खर्च और मारपीट से परेशान मां जनसुनवाई में पहुंची:इंदौर पुलिस की काउंसलिंग के बाद बेटे ने मानी गलती; मां के पैर छूकर माफी मांगी

इंदौर में जनसुनवाई के दौरान एक भावुक मामला सामने आया, जहां रोती हुई मां ने अपने ही बेटे के खिलाफ गुहार लगाई। मां ने शिकायत में बताया कि बेटा खर्च नहीं देता, मारपीट करता है और बहू भी प्रताड़ित करती है। एसीपी रूबिना मिजवानी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मां और बेटे को काउंसलिंग के लिए बुलाया। एसीपी कार्यालय में थाना प्रभारी सुशील पटेल और अनुभवी महिला काउंसलरों की मौजूदगी में पूरे परिवार को बैठाकर दोनों पक्षों की बात सुनी गई। काउंसलिंग के दौरान मां की भावनाओं को समझाते हुए बेटे को उसके कर्तव्यों का एहसास कराया गया। इसके बाद बेटे ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मां से माफी मांगी। मां ने अपने खर्च के लिए हर महीने 8 हजार रुपए और रहने के लिए दो कमरों के किराए की मांग रखी, जिसे बेटे ने सहर्ष मान लिया। इसके बाद बेटे ने मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और मिठाई खिलाकर विवाद खत्म किया। इस पहल के बाद बुजुर्ग महिला ने पुलिस का आभार जताया।
परीक्षा में पूछा- अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं:सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम, बीसीए में पूछे गए प्रश्न पर विवाद, जांच के आदेश

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन पेपर में पूछे गए एक प्रश्न से विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को आयोजित परीक्षा में पूछा गया-‘अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है’। इसके साथ चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें 1. सोमेश्वर, 2. खुदा, 3. शक्तिवान, 4. दंड देने वाला शामिल थे। इस प्रश्न को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताते हुए प्रश्न पत्र बनाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के बीकॉम और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन कोर्स का पेपर सोमवार को आयोजित हुआ था। पेपर सामने आने के बाद उज्जैन सहित रतलाम में हिंदूवादी संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पेपर किसने तैयार किया था। उज्जैन में हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक रितेश माहेश्वरी ने कहा कि जिस प्रोफेसर ने इस तरह का पेपर सेट किया है, उसके खिलाफ विश्वविद्यालय को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इधर विवाद बढ़ता देख सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल शर्मा ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि मामला परीक्षा समिति को भेजा गया है। यह सवाल बीकॉम और बीसीए के फाउंडेशन पेपर में पूछा गया था। फाउंडेशन कोर्स में विभिन्न धर्मों से जुड़े प्रश्न होते हैं, लेकिन इस तरह का प्रश्न अपेक्षित नहीं है। परीक्षा समिति की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुलपति अर्पण भारद्वाज ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक से इस संबंध में जवाब मांगा गया है कि ऐसा सवाल क्यों पूछा गया। इसके लिए परीक्षा विभाग की बैठक बुलाई गई है। यदि इस प्रश्न को हटाया जाता है, तो विद्यार्थियों को अंक किस प्रकार दिए जाएंगे, इस पर भी चर्चा की जाएगी।
सुबह प्रोटीन युक्त नाश्ता क्यों है जरूरी, वजन और ऊर्जा पर असर

सुबह का नाश्ता हमारे पूरे दिन की शुरुआत तय करता है, इसलिए इसे सबसे अहम भोजन माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दिन की शुरुआत सही पोषण के साथ की जाए, तो शरीर लंबे समय तक एक्टिव और फ्रेश बना रहता है. खासतौर पर नाश्ते में प्रोटीन शामिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर को जरूरी ऊर्जा देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. जो लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं या सिर्फ हल्का-फुल्का खाते हैं, उन्हें दिनभर थकान, कमजोरी और बार-बार भूख लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. प्रोटीन हमारे शरीर की एक बुनियादी जरूरत है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने, कोशिकाओं की मरम्मत करने और शरीर को सही तरीके से काम करने में मदद करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सुबह के समय प्रोटीन लिया जाए, तो यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है और अनावश्यक भूख को भी नियंत्रित करता है. इससे दिन के बीच में बार-बार स्नैक्स खाने की आदत कम हो जाती है. साथ ही, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है, जिससे वजन नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है. प्रोटीन युक्त नाश्ते के फायदेसुबह प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने के कई फायदे होते हैं. यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे ओवरईटिंग की समस्या नहीं होती. इसके अलावा, यह शरीर को स्थिर ऊर्जा देता है, जिससे थकान और सुस्ती महसूस नहीं होती. नियमित रूप से प्रोटीन लेने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उनकी ग्रोथ बेहतर होती है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि यह भूख को नियंत्रित रखता है और कैलोरी इंटेक को कम करने में मदद करता है. नाश्ते में क्या शामिल करेंप्रोटीन युक्त नाश्ता तैयार करना मुश्किल नहीं है, बल्कि आप रोजमर्रा की चीजों से ही इसे आसानी से बना सकते हैं. जैसे पनीर पराठा या पनीर भुर्जी, दही के साथ फल और थोड़ी मूंगफली, दूध के साथ ओट्स या दलिया, छाछ के साथ स्प्राउट्स, बेसन का चीला या मूंग दाल का चीला जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं. ये सभी चीजें न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं. सुबह का नाश्ता कभी न करें स्किपकई लोग व्यस्त दिनचर्या के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है. अगर आपके पास समय कम है, तो भी कुछ हल्का और प्रोटीन से भरपूर जरूर खाएं, जैसे एक गिलास दूध, दही या मुट्ठी भर मूंगफली. इससे शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती है और दिनभर काम करने की क्षमता बनी रहती है.
'टटीरी' सॉन्ग कंट्रोवर्सी पर रैपर बादशाह ने मांगी माफी:NCW के सामने पेश हुए; बोले- 50 बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे, कभी नहीं गाएंगे ऐसे गाने

बॉलीवुड सिंगर-रैपर बदशाह ने टटीरी सांन्ग पर चल रही कंट्रोवर्सी में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने पेश होकर माफी मांग ली है। मंगलवार को दिल्ली में आयोग के सामने सिंगर के अलावा निर्देशक जोबन संधू, महावीर सिंह के साथ-साथ निर्माता हितेन भी पेश हुए। मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर ने की। आयोग ने गीत के बोल और प्रेजेंटेशन को महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताते हुए नाराजगी जताई। इसके बाद बादशाह और उनकी टीम ने बिना शर्त माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा बादशाह ने महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने, 4 महीनों के भीतर एक पॉजीटिव सॉन्ग बनाने और आर्थिक रूप से कमजोर 50 लड़कियों की शिक्षा का खर्च उठाने का भी वादा किया। यहां जानिए कब रिलीज हुआ सॉन्ग और क्यों था विवाद… बादशाह ने वीडियो शेयर कर मांगी थी माफी जब गाने को लेकर विवाद हुआ था तो बादशाह ने वीडियो बनाकर माफी मांगी थी. उन्होंने वीडियो में कहा था, ‘मेरा टरीरी गाना जब से रिलीज हुआ है तब से इसके एक हिस्से में मेरे लिरिक्स को और विजुअल रिप्रेजेंटेशन की वजह से जो मैसज गया उससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची. मैं ये कहना चाहूंगा कि मैं खुद हरियाणा से हूं. मेरी पहचान हरियाणा से है. मेरा इरादा नहीं था कि मैं किसी बच्चे या महिला के बारे में बेहुदी बात करूं. वो शब्द कभी भी किसी महिला या बच्चे के लिए नहीं थे. मैं उम्मीद करता हूं कि मुझे हरियाणा का बेटा समझकर माफ करेंगे.’ अब जानिए राष्ट्रीय महिला आयोग में सिंगर ने क्या कहा, 2 पॉइंट… क्या है टटीरी सॉन्ग, 2 पॉइंट में जानिए… सिमरन ने तीन साल पहले गाया: टटीरी सॉन्ग में फीमेल वोकल देने वाली 20 वर्षीय सिमरन जागलान कैथल जिले के पट्टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी सिंगर हैं। सिमरन ने करीब तीन साल पहले टटीरी सॉन्ग गाया था। बादशाह को उनकी ट्रेडिशनल स्टाइल में गाई हुई आवाज पसंद आई तो दोबारा रिकॉर्डिंग कर मंगाया। इसी के बाद बादशाह ने टटीरी को नए ढंग से पेश किया, जिसमें फीमेल वोकल रिमरन ने दी। जींद में हुई थी गाने की शूटिंग: इस गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई थी। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। वहीं, प्रोडक्शन टीम ने 14 मार्च को सिमरन और बादशाह का मुंबई में एक शो भी शेड्यूल किया था। सॉन्ग के यूट्यूब से हटाए जाने के बाद मुंबई शो भी कैंसिल कर दिया गया। —————— टटीरी सॉन्ग विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर ने गाया- ऐसी ना थी,जैसी तनै बनाई ‘टटीरी’: बादशाह का नाम लेकर ‘तेरे घर में बहन-बेटी ना’ लिरिक्स गाए; सिमरन का न्यू सॉन्ग रिलीज रैपर बादशाह पर FIR, गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित:हरियाणा पुलिस बोली- लुक आउट सर्कुलर जारी होगा; सिंगर बोले- बेटा समझकर माफ कर दो बादशाह के टटीरी सॉन्ग पर पंचकूला-जींद में FIR:लड़कियों को स्कूल बैग फेंकते दिखाया, गंदे शब्द का इस्तेमाल; महिला आयोग ने रैपर को तलब किया बादशाह संग ‘टटीरी’ सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी: पिता हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही हरियाणवी सॉन्ग ‘टटीरी’ का रैप वर्जन लाए सिंगर बादशाह: सोनीपत में सरपंचों के वेलकम पर बोले- मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है; साग-मक्के की रोटी खाई
मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया में सबसे ज्यादा कटे वोटर्स के नाम, जानें जिलेवार वोटर्स का पूरा हिसाब

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग ने एक इंटरव्यू वाला डेटा जारी किया है। राज्य में चलाए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिजन’ (SIR) अभियान के बाद करीब 91 लाख लाख के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नए वोटरों का वोट नहीं दिया है, उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल वोटरों में से लगभग 11.85 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़े बदलाव ने राज्य की मोटरसाइकिल को और तेज कर दिया है। 91 लाख नाम अर्थशास्त्र का पूरा गणितचुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर तक बंगाल में 7.66 करोड़ वोट थे. जांच प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90.83 लाख लाख का बकाया चुकाया गया है। इनमें से करीब 27.16 लाख नाम अकेले तो प्रमुख अधिकारियों की उस जांच (न्यायनिर्णय) के दौरान कटे, जिसमें 60.06 लाख मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठाए गए थे। यानी जांच के दस्तावेजों में करीब 45 प्रतिशत वोट वोट के लिए अलग-अलग वोट मिले हैं। मुस्लिम बाहुल्य और शैतान में भारी कटारआंकड़ों में सबसे बड़े हिस्से मुस्लिम बाहुल्य जिले मुर्शिदाबाद में बताए गए हैं, जहां जांच के आंकड़ों में 11 लाख लोगों में से 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। इसी तरह बांग्लादेश की सीमा से उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख और मालदा में 2.39 लाख नाम बताए गए हैं। दक्षिण 24 परगना में भी करीब 2.23 लाख वोटर्स की छुट्टी कर दी गई है। नादिया और मतुआ बाहुल्य एशिया का हालप्रतिशत के हिसाब से देखें तो नदिया और उत्तर 24 परगना में कितनी स्थिति है और भी स्कूटर वाली है। नादिया जिले में जांच के अनुभाग में आये ओस्टल में से रिकॉर्ड 77.86 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 55.08 प्रतिशत नाम जारी किये गये हैं। बता दें कि ये इलाका हिंदू ‘नमोशूद्र मतुआ’ समुदाय के प्रभाव वाले माने जाते हैं। ममता बनर्जी के गढ़ कोलकाता में क्या हुआ?मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर वाले ‘कोलकाता दक्षिण’ क्षेत्र में भी करीब 28,000 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। वहीं ‘कोलकाता उत्तर’ में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां आंकड़ों के मुताबिक 64 फीसदी यानी करीब 39,000 लोगों को वोट के लिए वोट मिले हैं। मतदाता सूची ‘फ़्रीज़’ के लिए प्रथम चरणचुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया के तरीके और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत दिया गया है। सोमवार आधी रात के बाद पहले चरण (23 अप्रैल) की 152वीं पोस्ट के लिए वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ कर दिया गया है, यानी अब इसमें कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा। दूसरे चरण की 142 की सूची 9 अप्रैल को लॉक कर देगी। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता सूची संशोधन(टी)बंगाल चुनाव 2026 मतदाता कटौती(टी)91 लाख मतदाता हटाए गए(टी)चुनाव आयोग सर ड्राइव(टी)बंगाल राजनीतिक समाचार(टी)मतदाता सूची विवाद भारत(टी)मुर्शिदाबाद मतदाता विलोपन(टी)उत्तर 24 परगना मतदाता सूची(टी)मालदा मतदाता कटौती समाचार(टी)कोलकाता मतदाता सूची अपडेट(टी)ममता बनर्जी निर्वाचन क्षेत्र समाचार(टी)भारत चुनाव आयोग अपडेट(टी)मतदाता पात्रता जांच भारत(टी)बंगाल चुनाव विवाद(टी)ब्रेकिंग न्यूज पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल वोटर लिस्ट(टी)बंगाल चुनाव 2026 खबर(टी)91 लाख वोटर लिस्ट विवाद(टी)चुनाव आयोग एसआईआर अभियान(टी)मतदाता सूची विवाद(टी)मुर्शिदाबाद सुपरस्टार(टी)उत्तर 24 परगना सुपरस्टार(टी)मालदा वोटर निकाले गए(टी)कोलकाता वोटर लिस्ट अपडेट(टी)ममता बनर्जी सीट खबर(टी)भारत चुनाव आयोग अपडेट(टी)मतदाता सूची जांच(टी)बंगा चुनावी विवाद
GK: शरीर में सबसे मजबूत और कमजोर हड्डी कौन सी होती है? टूट गई तो पूरी जिंदगी तहस-नहस

Last Updated:April 07, 2026, 18:38 IST हमारे शरीर में कई तरह की हड्डियां होती हैं, जिनमें कुछ बेहद मजबूत होती हैं तो कुछ काफी नाजुक और जल्दी टूटने वाली. इन्हीं में कॉलरबोन यानी हंसली की हड्डी भी शामिल है, जो शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक होते हुए भी काफी कमजोर मानी जाती है और हल्की चोट या गिरने से भी आसानी से फ्रैक्चर हो सकती है. ख़बरें फटाफट शरीर में 206 हड्डियां होती हैं. हमारे शरीर की संरचना हड्डियों पर टिकी होती है, जो न सिर्फ शरीर को आकार देती हैं बल्कि हमें चलने-फिरने, बैठने और रोजमर्रा के काम करने में मदद करती हैं. मानव शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं और हर हड्डी का अपना अलग काम और महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कुछ हड्डियां बेहद मजबूत होती हैं, जबकि कुछ बहुत नाजुक होती हैं? इन हड्डियों की मजबूती और कमजोरी का सीधा असर हमारे शरीर के संतुलन और स्वास्थ्य पर पड़ता है. दरअसल, शरीर की सबसे मजबूत हड्डी जांघ में पाई जाने वाली फीमर (जांघ की हड्डी) होती है. यह न सिर्फ सबसे लंबी होती है, बल्कि इतनी मजबूत होती है कि यह शरीर के पूरे वजन को संभाल सकती है. फीमर पर काफी दबाव पड़ता है, क्योंकि यह चलने, दौड़ने और कूदने जैसे हर काम में अहम भूमिका निभाती है. इसके बावजूद यह आसानी से नहीं टूटती, लेकिन अगर किसी बड़े हादसे में यह टूट जाए तो व्यक्ति के लिए चलना-फिरना बेहद मुश्किल हो जाता है और लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है. वहीं, अगर सबसे कमजोर हड्डी की बात करें तो कान के अंदर मौजूद स्टेप्स (Stapes) हड्डी को सबसे छोटी और नाजुक हड्डी माना जाता है. यह हड्डी इतनी छोटी होती है कि इसका आकार एक चावल के दाने जितना होता है. यह सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है और ध्वनि को अंदर तक पहुंचाने में मदद करती है. हालांकि यह शरीर के अंदर सुरक्षित रहती है, इसलिए आमतौर पर इसे नुकसान कम ही होता है, लेकिन इसकी संवेदनशीलता इसे बेहद खास बनाती है. कॉलरबोन, जिसे हंसली की हड्डी भी कहा जाता है, शरीर की कमजोर हड्डियों में गिनी जाती है. यह कंधे और छाती के बीच स्थित होती है और हाथों की मूवमेंट में अहम भूमिका निभाती है. इसकी स्थिति शरीर के बाहरी हिस्से के करीब होने के कारण यह चोट लगने के लिए ज्यादा संवेदनशील रहती है. गिरने, खेलते समय टक्कर लगने या सड़क दुर्घटना में सबसे पहले यही हड्डी प्रभावित होती है. खासकर बच्चों और खिलाड़ियों में कॉलरबोन फ्रैक्चर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. अगर यह हड्डी टूट जाए तो कंधे और हाथ की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं और ठीक होने में कई हफ्तों का समय लग सकता है. इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी भी शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. यह हमारे पूरे शरीर को सहारा देती है और नसों के जरिए दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक संदेश पहुंचाने का काम करती है. अगर रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग जाए, तो व्यक्ति को चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है या लकवा तक हो सकता है. यही वजह है कि इसे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है, जहां चोट लगने का असर पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 07, 2026, 18:25 IST
‘बीजेपी पर भरोसा, विपक्षियों पर भरोसा करने जैसा..’

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इंटरव्यू बयानबाजी का दौर जारी है। राज्य में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा और किसान एक दूसरे पर दावेदार हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी की तुलना सांप से की है। उन्होंने कहा कि भाजपा पर विश्वास करना सांपों पर विश्वास करना जैसा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह बयान दिया है कि हाबड़ा ने एक शौचालय का आयोजन किया है। एस दरभंगा में लाखों असली मतदाताओं का नाम नीचे दिया गया है: मुद्रा बनर्जी ने कहा कि वो तो बस बंगाल पर हमला करने के सही मौके का इंतजार कर रहे हैं. अपने इस सशक्त एस.एस. सशक्त अभियान में उन्होंने बिना किसी भेदभाव के लाखों मूल मतदाताओं के नाम दिये हैं। यहां तक कि धर्मार्थ आध्यात्म से जुड़े साधु संतों के नाम भी वोटर लिस्ट से बेहरमी से हटा दिए गए हैं। इन लोगों ने बंगाल के असली वोटरों को ऐसे दिखाया बेशर्मी से नजर. इस चुनाव में जनता को भाई से पूरी तरह से समझौता कराना चाहिए। किसी भी तरह की कोई रहम नहीं करनी चाहिए. कोई दूसरा अवसर नहीं मिलना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने संदेश में कहा कि यह चुनावी बंगाल में भाषा, अधिकार और लोकतंत्र की मूल भावना की रक्षा करने के बारे में है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मां-माटी-मानुष सरकार लोगों की निष्ठा और आकांक्षाओं को पूरा करना जारी रखेगी। साथ में ही कहा गया है कि सभी उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहते हैं, जो समाज को कमजोर और ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में आम चुनाव के दो चरण होने हैंवर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में आयोजित किये जायेंगे। इसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 पर वोट डालेंगे। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किये जायेंगे. नागालैंड में आचार संहिता लागू है, यहां की सरकार है। यह भी पढ़ें: ‘हम सभी के साथ हैं अलग नाम…’, सीएम ममता बनर्जी के सर ने चुनाव आयोग पर लेकर कहा- ’91 लाख नाम निकाले गए’ (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)टीएमसी:(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी नवीनतम समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)चुनाव समाचार(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव समाचार(टी)बीजेपी पर ममता बनर्जी(टी)अमित शाह(टी)नरेंद्र modi
केरल में शांत उलटी गिनती: जैसे ही चुनाव प्रचार समाप्त हुआ, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया केरल के 9 अप्रैल के चुनाव के लिए एक माध्यमिक चर्चा के बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। चुनाव प्रचार ख़त्म होते ही ‘प्रवासी’ वोट पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर/पीटीआई केरल भर में उच्च-डेसिबल रैलियों, “कलासकोट्टू” जुलूसों और गहन रोड शो का शोर आधिकारिक तौर पर मंगलवार शाम को समाप्त हो गया। यह राज्य में गुरुवार को उच्च जोखिम वाले एकल-चरण विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले अनिवार्य 48 घंटे की “मौन अवधि” की शुरुआत का प्रतीक है। एक ऐसे राज्य के लिए जो अपनी उच्च मतदाता साक्षरता और गहरी जड़ें जमा चुकी राजनीतिक निष्ठाओं के लिए जाना जाता है, 2026 का अभियान हाल के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित में से एक रहा है, जिसे पारंपरिक स्थानीय शिकायतों की तुलना में वैश्विक आर्थिक चिंताओं और नए राजनीतिक व्यवधानों के प्रवेश द्वारा अधिक परिभाषित किया गया है। जैसे-जैसे लाउडस्पीकरों की स्थिरता कम होती जाती है, ध्यान “मूक प्रभाव” चरण पर केंद्रित हो जाता है, जहां पार्टी कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए घर-घर जाकर प्रचार करते हैं कि प्रत्येक पंजीकृत मतदाता बूथ तक पहुंचे। 140 निर्वाचन क्षेत्रों पर कब्ज़ा होने के साथ, परिणाम यह निर्धारित करेंगे कि क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल कर सकता है या क्या यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) अपने पारंपरिक वैकल्पिक शक्ति चक्र को पुनः प्राप्त कर सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने अंतिम अभियान को कैसे बदल दिया है? चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया एक माध्यमिक चर्चा बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। केरल, एक राज्य जो वार्षिक प्रेषण में 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त करता है, खाड़ी में समुद्री अवरोधों के कारण आय में अनुमानित 20% की गिरावट का सामना कर रहा है। इस आर्थिक “सदमे” ने सभी प्रमुख गठबंधनों को अपने घोषणापत्रों को “आजीविका सुरक्षा” की ओर मोड़ने के लिए मजबूर किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अभियान के अंतिम दिन एलडीएफ को “स्थिरता ढाल” के रूप में बिताए, जिसमें लौटने वाले प्रवासियों का समर्थन करने के लिए राज्य के कल्याण सुरक्षा जाल का विस्तार करने का वादा किया गया। इसके विपरीत, वीडी सतीसन के नेतृत्व में यूडीएफ नेतृत्व ने राज्य का औद्योगीकरण करने में विफल रहने के लिए सरकार पर हमला किया और तर्क दिया कि युद्ध ने अस्थिर पश्चिम एशिया पर केरल की खतरनाक अति-निर्भरता को उजागर कर दिया है। इस बीच, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने अंतिम घंटों का उपयोग केंद्र सरकार के सफल निकासी प्रोटोकॉल और “वंदे भारत” की तैयारी को उजागर करने के लिए किया, जिसका लक्ष्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे संघर्ष क्षेत्रों में अपने रिश्तेदारों के लिए चिंतित मध्यमवर्गीय परिवारों पर जीत हासिल करना है। इस वर्ष ‘तीसरे मोर्चे’ के विघ्नकर्ताओं का क्या महत्व है? 2026 के अभियान में सबसे उल्लेखनीय बदलावों में से एक अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) का दृश्यमान प्रभाव रहा है। जबकि पार्टी मुख्य रूप से तमिलनाडु में स्थित है, इसका “थलपति” प्रभाव सीमावर्ती जिलों पलक्कड़, इडुक्की और तिरुवनंतपुरम में काफी कम हो गया है। “कॉर्पोरेट-स्वच्छ” प्रशासन और हाई-टेक रोजगार सृजन पर टीवीके का ध्यान युवा जनसांख्यिकीय के साथ प्रतिध्वनित हुआ है जो बारहमासी एलडीएफ-यूडीएफ प्रतिद्वंद्विता से मोहभंग महसूस करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही टीवीके महत्वपूर्ण संख्या में सीटें नहीं जीत सके, लेकिन कड़े त्रिकोणीय मुकाबलों में 5% से 8% वोट खींचने की इसकी क्षमता प्रमुख मोर्चों के लिए “बिगाड़ने” का काम कर सकती है। इस वर्ष, “युवा वोट” केवल विचारधारा के बारे में नहीं है; यह अर्धचालकों, डेटा केंद्रों और बेंगलुरु में “प्रतिभा पलायन” को रोकने के बारे में है। अंतिम रैलियों में टीवीके और एनडीए कार्यक्रमों में भाग लेने वाले युवा मतदाताओं में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई, जिससे पता चलता है कि केरल की राजनीति की पारंपरिक द्विध्रुवीय प्रकृति दशकों में सबसे बड़े तनाव में है। क्या एनआरआई मतदान में गिरावट ‘बहुत पतली’ सीटों का फैसला करेगी? जैसे-जैसे चुनाव प्रचार ख़त्म हो रहा है, “प्रवासी” वोटों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, वडकारा और पोन्नानी जैसे “स्विंग” निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिए 50,000 मलयाली खाड़ी से घर आते हैं। हालाँकि, युद्धकालीन आसमान छूते हवाई किराए और क्षेत्रीय यात्रा प्रतिबंधों के कारण, इस वर्ष यह संख्या 5,000 से कम होने की उम्मीद है। यह अनुपस्थिति यूडीएफ और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जो परंपरागत रूप से केएमसीसी द्वारा आयोजित “वोट उड़ानों” पर भरोसा करते हैं। इसकी भरपाई के लिए, अभियान के अंतिम घंटों में “डिजिटल प्रॉक्सी” वोटिंग की ओर बड़े पैमाने पर बदलाव देखा गया। पार्टियों ने खाड़ी स्थित मलयाली लोगों को लक्षित करते हुए उच्च-उत्पादन वाली व्हाट्सएप सामग्री तैनात की है, जिसमें उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवार के सदस्यों को प्रभावित करने का आग्रह किया गया है। ऐसे राज्य में जहां जीत अक्सर 1,000 से कम वोटों से तय होती है, दुबई में एक बेटे का “व्हाट्सएप वोट” केरल की धरती पर आयोजित किसी भी रैली से अधिक निर्णायक साबित हो सकता है। पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST समाचार चुनाव केरल में शांत उलटी गिनती: चुनाव प्रचार समाप्त होते ही, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)व्हाट्सएप(टी)केरल चुनाव(टी)पश्चिम एशिया(टी)वोटिंग(टी)एलडीएफ(टी)यूडीएफ
नरसिंहपुर मंडी शेडों में व्यापारियों का अनाज भरा:किसानों ने गैलरी में रखा गेहूं, बोली लगाने से इनकार पर हंगामा

नरसिंहपुर की कृषि उपज मंडी में मंगलवार को अव्यवस्थाओं से परेशान होकर किसानों ने जमकर हंगामा किया। उपज रखने की जगह न मिलने और व्यापारियों के रवैये को लेकर किसानों और मंडी प्रबंधन के बीच काफी देर तक खींचतान चलती रही। किसानों का आरोप है कि मंडी के शेडों में पहले से ही व्यापारियों का पुराना अनाज भरा हुआ है। इसकी वजह से जब किसान अपना गेहूं लेकर पहुंचे, तो उन्हें अनाज रखने के लिए कोई खाली जगह नहीं मिली। मजबूरी में किसानों ने अपना गेहूं मंडी की गैलरी में रख दिया, लेकिन व्यापारियों ने यह कहकर बोली लगाने से मना कर दिया कि वहां बोली नहीं लगेगी। किसान बोले- न तौल हुई, न लगी बोली खैरी गांव से आए किसान रमेश कुमार चौधरी ने बताया कि वे करीब 100 क्विंटल गेहूं लेकर मंडी आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घंटों इंतजार के बाद भी न तो उनके गेहूं की तौल हुई और न ही व्यापारियों ने बोली लगाई। किसानों ने मांग की है कि मंडी में जगह तय की जाए और सूचना बोर्ड लगाए जाएं ताकि उन्हें पता रहे कि अनाज कहां रखना है। मंडी प्रबंधन की सफाई हंगामे के बाद मंडी सचिव देवेंद्र ठाकुर ने दखल दिया और स्थिति को संभाला। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कुछ किसानों ने गैलरी में अनाज रख दिया था, जिससे दिक्कत हुई थी। हालांकि, बाद में व्यापारियों को समझाकर गैलरी में रखे माल की भी बोली लगवा दी गई और विवाद शांत कराया गया। किसानों ने भविष्य में ऐसी अव्यवस्था न होने देने की अपील की है।
91 लाख वोट पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- सबसे ज्यादा मुस्लिम वोट और…

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीति काफी गर्म है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में जारी एस तेजस्वी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कैथेड्रल टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि हम उन सभी लोगों के साथ एकजुटता से जुड़े हुए हैं, जिनका नाम चुनाव आयोग ने नीचे दिए गए वोटरों की सूची से हटा दिया है। चुनाव आयोग पर भड़कीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार (7 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के चकदाहा में एक नियुक्ति नियुक्तियों को बयान देते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एस मजबूत के बाद मतदाता सूची से मतुआ और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उन सभी लोगों के साथ खड़ी रहेगी, जहां का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। ‘हम ट्रिब्यूनल्स में इसके लिए कानूनी लड़ाई ‘शैवेजरियन’ है।’ मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पश्चिम बंगाल में मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से उनका नाम निकाला जा रहा था।’ टीएमसी उन लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिनके नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे; ट्रिब्यूनल में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी: बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से विशिष्ट समुदायों के लोगों के नाम हटा दिए गए: चकदाहा चुनाव रैली में ममता बनर्जी। pic.twitter.com/vmpNOtgjD3 – प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 7 अप्रैल 2026 सुप्रीम कोर्ट में यात्रियों के बाद 32 लाख की बहाली का नाम दिया गया चुनाव आयोग के नए आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की सूची में से एस मजबूत प्रक्रिया के बाद करीब 91 लाख रजिस्ट्री के नाम हटा दिए गए हैं। वहीं, ममता बनर्जी ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में उनके हस्तक्षेप के बाद विचाराधीन करीब 60 लाख मामलों में से करीब 32 लाख नाम बहाल कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा वोट और मुस्लिम मतुआ समुदाय के लोगों को काटा गया है. 23 अप्रैल को बंगाल में पहले चरण का चुनाव होगा 294 विधानसभा वाले पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनावी मोटरबाइक तैयार की गई है। पश्चिम बंगाल में पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल, 2026 को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल, 2026 को होगा। इसके बाद वोटों की गिनती और चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई, 2026 को की जाएगी। यह भी पढ़ें: ’55 साल पहले दो-टूक थे, लेकिन इस बार…’, ख्वाजा स्टूडियो के कोलकाता वाले खतरनाक पर भड़के राजनाथ, 1971 की मजबूत याद








