हर दिन मखाना खाते हैं? ज्यादा सेवन से पेट और किडनी को हो सकता है नुकसान, जानिए जरूरी बातें

Last Updated:March 14, 2026, 13:47 IST मखाना या फॉक्स नट्स एक पौष्टिक और हेल्दी स्नैक है, जो प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होता है. यह सामान्यत: गर्भावस्था में भी सुरक्षित माना जाता है. हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन समस्याएं, एलर्जी और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए सेवन करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. मखाने हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ कुछ हद तक नुकसानदायक भी हो सकते हैं. इनके अधिक सेवन से पेट में कब्ज, ब्लोटिंग और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कैल्शियम और फाइबर की अधिकता के कारण यह किडनी स्टोन वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा, अत्यधिक पोटैशियम किडनी रोगियों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, और बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. मखाने वैसे तो एक बहुत हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में (30–60 ग्राम से अधिक) खाने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और बदहजमी जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखानों में उच्च फाइबर होता है और पानी की मात्रा कम होती है, जो अधिक सेवन करने पर पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, मखाने में उच्च फाइबर और प्रोटीन पाए जाते हैं. इनका अत्यधिक सेवन करने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और अपच जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखाने पचने में समय लेते हैं और अधिक मात्रा में खाने से दस्त भी बढ़ सकते हैं. साथ ही, खाली पेट मखाने खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट दर्द हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मखानों में ज्यादा नमक, मसाले या घी का इस्तेमाल हाई बीपी और हार्ट संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए मखानों का सेवन सीमित मात्रा में करें और कम नमक वाले विकल्प चुनें. अपने आहार में संतुलन बनाए रखें और हार्ट हेल्थ का ध्यान रखें. साथ ही, डॉक्टर की सलाह लेना भी उचित रहेगा. मखाना कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें नट्स या बीजों से एलर्जी होती है. इसमें मौजूद उच्च स्टार्च और प्रोटीन की वजह से उन्हें खुजली, सूजन, सांस लेने में तकलीफ या पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं. मखानों में पोटैशियम और फास्फोरस पाया जाता है, जो किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए किडनी की समस्या वाले लोगों को मखानों का सेवन सीमित करना चाहिए या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सही आहार चुनें. मखाने आमतौर पर गर्भावस्था में सुरक्षित और पौष्टिक माने जाते हैं. यह कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं. लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर ये नुकसानदायक हो सकते हैं, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग (पेट फूलना), किडनी स्टोन में वृद्धि और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : March 14, 2026, 13:47 IST
सफेदा के पत्ते एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण से होते हैं भरपूर, सर्दी, खांसी और सांस की बीमारियों में फायेदमंद

Last Updated:February 27, 2026, 14:27 IST लिप्टस (नीलगिरी/सफेदा) के पत्ते अपने औषधीय गुणों के कारण सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसमें एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण होते हैं. जो सर्दी, खांसी, बंद नाक और सांस संबंधी समस्याओं में भाप या काढ़े के रूप में राहत दिलाते हैं. इसके तेल का उपयोग जोड़ों के दर्द, त्वचा संक्रमण को कम करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि लिप्टस के पत्ते और तेल अपनी एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल और सूजन-रोधी गुणों के कारण सांस की समस्याओं जैसे सर्दी, खांसी, अस्थमा और जकड़न के लिए रामबाण माने जाते हैं. इसकी भाप या चाय का सेवन कफ को पतला कर बाहर निकालने में मदद करता है. लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते और तेल में दर्द निवारक और सूजन-रोधी गुण होते हैं. जो जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और सूजन में बहुत प्रभावी हैं. इन्हें नारियल या जैतून के तेल में मिलाकर मालिश करने, गर्म पानी में डालकर भाप लेने या चाय के रूप में सेवन करने से राहत मिलती है. लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते फ्लेवोनोइड्स और टैनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो शरीर को फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं. यह सूजन को कम करने, श्वसन रोगों (सर्दी-जुकाम), और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत मददगार है. Add News18 as Preferred Source on Google लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने शक्तिशाली रोगाणुरोधी और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. यह मुँहासे, फंगल इन्फेक्शन को कम करने और घावों को भरने में मदद करते हैं. साथ ही त्वचा को नमी प्रदान कर उसे हाइड्रेटेड रखते हैं. इन्हें आमतौर पर भाप, काढ़े, या तेल (कैरियर ऑयल के साथ) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुणों के कारण मौखिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन हैं. ये मसूड़ों की बीमारी, कैविटी और दांतों की सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं. इनके उपयोग से सांसों की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़ों से खून आना भी कम हो सकता है. लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों के कारण दांतों और मसूड़ों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. ये मसूड़ों से खून आना, प्लाक (पट्टिका) कम करने और कैविटी को रोकने में मदद कर सकते हैं. जिससे दांतों की मजबूती बनी रहती है. इसके एंटीसेप्टिक गुणों के कारण, इसका उपयोग मसूड़ों की सूजन और पायरिया जैसी समस्याओं के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है. लिप्टस (नीलगिरी/सफेदा) के पत्तों में शक्तिशाली जीवाणुनाशक, रोगाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो मुख्य रूप से उनके आवश्यक तेल के कारण होते हैं। यह स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ते हैं, श्वसन संक्रमण, खांसी-जुकाम, साइनस, घावों को ठीक करने और त्वचा की समस्याओं में राहत देने के लिए उपयोगी होते हैं. First Published : February 27, 2026, 14:16 IST
बरगद के पत्तों के फायदे: पाचन, त्वचा व जोड़ों के दर्द में असरदार

Last Updated:February 21, 2026, 21:28 IST वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते, छाल और कोपलें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोगाणुरोधी गुणों से भरपूर होती हैं. जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं. इन पत्तियों का काढ़ा या अर्क संक्रमण से लड़ने, त्वचा रोगों, मधुमेह और श्वसन संबंधी समस्याओं में कारगर माना जाता है. जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वट वृक्ष यानी के बरगद के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जो पाचन में सुधार, त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द, सूजन और डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके कोमल पत्तों का लेप घावों को भरने में सहायक है और इनका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि बरगद के कोमल पत्ते (कूपल) और दूध दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार हैं. कसैले गुणों के कारण, यह आंतों की गति को नियंत्रित करते हैं और मल को बांधते हैं. इसके कूपलों को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने या दही के साथ सेवन करने से दस्त में तुरंत लाभ होता है. बरगद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, मोच और सूजन में कारगर हैं. सबसे असरदार उपाय में पत्तों पर घी/सरसों का तेल लगाकर गर्म करें और सूजन वाले स्थान पर बांधें. इसके ताजे पत्तों का लेप खुजली व लाल चकत्तों में आराम देता है. जो एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते और अन्य भाग हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें कैल्शियम और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने, जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने में सहायक हैं. यह दर्द से राहत और टूटी हड्डियों के उपचार में मदद करता है. बरगद के पत्ते औषधीय खजाना हैं. जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. इनमें ट्राइटरपेन्स, फ्रीडेलिन, सिटोस्टेरॉल, और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पत्ते मधुमेह नियंत्रण, त्वचा रोगों (दाग-धब्बे, खुजली), जोड़ों के दर्द, दस्त, और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं. बरगद के पत्ते जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा की समस्याओं और शरीर के दर्द में राहत देते है. ताजे पत्तों का लेप खुजली, मुंहासे और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है. जबकि पत्तों का गर्म काढ़ा जोड़ों के दर्द में उपयोगी है. First Published : February 21, 2026, 21:28 IST
आंवला के अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, ब्लड शुगर कम और रक्तस्राव का खतरा.

Last Updated:February 21, 2026, 21:12 IST आंवला स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. खाली पेट लेने, ज्यादा मात्रा में खाने, लो ब्लड शुगर या सर्जरी के आसपास इस्तेमाल करने पर यह एसिडिटी, पेट दर्द, रक्तस्राव और कमजोरी जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ डॉ. गीतिका शर्मा की सलाह है कि इसे सीमित मात्रा में ही लें. आंवले का अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष शारीरिक स्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. यह एसिडिटी, पेट में जलन, कब्ज, दस्त, ब्लड शुगर कम होना, और रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकता है. इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. एक्सपर्ट डॉ गीतिका शर्मा ने बताया कि खाली पेट या अत्यधिक सेवन करने पर यह एसिडिटी, जलन और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. चूंकि आंवला विटामिन C से भरपूर होता है. इसकी उच्च अम्लीय प्रकृति संवेदनशील पेट या हाइपरएसिडिटी वाले लोगों में एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकती है. लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) वाले लोगों के लिए आंवले का बहुत अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है. आंवला रक्त शर्करा के स्तर को काफी कम करता है. यदि आपका शुगर लेवल पहले से ही कम है. तो आंवला इसे और कम कर सकता है. जिससे चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सर्जरी से दो सप्ताह पहले और बाद में आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खून को पतला कर सकता है. जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है. यह ब्लीडिंग जोखिम को बढ़ाता है और ब्लड शुगर/बीपी में उतार-चढ़ाव कर सकता है. आंवले का सेवन उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है जिन्हें इससे एलर्जी है. यह एक दुर्लभ प्रतिक्रिया है. लेकिन एलर्जी होने पर खुजली, पित्ती, त्वचा पर चकत्ते, सूजन, या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, पेट दर्द, लो ब्लड प्रेशर और किडनी स्टोन की समस्या भी बढ़ सकती है. अत्यधिक आंवला खाने या लगाने से बालों और त्वचा में रूखापन और डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. आंवला में मौजूद प्राकृतिक टैनिन और एस्ट्रिंजेंट गुण बालों की प्राकृतिक नमी को कम कर सकते हैं. इसके अलावा, इसके मूत्रवर्धक प्रभाव के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है. वैसे तो यह सुरक्षित है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में सेवन से दस्त, एसिडिटी और पेट में ऐंठन हो सकती है. गर्भावस्था में किसी भी प्राकृतिक उपाय से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है. First Published : February 21, 2026, 21:12 IST







