Sunday, 30 Aug 2026 | 06:05 PM

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करिश्मा कपूर@52, जया बच्चन ने सरेआम कहा बहू:कपूर खानदान की पहली एक्ट्रेस, हनीमून पर पति ने दोस्तों के साथ सोने को कहा

करिश्मा कपूर@52, जया बच्चन ने सरेआम कहा बहू:कपूर खानदान की पहली एक्ट्रेस, हनीमून पर पति ने दोस्तों के साथ सोने को कहा

90 के दशक में बॉलीवुड पर राज करने वालीं करिश्मा कपूर आज 52 साल की हो चुकी हैं। 65 से ज्यादा फिल्मों और अनगिनत हिट्स के दम पर सुपरस्टार बनीं करिश्मा को कपूर खानदान की रीत बदलने का क्रेडिट भी दिया जाता है। उनसे पहले कपूर खानदान की महिलाओं पर फिल्मों से जुड़ने पर पाबंदी थी। करिश्मा की कहानी सिर्फ स्टारडम की नहीं, बल्कि अधूरे रिश्तों और विवादों की भी है। कभी अक्षय खन्ना उनसे शादी करना चाहते थे। उनके पिता विनोद खन्ना ने रिश्ता भी भिजवाया, लेकिन करिश्मा की मां बबीता ने रिश्ता ठुकरा दिया। कहा जाता है कि यही वजह है कि अक्षय ने कभी शादी नहीं की। आगे अभिषेक से उनकी शादी की और जया बच्चन ने सार्वजनिक मंच पर उन्हें बहू कहकर मीडिया के सामने इंट्रोड्यूस किया, लेकिन ये शादी भी चर्चा में रहने के बावजूद टूट गई। करिश्मा ने 2003 में बचपन के दोस्त संजय कपूर से शादी की। हालांकि बाद में ये शादी विवादों में बदल गई। करिश्मा ने दावा किया कि हनीमून में पति संजय ने दोस्तों से उनकी बोली लगवाई। करिश्मा ने मारपीट, दहेज प्रताड़ना और टॉर्चर का आरोप लगाते हुए पति से तलाक लिया, लेकिन पूर्व पति की मौत के बाद ये रिश्ता फिर चर्चा में आ गया और आज भी उनकी 3200 करोड़ की प्रॉपर्टी पर कानूनी विवाद जारी है। आज करिश्मा के जन्मदिन के खास मौके पर जानिए, उनके निजी रिश्तों, संजय कपूर से शादी और विवाद की पूरी कहानी- 25 जून 1974 को करिश्मा कपूर का जन्म हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित परिवार के एक्टर रणधीर कपूर और एक्ट्रेस बबीता के घर हुआ। उनकी पैदाइश पर पूरा कपूर खानदान ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचा, लेकिन दादा शो मैन राज कपूर नहीं आए। उन्होंने साफ कहा, ‘बच्ची को देखने तब ही जाऊंगा, जब उसकी आंखें नीली हों।’ खुशकिस्मती से करिश्मा की आंखें गहरी नीली रहीं, हूबहू दादाजी की तरह। घर की पहली बेटी होने पर वो पूरे परिवार की चहेती रहीं। देखिए करिश्मा कपूर के बचपन की तस्वीरें- एक समय में उनकी मां बबीता, जानी-मानी एक्ट्रेस थीं, जिन्होंने कपूर खानदान की बहू बनने के लिए एक्टिंग करियर कुर्बान कर दिया। शादी से कुछ समय पहले उन्होंने 1968 की फिल्म हसीना मान जाएगी में काम किया था। इस फिल्म की शूटिंग, बॉम्बे के बिजनेस टायकून रौनक सिंह के घर में हुई। घर में शूटिंग करते हुए बबीता की दोस्ती रौनक सिंह की बेटी रानी सिंह (बाद में कपूर) से हुई, जो आगे चलकर करिश्मा की सास बनीं। रानी उस वक्त महज 18 साल की थीं। आगे रानी सिंह ने ऑटो पार्ट के नामी बिजनेसमैन सुरिंदर कपूर से शादी की, जिससे उन्हें बेटा संजय कपूर हुआ। समय के साथ बबीता और रानी की दोस्ती गहरी होती रही। वो अक्सर साथ पार्टी करते थे, जिससे बच्चों करिश्मा, करीना, संजय और उनकी बहनों की दोस्ती भी गहरी हुई। करिश्मा कपूर ने मुंबई के कैथेद्रेल एंड जॉन केनन स्कूल से पढ़ाई की। संजय कपूर ने शुरुआत में देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई की लेकिन कुछ सालों में ही उनका दाखिला करिश्मा के स्कूल में करवा दिया गया। दोनों की दोस्ती और बढ़ गई। स्कूलिंग के बाद संजय कपूर पढ़ाई करने विदेश चले गए और करिश्मा की रुचि फिल्मों में बढ़ने लगी और इस तरह दोनों की दोस्ती में दूरी आ गई। दोनों अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त होते चले गए। फिल्मी दुनिया हमेशा से ही करिश्मा को अट्रैक्ट करती थी। बचपन से ही वो दादाजी राज कपूर और पिता रणधीर के फिल्मों के सेट पर जाया करती थीं। वो अक्सर दादाजी से कहती थीं, ‘मैं भी एक दिन हीरोइन बनूंगी’, इस पर राज कपूर उन्हें जवाब देते थे- ‘एक्टर बनना कोई आसान काम नहीं है, अगर तुम एक्टर बनना चाहती हो, तो कांटों पर चलो और मिट्टी पर काम करो ताकि अच्छी एक्टर बन सको। एक्टर को हमेशा बेस्ट बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।’ जब एक दिन करिश्मा ने पिता रणधीर से कहा कि उन्हें हीरोइन बनना है, तो पिता ने साफ इनकार कर दिया कि कपूर खानदान की लड़किया एक्टिंग नहीं करेंगी। लेकिन उनकी मां बबीता उनके सपोर्ट में थीं। ये वो दौर था, जब फिल्में न चलने से परेशान होकर वो काफी ज्यादा शराब पीने लगे थे। इससे उनके और बबीता के रिश्ते में भी अनबन चल रही थीं। फिर एक समय ऐसा आया, जब करिश्मा के करियर को सपोर्ट करते हुए बबीता ने 1987 में रणधीर का घर छोड़ दिया। राज कपूर की पोती होने के चलते उन्हें बिना संघर्ष फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। 16 की उम्र में उन्होंने एक साथ कई फिल्में साइन कीं। सबसे पहले करिश्मा ने फिल्म निश्चय शूट की, जिसके लिए न उन्हें ऑडिशन देना पड़ा, न ही उनका स्क्रीन टेस्ट लिया गया। हालांकि इस फिल्म से पहले ही उनकी दूसरी फिल्म प्रेम कैदी (1991) रिलीज हो गई। पहली ही फिल्म में करिश्मा ने स्विमसूट पहना, जिससे अंकल ऋषि कपूर काफी नाराज हुए थे। फिल्म एवरेज रही, लेकिन इसके बाद करिश्मा को बैक-टु-बैक कई फिल्में मिलने लगीं। 1992 में उनकी एक साथ 6 फिल्में पुलिस ऑफिसर, जागृति, निश्चय, सपने साजन के, दीदार और जिगर रिलीज हुईं। हालांकि उन्हें बड़ी सफलता 1993 की फिल्म अनाड़ी से मिली। 1994 में उनकी 10 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें से गोपी किशन, राजा बाबू, खुद्दार, अंदाज अपना-अपना जबरदस्त हिट रहीं। आगे साजन चले ससुराल, कृष्णा, जीत, राजा हिंदुस्तानी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से करिश्मा स्टार बनीं और उनकी गिनती बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में होने लगी। इसी समय उनका नाम अजय देवगन से जुड़ा, लेकिन जल्द ही दोनों अलग भी हो गए। फिल्मी गलियारों में चर्चा रही कि रवीना टंडन के चलते रिश्ते में दरार आई और यही वजह रही कि करिश्मा और रवीना के फिल्मों के सेट पर अनबन और झगड़े बढ़ने लगे। पिता चाहते थे अक्षय खन्ना से हो करिश्मा की शादी करिश्मा कपूर करियर के पीक पर थीं, जब उनके पिता रणधीर कपूर ने दोस्त विनोद खन्ना से कहा था कि वो चाहते हैं कि करिश्मा की शादी उनके बेटे अक्षय खन्ना से हो। विनोद खन्ना भी इस पर विचार कर रहे थे कि तभी बबीता ने इससे साफ इनकार कर दिया। अभिषेक बच्चन को जीजू कहती थीं करीना

करिश्मा कपूर@52, जया बच्चन ने सरेआम कहा बहू:कपूर खानदान की पहली एक्ट्रेस, हनीमून पर पति ने दोस्तों के साथ सोने को कहा

करिश्मा कपूर@52, जया बच्चन ने सरेआम कहा बहू:कपूर खानदान की पहली एक्ट्रेस, हनीमून पर पति ने दोस्तों के साथ सोने को कहा

90 के दशक में बॉलीवुड पर राज करने वालीं करिश्मा कपूर आज 52 साल की हो चुकी हैं। 65 से ज्यादा फिल्मों और अनगिनत हिट्स के दम पर सुपरस्टार बनीं करिश्मा को कपूर खानदान की रीत बदलने का क्रेडिट भी दिया जाता है। उनसे पहले कपूर खानदान की महिलाओं पर फिल्मों से जुड़ने पर पाबंदी थी। करिश्मा की कहानी सिर्फ स्टारडम की नहीं, बल्कि अधूरे रिश्तों और विवादों की भी है। कभी अक्षय खन्ना उनसे शादी करना चाहते थे। उनके पिता विनोद खन्ना ने रिश्ता भी भिजवाया, लेकिन करिश्मा की मां बबीता ने रिश्ता ठुकरा दिया। कहा जाता है कि यही वजह है कि अक्षय ने कभी शादी नहीं की। आगे अभिषेक से उनकी शादी की और जया बच्चन ने सार्वजनिक मंच पर उन्हें बहू कहकर मीडिया के सामने इंट्रोड्यूस किया, लेकिन ये शादी भी चर्चा में रहने के बावजूद टूट गई। करिश्मा ने 2003 में बचपन के दोस्त संजय कपूर से शादी की। हालांकि बाद में ये शादी विवादों में बदल गई। करिश्मा ने दावा किया कि हनीमून में पति संजय ने दोस्तों से उनकी बोली लगवाई। करिश्मा ने मारपीट, दहेज प्रताड़ना और टॉर्चर का आरोप लगाते हुए पति से तलाक लिया, लेकिन पूर्व पति की मौत के बाद ये रिश्ता फिर चर्चा में आ गया और आज भी उनकी 3200 करोड़ की प्रॉपर्टी पर कानूनी विवाद जारी है। आज करिश्मा के जन्मदिन के खास मौके पर जानिए, उनके निजी रिश्तों, संजय कपूर से शादी और विवाद की पूरी कहानी- 25 जून 1974 को करिश्मा कपूर का जन्म हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित परिवार के एक्टर रणधीर कपूर और एक्ट्रेस बबीता के घर हुआ। उनकी पैदाइश पर पूरा कपूर खानदान ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचा, लेकिन दादा शो मैन राज कपूर नहीं आए। उन्होंने साफ कहा, ‘बच्ची को देखने तब ही जाऊंगा, जब उसकी आंखें नीली हों।’ खुशकिस्मती से करिश्मा की आंखें गहरी नीली रहीं, हूबहू दादाजी की तरह। घर की पहली बेटी होने पर वो पूरे परिवार की चहेती रहीं। देखिए करिश्मा कपूर के बचपन की तस्वीरें- एक समय में उनकी मां बबीता, जानी-मानी एक्ट्रेस थीं, जिन्होंने कपूर खानदान की बहू बनने के लिए एक्टिंग करियर कुर्बान कर दिया। शादी से कुछ समय पहले उन्होंने 1968 की फिल्म हसीना मान जाएगी में काम किया था। इस फिल्म की शूटिंग, बॉम्बे के बिजनेस टायकून रौनक सिंह के घर में हुई। घर में शूटिंग करते हुए बबीता की दोस्ती रौनक सिंह की बेटी रानी सिंह (बाद में कपूर) से हुई, जो आगे चलकर करिश्मा की सास बनीं। रानी उस वक्त महज 18 साल की थीं। आगे रानी सिंह ने ऑटो पार्ट के नामी बिजनेसमैन सुरिंदर कपूर से शादी की, जिससे उन्हें बेटा संजय कपूर हुआ। समय के साथ बबीता और रानी की दोस्ती गहरी होती रही। वो अक्सर साथ पार्टी करते थे, जिससे बच्चों करिश्मा, करीना, संजय और उनकी बहनों की दोस्ती भी गहरी हुई। करिश्मा कपूर ने मुंबई के कैथेद्रेल एंड जॉन केनन स्कूल से पढ़ाई की। संजय कपूर ने शुरुआत में देहरादून के दून स्कूल से पढ़ाई की लेकिन कुछ सालों में ही उनका दाखिला करिश्मा के स्कूल में करवा दिया गया। दोनों की दोस्ती और बढ़ गई। स्कूलिंग के बाद संजय कपूर पढ़ाई करने विदेश चले गए और करिश्मा की रुचि फिल्मों में बढ़ने लगी और इस तरह दोनों की दोस्ती में दूरी आ गई। दोनों अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त होते चले गए। फिल्मी दुनिया हमेशा से ही करिश्मा को अट्रैक्ट करती थी। बचपन से ही वो दादाजी राज कपूर और पिता रणधीर के फिल्मों के सेट पर जाया करती थीं। वो अक्सर दादाजी से कहती थीं, ‘मैं भी एक दिन हीरोइन बनूंगी’, इस पर राज कपूर उन्हें जवाब देते थे- ‘एक्टर बनना कोई आसान काम नहीं है, अगर तुम एक्टर बनना चाहती हो, तो कांटों पर चलो और मिट्टी पर काम करो ताकि अच्छी एक्टर बन सको। एक्टर को हमेशा बेस्ट बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।’ जब एक दिन करिश्मा ने पिता रणधीर से कहा कि उन्हें हीरोइन बनना है, तो पिता ने साफ इनकार कर दिया कि कपूर खानदान की लड़किया एक्टिंग नहीं करेंगी। लेकिन उनकी मां बबीता उनके सपोर्ट में थीं। ये वो दौर था, जब फिल्में न चलने से परेशान होकर वो काफी ज्यादा शराब पीने लगे थे। इससे उनके और बबीता के रिश्ते में भी अनबन चल रही थीं। फिर एक समय ऐसा आया, जब करिश्मा के करियर को सपोर्ट करते हुए बबीता ने 1987 में रणधीर का घर छोड़ दिया। राज कपूर की पोती होने के चलते उन्हें बिना संघर्ष फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। 16 की उम्र में उन्होंने एक साथ कई फिल्में साइन कीं। सबसे पहले करिश्मा ने फिल्म निश्चय शूट की, जिसके लिए न उन्हें ऑडिशन देना पड़ा, न ही उनका स्क्रीन टेस्ट लिया गया। हालांकि इस फिल्म से पहले ही उनकी दूसरी फिल्म प्रेम कैदी (1991) रिलीज हो गई। पहली ही फिल्म में करिश्मा ने स्विमसूट पहना, जिससे अंकल ऋषि कपूर काफी नाराज हुए थे। फिल्म एवरेज रही, लेकिन इसके बाद करिश्मा को बैक-टु-बैक कई फिल्में मिलने लगीं। 1992 में उनकी एक साथ 6 फिल्में पुलिस ऑफिसर, जागृति, निश्चय, सपने साजन के, दीदार और जिगर रिलीज हुईं। हालांकि उन्हें बड़ी सफलता 1993 की फिल्म अनाड़ी से मिली। 1994 में उनकी 10 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें से गोपी किशन, राजा बाबू, खुद्दार, अंदाज अपना-अपना जबरदस्त हिट रहीं। आगे साजन चले ससुराल, कृष्णा, जीत, राजा हिंदुस्तानी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से करिश्मा स्टार बनीं और उनकी गिनती बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में होने लगी। इसी समय उनका नाम अजय देवगन से जुड़ा, लेकिन जल्द ही दोनों अलग भी हो गए। फिल्मी गलियारों में चर्चा रही कि रवीना टंडन के चलते रिश्ते में दरार आई और यही वजह रही कि करिश्मा और रवीना के फिल्मों के सेट पर अनबन और झगड़े बढ़ने लगे। पिता चाहते थे अक्षय खन्ना से हो करिश्मा की शादी करिश्मा कपूर करियर के पीक पर थीं, जब उनके पिता रणधीर कपूर ने दोस्त विनोद खन्ना से कहा था कि वो चाहते हैं कि करिश्मा की शादी उनके बेटे अक्षय खन्ना से हो। विनोद खन्ना भी इस पर विचार कर रहे थे कि तभी बबीता ने इससे साफ इनकार कर दिया। अभिषेक बच्चन को जीजू कहती थीं करीना

यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक:देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड, टेलीकॉम सेक्टर में लाइसेंस राज खत्म; अब ऑनलाइन मंजूरी मिलेगी

यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक:देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड, टेलीकॉम सेक्टर में लाइसेंस राज खत्म; अब ऑनलाइन मंजूरी मिलेगी

अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। कोई भी कंपनी आपका पर्सनल डेटा देश के बाहर नहीं भेज पाएगी और न ही किसी विदेशी संस्था के साथ शेयर कर सकेगी। दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। आइए टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े सरकार के नए नियम और उनसे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं… 1. लाइसेंस राज खत्म, टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल शुरू DoT ने कंपनियों के लिए टेलीकॉम सेक्टर में दशकों पुराना लाइसेंस राज खत्म कर एक नया और आसान मंजूरी सिस्टम शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार ने ‘टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल’ नाम की एक वेबसाइट भी बनाई है, ताकि सारा काम डिजिटल हो सके। अब तक कंपनियों को मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार से जटिल और लंबी ‘लाइसेंस’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। पुराने लाइसेंस वाले भी नए सिस्टम में आ सकेंगे जो टेलीकॉम कंपनियां पहले से काम कर रही हैं और जिनके पास पुराने सिस्टम के तहत अलग-अलग तरह के लाइसेंस (जैसे इंटरनेट या कॉलिंग के लिए) हैं, सरकार ने उन्हें भी इस नए और आसान सिस्टम में शिफ्ट होने की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि पुरानी कंपनियों को भी अब कागज़ी कार्रवाई से राहत मिलेगी। 2. सस्ते और नए प्लान्स मिल सकते हैं नए नियमों के तहत अब कंपनियां एक ही डिजिटल पोर्टल से नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस के लिए एक साथ अप्लाई कर सकती हैं। 3. सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर सरकार सख्त अगर आप आने वाले समय में इलॉन मस्क की स्टारलिंक या अमेजॉन जैसी कंपनियों से सीधे सैटेलाइट (बिना तार या टावर वाला डायरेक्ट इंटरनेट) लेने की सोच रहे हैं, तो सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए हैं। 4. आपका पर्सनल डेटा सुरक्षित रहेगा आजकल सबसे बड़ा डर डेटा चोरी या लीक होने का होता है। सरकार ने इस पर बेहद सख्त नियम बनाया है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए अब यह जरूरी कर दिया गया है कि वे भारतीय यूजर्स का सारा डेटा और रिकॉर्ड भारत के अंदर ही स्टोर कर रखेंगी। 5. देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं जम्मू-कश्मीर या उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील इलाकों में नेटवर्क लगाने के लिए कंपनियों को विशेष सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, देश विरोधी या संदिग्ध संदेशों पर नजर रखने के लिए भी कंपनियों को सिस्टम बनाना होगा।

यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक:देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड, टेलीकॉम सेक्टर में लाइसेंस राज खत्म; अब ऑनलाइन मंजूरी मिलेगी

यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक:देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड, टेलीकॉम सेक्टर में लाइसेंस राज खत्म; अब ऑनलाइन मंजूरी मिलेगी

अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। कोई भी कंपनी आपका पर्सनल डेटा देश के बाहर नहीं भेज पाएगी और न ही किसी विदेशी संस्था के साथ शेयर कर सकेगी। दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। आइए टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े सरकार के नए नियम और उनसे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं… 1. लाइसेंस राज खत्म, टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल शुरू DoT ने कंपनियों के लिए टेलीकॉम सेक्टर में दशकों पुराना लाइसेंस राज खत्म कर एक नया और आसान मंजूरी सिस्टम शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार ने ‘टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल’ नाम की एक वेबसाइट भी बनाई है, ताकि सारा काम डिजिटल हो सके। अब तक कंपनियों को मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार से जटिल और लंबी ‘लाइसेंस’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। पुराने लाइसेंस वाले भी नए सिस्टम में आ सकेंगे जो टेलीकॉम कंपनियां पहले से काम कर रही हैं और जिनके पास पुराने सिस्टम के तहत अलग-अलग तरह के लाइसेंस (जैसे इंटरनेट या कॉलिंग के लिए) हैं, सरकार ने उन्हें भी इस नए और आसान सिस्टम में शिफ्ट होने की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि पुरानी कंपनियों को भी अब कागज़ी कार्रवाई से राहत मिलेगी। 2. सस्ते और नए प्लान्स मिल सकते हैं नए नियमों के तहत अब कंपनियां एक ही डिजिटल पोर्टल से नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस के लिए एक साथ अप्लाई कर सकती हैं। 3. सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर सरकार सख्त अगर आप आने वाले समय में इलॉन मस्क की स्टारलिंक या अमेजॉन जैसी कंपनियों से सीधे सैटेलाइट (बिना तार या टावर वाला डायरेक्ट इंटरनेट) लेने की सोच रहे हैं, तो सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए हैं। 4. आपका पर्सनल डेटा सुरक्षित रहेगा आजकल सबसे बड़ा डर डेटा चोरी या लीक होने का होता है। सरकार ने इस पर बेहद सख्त नियम बनाया है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए अब यह जरूरी कर दिया गया है कि वे भारतीय यूजर्स का सारा डेटा और रिकॉर्ड भारत के अंदर ही स्टोर कर रखेंगी। 5. देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं जम्मू-कश्मीर या उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील इलाकों में नेटवर्क लगाने के लिए कंपनियों को विशेष सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, देश विरोधी या संदिग्ध संदेशों पर नजर रखने के लिए भी कंपनियों को सिस्टम बनाना होगा।

कर्नाटक कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में भगवाकरण और शाकाहारवाद के दावों पर विवाद |#ब्रासस्टैक्स

कर्नाटक कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में भगवाकरण और शाकाहारवाद के दावों पर विवाद |#ब्रासस्टैक्स

कर्नाटक की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को भगवाकरण के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है और दावा किया गया है कि यह राज्य की विविध खाद्य संस्कृति की अनदेखी करते हुए शाकाहार को बढ़ावा देती है। कार्यकर्ताओं ने पाठ्यपुस्तक में संशोधन की मांग की है, जिसमें कर्नाटक की खाद्य विविधता के हिस्से के रूप में अंडे और मांस का संदर्भ और पाठ्यपुस्तक के शीर्षक “कृष्णा” में बदलाव शामिल है। इस विवाद ने स्कूल पाठ्यक्रम, सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व, खाद्य विविधता, शिक्षा में विचारधारा, पाठ्यपुस्तक राजनीति और कक्षाओं में राज्य की पहचान को कैसे प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए, इस पर व्यापक बहस छेड़ दी है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_brass-tacksNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 20:24 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कार्यकर्ता संशोधन की मांग करते हैं(टी)कक्षा 6 कन्नड़ पाठ्यपुस्तक(टी)विविध खाद्य संस्कृति कर्नाटक(टी)अंडे और मांस समावेशन(टी)कन्नड़ पाठ्यपुस्तक विवाद(टी)कर्नाटक कक्षा 6 पाठ्यपुस्तक(टी)कर्नाटक शिक्षा(टी)कर्नाटक खाद्य संस्कृति(टी)कर्नाटक पाठ्यपुस्तक पंक्ति(टी)कृष्ण पाठ्यपुस्तक शीर्षक पंक्ति(टी)शाकाहार को बढ़ावा देता है(टी)भगवाकरण आरोप(टी)भगवाकरण का दावा(टी)स्कूल पाठ्यक्रम कर्नाटक(टी)पाठ्यपुस्तक राजनीति(टी)पाठ्यपुस्तक भगवाकरण(टी)पाठ्यपुस्तक शीर्षक कृष्ण(टी)पाठ्यपुस्तक में शाकाहारवाद

‘सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन…’: महुआ मोइत्रा ने ‘चेरी-पिक्ड’ वायरल एक्स क्लिप का विरोध किया, टीएमसी के ‘गद्दारों’ पर निशाना साधा | भारत समाचार

People cross a road under umbrellas during heavy rainfall, in Mumbai, Tuesday, June 23, 2026. The city received rain showers as monsoon activity continued across parts of Maharashtra. (PTI)

आखरी अपडेट:24 जून, 2026, 20:00 IST पश्चिम बंगाल के सांसद ने राजनीतिक यू-टर्न के संकेत को दृढ़ता से खारिज कर दिया, पर्यवेक्षकों से अलग-अलग अंशों के बजाय पूरा साक्षात्कार सुनने का आग्रह किया। साक्षात्कार में, मोइत्रा ने 2014 में लोकसभा टिकट से वंचित होने के बाद अपने गहरे संकट को याद करते हुए खुलासा किया कि वह पूरी रात रोई थीं और अधिकारी ही थे जिन्होंने आश्वासन दिया था। फ़ाइल छवि/एक्स तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने इस दावे पर पलटवार किया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर उनका रुख नरम हो गया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक साक्षात्कार क्लिप जानबूझकर चुनी गई थी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की कि अधिकारी को अब “एक देवदूत” के रूप में फंसाया जा रहा है और अनुमान लगाया कि या तो एक राजनीतिक बदलाव चल रहा है या क्लिप में व्यापक संदर्भ का अभाव है। एक्स पर सीधे प्रतिक्रिया देते हुए, कृष्णानगर के सांसद ने राजनीतिक यू-टर्न के संकेत को दृढ़ता से खारिज कर दिया, पर्यवेक्षकों से अलग-अलग अंशों के बजाय पूरा साक्षात्कार सुनने का आग्रह किया। यह स्वीकार करते हुए कि उन्होंने अधिकारी के टीएमसी से बाहर निकलने से पहले उनके साथ एक सकारात्मक कामकाजी संबंध साझा किया था, मोइत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ने के बाद से उनसे बात नहीं की है। उन्होंने रेखांकित किया कि जहां उन्होंने भीतर से तोड़फोड़ करने के बजाय विपक्ष के टिकट पर लड़ने का फैसला किया, वहीं उनकी टिप्पणियां उनकी वर्तमान राजनीति के समर्थन के बजाय पिछली घटनाओं का वर्णन करने वाली थीं। ममता ने एक और खोया. कल तक वह सुवेंदु पर आग उगल रही थी. अब सुर बदल गए हैं. सुवेंदु देवदूत हैं. वह एक कुशल राजनीतिज्ञ बन गई हैं। या फिर यह एक बड़े संदर्भ से चुनी गई चेरी क्लिप है। मैं अभी भी संकेतों का पता लगाने के लिए RaGa और INC टीम की सराहना करता हूं… pic.twitter.com/xrF1yYy88p– सुबी #रिलीज़संजीव भट्ट #फ़िलिस्तीन #वोटचोरी (@Subytweets) 24 जून, 2026 हाँ, यह चेरी पिक्ड है कृपया पूरा साक्षात्कार सुनें। सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन उनमें इन गद्दारों के विपरीत उन्हें छोड़ने और उनके टिकट पर लड़ने की हिम्मत थी। और जब वह हमारी पार्टी में थे तब मेरे उनके साथ अच्छे संबंध थे लेकिन उनके जाने के बाद मैंने उनसे कभी बात नहीं की। इन्हें क्यों बनाएं…- महुआ मोइत्रा (@MahuaMoitra) 24 जून, 2026 आंतरिक अशांति और व्यक्तिगत खुलासे सोशल मीडिया पर तूफान मोइत्रा द्वारा दिए गए एक विस्तृत साक्षात्कार के बाद आया है, जिसमें उन्होंने अपनी शुरुआती राजनीतिक यात्रा और पार्टी सहयोगी होने के दौरान अधिकारी से मिले भावनात्मक समर्थन के बारे में खुलकर बात की थी। मोइत्रा ने 2014 में लोकसभा टिकट से वंचित होने के बाद अपने गहरे संकट को याद करते हुए खुलासा किया कि वह पूरी रात रोई थीं और अधिकारी ही थे जिन्होंने आश्वासन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने 2016 में करीमपुर से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था, तो अधिकारी उनकी पहली रैली में सक्रिय रूप से प्रचार करने वाले एकमात्र वरिष्ठ नेता थे। इन यादों के समय ने पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, एक ऐसा राज्य जो वर्तमान में टीएमसी के भीतर तीव्र राजनीतिक पुनर्गठन और आंतरिक असंतोष को जन्म दे रहा है क्योंकि यह इस साल के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी से हार गया था। बागी विधायकों के एक महत्वपूर्ण गुट और लोकसभा सांसदों के एक समूह ने हाल के महीनों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए काफी मतभेद पैदा कर दिया है। इस पृष्ठभूमि के बीच, सत्तारूढ़ भाजपा की कैडर-आधारित प्रणाली और टीएमसी के नेतृत्व-निर्भर ढांचे के बीच संरचनात्मक अंतर पर मोइत्रा के स्पष्ट विचारों ने गहन जांच की है। पार्टी की वफादारी पर एक उद्दंड रुख अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में अटकलों की सुगबुगाहट के बावजूद, एक्स पर मोइत्रा की प्रतिक्रिया आंतरिक विद्रोह के खिलाफ एक तीखी रेखा खींचते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी खेमे के मुख्य नेतृत्व के प्रति उनकी चल रही निष्ठा को मजबूत करने का काम करती है। उन्होंने खुले तौर पर पार्टी छोड़ने और वैकल्पिक टिकट पर चुनाव लड़ने के अधिकारी के पिछले फैसले की तुलना समकालीन विरोधियों के कार्यों से की, जिन्हें उन्होंने पार्टी को भीतर से अस्थिर करने के लिए स्पष्ट रूप से “देशद्रोही” करार दिया था। राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बारे में व्यापक अफवाहों को संबोधित करते हुए, मोइत्रा ने ममता की टीएमसी और कांग्रेस के बीच संभावित विलय की किसी भी बात को दृढ़ता से खारिज कर दिया। दोनों संस्थाओं के बीच साझा वैचारिक आधार को स्वीकार करते हुए, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सुवेंदु कोई देवदूत नहीं हैं, लेकिन…’: महुआ मोइत्रा ने ‘चेरी-पिक्ड’ वायरल एक्स क्लिप का विरोध किया, टीएमसी के ‘गद्दारों’ पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)महुआ 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तमिलनाडु वेलाचेरी-तांबरम रोड का नाम मेजर मुकुंद वरदराजन के नाम पर रखेगा | ब्रेकिंग न्यूज़ | न्यूज18

तमिलनाडु वेलाचेरी-तांबरम रोड का नाम मेजर मुकुंद वरदराजन के नाम पर रखेगा | ब्रेकिंग न्यूज़ | न्यूज18

तमिलनाडु वीरांगना की सेवा, बलिदान और विरासत का सम्मान करते हुए, वेलाचेरी-तांबरम रोड का नाम बदलकर मेजर मुकुंद वरदराजन के नाम पर रखने की तैयारी में है। सड़क का नाम बदलने को भारत के सम्मानित सैन्य नायकों में से एक को श्रद्धांजलि और कर्तव्य के दौरान सैनिकों द्वारा दिखाए गए साहस की याद के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम ने नागरिकों और दिग्गजों से सराहना प्राप्त की है, जो सार्वजनिक स्थानों, नागरिक सम्मान और स्थायी स्मारकों के माध्यम से राष्ट्रीय नायकों को याद करने के महत्व पर प्रकाश डालता है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_breaking-newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 18:10 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)अशोक चक्र(टी)ब्रेवहार्ट मेजर मुकुंद(टी)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया(टी)चेन्नई न्यूज(टी)चेन्नई रोड का नाम बदलना(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय सेना(टी)भारतीय सेना अधिकारी(टी)ताजा समाचार(टी)मेजर मुकुंद(टी)मेजर मुकुंद विरासत(टी)मेजर मुकुंद वरदराजन(टी)सैन्य नायक भारत(टी)मुकुंद वरदराजन(टी)राष्ट्रीय नायक(टी)न्यूज18(टी)सड़क का नाम मेजर मुकुंद के नाम पर रखा गया वरदराजन(टी)तमिलनाडु ने मेजर मुकुंद(टी) का सम्मान किया तमिलनाडु समाचार(टी)तमिलनाडु रोड का नाम बदला(टी)सैनिकों को श्रद्धांजलि(टी)वेलाचेरी तांबरम रोड

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने आलोचना के बाद कम-अल्कोहल पेय कर कटौती पर यू-टर्न लिया | न्यूज18

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने आलोचना के बाद कम-अल्कोहल पेय कर कटौती पर यू-टर्न लिया | न्यूज18

विपक्ष और कांग्रेस के भीतर की आवाजों की तीखी आलोचना के बाद केरल के सीएम वीडी सतीसन ने कम अल्कोहल सामग्री वाले पेय पदार्थों पर कर दरों को कम करने के प्रस्ताव पर यू-टर्न ले लिया है। इस कदम से एक राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था, आलोचकों ने सवाल उठाया था कि क्या यह नीति शराब की खपत को बढ़ावा देगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी। इस उलटफेर ने अब केरल की शराब नीति, कर राजस्व, सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, राजनीतिक जवाबदेही और संवेदनशील नीतिगत निर्णयों पर कांग्रेस के भीतर आंतरिक मतभेदों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। -newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 18:04 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)शराब कर केरल(टी)पेय कर कटौती(टी)कांग्रेस आलोचना(टी)कांग्रेस केरल(टी)आंतरिक कांग्रेस आलोचना(टी)केरल शराब नीति(टी)केरल पेय कर(टी)केरल सीएम वीडी सतीसन(टी)केरल सरकार यू टर्न(टी)केरल शराब नीति(टी)केरल शराब कर पंक्ति(टी)केरल की राजनीति(टी)शराब कर कटौती प्रस्ताव(टी)कम शराब पेय पदार्थ (टी) कम अल्कोहल सामग्री वाले पेय (टी) विपक्ष की आलोचना केरल (टी) सतीसन शराब कर यू टर्न (टी) सतीसन यू टर्न (टी) पेय पदार्थों पर कर की दरें (टी) वीडी सतीसन (टी) वीडी सतीसन

परीक्षा सुधार और पारदर्शिता पर फोकस के बीच पीएम मोदी ने सुचारू एनईईटी पुनर्परीक्षा की सराहना की | न्यूज18

परीक्षा सुधार और पारदर्शिता पर फोकस के बीच पीएम मोदी ने सुचारू एनईईटी पुनर्परीक्षा की सराहना की | न्यूज18

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनईईटी पुन: परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए कैबिनेट की सराहना की है, जिसमें पारदर्शिता, समन्वय और छात्र कल्याण पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डाला गया है। परीक्षा की अखंडता को लेकर चिंताओं के बाद पुन: परीक्षा पर बारीकी से नजर रखी गई, जिससे इसका सुचारू संचालन शिक्षा प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया। प्रतिस्पर्धी परीक्षा सुधार, जवाबदेही, परीक्षा सुरक्षा, छात्र आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका पर निरंतर ध्यान देने के बीच यह विकास हुआ है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_breaking-newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 24 जून, 2026, 17:43 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रतियोगी परीक्षाएं भारत(टी)शिक्षा मंत्रालय(टी)शिक्षा समाचार भारत(टी)परीक्षा अखंडता(टी)परीक्षा पारदर्शिता(टी)मेडिकल उम्मीदवारों(टी)मेडिकल प्रवेश परीक्षा(टी)मोदी ने नीट पुनः परीक्षा की प्रशंसा की(टी)नरेंद्र मोदी(टी)नीट 2026(टी)नीट विवाद(टी)नीट परीक्षा समाचार(टी)नीट नवीनतम अपडेट(टी)नीट पेपर लीक पंक्ति(टी)नीट पुनः परीक्षा(टी)नीट पुनः परीक्षा(टी)नीट पुनः परीक्षा सुचारु संचालन(टी)नीट पुनः परीक्षा(टी)पीएम मोदी(टी)पीएम मोदी ने कैबिनेट की प्रशंसा की(टी)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(टी)सुचारू नीट पुनः परीक्षा(टी)छात्र कल्याण

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड पर भड़के सेलेब्स:विवेक अग्निहोत्री बोले- मौत का खेल है, अगला नंबर किसका; देवोलीना बोलीं- लंबे हाईवे नहीं परिवार की सुरक्षा चाहिए

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड पर भड़के सेलेब्स:विवेक अग्निहोत्री बोले- मौत का खेल है, अगला नंबर किसका; देवोलीना बोलीं- लंबे हाईवे नहीं परिवार की सुरक्षा चाहिए

लखनऊ की 2 मंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कई बड़े सवाल खडे़ किए जा रहे हैं। इसी बीच बॉलीवुड सेलेब्स भी घटना की निंदा करते हुए सरकार पर भड़क गए हैं। एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्या ने अग्निकांड पर गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, ‘सत्ता एक खतरनाक नशा है। यह अच्छे इरादों वाले नेताओं को भी उन लोगों के प्रति उदासीन बना सकती है, जिनकी सेवा करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। बेशक, सरकारें हाईवे, फ्लाईओवर और बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाती हैं। लेकिन किसी देश की असली प्रगति सड़कों की लंबाई से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसके नागरिक कितने सुरक्षित हैं।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘हर दिन हम आग लगने की घटनाओं, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों, परीक्षा पेपर लीक, बदहाल सरकारी अस्पतालों और स्कूलों, पानी की कमी तथा बढ़ती जन असंतुष्टि की खबरें सुनते हैं। वहीं दूसरी ओर जवाबदेही अक्सर चुनिंदा लोगों तक ही सीमित दिखाई देती है। प्रभावशाली लोगों को राहत मिल जाती है, जबकि आम नागरिक न्याय के लिए संघर्ष करता रहता है।’ ‘एक आम नागरिक सुबह उठकर यह नहीं सोचता कि कितने किलोमीटर हाईवे बने। वह यह जानना चाहता है कि उसका परिवार सुरक्षित है या नहीं, उसके बच्चों को निष्पक्ष शिक्षा मिलेगी या नहीं, कानून उसकी रक्षा समान रूप से करेगा या नहीं, और उसके टैक्स का पैसा वास्तव में उसके जीवन को बेहतर बनाने में खर्च हो रहा है या नहीं।’ ‘अपने आसपास हो रही घटनाओं को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हम वास्तव में आगे बढ़ रहे हैं, या फिर धीरे-धीरे उन्हीं समस्याओं की ओर लौट रहे हैं जिन्हें पीछे छोड़ने का हमने कभी वादा किया था? लोकतंत्र वादों पर नहीं, बल्कि जवाबदेही पर फलता-फूलता है।’ विवेक रंजन बोले- अगला नंबर किसका होगा देवोलीना के अलावा डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने भावुक अंदाज में लिखा है, ‘भारत में मुझे सबसे ज्यादा डर सड़क दुर्घटनाओं से नहीं लगता। मुझे डर इस बात का लगता है कि अगर मैं ग्राउंड फ्लोर से ऊपर किसी मंजिल पर रह रहा हूं और अचानक आग लग जाए, तो मैं वहां से बाहर कैसे निकलूंगा? कुछ दिन पहले जुहू में मेरे एक दोस्त की बिल्डिंग में आग लग गई। देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘भारत में फायर सेफ्टी इंस्पेक्शन अब मानो लोगों की जान लेने का लाइसेंस बन चुके हैं। किसी को नहीं पता कि इन मौत के जाल जैसी इमारतों की जिम्मेदारी किसकी है। ऐसी इमारतों को मंजूरी कौन देता है? इस तरह की घोर लापरवाही पर हस्ताक्षर कौन करता है? इन्हें डिजाइन कौन करता है? और जब कोई हादसा होता है, तो आखिर सजा किसे मिलती है?’ आखिर में उन्होंने लिखा, ‘शहरी भारत में हम सभी ऐसी इमारतों में रह रहे हैं जो संभावित आग का खतरा बनी हुई हैं। हम अपने परिवारों के साथ मानो हर दिन किस्मत का खेल खेल रहे हैं। किसी को नहीं पता कि अगला नंबर किसका होगा।’ सोनू सूद बोले- क्लासरूम सपनों की दुनिया होनी चाहिए, अंतिम पड़ाव की नहीं एक्टर सोनू सूद ने घटना के बाद भावुक होकर लिखा है, ‘क्लासरूप बच्चों के सपनों की दुनिया होनी चाहिए उनका अंतिम पड़ाव नहीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, एक क्लासरूम बच्चों के सपनों को उड़ान देने की जगह होनी चाहिए, उनका अंतिम पड़ाव नहीं। लखनऊ में हुई आग की इस दुखद घटना ने दिल तोड़ दिया है।’ आगे उन्होंने लिखा, ‘कितनी मासूम जिंदगियां, कितने सपने एक पल में खत्म हो गए। वे बच्चे, जो आगे चलकर अधिकारी, कलाकार, नेता और समाज में बदलाव लाने वाले लोग बन सकते थे, उनका सफर शुरू होने से पहले ही थम गया। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया है, उनके दर्द को कम करने के लिए शब्द भी छोटे पड़ जाते हैं। मेरी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ हैं और उन लोगों के लिए भी प्रार्थना है जो अभी जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।’ ‘हम इन बच्चों के सिर्फ आंसुओं के नहीं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य के भी कर्जदार हैं। हमें ऐसे सुरक्षित स्कूल, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सख्त नियम सुनिश्चित करने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों।’ अग्निकांड में हुई 15 लोगों की मौत, इनमें ज्यादातर कोचिंग के स्टूडेंट यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर 2:15 बजे बड़ा हादसा हो गया। अलीगंज इलाके में हुए अग्निकांड में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर कोचिंग के स्टूडेंट हैं। आग से बचने के लिए कुछ छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया तो कोई पहले फ्लोर से कूद गया। कई छात्र तार से लटककर नीचे उतरे। इंसानों के साथ जानवर भी इस भीषण आग फंस गए। देखिए लखनऊ अग्निकांड की तस्वीरें-