कहा- आगे बनने वाली फिल्मों में महाराज जी से जुड़े दूसरे किस्सों और प्रसंगों को भी दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से- ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है। नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला कि बाबा का सितंबर 1973 में निधन हो चुका था। जॉब्स फिर भी भारत में करीब सात महीने रहे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाला अनुभव माना। मार्क जुकरबर्ग भी मिलने पहुंचे थेः 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत आए और कैंची धाम गए। उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि जब फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत जाकर उस मंदिर/आश्रम को देखने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे। हॉलीवुड एक्ट्रेस थीं नीम करोली बाबा से प्रेरितः हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी नीम करौली बाबा से प्रभावित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्होंने बाबा की एक तस्वीर देखी और उन्हें उनके प्रति एक गहरा आकर्षण महसूस हुआ। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट ने लिखी बुकः अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और नीम करौली बाबा के शिष्य बने। बाबा ने उन्हें राम दास नाम दिया। इसके बाद राम दास अमेरिका लौटे और उन्होंने पश्चिमी दुनिया में बाबा की शिक्षाओं और भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध किताब ‘बी हेयर नाऊ’ ने लाखों लोगों को ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया। ————————– यह खबर भी पढ़िए- योगी बोले- हम उनमें से नहीं, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं, बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो जहन्नुम जाओगे सीएम योगी बुधवार को वाराणसी में थे। यहां उन्होंने पहले की सपा सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा- घर से बाहर कैसे निकलें, 9 साल पहले यह सवाल था। कहां तक जाना है, आज यह सवाल है। पहले घर से बाहर निकलने में बेटियां डरती थीं, आज ऐसी कोई चिंता नहीं।हमने कह दिया है कि बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो दो ही जगह होगी- जेल या जहन्नुम। हम उन लोगों में नहीं हैं कि वोटबैंक के लिए किसी माफिया के सामने गिड़गिड़ाएं। पढ़ें पूरी खबर…

नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं

नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

शिवराजकुमार ने हिंदी को कहा राष्ट्रीय भाषा:विवाद होने पर माफी मांगी, कहा- हिंदी उनकी भाषा, हमारे लिए हमारी भाषा कन्नड़ सबसे जरूरी; जानिए पूरा विवाद

शिवराजकुमार ने हिंदी को कहा राष्ट्रीय भाषा:विवाद होने पर माफी मांगी, कहा- हिंदी उनकी भाषा, हमारे लिए हमारी भाषा कन्नड़ सबसे जरूरी; जानिए पूरा विवाद

कन्नड़ स्टार शिवराजकुमार ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने वाले अपने पुराने बयान पर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद उन्होंने सफाई दी कि वह भारतीय भाषाओं को लेकर उलझ गए थे। शिवराजकुमार ने कहा कि उनका मतलब हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषाओं में से एक’ कहना था, लेकिन उन्होंने गलत शब्द का इस्तेमाल कर दिया। उन्होंने यह बात अपनी आने वाली फिल्म ‘ओरिजिनल मॉन्स्टर’ के प्रमोशन के दौरान कही थी। मीडिया से बातचीत में शिवराजकुमार ने कहा, “मैंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा कहा। यह भाषाओं में से एक है। हमारे लिए हमारी भाषा यानी कन्नड़ हमेशा महत्वपूर्ण है। पता नहीं, मैं भारतीय भाषाओं में से एक को लेकर उलझ गया था। मैं माफी मांगता हूं, मुझे नहीं पता था।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी भाषा हिंदी है और हमारी भाषा कन्नड़ है। उनकी भाषा उनके लिए महत्वपूर्ण है। इसी तरह हमारी भाषा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।” कैसे शुरू हुआ विवाद? विवाद शिवराजकुमार के उस पुराने बयान के बाद शुरू हुआ, जब उनसे पैन-इंडिया प्रोजेक्ट के लिए हिंदी डायलॉग बोलने को लेकर सवाल पूछा गया था। तब उन्होंने कहा था, “क्यों? हिंदी मेरी दूसरी भाषा है। मैं हिंदी बोल सकता हूं। आपको क्या लगा? यह आसान भाषा है, राष्ट्रीय भाषा है। हमें यह कैसे नहीं पता होगा? हमें पता है।” उनके इस बयान पर इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ कहने पर उनकी आलोचना की। वहीं, कुछ फैन्स ने उनका बचाव भी किया। शिवाराजकुमार का बयान इसलिए भी विवादों में आ गया, क्योंकि लंबे समय से साउथ में भाषा पर विवाद और बहस जारी है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में लोग हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते चलन का विरोध कर रहे हैं। वह मानते हैं कि कन्नड़ कर्नाटक की प्राथमिक सार्वजनिक भाषा होनी चाहिए, जबकि हिंदी और अंग्रेजी का बढ़ता इस्तेमाल स्थानीय भाषा के लिए जगह कम कर सकता है। कर्नाटक में ये विवाद तब सबसे बड़ा हुआ, जब लोकल संगठनों ने साइन बोर्ड में कन्नड़ लिखना अनिवार्य कर दिया और हिंदी, अंग्रेजी के साइनबोर्ड तोड़े। संजय दत्त भी मराठी बोलने से इनकार कर विवादों में महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मैं 6 साल तक येरवडा जेल में रहा, तब भी मराठी भाषा नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के बयान पर अब विवाद हो गया है। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा, लेकिन 67 साल के एक्टर ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑटो ड्राइवरों पर तो मराठी बोलने का दबाव बनाया जाता है। बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।”

अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। EB-5 वीजा के लिए आवेदन करने वालों में भारतीय चीन से आगे निकल गए हैं। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से 9,875 आवेदन आए। EB-5 अमेरिका का इन्वेस्टमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन प्रोग्राम है। इसके तहत अमेरिका में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मिलता है। इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता है EB-5 EB-5 वीजा अमेरिका में निवेश करने पर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता खोलता है। H-1B वीजा को लेकर सख्ती बढ़ने के बीच कुछ भारतीयों की दिलचस्पी EB-5 में बढ़ी है। हालांकि, EB-5 मिलने से सीधे अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती। पहले ग्रीन कार्ड के लिए पात्रता हासिल करनी होती है। अमेरिका में रहने के लिए आवेदक को EB-5 के सभी नियम और इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। प्रोफेसर-स्कॉलर का EB-1 कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में EB-1 वीजा का कोटा इस साल तय समय से पहले ही पूरा हो गया। इस कैटेगरी में हर साल करीब 7 हजार वीजा उपलब्ध होते हैं। इस बार यह कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया, जबकि इसकी आखिरी तारीख 30 सितंबर थी। EB-1 में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग आवेदन कर सकते हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी ट्रम्प ने 2025 में गोल्ड कार्ड स्कीम लेकर आए थे। इसे उन्होंने EB-5 के विकल्प के तौर पर पेश किया था। इसका मकसद अमीर विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले अमेरिका में स्थायी निवास का रास्ता देना था। गोल्ड कार्ड को अब तक ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक ने बताया था कि गोल्ड कार्ड में 338 लोगों ने रुचि दिखाई, 165 ने आवेदन फीस भरी और सिर्फ एक व्यक्ति को गोल्ड कार्ड मिला। यही वजह है कि EB-5 में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नए राष्ट्रपति इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकते हैं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा: ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल को लेकर विवाद हो गया है। इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट रैपरिया बालम ने आरोप लगाया है कि फिल्म में यह गाना उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एक्सेल एंटरटेनमेंट को लीगल नोटिस भेजा है। रैपरिया बालम का कहना है कि वह ‘शूरवीर’ गाने के कॉपीराइट मालिक हैं। यह गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है। उनका दावा है कि फिल्म में इसे मुन्ना भैया के हिंसा, गाली-गलौज और ड्रग्स वाले किरदार के साथ इस्तेमाल किया गया है। रैपरिया बालम ने गाना हटाने, माफी मांगने और महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनाने की मांग की है। लीगल नोटिस में ये तीनों मांगें शामिल हैं। लीगल नोटिस में तीन मांगें गाना कंपोज करने और इसे आवाज देने वाले रैपरिया बालम ने लीगल नोटिस भेजकर तीन मांग की हैं। पहली मांग- मेकर्स को फिल्म से ये गाना हटाना होगा। दूसरी मांग- मेकर्स को हिंसक सीन में महाराणा प्रताप पर बना गाना रखने पर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी। तीसरी मांग- गांव में महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनवाना होगा। जानिए क्या है पूरा विवाद? फिल्म मिर्जापुर 4 सितंबर को रिलीज हुई, जिसके एक हिंसक सीन में शूरवीर गाना दिखाया गया। फिल्म रिलीज के बाद राजस्थान के मशहूर सिंगर रैपरिया बालम ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि ये गाना बिना उनकी इजाजत के फिल्म में इस्तेमाल हुआ है। ये गाना महाराणा प्रताप की वीरता पर बनाया गया है, लेकिन मिर्जापुर के मेकर्स ने इसका इस्तेमाल विलेन का महिमामंडन करने के लिए किया। गाना रिलीज करने वाली म्यूजिक कंपनी ने मिर्जापुर टीम को दिया कॉपीराइट सिंगर रैपरिया बालम का दावा है कि गाने के कॉपी राइट्स उनके पास हैं, हालांकि ये गाना रिलीज करने वाले ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने इस दावे का खंडन किया। इतना ही नहीं कंपनी ने विवाद के बीच मिर्जापुर के मेकर्स को इस गाने के राइट्स भी दे दिए हैं। कॉपीराइट को लेकर रैपरिया बालम का दावा रैपरिया बालम के भाई ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया है, ‘गाना ट्रूपर रिकॉर्ड्स के चैनल पर है, लेकिन कॉपीराइट हमारे पास है। अगर इसे फिल्म में इस्तेमाल करना है, तो हमसे अनुमति लेनी होगी। वे इसे लाइसेंस नहीं कर सकते। यह गैरकानूनी है। रैपरिया बालम और ट्रूपर रिकॉर्ड्स पहले साथ काम करते थे। दस्तावेजों में रैपरिया बालम पार्टनर नहीं थे, लेकिन वह उनके साथ काम कर रहे थे। समझौते के मुताबिक, कुछ साल बाद वह रिकॉर्ड्स में कानूनी तौर पर 50% पार्टनर बनने वाले थे।’ उन्होंने बताया कि पार्टनरशिप होने से पहले यह गाना रिलीज हो गया था। उनके मुताबिक, रैपरिया बालम को उस चैनल के लिए बनाए गए किसी भी गाने का भुगतान नहीं मिला। बाद में जब पार्टनरशिप को लेकर बात शुरू हुई, तो ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने मामला टालना शुरू कर दिया। इन गानों को लेकर कभी NOC भी साइन नहीं हुआ। रैपरिया बालम के भाई ने कहा कि बाद में उन्होंने अपना चैनल शुरू किया और गानों के कॉपीराइट अपने असली नाम अशोक मंडा से हासिल किए। उन्होंने कहा, “‘शूरवीर’ से जुड़े सभी कॉपीराइट दस्तावेज रैपरिया बालम के असली नाम अशोक मंडा पर हैं। उन्होंने इस गाने का कॉपीराइट अपने नाम कराया था। बाद में हमने ‘शूरवीर’ सीरीज में 9-10 और गाने बनाए। इन सभी के कॉपीराइट सर्टिफिकेट हमारे पास हैं। लेखक की ओर से NOC भी हमारे पास है।” जिन सीन पर गाना रखा, उससे आपत्ति रैपरिया बालम का कहना है कि मामला केवल कॉपीराइट का नहीं है। उनके मुताबिक, ‘शूरवीर’ सीरीज का मकसद बच्चों को भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक शख्सियतों की कहानियां संगीत के जरिए समझाना था। ऐसे में शूरवीर की कहानी को किसी फिल्म के हिंसक और गोली चलाने वाले सीन में इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। उनके भाई ने कहा, “ये गाने कमर्शियल नहीं हैं। हमारा मकसद था कि अगली पीढ़ी हमारे इतिहास से जुड़े। हम चाहते थे कि बच्चे रैप म्यूजिक के जरिए इतिहास सीखें और अपने नेताओं की कहानियां जानें।” उन्होंने कहा कि हर कलाकार का सपना होता है कि उसका गाना किसी अच्छी फिल्म में आए और यह उनका भी सपना था। लेकिन इस सीरीज के साथ उनकी कुछ विचारधाराएं जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “मिर्जापुर में मुन्ना भैया गाली दे रहे हैं और ड्रग्स ले रहे हैं। उसके किरदार को दिखाने के लिए बैकग्राउंड म्यूजिक में यह गाना लगाया गया है। यह हमारी राजस्थानी संस्कृति और महाराणा प्रताप का अपमान है। अगर कोई बच्चा यह देखेगा, तो वह मुन्ना भैया जैसे किरदार को महाराणा प्रताप से जोड़ सकता है। इससे गलत धारणा बनेगी।” उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि लाइसेंस लेने से पहले उन्हें सही दस्तावेज जांचने चाहिए थे। उनके मुताबिक, एक्सेल एंटरटेनमेंट की गलती यह है कि उसने महाराणा प्रताप को समर्पित गाने को एक गुंडे के किरदार को दिखाने के लिए चुना। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क रैपरिया बालम और उनके परिवार ने ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर्स फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क करने की कोशिश की। परिवार के मुताबिक, फरहान अख्तर ने जवाब नहीं दिया। रितेश सिधवानी की टीम ने कहा कि वह उनसे संपर्क करेगी। परिवार का कहना है कि वह टीम से नहीं, बल्कि फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से सीधे बात करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम समझना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। हम चाहते हैं कि गाना ‘मिर्जापुर’ से हटा दिया जाए। यह इस फिल्म के लिए नहीं बना है। इसे गलत तरीके से दिखाने से हमारी भावनाओं और विचारधारा को ठेस पहुंच रही है।” परिवार ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस गाने को फिल्म में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। उसने ट्रूपर रिकॉर्ड्स से भी बात करने से इनकार किया है।

मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

मिर्जापुर मेकर्स को लीगल नोटिस:बिना इजाजत शूरवीर गाना इस्तेमाल करने के आरोप; ऑरिजिनल सिंगर ने सार्वजनिक माफी, गाना हटाने की मांग की, जानिए पूरा विवाद

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल को लेकर विवाद हो गया है। इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट रैपरिया बालम ने आरोप लगाया है कि फिल्म में यह गाना उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एक्सेल एंटरटेनमेंट को लीगल नोटिस भेजा है। रैपरिया बालम का कहना है कि वह ‘शूरवीर’ गाने के कॉपीराइट मालिक हैं। यह गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है। उनका दावा है कि फिल्म में इसे मुन्ना भैया के हिंसा, गाली-गलौज और ड्रग्स वाले किरदार के साथ इस्तेमाल किया गया है। रैपरिया बालम ने गाना हटाने, माफी मांगने और महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनाने की मांग की है। लीगल नोटिस में ये तीनों मांगें शामिल हैं। लीगल नोटिस में तीन मांगें गाना कंपोज करने और इसे आवाज देने वाले रैपरिया बालम ने लीगल नोटिस भेजकर तीन मांग की हैं। पहली मांग- मेकर्स को फिल्म से ये गाना हटाना होगा। दूसरी मांग- मेकर्स को हिंसक सीन में महाराणा प्रताप पर बना गाना रखने पर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी। तीसरी मांग- गांव में महाराणा प्रताप के नाम पर स्कूल बनवाना होगा। जानिए क्या है पूरा विवाद? फिल्म मिर्जापुर 4 सितंबर को रिलीज हुई, जिसके एक हिंसक सीन में शूरवीर गाना दिखाया गया। फिल्म रिलीज के बाद राजस्थान के मशहूर सिंगर रैपरिया बालम ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि ये गाना बिना उनकी इजाजत के फिल्म में इस्तेमाल हुआ है। ये गाना महाराणा प्रताप की वीरता पर बनाया गया है, लेकिन मिर्जापुर के मेकर्स ने इसका इस्तेमाल विलेन का महिमामंडन करने के लिए किया। गाना रिलीज करने वाली म्यूजिक कंपनी ने मिर्जापुर टीम को दिया कॉपीराइट सिंगर रैपरिया बालम का दावा है कि गाने के कॉपी राइट्स उनके पास हैं, हालांकि ये गाना रिलीज करने वाले ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने इस दावे का खंडन किया। इतना ही नहीं कंपनी ने विवाद के बीच मिर्जापुर के मेकर्स को इस गाने के राइट्स भी दे दिए हैं। कॉपीराइट को लेकर रैपरिया बालम का दावा रैपरिया बालम के भाई ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में बताया है, ‘गाना ट्रूपर रिकॉर्ड्स के चैनल पर है, लेकिन कॉपीराइट हमारे पास है। अगर इसे फिल्म में इस्तेमाल करना है, तो हमसे अनुमति लेनी होगी। वे इसे लाइसेंस नहीं कर सकते। यह गैरकानूनी है। रैपरिया बालम और ट्रूपर रिकॉर्ड्स पहले साथ काम करते थे। दस्तावेजों में रैपरिया बालम पार्टनर नहीं थे, लेकिन वह उनके साथ काम कर रहे थे। समझौते के मुताबिक, कुछ साल बाद वह रिकॉर्ड्स में कानूनी तौर पर 50% पार्टनर बनने वाले थे।’ उन्होंने बताया कि पार्टनरशिप होने से पहले यह गाना रिलीज हो गया था। उनके मुताबिक, रैपरिया बालम को उस चैनल के लिए बनाए गए किसी भी गाने का भुगतान नहीं मिला। बाद में जब पार्टनरशिप को लेकर बात शुरू हुई, तो ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने मामला टालना शुरू कर दिया। इन गानों को लेकर कभी NOC भी साइन नहीं हुआ। रैपरिया बालम के भाई ने कहा कि बाद में उन्होंने अपना चैनल शुरू किया और गानों के कॉपीराइट अपने असली नाम अशोक मंडा से हासिल किए। उन्होंने कहा, “‘शूरवीर’ से जुड़े सभी कॉपीराइट दस्तावेज रैपरिया बालम के असली नाम अशोक मंडा पर हैं। उन्होंने इस गाने का कॉपीराइट अपने नाम कराया था। बाद में हमने ‘शूरवीर’ सीरीज में 9-10 और गाने बनाए। इन सभी के कॉपीराइट सर्टिफिकेट हमारे पास हैं। लेखक की ओर से NOC भी हमारे पास है।” जिन सीन पर गाना रखा, उससे आपत्ति रैपरिया बालम का कहना है कि मामला केवल कॉपीराइट का नहीं है। उनके मुताबिक, ‘शूरवीर’ सीरीज का मकसद बच्चों को भारतीय इतिहास और ऐतिहासिक शख्सियतों की कहानियां संगीत के जरिए समझाना था। ऐसे में शूरवीर की कहानी को किसी फिल्म के हिंसक और गोली चलाने वाले सीन में इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। उनके भाई ने कहा, “ये गाने कमर्शियल नहीं हैं। हमारा मकसद था कि अगली पीढ़ी हमारे इतिहास से जुड़े। हम चाहते थे कि बच्चे रैप म्यूजिक के जरिए इतिहास सीखें और अपने नेताओं की कहानियां जानें।” उन्होंने कहा कि हर कलाकार का सपना होता है कि उसका गाना किसी अच्छी फिल्म में आए और यह उनका भी सपना था। लेकिन इस सीरीज के साथ उनकी कुछ विचारधाराएं जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “मिर्जापुर में मुन्ना भैया गाली दे रहे हैं और ड्रग्स ले रहे हैं। उसके किरदार को दिखाने के लिए बैकग्राउंड म्यूजिक में यह गाना लगाया गया है। यह हमारी राजस्थानी संस्कृति और महाराणा प्रताप का अपमान है। अगर कोई बच्चा यह देखेगा, तो वह मुन्ना भैया जैसे किरदार को महाराणा प्रताप से जोड़ सकता है। इससे गलत धारणा बनेगी।” उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि लाइसेंस लेने से पहले उन्हें सही दस्तावेज जांचने चाहिए थे। उनके मुताबिक, एक्सेल एंटरटेनमेंट की गलती यह है कि उसने महाराणा प्रताप को समर्पित गाने को एक गुंडे के किरदार को दिखाने के लिए चुना। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क रैपरिया बालम और उनके परिवार ने ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर्स फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से संपर्क करने की कोशिश की। परिवार के मुताबिक, फरहान अख्तर ने जवाब नहीं दिया। रितेश सिधवानी की टीम ने कहा कि वह उनसे संपर्क करेगी। परिवार का कहना है कि वह टीम से नहीं, बल्कि फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी से सीधे बात करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम समझना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। हम चाहते हैं कि गाना ‘मिर्जापुर’ से हटा दिया जाए। यह इस फिल्म के लिए नहीं बना है। इसे गलत तरीके से दिखाने से हमारी भावनाओं और विचारधारा को ठेस पहुंच रही है।” परिवार ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस गाने को फिल्म में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा। उसने ट्रूपर रिकॉर्ड्स से भी बात करने से इनकार किया है।

बेटी दुआ के बर्थडे पर दीपिका-रणवीर ने कराया फोटोशूट:मां का बेबी बंप निहारती नजर आईं, पिता के साथ मस्ती की; जल्द हो सकती है दीपिका की डिलीवरी

बेटी दुआ के बर्थडे पर दीपिका-रणवीर ने कराया फोटोशूट:मां का बेबी बंप निहारती नजर आईं, पिता के साथ मस्ती की; जल्द हो सकती है दीपिका की डिलीवरी

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह जल्द ही अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने वाले हैं। दूसरी बच्चे का ऐलान इस साल की शुरुआत में करने के बाद कपल ने मंगलवार को फैमिली फोटोशूट की कुछ खूबसूरत तस्वीरें शेयर की हैं। दीपिका-रणवीर के फोटोशूट में उनकी बेटी दुआ भी नजर आ रही हैं। तस्वीरों में दीपिका और रणवीर के साथ दुआ ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। तस्वीरों के साथ रणवीर सिंह ने कैप्शन में लिखा है, “बेबी दुआ और हमारे दिल बड़े हो रहे हैं! आपकी दुआओं के लिए धन्यवाद।” देखिए रणवीर सिंह- दीपिका की खूबसूरत फैमिली फोटोज- सोशल मीडिया यूजर्स ने दुआ की नई तस्वीर की तुलना दीपिका और रणवीर की पुरानी तस्वीरों से की। ज्यादातर लोगों का कहना था कि दुआ बिल्कुल रणवीर जैसी दिखती हैं। जल्द हो सकती है दीपिका की डिलीवरी दीपिका पादुकोण का तस्वीरों में बड़ा बेबी बंप नजर आया है। इससे पहले पिछली प्रेग्नेंसी में भी मेटरनिटी फोटोशूट की तस्वीरें पोस्ट करने के महज एक हफ्ते बाद ही दीपिका ने बेटी को जन्म दिया था। इस बार भी यही हो सकता है। दीपिका ने अप्रैल में प्रेग्नेंसी अनाउंस की, जिसके बाद अब वह 9वें महीने के करीब हो सकती हैं। 19 अप्रैल को की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने 19 अप्रैल को दूसरी बार पेरेंट्स बनने की गुड न्यूज दी थी। तब भी कपल ने बेटी दुआ की प्रेग्नेंसी किट पकड़े हुए तस्वीर शेयर की थी। सितंबर 2024 में हुआ था दुआ का जन्म दीपिका पादुकोण ने साल 2024 की शुरुआत में प्रेग्नेंसी अनाउंस की, जिसके बाद 8 सितंबर 2024 को उनके घर बेटी का जन्म हुआ था। नवंबर 2024 में कपल ने बेटी का नाम दुआ रखा। शुरुआत में दीपिका-रणवीर ने बेटी की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की थीं। दीवाली के मौके पर दीपिका रणवीर ने फैमिलो फोटोज शेयर कर दुआ का चेहरा रिवील किया था। देखिए दीपिका की पिछली प्रेग्नेंसी की तस्वीरें-