Tuesday, 15 Sep 2026 | 08:51 PM

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वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला, 2 पुलिसकर्मी की मौत, एक दिन में अलग-अलग हमलों में 7 जाने गईं

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला, 2 पुलिसकर्मी की मौत, एक दिन में अलग-अलग हमलों में 7 जाने गईं

पाकिस्तान में मंगलवार को अलग-अलग हमलों में 7 पुलिसकर्मियों की जान चली गई। अधिकारियों ने बताया कि पंजाब प्रांत के भक्कर जिले में एक सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला हुआ। पंजाब पुलिस प्रमुख अब्दुल करीम के मुताबिक इस हमले में 2 पुलिसकर्मी मारे गए। इस धमाके में 3 आम लोग भी घायल हुए, जिनमें पोलियो रोधी अभियान से जुड़े 2 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इसी दिन इससे पहले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट इलाके में उग्रवादियों ने एक पुलिस गाड़ी पर हमला किया। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि इस हमले में 5 पुलिसकर्मी, जिनमें एक वरिष्ठ अधिकारी भी थे और 2 नागरिक मारे गए। कोहाट के जिला पुलिस अधिकारी शेहबाज इलाही ने बताया कि इस हमले में 3 अन्य लोग घायल भी हुए। पिछले एक हफ्ते में खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में उग्रवादियों के खिलाफ झड़पों और सुरक्षा अभियानों के दौरान कम से कम 16 सुरक्षाकर्मी, जिनमें एक सीनियर सेना अधिकारी भी शामिल थे, मारे गए हैं। सेना के मुताबिक इन अभियानों और हमलों में 53 उग्रवादी भी मारे गए। हाल के सालों में पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाएं बढ़ी हैं। खास तौर पर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, पुलिस और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।

सिवनी में तेज आवाज बुलेट पर पुलिस की कार्रवाई:मॉडिफाइड साइलेंसर के लिए किया जुर्माना; चालक को सख्त हिदायत

सिवनी में तेज आवाज बुलेट पर पुलिस की कार्रवाई:मॉडिफाइड साइलेंसर के लिए किया जुर्माना; चालक को सख्त हिदायत

सिवनी शहर में तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगी मोटरसाइकिलों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। ध्वनि प्रदूषण और आमजन को हो रही असुविधा को देखते हुए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसी क्रम में मंगलवार की रात्रि को घसियारी चौक क्षेत्र में एक बुलेट मोटरसाइकिल को तेज आवाज वाले साइलेंसर के साथ पकड़ा गया। कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार तिवारी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता के निर्देश पर तेज और मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना और नागरिकों, विद्यार्थियों तथा बुजुर्गों को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस ने तेज आवाज कर रही बुलेट मोटरसाइकिल को रोककर जांच की। जांच में पाया गया कि वाहन में मॉडिफाइड साइलेंसर लगा हुआ था। इसके बाद वाहन को थाने लाकर खड़ा कराया गया और चालक के विरुद्ध मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 120/190(2) के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस ने चालक से 1000 रुपए का समन शुल्क वसूल किया और उसे भविष्य में इस प्रकार का उल्लंघन न करने की सख्त हिदायत दी। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि शहर में नियमों का उल्लंघन कर वाहन चलाने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और अवैध मॉडिफिकेशन से बचने की अपील की, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में निरीक्षक सतीश तिवारी के साथ आरक्षक सौरभ सिंह, सिद्धार्थ दुबे और लोकेश सरेयाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मासूम शर्मा ने पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:अमृतसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक में MA की; बोले- अचीवमेंट फैंस को समर्पित

मासूम शर्मा ने पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:अमृतसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक में MA की; बोले- अचीवमेंट फैंस को समर्पित

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच विवाद के बीच अपनी दूसरी मास्टर डिग्री पूरी कर ली है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ कई फोटोज भी शेयर किए हैं। मासूम शर्मा ने अमतृसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक सब्जेक्ट में MA की है। करीब डेढ़ साल पहले ही उन्होंने अपनी मास्टरर्स पूरी कर ली थी, लेकिन 23 फरवरी को हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें ये डिग्री मिली। मासूम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- गायकी मेरा इश्क है, पढ़ाई मेरी ताकत। दो मास्टर डिग्री पूरी करने की अचीवमेंट अपने हर एक फैन को समर्पित करता हूं। अब पढ़िए…मासूम का स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक का सफर गांव के स्कूल से की दसवीं की पढ़ाई मासूम शर्मा का जन्म जींद के गांव ब्राह्मणवास गांव में 27 मार्च 1991 को हुआ था। मासूम ने दसवीं तक की पढ़ाई हिंदू स्कूल जुलाना से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई एसडी स्कूल किलाजफरगढ़ से की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए रोहतक का रुख किया। पंडित लख्मीचंद कॉलेज से फिल्म एंड एक्टिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। मास कम्युनिकेशन में पहली डिग्री की ग्रेजुएशन के बाद मासूम शर्मा ने 2019 में मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया प्रोडक्शन में MA की पढ़ाई पूरी की। यह डिग्री भी उन्होंने पंडित लख्मीचंद यूनिवर्सिटी से ही हासिल की। 2019 में ही पंडित लख्मीचंद कॉलेज में मास्टर डिग्री का पहला बैच शुरू हुआ था। मासूम इसी बैच के स्टूडेंट थे। मासूम शर्मा ने अपनी दूसरी मास्टर डिग्री वर्ष 2024 में म्यूजिक विषय में पूरी की थी। बड़ा बेटा फर्स्ट क्लॉस में पढ़ाई कर रहा मासूम शर्मा के के दो बेटे और एक बेटी है। जिनमें से एक एलकेजी और दूसरा बच्चा फर्स्ट क्लास में पढ़ाई करता है। जबकि छोटा बेटा अभी तीन साल का है। 18 फरवरी को जींद में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ 18 फरवरी को जींद में मासूम शर्मा का बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं सालगिराह के दौरान हुए कार्यक्रम में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ था। मासूम शर्मा ने लाइव शो के दौरान स्टेज पर पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को देखकर भड़क गए थे। मासूम ने यहां तक कह दिया था कि मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। इसके बाद विवाद बढ़ा तो पूर्व पूर्व सरपंच ने उन्हें पंच का चुनाव तक लड़ने की चुनौती दे डाली। इसके बाद मासूम के बड़े भाई विकास शर्मा ने मुआना गांव में पूर्व सरपंच के सामने बैठकर मामले में मासूम की गलती स्वीकार की थी, लेकिन विवाद फिर भी नहीं रुका। हालांकि, मासूम ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अपने शब्द वापस लेने की बात कही थी, लेकिन उसके साथ यह भी कहा था कि एक व्यक्ति के कहने पर पंचायत नहीं होती। ————– पूर्व सरपंच विवाद की ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं: दोस्त मुकेश जाजी ने गलती मानी, सरपंचों ने किया बहिष्कार; प्रदेश प्रभारी बोले- मौत के कार्यक्रम में भी नचा लो पूर्व सरपंच बोले-पैसे देकर मासूम शर्मा को कहीं नचवा लो:पंच चुनाव जीतकर दिखाए, जींद में महापंचायत की तैयारी; सिंगर ने स्टेज से उतारा था फतेहाबाद में सरपंचों की मासूम शर्मा को चेतावनी:माफी मांगने की मांग; बोले- वरना कोई भी इवेंट्स नहीं होने देंगे

ट्रम्प आज अमेरिकी संसद को संबोधित करेंगे:ईरान-गाजा और टैरिफ पर बयान दे सकते हैं; एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़ित शामिल होंगी

ट्रम्प आज अमेरिकी संसद को संबोधित करेंगे:ईरान-गाजा और टैरिफ पर बयान दे सकते हैं; एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़ित शामिल होंगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में दूसरे कार्यकाल का दूसरा ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ भाषण देंगे। इस दौरान वे ईरान और गाजा के हालात के साथ-साथ टैरिफ के मुद्दे पर भी बयान दे सकते हैं। उनके भाषण के दौरान जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़िताएं भी संसद में मौजूद रहेंगी। इन्हें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शूमर, एमिली रैंडल, टेरेसा लेगर फर्नांडीज, जैमी रास्किन और सुहास सुब्रमण्यम ने इनवाइट किया है। ट्रम्प और एपस्टीन में लंबे समय तक दोस्ती थी, हालांकि ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि उन्हें एपस्टीन के किसी गलत काम की जानकारी नहीं थी। ट्रम्प का संबोधन सुबह 7:30 बजे शुरू होगा। इस जॉइंट सेशन में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) मेंबर, सीनेट (ऊपरी सदन) मेंबर, सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की कैबिनेट मौजूद रहती है। इस भाषण में राष्ट्रपति देश के मौजूदा हालात और अपनी सरकार की आगे की योजनाओं के बारे में बताते हैं। ट्रम्प टैरिफ नीति को देश की सुरक्षा से जोड़ सकते हैं इस बार भाषण की थीम ‘अमेरिका एट 250: स्ट्रॉन्ग, प्रॉस्पेरस एंड रिस्पेक्टेड’ रखी गई है। CNN के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रम्प के कुछ टैरिफ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद उन्होंने सीमित समय के लिए नया टैरिफ लागू किया है। हो सकता है वे इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए जरूरी कदम बता सकते हैं। ट्रम्प विदेश नीति पर भी खुलकर बोल सकते हैं। ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और गाजा में हालात को लेकर भी अमेरिका की भूमिका चर्चा में है। ट्रम्प खुद को मजबूत नेता के तौर पर पेश करते हुए कह सकते हैं कि सख्त रुख ही शांति का रास्ता है। यूक्रेन युद्ध भी चर्चा में रहेगा। रूस के हमले को चार साल पूरे हो गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि वह एक दिन में युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इमिग्रेशन भी उनका प्रमुख मुद्दा रहेगा। सत्ता में लौटने के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर डिपोर्ट ऑपरेशन चलाया और दक्षिणी बॉर्डर पर सख्ती बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने 13 महीनों में लगभग 240 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के बाद इतने कम समय में इतने ज्यादा आदेश किसी राष्ट्रपति ने जारी नहीं किए। ट्रम्प किन किन मुद्दों पर भाषण दे सकते हैं… हर साल जनवरी या फरवरी में ये भाषण होता है अमेरिका में राष्ट्रपति हर साल जनवरी या फरवरी में कांग्रेस (संसद) को एक संबोधित करते हैं, जिसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कहा जाता है। स्टेट ऑफ द यूनियन के दिन संसद की प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) और सीनेट (ऊपरी सदन) के सदस्य हाउस चैंबर में इकट्ठा होते हैं। स्पीकर ऑफ द हाउस और उपराष्ट्रपति जो सीनेट के अध्यक्ष भी होते हैं, राष्ट्रपति के पीछे ऊंचे मंच पर बैठते हैं। जब राष्ट्रपति संसद में पहुंचते हैं तो हाउस के सार्जेंट-एट-आर्म्स उनके आने की घोषणा करते हैं। इसके बाद स्पीकर राष्ट्रपति का परिचय कराते हैं और राष्ट्रपति कांग्रेस को अपना भाषण देते हैं। कैबिनेट का एक मेंबर कार्यक्रम में शामिल नहीं होता एक परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति के कैबिनेट का एक सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होता। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और बाकी कैबिनेट सदस्य की मौत हो जाएं, तो जो सदस्य कार्यक्रम में नहीं आया है वह राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल सके। राष्ट्रपति अपने भाषण के लिए कुछ खास अमेरिकी नागरिकों को भी बुलाते हैं। इन लोगों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है क्योंकि उन्होंने कोई असाधारण काम किया होता है। भाषण के दौरान राष्ट्रपति उनका परिचय कराते हैं और सम्मानित करते हैं। स्टेट ऑफ द यूनियन संदेश के बाद विपक्षी पार्टी की ओर से एक जवाबी भाषण दिया जाता है। इसमें विपक्ष के नेता राष्ट्रपति की बातों पर अपनी राय रखते हैं और देश को बेहतर बनाने के लिए अलग सुझाव देते हैं। इसे पहले ‘एनुअल मैसेज’ कहा जाता था स्टेट ऑफ द यूनियन की परंपरा अमेरिकी संविधान से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 2 में लिखा है कि राष्ट्रपति समय-समय पर कांग्रेस को देश के हालात की जानकारी देंगे और जरूरी कदमों की सिफारिश करेंगे। शुरुआत में इस भाषण को ‘एनुअल मैसेज’ कहा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन से लेकर हर्बर्ट हूवर तक सभी राष्ट्रपति इसे इसी नाम से बुलाते थे। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने 1941 के भाषण में इसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कहा। हालांकि उनका यह भाषण ‘फोर फ्रीडम्स’ नाम से ज्यादा फेमस है। संविधान में यह नहीं बताया गया है कि यह संदेश कब और कैसे दिया जाए, लेकिन परंपरा के तौर पर राष्ट्रपति हर साल एक बार यह भाषण देते हैं। पहले यह भाषण आमतौर पर दिसंबर में दिया जाता था, लेकिन 1934 के बाद से इसे जनवरी या फरवरी में दिया जाने लगा। साल 2022 में जो बाइडेन मार्च महीने में व्यक्तिगत रूप से यह भाषण देने वाले पहले राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने 2024 में भी ऐसा ही किया। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में इसी तरह का संबोधन दिया था। थॉमस जेफरसन ने लिखित संदेश भेजे थे एक समय ऐसा भी था जब ये स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण के रूप में नहीं बल्कि लिखित रूप में भेजा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन (1789-1797) और जॉन एडम्स (1797-1801) ने कांग्रेस के सामने जाकर भाषण दिया था, लेकिन थॉमस जेफरसन (1801-1809) ने लिखित संदेश भेजने की परंपरा शुरू की। माना जाता है कि वह अच्छे वक्ता नहीं थे। इसके बाद 1913 तक राष्ट्रपति लिखित संदेश ही भेजते रहे। फिर वुडरो विल्सन (1913-1921) ने दोबारा कांग्रेस के जॉइंट सेशन को संबोधित करने की परंपरा शुरू की। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के बाद से ज्यादातर राष्ट्रपति भाषण देकर ही अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हैं। दो राष्ट्रपति ऐसे रहे जो यह भाषण नहीं दे पाए। विलियम हेनरी हैरिसन की 1841 में बीमारी से मौत हो गई थी और जेम्स गारफील्ड की 1881 में एक हमले में मृत्यु हो गई थी। इसलिए दोनों अपने कार्यकाल में स्टेट ऑफ द यूनियन नहीं दे सके। रॉनल्ड रीगन ने 1981 में अपने पहले

ट्रम्प आज अमेरिकी संसद को संबोधित करेंगे:ईरान-गाजा और टैरिफ पर बयान दे सकते हैं; एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़ित शामिल होंगी

ट्रम्प आज अमेरिकी संसद को संबोधित करेंगे:ईरान-गाजा और टैरिफ पर बयान दे सकते हैं; एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़ित शामिल होंगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में दूसरे कार्यकाल का दूसरा ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ भाषण देंगे। इस दौरान वे ईरान और गाजा के हालात के साथ-साथ टैरिफ के मुद्दे पर भी बयान दे सकते हैं। उनके भाषण के दौरान जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की कई पीड़िताएं भी संसद में मौजूद रहेंगी। इन्हें विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शूमर, एमिली रैंडल, टेरेसा लेगर फर्नांडीज, जैमी रास्किन और सुहास सुब्रमण्यम ने इनवाइट किया है। ट्रम्प और एपस्टीन में लंबे समय तक दोस्ती थी, हालांकि ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि उन्हें एपस्टीन के किसी गलत काम की जानकारी नहीं थी। ट्रम्प का संबोधन सुबह 7:30 बजे शुरू होगा। इस जॉइंट सेशन में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) मेंबर, सीनेट (ऊपरी सदन) मेंबर, सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रपति की कैबिनेट मौजूद रहती है। इस भाषण में राष्ट्रपति देश के मौजूदा हालात और अपनी सरकार की आगे की योजनाओं के बारे में बताते हैं। ट्रम्प टैरिफ नीति को देश की सुरक्षा से जोड़ सकते हैं इस बार भाषण की थीम ‘अमेरिका एट 250: स्ट्रॉन्ग, प्रॉस्पेरस एंड रिस्पेक्टेड’ रखी गई है। CNN के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रम्प के कुछ टैरिफ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद उन्होंने सीमित समय के लिए नया टैरिफ लागू किया है। हो सकता है वे इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए जरूरी कदम बता सकते हैं। ट्रम्प विदेश नीति पर भी खुलकर बोल सकते हैं। ईरान को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और गाजा में हालात को लेकर भी अमेरिका की भूमिका चर्चा में है। ट्रम्प खुद को मजबूत नेता के तौर पर पेश करते हुए कह सकते हैं कि सख्त रुख ही शांति का रास्ता है। यूक्रेन युद्ध भी चर्चा में रहेगा। रूस के हमले को चार साल पूरे हो गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि वह एक दिन में युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इमिग्रेशन भी उनका प्रमुख मुद्दा रहेगा। सत्ता में लौटने के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर डिपोर्ट ऑपरेशन चलाया और दक्षिणी बॉर्डर पर सख्ती बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने 13 महीनों में लगभग 240 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के बाद इतने कम समय में इतने ज्यादा आदेश किसी राष्ट्रपति ने जारी नहीं किए। ट्रम्प किन किन मुद्दों पर भाषण दे सकते हैं… हर साल जनवरी या फरवरी में ये भाषण होता है अमेरिका में राष्ट्रपति हर साल जनवरी या फरवरी में कांग्रेस (संसद) को एक संबोधित करते हैं, जिसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कहा जाता है। स्टेट ऑफ द यूनियन के दिन संसद की प्रतिनिधि सभा (निचला सदन) और सीनेट (ऊपरी सदन) के सदस्य हाउस चैंबर में इकट्ठा होते हैं। स्पीकर ऑफ द हाउस और उपराष्ट्रपति जो सीनेट के अध्यक्ष भी होते हैं, राष्ट्रपति के पीछे ऊंचे मंच पर बैठते हैं। जब राष्ट्रपति संसद में पहुंचते हैं तो हाउस के सार्जेंट-एट-आर्म्स उनके आने की घोषणा करते हैं। इसके बाद स्पीकर राष्ट्रपति का परिचय कराते हैं और राष्ट्रपति कांग्रेस को अपना भाषण देते हैं। कैबिनेट का एक मेंबर कार्यक्रम में शामिल नहीं होता एक परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति के कैबिनेट का एक सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होता। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और बाकी कैबिनेट सदस्य की मौत हो जाएं, तो जो सदस्य कार्यक्रम में नहीं आया है वह राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल सके। राष्ट्रपति अपने भाषण के लिए कुछ खास अमेरिकी नागरिकों को भी बुलाते हैं। इन लोगों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है क्योंकि उन्होंने कोई असाधारण काम किया होता है। भाषण के दौरान राष्ट्रपति उनका परिचय कराते हैं और सम्मानित करते हैं। स्टेट ऑफ द यूनियन संदेश के बाद विपक्षी पार्टी की ओर से एक जवाबी भाषण दिया जाता है। इसमें विपक्ष के नेता राष्ट्रपति की बातों पर अपनी राय रखते हैं और देश को बेहतर बनाने के लिए अलग सुझाव देते हैं। इसे पहले ‘एनुअल मैसेज’ कहा जाता था स्टेट ऑफ द यूनियन की परंपरा अमेरिकी संविधान से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 2 में लिखा है कि राष्ट्रपति समय-समय पर कांग्रेस को देश के हालात की जानकारी देंगे और जरूरी कदमों की सिफारिश करेंगे। शुरुआत में इस भाषण को ‘एनुअल मैसेज’ कहा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन से लेकर हर्बर्ट हूवर तक सभी राष्ट्रपति इसे इसी नाम से बुलाते थे। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने 1941 के भाषण में इसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कहा। हालांकि उनका यह भाषण ‘फोर फ्रीडम्स’ नाम से ज्यादा फेमस है। संविधान में यह नहीं बताया गया है कि यह संदेश कब और कैसे दिया जाए, लेकिन परंपरा के तौर पर राष्ट्रपति हर साल एक बार यह भाषण देते हैं। पहले यह भाषण आमतौर पर दिसंबर में दिया जाता था, लेकिन 1934 के बाद से इसे जनवरी या फरवरी में दिया जाने लगा। साल 2022 में जो बाइडेन मार्च महीने में व्यक्तिगत रूप से यह भाषण देने वाले पहले राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने 2024 में भी ऐसा ही किया। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में इसी तरह का संबोधन दिया था। थॉमस जेफरसन ने लिखित संदेश भेजे थे एक समय ऐसा भी था जब ये स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण के रूप में नहीं बल्कि लिखित रूप में भेजा जाता था। जॉर्ज वॉशिंगटन (1789-1797) और जॉन एडम्स (1797-1801) ने कांग्रेस के सामने जाकर भाषण दिया था, लेकिन थॉमस जेफरसन (1801-1809) ने लिखित संदेश भेजने की परंपरा शुरू की। माना जाता है कि वह अच्छे वक्ता नहीं थे। इसके बाद 1913 तक राष्ट्रपति लिखित संदेश ही भेजते रहे। फिर वुडरो विल्सन (1913-1921) ने दोबारा कांग्रेस के जॉइंट सेशन को संबोधित करने की परंपरा शुरू की। फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के बाद से ज्यादातर राष्ट्रपति भाषण देकर ही अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हैं। दो राष्ट्रपति ऐसे रहे जो यह भाषण नहीं दे पाए। विलियम हेनरी हैरिसन की 1841 में बीमारी से मौत हो गई थी और जेम्स गारफील्ड की 1881 में एक हमले में मृत्यु हो गई थी। इसलिए दोनों अपने कार्यकाल में स्टेट ऑफ द यूनियन नहीं दे सके। रॉनल्ड रीगन ने 1981 में अपने पहले

मंदसौर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली 12 बाइक जब्त:तेज आवाज और पटाखों पर पुलिस का एक्शन; बुलेट चलाने वालों पर विशेष नजर

मंदसौर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली 12 बाइक जब्त:तेज आवाज और पटाखों पर पुलिस का एक्शन; बुलेट चलाने वालों पर विशेष नजर

मंदसौर जिले में पटाखे जैसी तेज आवाज निकालने वाले और मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार शाम से बड़ा अभियान शुरू किया है। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देश पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक 12 मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं। इनमें 10 रॉयल एनफील्ड (बुलेट) और दो अन्य बाइक शामिल हैं। फिलहाल, पुलिस इन वाहनों को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा कर रही है और यह कार्रवाई पूरे जिले में निरंतर जारी रहेगी। यातायात पुलिस द्वारा मंदसौर शहर के रामटेकरी, पुलिस पेट्रोल पंप के पास और सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहे पर विशेष चेकिंग पॉइंट लगाए गए हैं। वहीं सिटी कोतवाली पुलिस ने प्रतापगढ़ पुलिया और 10 नंबर नाका सहित विभिन्न संवेदनशील इलाकों में सर्चिंग तेज कर दी है। जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जा रही है। बुलेट के साइलेंसर की बारीकी से जांच इस अभियान के दौरान पुलिस का विशेष फोकस रॉयल एनफील्ड (बुलेट) मोटरसाइकिलों पर है। अधिकारी खुद वाहनों के साइलेंसर की जांच कर रहे हैं कि उनसे पटाखे जैसी आवाज या चिंगारियां तो नहीं निकल रही हैं। जिन भी वाहनों में नियमों के विरुद्ध मॉडिफाइड साइलेंसर पाए जा रहे हैं, उन्हें मौके पर ही जब्त किया जा रहा है। पुलिस की चेतावनी- जारी रहेगी सख्ती यातायात सूबेदार शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि एसपी के निर्देश पर यह अभियान शुरू किया गया है, जो पूरे जिले में लगातार चलेगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।

टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर हुई चर्चा बेनतीजा रही। मीटिंग के दौरान मतभेद उभरने के बाद खुद चंद्रशेखरन ने अपना कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप तभी सबसे अच्छा काम करता है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के फैसले एक समान हों। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के घाटे पर जताई चिंता इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने मीटिंग के दौरान ग्रुप के कुछ नए बिजनेस में हो रहे घाटे का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की। हालांकि, बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि ये घाटे ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स’ (नए शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स) से जुड़े हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मुनाफा देने में थोड़ा समय लगता है और यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। कार्यकाल विस्तार के लिए नोएल टाटा की 4 शर्तें माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं: चंद्रशेखरन को जून में रिटायरमेंट नियमों से चाहिए होगी छूट एन चंद्रशेखरन इस साल जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा संस के नियमों के मुताबिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल तय है। अगर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी आगे बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए बोर्ड को एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करना होगा और रिटायरमेंट नियमों में छूट देनी होगी। निदेशकों ने की वोटिंग की पेशकश, चेयरमैन ने टाला फैसला बोर्ड की पुनर्नियुक्ति समिति की प्रमुख अनीता जॉर्ज ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नए प्रोजेक्ट्स में शुरुआती घाटे सामान्य बात है। चर्चा के बाद जब कुछ निदेशकों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने का प्रस्ताव दिया, तो चंद्रशेखरन ने खुद इसे फिलहाल टालने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि टाटा संस और मुख्य शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति होना ग्रुप के भविष्य के लिए जरूरी है। टाटा ग्रुप में विवाद, सरकार को दखल देना पड़ा रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल को टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल किया गया। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया यह फैसला ट्रस्ट के भीतर एकमत नहीं था। इससे टाटा संस को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बोर्ड सीट को लेकर सीधा-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड मेंबर नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसकी टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो। मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। टाटा ग्रुप में टाटा संस की 66% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। यह भारत की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है, 10 अलग-अलग बिजनेस में इसकी 30 कंपनियां दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं। टाटा संस टाटा कंपनियों की प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग और प्रमोटर है। टाटा संस की 66% इक्विटी शेयर कैपिटल टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट के पास हैं, जो एजुकेशन, हेल्थ, आर्ट एंड कल्चर और लाइवलीहुड जनरेशन के लिए काम करता है। 2023-24 में टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का टोटल रेवेन्यू 13.86 लाख करोड़ रुपए था। यह 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। इसके प्रोडक्ट्स सुबह से शाम तक हमारी जिंदगी में शामिल है। कंपनी चाय पत्ती से लेकर घड़ी, कार और एंटरटेनमेंट सर्विसेज देती है।

कोकिलाबेन अंबानी ने नाथद्वारा में मनाया 92वां जन्मदिन:बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी सहित पूरा परिवार रहा मौजूद; एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए

कोकिलाबेन अंबानी ने नाथद्वारा में मनाया 92वां जन्मदिन:बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी सहित पूरा परिवार रहा मौजूद; एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए

नाथद्वारा के श्रीनाथजी की हवेली में बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन ने 92वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर पूरा अंबानी परिवार मौजूद रहा। सभी ने श्रीनाथजी के दर्शन किए और युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा से आशीर्वाद लिया। अंबानी परिवार मंगलवार शाम 4 बजे मंदिर में पहुंचा, सभी लोग संध्या आरती में शामिल हुए। श्रीनाथ जी के दर्शन के बाद युवाचार्य विशाल बावा ने परिवार के सदस्यों को फेंटा बांधकर, रजाई एवं ऊपरना ओढ़ाकर प्रसाद और आशीर्वाद दिया। परिवार ने युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के पिता तिलकायत गोस्वामी इंद्रदमन महाराज और मा राजेश्वरी गोस्वामी से वीडियो कॉल पर आशीर्वाद प्राप्त किया। तिलकायत ने कोकिला बेन अंबानी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। अंबानी परिवार ढाई घंटे तक मंदिर में रहा। दोनों भाई समेत पूरा परिवार मौजूद रहा कोकिला बेन के जन्मदिन पर मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, आकाश अंबानी, अनंत अंबानी, श्लोका मेहता अंबानी, राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना कोठारी, दीप्ती सालगांवकर सहित परिवारजन मौजूद रहे। उनके साथ उद्योगपति धनराज नाथवानी भी मौजूद रहे। बता दें कि कोकिला बेन अंबानी मंदिर मंडल नाथद्वारा की उपाध्यक्ष भी हैं। मोती महल चौक में हुई भजन संध्या इस अवसर पर महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्ति वाचन और मंगलाचरण के पाठ किए गए। मोती महल चौक में भजन संध्या का आयोजन कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। नाथद्वारा आने से पूर्व अंबानी परिवार ने मेवाड़ के प्रमुख आराध्य देव एकलिंगनाथ मंदिर मे भी दर्शन किए। कोकिलाबेन को माना जाता है अंबानी परिवार का मुखिया 24 फरवरी 1934 को जामनगर, गुजरात में जन्मी कोकिलाबेन को अंबानी परिवार की मुखिया माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि इस तेजी से बदलते दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। कोकिलाबेन परिवार को एकजुट रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों में भी शामिल हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है।

मसाले के रूप में रसोई में रखी ये लकड़ी, बड़े पैमाने पर काम का, प्रवासियों से लेकर उच्च रेलवे तक की छुट्टियों में है राहत; जानिए कैसे उपयोग किया जाता है

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24 फरवरी 2026 को 21:09 IST पर अद्यतन किया गया पियानो वुड की छात्रा जैसी दिखती है। लेकिन ये सिर्फ चाय और सब्जी का स्वाद नहीं बल्कि मसाले और चॉकलेट को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है, जानें कैसे। लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है।

नकली शकरकंद: सावधान! बाजार में बिक रहा नकली शकरकन्द, घर पर ऐसे करें असली की पहचान

नकली शकरकंद

नकली शकरकंद | छवि: फ्रीपिक नकली शकरकंद: शकरकंद को आम तौर पर हेल्थमंद और मशरिक आहार माना जाता है, लेकिन अब यही सुपरफूड उत्पाद की वजह से चर्चा में चल रहा है। बहुउद्देश्यीय सामानों के बाजार में नकली और केमिकल मिले शकरकन्द सोलन जाने की खबरें सामने आई हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि शक्रकंद में खतरनाक केमिकल रोडामिन बी के उत्पाद जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। आइए जानते हैं कि नकली शकरकन्द को घर पर कैसे पहचाना जा सकता है। रोडामिन बी क्या होता है? बीमामिन एक रसायनिक रंग है, जिसका उपयोग कपड़ा, कागज, सामान और प्रयोगशाला में किया जाता है। ये ख़ज़ाना नहीं चलता. FSSAI के अनुसार इस रसायन का सेवन गंभीर खतरा का कारण बन सकता है। इससे कैंसर, कैंसर और किडनी को नुकसान जैसे खतरे हो सकते हैं। इसलिए खाद्य वस्तुओं में इसका उपयोग पूरी तरह से असुरक्षित माना जाता है। घर पर ऐसे करें शकरकन्द की जांच उत्पादी शकरकन्द की पहचान घर पर काफी आसान तरीके से की जा सकती है। इसके लिए थोड़ा सा पानी या वनस्पति तेल लें और इसमें रुई सोर्स लें। अब इस रुई को शकरकन्द के ऊपर थोड़ी देर तक राँगें। अगर शक्रकंद नहीं आया तो रुई का रंग नहीं बदलेगा। लेकिन अगर इसमें रोडामिन बी मिला हुआ है तो रुई लाल या ब्लू कलर की होगी। पोषण से भरपूर होता है शकरकंद शकरकन्द कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। 100 ग्राम शकरकन्द में लगभग 80 से 86 कैलोरी, 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 1 से 2 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें विटामिन ए के अलावा विटामिन सी, कैल्शियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है। शकरकंद में कई तरह के तत्व शामिल किये जा सकते हैं- शकरकंद चिप्सआदर्श वाक्य में विजिबिलिटी एयर फ्राई या मोटोरोला द्वारा रेडिएशन तैयार किया जा सकता है। शकरकन्द स्टुटमसाले को टमाटर, प्याज और मसालों की ग्रेवी के साथ पकाकर मिशिगन स्टूडियो बनाया जा सकता है। फिर हुआ शकरकन्दइसे कुरकुरे से बनाया जा सकता है। शहद पोनी शकरकंदकच्चे माल को शहद और दालचीनी के साथ मिश्रित और मोर्टार से तैयार किया जा सकता है। भरवां शकरकन्दचीज़, प्लांटेशन और प्लास्टिक की फिलिंग के साथ यह एक भरपेट और मैकेनिकल विकल्प बन जाता है। यह भी पढ़ें:गोविंद नामदेव ने प्लास्टिक बॉलीवुड इंडस्ट्री की पोल, फ्रैंक की बात