‘टुकड़े-टुकड़े गठबंधन को अलविदा’: राघव चड्ढा के पार्टी में शामिल होने के बाद बीजेपी का विपक्ष पर तंज | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 14:38 IST बीजेपी ने राघव चड्ढा और छह पूर्व AAP सांसदों को शामिल किया, जिससे राज्यसभा में उसकी ताकत बढ़ गई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (दाएं) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा से मुलाकात की। (पीटीआई) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास को चिह्नित करते हुए राघव चड्ढा और छह अन्य पूर्व AAP सांसदों का अपने पाले में स्वागत किया है। पार्टी ने कहा कि यह कदम ”टुकड़े-टुकड़े इंडी गठबंधन को अलविदा” का संकेत है। भाजपा नेतृत्व ने इस घटनाक्रम को जश्न का क्षण बताया, क्योंकि राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या सात बढ़ गई है। पार्टी के अनुसार, अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने चड्ढा और छह सांसदों के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, जिससे भाजपा संसदीय दल में उनके प्रवेश को औपचारिक रूप मिल गया है। बीजेपी ने विपक्षी गठबंधन पर साधा निशाना अपने संदेश में, रिजिजू ने विपक्षी गठबंधन पर भी कटाक्ष किया और इसे “टुकड़े-टुकड़े भारत गठबंधन” कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में नए लोगों का स्वागत किया और उनके प्रवेश को व्यापक राष्ट्र-निर्माण प्रयास का हिस्सा बताया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की आलोचना जारी रखी। रिजिजू ने दावा किया कि सार्वजनिक मतभेदों के बावजूद, ये दल संसद के अंदर एक साथ काम करते हैं। संसदीय कार्यवाही का जिक्र करते हुए रिजिजू ने आरोप लगाया कि महिला कोटा विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस, तृणमूल और आप ने एकजुट होकर काम किया। उन्होंने उनकी एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे संसद के भीतर “सबसे अच्छे दोस्त” प्रतीत होते हैं। उन्होंने आगे दावा किया कि INDI गठबंधन शुरू से ही त्रुटिपूर्ण था, इसे “धोखाधड़ी” कहा। राज्यसभा में बीजेपी की ताकत बढ़ी इस बदलाव के साथ, चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी के साथ, अब आधिकारिक तौर पर उच्च सदन में भाजपा का हिस्सा हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ऑनलाइन पोस्ट में विकास की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सात सांसदों को शामिल करने से पार्टी की उपस्थिति मजबूत होती है और उनके आचरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इन सांसदों पर लंबे समय तक नजर रखी और कहा कि उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है या अनुशासनहीनता या असंसदीय व्यवहार में शामिल नहीं हुए हैं। AAP ने इस कदम को “विश्वासघात” बताया यह घटनाक्रम सांसदों के आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद आया है, जिससे अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी को बड़ा झटका लगा है। आप ने पहले कहा था कि वह उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग करेगी। पार्टी ने तर्क दिया कि चड्ढा को AAP के भीतर आवश्यक दो-तिहाई ताकत का समर्थन नहीं था, और उनके फैसले को “विश्वासघात” बताया। राज्य स्तर पर, विशेष रूप से चल रहे पश्चिम बंगाल चुनावों में, कांग्रेस, तृणमूल और आप औपचारिक रूप से गठबंधन में नहीं हैं। हालाँकि, वे विशिष्ट विषयों के आधार पर संसद में कुछ मुद्दों पर समन्वय करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, 2024 में उभरा विपक्षी गुट विभाजित है, इसकी नेतृत्व संरचना अभी भी खंडित है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2026, 14:38 IST न्यूज़ इंडिया ‘टुकड़े-टुकड़े गठबंधन को अलविदा’: राघव चड्ढा के पार्टी में शामिल होने के बाद बीजेपी का विपक्ष पर तंज अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा(टी)राघव चड्ढा समाचार(टी)बीजेपी राघव चड्ढा(टी)राघव चड्ढा बीजेपी(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)बीजेपी राज्यसभा ताकत(टी)पूर्व आप सांसद(टी)टुकड़े-टुकड़े इंडी गठबंधन(टी)किरेन रिजिजू बयान(टी)आप विश्वासघात का दावा(टी)विपक्षी गठबंधन भारत(टी)एनडीए संसदीय ताकत
शाजापुर के गिरवर रोड पर पेड़ में आग:धुएं से अफरा-तफरी; फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया

शाजापुर के लालघाटी थाना क्षेत्र अंतर्गत सोमवार को दोपहर के समय गिरवर रोड पर नहर के पास स्थित एक खेत में खड़े पेड़ में अचानक आग लग गई। इस घटना के बाद करीब 500 मीटर तक धुआं फैल गया, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। वहां से गुजर रहे राहगीरों ने पेड़ में आग लगी देख तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन अचानक उठे धुएं के गुबार से लोग घबरा गए थे। कुछ समय के लिए मार्ग पर आवागमन भी प्रभावित रहा। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
साउथ एक्ट्रेस पर लगे धोखाधड़ी के आरोप:दावा- NRI से शादी के नाम पर ठगे 9.35 करोड़, कहा- गलत खबर फैलाने वालों के खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे

साउथ की पॉपुलर एक्ट्रेस और बिग बॉस तेलुगु की कंटेस्टेंट रह चुकीं आशु रेड्डी के खिलाफ हाल ही में हैदराबाद में धोखाधड़ी के आरोप में शिकायत दर्ज हुई है। आरोप हैं कि एक्ट्रेस ने एक एनआरआई से 9.35 करोड़ की ठगी की है। चर्चा में आने के बाद अब एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर रहा है कि वो अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ एक्शन लेंगीं। आशु रेड्डी ने हाल ही में आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, “मेरी अनुमति के बिना जो भी खबर या गलत जानकारी फैल रही है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सम्मान रखें।” क्या है पूरा मामला? हाल ही में धर्मेंद्र नाम के एनआरआई सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हैदराबाद में एक्ट्रेस समेत 3 के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के अनुसार, धर्मेंद्र नाम के सॉफ्टवेयर इंजीनयिर एनआरआई साल 2018 में अपने परिवार से मिलने हैदराबाद आए थे। यहां एक कॉमन दोस्त ने उनकी मुलाकात एक्ट्रेस आशु रेड्डी से करवाई। आशु ने बताया था कि वो अमेरिका में पढ़ाई कर रही हैं। जल्द ही दोनों की दोस्ती हो गई, जबकि धर्मेंद्र तलाकशुदा थे। दोनों की बात शादी तक पहुंच गई। आशु ने उनसे शादी का वादा किया और कहा कि उन्हें तलाकशुदा होने से कोई दिक्कत नहीं है। कुछ समय बाद आशु ने एजुकेशन लोन चुकाने के नाम पर धर्मेंद्र से पैसे लिए और फिर फ्लैट, गोल्ड और कार समेत कई महंगीं चीजें खरीदने के लिए पैसे लिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में एक पुलिसकर्मी के हवाले से लिखा गया है, एक्ट्रेस ने धर्मेंद्र से सालों तक पैसे लिए, लेकिन फिर 2020 में शादी की बात पर कुछ समय तक रुकने के लिए कहा। 2020 में दोनों परिवारों को शादी के लिए मुलाकात करनी थी, लेकिन तब एक्ट्रेस ने शादी से इनकार कर दिया। जब धर्मेंद्र ने शादी टूटने पर पैसे वापस मांगे, तो एक्ट्रेस ने रकम लौटाने से साफ इनकार कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, एक्ट्रेस ने 70 लाख लौटाने का वादा किया था, लेकिन वो भी नहीं लौटाए। बाद में एक्ट्रेस के परिवार ने दावा किया कि एक्ट्रेस डिप्रेशन में हैं और धर्मेंद्र से ही शादी करना चाहती हैं। शिकायतकर्ता ने रिश्ते को एक और मौका दिया, लेिकन फिर जुलाई 2025 में दोबारा शादी के वादे से मुकर गईं। शिकायत में ये भी दावा किया गया है कि जिस समय 2025 में एक्ट्रेस ने शादी का झांसा दिया था, तब भी वो किसी और के साथ रिलेशनशिप में थीं और उससे भी पैसे ले रही थीं। बता दें कि आशु रेड्डी, बिग बॉस तेलुगु 3 का हिस्सा रह चुकी हैं, जिससे उन्हें काफी पॉपुलैरिटी मिली थी। इसके अलावा वो साउथ की चल मोहन रंगा (2018), फोकस (2022) जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं।
दही-खीरा फेस पैक: सनबर्न और टैनिंग से मिलेगी राहत? घर पर इस तरह का दही-खिरे का स्टॉकिंग फेसबुक पैक

27 अप्रैल 2026 को 13:35 IST पर अद्यतन किया गया दही-खीरा फेस पैक: तापती गर्मी में सनबर्न और टैनिंग से हो गए हैं परेशान? आइए हम आपको बताते हैं कि आप अपने चेहरे को सीरम कैसे रख सकते हैं। अनुसरण करना : दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को गहराई से साफ करता है और डेड सेल्स को नशे की चमक प्रदान करता है। छवि: फ्रीपिक खेड़ा एक प्राकृतिक शीतलन एजेंट है जो सनबर्न की जलन को शांत करता है और त्वचा को ऊर्जा प्रदान करता है। छवि: फ्रीपिक कद्दूकस किया हुआ या इसका पल्प, 2 मोरिया, हनी लें। छवि: फ्रीपिक फलों को अच्छी तरह से ढोकर केकड़े सहित कद्दूकस कर लें। आप इसे मिक्सी में पीसकर पेस्ट भी बना सकते हैं। खीरे का रस त्वचा की सूजन कम करने में सहायक है। छवि: फ्रीपिक एक कटोरी में कद्दू बनाया हुआ खेडा लें और इसमें 2 बड़े दही के चिप्स शामिल हैं। इसे तब तक संयोजित करें जब तक कि दोनों अच्छी तरह मिल न जाएं। यह मिश्रण ठंडा और ताज़ा होना चाहिए। छवि: फ्रीपिक अपने चेहरे को ठंडे पानी से धोकर साफ कर लें। पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर पतले हाथों से एक जैसे रूप से फैलाया गया। इसे 15 से 20 मिनट तक इन्वेंटरी डेस्टिनेशन तक। नॉर्म पानी से चेहरा और थपथपाकर सुखाएं। छवि: फ्रीपिक धूप से हुई रेडनेस को कम करती है। स्किन टोन को सही तरीके से तैयार किया गया है। पोर्स को गहराई से स्टॉक किया गया है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : आर्या पांडे प्रकाशित 27 अप्रैल 2026, 13:35 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)दही खीरा फेस पैक के फायदे(टी)गर्मियों के लिए हाइड्रेटिंग फेस पैक(टी)दही खीरा फेस पैक(टी)सनबर्न के लिए फेस पैक(टी)टैनिंग के लिए फेस पैक(टी)घर पर दही खीरे का फेस पैक(टी)दही खीरा फेस पैक कैसे बनाएं
बुरहानपुर के नेपानगर पंप पर लगी वाहनों की कतार:टैंकर नहीं पहुंचने से ₹100 का मिल रहा पेट्रोल, इमरजेंसी कोटे से कर रहे वितरण

बुरहानपुर के नेपानगर में सोमवार को पेट्रोल की कमी के कारण नेपा मिल पेट्रोल पंप पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। यहां बाइक चालकों को इमरजेंसी कोटे से केवल 100 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है। पेट्रोल पंप कर्मचारियों के अनुसार, यह समस्या टैंकरों के अनियमित आगमन के कारण उत्पन्न हुई है। वर्तमान में पेट्रोल के टैंकर पांच दिन में एक बार ही पहुंच रहे हैं, जिससे आपूर्ति बाधित हो रही है। नेपा मिल के पेट्रोल पंप का संचालन कर रहे चंद्रकांत बावस्कर ने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों ने दाम बढ़ने के कारण उत्पादन कम कर दिया है। इसके अलावा, टैंकर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज टैंकर आने की संभावना है। बावस्कर ने आगे बताया कि उनके पास इमरजेंसी कोटे में लगभग 1500 लीटर पेट्रोल शेष है, जिसे वे एचपी का चला रहे हैं। नेपा मिल में भी पेट्रोल उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों के वाहनों के लिए एक इमरजेंसी कोटा होता है, और इसी कोटे से आम लोगों को 100-100 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है। बावस्कर के अनुसार, डिपो से भी माल कम आ रहा है। कंपनियों को लागत बढ़ने से घाटा हो रहा है, जिसके कारण उन्होंने उत्पादन घटा दिया है। डिपो में भी पर्याप्त माल उपलब्ध नहीं है और गाड़ियों को लोड होने में पांच दिन का समय लग रहा है। खकनार, नावरा, सीवल और बुरहानपुर के कुछ अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं। जब आपूर्ति सामान्य होती है, तो ग्राहकों को 200 रुपए तक का पेट्रोल भी दिया जाता है। वहीं नगर का एक अन्य पेट्रोल पंप फिलहाल बंद है।
बाइक पर सवार युवा, असाधारण सुरक्षा संतुलन, वोट के लिए किले में वोट डालने वाले डुबा के चेहरे का बंगाल

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। 29 अप्रैल को वाले मतदान के लिए 142 को आपत्तिजनक सुरक्षा के आधार पर नियुक्त किया गया, ताकि बिना किसी डर के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया जा सके। पहले चरण की तरह ही इस बार भी सागर और पोल्स मतदान हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग स्मारकों की जाए और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में ‘एरिया डोमिनेशन’ का निर्माण किया जाए। यानी सुरक्षा बल केवल मौजूद ही नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से नामांकन कर केंद्रीय नियंत्रण है। इस रणनीति के तहत 160 मोटरसाइकिलों पर सवार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के युवा कॉन्स्टेबल पेट्रोलिंग करेंगे। हर बाइक पर दो युवा होंगे, ताकि किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इसका उद्देश्य है- तेज प्रतिक्रिया, मजबूत उपस्थिति और मजबूत स्थिति। यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल की बंपर वोट पर अमित शाह की खुशी से फूले नहीं समाए, कर्सल्ट्स की भविष्यवाणी, बताएं कौन होगा सीएम हर मतदान केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और सेंट्रल विधानमंडल की जांच की जाएगी। साथ ही, मतदान केन्द्र के 100 मीटर के दस्तावेज में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने साफा ने कहा, “हम सभी को पेट्रोलियम और सामान्य मतदान गारंटी देने की पेशकश की गई है। मजबूत मतदान या बूथ कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोगों को बिना किसी डार के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। जो भी इसे रोकने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।” क्यों खास है ये फेस 142 पर होने वाला यह चेहरा इसलिए खास है क्योंकि ये इलाका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली इमारतों का कोर गढ़ माने जाते हैं- दक्षिण बंगाल और कोलकाता का शहरी बेल्ट, जहां पार्टी की पकड़ लंबे समय से मजबूत बनी हुई है। वहीं पहले चरण में रिकॉर्ड करीब 93% मतदान ने यह संकेत दिया है कि इस बार लोकतंत्र बेहद सक्रिय हैं। यही वजह है कि दूसरे चरण में मुकाबला और तीखा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के शीर्ष नेता इन दिनों लगातार चुनावी प्रचार कर रहे हैं. बीजेपी की रणनीति साफ है—दक्षिण बंगाल में सेंध लगाए 2021 में मिली 77 पार्टी के आंकड़ों को पार करना और सत्ता की दौड़ में खुद को मजबूत करना। इस चरण के घटकों में भी वृद्धि होती है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल गियरबॉक्स पर मतदान होता है। सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भवानीपुर सीट है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी टक्कर वाली विधानसभा में नामांकन के नेता सुवेंदु अधिकारी हैं। किन सबसे अहम वोटिंग पर पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में जिन 142 वें सीज़न में मतदान हो रहा है, वे राज्य के सबसे अहम राजनीतिक क्षेत्र को कवर करते हैं। ये मूर्ति आठ आकर्षक स्मारक—कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, हावड़ा, नादिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और पूर्व बर्दवान—में तस्वीरें हुई हैं। यही कारण है कि इस चरण को ‘नर्व सेंटर’ का चुनाव करने पर विचार किया जा रहा है। आंकड़ों पर नजर तो 2021 के चुनाव में इन डायनासोर कांग्रेस (टीएमसी) का नजरिया साफ था। बीजेपी के आक्रामक प्रचार के बावजूद टीएमसी ने 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की. बीजेपी सिर्फ 18 वें सीट पर पहुंची थी, जबकि लेफ्ट के सहयोगी इंडियन सेक यूनिवर्सल फ्रंट (आईएसएफ) को एक सीट मिल गई थी। क्वेश्चन का डिस्ट्रीब्यूशन भी इस चरण के कॉम्बिनेशन में शामिल है। कोलकाता उत्तर और दक्षिण में 11, हाथी में 16, नादिया में 17, उत्तर 24 परगना में सबसे ज्यादा 33, दक्षिण 24 परगना में 31, हुगली में 18 और पूर्व बर्दवान में 16 तीर्थ शामिल हैं। बड़े की किस्मत का होगा फैसला दूसरे चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कई बड़े और प्रभावशाली समुदाय के मैदान हैं, जो कि हार-जीत पूरे राजनीतिक पहलू को प्रभावित कर सकते हैं। ऑर्थोडॉक्स कांग्रेस (टीएमसी) के लिए यह चरण खास तौर पर अहम है, क्योंकि पार्टी के कई दिग्गज नेता अपनी साख पर दांव लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट पर स्वामित्व नजर आता है, लेकिन इसके अलावा कोलकाता पोर्ट से मेयर फिरहाद हकीम, दमदम उत्तर से वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, श्यामपुकुर से उद्योग मंत्री शशि पांजा, टॉलीगंज से बिजली मंत्री अरूप बिस्वास, दमदम से मंत्री ब्रत्य बसु और विधाननगर से फायर राज्य मंत्री सुजीत बसु जैसे बड़े नाम भी मैदान में हैं। इन नेताओं का प्रदर्शन यह तय करना है कि अपने शहरी गढ़ को क्वेंटी प्लॉट से बचाकर रखें। दूसरी ओर बीजेपी ने भी इस चरण में प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ी है। पार्टी ने पनिहाटी से उस जूनियर डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिसके साथ अक्टूबर 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में दोस्ती और हत्या की वारदात हुई थी- यह निर्णय चुनाव को उलटफेर देता है। इसके अलावा बीजेपी ने पूर्व समाजवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता स्वपन दासगुप्ता को राशबिहारी और अभिनेत्री-राजनेता रूपा सुजुकी को सोनारपुर के दक्षिण मैदान में उतारा है, जो प्रतिस्पर्धा और दिलचस्प हो गई है। भवानीपुर काम्बैट: प्रतिष्ठा, गणित और दबाव की लड़ाई दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल जंग बन गई है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से है। अधिकारी नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे हैं—वही सीट जहां 2021 में उन्होंने ममता को करीब 1,900 सीटों से हराया था. इस पृष्ठभूमि ने भवानीपुर की लड़ाई को और ऐतिहासिक बनाया है। यह भी पढ़ें- एग्जिट पोल 2026 तारीख: पश्चिम बंगाल में पहला चरण खत्म, असम-केरल-तमिलनाडु में वोट पूरा, कब आएगा चुनावी पोल? इस बार गुणांक परिवर्तन हुए हैं. चुनाव आयोग के विशेष सूचना आयोग (एसआईआर) के बाद भवानीपुर में करीब 51,000 लोहिया के नाम की सूची से निकाली गई, जो कुल वोटरों का करीब 21% है। यह ममता बनर्जी के लिए चुनौती बनी हुई है, खासकर इसलिए क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी
क्या राघव चड्ढा कानूनी तौर पर केजरीवाल की AAP का बीजेपी में ‘विलय’ कर सकते हैं? जांच के अधीन खंड की व्याख्या | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 12:35 IST राघव चड्ढा बनाम केजरीवाल ने दलबदल विरोधी कानून, विलय खंड को जांच के दायरे में रखा: AAP का तर्क है कि “विलय” का दुरुपयोग “विभाजन” के रूप में किया जाता है। सेना नहीं, गोवा का चोडनकर मामला धारा पर प्रकाश डाल सकता है अरविंद केजरीवाल के साथ राघव चड्ढा. (पीटीआई फ़ाइल) 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से भारत के दल-बदल विरोधी कानून के “विलय” अपवाद को गहन कानूनी जांच के दायरे में लाया गया है। राघव चड्ढा के नेतृत्व में विद्रोहियों का दावा है कि वे अयोग्यता से सुरक्षित हैं क्योंकि वे उच्च सदन में AAP की ताकत का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा हैं। क्या वे हैं? News18 बताते हैं. विलय खंड क्या है? दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के पैराग्राफ 4 के तहत, एक विधायक को अयोग्यता से बचाया जाता है यदि उनका “मूल राजनीतिक दल” किसी अन्य पार्टी में विलय हो जाता है। विलय तभी वैध माना जाता है जब विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य (सदन में निर्वाचित सांसद/विधायक) इससे सहमत हों। राज्यसभा में 10 सांसदों के साथ, 7 का समूह इस संख्यात्मक सीमा को पूरा करता है। चूंकि 91वें संशोधन (2003) ने “विभाजन” प्रावधान को हटा दिया (जिसमें केवल एक तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी), अब “विलय” एक बड़े समूह के लिए अपनी सीटें खोए बिना पक्ष बदलने का एकमात्र कानूनी मार्ग है। खंड की जांच क्यों की जा रही है? कानूनी विशेषज्ञों और आप नेतृत्व का तर्क है कि “विलय” खंड का छद्म रूप से “विभाजन” के रूप में दुरुपयोग किया जा रहा है। मुख्य बहस यह है कि क्या विलय स्थानीय स्तर पर (सिर्फ सदन के भीतर) हो सकता है या संगठनात्मक रूप से होना चाहिए (पूरी आप पार्टी का भाजपा में विलय)। विधायकों का तर्क है कि वैध विलय के लिए सदन में दो-तिहाई समर्थन पर्याप्त है। AAP का दावा है कि जब तक “मूल राजनीतिक दल” (अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में) का भाजपा में विलय नहीं हो जाता, सांसद एकतरफा विलय की घोषणा नहीं कर सकते। राजनीतिक दल बनाम विधायक दल: शिवसेना मामले में SC ने क्या कहा सुभाष देसाई बनाम प्रधान सचिव, महाराष्ट्र के राज्यपाल (2023) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शिवसेना पार्टी के विभाजन के बाद संवैधानिक संकट को संबोधित किया। 11 मई, 2023 को मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें वर्तमान सरकार के गठन को बरकरार रखते हुए राज्यपाल की भूमिका की आलोचना की गई। मुख्य निष्कर्ष कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का फ्लोर टेस्ट बुलाने का फैसला गैरकानूनी था। उनके पास यह निष्कर्ष निकालने के लिए “वस्तुनिष्ठ सामग्री” का अभाव था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने सदन का विश्वास खो दिया है। गैरकानूनी फ्लोर टेस्ट के बावजूद कोर्ट उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद पर बहाल नहीं कर सका. ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्होंने मतदान से बाहर होने के बजाय परीक्षण का सामना करने से पहले स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्हिप और सदन के नेता को नियुक्त करने की शक्ति विधायक दल को नहीं बल्कि राजनीतिक दल को है। शिंदे गुट के व्हिप को स्पीकर की मान्यता अवैध करार दी गई. कोर्ट ने एकनाथ शिंदे समेत 16 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला नहीं सुनाया. इसने अध्यक्ष को इन याचिकाओं पर “उचित समय” के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। संवैधानिक निहितार्थ इस मामले ने दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) और राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों के संबंध में लंबे समय से चली आ रही कई कानूनी बहसों का समाधान किया: न्यायालय ने 2016 की नबाम रेबिया मिसाल को पुनर्विचार के लिए सात-न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेज दिया, जिसने स्पीकर को निष्कासन नोटिस का सामना करते समय अयोग्यता पर निर्णय लेने से रोक दिया था। न्यायालय ने पुष्टि की कि 91वें संशोधन के बाद, अयोग्यता से बचने के लिए किसी पार्टी में “विभाजन” का बचाव अब उपलब्ध नहीं है। फैसले ने स्थापित किया कि राज्यपाल पार्टी के आंतरिक विवादों में हस्तक्षेप करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर सकते। उनकी भूमिका एक स्थिर सरकार सुनिश्चित करना है, न कि पार्टी के भीतर मतभेदों को सुलझाना आप मामला: आगे क्या? दल बदलने वाले सांसदों का भाग्य राज्यसभा के सभापति पर निर्भर करता है, जो अयोग्यता के मामलों में न्यायाधिकरण के रूप में कार्य करते हैं। AAP ने घोषणा की है कि वह इस कदम को “असंवैधानिक” बताते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेगी। जब तक कोई फैसला नहीं आता, सांसद तकनीकी रूप से AAP का हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन कार्यात्मक रूप से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन कर सकते हैं। अध्यक्ष के किसी भी निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जिसे अंततः इस पर एक निश्चित निर्णय देना पड़ सकता है कि “विलय” के लिए पार्टी-स्तर की सहमति की आवश्यकता है या नहीं। गिरीश चोडनकर द्वारा दायर गोवा मामला क्या है? चोडनकर मामला – गिरीश चोडनकर बनाम अध्यक्ष, गोवा राज्य विधान सभा – विधायी विलय के संबंध में दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) की व्याख्या पर एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई है। विवाद का मूल यह है कि क्या “विलय” को अकेले विधायक दल के दो-तिहाई बहुमत द्वारा वैध रूप से घोषित किया जा सकता है, भले ही मूल राजनीतिक दल (स्वयं संगठन) का राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर विलय न हो। क्या हुआ था? 2019 के दलबदल में शामिल 10 कांग्रेस विधायक, जिसे चोडनकर ने प्रसिद्ध रूप से चुनौती दी थी, उस समय कांग्रेस विधायक दल के दो-तिहाई का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके इस कदम से 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में कांग्रेस की ताकत 15 से घटकर सिर्फ 5 रह गई। तत्कालीन विपक्ष के नेता के नेतृत्व में, समूह का आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई, 2019 को भाजपा में “विलय” हो गया। मामले की स्थिति फरवरी 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में भाजपा में शामिल होने वाले 10 कांग्रेस विधायकों के संबंध में याचिका का निपटारा करते हुए इसे निरर्थक करार दिया क्योंकि 2022 में नए चुनाव पहले
रिंकू के 4 छक्कों पर झूमीं मंगेतर प्रिया सरोज:बोलीं- वंस मोर, लखनऊ में अखिलेश की बेटियों के साथ देखा मैच

लखनऊ के इकाना स्टेडियम में क्रिकेटर रिंकू सिंह के लगातार 4 छक्कों पर उनकी मंगेतर सपा सांसद प्रिया सरोज में झूम उठीं। वह कुर्सी से उठकर खड़ी हो गईं। कोलकाता नाइट राइडर्स का झंडा लहराते हुए रिंकू को चीयर किया। कहा- वंस मोर। प्रिया सरोज ने कहा कि आज रिंकू सिंह ने मेरे फादर इन ला (ससुर) के लिए शानदार पारी खेली है। आज हम उन्हें बहुत मिस कर रहे हैं। दरअसल, रिंकू के पिता खानचंद का 27 फरवरी को निधन हो गया था। वे फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। वो 60 साल के थे। प्रिया सरोज के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव की दोनों बेटियां अदिति और टीना भी मैच देखने पहुंची थीं। उन्होंने भी रिंकू को चीयर किया। रविवार को KKR ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को सुपर ओवर में हरा दिया। मैच के हीरो रिंकू सिंह रहे। रिंकू ने 51 गेंद पर नाबाद 83 रन बनाए। फील्डिंग में 5 कैच लपके। मैच के आखिरी ओवर में ध्रुव राठी की गेंद पर लगातार 4 छक्के जड़े। सुपर ओवर की पहली गेंद पर चौका लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई। देखिए 4 तस्वीरें… रिंकू ने अपनी मां से सुनील नारायण की बात कराई मैच जीतने के बाद रिंकू ने अपनी मां और बहन से वेस्टइंडीज के स्पिनर सुनील नारायण की वीडियो कॉल पर बात कराई। इस दौरान रिंकू की बहन ने कहा कि आज बहुत अच्छी बॉलिंग की भइया। इस पर रिंकू ने कहा- भइया नहीं, ब्रदर। क्रिकेटर की शादी में पहली बार मिले थे रिंकू-प्रिया अब प्रिया सरोज को जानिए प्रिया सरोज वाराणसी जनपद के पिंडरा तहसील के करखियांव की रहने वाली हैं। उनका जन्म 23 नवंबर 1998 को हुआ था। 18 साल की उम्र पार करते ही उन्होंने सपा की न केवल सक्रिय सदस्यता ले ली थी, बल्कि पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती रहीं। महज 25 साल की उम्र में वह भाजपा के बीपी सरोज को हराकर लोकसभा पहुंचीं। प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज भी मछलीशहर लोकसभा सीट से 3 बार सांसद रहे हैं। वो साल 1999, 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीते थे। IPL के बाद काशी में शादी, रिसेप्शन अलीगढ़ में होगा रिंकू और प्रिया इसी साल जून में 7 फेरे लेने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि पिता के निधन के बाद रिंकू की शादी की तारीख पर परिवार फिर से विचार कर सकता है। इससे पहले दो बार रिंकू-प्रिया की शादी की तारीख आगे बढ़ी थी। 18 नवंबर, 2025 को पहली तारीख तय हुई, लेकिन क्रिकेट सीरीज के कारण टल गई। फरवरी, 2026 को दूसरी तारीख निकली, लेकिन वर्ल्ड कप के चलते कैंसिल करनी पड़ी। रिंकू के बड़े भाई सोनू सिंह ने बताया था जब रिंकू IPL से फ्री होंगे, तभी शहनाई बजेगी। शादी काशी में होगी। रिसेप्शन अलीगढ़ में रखा जाएगा। रिंकू के पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे ————– संबंधित खबर भी पढ़िए… ‘ऋषभ पंत को रिजाइन कर देना चाहिए’:LSG फैंस बोले- पूरन को भेजना गलत फैसला, लखनऊ में व्हीलचेयर पर मैच देखने पहुंचा फैन इकाना में आज खेले गए IPL-2026 के 38वें मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को हरा दिया। यह मुकाबला काली मिट्टी की पिच पर हुआ। इकाना LSG का होम ग्राउंड है। इस सीजन में LSG ने यहां अब तक 4 मैच खेले और सभी में हार का सामना करना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें
गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, स्किन को हो सकते हैं ये नुकसान, जानिए एक्सपर्ट की राय – News18 हिंदी

X गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, हो सकते हैं ये नुकसान Summer Health Tips: रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अक्षय श्रीवास्तव कहते हैं कि गर्मियों के दिनों में पुरुष और महिलाएं दोनों ही अपने चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर निकलते हैं, ताकि टैनिंग से बचा जा सके. लेकिन एक कपड़ा बांधने से आपकी स्किन टैन नहीं होगी या फिर धूप और धूल-मिट्टी आपकी त्वचा तक नहीं पहुंच पाएगी. मुंह पर सिर्फ कपड़ा बांधना, गर्मी में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को पैदा कर सकता है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कई लोग एक ही कपड़े को हफ्तेभर मुंह में बांधकर घूमते हैं. ऐसे में इतने दिनों की जमी गंदगी आपके चेहरे को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे एक्ने, पिम्पल्स, तेलीय त्वचा, चेहरा फीका पड़ने और कई तरह की स्किन एलर्जी हो सकती है और धूप का असर भी होने लगता है. लेकिन क्या ऐसा करना सही है. गर्मी में मुंह पर कपड़ा बांधने के कई फायदे हैं, तो कई नुकसान भी हैं. गर्मी में हमेशा ही सूती और हल्के रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए.
AAP के 7 सांसदों को BJP में विलय की मंजूरी:राज्यसभा में भाजपा सांसद 106 से बढ़कर 113 हुए, केजरीवाल की पार्टी 3 पर सिमटी

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई है, जबकि BJP सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। जो सात सांसद BJP में शामिल हुए हैं, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी इन सांसदों को BJP के सदस्यों के रूप में दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा सभापति को आवेदन देकर खुद को BJP सांसद के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, AAP ने इस घटनाक्रम का विरोध किया था। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने शुक्रवार को BJP जॉइन कर ली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। AAP ने सभापति को याचिका दी AAP ने रविवार को सभापति के समक्ष याचिका दायर कर इन सात सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। AAP सांसद संजय सिंह ने भी सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अपील की थी। सिंह ने कहा था कि इन सदस्यों का पार्टी छोड़ना दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। राघव ने कहा- मैं राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी राघव ने कहा था कि पिछले कुछ सालों से मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं। इसलिए आज मैं घोषणा करता हूं कि मैं AAP से दूरी बना रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं। राजनीति में आने से पहले, मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) था। इस मंच पर मेरे साथ अलग-अलग क्षेत्रों के लोग थे। स्वाति मालीवाल बोलीं- केजरीवाल महिला विरोधी हैं स्वाति मालीवाल ने AAP और अरविंद केजरीवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया, हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन बाद में उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट कराई गई और FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। मालीवाल ने कहा कि उन्हें दो साल तक संसद में बोलने का मौका नहीं दिया गया जो बेहद शर्मनाक है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… AAP छोड़ते ही राघव चड्ढा के 14 लाख इंस्टाग्राम-फॉलोअर्स घटे आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा जॉइन करने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर करीब 14 लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं। 24 घंटे पहले उनके फॉलोअर 14.6 मिलियन (1 करोड़ 46 लाख) थे। शनिवार शाम तक यह 13.2 मिलियन (1 करोड़ 32 लाख) बचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…







